अभी अभी: डेनमार्क ने दिया सेकुलरो को तगड़ा झटका, वामपंथी समेत कांग्रेस के उड़े होश..

डेनमार्क अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध पर अभी कुछ समय पहले ये देश कुछ अलग कारणों के लिए समाचारो की सुर्खियों में रहा है। पहले धार्मिक मुद्दों के कारण और फिर बढ़ती हुई स्थानीय लोगो और मुसलमानों के बीच लगातार झड़प ने डेनमार्क को सुर्खियों में ला दिया । इन झड़पो के बढ़ने का कारण मध्य पूर्व के प्रवासियों की बढ़ती हुई आबादी है जिनसे आये दिन विवाद पनप रहे है इसके अलावा और भी कई कारण है।

अब डेनमार्क सरकार ने स्थानीय कल्याणकारी कार्यकर्ताओं से प्रचार के वर्षों के बाद मांस के उत्पादन के लिए जानवरों के धार्मिक वध पर प्रतिबंध लगाया है। यह विवादास्पद कानून पिछले हफ्ते घोषित किया गया है और कल के रूप में प्रभावी है, जिसे यहूदी नेताओं द्वारा “विरोधी जातिवाद” कहा जाता है और गैर लाभ समूह दानिश हलाल द्वारा “धार्मिक स्वतंत्रता में एक स्पष्ट हस्तक्षेप” कहा जाता है।

यूरोपीय नियमों के मुताबिक, जानवरों को बलि के पहले वह पशु बुरी तरह से डरा हुआ होता है, लेकिन उसके वध की धार्मिक आधार पर छूट दी जाती है। इस्लामी कानून के तहत यहूदी कानून या हलाल के तहत कोषेर को माना जाने वाला मांस, मारे जाने पर पशु जागरूक होना चाहिए। हालांकि, इस छूट को हटाने के अपने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए, कृषि और खाद्य मंत्री डेन जोर्गेन्सन ने डेनमार्क के टीवी 2 को बताया कि “पशु अधिकार धर्म से पहले आते हैं”। यह कथन निश्चित रूप से डेविड के छद्म सेक्युलर और लिबरल की भावनाओं तथा तथाकथित सिविक सोसायटी को चिंतित करेगा।

इस बदलाव पर टिप्पणी करते हुए, इजरायल के धार्मिक मंत्री रब्बी एली बेन डहन ने यहूदी दैनिक फॉरवर्ड को बताया: “यूरोपियन विरोधी सेमेटिज़्म पूरे यूरोप में अपने असली रंग दिखा रहा है, और यहां तक ​​कि सरकारी संस्थानों में ये प्रभावी हो चुका है।” दूसरी ओर धार्मिक समूहों ने इस आदेश के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है। एक नियन्त्रक समूह डेनिश हलाल ने प्रतिबंध के खिलाफ एक याचिका पेश की, जिसमें कहा गया है कि यह “धार्मिक स्वतंत्रता में एक स्पष्ट हस्तक्षेप है, जो मुस्लिमों और यहूदियों के अधिकारों को डेनमार्क में अपने धर्म का पालन करने के लिए सीमित करता है”।

हालांकि इस अचानक प्रतिबंध ने देश में राय विभाजित कर ली है, खासकर जब हाल ही में कोपेनहेगन चिड़ियाघर ने “अधिशेष” युवा जिराफ “मारियस” की बलि के बाद पशु कल्याण नीति विभाग वालो ने उसे सुर्खियों में ला दिया

पिछले साल ब्रिटिश राजनेताओं ने कहा कि वे आरएसपीसीए, नेशनल सेक्युलर सोसायटी और अन्य कार्यकर्ताओं के “मजबूत दबाव” के बावजूद धार्मिक वध पर प्रतिबन्ध नही लगाएंगे। चाहे वह जानवरों का प्रयोग खेती में हो या जानवर का वध भोजन के लिए हो, वहाँ एक सरल बात है जिसे शिष्टता कहा जाता है

जब आप जानवरों की हत्या के धार्मिक कारणों पर विचार करते हैं जब यह जीवित था, यह केवल एक ही उद्देश्य के लिए था यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों मृत जानवरों को नहीं खाये जिससे वो रोगग्रस्त हो सकते थे।

अब जबकि ये खाद्य स्रोतों से दूषित होने से ‘लोगों की रक्षा’ का मुद्दा नहीं है, तो ‘यह मेरा धर्म है’ का तर्क इसकी योग्यता खो देता है एक धार्मिक कर्तव्यों की तकनीकी द्वारा मंत्रमुग्ध किए जाने की बजाय एक कार्रवाई की योग्यता पर सवाल उठाने से समाज में सभी को एक लंबा रास्ता मिल सकता है?

