बड़ा खुलासा : जब ” हिन्दू शरणार्थी ” बनेंगे तो ऐसा कौन सा देश है जो हिन्दुओं को आश्रय देगा, मचा हडकंप …..

आजकल सभी लोग सोशल मीडिया पर अपने विचार रखते है. वो क्या सोचते है और क्या चाहते है सभी कुछ सोशल मीडिया पे डालते है ताकि बाकि लोग भी इस ओर ध्यान दें. सोशल मीडिया लोगो को एक- दुसरे की बात को बताने का समझाने का माध्यम बन गया है. जिसके सहारे लोग अपनी बात को दुसरे लोगो तक पहुंचाते है. सच्चाई को सामने लेन का प्रयास करते है. लोगो को कई बातों से जुडी सच्चाई से अवगत कराते. सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो लोगो को लोगो से जोड़ता है. उनके विचारो को दुसरे लोगो तक पहुंचता है !

Nowadays all people have their views on social media. What they think and what they want to put everything on social media so that other people also pay attention to it. The social media has become a medium to explain to people the story of one another. With which people bring their talk to other people. Let’s try the front lane to the truth. Make people aware of the truth about many things. Social media is a medium that connects people to people. Their thoughts reach to other people.

इसी चलते हमारी नजर सोशल मीडिया पर रहती है. आजकल देशभर में क्या-क्या हो रहा है ये सब हमे सोशल मीडिया से ही पता चलता है और इससे जुडी कई चीजों को हम अपने पाठकों के सामने भी पेश करते है. पूरे देशभर में क्या हो रहा है और क्या होने वाला है इससे लोगो को जागरूक कराते है. यह एक ऐसा माध्यम है जो कि सभी बातों को लोगो के सामने लाता है ये किसी एक क पक्ष नही लेता. जो भी देशभर में चल रहा होता है उससे लोगो को जागरूक कराता है. जिससे लोगो को पता होना चाहिए कि हमारे देश में क्या चल रहा है. कैसा होए से हमारा देश प्रगति कर सकता है या फिर कैसा न होने से देश कोहनी हो सकती है ये सभी बातें हमें सोशल मीडिया से पता चलती है !

This is why our eyes stay on social media. Nowadays, what is happening all over the country, we all know from the social media and we present a lot of things in front of our readers. Make people aware of what is going on in the whole country and what is going to happen. It is a medium that brings all things in front of people, it does not favor any one. What makes people aware of what is going on in the country. So that people should know what is going on in our country. How can our country progress or how can there be a lion in the country without regard to all these things we all know from the social media.

जिस सोशल मीडिया के कारन हमे देश भर हो रही बातों का पता चलता है आज उसी सोशल मीडिया पर हुए ये सवाल देखने को मिला. सवाल ये पूछा गया कि अगर कभी ऐसा हुआ की हिन्दुओं पर किसिस प्रकार की मुसीबत आई और उन्हें मज़बूरी में शरणार्थी बनना पड़ा तो वे क्या करेंगे. वे किस देश में शरण लेंगे या फिर किस देश में उनको शरण मिलेगी. कोन सा ऐसा देश होगा जो हिन्दुओं को अपने देश में आश्रय देगा. क्या कभी सोचा है आपने इस बारे मे कल अगर ऐसा हुआ थो क्या होगा इसका परिणाम. जनता है कोई इस बारे में की अगर कभी ऐसी नौबत आई थो क्या करेंगे !

The social media that we are aware of is happening around the country today, these questions got on the same social media. The question was asked, “If ever there was such kind of trouble that the Hindus had to suffer and what they would have to become refugees in a helplessness, what would they do?” In which country will they take shelter or in what country will they get shelter? Which country would be a country which would give shelter to Hindus in their country. Have you ever wondered what happened if you did this yesterday, the result? There is a public about this, if ever such a time came, what will happen.

यहाँ एक ऐसा मामला है जो दैनिक भारत के पाठकों के बीच में रखने लायक है, क्यूंकि जागरूकता हर व्यक्ति का अधिकार है. दैनिक भारत के पाठकों को इस बात कि जानकारी होनी ही चाहिए. आगे आने वाले समय में अगर कोई इसी मुसीबत आई थो क्या कदम उठाना होगा. क्या देश को जागरूक करना गलत है. क्या देश के प्रति अपना कर्तव्य न्हीभाना गलत है. दैनिक भारत के पाठकों को नि लगता की इस तरह का सवाल पूछा जाना सही नहीं है. ऐसा सवाल पूछकर आप क्या साबित करना चाहते है. जो भी देश में च रहा है इससे जनता को जागरूक कराना आवश्यक है !

Here is a case which is worth keeping among the readers of daily India, because awareness is the right of every person. The readers of daily India must know about this fact. In the coming time, if anybody has suffered this problem then what steps will be taken? Is it wrong to make the country aware? Is it wrong to claim duty on the country? It is not right to ask a question like this that readers of daily India feel uncomfortable. What do you want to prove by asking such a question? Whatever is happening in the country, it is necessary to make the public aware.

देखिये सोशल मीडिया पर क्या सवाल उठ रहा है सवाल यह पूछा गया है कि,अगर कभी हिन्दुओ पर मुसीबत आई और हिन्दू मज़बूरी में शरणार्थी बने तो उनको कौन से देश में शरण मिलेगी? ऐसा कोन सा देश हो जो इनको अपने साथ रखने के लिए राजी होगा अगर आप भारत का नक्शा देखें, और उसके पड़ोसियों को देखें तो एक चीज तो साफ़ हो जाता है की, पाकिस्तान में हिन्दुओ को शरण नहीं मिलेगी, बांग्लादेश और चीन की तरफ भी न ही देखा जाये तो अच्छा है !

What is the question raised on the social media? The question is asked, If ever there has been trouble on Hindus and Hindus become refugees in vulnerability, then which country will they find refuge? Who are these people who will agree to keep them with you if you look at the map of India, and if you see its neighbors, then one thing becomes clear that Hindus in Pakistan will not be sheltered, even in Bangladesh and China. Neither is good to be seen.

बात करें पाकिस्तान कि तो ये बात तो सबको पता है कि यहाँ आश्रय मिल पाना नामुमकिन है. पाकिस्तान तो शुरू से ही भारत का विरोधी देश रहा है. मुस्लिमो ने हमेशा से ही हिन्दुओं को अपना गुलाम बनाना चाहा. उनको अपने कदमो पर रखना चाहा है फिर केसे ये उम्मीद रख सकते है की पाकिस्तन किसी भी प्रकार से हिन्दुओ की मदद कर सकता है. ऐसा सोचना एक तरह से सपना देखना होगा और वो भी ऐसा सपना जो कि कभी भी सच्चा नही हो सकता इस बात को भूल जाओ वही अच्छा है !

