देवबंद में आतंकियों के छिपे होने का हुआ पर्दाफाश, सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम, योगी और मोदी सक्ते में|

बरेली : हाल में दो संदिग्‍ध बांग्‍लादेशी आतंकियों के पकड़े जाने के बाद पुलिस देवंबद समेत सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिलों में सभी हजारों पासपोर्ट धारकों के कागजात के सत्‍यापन का काम शुरू करने वाली है. दरअसल इन संदिग्‍धों के पास देवबंद पते के भारतीय पासपोर्ट मिले हैं. नकली दस्‍तावेजों के इस्‍तेमाल से ये पासपोर्ट बनाए गए हैं. मामले की जांच में पुलिस को सूचनाएं मिली हैं कि इस क्षेत्र में कई आतंकी मॉड्यूल छिपे हो सकते हैं!

Bareilly : After the arrest of two suspected Bangladeshi terrorists recently, the police is going to start verification of all the thousands of passport holders papers in Saharanpur and Muzaffarnagar districts, including Davamband. Indeed, these suspects have got Indian passports of Deoband address. These passports have been made using fake documents. In the investigation of the case, the police have received information that many terror module may be hidden in this area.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कहा कि यह केवल देवबंद या किसी खास समुदाय के लिए नहीं किया जा रहा है. मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिलों के सभी पासपोर्ट धारकों का सत्‍पापन किया जाएगा. दरअसल इस तरह की खुफिया सूचनाएं मिली हैं कि कुछ ऐसे आतंकी मॉड्यूल यहां छिपे हुए हैं. इससे पहले भी ऐसे कई वाकये यहां हुए हैं जब संदिग्‍ध यहां पकड़े गए हैं!

According to the Times of India report, the police said that this is not being done only for Deoband or any particular community. All passport holders of Muzaffarnagar and Saharanpur districts will be certified. In fact, intelligence inputs such that some such terror module are hidden here. Even before this, there have been many such instances here when the suspects are caught here.

यूपी ATS के हत्थे चढ़ा बांग्लादेशी आतंकी, देवबंद में रहकर रच रहा था आतंकी साजिश…
उत्तर प्रदेश के एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वायड) ने बांग्लादेश के आतंकवादी संगठन ‘अन्सारुल्ला बांग्ला टीम’ से जुड़े एक दहशतगर्द को आज (रविवार) मुजफ्फरनगर जिले से गिरफ्तार किया. एटीएस के महानिरीक्षक असीम अरुण ने यहां बताया कि दस्ते ने अब्दुल्ला अल मामून नामक व्यक्ति को आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में मुजफ्फरनगर जिले के कुटेसरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती पूछताछ में पता लगा है कि वह बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ‘अन्सारुल्ला बांग्ला टीम’ से जुड़ा है. अन्सारुल्ला बांग्ला टीम कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन द्वारा गठित किये गये आतंकवादी संगठन ‘अलकायदा’ से प्रेरित तन्जीम बतायी जाती है!

Terrorist conspiracy was made in the wake of the UP ATS assassinated Bangladeshi terrorists, Deoband …
ATS (Anti Terrorist Squad) of Uttar Pradesh arrested a terrorist linked to Bangladesh’s terrorist organization ‘Ansarullah Bangla Team’ from Muzaffarnagar district today (Sunday). ATS Inspector General Asim Arun told here that the squad has arrested a person named Abdullah al-Mamun, from the Kutsara area of ​​Muzaffarnagar district on charges of involvement in terrorist activities. In the initial inquiry, it has been found that he is associated with the Bangladesh-based terrorist organization ‘Ansarullah Bangla Team’. Ansarullah Bangla team is known as Tanjim inspired by the terrorist organization ‘Al-Qaeda’ formed by the notorious terrorist Osama bin Laden.

अरुण ने बताया कि बांग्लादेश के मोमिन शाही जिले के हुसनपुर गांव का रहने वाला अब्दुल्ला पिछले करीब एक महीने से मुजफ्फरनगर के कुटेसरा में रह रहा था. इससे पहले वह सहारनपुर जिले के देवबंद थाना क्षेत्र स्थित अम्बेहटा शेख इलाके में रह रहा था. वहीं पर उसने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपना पासपोर्ट बनवाया था. उसके कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट, चार मोहरें तथा 13 पहचान पत्र बरामद किये गये हैं!

Arun said that Abdullah, who was from Hussanpur village in Momin Shahi district of Bangladesh, had been living in Kutsasera of Muzaffarnagar for nearly a month. Earlier, he was living in Ambehata Sheikh area of ​​Deoband police station area of ​​Saharanpur district. At the same time, he made his passport on the basis of fake documents. Fake identity card, passport, four stamps and 13 identity cards have been recovered from his possession.

पुलिस के मुताबिक जो बांग्‍लादेशी आतंकी अगस्‍त में मुजफ्फरनगर में पकड़े गए थे, उनके पासपोर्ट सहारनपुर में ही बने थे. इसके चलते इस क्षेत्र के सभी पासपोर्ट धारकों का सत्‍यापन हो रहा है. अगस्‍त में यूपी एटीएस ने बांग्‍लादेशी नागरिक अब्‍दुल्‍ला अल-मामून को पकड़ा था. वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसारुल्‍ला बांग्‍ला टीम (एबीटी) का सदस्‍य था. वह मुजफ्फरनगर में पकड़े जाने से पहले देवबंद में कई सालों तक छिपा रहा. उसके पकड़े जाने के बाद से कई सहयोगियों को पकड़ा गया है!

According to the police, the Bangladeshi terrorists who were arrested in Muzaffarnagar in August, their passports were made in Saharanpur only. As a result, all passport holders in this area are being verified. In August, UP ATS had caught the Bangladeshi citizen Abdullah Al-Mamun. He was a member of the banned terrorist organization Ansarullah Bangla Team (ABT). He was hiding in Deoband for many years before being caught in Muzaffarnagar. Many collaborators have been arrested since his arrest.

महिलओं का आइब्रो बनवाना और बाल कटवाना नाजायज है, दारुल उलूम देवबंद का फतवा…
फतवा में स्पष्ट रूप से कहा गया है, ‘इस्लाम में आइब्रो बनवाना और बाल कटवाना धर्म के खिलाफ है. कोई महिला ऐसा करती है तो वह इस्लाम के नियमों का उल्लंघन कर रही है.’ इस फतवा को जारी करने के पीछे तर्क दिया गया है कि इस्लाम में महिलाओं पर 10 पाबंदियां लगाई गई हैं. उन्हीं में बाल काटना और आइब्रो बनवाना भी शामिल है. लंबे बाल महिलाओं की खूबसूरती का हिस्सा है. इस्लाम मजबूरी में बाल काटने की इजाजत देता है. बिना किसी मजबूरी के बाल कटवाना नाजायज है’!

Making eyebrows of women and cutting hair is unfair; Darul Uloom Deoband’s fatwa …
In Fatwa it is clearly stated that ‘making eyebrows in Islam and hair cutting is against religion. If a woman does this, then she is violating the rules of Islam. ‘ The reason behind issuing this fatwa is that there are 10 restrictions on women in Islam. She also includes cutting hair and eyebrow. Long hair is part of the beauty of women. Islam permits hair cutting in compulsion. It is unfair to cover the hair without any compulsion. ‘

मालूम हो कि दारुल उलूम देवबंद मुस्लिमों के लिए एक विशेष स्थान है. दारुल उलूम देवबंद का कहना है कि वह दुनिया में इस्लाम की मौलिकता को कायम रखने के लिए काम कर रही हैं. इस विचारधार से प्रभावित मुसलमानों को देवबंदी कहा जाता है. दारुल उलूम देवबंद की आधारशिला 30 मई 1866 में हाजी आबिद हुसैन व मौलाना क़ासिम नानौतवी ने रखी थी!

It is known that Darul Uloom Deoband is a special place for the Muslims. Darul Uloom Deoband says that he is working to maintain the originality of Islam in the world. The Muslims affected by this ideology are called Deobandi. The foundation stone of Darul Uloom Deoband was laid on 30 May 1866 by Haji Abid Hussain and Maulana Qasim Nanautvi.

अब्‍दुल्‍ला मामून की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर भगोड़े आतंकी फैजान अहमद के सहारनपुर ठिकानों पर छापे मारे गए. वहां पर आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट से जुड़ी सामग्री पाई गई. फैजान स्‍थानीय युवकों को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का काम करता है!

After the arrest of Abdullah Mamun, the raid was carried out on fugitive terrorist Fazan Ahmed’s Saharanpur bases on his trail. The contents of the terrorist organization Islamic State were found there. Faizan works to include local youth in terrorist activities.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब्‍दुल्‍ला की गिरफ्तारी के बाद तकरीबन 20 बांग्‍लादेशी पश्चिमी यूपी से लापता हो गए हैं. पुलिस को शक है कि इनके तार अब्‍दुल्‍ला और उसके आतंकी संगठन से जुड़े हैं. पुलिस को शक है कि नकली दस्‍तावेजों के आधार पर हो सकता है कि इनके पास भी भारतीय पासपोर्ट हों. इसकी जांच के लिए ही सत्‍यापन प्रक्रिया हो रही है!

According to police sources, after the arrest of Abdullah, about 20 Bangladeshis have disappeared from western UP. The police suspect that their ties are linked to Abdullah and his terrorist organization. The police suspect that on the basis of fake documents, they may also have Indian passport. Verification process is being done for its investigation.

source : zeenews.india.com

आँख होने पर भी कुछ दिखाई नहीं देता अक्ल के अंधो को, खुद देखिये ये सबूत !

चूँकि ताजमहल पर काफी चर्चा हो रही है इसलिए हम दैनिक भारत के पाठकों के सामने ताजमहल से जुडी कई चीजें रखना चाहते है, इन्हे आप ध्यान से पढ़िए, और आपके पास आँख और अक्ल दोनों होगी तो आपको किसी की सहायता की जरुरत नहीं पड़ेगी चीजों को समझने के लिए!

सबसे पहले आपको आगरा के बारे में बता दें की ये शहर का नाम अंग्रिया ऋषि के नाम पर पढ़ा था, अंग्रिया ऋषि इसी इलाके में रहते थे, और वो भगवान् शिव के भक्त थे, आज जहाँ पर ताजमहल है, वहां पर हज़ारों साल पहले अंग्रिया ऋषि ने शिवमंदिर बनाया था तेजोमहालय रखा था, और ये नाम क्यों रखा था वो भी जानिये

भगवान् शिव के शिवलिंग पर पूर्णिमा की रात को, या फिर उन रातों को जब चंद्र अच्छी रौशनी देता है, उसकी रौशनी शिवलिंग पर पड़ती थी तो सफ़ेद शिवलिंग रात को चमकता था इसलिए ऋषि ने इस शिवलिंग और मंदिर को तेजोमहालय का नाम दिया था, यानि वो महादेव जो की चंद्र की रौशनी में चमकते हैं, बता दें की चंद्र भगवा शिव के मस्तक पर भी विराजमान रहता है, इसलिए शिव और चंद्र में रिश्ता है!