पिछले साल के ब्रिटेन के राजनेताओं ने कहा कि वे आरएसपीसीए, नेशनल सेक्युलर सोसायटी और अन्य कार्यकर्ताओं के “मजबूत दबाव” के बावजूद धार्मिक वध पर प्रतिबंध नही लगाएंगे

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

खास खबर: शांतिदूतों पर टूटा मौत का ज़बरदस्त कहर, मस्जिद बम ब्लास्ट में राख हुए नमाज़ी

नई दिल्ली : आतंकवाद आज केवल एक देश या एक धर्म के खिलाफ नहीं रह गया है | जो आतंकवाद को पालेगा पोसेगा उसे भी यह आतंकवाद खा जाएगा और मासूम लोगों पर तो कहर बरपाता ही रहता है | अगर एक धर्म के लोगों को लगता है कि वे आतंकवाद से बच जायेंगे तो ये उनकी ग़लतफहमी है | ऐसी ही खबर अभी नाइजीरिया से आ रही है जहाँ एक मस्जिद में भयंकर धमाका हुआ है |

New Delhi: Terrorism is no longer against a single country or a religion Even if terrorism is found, it will also eat terrorism and continue to torment innocent people. If people of one religion think that they will escape terrorism, then this is their misunderstanding Such a news is just coming from Nigeria where there is a huge explosion in a mosque.

अभी-अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक पूर्वोत्तर नाइजीरिया की एक मस्जिद में बड़े आत्मघाती हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है ओर दर्जनों घायल बताये जा रहे हैं | एडमवा राज्य में किशोर बॉम्बर ने उस समय खुद को उड़ा दिया जब लोग मस्जिद में सुबह की नमाज़ अदा करने के लिए पहुंच रहे थे | किशोर ने अपने जैकेट में घातक बम लगा रखा था | धमाका इतना भीषण था कि लोगों कि चीथड़े तक नहीं मिल पा रहे हैं |

According to the latest news, at least 50 people have died and dozens more injured are being reported in a major suicide attack in a mosque in northeast Nigeria. Kishore Bomber blew himself in the state of Edwawa when people were arriving in the mosque for morning prayer. The teenager had put a deadly bomb in his jacket The explosion was so gruesome that people are not able to get the screw.

धमाके की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है | पुलिस प्रवक्ता ओथमान अबुबकर ने बताया कि वारदात में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है | हालांकि हमले की जिम्मेदारी का किसी आंतकी संगठन ने कोई दावा नहीं किया लेकिन “बोको हरम” पर इस हमले की आशंका जताई जा रही है | ये इस्लामी चरमपंथी समूह पड़ोसी राज्य बोर्नो में स्थित है और इस तरह के कई हमलों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है |

The intensity of the blast was so great that the number of people killed is increasing Police spokesman Othman Abubakar said that the number of people killed in the incident can increase Although no terrorist organization claimed responsibility for the attack, but the “Boko Haram” is being feared for this attack. These Islamic extremist groups are located in neighboring Bornoo and have been convicted for many such attacks.

डमवा का शहर मुबी है जहां 2014 में बोको हरम का कब्‍जा था लेकिन बाद में सेना ने 2015 में आतंकियों को निकाल दिया था. आज ये आतंकवादी संगठन ही आपस में एक दूसरे के आतंकी संगठन के खात्मे पर तुले हुए हैं. हर कोई अपने आतंकवाद को एक दूसरे की आतंकवाद से ऊँचा बताने पर तुला हुआ है. जिसकी कीमत उन निर्दोष लोगों को अपनी जान गँवा कर चुकाना पड़ रहा है और यहाँ कुछ लोग भारत को असहिष्णु देश बताते हैं |

The town of Damwa is a mubi where Boko Haram was occupied in 2014 but later the army fired the terrorists in 2015. Today, these terrorist organizations are bent upon the end of each other’s terrorist organization. Everyone is bent on telling terrorism higher than each other. The price of those innocent people has to be lost due to their lives and some people here call India an intolerant country.