Talk to Pakistan, then everyone knows that it is impossible to find shelter here. Pakistan has been an anti-India country since the beginning. Muslims always wanted to make Hindus their slave. They want to keep them on their feet, then how can they hope that Pakistan can help Hindus in any way. Thinking like this would have to be dreamed in a way and even a dream which can never be true, forget that, that is good.

वहीँ नेपाल भूटान और श्रीलंका हिन्दुओ को शरण दे सकेगा ये भी मुमकिन नहीं होगा क्यौकी वो तो काफी छोटे देश है, उनके खुद के देश में रहने वालो को मुसीबतों का सामना करना पता है ओ वो किस तरह हिन्दुओं की मदद क सकते है ऐसी सूरत में हिन्दुओ को 1 ही जगह शरण मिल सकती है और वो स्थान है समुंद्र में या तो बंगाल की खाड़ी या अरब सागर या फिर हिन्द महासागर ये जगह है जहाँ हिन्दुओं को रहने के लिए शरण मिल जाएगी. इन सभी बातों से यह पता चलता है कि हिन्दुओं का अपना कोई भविष्य नही है. उन्होंने कभी इस नजरिये से देखा ही नहीं की अगर कभी ऐसा हुआ तो कोण उनकी मदद करेगा.कोई भी नही है हिन्दुओं की सहायता करने वाला !

Even Nepal, Bhutan and Sri Lanka will be able to give shelter to Hindus. It is also not possible that they are a small country, those who live in their own country know to face the problems. How can they help Hindus in such a situation? Hindus can get asylum in the 1st place and the place is in Samudra either in the Bay of Bengal or the Arabian Sea or Indian Ocean where Hindus will get shelter to live. All these things show that Hindus have no future for themselves. He never saw from this point of view that if ever this happened then angle will help him. Nobody is helping the Hindus.

इन सब बातों से अब तो यही लगता है कि सच में हिन्दुओ को भी अपने भविष्य के बारे में सोचना ही चाहिए कि उनका आज चाहे जेसा भी हो पर उनका कल केसा होगा या उनका कल आज जेसा ही होगा या इससे भी बेकार होगा इस बारे में अभी तो कुछ भी नही कहा जा सकता. लेकी इतना जरुर कहा जा सकता ही हिन्दुओं को अपने आज के साथ- साथ अपने कल को भी बहतेर बनाना होगा ताकि अगर भविष्य में ऐसा हुआ भी तो उनको किसी के सहारे की जरुरत न पड़े. किसी के सामने सहायता के लिए हाथ न फैलाना पड़े. आज में अपने कल को इतना मजबूत बना लो कि कल जो भी हो इस बात से निश्चिंत रहें कि हमे या हमारी आने वाली पीड़ी को कोई कष्ट न हो आज की तरह हमारा कल भी सुन्दर ओए प्यारा हो !

From all these things, it seems that in reality, Hindus should also think about their future, regardless of what they are today, how they will be tomorrow or tomorrow will be as bad as today or worse. Nothing can be said right now. Leki can be said so much that Hindus have to make their own days together as well as their own, so that if this happened in the future, they would not have needed any support. Do not spread hands for anyone to help. Today, make your tomorrow so strong that whatever tomorrow is, be assured that neither ours nor our future will suffer any pain, as our life is still beautiful, dear.

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

Source: guiltfree.online

हिन्दू भावनाओं की रक्षा को लेकर, पद्मावती पर CM योगी का ऐतिहासिक फैसला- भंसाली समेत पूरी फिल्म इंडस्ट्री में हाहाकार !

कोई तो ऐसी सरकार है देश में की भावना का पूर्ण सम्मान करती हुई दिखाई देती है, और वो है उत्तर प्रदेश की योगी जी आदित्यनाथ सरकार, जी हां योगी जी आदित्यनाथ सरकार ने संकेत दिए है की उत्तर प्रदेश में हिन्दू विरोधी फिल्मबाज़ संजय लीला भंसाली वाहियात फिल्म पद्मावती को बैन किया जा सकता है, उत्तर प्रदेश में कभी रिलीज ही नहीं करने दी जाएगी ऐसी वाहियात फिल्म

Nobody looks like this government is giving full respect to the spirit of the country, and it is the Yogi ji of Uttar Pradesh, Adityanath Sarkar, and yes Yogi ji Adityanath Sarkar has indicated that anti-Hindu filmmaker Sanjay Leela Bhansali Vahiyat in Uttar Pradesh Padmavati can be banned in the film, Uttar Pradesh will not be allowed to release any such film

योगी जी आदित्यनाथ सरकार ने केंद्र को चिट्ठी लिखकर कहा की, पद्मावती फिल्म पर रोक लगा दीजिये, हमे शंका है की उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को लेकर शांति फ़ैल सकती है, और प्रदेश में अशांति फैलने की आशंका से राज्य सरकार चिंतित है अतः इस फिल्म को रोक दिया जाये

Yogi ji Adityanath Sarkar wrote to the Center and wrote to the Center, “Stop the Padmavati film, we are doubtful that peace can prevail in this film in Uttar Pradesh and the state government is worried due to the disturbance in the state, so this movie To be stopped

योगी जी आदित्यनाथ सरकार ने केंद्र में मोठे तौर पर मांग करि है की फिल्म के रिलीज पर रोक लगे, क्यूंकि इस वाहियात फिल्म से हिन्दुओ की भावनाएं आहात हो रही है, और इसी कारण इसपर रोक लगनी चाहिए, वरना अशांति हो सकती है

Yogi ji Adityanath Sarkar has been demanding at the Center that the release of the movie should be stopped, because the film is getting Hindu sentiments, and this is why it should be stopped, or else there can be unrest

योगी जी आदित्यनाथ सरकार का साफ़ मत है की भंसाली की वाहियात फिल्म पद्मावती हिन्दुओ की भावनाओं के विरुद्ध है, और हिन्दू इस फिल्म से आहात हो सकते है, इसलिए योगी जी आदित्यनाथ सरकार इस फिल्म के पक्ष में नहीं है, वहीँ सूत्रों का कहना है की, केंद्र इस फिल्म पर सभी राज्य सरकारों को छूट देगा, की वो फिल्म दिखाना चाहते है या फिर नहीं, फिल्म को राज्य चाहे तो दिखा सकते है, या बैन भी कर सकते है

