मंदिर जाने वाले हिन्दुओं पर आरोप लगाने से पहले खुद को हिन्दू तो साबित करें राहुल गाँधी, 10 जनपथ के अंदर तो चर्च है : डॉ सुब्रमण्यम स्वामी|

डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने राहुल गाँधी और 10 जनपथ की एक बार फिर पोल खोलकर रख डाली है. आपको बता दें कि गुजरात में चुनाव है. जिसके लिए राहुल गाँधी जोर शोर से तैयारी कर रहे है. लेकिन क्या आप जानते है कि राहुल गाँधी जो भगवान् राम को नहीं मानते वो हिन्दू बने मंदिर-मंदिर घूम रहे है. मंदिर व नवरात्री के पंडालों में जा रहे है. मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर रह है. जबकि असलियत तो ये है कि ये भगवान् को मानते भी नहीं है.

Dr. Subramaniam Swamy has kept Rahul Gandhi and 10 Janpath once more open. Let us know that there is an election in Gujarat. For which Rahul Gandhi is preparing for loud noise. But do you know that Rahul Gandhi, who does not believe in Lord Rama, is walking in a Hindu temple-temple. Going into the pandals of the temple and Navratri. Going to the temples is worshiping the worship. Whereas the reality is that it does not even believe in God.

अब क्या हुआ जो राहुल गाँधी मंदिरों में जा रहे है नवरात्री पंडालों में जाकर पुजा कर रहे है. जो राहुल गाँधी मंदिर जाने वाले हिन्दुओं को ” लड़की छेड़ने ” वाला गुंडा बताते है. उनको बुरा भला कहते फिरते है आज वो खुद मंदिर जा रहे है, खैर डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने आज राहुल गाँधी पर तीखा कटाक्ष किया. उन्होंने राहुल गाँधी के ऐसा करने पर ऐसा कडवा सच बोला है जो हम आपको बतातें है.

Now what is happening in Rahul Gandhi temples, Navratri is worshiping Pandals and worshiping them. The Rahul Gandhi, who goes to the Gandhi temple, tells the punda of “girl witch”. Today they are going to the temple themselves. Well, Dr. Subramaniam Swamy took a dig at Rahul Gandhi today. He has said such a harsh reality to Rahul Gandhi, who we are talking to you.

डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि राहुल गाँधी मंदिर जा रहे है, पहले वो खुद को हिन्दू तो घोषित कर दें. पहले ये साबित कर दें की वे सच्चे हिन्दू है. 1 बार ही कह दें की वो हिन्दू है. डॉ स्वामी ने कहा की, राहुल गाँधी तो ईसाई है और उनकी मम्मी के बंगले में चर्च है. डॉ स्वामी ने तो राहुल गाँधी की साडी पोल पट्टी ही खोल डाली देखिये क्या कहा.

Dr. Subramaniam Swamy said that Rahul Gandhi is going to the temple, first he declared himself a Hindu. First prove that they are true Hindus. Just say 1 time that he is a Hindu. Dr. Swamy said that Rahul Gandhi is a Christian and there is a church in his mother’s bungalow. Dr. Swamy then opened Rahul Gandhi’s sari pole belt and saw what he said.

बता दें कि 10 जनपथ सोनिया गाँधी का दिल्ली में आलिशान बंगला है, जो की प्रधानमंत्री के घर 7 लोक कल्याण मार्ग से भी कहीं अधिक बड़ा है. उसके अंदर चर्च बनाया गया है. आपको ये भी बताते चले की सोनिया गाँधी मूलतः ईसाई देश इटली से है, और सोनिया गाँधी का असली नाम ” एंटोनिया मियानो ” है. ये रोमन कैथलिक यानि ईसाईयों में भी सबके कट्टर ईसाई है.

Let us tell that 10 Janpath Sonia Gandhi is a luxurious bungalow in Delhi, which is much larger than the Prime Minister’s house of 7 Lok Kalyan Marg. The church has been built inside it. Let’s also tell you that Sonia Gandhi originally belongs to Christianity Italy, and Sonia Gandhi’s real name is “Antonia Miyano”. It is also the Roman Catholic that is also the strictest Christian in every Christian.

राहुल गाँधी का भी असली नाम ” रॉल विंची ” है, राहुल गाँधी जब अमेरीका में पढाई करने के लिए गए थे तो वहां की यूनिवर्सिटी में उन्हेंने अपना नाम ” रॉल विंची ” ही लिखवाया था. तो अब ये समझ नही आ रहा है की राहुल गाँधी हिन्दू तो है ही नही फिर क्यों मंदिरों में जाकर अपने हिन्दू होने का ढोंग करते फिरते है. क्या इसके पीछे भी राहुल गाँधी का अपना कोई सत्ता का फायेदा छिपा है.

Rahul Gandhi’s real name is “Rolin Vici”, when Rahul Gandhi went to study in America, he had written his name “Rol Vinci” in the university there. So now it is not understood that Rahul Gandhi is a Hindu, and why then why go to temples and pretend to be a Hindu. Did Rahul Gandhi have any hidden power of his own power even after this?

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https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : dainik-bharat.org

बड़ी खबर : बर्मा के बैद्धों के समर्थन में श्रीलंका के बैद्धों ने रोहिंग्या मुसलमानों को दिया ऐसा मुहंतोड़ जवाब कि…..

आपको पता है श्रीलंका की दुरी म्यांमार से कितनी है बहुत ज्यादा है, जबकि म्यांमार तो भारत का पडोसी है, पर जरा फर्क आप भी देखिये

You know, how far is the distance from Sri Lanka to Myanmar, while Myanmar is India’s neighbor, but see the difference.

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों ने बैद्धों का नरसंहार किया, उनको बुरी तरह से कत्लेआम किया. तो इसका असर आप देख सकते है कि श्रीलंका के बैद्ध बर्मा के बैद्धों का समर्थन आ खड़े हुए है. वे उन बैद्धों के समर्थन में रोड पर रैली निकाल कर उनके प्रति अपना दुःख प्रकट कर रहे है. अपनी संवेदना प्रकट कर रहे है देखिए ये तस्वीर…

In Myanmar, Rohingya Muslims massacred the Bidhas, slaughtered them badly. Then you can see the effect of it that the support of the Brahmins of Sri Lanka’s Burma have come back. They are showing their grief towards him by taking out a rally on the road in support of those unions. Seeing your condolences, see this picture …

 

ये बात तो सब जानते है कि रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में भारत के हर शहर में भारत के मुस्लमान सड़क पर है उनके लिए आँसू बहा रहे अपना दुःख प्रकट कर रहे है. ऐसा लगता है कि सभी समाज जागरूक है उनमे उनके समाज के लिए इंसानियत जिन्दा है, तभी वे अपने समाज का साथ दे रहे है पर एक ऐसा भी समाज है जो मर हुआ है बात सुनने में कड़वी जरुर है पर ये एक बड़ी सच्चाई है. वो समाज है हिन्दू समाज.

In Myanmar, Rohingya Muslims massacred the Bidhas, slaughtered them badly. Then you can see the effect of it that the support of the Brahmins of Sri Lanka’s Burma have come back. They are showing their grief towards him by taking out a rally on the road in support of those unions. Seeing your condolences, see this picture …

हिन्दू समाज एक ऐसा समाज है जो मर चूका है, जिसमे अपने समाज के हिन्दुओं के लिए कोई दया भावना नही बची है. इनको उन हिन्दुओं का दुःख दर्द नही दिखाई देता जिन्हें रोहिंग्या मुस्लिमों ने म्यांमार में क़त्ल किया, उन हिन्दू महिलाओ को अगवा किया उनका बलात्कार किया, उनका जबरन धर्म परिवर्तन किया. क्या उन हिन्दुओं से इनका कोई वास्ता नही है. क्या वे किंडू इस समाज के हिन्दुओं का हिस्सा नही है.