भारत छोड़ कर दूसरे देश में बसने की बात करते हैं | जबकि दूसरे बड़े देशों बड़े आतंकी हमले हो रहे हैं | अमेरिका में अभी एक शख्स ने ‘अल्लाह हू अकबर’ बोलकर लोगों पर ट्रक चढ़ा दिया. जिसके बाद कई मुस्लिम देशों के लोगों की एंट्री पर ही बैन लगा दिया है | तो वहीँ चीन ने तो मुस्लिम लोगों से कुरान और नमाज़ की चटाई तक छीन ली |

Talk about leaving India and settling in another country While other major countries are facing big terror attacks In America, a person has ordered a truck on people to speak ‘Allah Hu Akbar’. After which the people of many Muslim countries have banned the entry of the people So China itself took away the Muslim people from the Koran and Namaz mat

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=Dhl7blIhWec

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

source guiltfree.online

VIDEO : इस हिन्दू कलाकार ने हिन्दू धर्म पर दे डाला ये बड़ा बयान, फिल्म निर्माताओं के उड़े होश !

फ़िल्मी लोग हिन्दू धर्म पर लगातार चोट कर रहे है, और मुकेश खन्ना ने इसके लिए फ़िल्मी लोगों के अलावा हिन्दू समाज को भी दोषी ठहराया है, जो की चुप रहता है, विरोध के लिए अपने स्वर बुलंद नहीं करता, वहीँ दूसरे समुदाय के लोग तो कत्लेआम पर उतारू हो जाते है, तलवारें निकलने लगती है |

Films are constantly hurting Hindu religion, and Mukesh Khanna has blamed Hindu society other than the filmmakers for it, which remains silent, does not raise its tone for the opposition, the other community people Slaughtered on slaughter, swords start coming out.

हिन्दुओ को फिल्मबाजो ने सॉफ्ट टारगेट बनाया हुआ है, हिन्दुओ की सहिष्णुता को कमजोरी समझ लिया गया है, और सहिष्णुता अब महानता नहीं बल्कि कमजोरी की प्रतिक बनकर रह गयी है, और यही बात कलाकार मुकेश खन्ना ने भी कहीं जिन्होंने महाभारत सीरियल में भीष्म का किरदार निभाया था |

Hindus has created a soft target, the tolerance of Hindus has been deemed to be a weakness, and tolerance has now become a symbol of greatness, not a weakness, and the same thing is done by artist Mukesh Khanna, who also portrayed Bhishma in the Mahabharata serial Was played.

आजकल कई सारे महाभारत बनाये जा रहे है, जिसमे कुंती, गांधारी, सत्यवती इत्यादि को चुड़ैल के रूप में दिखाया जाता है, हिन्दू धर्मग्रंथो से डायरेक्टर अपने मन मुताबिक छेड़छाड़ करता है, इतिहास से छेड़छाड़ करता है, और जो अच्छा लगता है, अपने अजेंडे के हिसाब से दिखाता है, हिन्दू धर्म का मजाक बनाया जाता है |

Nowadays, many Mahabharata is being built, in which Kunti, Gandhari, Satyavati etc. are shown as a witch, from Hindu scriptures, the director tamper with his mind, tamper with history, and who feels good, his agenda According to the, the joke of Hindu religion is made.

और हिन्दू इतना सहिष्णु है, की वो चुपचाप सहता रहता है, सहते सहते अब हिन्दू को तो इस बात का आभास भी नहीं होता की उसका अपमान किया जा रहा है या नहीं, और धीरे धीरे इन फिल्मबाजो ने हिन्दू धर्म को सॉफ्ट टारगेट बना लिया है, पैसा कमाने के लिए हिन्दुओ पर निशाना लगाना आम सी बात हो चली है |

And Hindus are so tolerant, that they tolerate quietly, tolerate it; Now Hindus do not even realize the fact that they are being insulted or not, and gradually these films have made Hinduism a soft target. It is a common thing to target Hindus to make money.

इसके उलट ये फिल्मबाज़ लोग दूसरे धर्मों को बिलकुल भी नहीं छूते क्यूंकि इनको पता है की सहिष्णु सिर्फ हिन्दू ही है, अन्य धर्मों के लोग तलवारे निकाल लेंगे, और इसी कारण फिल्मबाजो के निशाने पर सिर्फ और सिर्फ हिन्दू धर्म ही है, क्यूंकि हिन्दू ही मूक है, निष्क्रिय है, सहिष्णु है |

On the contrary, the filmmakers do not touch other religions because they know that tolerant is only Hindu, people of other religions will get soles, and that is why only the Hindu religion is the target of the filmbazaar, because Hindu is silent It is passive, tolerant.

https://twitter.com/purvinsuthar/status/931781454723473414

यह भी देखो :

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source guiltfree.online

बड़ी खबर: PM मोदी को लेकर चीन से आयी ऐसी जबरदस्त खबर, जिसे सुन पाक के उड़े होश….