Yogi ji Adityanath Sarkar has a clear view that Bhansali’s film, Padmavati is against the feelings of Hindus, and Hindus can be from this movie, so Yogi ji Adityanath Sarkar is not in favor of this film, the sources say that , The center will give discounts to all the state governments on whether or not they want to show the film, whether it wants to show the film, or even ban it

अब योगी जी आदित्यनाथ सरकार तो पहले से इस फिल्म से अशांति की आशंका जाता चुकी है, ऐसे में अब मोटा मोटा ये मान ही लेना चाहिए की उत्तर प्रदेश में तो कम से कम हिन्दुओ की भावना से खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा और भंसाली की फिल्म बैन होगी

Now the Yogi ji Adityanath Sarkar has already anticipated unrest with this film, and now it should be assumed that in Uttar Pradesh, at least in Uttar Pradesh, at least the Hindus will not be allowed to flirt and Bhansali’s film Ban Will be

उत्तर प्रदेश में पद्मावती की रिलीज को टालने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने की बाबत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फोर्स निकाय चुनाव में व्यस्त है। यदि कोई फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ के जरिए समाज में जहर घोलने का काम कर रहा हो तो इसे सही नहीं कहा जा सकता। योगी ने कहा कि मैं फिल्म पर रोक नहीं लगा सकता, लेकिन कानून व्यवस्था के मसले को देखना हमारा काम है।

Regarding writing the letter to the central government to avoid the release of Padmavati in Uttar Pradesh, Yogi Adityanath said that the Force body is busy in the election. If someone is working in a film to tear the poison in the society through tampering with history, then it can not be said right. Yogi said that I can not stop the film but it is our job to look into the issue of law and order.

काफी विवाादों से जूझ रही संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के सामने उत्तर प्रदेश में एक और बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। कई संगठनों के विरोध के बाद अब यूपी सरकार ने भी यह कहते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है कि फिल्म का रिलीज होना शांति व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है। यह पत्र यूपी के गृह विभाग ने केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव को लिखा है। पत्र में फिल्म की कहानी और ऐतिहासिक तथ्यों को कथित रूप से तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने की बात कहते हुए इस संबंध में केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) को अवगत कराने का अनुरोध किया गया है।

In front of Sanjay Leela Bhansali’s film Padmavati, who is struggling with a lot of controversy, another big problem can arise in Uttar Pradesh. After the opposition of several organizations, the UP government has now written to the central government saying that the release of the film can be a threat to the peace process. This letter has been written to the Union Information and Broadcasting Secretary of the UP Department of Homeland Security. In the letter, the request has been made to inform the Central Board of Film Certification (Censor Board) in this regard, saying that the film’s story and historical facts have been reportedly being tampered with.

गृह विभाग ने पत्र के माध्यम से केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव को अवगत कराया है कि वर्तमान में प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 22, 26 और 29 नवंबर को 3 चरणों में मतदान होना है। मतगणना की तिथि 1 दिसम्बर, 2017 है। 2 दिसम्बर, 2017 को ही चन्द्रदर्शन के अनुसार बारावफात का पर्व भी पडऩा संभावित है, जिसमें पारंपरिक रूप से मुस्लिम समुदाय द्वारा बड़े पैमाने पर जुलूस आदि निकाले जाते हैं।

The Home Department has conveyed to the Union Information and Broadcasting Secretary that through this letter, the process of election of local bodies in the state is currently going on in which voting in 3 phases will be held on 22, 26 and 29 November. The date of counting is December 1, 2017. According to Chandradarshan, on December 2, 2017, it is possible to celebrate the festivities of the twelfth phase, in which traditional mass marches are extracted by the Muslim community traditionally.

ये वीडियो जरुर देखें

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

पद्मावती विवाद: अकेले पड़े सरदाना के बचाव में कूदे दूरदर्शन के इस पत्रकार ने धमकी देने वालों को दिखाई औकात !

रोहित सरदाना को आ रहे धमकी भरे फोन कॉल्स पर जहा मीडिया जगत के बड़े नाम चुप्पी साढ़े हुए है तो वही स्वेता सिंह के बाद अब दूरदर्शन के पत्रकार खुलकर उनके समर्थन में उतर चुके है | बड़े ताज्जुब की बात है रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त और रजत शर्मा जैसे बड़े पत्रकारों की और से इस मसले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है! रविश कुमार ने तो हर ऐसे मुद्दों को उठाने में रत्ती भर भी देर नहीं लगाते, लेकिन यह मामला समुदाय विशेष के लोगो के खिलाफ है शायद इसलिए उनकी पत्रकारिता इस मुद्दे को उठाने के लिए इजाजत नहीं देती |

After the threatening phone calls to Rohit Sardan, where the big names of the media are silent, then after the same Sweta Singh, the Doordarshan journalists have openly supported him. It is a matter of great surprise that senior journalists like Ravish Kumar, Rajdeep Sardesai, Barkha Dutt and Rajat Sharma have not received any response from this issue yet! Ravish Kumar does not even delay in raising such issues, but this case is against the people of the community, perhaps because his journalism does not allow him to raise this issue.

फ़ोन कॉल्स और धमकियों के जबाब में दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने बेहद कड़क और बेवाक अंदाज में जबाब दिया है! .अशोक श्रीवास्तव पहले भी सेक्सी दुर्गा फिल्म के नाम पर ट्वीट के जरिये अपना विरोध जाता चुके है! अब श्रीवास्तव ने एक बार फिर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्विटर पर लिखा, “क्या @sardanarohit को अभिव्यकि की आज़ादी नहीं है ?

After the threatening phone calls to Rohit Sardan, where the big names of the media are silent, then after the same Sweta Singh, the Doordarshan journalists have openly supported him. It is a matter of great surprise that senior journalists like Ravish Kumar, Rajdeep Sardesai, Barkha Dutt and Rajat Sharma have not received any response from this issue yet! Ravish Kumar does not even delay in raising such issues, but this case is against the people of the community, perhaps because his journalism does not allow him to raise this issue.

एक कलाकार सरस्वती का निर्वस्त्र चित्रण करे, फिल्मकार सेक्सी दुर्गा बनाये तो अभिव्यकि की आजादी और सेक्सी आएशा, सेक्सी फातिमा ईश निंदा ! भई वाह !” गौरतलब हो रोहित सरदाना ने फ़ोन पर मिल रही धमकियों की जानकारी ट्वीटर के माध्यम से दिया है और उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से इसके खिलाफ करवाई करने की मांग भी की थी |

An artist should be depicted as Saraswati, the filmmaker will make a sexy Durga, the freedom of expression and the sexual desire, sexy Fatima Ish Nidha! Bhai Wah! “Significantly, Rohit Sardana has given information about the threats received on the phone through a tweeter and he also demanded action against Home Minister Rajnath Singh and UP Chief Minister Yogi Adityanath.