Hindu society is a society which has died, in which there is no mercy sentiment for the Hindus of our society. They do not see the pain of those Hindus who had murdered Rohingya Muslims in Myanmar, kidnapped those Hindu women, rape them, forced their change of religion. Do they have any way to do these Hindus? Is this kind of Kendu not a part of the Hindus of this society?

बर्मा में हिन्दुओं को रोहिंग्यों ने सरेआम क़त्ल किया, 1000 से ज्यादा हिन्दू गायब किये जा चुके है 51 की अबतक लाश भी मिल चुकी है, हिन्दू महिलाओं को उठाकर रोहिंग्यों मुसलामन बांग्लादेश ले जाते है, उनके साथ बदसलूकी की जाती है जबरन उनका धर्म बदला जाता है. ये सारा अत्याचार उन हिन्दुओं पर हो रहे है जो ईद भारत के हिन्दू समाज का हिस्सा है.

Rohingya killed the Hindus in Burma, more than 1000 Hindus have disappeared 51 dead bodies have also been found, raising Hindu women, Rohingya Muslims take Bangladesh to Bangladesh, they are mistreated with their religion forcibly changed is. All these tortures are happening on those Hindus who are part of the Hindu society of Eid.

पर मजाल है की भारत के 1 भी शहर में भारत का एक भी हिन्दू बर्मा के हिन्दुओं के समर्थन में रैली लेकर कार्यक्रम करें, उनके ऐसी हालत करने वालो को मुहँ तोड़ जवाब दें. नहीं ये लोग ऐसा कुछ भी नही कर रहे है. अब तो बस यही कहा जा सकता है कि हिन्दू समाज और इस समाज के लोग नपुंसक है जो अपने ही लोगो के लिए कुछ नही कर सकते. उनके दुखों से मुहँ मोड़ लिया है. इस हिन्दू समाज से अधिक दयनीय स्थिति किसी की नहीं है.

But it is a joke that in the 1st city of India, one Hindu of India should take part in a rally in support of the Hindu people of Burma and break them in front of those who do such a condition. No, these people are not doing anything like that. Now it can only be said that the people of the Hindu society and this society are impotent, who can not do anything for their own people. They have turned their backs on their miseries. There is no more miserable situation than this Hindu society.

https://youtu.be/YMSgl4dvwvk

source : dainik-bharat.

ब्रेकिंग न्यूज़: पाकिस्तान के बाद इस बार म्यांमार में घुसकर भारतीय सेना ने किया सर्जिकल स्ट्राइक!

नई दिल्‍ली : भारतीय सेना की तरफ से बड़ी कार्रवाई की खबर आ रही है. सेना ने पाकिस्तान में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ (surgical strike) करने के करीब एक साल बाद म्यांमार सीमा पर बड़ा ऑपरेशन किया है. भारतीय सेना की इस कार्रवाई में आतंकी संगठन एनएससीएन (के) को बड़ा नुकसान हुआ है. सेना की तरफ से की गई इस कार्रवाई में एनएससीएन (के) के कई आतंकियों के मारे जाने की खबर आ रही है. सेना ने म्यांमार के नागा इंसर्जेंट कैंप में इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है. भारतीय सेना ने म्‍यांमार सीमा पर आतंकियों पर हमला किया. इस कार्रवाई में भारतीय सेना को कोई नुकसान नहीं हुआ है.

New Delhi: Big action is coming on behalf of the Indian Army. The army has done a major operation on the Myanmar border almost a year after having a ‘surgical strike’ in Pakistan. In this action of the Indian Army, the terrorist organization NSCN (K) has suffered a major loss. In the action taken by the army, it is being reported that many terrorists of NSCN (K) were killed. The army has carried out this major operation in the Naga insurgent camp in Myanmar. Indian Army attacked terrorists on the Myanmar border There is no harm to the Indian Army in this action.

यह भारत की म्‍यांमार सीमा के पास अब तक की तीसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे दो साल पहले 2015 में सेना ने इसी सीमा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ (surgical strike) को अंजाम दिया था. 1995 में भी भारतीय सेना की तरफ से सर्जिकल स्‍ट्राइक की गई थी. म्‍यामांर सीमा पर सुबह 4.45 पर भारतीय सेना की तरफ से नगा आतंकियों पर यह कार्रवाई की गई. यह कार्रवाई कोन्‍सा इलाके में हुई. सेना की ईस्‍टर्न कमांड की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सेना ने अंतरराष्‍ट्रीय बॉर्डर को क्रॉस नहीं किया. आपको बता दें कि इससे एक साल पहले ही भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के खिलाफ सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया था. इस कार्रवाई में सेना ने पीओके में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्‍ट किया था.

This is the third major action taken by India’s Myanmar border so far. Two years ago, in 2015, the army conducted a ‘surgical strike’ on this border. In 1995 also, surgical strikes were done by the Indian Army. This action was taken on Nagar militants from Indian Army on 4.45 in the morning on the Myanmar border. This action took place in Kansa area. A statement released by the Army’s Eastern Command said that the army did not cross the international border. Let us tell you that this year only the Indian Army carried out a surgical strike against Pakistan. In this action, the army had penetrated the POK and destroyed terrorist bases.

आपको बता दें कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को ही आतंकियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि पिछले वर्ष नियंत्रण रेखा के पार जाकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान के लिए एक संदेश था. उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर इस तरह की और सर्जिकल स्ट्राइक का संकेत दिया था.

Let us tell you that Army Chief General Bipin Rawat had warned the terrorists on Monday that there was a message for Pakistani surgical strikes crossing the Line of Control last year. He had indicated such a kind of surgical strike when needed.

रावत ने ‘इंडियाज मोस्ट फीयरलेस’ नामक किताब के लोकार्पण के बाद कहा था, ‘स्ट्राइक एक संदेश था, जिसे हम देना चाहते थे. मैं समझता हूं कि वे हमारे संदेश को समझ गए हैं. जरूरत पड़ने पर ऐसी कार्रवाई फिर की जा सकती है.’

Rawat had said after the release of ‘India’s Most Fearless’ book,’ Strike was a message that we wanted to give. I understand that they have understood our message. Such action can be taken again if needed.

इस किताब में म्यांमार सीमा और नियंत्रण रेखा के पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में सामग्री है. रावत ने कहा कि आतंकवादी लगातार आते रहेंगे और भारतीय सैनिक उनकी खातिरदारी के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, “हम किसी भी घुसपैठ को रोकने के लिए तैयार हैं. आतंकवादी सीमा के उस पार तैयार हैं और हम सीमा के इस तरफ उनकी खातिरदारी के लिए तैयार हैं. हम उनका स्वागत करेंगे और उन्हें उनकी कब्र में दफन कर देंगे.

This book contains material about the Myanmar border and the surgical strike across the Line of Control. Rawat said that the terrorists will keep coming and Indian soldiers are ready for their sake. They said, “We are ready to stop any intrusion.” The terrorists are ready across the border, and we are ready for their response on this side of the border. We will welcome them and bury them in their graves.