आज पीएम मोदी का राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोलबाला हैl सभी भारतीयों को ये जानकर ख़ुशी होगी कि चीनी मीडिया ने भी भारतीय प्रधानमंत्री का लोहा माना है। ‘शिन्हुआ’ चीन की एक समाचार एजेंसी है जिसने 2017 को राजनीति में ‘ब्रांड मोदी’ घोषित किया है।

Today PM Modi is not only national but also internationally. All Indians will be happy to know that Chinese media has also been considered as iron of Indian Prime Minister. ‘Xinhua’ is a news agency in China who has declared 2017 as a ‘Brand Modi’ in politics.

एजेंसी ने हाल ही में अपने एक प्रकाशित हुए लेख में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा भाजपा को वास्तविकता की जांच करने की भी जरुरत है। लेख ने ईयर एंडर टाइटल के साथ लिखा है, ‘2017 में भारत की सत्तारूढ़ भाजपा के लिए जादू की तरह काम करती मोदी लहरl’

The agency recently appreciated the leadership of Indian Prime Minister Narendra Modi in a published article and said that the BJP also needs to investigate the reality. The article has written with the year-end title: ‘Modi wave lined up for the BJP’s ruling BJP in 2017’

भारत में मोदी लहर का उल्लेख करते प्रकाशित लेख में लिखा गया कि इस साल जितने भी राज्यों में चुनाव हुए, उन सभी में मोदी लहर दौड़ गई और मोदी ने सभी जगह मास्टरस्ट्रोक से अपनी छाप छोड़ी है। इसके अलावा राज्यसभा में मोदी सरकार की ताकत के बारे में भी बताया गयाl

In a published article mentioning Modi wave in India, it was written that in all the states where elections were held this year, Modi wave was raging among them and Modi has left his mark with the masterstroke everywhere. Apart from this, the power of the Modi Government in the Rajya Sabha was also told.

लेख में बताया गया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के जीतते ही मोदी लहर की शुरुआत हो गयी थीl 17 राज्यों के चुनाव में 9 राज्यों में जीत के पीछे मोदी का हाथ है। लेख में आगे कहा गया है

It was told in the article that Modi wave started in BJP’s victory in the 2014 Lok Sabha elections. Modi is behind the victory in nine states in the elections of 17 states. The article further states

कि मोदी को अपनी नीतियों के कारण विपक्षी पार्टी कांग्रेस की आलोचनाओं का भी काफी शिकार होना पड़ा इसके बावजूद भारत में लगातार मोदी मैजिक कायम रहा। यहाँ तक कि नोटबंदी के बाद भी उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है।

Despite the fact that Modi had suffered a lot due to the criticisms of the opposition party Congress due to his policies, continuous Modi magic continued in India. Even after the ban, BJP’s big victory in Uttar Pradesh shows their popularity.

लेख में पीएम मोदी के अलावा हालिया चुनावों में अमित शाह की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। अब इस सबके बाद तो ये साफ़ है कि चीन भारत की इस जीत की तरफ बड़ी ही गहराई से नजर रख रहा है।

Apart from PM Modi in the article, Amit Shah’s role in the recent elections has also been mentioned. Now, after all this, it is clear that China is keeping a close watch on India’s victory.

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source politicalreport.in

ट्रिपल तलाक के तुरंत बाद ओवैसी जैसे कट्टरपंथियों का दोगलापन आया सामने, खुद इस मुस्लिम महिला ने किया ये खौफनाक खुलासा…

कभी कभी तो हमे लगता है की कट्टरपंथियों ने दोगलेपन में पीएचडी किया हुआ होता है, इनके डीएनए में ही दोगलापन घुसा हुआ है, आपने कई बार टीवी डिबेट में, और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर देखा और सुना होगा की जब कट्टरपंथियों द्वारा अधिक बच्चे करने का मुद्दा उठता है