इस ट्वीट के बाद रोहित ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर उन नंबरों की पूरी लिस्ट साझा कि जिन नंबरों से उनको व उनके परिवार को लगातार धमकिया मिल रही थी. साथ ही लिखा कि “मुझे ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का मज़ा चखाने के लिए कोई आबिद! कोई नकवी, कोई हैदर- लखनऊ, गुजरात, अफ़्रीका में ओवरटाइम कर रहे हैं!”

After this tweet, Rohit shared a full list of the numbers on his Twitter account that the number of those who received constant threats from him and his family. Also wrote that “Abid me to enjoy the freedom of expression”! No nakvi, no haider- Lucknow, Gujarat, Africa are overtime! ”

https://youtu.be/g-H5DwYD5dc

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https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

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source vegnfress.com

पाकिस्‍तान से आए हिंदुओं ने किया खौफनाक खुलासा, बताई भारत की तबाही की तारीख- मोदी जी समेत पूरा देश सन्न

यह तो सब जानते है, पाकिस्तान किस तरह का देश है, और वह पर हिन्दू परिवारों के साथ कितना बुरा सलूक किया जाता है, यह बात तो सिर्फ वहां पर जो हमारे हिन्दू भाई रह रह रहे है, केवल वही इस बात को जानते है, और वहां पर किस तरह नरक में अपनी जिंदगी को काट रहे है, ऐसा ही हिन्दू परिवार पाकिस्तान से लोट कर अपने देश आ कर सुनाई अपनी दर्द भरी दास्तान!

It is known to all, what kind of country Pakistan is, and how badly it is done with Hindu families, only this thing which our Hindu brothers are living there, only they know this thing, And how they are cutting their lives in hell, the same Hindu family came to their country by laughing with their own painful story!

पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के साथ शारीरिक तथा मानसिक उत्पीड़न हो रहा है, जिसके कारण पाकिस्तान से हिन्दू भारत की तरफ भारी मात्रा में आ रहे है, इसके साथ ही भारत पहुंचे पाकिस्तानी हिन्दुओं ने उनके ऊपर हो रहे अत्याचारों के बारे में बताया, जिसे सुन ऐसा लग रहा है, मानो उन्हें वहां सांस लेने की भी आजादी ना हो!

In Pakistan, physical and mental harassment is happening with the Hindus on a large scale, due to which Hindu Hindus from Pakistan are coming in huge quantities towards India, along with the Pakistani Hindus who came to India, told about their atrocities Look, it sounds like they do not even have the freedom to breathe there!

उन्होंने यह भी बताया की बहुत जल्द यहाँ के बहुसंख्यक के अधिकार छीन लिए जायेंगे और अल्पसंख्यक हावी होकर भारत को भी मुस्लिम राष्ट्र में तब्दील कर देंगे ऐसा करने के लिए पाक और isis उन्हें लगातार भड़का रहा है जिसका सबूत मुजफ्फरनगर के दंगे है जिसमे खुद राहुल गाँधी ने कहा था की भारत के मुसलमान isi के सम्पर्क में है

They also told that very soon the rights of the majority will be stripped and minorities will dominate India into a Muslim nation. To do this, Pakis and Isis are constantly spreading them, which is proof of Muzaffarnagar riots, in which Rahul Gandhi himself Had said that the Muslims of India are in contact with isi

दरअसल पाकिस्‍तानी हिंदू परिवार मुजफ्फरनगर में थाना मंसूरपुर क्षेत्र के गांव दुधाहेड़ी में समाजसेवी जयविंद्र फौजी के आश्रम में पहुंचे , पाकिस्तानी हिन्दुओं का मुज्जफरनगर के लोगों ने स्वागत किया, और स्वामी प्रणवानंद ने मंत्र उच्चारण के साथ सभी पाकिस्तानी हिंदुओं का तिलक भी किया,

In fact, the Pakistani Hindu family reached the ashram of social worker Jaiwindra Fauji in Dudhhedi village of Mansoorpur area in Muzaffarnagar, the people of Pakistani Hindus were welcomed by the people of Muzaffarnagar, and Swami Pranavanand even tilak of all Pakistani Hindus with mantra,

इस अवसर पर वहां के लोगों ने पीड़ित परिवारों को रोजो-रोटी के साथ उनकी हर मुमकिन मदद करने का भरोसा दिलाया , और कहा कि वे उनके जीवन यापन के लिए जमीन और काम देगें, पीड़ि‍तों को शरण देने वाले जेविंद्र फौजी ने बताया कि अपनी करोड़ों की संपत्ति छोड़कर आए ये लोग अभी दिल्ली में ठहरे हुए हैं, लेकिन चार साल से किसी ने इनकी तरफ ध्यान तक नहीं दिया है !

On this occasion, the people of the city assured the victims families their help in every possible way, and said that they would give land and work for their livelihood, Javindra Fauji, who gave shelter to the victims, told that their crores These people who have left the property are still staying in Delhi, but for four years nobody has paid attention to them!

सब कुछ लिख पाना असंभव है आप यह विडियो देख लीजिये !!

https://youtu.be/mC-QRZ1_HhU

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https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source political news

करणी सेना का ‘पद्मावती’ पर बड़ा बयान, किसी भी रूप में फिल्म रिलीज हुई तो होगा….

जयपुर: संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के सुझाव को लेकर मीडिया रिपोर्ट पर राजपूत करणी सेना के तेवर अभी भी तीखे ही हैं. करणी सेना के नेता सुखदेव सिंह ने धमकी देते हुए कहा है, “अगर फिल्म रिलीज हुई तो हमारे कार्यकर्ता हर सिनेमा हॉल में तोड़-फोड़ करेंगे. फिल्म की समीक्षा के लिए जो कमेटी बनी थी उसने कई सीन को लेकर आपत्ति जताई लेकिन अंडर वर्ल्ड के दबाव की वजह से फिल्म को रिलीज करने का फैसला किया जा रहा है.”

उधर, राजपूत करणी सेना के संयोजक लोकेन्द्र सिंह कालवी के तेवर अभी भी तीखे ही हैं. उन्होंने कहा अभी तो बहुत से स्पष्टीकरण आने बाकी है, इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. मेरी दिशा स्पष्ट है, यह सब को पता है. दूसरी तरफ राजस्थान राजपूत सभा के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाडा ने कहा कि सेंसर बोर्ड कमेटी की सिफारिश को तवज्जो नहीं देकर फिल्म निर्माताओं की मदद करना चाहता है. यह देश का दुर्भाग्य है. हम लोकतांत्रिक तरीके से विवादित फिल्म पद्मावती का विरोध जारी रखेंगे. कालवी और लोटवाडा ने शुरुआती प्रतिक्रिया में यह कहा.