यहाँ पर एक छोटा सा ही मंदिर था, जिसमे सफ़ेद शिवलिंग था, 15वी सदी में जयपुर के राजा जय सिंह इस मंदिर में आये थे, और उन्होंने इस मंदिर को भव्य बनाया और आज का जो ताजमहल है, उसे जयसिंह ने ही बनवाया, इसके प्रमाण हम आपको नीचे देंगे!

आपकी जानकारी के लिए बता दें की इतिहासकार आपको बताते है की, मुमताज बेगम मर गयी तो उसकी याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया, पर ताजमहल को बनाने में तो सालों लगे, तबतक क्या मुमताज की लाश हवा में थी ?

असल में मुमताज महल की मौत आगरा या दिल्ली में हुई ही नहीं थी बल्कि उसकी मौत मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हुई थी जहाँ आज भी बुरहानपुर किला मौजूद है जहाँ मुमताज महल रहा करती थी, मौत के बाद उसे वहीं दफनाया गया था, और आपको अब सबूत देते है की जब मुमताज महल जिन्दा थी तब भी ताजमहल था, क्यूंकि असल में ताजमहल तो 15वी सदी का ही बना हुआ है जिसे राजा जयसिंह ने बनवाया था, देखिये बुरहानपुर किले का वो कमरा जिसमे मुमताज महल की मौत हुई थी ये आज भी मौजूद है!

ये है वो कमरा जिसमे मुमताज महल अपने 14वे बच्चे को जन्म दे रही थी, और उसी दौरान प्रसव पीड़ा से उसकी मौत हुई थी, इसी कमरे में मुमताज महल मरी थी, इस कमरे में रंगीन पत्थरों से कई चीजों को बनाया गया है था, शाहजहां ने मुमताज के कहने पर इन चीजों को नक्काशी के जरिये बनवाया था क्यूंकि मुमताज महल को ये चीजें, नक्काशियां पसंद थी, अब देखिये इसी कमरे में नक्काशी में आपको कुछ नजर आएगा, ये आज भी मौजूद है!

इसी कमरे की दीवार पर ये नक्काशी आज भी मौजूद है, देखिये ये ताजमहल की ही तस्वीर है, जिसे रंगीन पत्थरों से मुमताज महल के कमरे में उसकी इक्षा के बाद बनाया गया था, यानि जब मुमताज जिन्दा थी तब भी ये ईमारत मौजदू थी, मैडम को ये ईमारत पसंद थी इसलिए उन्होंने इसकी पेंटिंग समझ लीजिये, नक्काशी अपने कमरे में बनवाया था!

तो यही पकड़ा जाता है वामपंथी इतिहासकारो का झूठ की ताजमहल को मुमताज की मौत के बाद बनवाया गया, असल में ये ईमारत तो पहले से ही आगरा में था, और मुमताज को ये पसंद था इसलिए बुरहानपुर मध्य प्रदेश में उसने अपने कमरे में इसे बनवाया भी था!

मुमताज मरी तो उसे बुरहानपुर में ही दफ़न कर दिया गया, पर बाद में शाहजहां को मुमताज के करीबियों ने बताया की मुमताज को ताजमहल पसंद था तो उसकी कब्र को 2 साल बाद बुरहानपुर में फिर खोदा गया और उसकी जर्जर हो चुकी लाश को ताजमहल में गाड़ दिया गया, ध्यान से पढ़ते रहिये अभी बहुत कुछ बाकि है!

भारत जब आज़ाद हुआ तो नेहरू ने डाक्टर पीएन ओके को ताजमहल के निरक्षण के लिए भेजा, और ओके साहब ताजमहल का निरक्षण करने लगे, और उन्होंने निरक्षण में जो पाया वो आपके होश उड़ाने के लिए काफी है, और ये चीजें आज भी मौजूद है, कभी आपको यकीन न हो तो आगरा जाकर अपनी आँखों से देख सकते है, ताजमहल के स्ट्रक्चर को देखिये, ये चित्र है!

ये जो 7 नंबर है, वहां यमुना नदी का पानी आता है, वहां पानी भरा रहता है, मकबरे में इसकी कोई जरुरत नहीं, मुगलों के किसी मकबरे में नीचे पानी आने के लिए नहीं बनाया गया, कब्र को गीला थोड़ी करना है, ये पानी बहती यमुना से इस भाग में आता है, प्रेशर बनता है, छोटी सी नली बनाई गयी है, उस प्रेशर से पानी ऊपर जाता है, और ऊपर कहाँ जाता है वो बाद में बतायेगे!

जो 6 नंबर है वो जमींन पर बना हुआ है, अगर आप आगरा जाएं तो आपको ये नजर आएंगी, इसको आप ताजमहल का ग्राउंड फ्लोर भी कह सकते है, इस ग्राउंड फ्लोर पर 21 अलग अलग कमरे है, जिनके दरवाजों को ईंट से सील कर दिया गया है, ये दरवाजे कुछ इस प्रकार दिखाई देते है, देखिये 1950 में ओके साहब ने ये तस्वीर खिंचवाई थी!

ये अलग अलग कमरे है, जिनके दरवाजों को ईंटों से सील कर दिया गया है, जय सिंह ने जब 15 सदी में इस मंदिर को बनाया था, तब उसने हज़ारों की सख्या में मंदिर में यानि तेजोमहायल में हिन्दू देवी देवताओं, घोड़े, बैल इत्यादि की मूर्तियां लगवाई थी, इन बंद कमरों में वही मूर्तियां है, मंदिर को शाहजहां ने मकबरे का स्वरुप दिया और मूर्तियों को तोड़कर यहाँ वहां फेंका कुछ मूर्तियों को कमरों में बंद कर दिया, जैसे स्टोर रूम में हम चीजों को फेंक देते है वैसे ही, पोल न खुल जाये इसलिए इन कमरों को ईंट से सील कर दिया गया

ताजमहल में एक तलघर भी है, जिसमे 1950 में ओके साहब घुसे थे और उन्होंने 1950 में ये तस्वीर खींची थी

अब पैरों के चिन्ह कहाँ पर होते है, इस्लामिक इमारतों में या फिर हिन्दू मंदिरों में ये आपको बताने की जरुरत तो शायद नहीं होनी चाहिए, जय सिंह ने तेजोमहालय को बनाते हुए उसी अंग्रिया ऋषि के पैरों के चिन्ह मंदिर में बनवाये थे, जिन्होंने यहाँ अपने हाथों से ओरिजिनल शिव लिंग स्थापित किया था, मंदिर जर्जर स्तिथि में था तो जय सिंह ने उसे ठीक किया और भव्य तेजोमहालय बनवाया, आगे भी देखिये

तलघर में ही कमल के फूल के बीचों बीच ॐ बनाया हुआ है, ऐसा कमल का फूल और ॐ मकबरे में होता है या मंदिर में ये भी शायद आपको बताने की जरुरत नहीं है, अब आपको एक बड़ी चीज दिखाते है

पहली तस्वीर 1950 की है, दूसरी रंगीन तस्वीर हाल ही की है, ये कबर पर आपको लटकी हुई चीज दिखाई दे रही है, बिलकुल कलश जैसी है न, क्या कबर ऊपर कलश लटकाया जाता है ?, कलश कहाँ लटकाया जाता है वो देखिये

किसी भी कब्र पर लक्ष्य नहीं लटकाया जाता, आपको कहीं भी कब्र पर कलश लटका हुआ नहीं मिलेगा कलश लटकाया जाता है, कलश को शिवलिंग पर लटकाया जाता है, ताकि उस से पानी बूँद बूँद करके गिरे या फिर दूध या ऐसा ही कोई तरल, लिक्विड

अब आपको ध्यान होगा हमने ऊपर ताजमहल का स्ट्रक्चर दिखाया था, जिसमे 7 नंबर में यमुना का पानी ताजमहल के नीचे आता था, जय सिंह के शिल्पकारों ने अच्छी इंजीनियरिंग की थी, शिवलिंग पर आटोमेटिक पानी गिरे, इसलिए उन्होंने 7 नंबर बनाया था यानि मंदिर के नीचे का स्थान जहाँ यमुना का बहता हुआ पानी आये और प्रेशर बने तो पानी ऊपर तक आये और इस कलश तक नली बनी हुई है, कलश के नीचे शिवलिंग था, वहां वो यमुना का पानी टप टप करता हुआ गिरे और भगवान् शिव को दिन रात यमुना का पानी चढ़ता रहे, पर जहाँ शिवलिंग था वहां शाहजहां ने कब्र बनवा दिया, शिवलिंग को तोड़कर फेंक दिया गया, और देखिये, ये तस्वीर हाल ही की है, पहले भी ऐसा ही था आज भी ऐसा ही है

ताजमहल के बिलकुल ऊपर ये लगा हुआ है, आप कलश देख सकते है, साथ ही त्रिशूल भी देख सकते है, ये हिन्दू मंदिर में लगता है, दुनिया के किसी मकबरे में ऐसा नहीं लगा और न ही लगाया जाता है, चूँकि यहाँ ऋषि द्वारा बनाया हुआ शिवलिंग था, राजा जय सिंह ने उसे शिव मंदिर ही बनाया था, ऋषि के पैरों के चिन्ह भी सांकेतिक तौर पर बनाये थे, दीपावली पर हम भी लक्ष्मी माता के पैरों के चिन्ह अपने घरों में बना ही देते है ये पुरानी परंपरा है

ताजमहल का निर्माण जय सिंह ने मुमताज महल के जन्म से पहले ही करवाया था, उसे ये ईमारत बहुत पसंद थी इसलिए मुमताज ने इसकी नक्काशी या पेंटिंग भी कह सकते है वो अपने मध्य प्रदेश के बुरहानपुर किले के कमरे में बनवाया था जहाँ वो रहती थी

मुमताज मर गयी तो उसकी लाश को वहीँ दफ़न किया गया, बाद में 2 साल बाद लाश को शाहजहां आगरा के तेजोमहालय ले आया, मंदिर को उसने मकबरे की शक्ल दे दी, और शिवलिंग तथा अन्य हिन्दू मूर्तियों को तोड़कर यहाँ वहां फेंक दिया, 21 कमरों में भी बहुत सी मूर्तियां पड़ी है जो इस ईमारत के ग्राउंड फ्लोर पर है

1950 में ओक साहब ये सारी जानकारियां लेकर प्रधानमंत्री नेहरू के पास दिल्ली में भी पहुंचे थे और 21 कमरों को खोलने की इज़ाज़त मांगी थी, नेहरू ने ओके साहब को डांटकर वहां से भगा दिया कहा की दंगे हो जायेगे, उसके बाद से आजतक किसी सरकार ने ये कमरे खुलवाए ही नहीं

शाहजहां ने बहुत कोशिश की पर ताजमहल से वो हिन्दू मंदिर होने के सारे सबूत नहीं मिटा पाए, उसने हालाँकि ताजमहल में छोटे मोठे चेंज भी करवाए ताकि ये मकबरे जैसा दिखाई दे, उसने अरबी और अन्य भाषाओँ में ताजमहल की दीवारों पर न जाने क्या क्या गुदवाया, ताकि ये मकबरा ही लगे, ताजमहल एक हिन्दू मंदिर है, इसका शिवलिंग ऋषि ने स्थापित किया था, तेजोमहालय नाम दिया था क्यूंकि शिवलिंग पर चंद्र का तेज पड़ता था तो वो चमकता था, 15वी सदी में जयपुर के राजा ने जर्जर मंदिर को भव्य स्वरुप दिया!