भारतीय सेना की तरफ से बड़ी कार्रवाई की खबर आ रही है. सेना ने पाकिस्तान में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने के करीब एक साल बाद म्यांमार सीमा पर बड़ा ऑपरेशन किया है.

Report of big action is coming on behalf of the Indian Army. The army has done a major operation on the Myanmar border almost a year after ‘surgical strike’ in Pakistan.

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https://youtu.be/6KzO3XxanXM

बड़ी खबर : पाकिस्तान और चीन के खिलाफ ये एक बड़ा कदम मिटा देगा इनका नामोनिशान : अनिल अंबानी

हमारा एक भी जवान नही मारा जाएगा, और हम बस इस एक कदम से चीन का नामोनिशान मिटा देंगे : अनिल अंबानी

चाहे चीन और पाकिस्तान कितना भी साजिस कर ले भारत के खिलाफ कोई भी आतंकी हमले की तैयारी कर ले लेकिन भारत का बाल भी बांका नही कर सकता. और ये बात साबित कर दिया है भारत के 2 महान उद्योगपतियों तथा उसकी कंपनी ने। इन्होने ये बात साबित कर दी है की भारत देश का कोई भी दुश्मन चाहे जो मर्जी कर ले परन्तु उसको खत्म करना उनके बसकी बात नही है. भारत इतना कमजोर देश नही है कि इन छोटी – छोटी मुश्किलों से डर जाये.

Even if China and Pakistan prepare for any terrorist attack against India, how much can be prepared, but India’s child can not even make money. And this fact has proved that two great industrialists and their company of India. He has proved this fact that whatever the will of the country is any enemy, but it is not a matter of settling on him. India is not such a weak country that is afraid of these small things.

राफेल डिफ्फेन्स तथा रिलायंस के बीच हुआ साझा :-                                                                                                                                                                                                                                     दरअसल भारत सरकार ने दूसरे देशों की गतिविधियों को देख कर एक बहुत ही अहम् निर्णय लिया है जिसके तहत हवाई शक्तियों को मजबूत बनाने की बात सामने आई है। जिस तरह चीन और पाकिस्तान के बीच स्थलीय सड़क बन रही है इन सबको मात देने को तैयार भारत ने लिया अहम फैसला. भारत ने ऐसा महत्वपूर्ण फैसला लिया है जिससे भारत के दुश्मनों के पैरों तले जमीन निकल जाएगी. ये लोग डर से कांपने लगेंगे.

The sharing between Rafael Diffens and Reliance:                                                                                                                                                                                                                               In fact, the Government of India has taken a very high decision by looking at the activities of other countries, under which it has come to strengthen the air forces. Just as the terrestrial road between China and Pakistan is being formed, India has decided to overcome all these important decisions taken by India. India has taken such an important decision which will bring the land under the feet of the enemies of India. These people will start tremble with fear.

 

सभी राज्य साथ देंगे मिसाइल बनाने में :-                                                                                                                                                                                                                                                      इस योजना के तहत इन दो कंपनियों ने मिलकर हर राज्य में मिसाइल बनाने की इकाइयों तथा देश से बाहर जाने की सारी हवाई पट्टियों के निर्माण की जिम्मेदारी अपने सर पर ली है। इन दो कंपनियों ने ये जिम्मा उठाया है कि हवाई पट्टियों के निर्माण तथा मिसाइल का सारा खर्च ये उठाएंगे. हर राज्य को इतना मजबूत बनाना है कि कभी भी मुसीबत आने पर ये राज्य उनका डटकर सामना करने में सक्षम हों. और हर मुमकिन कोशिश कर दुश्मनों को हरा सके.

All the states will work together to make missiles: –                                                                                                                                                                                                                        Under this scheme, these two companies together have taken the responsibility to build missile-making units and all the air strips leaving the country. These two companies have taken up the responsibility to build airbases and collect all the expenses of the missile. It is to make every state so strong that once the trouble comes, the state will be able to face them bitterly. And can be able to defeat enemies by every possible effort.

सिर्फ इंदौर में खर्च होंगे 1300 करोड़ :-                                                                                                                                                                                                                                                        सिर्फ इंदौर के समीप निर्माण कार्य में खर्च होंगे 1300 करोड़ ये तो सिर्फ एक शुरुआती राशि है और इसके साथ ही 3000 लोगो को रोजगार भी मिलेगी। ऐसा होने से भारत की ततक और भी बढ़ जाएगी. इअसा होने से भारत अपनी हवाई शक्तियों को मजबूत करके चीन और पाकिस्तान की हमला करने की सारी उम्मीदों पर पानी फेर देगा. भारत की सुरक्षा की ओर ये एक ऐसा बड़ा कदम है जो भारत के खिलाफ आतंक फैलाने और भारत को हानि पहुँचाने का सोच रहे हैं।

Only Rs 1,300 crore will be spent in Indore: –                                                                                                                                                                                                                                       Only around Indore will be spending 1300 crore in construction work, it is just an initial amount and it will also get jobs for 3,000 people. By doing so, India’s tautak will increase further. With this, India will reinforce all hope of attacking China and Pakistan by strengthening its air power. This is a major step towards the security of India that is planning to spread panic against India and harm India.

यहां के उद्योगपति ने भी देश के लिए कुछ न कुछ बड़ा करने की ठान लिए हैं। इसके उपरांत भारत में स्वदेशी रक्षा उपकरणों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे होगा ये की देश को कभी किसी दुसरे देश पर निर्भर नही होना पड़ेगा. देश की रक्षा के लिए सारे हथियार देश में ही बनेंगे. ताकि बेरोजगार को रोजगार भी मिल सके और देश आर्थिक रूप से उन्नति भी कर सके जरुरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा हथियार बना सके।

The industrialist here has also decided to do something big for the country. After this, indigenous defense equipments will also be encouraged in India. It will happen that the country will never have to depend on any other country. All weapons will be made in the country to protect the country. So that the unemployed can also get employment and the country can make economic progress and create the maximum weapon to protect the country.

मोदी के इजरायल दौरे के बाद उठाया गया यह बड़ा कदम अब होगा देश के विरोधियों के मुँह पर जोरदार तमाचा. क्योंकि अब हर राज्य में ऐसी कंपनिया स्थापित की जाएगी जो इन विरोधियों के मुहं तोड़ जवाब दे सके। अब से हमारे देश के एक भी सैनिक नही मारे जाने चाहिए : अनिल अंबानी

This big move, taken after Modi’s visit to Israel, will now be a big hit on the faces of the country’s opponents. Because now in every state, such companies will be set up which can break the mouth of these opponents. An Indian soldier should not be killed anymore: Anil Ambani

अनिल अम्बानी ने अपने कंपनी रिलायंस के साथ इस साझा में भाग लिया हैं साथ ही साथ निवेश करते हुए यह बयान दिया है कि हमारे देश के एक भी सैनिक नही मारे जाने चाहिए वरना चीन को मिट्टी में मिला दूंगा।

Anil Ambani has taken part in this share with his company Reliance and while investing, it has made a statement that not one single soldier of our country should be killed or else we will get China into the soil.

https://youtu.be/tSvh2gioW7I

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source : thenamopress.com

गाँधी नेहरु का जन्मदिवस की तारीख सबको याद रहती है पर भगतसिंह को कौन पूछता है !