उन्होंने कहा अभी तो बहुत से स्पष्टीकरण आने बाकी है, इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. मेरी दिशा स्पष्ट है, यह सब को पता है. दूसरी तरफ राजस्थान राजपूत सभा के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाडा ने कहा कि सेंसर बोर्ड कमेटी की सिफारिश को तवज्जो नहीं देकर फिल्म निर्माताओं की मदद करना चाहता है. यह देश का दुर्भाग्य है. हम लोकतांत्रिक तरीके से विवादित फिल्म पद्मावती का विरोध जारी रखेंगे. कालवी और लोटवाडा ने शुरुआती प्रतिक्रिया में यह कहा.

कालवी ने कहा कि इस फिल्म को नौ लोगों की कमेटी को देखना था, लेकिन मात्र तीन सदस्यों ने फिल्म देखी है, तीनों सदस्यों ने क्या सिफारिश दी, यह सामने नहीं है. अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी है, हालांकि मैं जिस रास्ते पर चला था, आज भी उसी रास्त पर हूं. लोटवाडा ने कहा कि बोर्ड ने विवादित फिल्म पदमावती की समीक्षा के लिए जिस कमेटी का गठन किया था, वह कमेटी फिल्म को लेकर प्रतिकूल सिफारिश कर रही है तो फिर बोर्ड ने फिल्म में छब्बीस दृश्य को नहीं दिखाने और फिल्म का नाम बदलने का सुझाव क्यों दिया है

उन्होंने कहा कि बोर्ड को पारदर्शी होना चाहिए और उसे राष्ट्र हित में सोचना चाहिए. बोर्ड अपने द्वारा गठित कमेटी की सिफारिश को नहीं मान रहा है तो फिर कमेटी गठित ही क्यों की गई थी. हमारा लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा. अगली क्या रणनीति​ होगी, यह बातचीत करने के बाद तय किया जाएगा. मेवाड़ राजघराने के सदस्य लक्ष्यराज मेवाड़ ने कहा कि पद्मावती को लेकर अभी हाल में मीडिया से ही जानकारी मिली है, जब तक पूरी स्थिति सामने नहीं आ जाती, कुछ कहना उचित नहीं होगा.

सीबीएफसी द्वारा गठित ‘विशेष पैनल’ में उदयपुर से अरविंद सिंह, डॉ चन्द्रमणि सिंह और जयपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के के सिंह शामिल थे. गठित कमेटी में शामिल में अरविंद सिंह, डॉ चन्द्रमणि सिंह और जयपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केके सिंह से इस बारे में सम्पर्क नहीं हो सका.

गौरतलब है कि फिल्म पद्मावती शूटिंग के साथ ही विवादो के साये में रही है. पद्मावती में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर दिखाने की तैयारी में फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के साथ जयपुर में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने दुर्व्यवहार किया और शूटिंग स्थल पर जमकर तोड़फोड़ की थी. विवादित फिल्म पद्मावती पर रोक लगाने की मांग को लेकर देश भर में पिछले दिनों जमकर प्रदर्शन हुए हैं. जिसके बाद भाजपा शासित प्रदेशों ने जारी विरोध को देखते हुए फिल्म पदमावती के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी .

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https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

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source zee news

सुपर स्टार रजनीकांत ने लांच की राजनीति पार्टी तो सुब्रमण्यम स्वामी ने दे डाला ये विवादित बयान..

नई दिल्ली : दक्षिण फिल्मों के सुपर स्टार रजनीकांत ने आज वर्ष 2017 के आखिरी दिन अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही एक नई पार्टी का गठन करेंगे और आने वाले विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे. उनकी इस घोषणा से जहां उनके प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उन्हें अनपढ़ कह कर रजनीकांत के इस कदम की आलोचना की है.

New Delhi: Superstar Rajinikanth, who announced the launch of his political career on the last day of the year 2017, He said that he will soon form a new party and will stand his candidates in the forthcoming assembly elections. Whereas his enthusiasm in his announcement with this announcement, senior BJP leader Subramaniam Swamy has criticized him for saying this as an illiterate and this move of Rajinikanth.

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि रजनीकांत ने राजनीति में आने की घोषणा तो कर दी लेकिन उनके पास नई पार्टी बनाने के ना कोई डाक्यूमेंट हैं ना ही कोई विस्तृत अध्ययन. उन्होंने कहा कि रजनीकांत अनपढ़ हैं और ऐसा वह मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए कर रहे हैं. सुब्रमण्यम ने कहा कि तमिलनाडु की जनता इंटेलीजेंट है, वह उनके बहकावे नहीं आएगी. सुब्रमण्यम स्वामी इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने कहा कि रजनीकांत को पहले राजनीतिक पार्टी के नाम और उनके उम्मीदवारों की घोषणा करने दो, फिर वह उनके कारनामे उजागर करेंगे. उधर, दक्षिण फिल्मों के मशहूर अभिनेता कमल हासन ने रजनीकांत के इस कदम का स्वागत करते हुए उन्हें बधाई दी है.

Subramaniam Swamy said that Rajinikanth has announced the arrival of politics but he has no document to make a new party or any detailed study. He said that Rajinikanth is illiterate and he is doing this to stay in the media headlines. Subramaniam said that the people of Tamil Nadu are intelligible, they will not be misled by them. Subramaniam Swami did not stop at all. He said that Rajinikanth should first announce the names of the political party and their candidates, then they will expose their exploits. On the other hand, the famous South Korean film actor Kamal Haasan congratulated Rajinikanth for welcoming this move.

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बता दें कि रजनीकांत के राजनीतिक सफर को लेकर लंबे समय से चल रहा अटकलों का दौर आज रविवार का समाप्त हो गया. इस बात की घोषणा सुपर स्टार ने अपने प्रशंसकों के बीच की. चेन्नई स्थित श्रीराघवेंद्र कल्याण मंडप में रजनीकांत ने यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर राजनीतिक दल हमारी ही जमीन पर हमें ही लूटने का काम कर रहे हैं. इस परंपरा को बदले की जरूरत है.

Let’s say that the long-running speculation about Rajinikanth’s political journey ended Sunday. This announcement is made between Superstar and his fans. Rajinikanth announced this in the Sriraghvendra Kalyan Mandap located in Chennai. He said that in the name of democracy political parties are working to rob us only on our own land. This tradition needs to be replaced.