यह भी देखें!

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : hindpress.in

यह हैं लद्दाख की प्राचीन वैदिक आर्य जनजाति जिन्होंने हजारों सालों के उपरांत भी कायम रखी है अपनी पहचान !

गार्खुन (लद्दाख) : हिमालय की कंदराओं में अनेकों मोती एवं रत्न बिखरे हुए हैं, जिनकी खोज के लिये हजारों सालों से श्रद्धालु जाते रहे हैं। यहां के वातावरण में एक चुंबकीय आकर्षण है जो स्मृति पटल पर हमेशा के लिये अंकित हो जाता है और बार-बार यहां आने के लिये प्रेरित करता है।

Garkhun (Ladakh): There are many pearls and gems scattered in the Kalias of the Himalayas, who have been visiting devotees for thousands of years for their discovery. Here is a magnetic attraction in the atmosphere which gets marked on the memory plate forever and inspires to come here again and again.

हिमालय की देवभूमि, तपोभूमि ऋषि एवं मुनियों के लिये साधना स्थल तो रहा ही हमारे देश के प्राचीनतम संस्कृति के चिह्न भी यहां देखे जा सकते है। हमारी संस्कृति एक जीवित संस्कृति है लेकिन यदाकदा बाहरी आक्रमणों से ये दूषित भी रही और इसके दुष्प्रभाव हमारी भाषा, हमारी संस्कृति और हमारे व्यवहार में भी देखने को मिलते हैं। एक समय था जब पूर भारतवर्ष में संस्कृत बोलचाल एवं व्यवहार की भाषा थी लेकिन अब ये कुछ विद्वानों तक ही सीमित रह गयी है लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि संस्कृत के शब्दों का प्रयोग एवं प्रभाव पूरे भारतवर्ष की भाषाओं में मिलता ही है और हिमालय की कंदराओं में अभी भी आर्य जनजातियां हैं जिन्होंने प्राचीन आर्यव्रत को अब भी अपने संस्कारों में संजोया हुआ है।

There is also a place of worship for the Goddess of the Himalayas, Tapo Bhumi Sage and Muni, and the signs of the ancient culture of our country can also be seen here. Our culture is a living culture, but it has also been contaminated by external attacks and its adverse effects are also seen in our language, our culture and our behavior. There was a time when the whole of India was the language of Sanskrit speaking and behavior in the whole of India but now it has remained confined to some scholars but you will be surprised that the words and usage of Sanskrit words are found in the languages ​​of entire India and in the Himalaya Kandraas There are still Arya tribes which ancient Aryavrata is still preserved in its sacraments.

लेह और कारगिल के बीच में सिंधु नदी के दोनों किनारों पर बुहत सारे गांव है जिनमें मुख्यतः दा, हनों, दरचिक और गार्खुन हैं जो आर्य गांव कहलाये जाते हैं और पूरे विश्व में आर्य प्रदेश के नाम से विख्यात हैं। यहां के लोगों को जिनमें पुरूष व महिलायें दोनों हैं जिनको फूलों से बहुत अधिक प्यार रहता है जो अपने शिश को फूलों से श्रृंगार करते हैं। इस आर्य घाटी में कुछ फूल ऐसे पाये हैं जो सालभर मुरझाते नहीं। यहां पर पाये जाने वाले केसरी रंग का फूल तोड़ने के बाद सालों साल ताजा रहता है। यहां के लोगों के अनुसार ये फूल दस-बारह साल तक तोड़ने के बाद भी तरो-ताजा रहता है। फूल सज्जा के साथ-साथ यहां के वासी रजत आभूषणों से सुशोभित रहते हैं। यहां के वासियों को दर्द जनजाति में शामिल किया गया है।

Between Leh and Kargil, on both sides of the river Indus, there are many villages, which are mainly Da, Han, Darchik and Garkhun, which are known as Arya villages and are known all over the world as the name of the Arya region. People here are both men and women who love a lot of flowers, who make their shirt beautiful with flowers. There are some flowers found in this Arya valley that do not fade over the years. The Kesari color found here is fresh year after year after breaking the flower. According to the people here, this flower remains fresh and fresh even after breaking for ten to twelve years. Along with flower decoration, the residents reside here with ornaments. The people here are included in the pain tribe.

दर्द जनजाति एलओसी के दोनों तरफ बसे हुए है। विभाजन के समय जो गांव एलओसी के दूसरी तरफ रह गये उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है और इसके साथ ही उन्होंने प्राचीन धार्मिक मान्यताऐं खत्म कर दीं। जिन आर्य गांवों का उल्लेख हमने उपर किया है उनमें मुख्यतः दा, हनो, दरचिक और गारभंग, बेमा गांव हैं। ये हजारों वर्षों की प्राचीन मान्यताऐं अब भी संजोये हुए हैं जो इनके दिनचर्या, व्यवहार व इनके पर्वों में देखने को मिलती हैं। कारगिल के बटालिक क्षेत्र के गांव में भी दर्द जनजाति के लोग बसे हैं लेकिन उन्होंने पुरानी संस्कृति छोड़ दी है उसका मुख्य कारण मुस्लिम धर्म परिवर्तन है।

The tribal tribe has settled on both sides of the LoC. Those who remained on the other side of the LOC at the time of partition, have accepted the religion of Islam and at the same time they ended the ancient religious beliefs. The Arya villages which we have mentioned above are mainly Da, Hano, Darchik and Garbhanga, Bema village. These thousands of years of ancient beliefs are still conserved, which can be seen in their routine, behavior and their festivals. In the village of the Batalik region of Kargil, the people of the tribal settlement have settled but they have abandoned the old culture, the main reason behind this is Muslim conversion.

बटालिक के मुस्लिम गांव में नाच-गाना एवं संगीत नहीं होता है जबकि आर्य बौद्ध गांव में त्योहारों पर पारंपरिक नृत्य एवं संगीत एक नई शोभा एवं उमंग पैदा करता है। दर्द आर्य बौद्ध गांव की हम चर्चा करें तो ये 180-85 साल पहले बौद्ध धर्म का अनुकरण करने लगे लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने पारंपरिक वेश-भूषा पर्व त्योहार एवं मान्यताऐं भी रखीं जो अब भी सजीव हैं एवं आकर्षण का केंद्र हैं। इन गांवों के साथ लगे मुस्लिम दर्द गांव पुराने रीति रिवाज एव मान्यताओं से दूर चले गये हैं और इनके यहां कोई उत्सव देखने को नहीं मिलता। आर्य बौद्ध गांव में अभी भी प्राचीन पर्व सालभर मनायें जाते है जिनमें आस-पास के मुस्लिम गांव के लोग भी शामिल होते हैं। मुस्लिम गांव की भाषा में अब अरबी और फारसी शब्द बहुत तादाद में पाये जाने लगे हैं। उनकी भाषाओं का मूल स्वरूप बिगड़ने लगा है। इसका प्रमख कारण अपनी संस्कृति से कटना और कहीं न कहीं अपनी पहचान खो देना। आर्य दर्द गांवों का इतिहास अगर हम देखें तो ये इतिहास वैदिक काल काल से मिलता है। वैदिक समय जहां मुख्यतः संस्कृत भाषा का ही प्रचलन था और यहां की दर्द भाषा में भी पचास प्रतिशत से ज्यादा शब्द संस्कृत के अभी भी प्रचलन में हैं।

In the Muslim village of Batalik there is no dance and music, whereas in Arya Buddhist village, traditional dance and music on festivals produces a new beauty and embarrassment. When we discussed the Arya Buddhist village, they began to imitate Buddhism 180-85 years ago, but along with it, they also kept traditional Vesha-Bhausa festival and festivals which are still alive and are the center of attraction. The Muslim Pain Village, which has been engaged with these villages, has gone away from the old customs and beliefs, and they do not have any celebration here. Even in the Arya Buddhist village, ancient festivals are celebrated throughout the year, in which people from nearby Muslim villages are also involved. Arabic and Persian words are now being found in the language of Muslim villages. The basic form of their languages ​​has started to deteriorate. Its prime reason to cut off its culture and lose your identity somewhere. If we see history of Arya Pain villages, then this history meets the Vedic period. The Vedic period was mainly the practice of Sanskrit language and here in the pain language, more than fifty percent of the words are still in Sanskrit.

वैदिक देवताओं की बात करें तो देवता इंद्र जिनकों यहां के निवासी येनद्रन नाम से पूजते हैं। जो यहां के प्रमुख देवता हैं और जिनकी पूजा-अर्चना समय-समय पर खेती की खुशहाली के लिये की जाती है। इसके साथ-साथ नारायण भी सबसे बडा देवता है जो सबसे बड़ा पालनहार है। उसका आवाहन हर शुभ काम पर किया जाता है और उसके लिये यदाकदा अनुष्ठान भी किया जाता है। हर घर में अग्नि के देवता की पूजा भी होती है जिसका प्रमुख स्थान चूल्हे के पास रहता है और पहला भोग उसी को चढ़ाया जाता है। कुछ गांवों तक ही सीमित ये प्राचीन आर्य जनजाति जिन्होंने हजारों सालों के उपरांत भी अपनी पहचान कायम रखी है, लेकिन ये पहचान कब तक? जबकि आंतरिक एवं बाहरी प्रभाव से ये गांव भी अछूता नहीं है। जिनके शिश फूलों से संजाये रहते हैं ये कब तक हमें देखने को मिलेंगे ये कोई नहीं जानता।

Speaking of Vedic deities, Devta Indra, who reside here, is worshiped by Yindran. Which are the chief deities here and whose worship is from time to time for the betterment of farming. Along with this, Narayana is also the largest God who is the biggest worshiper. His appeal is done on every auspicious thing and for him it is also done rituals. Every home also has the worship of the God of fire, whose main place is near the stove and the first one is sacrificed to it. These ancient Aryan tribes, limited to some villages, have maintained their identity even after thousands of years, but how long will this identity be? However, this village is also not insulated with internal and external impact. No one knows how long they will get to see us.