गाँधी नेहरु का जन्मदिवस होता तो राष्ट्रिय छुट्टी होती कार्यक्रम होते, भगत सिंह को कौन पूछने वाला !ये बात तो हम किसी कटाक्ष में नहीं कह रहे बल्कि यही हकीकत है, क्योंकि अगर गाँधी और नेहरु का जन्मदिवस होता तो सब जगह सरकारी छुट्टियां होती कार्यक्रम होते जगह जगह पर ढोल भजते लेकिन भगत सिंह कौन है, क्या किया है इसने कौन पूछने वाला है कोई नही पूछेगा !

Gandhi Nehru’s birthday would be a national holiday program, who would ask Bhagat Singh! We are not saying this in a tone, but this is the reality, because of Gandhi and Nehru were the birthplaces then there would be government holidays. Place the drum on the place but who is Bhagat Singh, what has done, who is going to ask who will ask no one!

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार भगत सिंह जी का जन्मदिवस 27,एवं 28 को मनाया जाता है, भगत सिंह जी ने 23 साल की उम्र में भारत के लिए अपनी जान दे दी उनका उनका जन्मदिवस है, उन्होंने अपने भारत के अपनी जान तक न्यौछावर कर दी लेकिन उनके जन्मदिवस को सब भूल गये कोई भी उनको याद तक नही करता है,

According to official records, Bhagat Singh’s birthday is celebrated on 27th, and 28th, Bhagat Singh Ji gave his life for India at the age of 23, he is his birthday, he has given up his life till his life of India but Nobody remembers his birthday, he does not remember them,

पर हम दावे के साथ कह सकते है की, अधिकतर भारतीय लोगों को न ये तारीख याद है और न ही भगतसिंह क जन्मदिवस याद,इस देश का यही हाल है, जो सम्मान के असली हकदार होते है
वो गुमनाम हो जाते है, और जो दलाली करते है वो महान हो जाते है

But we can say with the claim that most Indian people do not remember this date nor remember the birthday of Bhagat Singh, this is the situation in this country which is the rightful owner of respect
They become anonymous, and those who do brokerage become great

2 अक्टूबर होता तो राष्ट्रीय छुट्टी होती, कार्यक्रम चलाये जा रहे होते
नेहरू का जन्मदिवस होता तो बाल दिवस मनाया जा रहा होता, पर 27 सितम्बर इसे कौन पूछने वाला है,अंग्रेजो ने भारतीयों पर जुल्म किया, भगत सिंह ने उनसे लड़ाई लड़ी ,अंग्रेजो ने खुद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले को फांसी दी

October 2 was a national holiday, programs were being run
If Nehru’s birthday was being celebrated, Children’s Day would have been celebrated, but on September 27, who is going to ask it, the British oppressed the Indians, Bhagat Singh fought with them, the British who executed the war against themselves

गाँधी नेहरू न जाने अंग्रेजों से कैसे लड़ रहे थे, की अंग्रेज उनके साथ बैठकर चाय पिया करते थे
न जाने कौन से कवच कुण्डल गाँधी नेहरू जैसे लोगों ने पहने थे की अंग्रेज उन्हें 1 लाठी भी नहीं मारते थे, हां अपनी महिलाओं के साथ उनको सम्बन्ध बनाने देते थे

How did Gandhi Nehru fight against the British, the British used to drink tea with them?
Do not know which people like Kavacha Kundal Gandhi Nehru were worn that the British did not kill them even with a single stick, yes they would have given them their relationships with women

हमने पहले ही कहा की इस देश का यही हाल है, सम्मान के असली हकदार गुमनाम है, और दलाली करने वाले महान है, तभी 27 सितम्बर किसी को नहीं याद है

We have already said that this is the case of this country, the rightful owner of the honor is anonymous, and the brokerage is great, then only 27 September nobody remembers

यह टिप्पणी भी पढ़े :

भगत सिंह के जन्म-दिवस पर मतभेद है। कई पुस्तकों में इनका जन्म-दिवस 28 सितंबर व कहीं-कहीं इनका जन्म-दिवस अक्टूबर भी दिया गया है। वैसे पुरानी पुस्तकों व पत्र-पत्रिकाओं में भगत सिंह का जन्म दिवस आश्विन शुक्ल तेरस, संवत १९६४ को शनिवार के दिन प्रात: ६ बजे बताया गया है। इस तिथि को कुछ विद्वानों ने 27 सितंबर 1907 तो कुछ ने 28 सितंबर बताया है।

Also, read this comment:

There is a difference of birthday on Bhagat Singh. In many books, their birthdays are given on September 28 and somewhere in the year of their birth as well. In the old books and journals, Bhagat Singh’s birthday was told Ashwin Shukla Teras, Samvat 1964 on Saturday, at 6 a.m. on Saturday. On this date, some scholars described September 27, 1907 as some as 28 September.

भगतसिंह ने देश के लिए दी ये कुर्बानी :

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। उनका मन इस अमानवीय कृत्य को देख देश को स्वतंत्र करवाने की सोचने लगा। भगत सिंह ने चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर क्रांतिकारी संगठन तैयार किया।

लाहौर षड़यंत्र मामले में भगत सिंह,  सुखदेव और राजगुरू को फाँसी की सज़ा सुनाई गई व बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया।

भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरू के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हँसते-हँसते देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, तभी भी इनका जन्मदिवस किसी को भी याद नहीं है,

Bhagat Singh gave these sacrifices for the country:

On April 13, 1919, the Jallianwala Bagh massacre had a profound effect on Bhagat Singh’s child mind. Their mind started thinking about this inhuman act to make the country independent. Bhagat Singh teamed up with Chandrashekhar Azad to form a revolutionary organization.

In the Lahore conspiracy case Bhagat Singh, Sukhdev, and Rajguru were sentenced to death and Batukeshwar Dutt was given life imprisonment.

Bhagat Singh was hanged on the death of Sukhdev and Rajguru on the evening of March 23, 1931, at 7 in the evening. All three sacrificed their lives for a laughing country, even then nobody remembers their birthdays,

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VIDEO : केवल 3 प्रतिशत लोगो की हथेली में होता है यह (X) चिन्ह, इस चिन्ह के पीछे छिपा है ये बड़ा राज….

क्या है हस्त रेखा
हस्तरेखा शास्त्र के प्राचीन ज्ञान के आधार पर हथेली की लाइन (रेखाएँ), मनुष्य के व्यक्तित्व और भविष्य की संभावनाओं जैसे करियर, जीवन, विवाह, धन, प्रेम और स्वास्थ्य संबंधी विषय के बारे में दर्शाती है।

What is the hand line
Based on the ancient knowledge of palmistry, the line of palm reflects the subject of personality and future prospects such as careers, life, marriage, wealth, love and health.

प्राचीन ग्रन्थों में हस्तरेखा ज्ञान-
हाथ की रेखाओं को देख कर भविष्य का भान करने की इस कला की जड़े, भारतीय पृष्ठभूमि से ही जुड़ी हैं। विभिन्न शास्त्रों के अनुसार कई हज़ार साल पहले हिन्दू ऋषि वाल्मीकि ने 567 छंद युक्त एक ग्रन्थ की रचना की थी। जिसमे उन्होंने हाथ की रेखाओ का भी संक्षेप में वर्णन  किया था!

In ancient texts, palm-
This art of realizing the future by looking at the lines of the hand is connected to the Indian background. According to various scriptures, Hindu Rishi Valmiki composed a volume containing 567 verses several thousand years ago. In which he described briefly the lines of hand!