रजनीकांत ने कहा कि आज लोकतंत्र का स्वरूप बिगड़ गया है. तमिलनाडु को लेकर लोग मजाक उड़ाते हैं, ऐसे में अगर वह कोई फैसला नहीं लेते हैं तो वह खुद को दोषी मनेंगे. उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल ना होकर एक नई पार्टी बनाएंगे और उनकी पार्टी तमिलनाडु के आने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेंगे. उन्होंने कहा कि सच्चाई, कर्म और विकास ही उनकी पार्टी का मूल मंत्र होगा.

Rajinikanth said that the nature of democracy has worsened today. People make fun of Tamil Nadu, if they do not take any decision, then they themselves will be guilty. He said that he will not join a political party and create a new party and his party will take its candidates in the forthcoming assembly elections in Tamil Nadu. He said that truth, work and development will be the basic mantra of his party.

रजनीकांत ने चार दिन पहले अपने प्रशंसकों से कहा था कि चार दिन और इंतजार करो, चार दिन बाद वह नया खुलासा करेंगे. रविवार की सुबह घर से निकलते हुए भी मीडिया से उन्होंने यही कहा कि थोड़ा सब्र करें, वैंकट हाल पहुंचने पर वह एक बड़ी घोषणा करेंगे. वह पिछले कई दिनों से इस वैंकेट हाल में अपने प्रशंसकों से मुलाकात कर रहे हैं. मुलाकात का उनका आज आखिरी दिन था. उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा कि वह राजनीति में नए नहीं है.

Rajinikanth had told his fans four days ago that wait four days, four days later he will reveal new. Even after leaving the house on Sunday morning, he told the media that he had a lot of patience, he would make a big announcement when he reached Wankat Hall. He has been meeting his fans recently in this vauncate for several days. His meeting was his last day today. He told his fans that he is not new to politics.

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हिंदुस्तान से प्रेरणा पाकर, ईरान में इस्लाम के खिलाफ जिहाद- लगे इन नारों से थर्राया पूरा रामल्ला..

ईरान में इस्लाम और वहां की सरकार जिसे एक मौलाना रूहानी चला रहे है, उनके खिलाफ लोगों ने जबरजस्त और भीषण प्रदर्शन शुरू कर दिया है, लोगों ने इस्लाम विरोधी नारे लगाने शुरू किये है, महिलाओं ने भी बुरखा उतारना शुरू कर दिया है, और ईरान की सडको पर भीषण प्रदर्शन चल रहा है

In Iran, the people who are running a Maulana Rouhani, people have begun to perform enormous and horrific demonstrations, people have started putting anti-Islam slogans, women have begun to take off, and Iran There is a horrific demonstration on the road

प्रदर्शन सरकार और इस्लाम दोनों के खिलाफ चल रहा है, और मुसलमान ये भी नारे लगा रहे है की, “हम आर्यन है, हमपर अरबी अल्लाह थोप दिया गया है”, इस तरह के इस्लाम विरोधी नारे ईरान की सडकों पर सुने जा रहे है, और लोग इस्लाम छोड़ने की बात कर रहे है, ये भी कह रहे है की, इस्लाम उनके देश को छोड़कर जाए, देखें वीडियो

The demonstration is going on against both the government and Islam, and the Muslims are also shouting that “we are Aryans, we have been imposed on Arabic”, such anti-Islam slogans are being heard on the streets of Iran, And people are talking about leaving Islam, they are also saying that Islam should leave their country, see video

https://twitter.com/kachalmooferfer/status/946367938784882688

ईरान के लोग इस्लामिक धर्मगुरुओं को कह रहे है की, तुमपर शर्म है तुम हमारे देश को छोड़कर जाओ, लोग ये भी कह रहे है की हमे इस्लामिक शासन अब नहीं चाहिए, इस्लामिक शासन हमारे देश को छोड़कर अरब में जाये, लोग ये भी कह रहे है की हम आर्यन है, हमपर अरबी अल्लाह थोप दिया गया है

The people of Iran are saying to Islamic religious leaders that you are ashamed to leave our country, people are also saying that we do not want Islamic rule now, Islamic rule should leave our country and go to Arabia, people say this also Is that we are Aryan, we have been imposed Arabic Arabic

आपकी जानकारी के लिए बता दें की ईरान पहले एक पारसी देश ही था, बाद में इस्लामिक हमलावरों ने सभी का धर्मांतरण कर दिया, 1970 तक ईरान में काफी हद तक आज़ादी थी, फिर वहां पर शरिया इत्यादि लागू कर दिया गया, महिलाओं को बुर्खों में कैद कर दिया गया, और अब 2017 आते आते ईरान के लोग इस्लामिक शासन से इस तरह परेशान हो गए है की सड़कों पर भीषण प्रदर्शन करने लगे है

For your information, let Iran know that it was only a Parsi country later, after the Islamic invaders converted all of them, until 1970, there was a great extent of freedom in Iran, then Sharia etc. were applied there, women were in bad Captured, and now 2017, the people of Iran have become disturbed by Islamic rule in such a way that they have started to perform horrors on the streets.

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PM मोदी से मिली जीत की बधाई पर विश्वनाथन आनंद का ये जवाब सुनकर आपका सीना गर्व से फूल जाएगा

विश्वनाथन आनंद ऐसा नाम है जो किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है| न सिर्फ हिन्दुस्तान में, बल्कि सारे विश्व में उनका इतना रसूख सिर्फ इसलिए नहीं है कि वे शतरंज के बेताज बादशाह रहे हैं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि उनका व्यक्तित्व एक अति सुलझे इंसान का है!

Viswanathan Anand is a name which is not an introduction to any introduction. Not just in India, but in all the world, he is not just because he is the uncaring ruler of chess, but also because his personality is of a very compact person!

ख़ुशी मनाने के मौके तो आनंद को अनगिनत बार मिले हैं, लेकिन बीतते वर्ष के इस अंतिम महीने की 28 तारीख उनके लिए और भी यादगार साबित हुई| इस दिन उन्होंने रूस के व्लादिमीर फेदोसीव को हराकर वर्ल्ड रैपिड चेस का खिताब अपने नाम किया| और ये इतना ख़ास इसलिए रहा, क्योंकि यहाँ उन्होंने 2013 में इसी प्रतिद्वंदी द्वारा मिली हार का हिसाब भी चुकता कर दिया!

Anand has met countless times on the occasion of celebrating happiness, but the 28th of this last year of the year has proved to be more memorable for him. On this day, he defeated Vladimir Fedosiv of Russia to name the World Rapid Chase. And this was so special, because here in 2013, they paid the account of the defeat given by this opponent!