बदलाव एक निरंतर क्रिया है, एक नदी के समान है जो निरंतर बहती रहती है। लेकिन एक संस्कृति नदी के तटों के समान है जो दृढ़ता से खड़ी रहती है। यहां के संस्कृति के उत्थान की बात करें तो राजकीय स्तर पर नहीं के बराबर कार्य हुआ है। यहां के क्षेत्र भी विकास से कोसों दूर है। यहां के गांव तक सड़क पहुंचाने का काम हाल में ही पूरा हुआ है और जितना भी कार्य हुआ है वो कार्य कारगिल युद्ध के बाद हुआ है। कारगिल युद्ध के बाद इस पूरे सीमावर्ती क्षेत्र को प्राथमिकता दी गयी। इस क्षेत्र में एक संग्रहालय खुलने से नई पहचान मिल गयी है। ये संग्रहालय गारखुन गांव में अक्टूबर में खुला जिसमें प्राचीन भवन के साथ-साथ पुरानी चीजें भी संजोकर रखी गयी हैं। हिमालयन म्यूजियम आॅफ लबदक कल्चर एंड ट्रेडिशन के नाम से इस संग्रहालय का उद्घाटन किया गया। जिसकी रूपरेखा विरेंद्र बांगरू जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सह प्राचार्य हैं ने तैयार की। इसके साथ-साथ लंदुप ताशी और यहां के गांववासियों ने बढ़ चढ़कर सहयोग दिया। इस संग्रहालय का उद्घाटना बोनाना उत्सव के दौरान किया गया। जो एक वार्षिक उत्सव है। इस उत्सव में देवताओं को पूजा जाता है एवं न्त्य एवं संगीत का आयोजन हर दिन होता है।

Change is a continuous action, similar to a river that keeps on flowing continuously. But a culture is like the banks of the river, which stands firmly. Talk about the upliftment of the culture here and there is no work at the state level. The areas here are also far from the development. The road to reach the village is completed in the recent past and the work that has taken place has happened after the Kargil war. This entire border area was given priority after the Kargil war. Opening a museum in this area has given new recognition. This museum is open in October at Garkhun village in which the old building along with the old things has been preserved. This museum was inaugurated by the name of the Himalayan Museum of Liberal Culture and Tradition. Whose framework is prepared by Virendra Bangru, who is the co-principal in the Indira Gandhi National Arts Center. Along with this, Lundup Tashi and the people of this village helped to increase their support. The museum was inaugurated during the Bonana festival. Which is an annual festival. In this festival, the deities are worshiped and dance and music are organized every day.

जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में पुरूष एवं महिलाऐं नृत्य करती हैं। इस उत्सव के दौरान लोग पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और अतिथियों का सत्कार खूबानी और इसकी गिरी से किया जाता है। साथ में पारंपरिक छंग, स्थानीय मदिरा भी परोसी जाती है। यहां के आर्य गांव पर प्रकृति की एक अलग ही छटा देखने को मिलती है। स्वशीतल जल की छोटी-छोटी नदियां गाव में प्रवाहित होती हैं और खेतों में विभिन्न प्रकार के फूल जिनमें खुभानी, सेब, अंगूर इत्यादि हैं। ये पूरा क्षेत्र वनस्पति संपदा से समृद्ध है। और यहां की प्राचीन संस्कृति से इसमें और भी चार चांद लग जाते हैं। विरेंद्र बांगरू के अनुसार यहां की प्राचीन संस्कृति में वैदिक काल की झलक मिलती है। यहां के गीतों में पूरे वेद समाये हुए हैं। संग्रहालय बनने से यहां के लोगों में एक नया उत्साह जागा है और उनका अपनी संस्कृति के प्रति गौरव बढ़ा है। अपने ही चीजों को संग्रहालय में देखकर के यहां के लोगों को अपने संस्कृति के बारे में और सम्मान बढ़ा है। आने वाले दिनों में ये संग्रहालय एक सांस्कृतिक केंद्र बनकर पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा।

In which the men and women dance in traditional costumes. During this festival people make traditional dishes and guests are hailed by apricot and its kernel. Along with traditional cloth, local wines are also served. Arya village has a different shade of nature. The small rivers of autonomous water flow in the village and there are various types of flowers in the fields, which include khobhani, apple, grapes etc. This entire area is rich in vegetable estates. And here’s the ancient culture, there are four more moons in it. According to Virendra Bangru, the ancient culture gets a glimpse of the Vedic period. The songs of the entire Vedas are contained here. The museum has created a new enthusiasm among the people here and has enhanced their pride towards their culture. Seeing their own things in the museum, people here have increased their respect for their culture. In the coming days, this museum will also attract tourists as a cultural center.

हिमालय के रत्नों की खोज में आर्य गांव का ये रत्न भारतवर्ष के मुकुट पर सुशोभित हैं। हम सबका ये दायित्व होना चाहिये कि हम हिमालय क्षेत्र के गांवों को सम्मानपूर्वक स्थान दें और यहां के विकास में भी यदाकदा सहयोग करें। एक पर्यटक के नाते भी हम इन क्षेत्रों में जाकर के विभिन्न सांस्कृतिक एवं विकास के कार्यों में सहयोग दे सकते हैं और यहां की संस्कृति का संदेश पूरे भारत में फैला सकते हैं।

In search of the gems of the Himalayas, these gems of Arya village are decorated on the crown of India. We should all have this obligation to give respect to the villages in the Himalayan region and to cooperate in this area. As a tourist we can also go to these areas to help in various cultural and developmental activities and spread the message of culture here in the whole of India.

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VIDEO: कुरान की आयत का मतलब पूंछने पर मौलाना ने दी मुस्लिम महिला एंकर को गलियां |

मुफ्ती ने एंकर और पैनल में मौजूद मुस्लिम महिला को बेशर्म और बेहया कहा, इसके बाद उन्हें स्टूडिया से निकाल दिया गया। ये तमाचा है उन सेक्युलर हिन्दुओं पर जो खुलकर मस्जिद और मंजारों पर जाकर माथा टेकते हैं.बिहार में नई सरकार बनने के साथ ही नया विवाद जुड़ गया है. बिहार सरकार में गन्ना एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद जय श्री राम का नारा लगाने के बाद माफी मांग ली है |

Mufti said that the anchor and the Muslim woman in the panel were shameless and unsound, after which they were fired from the studio. These slogans are those secular Hindus who freely go to the mosque and the shrines and go to the top of the head. With the formation of a new government in Bihar, a new dispute has been added. In Bihar government, sugarcane and minority welfare minister Khurshid alias Firuz Ahmed has apologized after the slogan of Jai Shri Ram.

 

मुस्लिम मौलानाओं ने उन्हें माफ़ी मांगने पर मजबूर किया.एक मुफ्ती द्वारा उनके खिलाफ फतवा जारी किए जाने पर उन्होंने सामने आकर माफी मांग ली. खुर्शीद ने आज कहा कि अगर उनके किसी भी व्यक्त्व से किसी को तकलीफ पहुंची है, तो उसके लिए वे माफी मांगते हैं |

Muslim maulanas forced them to apologize. When a Mufti issued a fatwa against them, they came forward and apologized. Khurshid said today that if anyone has hurt anyone from his person, then they apologize for him.

इस मुद्दे पर कई चैनलों पर बहस भी हुई ऐसे ही एक चैनल में टीवी एंकर रुबिका लियाकत और मुफ्ती एजाज अरशद कासमी के बीच बेहद तल्क बहस हो गई. बहस में शामिल अंबर जैदी को एआईएमआईएम के तरफ से शामिल प्रवक्ता ने अपशब्द कहे इसके जवाब में रुबिका ने ये कह दिया कि ये मदरसा नहीं है. इतना कहते हैं मुफ्ती बढ़क गए और रुबिका और अंबर पर जमकर व्यक्तिगत् हमले किए |

There were debates on this issue on many channels; In such a channel, there was a lot of debate between TV anchor Rubika Liyaqat and Mufti Ejaz Arshad Kasami. In response to this, Amber Zaidi, who was involved in the debate, said that the spokesman involved in AIMIM said that she is not a madrasa. It is said that Mufti grew and attacked Rabika and Amber fiercely.

दोनों को अपशब्द कहे. रुबिका के वंदे मारतम गाने और जय श्री राम बोलने पर ताने मारे गए. मुफ्ती ने एंकर के महिला होने का भी लिहाज नहीं किया उन्हें बेहया बताया, संघ का तोता बोला.रुबिका के वंदे मातरम बोलने पर एतराज जताने पर भी रुबिका ने जोर देकर कहा कि कहूंगी वंदे मातरम |

Saying offensive to both Rabika’s Vande Mataram songs and Jai Shree Ram were stabbed to death. Mufti did not even consider being an anchor woman, she told him a bad thing, said the parrot of the Sangh. Rabika also insisted on expressing her objection on speaking Verma Mataram, saying that Vande Mataram will do it.

देख लो आँखे खोलकर सेक्युलर हिन्दुओं इन्हें जय श्री राम बोलने से भी तकलीफ है और हम लोग इनकी मस्जिदों में जाते है.सबसे बड़ा सवाल हम क्यों इनकी अज़ान सुने जब ये जय श्री राम तक नहीं सुन सकते!

Seeing the eyes, Secular Hindus also suffer from speaking Jai Shri Ram and we go to their mosques. The biggest question is why we can listen to them when they can not hear Jai Shri Ram!

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बड़ा खुलासा- अहमद पटेल का हुआ पर्दाफाश, जांच में इन बड़े नेताओं का नाम आया सामने !