 हस्त रेखा की उत्पत्ति कहाँ हुई और उसके बाद जाने क्या है x चिन्ह का राज
 हस्त रेखा पढ़ने की उत्पत्ति-                                                                                                                                                                                                                                                                      यह माना जाता है कि हस्तरेखा पढ़ने के इस ज्ञान की उत्पत्ति भारत से हुई। इसके बाद यह चीन, तिब्बत, मिस्र, फ्रांस से होता हुआ यूरोप जैसे दूसरे देशों में फ़ैल गया। अब बहुत से देशो ने इस ज्ञान को अर्जित कर लिया है!

Where is the origin of the hand line and after that is the key to the symbol of the x sign
Origin of reading the handloom –                                                                                                                                                                                                                                                        It is believed that this knowledge of reading palm has originated from India. After this it spread to other countries like Europe, China, Tibet, Egypt and France. Now many countries have acquired this knowledge!

 ग्रीक ज्योतिष के अनुसार-                                                                                                                                                                                                                                                                        ऐसा कहा जाता है कि ग्रीस के विद्धवान अंक्सगोरस ने अपने समय में भारतीय उपमहाद्वीप में रहते हुए हस्तकला ज्ञान के बारे में जो भी सीखा, वो उन्होंने हेर्मेस के साथ साझा किया था

 According to Greek astrology –                                                                                                                                                                                                                                                            it is said that the Greeks of Greece, who lived in the Indian subcontinent during their time, shared what they learned about handicraft knowledge, they shared with Hermes

हथेली में X रेखा होने के पीछे छुपा है ये राज, केवल 3 प्रतिशत लोगो की हथेली में होता है यह चिन्ह                                                                                                                                                                       This is hidden behind the X line in the palm, this secret is in the palm of only 3 percent of the people.

 हथेली में X का होना                                                                                                                                                                                                                                                                                    X in the palm           

                                                                    

मिस्र के विद्वानों का कहना है कि सिकंदर महान के हाथों में इस तरह के चिन्ह देखे गए थे। सिकंदर की हथेली के अलावा यह चिन्ह शायद ही किसी की हथेली में पाया गया। अनुमान लगाया गया है कि दुनियाभर में केवल 3 प्रतिशत लोगों के हाथों में ये चिन्ह पाया जा सकता है।

Egyptian scholars say such signs were seen in the hands of Alexander the Great. Apart from the palm of Alexander, this sign was hardly found in the palm of someone. It is estimated that only 3 percent of the world’s people can see this symbol.

हालही में हथेली में X रेखा पाए जाने की उत्पत्ति और इन रेखाओं के किस्मत से होने वाले संबंध को लेकर मास्को यूनिवर्सिटी में एक शोध की गयी। व्यक्ति और उनकी हथेली की रेखाओं के बीच होने वाले सम्बन्ध पर एक पेपर निकाला गया।

Recently, a research was conducted at the Moscow University about the origin of the X line found in the palm and the connection between the fate of these lines. A paper was drawn on the relationship between the person and the lines of his palm.

X रेखा वाले लोग होते हैं लीडर                                                                                                                                                                                                                                                                 People with X lines are leaders

विश्वविद्यालय में हुई शोध में शोधकर्ताओं ने 2 मिलियन लोगों के बारे में जानकारी एकत्रित की। जिनमें जीवित और मृत दोनों तरह के व्यक्तियों की जानकारी थी। इनका शोध करने पर उन्होंने पाया कि जिनके हाथों में X रेखा थी कोई बड़े नेता, कोई लोकप्रिय व्यक्ति या ऐसे कोई व्यक्ति थे जिन्हें बड़े-बड़े कामों के लिए याद किया जाता है।

In the research done at the University, the researchers collected information about 2 million people. Which included information about both living and dead. Upon research, he found that in his hands the X line was a big leader, a popular person or someone who is remembered for his great deeds.

जिन व्यक्तियों के दोनों हाथों में ये रेखाएँ होती हैं वे बड़े काम करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति होते हैं। ये उन लोगों में से होते हैं जिन्हें मरने के बाद भी याद किया जाता है। जिन व्यक्तियों के केवल एक हाथ में ये चिन्ह होता है वे प्रतिष्ठा पाने वाले और सफलता उनके कदम चूमने वाली होती है।”

The persons who have these lines in both hands are famous people who work big. These are among those who are remembered even after death. Those people who have these symbols in only one hand, have a reputation and success is about to kiss their steps.

https://youtu.be/6MGaHwd7sHY

यह वीडियो भी देखें!

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : http://thenamopress.com

बड़ा खुलासा : राहुल गाँधी का पक्ष लेना पड़ा हार्दिक पटेल की बड़ा महंगा, ट्रोलर्स ने पूछ लिया एक ऐसा सवाल……

नई दिल्ली: इस साल के अंत में गुजरात विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं! इसी की मद्देनज़र रखते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज तीन दिन के दौरे पर गुजरात पहुंचे हुए हैं ! राहुल गांधी ने पहले द्वारका के जगत मंदिर और शारदापीठ के शंकराचार्य में दर्शन कर अपनी यात्रा की शुरूआत की!

New Delhi: Gujarat assembly elections are going to be held later this year! Keeping this in view, Congress vice-president Rahul Gandhi has reached Gujarat on a three-day tour today! Rahul Gandhi first started his journey by visiting the Jagtar Mandir of Dwarka and Shankaracharya of Shardapith.

आपको बता दें कि हार्दिक पटेल पाटीदार आंदोलन के नेता हैं! वह पटेल समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष रत रहे हैं! हार्दिक ने इस साल मई में कहा था कि उन्होंने कांग्रेस का समर्थन करने का विकल्प भी खुला रखा है, उनकी शर्त केवल इतनी होगी कि कांग्रेस चुनाव जीतने के बाद उनकी मांग पूरी करने का वादा करें. हार्दिक पटेल ने राहुल गांधी के गुजरात दौरे पर उनका स्वागत किया है! हार्दिक पटेल ने राहुल के दौरे के मौके पर ट्वीट करते हुए कहा, “कोंग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल जी का गुजरात में तहेदिल से स्वागत हैं! जय श्री कृष्णा!”

Let me tell you that Hardik Patel is a leader of Patidar movement! He is constantly struggling to get the reservation for the Patel community! Hardik had said in May this year that he has kept the option to support the Congress, his condition will be only that he promises to fulfill his demand after winning Congress election. Hardik Patel has welcomed Rahul Gandhi on his visit to Gujarat! Hardik Patel tweeting on the occasion of Rahul’s visit, said, “Congress Vice President Rahul Ji is absolutely welcome in Gujarat! Hail lord krishna!”

बाद में पत्रकारों से बातचीत में हार्दिक ने कहा कि उन्होंने गांधी का गुजरात के महज एक अतिथि के रूप में भारतीय परंपरा के अनुसार स्वागत किया है! इसे राजनीति से नहीं जोडा जाना चाहिए! उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि इस बार कांग्रेस ही जीतेगी पर यह बात सही है कि राज्य की जनता भाजपा से नाखुश है और इसके शासन से मुक्ति चाहती है! यह चुनाव भाजपा अथवा कांग्रेस का नहीं बल्कि भाजपा और राज्य की छह करोड जनता के बीच है!

Later in the interaction with reporters, Hardik said that he has welcomed Gandhi as a guest of Gujarat in accordance with Indian tradition. It should not be linked to politics! He also said that he did not say that Congress will win this time, but it is true that the people of the state are unhappy with the BJP and want freedom from its rule! This election is not between the BJP or the Congress, but between BJP and the six crore people of the state!