और इस शानदार जीत के साथ आनंद ने न सिर्फ आलोचकों को करार जवाब दिया, बल्कि हमारा सर गर्व से ऊँचा भी किया| और फिर चला सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों का दौर!

And with this glorious victory, Anand did not only answer the deal to the critics, but also lifted our head proudly. And then run the message of congratulations on social media!

हमारे राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री ने ख़ास तौर पर आनंद को सम्बोधित करते हुए ट्विटर पर बधाई दी| लेकिन जिस बात ने पुरे हिन्दुस्तान का दिल जीत लिया, वो था आनंद द्वारा मोदी कि ट्वीट पर दिया गया जवाब|

Our President and Prime Minister specially congratulated Twitter on the occasion and congratulated him on Twitter. But what made the whole of Hindustan win the heart was that Anand gave the answer given on Modi’s tweet.

पहले देखिये मोदी ने किस तरह आनदं को बधाई दी:

और ये सन्देश मिलते ही बिना कोई समय गवाएं आनंद ने ये शानदार जवाब देकर हम सब का दिल जीत लिया:

अब आप ही बताईये कि आपको कैसा लगा आनंद का ये जवाब? किसी भी सच्चे हिन्दुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाए, ऐसी बात उनके इस सादगी और ईमानदारी से भरे जवाब में जरूर थी|

आपको बता दें कि आनंद के ये जीत इतने ख़ास मायने क्यों रखती है| दरअसल पिछले कुछ समय से कुछ ख़ास न कर पाने की वजह से उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था| लेकिन अब इसमें कोई संदेह नहीं कि ऐसा शानदार खेल प्रदर्शन और जवाब पाकर सबके मुह बंद हो गये होंगे!

Let us tell you why these victories of joy are so special. In fact, because of not being able to do something special for some time, he had to face much criticism. But now there is no doubt that such a great game performance and answer will have stopped all the faces!

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source theindianvoice.com

UP के बाद अब उत्तराखंड में मदरसों से बगावत के बोल, ओवैसी समेत आजम के पैरों तले खिसकी जमीन…

देहरादून : मुस्लिम संगठनों के विरोध के बावजूद तीन तलाक पर बिल लोकसभा में पास हो चुका है. हालांकि मुस्लिम महिलाऐं इससे काफी खुश है. अब मदरसों को लेकर भी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिससे मुस्लिम संगठन एक बार फिर विरोध में उतर आये हैं. दरअसल अब जल्द ही मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जायेगी. सबसे ख़ास बात तो ये है कि मदरसों ने ये मांग खुद ही की है.

Dehradun: Despite the opposition from Muslim organizations, the bill has been passed in the Lok Sabha on three divorces. Although Muslim women are very happy with this. There is also a big news about the madarsas, which has brought Muslim organizations once again in protest. In fact, soon Sanskrit will be taught in the madarsas. The most important thing is that the madarsas have made these demands themselves.

मदरसों में संस्कृत पढ़ेंगे मुस्लिम बच्चे?
उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाने की मांग हुई है. प्रदेश की मदरसा वेलफेयर सोसायटी (एमडब्ल्यूएस) के सदस्यों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर इसकी मांग की है. प्रदेश की 207 मदरसों का प्रतिनिधित्व करने वाली एमडब्ल्यूएस ने 8 दिसंबर को मुख्यमंत्री रावत को इस बाबत पत्र लिखा था.

Muslim children to study Sanskrit in madarsas?
There has been a demand for Sanskrit teaching in the madarsas of Uttarakhand. Members of the Madrasah Welfare Society (MWS) of the state have written a letter to Chief Minister Trivendra Singh Rawat and demanded it. The MWS, which represented 207 madrassas of the state, had written a letter to Chief Minister on December 8 this year.

उन्होंने अपने पत्र में अपील की थी कि सूबे के मदरसों से संस्कृत के शिक्षकों को भी जोड़ा जाए ताकि वहां के पाठ्यक्रम में संस्कृत को जोड़ा जा सके. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ एमडब्ल्यूएस के चेयरपर्सन सिब्ते नाबी ने कहा है कि राज्य के 207 मदरसों ने हमारे इस सुझाव का खुशी से स्वागत किया है. हम चाहते हैं कि मदरसे के छात्रों का भविष्य उज्जवल हो और वो आयुर्वेद की पढ़ाई भी कर सकें.

He had appealed in his letter that teachers of Sanskrit should also be added to the Madarsas of the state so that the Sanskrit could be added in the courses there. According to the report of the Indian Express, MVS chairperson Sibte Naabi has said that 207 madrassas of the state have happily welcomed our suggestion. We want the future of the students of madrassas to be bright and they can also study Ayurveda.

आयुर्वेद सीखने के लिए संस्कृत जरूरी
उन्होंने कहा कि फिलहाल मदरसे के छात्रों के लिए यह एक नामुमकिन सी बात है, क्योंकि आयुर्वेद की पढ़ाई में संस्कृत भाषा का इस्तमाल होता है और मदरसे के छात्रों को संस्कृत भाषा आती ही नहीं. इसलिए उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से अपील करते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा पर खर्च होने वाले पैसे का उपयोग यहां के 25,000 छात्रों को संस्कृत की शिक्षा प्रदान करने के लिए होना चाहिए.

Sanskrit needed to learn Ayurveda
He said that this is an impossible thing for the students of Madarsa at the moment, because Sanskrit is used in the education of Ayurveda and the students of the madarsa do not have Sanskrit language. Therefore, he appealed to the central government of Modi and said that the money spent on education in the state should be used to provide Sanskrit education to 25,000 students here.

मुस्लिम संगठन खिलाफत में उतरे
वहीँ कई मुस्लिम संगठन इस मांग के खिलाफ खड़े हो गए हैं. मुस्लिम बच्चों को संस्कृत भाषा का ज्ञान हो, ऐसा उन्हें कतई मंजूर नहीं. प्रदेश के मदरसा बोर्ड ने भी एमडब्ल्यूएस की इस मांग को अव्यावहारिक बताते हुए मानने से इनकार कर दिया है.

Muslim organizations go to Khilafat
Many Muslim organizations have stood there against this demand. Muslim children do not know how to get knowledge of Sanskrit language; The Madarsa Board of the state has also refused to accept the demand of the MWS as impractical.

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अखलाक अहमद अंसारी ने एमडब्ल्यूएस के इस सुझाव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मदरसों में संस्कृत की शिक्षा को लेकर हमें कोई पत्र नहीं मिला है और न ही किसी ने जानकारी दी है.