नामोभारत ने सबसे पहले अपने पाठको को बताया था की गुजरात में जो 2 ISIS के आतंकी पकडे गए है उनमे से एक के तार कांग्रेस नेता अहमद पटेल से जुड़े हुए है, नामोभारत के बाद अन्य पोर्ट्सल और फिर टीवी वाली मीडिया ने भी ये खबर दिखाना शुरू कर दिया|

Namobharat had first told his readers that one of the two ISIS terrorists in Gujarat has been linked to Congress leader Ahmed Patel, after Nomination, other portals and then TV-based media also started showing this news. Done

अहमद पटेल सिर्फ उस अस्पताल का ट्रस्टी ही नहीं बल्कि उसका संस्थापक भी था, ये अहमद पटेल का ही अस्पताल है, 2014 में ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया, पर मालिकाना हक अहमद पटेल का ही है, 2016 में वो इस अस्पताल के एक कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी लाया था |

Ahmed Patel was not only the trustee of that hospital but also the founder of it, it is Ahmad Patel’s hospital, resigned from the trustee post in 2014, but belongs to the owner of Ahmed Patel, in 2016 in a hospital program, President Pranab Mukherjee was also brought.

अहमद पटेल के अस्पताल से ISIS का आतंकवादी निकला है, पर कांग्रेस का कहना है की अहमद पटेल और कांग्रेस का इस से कुछ लेना देना नहीं है, इतनी बड़ी खबर के बाद भी सी.पी.एम. और आम आदमी पार्टी ने चुप्पी साध रखी है, इनका सोशल मीडिया आईटी सेल भी एकदम चुप है, और इसी चुप्पी पर भारतीय सेना के पूर्व मेजर ने सवाल पूछा है |

ISIS has emerged as a terrorist from Ahmed Patel’s hospital, but the Congress says that Ahmed Patel and the Congress have nothing to do with it, even after such a big news, CPM And the Aam Aadmi Party has kept quiet, their social media IT cell is also quite silent, and on this silence the former Major of the Indian Army has asked the question.

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जिस अस्पताल का कर्मचारी ISIS का आतंकी निकला है उस अस्पताल अहमद पटेल का है जो गुजरात में मुख्यमंत्री पद का भी कांग्रेस दावेदार है, पर इतनी बड़ी खबर पर आम आदमी पार्टी और सी.पी.एम. और अन्य सेक्युलर दल बिलकुल चुप है|

Hospital hospital employee ISIS is out of the hospital Ahmed Patel, who is also a Congress contender for the Chief Minister in Gujarat, but on such a big news, the Aam Aadmi Party and the CPM. And other secular parties are absolutely silent.

अगर अहमद पटेल की जगह इस अस्पताल से मोदी या अमित शाह जुड़े होते, या इस अस्पताल के ट्रस्टी में कोई बीजेपी का नेता होता, तो क्या आम आदमी पार्टी सी.पी.एम. और अन्य सेक्युलर और वामपंथी इसी प्रकार चुप रहते ?

Had Ahmed or Amit Shah been associated with this hospital instead of Ahmed Patel, or if there was a BJP leader in the trustee of this hospital, would the Aam Aadmi Party CPM? And other secular and leftists remain silent in the same way?

ये तो अहमद पटेल का नाम आया इसलिए सभी सेक्युलर तत्व खामोश है, बीजेपी के किसी नेता या संघ के किसी नेता का नाम आता तो हिन्दू आतंकवाद का राग सभी सेक्युलर अलापने लगते |

It was Ahmad Patel’s name that all the secular elements are silent; the name of any leader of BJP or any leader of the Sangh, the name of the Hindu terrorism, all the secular alarms begin.

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पिछली सरकार की करतूतों को देख गुस्से से भभक उठे CM योगी आदित्यनाथ, अखिलेश की हालत ख़राब !

यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही उन्होंने अपने कड़े तेवर और बेबाक रवैया दिखाना शुरू कर दिया था. लेकिन सिर्फ शुरुआती दिनों में ही नहीं वही तेवर आज भी वो उसी हिम्मत और जोश से दिखा रहे हैं | लेकिन इस बार तो सीएम योगी ने अपने ही सरकारी विभाग के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन ले लिया |

As soon as Yogi became the governor of Adityanath in UP, he started showing his strong and uncomfortable attitude. But not only in the early days, they are showing the same courage and enthusiasm even today. But this time the CM Yogi took a swift action against his own government department.

अभी मिल रही बहुत बड़ी खबर के मुताबिक अखिलेश सरकार सीएम योगी को विरासत में सिर्फ मुसीबतें दे गए हैं | अखिलेश सरकार में सरकारी विभाग को इतना ज़्यादा लचर और लापरवाह बना के रख दिया है कि आप भी हैरान रह जायेंगे | खबर के मुताबिक सीएम योगी ने लखनऊ में सरकारी विभागों की ओर से कई महीनों से बिजली का बकाया बिल नहीं जमा करने पर उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं | इन सरकार विभागों के अंदर आरामतलवी और अड़ियलपन इतना ज़्यादा घुस गया है कि इन सरकारी विभागों ने कई महीनों से बिजली के बिल की भुगतान नहीं किया था |

According to the very big news now available, the Akhilesh government has given only trouble to the CM Yogi in heritage. In the Akhilesh government, the government department has been kept so lenient and careless that you will be surprised. According to the news, the CM Yogi has been disconnected from the government departments in Lucknow for not getting the electricity bill for several months. Relaxation and hardship have penetrated so much within these government departments that these government departments did not pay electricity bills for several months.

Akhilesh Yadav has given the legacy to the Yogi Government, Power Corporation Department of UP, which is badly defused. Because only government departments have outstanding electricity bill of about 10,000 crores. Due to this, electricity rates have to be expensive in the state, if the government departments recover from the arrears, electricity rates in the state will never be expensive. See what Akhilesh has given to the Yogi Sarkar in the heritage, you see the difference yourself, the UP number one in the government dues. Uttar Pradesh 8853 crores, Telangana- 3561 crores, Maharashtra- 3364 crores, Andhra Pradesh 2828 crores, Kerala 2609 crores, Jammu and Kashmir 1868 crores, Karnataka 1880 crores, Bihar Rs 610 crores. You can see the difference between the difference between UP and Jammu and Kashmir. Such government was running SP for 5 years.

समाज कल्याण विभाग कर रहा था अपना ही कल्याण लेकिन फिलहाल जिन दो विभागों पर योगी सरकार ने बिजली के कनेक्शन काटे गए है वो है फोरेंसिक लैब और समाज कल्याण का होस्टल शामिल है | बताया जा रहा है कि फोरेंसिक विभाग पर लगभग 16 लाख, जबकि समाज कल्याण के होस्टल पर करीब 26 लाख रुपये का बिल बकाया है | बताइये ये समाज का कल्याण करेंगे 26 लाख का बिल दबाये बैठे हैं, खुद अनुशासन है नहीं समाज में क्या अनुशासन लाएंगे | ऐसा लगता है ये समाज का कम, अपना ज़्यादा कल्याण करने में लगे थे |

The social welfare department was doing its own welfare, but the two departments on the Yogi Government have cut the connection of electricity, it is the forensic lab and hostel of social welfare. It is being told that about 16 lakhs have been given on forensic department, while the society welfare has a balance of about 26 lakh rupees. Let us say that the welfare of the society will pressurize the bill of 26 lakhs, discipline itself and not what will bring discipline in society. It seems that they were less in society, engaged in better welfare.

अब सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि अगर 10 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का बिल नहीं दिया गया तो ये पैसा गया कहाँ, किस-किस की जेब गरम हो रही थी अब तक? और अड़ियलपन की हद देखिये साहब बिजली विभाग ने कई बार नोटिस भी भेजना शुरू किया फिर भी कान पर जू तक नहीं रेंगी | लिहाजा बिजली विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते इनके कनेक्शन काट दिए | इससे सभी सरकारी विभागों को सन्देश जाएगा कि उनके अब ऐशोआराम के दिन गए, अब ज़रा सख्ती से पेश आने वाली सरकार आ गयी है |

 

Now the biggest question arises that if more than 10 thousand crores of rupees were not billed then this money went where, what was the pocket of the pocket being so far? And see the extent of hardship, the Hon’ble Electricity Department has started sending the notice many times, but the ear will not live up to the zoo. So the electric department took strong action and cut off their connections. It will send a message to all the government departments that they have gone on the day of Ashoka, now the government has come to the strictest level.

आगे से ऐसी समस्या न कभी खड़ी ना हो, इसका भी समाधान योगी सरकार ने ग़ज़ब का निकाला है, जीएम लेसा आशुतोष कुमार ने बताया कि सभी सरकारी विभागों को सख्त निर्देश दे दिए गए है कि सबसे पहले अपने बकाया बिल चुकाएं, और उसके बाद अपने यहां प्री-पेड मीटर लगवा ले. ठीक मोबाइल फ़ोन की तरह रिचार्ज करिये फोन पर बात करिये, ठीक वैसे ही बिजली मीटर को रिचार्ज करिये, और बिजली पाइये | जैसा राजा वैसी प्रजा इससे पहले आपको याद होगा जब कभी अखिलेश सरकार पत्रकारों से वार्ता करते वक़्त या कभी मीटिंग कर रही होती थी तब बिजली कट जाया करती थी, जिससे वे अँधेरे में बैठ कर मीटिंग करते थे और फिर बिजली आ जाया करती थी |

Further, such a problem should not arise at any time, even the solution of the Yogi Government is unfortunate, GM Lisa Ashutosh Kumar told that all government departments have been given strict instructions that first of all pay their outstanding bills, and after that their Take a pre-paid meter here. Recharge the phone like a mobile phone, talk on the phone, just recharge the power meter, and get electricity. As King Vaishi Praja, before you remember, whenever Akhilesh was talking to journalists or at the time of meeting, he used to cut electricity, so that he used to sit in the darkness and then used to come to power.

जिसका लोग खूब मज़ाक उड़ाया करते थे, लेकिन फिर भी अखिलेश कोई एक्शन नहीं ले पाए, यानि उन्हें सब पता था फिर भी जानबूझ कर एक्शन नहीं लिया गया | लेकिन कुछ वक़्त पहले खबर आयी थी की सपा पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के घर का ही बिजली कनेक्शन कटवा दिया गया था | क्यूंकि उन्होंने भी कई महीनों से बिल नहीं दिया था | अब वो कहावत है न जैसा राजा वैसी प्रजा  जैसा पार्टी प्रमुख वैसे सरकारी विभाग भी बिना बिजली बिल चुकाए मौज काट रहे थे |

Whose people used to make fun of him, but still Akhilesh could not take any action, that is, he knew everything, but no action was taken intentionally. But for the time being, the first news came that the power connection of SP chief Mulayam Singh Yadav’s house was cut. Because he had not even billed for several months. Now that is the saying, like the party chief like Raja Vasi Pradhan, the government departments were also spending money without paying electricity bills.