हालांकि हार्दिक पटेल अब तक आम आदमी पार्टी के साथ दिखते रहे हैं, लेकिन अब हार्दिक के इस ट्वीट ने कई नए सवालों को जन्म दे दिया है! लेकिन हार्दिक पटेल का इस तरह का ट्वीट करना काफी महंगा पड़ा, लोगों ने उन्‍हें जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया! ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा “आप ये बताएं कि आप किस तरफ हैं! जब केजरीवाल आते हैं, तो उनकी तरफ हो जाते हैं, जब राहुल गांधी आते हैं, तो उनका स्‍वागत करने लगते हैं! आप ये निश्चित क्र लीजिए की आखिरकार आप है किसकी तरफ.

Although Hardik Patel has been seen with Aam Aadmi Party till now, but now Hardik’s tweet has given birth to many new questions! But this kind of tweet of Hardik Patel was expensive, people started trolling him hard! A user on Twitter wrote “You tell me where you are! When Kejriwal comes, then he gets on his side, when Rahul Gandhi comes, he starts welcoming! Take it definite that at last you are on whose side.

देखिये यूजर्स के रिप्लाई:-

https://twitter.com/urvashirautelaj/status/912187168143032320

source : logicalbharat.com

हिन्दूराष्ट्र नेपाल पर इस्लामिक आक्रमणकारियों ने कभी हमला करने की हिम्मत क्यों नहीं की ?

पाकिस्तान डिफेंस के फोरम में एक व्यक्ति ने ये सवाल किया कि ‘नेपाल पर कभी इस्लामिक आक्रमण क्यों नहीं हुआ ?’ लोगों ने माथा खुजाते जिसके जो मन में आया वो जवाब लिखा। किसी को पता नही ये कैसे हो गया। मुगल दिल्ली से हजार कि.मी. दूर दक्षिण में पहुंच गए लेकिन कुछ सौ कि.मी. दूरी पर रहे नेपाल को छोड दिया, कैसे ?

In the Pakistan Defense Forum, a person asked, ‘Why did not the Islamic invasion of Nepal ever happen?’ People used to say that those who came to mind wrote the answer. Nobody knows how it happened. Thousands km from Mughal Delhi Reached far south but some hundred kilometers Leave Nepal on the distance, how?

किसी ने बताया कि, नेपाल गरीब था तो नेपाल जीतने का कोई कारण नही था। किसी ने कहा पहाडी इलाका होने से नेपाल को जीतना कठिन रहा होगा । दरअसल नेपाल कभी गरीब नही था। तिब्बत, चीन और भारत के बीच हो रहे व्यापार में, माल सामान के हेरफेर के रास्ते नेपाल से गुजरते थे, नेपाल व्यापार केन्द्र था और अल्लाह के बंदों के लिए भी पहाड चढना भी कोई बड़ी बात नही थी।

Someone said that Nepal was poor, there was no reason to win Nepal. Someone said that having a mountainous area, Nepal would have been hard to win. Indeed, Nepal was never poor. In the trade between Tibet, China and India, through the manipulation of goods, Nepal used to go through Nepal, the trade center was Nepal, and the climbing of the mountains for Allah was also not a big deal.

इसका जवाब हमें नेपाल की एक कहानी में मिलता है। उस कहानी को ‘सौर्य’ नाम की नेपाली फिल्म में भी बताया गया है। लगाए गए फोटो उसी फिल्म के स्क्रीनशॉट हैं ।गुरु गोरखनाथ ने नेपाल नरेश को एक दिव्य तलवार भेंट की थी। कहानी के अनुसार वो तलवार आज भी नेपाल के एक संग्रहालय में रखी हुई है।

We get the answer in a story of Nepal. That story has also been told in the Nepali film named ‘Suryari’. Photographs are screenshots of the same film. Guru Gorakhnath gifted a divine sword to the King of Nepal. According to the story, the sword is still kept in a museum in Nepal.

मुस्लिमों ने नेपाल पर कभी आक्रमण नही किया वो बात भी झूठी है। लगभग 12वीं-13वीं सदी में समशुद्दिन बेग आलम नाम के इस्लामिक आक्रमणकारी ने नेपाल पर आक्रमण किया था।

The fact that Muslims have never invaded Nepal is also false. In the 12th-13th century, the Samaduddin Beg Alam, an Islamic invader, invaded Nepal.

चूँकि इस्लामिक सेना काफी बड़ी थी और नेपाल की गुरखा सेना बेहद छोटी थी। फलस्वरूप गुरखा हार गए लेकिन हमेशा की तरह वे बहादूरी पूर्वक लडे थे जिससे इस्लामिक सेना को भी बडा भारी नुकसान हुआ था। युद्ध के पश्चात् गोरखा सेनापति अकेला बचा था और दस दस मुस्लिम सैनिकों को टक्कर दे रहा था। यह नजारा देख कर समशुद्दिन ने अपने सैनिकों को लडाई रोकने का आदेश दिया और गोरखा सेनापति को दाद देने लगा।

Because the Islamic army was very large and Nepal’s Gurkha army was very small. As a result, Gurka was defeated but as usual she had fought bravely, causing huge losses to the Islamic army. After the war, Gorkha Senapati was left alone and was battling ten ten Muslim soldiers. Seeing this sight, Samshuddin ordered his soldiers to stop the fight and started praising the Gurkha Senapati.

उसने ऐसे बहादुर सैनिक कभी, कहीं नही देखे थे। उसकी तारीफ करने के बाद समशुद्दीन बेग ने कहा कि, अगर उसे जान बचानी हो तो वह उसकी शरण में आ जाय। लेकिन गोरखा सैनिक के पास नेपाल नरेश की दी हुई ‘गोरख काली’ तलवार थी, धर्म और जन्मभूमि की रक्षा करते मरमीट जाने की गुरुगोरख और गुरुदत्त की सीख थी। तुरंत ही उसने समशुद्दिन के सामने तलवार उठाई। दूसरे सैनिक आसपास खड़े रहे दोनों सेनापतियों में जोरदार लड़ाई हुयी।

He never saw such a brave soldier anywhere. After complimenting Samshuddin Beg, he said that if he is to save his life, then he should come to his shelter. But the Gorkha soldier had the ‘Gorakh Kali’ sword given by the King of Nepal, that was the training of Guru Gorkh and Guru Dutt to go to Murmits protecting religion and the Janmabhoomi. Immediately he raised a sword in front of Samshuddin. A strong fight was fought between the two generals standing near the other soldier.

पहले से ही चोटिल गोरखा सेनापति आखिर में मारा गया और मरते मरते गोरख काली तलवार को जमीन में घुसाकर खंभे की तरह खडा कर दिया। समशुद्दिन का पैर तलवार के पास आकर रूक गया, तलवार को पार कर के आगे, नेपाल की तरफ आगे बढने की हिम्मत नही हुई।

Already injured Gurkha Senapati was killed in the end and after dying, the Gorakh black sword entered into the ground and made it like a pillar. Shamsuddin’s feet stopped coming to the sword, beyond crossing the sword, did not have the courage to move forward towards Nepal.