Uttarakhand Madarsa Education Board deputy registrar Akhlaq Ahmed Ansari rejected the suggestions of the MWS and said that we have not received any letter regarding Sanskrit education in Madarsas and no one has given the information.

मदरसा बोर्ड की अरबी और फारसी को प्राथमिकता
अंसारी ने कहा कि मदरसों के पाठ्यक्रम में संस्कृत को जोड़ने से तकनीकी समस्या होगी. हिंदी और अंग्रेजी हमारी प्राथमिकता हैं, जिन्हें मदरसों में पढ़ाया जाना आवश्यक है. इसके अलावा मदरसों में केवल एक ही अतिरिक्त भाषा पढ़ाई जा सकती है, जिसके लिए हमारे पास विकल्प के तौर पर अरबी और फारसी है. ऐसे में एक और भाषा संस्कृत को मदरसे के पाठ्यक्रम में जोड़ना अव्यावहारिक होगा. उन्होंने कहा कि हम संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए अरबी या फारसी को नहीं छोड़ सकते हैं.

Priority of Arabic and Persian of Madrasah Board
Ansari said that connecting Sanskrit to madrassas courses would be a technical problem. Hindi and English are our priorities, which are required to be taught in the madarsas. Apart from this, only one additional language can be taught in madarsas, for which we have Arabic and Persian as an alternative. In such a way it would be impractical to add another language to Sanskrit in the madarsas curriculum. He said that we can not leave Arabic or Persian to include Sanskrit in the curriculum.

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मोदी सरकार ने लिया जाधव के परिवार की बेइज्जती का बदला, किया ऐसा काम पूरे देश ने ठोका सलाम- पाक का हुआ बुरा हाल……

इस्लामाबाद : भारत ने ईंट का जवाब पत्थर से देना शुरू कर दिया है. पहले भारतीय जवानों की मौत का बदला लेते हुए भारतीय सेना ने एलओसी पार करके पाकिस्तान की सैन्य चौकियों को तबाह करते हुए पाक सैनिकों की लाशें बिछा दी. और अब कुलभूषण जाधव की मां व् पत्नी का अपमान करके भी पाकिस्तान ने खुद के पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार ली है. भारत ने पाकिस्तान को इसका जवाब दिया है.

ISLAMABAD: India has started giving the answer to the brick by stone. Taking the revenge of the death of the first Indian soldiers, the Indian Army crossed the LoC and demolished Pakistan’s military checkpoints and laid the bodies of the Pak soldiers. And now, by insulting the mother and wife of Kulbhushan Jadhav, Pakistan has hit the ax on itself. India has responded to Pakistan.

192 पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा देने से भारत का इंकार
दरअसल भारत की और से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज लगातार जरूरतमंद पाकिस्तानियों को भारत का वीजा दिए जा रही थी, उनकी सम्मानपूर्वक पूरी सहायता की जा रही थी. मगर अब पाकिस्तानियों के लिए भारत के दरवाजे बंद हो गए हैं.

India denies visa to 192 Pakistani nationals
Indeed, the Foreign Minister Sushma Swaraj was continuously giving India visas to the needy Pakistanis, and her whole-hearted support was being done. But now the doors of India are closed for the Pakistanis.

पाकिस्तान ने शनिवार को दावा किया है कि भारत ने उसके करीब 200 नागरिकों को वीजा देने से इनकार कर दिया है, जो भारत में हजरत निजामुद्दीन औलिया के उर्स में भाग लेना चाहते थे. पाकिस्तान के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान को दुःख है कि 1 से 8 जनवरी तक नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे उर्स में 192 पाकिस्तानी जायरीनों को भारत ने वीजा नहीं दिया.

Pakistan has claimed on Saturday that India has refused to grant Visa to nearly 200 citizens who wanted to participate in Urs of Hazrat Nizamuddin Auliya in India. Pakistan’s Foreign Office said in a statement that Pakistan is sad that India has not given visa to 192 Pakistani Jairans in Urs going to be held in New Delhi from 1st to 8th January.

ना’पाक ने बहाये घड़ियाली आंसू
बयान में कहा गया है, ”भारत के फैसले के कारण पाकिस्तानी जायरीनों को उर्स में भाग लेने का मौका नहीं मिल पाएगा. उर्स का एक खास महत्व है. यह यात्रा धार्मिक स्थलों के दौरे पर 1974 के पाकिस्तान-भारत प्रोटोकॉल के प्रावधानों के तहत होनी थी और यह एक वार्षिक प्रक्रिया है.”

Naypak sheds gaudical tears
According to the statement, “due to India’s decision, Pakistani Jairans will not be able to get a chance to participate in Urs. Urs has a special significance. This visit was to be done under the provisions of the Pakistan-India Protocol on Religious Places Tour, 1974 and it is an annual process.

बयान के अनुसार, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है और 1974 प्रोटोकॉल तथा लोगों से लोगों के संपर्क के उद्देश्य की भावना के खिलाफ है.” इसमें कहा गया है कि द्विपक्षीय प्रोटोकॉल और धार्मिक आजादी के मूल मानवाधिकार का उल्लंघन होने के साथ ही ऐसे कदमों से माहौल बेहतर बनाने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है.

According to the statement, “This is unfortunate and is against the spirit of 1974 protocol and the purpose of contact with people.” It says that with the violation of the basic human rights of bilateral protocols and religious freedom, Attempts to create, interact among people and normalize the relations between the two countries are damaged.

भारत की दोस्ती के लायक ही नहीं ना’पाक
पाकिस्तान के विदेश विभाग ने कहा, ”यह विडंबना है कि यह हजरत निजामुद्दीन औलिया के उर्स के मौके पर किया गया जो समुदायों को एक-दूसरे के करीब लाने के प्रतीक हैं.” वहीँ सोशल मीडिया में लोगों ने भारत के इस फैसले पर ख़ुशी व्यक्त की है. लोगों का कहना है कि आतंकी देश पाकिस्तान ने देश की माँ-बेटी का अपमान किया है, ऐसे में उसने भारत की दोस्ती का अधिकार ही खो दिया है. किसी भी पाक नागरिक को भारत का वीजा नहीं दिया जाना चाहिए.

Not only worth the friendship of India
Pakistan’s Foreign Office said, “It is ironic that this was done on the occasion of Urs of Hazrat Nizamuddin Auliya, which is a symbol of bringing communities closer to each other.” In the same social media, people expressed their happiness on this decision of India Is of People say that the terrorist country Pakistan has insulted the mother and daughter of the country, in this case it has lost the right to friendship of India. No Pak citizen should be given visa to India.

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source zee news