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गुजरात चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस ने खेला बड़ा दाव कहा हमे कश्मीर को आजाद कर देना चाहिए |

कल सोनिया गाँधी के सबसे करीबी नेता अहमद पटेल के ISIS आतंकी से तार जुड़े और आज पूर्व गृहमंत्री  और कांग्रेस के वरिष्ठनेता पी चिदंबरम ने एक ऐसी बात कही जिससे साफ हो गया की अंग्रेज अफसर हयूम द्वारा बनाई गई ये कांग्रेस पार्टी भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है. ये पार्टी देश को बर्बाद करने की ठान चुकी है!

Yesterday, Sonia Gandhi, the closest leader of Sonia Gandhi, joined the ISIS terrorists and today the former Home Minister and senior Congress leader P. Chidambaram said such a thing, that it was clear that the Congress party created by the British officer Haume, how big a threat to India is. This party has decided to ruin the country.

पी चिदंबरम का मानना है कि कश्मीर को भारत से अलग कर देना चाहते है, आजाद कर देना चाहते है.आज चिदंबरम ने एक कार्यक्रम मे कहा कि कश्मीर के लोग आजादी चाहते है और हमे उनकी मांग को सुनना चाहिए. यानि वो लोग जो चाहते है हमे वो करना चाहिए. कश्मीर को भारत से आजाद कर देना चाहिए. इनको आजादी मिलनी चाहिए!

P Chidambaram believes that Kashmir wants to separate India from India and want to liberate it. Today, Chidambaram said in a program that the people of Kashmir want freedom and we must listen to their demands. That is, the people who want us, we should do that. Kashmir should be liberated from India. They should get freedom.

कांग्रेस पार्टी के इस वरिष्ठ नेता ने अपने बयान से साफ कर दिया की ये कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानता और इसके अनुसार भारत ने कश्मीर को गुलाम बना रखा है. अब एक छोटा सा विशलेषण कीजिये कि कश्मीर नाम ही ऋषि कश्यप के नाम पर रखा गया है, ये हजारों साल से इस्लाम के अस्तित्व में आने से भी पहले से भारत का हिस्सा है. यहाँ के लोग कश्मीर हिन्दू है, न की अरबी मुस्लिम, हिन्दू कभी भी कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग नहीं करते!

This senior Congress leader has made it clear by his statement that he does not consider Kashmir as part of India and accordingly, India has made Kashmir a slave. Now make a small analysis that Kashmir is named after Rishi Kashyap, it is also a part of India even before coming into existence of Islam for thousands of years. People here are Kashmiri Hindus, not Arabs of Muslims, Hindus never demand separation of Kashmir from India.

सेकुलरिज्म ने जिहादियों को संरक्षण दिया, जिहादियों ने अपनी संख्या कश्मीर में बधाई, और उसके बाद मूल हिन्दुओं को वहा से क़त्ल कर भगा दिया, और सेकुलरों ने भी जिहादियों का साथ दिया, और अब सेक्युलर कह रहे है की कश्मीर के लोग यानि जिहादी लोग, आजादी चाहते है कश्मीर को आजादी कर दो. गिलानी, मीरवाइज, मशरत आलम, यासीन मालिक जैसे लोग कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करते है. और चिदंबरम जो कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता है उनका समर्थन करते है, उनको आजादी दे दो.

The secularism protected the jihadis, the jihadis congratulated their numbers in Kashmir, and after that the original Hindus were murdered there, and the secularists also supported the jihadis, and now the secular is saying that the people of Kashmir, i.e. jihadi people People want freedom, let Kashmir be free. People such as Geelani, Mirwaiz, Mushrat Alam, Yasin Bane demand separation of Kashmir from India. And Chidambaram, who is a senior Congress leader, supports them, give them freedom.

https://twitter.com/JagratiShukla29/status/924271816687808512

पहले तो नेहरु ने आधे कश्मीर पर पाकिस्तान को कब्ज़ा करने दिया, फिर धारा 370 लगाकर अन्य भारतीयों का कश्मीर में बसना नामुमकिन कर दिया, और फिर वहां से हिन्दुओं को भाग दिया गया और अब चिदंबरम कहते है कश्मीरियों को आजाद दे दो. आखिर ये लोग चाहते क्या है और करना क्या चाहते है ये तो साफ जाहिर हो रह है!

First, Nehru allowed Pakistan to occupy half of Kashmir, and then by making Article 370, it was impossible for other Indians to settle in Kashmir, and then from there the Hindus were divided and now Chidambaram says that let the Kashmiris free. It is clear that what you want and what you want to do.

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https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : dainik-bharat.org

पूर्व कांग्रेसी नेता ने किया यह बड़ा खुलासा- राहुल गाँधी को देश से ज्यादा अपना कुत्ता प्यारा है !

राहुल गांधी ट्विटर पर खासे सक्रिय हो गए हैं। गुजरात चुनावों के प्रचार के दौरान राहुल गांधी के ट्वीट्स चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस बीच ट्विटर पर लोकप्रियता के लिए राहुल पर बॉट्स के इस्तेमाल का भी आरोप लगा और बीजेपी ने उनपर निशाना भी साधा। राहुल गांधी ने ट्वीट के जरिये इसका जबाब दिया है! लेकिन पूर्व कांग्रेसी नेता हेमंता शर्मा ने राहुल को उनकी एक पुराणी करतूत को याद दिलाया और बताया की कांग्रेस में इंसानो से ज्यादा तवज्जो कुत्तो की है |

Rahul Gandhi has become very active on Twitter. Rahul Gandhi’s tweets have been the subject of discussion during the campaigning of Gujarat elections. Meanwhile, for the popularity of Twitter, Rahul was also accused of using bots and BJP also targeted him. Rahul Gandhi has given the answer through tweet! But former Congress leader Hemant Sharma reminded Rahul of one of his old deeds and told that more than the people of Congress, they prefer dogs rather than people.

हिमंता शर्मा असम में बीजेपी सरकार के मंत्री है, असम में अब बीजेपी की सरकार है, पर पहले वहां कोंग्रस की सरकार थी, और हिमंता शर्मा कांग्रेस के नेता हुआ करते थे, पर एक घटना के बाद अपमानित होने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दिया था, कांग्रेस में कोई ऐसा व्यक्ति जिसमे आत्मसम्मान हो वो रह ही नहीं सकता, सिर्फ निर्लज्ज तरह के लोग ही कांग्रेस में टिकते है |

Himanta Sharma is the BJP government minister in Assam, now BJP is in Assam, but earlier it was the Congress government, and Himanta Sharma used to be the leader of the Congress, but after leaving an incident, he left the Congress. In Congress, a person who has self-esteem can not live, only innocent people live in Congress.

हुआ ये की आज राहुल गाँधी ने अपने कुत्ते पीडी का वीडियो ट्विटर पर डाला, और दिखाया की उनका कुत्ता कितना मस्त है, पहले हम भी आपको दिखाते है राहुल गाँधी ने ट्विटर पर क्या डाला!

Today, Rahul Gandhi poured the video of his dog PD on Twitter, and showed how good his dog is, first we also show you what Rahul Gandhi did on Twitter!

राहुल गाँधी का विदेशी ब्रांड का कुत्ता जिसका नाम पीडी है, राहुल गाँधी के इस ट्वीट के बाद हिमंता बिस्वा शर्मा ने ये खुलासा किया, पहले भी आपने इसके बारे में सुना होगा, की राहुल गाँधी एक बार कॉंग्रेसी नेताओं से अपने बंगले में नहीं मिले क्यूंकि वो अपने कुत्ते को बिस्किट खिलाने में बीजी थे, वो घटना क्या थी अब देखिये!

Rahul Gandhi’s foreign brand’s dog named PD, after Rahul Gandhi’s tweet, revealed this by Himanta Biswa Sharma, you must have heard about it earlier, that Rahul Gandhi did not get a single Congressman from his bungalow once. He was a BG to feed his dog biscuit, what was that event, now see!

दरअसल हिमंता शर्मा ही वो नेता थे जो राहुल गाँधी से मिलने उनके बंगले पर गए थे, वो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, राहुल गाँधी की कांग्रेस की असम में सरकार भी थी, असम के एक जरुरी मुद्दे पर हिमंता शर्मा राहुल गाँधी से मिलने दिल्ली आये थे, पर राहुल गाँधी अपने इसी कुत्ते पीडी को बिस्किट खिलाने में इतने बीजी थे की उन्होंने अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात तक नहीं की! आज हिमंता शर्मा ने राहुल गाँधी को करारा जबाब देते हुए बेनकाब कर दिया |

In fact, Himanta Sharma was the leader who went to meet Rahul Gandhi at his bungalow; he was a senior Congress leader; Rahul Gandhi’s Congress had a government in Assam; On an urgent issue of Assam, Himanta Sharma came to Delhi to meet Rahul Gandhi. But Rahul Gandhi was so busy in feeding biscuits to his own dog PD that he did not meet senior leaders of his party! Today, Himanta Sharma exposes Rahul Gandhi with a written reply.

और इसी के बाद अपमान का घोंट पीकर हिमंता शर्मा बीजेपी में शामिल हो गए, और आज असम में वाकई अच्छा कार्य कर रहे है, इस घटना से साफ़ होता है की राहुल गाँधी के कुत्ते की हैसियत कॉंग्रेसी नेताओं से अधिक है, और जो लोग कांग्रेस में है उनमे आत्मसम्मान नाम की कोई चीज है ही नहीं | कांग्रेस को देश की चिंता है नहीं वो तो अपने कुत्तों के साथ खुश है | वेसे भी उनसे ज्यादा तो कुत्ते ही वफ़ा दार होंगे | इन 10 सालों में कांग्रेस ने देश को जमकर लुटा था और अनेकों घोटले किये थे जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान भी हुआ था | अब इत्ते पैसों का उन्होंने क्या किया ये तो हमें नहीं पता लेकिन यहाँ जो दिख रा है वो साफ़ साफ़ ज़ाहिर कर रहा है के देश और देश के लोगों से ज्यादा कुत्तों को ज्यादा प्यार करती है कांग्रेस |

After this, Hemant Sharma joined BJP in the heat of humiliation, and is working really well in Assam today, it is clear from this incident that Rahul Gandhi’s dog status is more than Congress leaders, and those who are Congress There is no such thing as self-respect in them. Congress is concerned about the country, but she is happy with her dogs. More than that, the dog will be the wafa door. In these 10 years, Congress had looted the country and made many scores, which caused huge loss to the country’s economy. Now we do not know what he did for the money, but what is seen here clearly shows that the Congress loves more dogs than the country and the people of the country.

Source : logicalbharat.com

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विडियो: यह है वो बहादुर जो तालिबानियों से लड़कर अकेला ही ले आया चौहान वंश के बहुमूल्य रत्न !