इस भीषण युद्ध के बाद वो अपने सैनिकों के साथ वापस चला गया । फिर कभी मुस्लिमों ने नेपाल पर आक्रमण नही किया। बाद में धन माफिया यहूदियों की कंपनी ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के नौकर अंग्रेजों और उनके गुलाम भारतीय सैनिकों ने 1767 में नेपाल पर आक्रमण कर दिया।लेकिन गुरखाओं के आगे सभी बुरी तरह परास्त हुए।

After this fierce war, he went back with his soldiers. Again Muslims never attacked Nepal. Later, the servants of the ” East India Company ” of the wealthy Mafia Jews, the British and their slaves, Indian soldiers invaded Nepal in 1767.But Gurkha were get defeated badly.

ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1816 में फिर आक्रमण किया और जो लडाई हुई उसे ‘गोरखा वॉर’ कहा जाता है। उस में नेपाल हार गया और बाद में कंपनी के साथ संधि करनी पडी जिसमें जमीन का बहुत बडा क्षेत्र नेपाल को गंवाना पड़ा।

The East India Company again invaded in 1816 and the war that was called is called ‘Gorkha War’. Nepal lost in it and later it had to make a treaty with the company which had lost much of the land in Nepal.

गुरु गोरख की तलवार की दिव्यता धन माफियाओं की बंदूक के आगे नही चली। धन माफियाओं के पगारदार अंग्रेजों के साथ बंदूके चलाने वाले बिकाऊ और गद्दार भारतीय भी थे।गुरु गोरख खूद गुरखा थे या गुरखाओं के दावे अनुसार उन्होंने अपने गुरु का नाम अपनी जाति के साथ जोड दिया है, पता नही, लेकिन एक बात सत्य है कि नेपाल और गुरु गोरख के बीच घनिष्ठ संबंध थे।

Guru Gorkh’s sword did not go beyond the gun of wealth divinities. There was also a soldier and trafficker running guns with the salaried Britishers of the money mafia. Guru Gorakh Khud was Gurkha or according to the claims of Gurkhas, he has added the name of his Guru to his caste, not known, but one thing is true that Nepal And there was a close connection between Guru Gorakh

गुरु गोरख और गुरु दत्तात्रेय गुरुभाई थे। गुरुदत्त ने गुजरात में धर्म का डंडा उठाया था । राजा अशोक के बाद पैदा हुए संघ के आतंकी गुजरात में गच्छामि करवाने के लिए आते थे तो उनपर गुरु दत्त के भक्तों के डंडे पडते थे।

Guru Gorakh and Guru Dattatreya were Guru Bhai. Guru Dutt had raised the religion of religion in Gujarat. When the terrorists of the RSS, born after King Ashoka, used to come to Gujarat to get a confession, they would have had stalks of devotees of Guru Dutt.

दत्त और नाथ संप्रदाय के सभी साधू गिरनार पर रहते थे। गुरु गोरख का भी वहां पर आना जाना रहता था। जाहिर है गोरख का धर्म का डंडा नेपाल में चला हो और वहां की प्रजा में धर्म और देश के लिए जनून भर दिया हो।

All the saints of Dutt and Nath sect used to live on Girnar. Guru Gorakh also used to go there. Obviously, Gorakh’s religion stance has started in Nepal and people have filled their religion for religion and country.

तलवार की कथा तो मात्र Symbol है, असल बात है प्रजा में जागृति लाना। वास्तविकता यह थी कि, मुस्लिम शासक नेपाल की बहादूर प्रजा से डर गये थे। आज भी सेना में बहादुर गोरखाओं की अलग शाखाएं है जिसे गोरखा बिग्रेड कहा जाता है।

The story of Sword is simply the symbol, it is a matter of fact that people are awakening. The reality was that the Muslim rulers were scared of the brave people of Nepal. Even today there are different branches of Brave Gurkhas in the army, which are called Gorkha Bigridas.

बड़ा खुलासा : जानिए क्या कर रहा है निर्भया कांड का वो नाबालिग आरोपी जो अब 23 साल का हो चूका है….

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्भया गैंगरेप मामले में सभी दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने का पीड़िता के परिजनों ने स्वागत किया है, साथ ही पुरे देश की जनता ने भी इस फैसले पर संतोष जताया है! जाहिर हो 14 सितम्बर, 2013 को चारों बालिग दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी जिसकी खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए चार दोसियो की फांसी की सजा बरक़रार रखी!

New Delhi: The families of the victim have been welcomed by the Supreme Court for the execution of all convicts in the gangrape case, as well as the people of the entire country have expressed satisfaction over this decision too! Apparently on September 14, 2013, four young convicts were sentenced to death, the hearing of the petition filed against them was going on in the Supreme Court and the Supreme Court preserving the sentence of four Dasiyo hanging the verdict!

क्या हुआ था राजधानी की सड़कों पर 16 दिसंबर, 2012 की रात, पढ़िएः

16 दिसंबर 2012 की वो हैवानियत दिल्ली और पुरे देश को झकझोर कर रख दिया था! उस रात एक चलती बस में 6 दरिंदो ने 23 साल की निर्भया के साथ हैवानियत का जो खेल खेला, उसे जानकर हर देशवासी का कलेजा कांप उठा, निर्भया अपने दोस्त के साथ मुनरिका से द्वारका जाने के लिए बस में चढ़ी थी! लेकिन बस में सिर्फ ६ लोग ही मौजूद थे और निर्भया के साथ छेड़खानी करने लगे जब उसके दोस्त ने विरोध जताया तो उसे मार-मार कर बेहोश कर दिया और निभाया के साथ जबरदस्ती करने लगे!

What happened was the night of December 16, 2012 on the streets of the capital, read:

On December 16, 2012, the hustle and bustle of Delhi and the entire country was shattered! Knowing that the 6 dharindas played a game of harmony with the 23 year old Nirbhaya in a moving bus, the laughter of every nation was shaken; Nirbhaya had just climbed to go to Dwarka from Munira with his friend! But only six people were present in the bus and started flirting with Nirbhaya when his friend protested, then he struck him and made him unconscious.

निर्भया के साथ इन दरिंदो ने दरिंदगी की सारी हद्दे पार कर दी थी, खबरों की माने तो सबसे ज्यादा दरिंदगी नाबालिग आरोपी ने की थी, इन दरिंदो ने जंग लगी लोहे की रोड निर्भया के गुप्तांग में घुसा दी थी जिससे आते बाहर आ गयी थी और इन्फेक्शन हो गया था, इस हैवानित भरी घटना ने पुरे देश को हिला डाला था! हर कोई दोसियो के सजा दिलाने के लिए प्रदर्शन कर रहा था, संसद से लेकर सड़क तक इस हैवानियत भरी घटना की गूंज थी! चार आरोपियों को फांसी की सजा तो मिल गयी लेकिन क्या आप जानते है की नाबालिग आरोपी आज कल कहा है, क्या कर रहा है!

With these Nirbhaya, they had crossed the limits of poverty, according to the news, the highest crime was made by a minor accused, these darinds had ransacked the iron rod of Nirbhaya, which had come out and came out of the infection It was done, this exhilarating incident had shaken the entire country! Everyone was performing to get the punishment of Dosiyi, from the Parliament to the Road, the euphemism was a resounding event! Four convicts got the hanging sentence but did you know that the minor accused has said yesterday, what is doing!

14 सितम्बर, 2013 को चारों बालिग दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी! लेकिन नाबालिग को बाल सुधार गृह भेज दिया गया था! उस नाबालिग आरोपी को पिछले साल 20 दिसंबर 2015 को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया था! साथ ही उसे कड़ी सुरक्षा के बीच एक गैर सरकारी संगठन की देखरेख में रहने के लिए निर्देशित किया गया था!