शेर सिंह राणा का नाम शायद ही कभी अपने पहले सुना हो | बैंडिट क्वीन के नाम से कुख्यात फूलन देवी का नाम तो अपने सुना ही होगा| ये वाही फूलन देवी है जिसने बड़ी ही बेरहमी से 22 ठाकुरों को एक साथ मार दिया था, और इसी का बदला लेने के लियें शेर सिंह राणा ने फूलन देवी को मारने के बारें सोचा |

The name of Sher Singh Rana is rarely heard before. The name of the infamous Phoolan Devi in the name of Bandit Queen will be heard by you. This is the same Phoolan Devi, who had brutally killed 22 Thakurs together, and thought of taking the revenge of Sher Singh Rana to kill Phoolan Devi.

“फूलन देवी के पति उम्मीद के मुताबिक 25 जुलाई 2001 की सुबह शेर सिंह राणा खुद फूलन देवी से मिलने गया था। उसने अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से अपना फर्जी नाम बताया था। मुलाकात के वक्त शेर सिंह राणा ने अपना नाम शेखर बताया था। राणा ने फूलन के सामने उनकी एकलव्य सेना से जुड़ने की मंशा जाहिर की थी। फूलन से राणा की मुलाकात एकलव्य सेना की उत्तराखंड शाखा से जुड़ी सदस्य उमा कश्यप ने करवाई थी।

“According to the expectation of Phoolan Devi’s husband, Sher Singh Rana himself went to meet Phoolan Devi on the morning of 25 July 2001. He told his fake name for the purpose of hiding his identity. During the meeting Sher Singh Rana named his name Shekhar. Rana had expressed the intention to join his Eklavya army in front of Phoolan. Rana met Phoolan from Uda Kashyap, a member of Eklavya Army’s Uttarakhand branch.

और इसके बाद करीब 11 बजे फूलन अपने सरकारी आवास से सनसद भवन चली गईं। उनके जाने के बाद भी शेर सिंह राणा उनके घर पर ही बैठा रहा। क्यूंकि जिस मकसद से वो आया था वो अभी पूरा ही नहीं हुआ था। राणा तब तक फूलन के सरकारी आवास पर बैठ कर इंतज़ार करता रहा जब तक फूलन सांसद से वापस नहीं आईं। दोपहर के करीब 1.30 बज रहे थे तभी फूलन सांसद से वापस आकर अपने सरकारी आवास पहुंचीं ही थी की वहां घात लगाए बैठे राणा ने फूलन पर गोलियां बरसा दीं और फूलन की मौत तुरंत हो गई।

And after this, at around 11 o’clock, Phoolan went to the Parliament House from his official residence. Even after his departure, Sher Singh Rana was sitting at his house. Because the reason for which he came from was not yet complete. Rana waited till he sat on the official residence of Phoolan till Phulan did not come back from MP. About 1.30 pm, when Phoolan Singh came back from the MP, he had reached his official residence. Rana, who was hanging there, sacked the bullets at Phoolan and Phoolan died immediately.

पुलिस के मुताबिक फूलन को 6 गोलियां मारी गई थीं जो कि शेर सिंह और उसके एक साथी ने चलाई थीं | फूलन की हत्या करने के बाद शेर सिंह राणा ने खुद को कानून के हवाले कर दिया। इसके बाद उसने डालनवाला थाने में हुई प्रेस कांफ्रेंस में यह कबूला कि उसने बेहमी से फूलन के हाथों मारे गए 22 क्षत्रियों की हत्या का बदला लिया था।

According to the police, 6 bullets were killed by Phoolan who was run by Sher Singh and one of his companions. After killing Phoolan, Sher Singh Rana handed himself over to the law. After this, he confessed in the press conference held in Dalanwala police station that he had avenged the killing of 22 Kshatriyas who were killed by Phoolan.

और उनकी मंशा अफगानिस्तान जा कर सम्राट पृथ्वीराज चौहान की समाधि भारत लाना था।” इस बात की तस्दीक संयुक्त पुलिस आयुक्त के के पॉल ने भी दिल्ली में की थी। उन्होंने कहा था, वह खुद चलकर पुलिस थाने आया और आत्मसमर्पण कर दिया। ” मगर कहानी यहीं ख़तम नहीं होती दोस्तों कहानी तो यहाँ से शुरू होती है| आपने उपर पढ़ा की शेर सिंह राणा ने कबूला की उसका इरादा तो अफ्घनिस्तान जाकर पृथ्वीराज चौहान जी की अस्थियाँ लाने का था |

And their motives were to go to Afghanistan to bring the Samadhi of Lord Pratishtha Chauhan to India. “The fact that the Joint Commissioner of Police K Paul also did in Delhi. He had said that he himself came to police station and surrendered. “But the story does not end there. Friends story starts here. You read above that Sher Singh Rana had his intentions of Kabula to go to Afghanistan and bring the bones of Prithviraj Chauhan ji.

आइये जानते हैं उन्होंने यह सब कैसे किया यह सच है कि शेर सिंह राणा अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियाँ अफ़ग़ानिस्तान से लाकर वापिस हिंदुस्तान में सम्मान पूर्वक गंगा में विसर्जित करायी| मगर आपको यह सब दो लाइन में पढ़कर जितना आसान लग रहा है सच्चाई उस्ससे कहीं अधिक कठिन थी |शेर सिंह राणा फूलन देवी की हत्या के केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे फिर भी अफ्घनिस्तान पहुंचे वो भी बिना वीसा, पस्स्प्पोर्ट अवम तीन देशों की इज्जाजत के बिना और वहां से महाराज पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों को, जो की सदियों से मुघ्ल्लों के कब्जे में थीं और उनके बाद तालिबानियों के कब्जे में थी उंसे छुडाकर फिर तीन देशों की सीमाओं को पार करके हिंदुस्तान में वापिस सकुशल लाये|

Let’s know how he did all this. It is true that Sher Singh Rana brought the bones of last Hindu emperor Prithviraj Chauhan from Afghanistan and repatriated him in the Ganga in Hindustan. But it seems as simple as reading it in two lines. The truth was much more difficult than that. Sher Singh Rana was locked in Delhi’s Tihar Jail in the case of killing Phoolan Devi, but he also came to Afghanistan without visa, Without permission and from there, the bones of Maharaj Prithviraj Chauhan, who had been in possession of Mughals for centuries and after them was captured by the Taliban After rescuing the boundaries of three countries, they would be able to return to India.

तारिख १७ फरवरी २००४ हत्या करने के मात्र ४ साल के अंदर ही राणा तिहाड जेल से फर्रार हो चुके थे | वही तिहाड़ जेल जिसमें कैदी एक बार अन्दर गया तो या तो सुधर कर बहार निकलता है या फिर बाहर अति है उस्की लाश, और इसी वजह से राणा सुर्ख़ियों में आचुके थे और १७ मई २०१४ को ही फिर से गिरफ्तार करलिये गए | मगर इस बीच उन्होंने डुप्लीकेट पासपोर्ट बनवाया और कोलकाता से होते हुए के बांग्लादेश से पाकिस्तान और फिर अफ्घनिस्तान पहुँच गए और वहां भी जा कर खोज ही निकाली वो जगह जो तालिबानी आतंकियों से घिरी हुई थी |और फिर बनाया एक विडियो जिसे आप आगे देखकर रेह्जयेंगे दंग |और फिर वहां से अस्थियाँ लेकर वापिस हिंदुस्तान आये उत्तर प्रदेश के गज़ाबाद जिले में आकर अस्थियों का पूरे हिन्दू रीति रिवाज से विसर्जन कराया |यह ही नहीं राणा ने इस पूरे घटनाक्रम की vcd भी बनायीं थी |

Within 4 years of the date of murder, 17 February 2004, Rana had gone to Tihar Jail. In the same Tihar Jail, the prisoner once went inside, either goes out of the way, or out of the lotus body, and because of this, Rana had been in the headlines and was arrested again on May 17, 2014. But in the meantime he made a duplicate passport and through Kolkata, he reached Pakistan and then Afghanistan, and went there and searched only the place which was surrounded by Taliban militants. And then a video that you will see after seeing the riots, | And then from there, returning the bones from Hindustan came to Gazabad district of Uttar Pradesh and come from the entire Hindu customs of the atheists. Rgn made | it was Rana made by vcd of the development itself.

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गुजरात चुनावों से पहले यूपी से आई ये बड़ी खबर- हुए अहम खुलासे, कई बड़े नेता रडार पर !

आज देश में दुश्मन सिर्फ सीमा पार से ही नहीं घुस रहे हैं बल्कि हमारी पिछली सरकारों की मूर्खता की वजह से वे आराम से अलग-अलग राज्यों में मस्त रह भी रहे हैं और अपने आतंकवाद को फ़ैलाने की साज़िश में लगे हुए हैं | ऐसी ही बड़ी खबर इस वक़्त यूपी के मुरादाबाद से आई जिसे देख आप भी सोचेंगे कि पिछली सरकारें आखिर कर क्या रही थीं | खबर के मुताबिक यूपी एटीएस और आइबी की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है और उन्होंने लश्कर के आतंकी और गोधरा कांड में आरोपी रह चुके फरहान अहमद अली को गिरफ्तार कर लिया है | उसके पास से ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पैन और पहचान पत्र भी बरामद हुआ है जो फर्जी पाए गए हैं |

Today the enemies are not just crossing the border in the country, but because of the stupidity of our previous governments, they have been comfortably comfortable in different states and are engaged in the conspiracy to spread terrorism. Such a big news came at Moradabad in UP at this time and you will also see what the previous governments were doing at the end. According to the news, the team of UP ATS and IB has achieved great success and they have arrested Farhan Ahmed Ali, a terrorist of the LeT and accused in the Godhra carnage. Driving license, Aadhar card, PAN and identity card have also been recovered from him, who have been found to be fake.

 

जानकारी के अनुसार फरहान फर्जी दस्तावेज के आधार पर ये यहां काफी लंबे वक़्त से छिपा हुआ था | इसके साथ इसका एक और साथी पकड़ा गया है और अब इन दोनों की अब रिमांड ली जा रही है | मुरादाबाद जनपद से लश्कर के सजायाफ्ता आतंकी और गोधरा कांड के आरोपी फरहान अहमद को गिरफ्तार किया गया है | फरहान अहमद जिले के मुगलपुरा थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज के साथ रह रहा था |आपको बता दें कि फरहान अहमद गोधरा कांड में आरोपी रह चुका है और उसे कोर्ट ने दोषी माना था | पोटा कानून के तहत दोषी साबित हुए फरहान अहमद को 2009 में जमानत मिली थी, जिसके बाद से वह मुरादाबाद में फर्जी दस्तावेज बनाकर रह रहा था | इतना ही नही आतंकी फरहान ने फर्जी पासपोर्ट बनाकर कुवैत की यात्रा भी 2016 में की थी और उसके पास से ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पैन और पहचान पत्र भी बरामद हुआ है जो फर्जी पाए गए हैं |

According to information, on the basis of Farhan fake document, it was hidden from the long time. With this one other fellow has been arrested and now the two are now seeking remand. Muradabad district’s accused convicted and Godhra accused Farhan Ahmed has been arrested. Farhan Ahmed was living with a fake document in the Mughalpura police station area of ​​the district, let him know that Farhan Ahmed has been accused in Godhra and he was convicted by the court. Farhan Ahmed, convicted under the POTA Act, was granted bail in 2009, after which he was living in Muradabad by making fake documents. Not only that, the terrorist Farhan has made a fake passport and traveled to Kuwait in 2016 and his driving license, Aadhar card, PAN and identity card have also been recovered, which have been found to be fake.

मूल रूप से सिद्धार्थनगर जनपद के रहने वाला फरहान अहमद मुरादाबाद में फरहान अहमद अली के नाम से रह रहा था और वह 2009 में मुरादाबाद आने के बाद कटघर और मुगलपुरा थाना क्षेत्र में किराये के मकान में रह रहा था | गोपनीय सूचना के बाद गुरुवार देर रात पुलिस ने आतंकी फरहान को गिरफ्तार कर लिया | फ़िलहाल एटीएस ओर आईबी की स्पेशल टीमें फरहान से पूछताछ कर रही हैं और फरहान अहमद के खिलाफ मुगलपुरा थाने में आईपीसी की कई धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया गया है |

Originally from Siddharthnagar district, Farhan Ahmed was staying in Moradabad after the name of Farhan Ahmed Ali and he was living in a rented house in Katghar and Mughalpura police station area after returning to Moradabad in 2009. After confidential information, the police arrested the terrorist Farhan on Thursday night. At present, ATS and IB special teams are interrogating Farhan and Farhan Ahmed has also filed a lawsuit against him in several sections of the IPC in the Mughalpura police station.

नोएडा एटीएस, आईबी और मुगलपुरा पुलिस ने मुरादाबाद से लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी फरहान अहमद को गुरुवार देर रात को अरेस्ट किया। उसके पास से फर्जी राशन कार्ड, पैन कार्ड भी बरामद हुए। आतंकी साजिश रचने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे बरी करते हुए विदेश जाने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद वह फर्जी पासपोर्ट पर कुवैत गया था | अब जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। ख़बरों के मुताबिक़ फरहान अहमद सिद्धार्थनगर का रहने वाला है और आरोप है कि वह लश्कर का एक्टिव मेंबर है। वह मुरादाबाद में रह रहा था। यहां उसने फरहान अहमद अली के नाम से फर्जी पासपोर्ट और राशनकार्ड भी बनवा लिया। फर्जी पासपोर्ट के आधार पर वह कुवैत भी हो आया। ऐसा कहा जाता है कि उसका परिवार कुवैत में रहता है।

Noida ATS, IB and Mughalpura police arrested the Lashkar-e-Taiba terrorist Farhan Ahmed on Thursday night from Moradabad. Fake ration cards, PAN cards were also recovered from him. On the charge of conspiring to plot a terror plot, the Delhi High Court banned it from going abroad. Despite this, he went to Kuwait on a fake passport. Now the investigating agencies are interrogating him. According to reports, Farhan Ahmed is a resident of Siddhartha Nagar and is alleged to be an active member of the LeT. He was living in Moradabad. Here he also made a fake passport and ration card in the name of Farhan Ahmed Ali. Based on the fake passport, he also came to Kuwait. It is said that his family lives in Kuwait.

2002 में गोधरा कांड के बाद फरहान कुवैत से अहमदाबाद बदला लेने के लिए आया था और करीब 15 दिन रहा। आरोप है कि इस दौरान वह अपने साथ लोगों को जोड़ना चाहता था। इंटेलिजेंस ब्यूरो को उसकी जानकारी मिली और इसकी भनक लगते ही वह दिल्ली भाग गया। इसके बाद दिल्ली की स्पेशल सेल ने निजामुद्दीन से अरेस्ट किया और उस वक़्त उसके पास से 4 किलो एक्सप्लोसिव, 2 डेटोनेटर, एक चाइनीज पिस्टल और 15 कारतूस बरामद हुए थे।

After the Godhra carnage in 2002, Farhana had come to Kuwait from Kuwait for revenge and he was about 15 days old. It is alleged that during this time he wanted to add people with him. The Intelligence Bureau got his information and he got away from Delhi as soon as he knew it. After this, Special Cell of Delhi arrested Nijamuddin and at that time 4 kg explosive, 2 detonators, one Chinese pistol and 15 cartridges were recovered from him.

2007 में दिल्ली हाईकोर्ट से उसको जमानत मिल गई। इसके बाद वह फर्जी पासपोर्ट पर कुवैत चला गया। वापस आया तो सुरक्षा एजेंसियों ने उसे फिर से अरेस्ट कर लिया। 2009 में वह जमानत पर छूटा और मुरादाबाद आ गया। आतंकी फरहान ने आरटीओ से अलग-अलग तारीखों में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। पहला लाइसेंस 18 अक्टूबर 2002 को बनवाया गया, जबकि मुरादाबाद से ही दूसरा लाइसेंस तीन फरवरी 2010 को जारी किया गया। दोनों लाइसेंस में नाम फरहान अहमद अली है, जबकि जन्म तारीख अलग-अलग थींं। ऐसा कहा जाता है कि आतंकी फरहान का पूरा परिवार कुवैत में रहता है और उसके परिवार में वाइफ शकीना, भाई कामरान, इमरान, उस्मान और मां आएशा खातून हैं।

In 2007, he got bail from the Delhi High Court. After this he went to Kuwait on a fake passport. When he came back, the security agencies again arrested him. In 2009, he was released on bail and returned to Moradabad. Terrorist Farhan had made a fake driving license from RTO on different dates. The first license was made on 18th October 2002, while the second license from Moradabad was released on 3 February 2010. Both licenses are named Farhan Ahmed Ali, whereas the date of birth was different. It is said that the whole family of the terrorist Farhan lives in Kuwait and his family is Wife Shakina, Bhai Kamran, Imran, Usman and Maaishha Khatoon.

वहीँ इस मामले पर मुरादाबाद के एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने कहा कि ”पोटा के मामले में सजायाफ्ता फरहान को फर्जी पासपोर्ट के मामले में अरेस्ट किया गया है। इसके अलावा दिल्ली और अहमदाबाद से भी उसका आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।” एबीपी न्यूज़ की जानकारी के मुताबिक पुलिस को पड़ताल में चला चला कि फरहान ने अहमदाबाद के रहने वाले शाहिद अहमद के साथ कुवैत में आरएसएस, विहिप और बजरंग दल के बड़े नेताओं के कत्ल की साजिश रची थी | ये दोनों दिल्ली में हथियारों के साथ पकड़े गए थे और पोटा के तहत इन लोगों को सजा भी सुनाई गई थी | 2002 में गोधरा कांड के बाद फरहान कुवैत से गुजरात के अहमदाबाद बदला लेने के लिए आया था और करीब 15 दिन रहा | उसके पास से चार किलो विस्फोटक, 2 डेटोनेटर, एक चाइनीज पिस्टल और 15 कारतूस बरामद हुए थे |

On this case Moradabad SSP Preetinder Singh said that the convicted Farhan has been arrested in the case of “POTA” in connection with a fake passport case. Apart from this, his criminal records are being investigated from Delhi and Ahmedabad and security agencies are interrogating him. “According to the information of ABP News, the police went into the investigation that Farhan had accompanied Shahid Ahmed, a resident of Ahmedabad, in the RSS , Conspiracy to kill the big leaders of the VHP and Bajrang Dal. Both of them were caught with arms in Delhi and under the POTA these people were also sentenced. After the Godhra carnage in 2002, Farhan came to Kuwait from Gujarat to take revenge on Ahmedabad and had spent about 15 days. Four kilos of explosives, 2 detonators, a Chinese pistol and 15 cartridges were recovered from him.

आगे की और कड़ी पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसे कुवैत से मोटा पैसा मिल रहा था | यहाँ फरहान स्थानीय मदद और लोगों की वजह से छिपता फिर रहा था | अब इसके और कितने साथी हैं और इनकी योजना क्या थी, ये सब पूछताछ में निकाला जा रहा है | अब सवाल ये कि जहाँ आम आदमी अपना आधार कार्ड बनवाने के लिए जूझ रहा है, वहां इन लश्कर आतंकियों के आधार कार्ड बने हुए हैं | अखिलेश सरकार आख़िरकार कर क्या रही थी, जो अब आतंकवादी पकड़े जा रहे हैं |

Further inquiries revealed that he was getting huge money from Kuwait. Here Farhan was hiding due to local help and people. Now how many more are his partners and what their plan was, all this is being put into question. Now the question is, where the common man is struggling to make a base card, the base cards of these LeT terrorists are made up there. The Akhilesh government was finally doing what, now the terrorists are being caught.

कांग्रेस सरकार ने आधार कार्ड व्यवस्था को ऐसे लागू किया कि आधार कार्ड पर कुत्ते बिल्लियों की फोटो छपने लगी थी और न जाने कितने लाखों आधार कार्ड फर्जी बनाये गए जिन्हे बाद में जलाया गया | हमें जाबांज आईबी और एटीएस के अधिकारीयों पर गर्व होना चाहिए कि वो देश में अंदर बैठे हुए आतंकवादियों को ढूंढ कर गिरफ़्तार कर रही है | इसके साथ ही सवाल उठता है उन दलालों पर जो सरकार में बैठकर लोगों के फ़र्ज़ी पहचान पत्र, आधारकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते हैं | इन जैसे दलालों का फायदा ये आतंकवादी उठाते हैं और फर्जी दस्तावेज बनाकर अपने नापाक मंसूबे पूरे करने कि साज़िश रचते रहते हैं |

The Congress government implemented such Aadhar card system that the photo of dog cats was being printed on the Aadhar card and not knowing how many millions of Aadhar cards were made fake, which was later burnt. We should be proud of the officials of Jabanj IB and ATS that they are apprehending and arresting the terrorists sitting inside the country. Along with this, the question arises on those brokers who sit in government and make fake identity card, Aadhar card, driving license of the people. These terrorists take advantage of these brokers and make a fake document and plot to fulfill their nefarious plans.

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