On September 14, 2013, four young convicts were sentenced to death! But the minor was sent to the Child Correctional Home! That minor accused was released on bail on December 20, 2015 by the court! At the same time, he was directed to stay under the care of a non-governmental organization.

निर्भया कांड में कल फैसला आया जिसमे कोर्ट ने 4 आरोपियों को फाँसी की सजा सुनाई एक आरोपी पहले ही आत्महत्या कर चूका है और एक आरोपी नाबालिग होने से बच गया है! सोशल मीडिया पर एक ही आवाज उठ रही है और वो ये कि उस नाबालिग आरोपी जो अब एक 23 साल का युवक बन चूका है उसे भी सजा हो उसको बिना सजा हुए इंसाफ अधुरा है! मोहम्मद अफरोज नाम का वो युवक आज से पांच साल पहले जब निर्भया गैंग रेप हुआ था तो नाबालिग था लेकिन आज वो 23 साल है और आज हमारे बीच खुला घूम रहा है!

The verdict came out in the Nirbhaya case in which the court has sentenced four accused to death, an accused has already committed suicide and an accused has been rescued from being a minor! There is only one voice on the social media and it is that the minor accused who has now become a 23-year-old man is also punished, without any punishment, he is incomplete. The young man named Mohammed Afroz was a minor when he was raped five years ago by the Nirbhaya gang, but today he is 23 years and today he is walking open between us!

आपको बता दें की वो नाबालिग आरोपी इस समय साउथ इंडिया के एक नामी रेस्त्रा में कुक का काम कर रहा है और सबसे बड़ी बात ये है कि जहाँ वो काम कर रहा है उस मालिक को भी उसके बारे में नहीं बताया गया है! अगर मालिक को पता होता तो कौन रखता! निर्भया के दोषियों में शामिल रहे नाबालिग इस आरोपी को जूवेनाइल ऐक्ट के तहत 3 साल की सजा के बाद छोड़ दिया गया था! 5 मई को निर्भया के 4 दोषियों की फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी! सोचो जरा आज समाज में हमारे बीच वो आजाद घूम रहा है!

Let us tell you that the minor accused is currently working as a cook in a famous South India restaurant and the biggest thing is that the owner is not even told about where he is working! If the owner knew who would have! The minor involved in Nirbhaya’s culprits was released after three years of sentence under the Juvenile Act! The Supreme Court has upheld the hanging of 4 convicts of Nirbhaya on May 5! Think, today in our society, the freedom is moving between us!

नाबालिग को 20 दिसंबर 2015 को छोड़ा गया था.जिस दिन उसे बाल सुधार गृह से छोड़ा जाने वाला था, बड़ी संख्या में लोग उसे तलाश रहे थे! इसे देखते हुए पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में उसे किसी गोपनीय जगह पर रखा था. उसके बाद एक NGO ने उसको अपने पास रखा! उसके बाद लड़के को साउथ इंडिया में कुक की नौकरी पर लगा दिया गया है। नाबालिग के बारे में ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है!

The minor was released on December 20, 2015. The day he was going to be released from the Child Rehabilitation House, a large number of people were searching for him! In view of this, the police kept him in a secret place in tight security. After that an NGO kept him with him! After that, the boy has been put on Cook’s job in South India. Nobody knows much about the minor!

आज कानून में बदलाव जरूरी है ताकि नाबालिग के चकर में अफरोज जैसे आरोपी कभी बच ना पाए!

Today, a change in law is necessary so that the accused like Afro can never escape under the care of the minor!

source : http://hindpress.in

बेटी की पढ़ाई व शादी को लेकर पैसे की टेंशन अब हो गई दूर , जानिए मोदी सरकार का क्या है नया प्लान…

बेटी की पढ़ाई व शादी के लिए पैसे की टेंशन दूर करने को अब आप डाक विभाग के पास ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ का अकाउंट खुलवा सकते हैं। जनवरी में पीएम नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ कैंपेन में इस स्कीम की शुरुआत की थी। इसके बाद अब पजाब में भी इसके खाते खुलने शुरू हो गए हैं। डाक विभाग के सभी पोस्ट ऑफिसेज के साथ अकाउंट खोलने के लिए सुविधा सेंटर में भी अलग काउंटर खुलेगा। यहां जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा कराने के बाद अकाउंट खुल सकेगा।

You can now open an account of ‘Sukanya Samrudhi Yojana’ to the Department of Posts to remove the tension of money for the daughter’s education and marriage. In January, Prime Minister Narendra Modi launched this scheme in ‘Beti Bachao-Beti Practice’ campaign in Haryana. After this, its accounts have started to be opened in Pajab. A separate counter will open in the facility center to open an account with all the post offices of the postal department. After submitting necessary documents, the account will be opened.

अगर पेमेंट लेट हुई तो सिर्फ 50 रुपए की पैनल्टी लगेगी। गार्जियन अपनी दो बेटियों के लिए दो अकाउंट खोल सकते हैं। जुड़वां होने पर उसका प्रूफ देकर ही तीसरा खाता खोल सकेंगे। खाते को आप कहीं भी ट्रांसफर करा सकेंगे।

If the payment is leased then only a penalty of 50 rupees will be seen. The Guardian can open two accounts for his two daughters. If you are a twin, you can open a third account by proof of it. You will be able to transfer the account anywhere.

इस अकाउंट में एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम 1 हजार और अधिक से अधिक डेढ़ लाख रुपया या इसके बीच की कितनी भी रकम जमा कर सकते हैं। यह पैसा अकाउंट खुलने के 14 साल तक ही जमा करवाना पड़ेगा। मगर, खाता बेटी के 21 साल की होने पर ही मैच्योर होगा। बेटी के 18 साल के होने पर आधा पैसा निकलवा सकते हैं।

In this financial year, you can deposit at least 1 thousand and more than 1.5 lakh rupees or any amount of money in a financial year. This money will have to be deposited only for 14 years of opening the account. But, the account will be matched only when the daughter is 21 years old. Half money can be withdrawn if the daughter is 18 years old.

21 साल के बाद खाता बंद हो जाएगा और पैसा गार्जियन को मिल जाएगा। अगर बेटी की 18 से 21 साल के बीच मैरिज हो जाती है तो अकांउट उसी वक्त बंद हो जाएगा।

After 21 years the account will be closed and money will be received by the Guardian. If the daughter gets married between 18 and 21 years then the account will be closed at the same time.

यदि कोई व्यक्ति 1,000 रुपए महीने से अकाउंट खोलता है तो उसे 14 साल तक हर साल 12 हजार रुपए डालने होंगे। मौजूदा हिसाब से उसे हर साल 9.1 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा तो जब बच्ची 21 साल की होगी तो उसे 6,07,128 रुपए मिलेंगे। यहां आपको बता दें कि 14 सालों में इस व्यक्ति को अकाउंट में कुल 1.68 लाख रुपए ही जमा करने पड़े। इसके अलावा बाकी के 4,39,128 रुपए ब्याज के हैं।

If a person opens the account for 1,000 rupees then he will have to pay 12 thousand rupees every year for 14 years. According to the present, it will get 9.1 per cent interest every year, and when the child is 21, it will get Rs 6,07,128. Let me tell you that in 14 years this person has to deposit a total of 1.68 lakhs in the account. Apart from this, the remaining Rs 4,39,128 are of interest.

https://youtu.be/sMTy86kmxP8

source : http://hindpress.in