Sometimes we think that the fundamentalists have done a PhD in double standards, in their DNA, there is a double-mindedness, you have seen many times in TV debates, and on other platforms, and heard that when the issue of raising children by more fanatics getting up

तो कट्टरपंथी कहते है की, परिवार नियोजन मजहब के खिलाफ है, और बच्चे तो अल्लाह की देन होते है, और जब पूछा जाता है की आप अधिक बच्चे करते है, उनका पालन पोषण कैसे होगा, ज्यादा बच्चे करना ठीक बात नहीं है, कम बच्चे हो तो उनका पालन पोषण भी ठीक से हो सकता है, इसपर भी कट्टरपंथी भड़क जाते है और कहते है की बच्चे अल्लाह की देन है, उनका पालन पोषण भी अल्लाह करेगा, अल्लाह ही खिलायेगा

So the fundamentalists say that family planning is against religion, and children are God’s donations, and when asked if you have more children, how will they be nurtured, more children do not matter, little children If so, they can be nurtured properly, but the fundamentalists also get angry and say that the child is God’s donation, and Allah will feed them, and Allah will feed them.

पर ट्रिपल तलाक पर देखिये कल कट्टरपंथी क्या कह रहे है की सरकार मुसलमानो पर जुल्म कर रही है, अगर शौहर जेल चले जायेगा, तो बीवी और बच्चों को खिलायेगा कौन, ये कट्टरपंथी चाहते है की ट्रिपल तलाक चलता रहे, और ये खाने में नमक, देर से उठने और ऐसी ही चीजों पर तलाक देते रहे

But look at triple divorce. What is the fundamentalist saying that the government is oppressing Muslims, if Shauhara goes to jail, who will feed the wives and children, these fundamentalists want triple divorces to continue, and in this meal salt, Continue to get late and divorce on such things

जब अधिक बच्चे करने की बात हो तो उन्हें अल्लाह खिलायेगा, पर जब ट्रिपल तलाक की बात हो तो भैया बेगम और बच्चो को खिलायेगा कौन ?, जिस तरह अल्लाह बच्चों को खिलाता है, वैसे ही परिवार भी अल्लाह ही चला लेगा, परन्तु कट्टरपंथी दोनों तरह की बात करते है, चूँकि इन लोगो ने कदाचित दोगलेपन में पीएचडी किया हुआ होता है, इनका मजहब और ईमान ही दोगलापन है

Whenever it is a matter of childhood, Allah will feed them, but when it is a matter of triple divorce, then brother, who will begum Begum and children,? As Allah Allah feeds the children, Allah will take away the family as well, but both radicals Let’s talk about, because these people may have done a PhD in a double-mindedness, their religion and honesty are ambiguous.

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source dainik bharat

अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, 60000 सुरक्षाबलों के साथ-साथ सेना को भी दिए आदेश..

नई दिल्ली : अवैध बांग्लादेशियों व् अन्य घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का काम शुरू हो गया है. इसकी शुरुआत असम से हो रही है, जिसके चलते वहां के मुस्लिम बहुल इलाकों में तनाव काफी बढ़ गया है. कट्टरपंथी मरने-मारने पर उतारू हैं लेकिन भारत से बाहर निकलने को तैयार नहीं, वहीँ इलाके के कुछ भारतीय मुस्लिम भी इन अवैध घुसपैठियों के समर्थन में खड़े हैं. जिसे देखते हुए असम सरकार ने कट्टरपंथियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है.

कट्टरपंथियों के खिलाफ भारी सुरक्षाबल तैनात
राज्य की पुलिस ने तमाम ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान की है, जहाँ कट्टरपंथी मुस्लिमों की संख्या अधिक है और वहां पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कमर कस ली है. नागरिक राष्ट्रीय पंजीकरण के पहले मसौदे के प्रकाशन से पहले पुलिस ने तमाम ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान की है, जहां जरूरत पड़ने पर सेना की मदद भी ली जा सकती है.

आपको बता दें कि 31 दिसंबर तक असम में रह रहे नागरिकों की लिस्ट जारी होगी, ऐसे में जिन लोगों का नाम इस लिस्ट में नहीं होगा, उन्हें देश से बाहर करने का प्रक्रिया शुरू होगी. यही बात कट्टरपंथी मुस्लिमों से बर्दाश्त नहीं हो रही है. इसी के चलते कई इलाकों में पिछले कई दिनों से हिंसा का माहौल है, लिहाजा 31 दिसंबर से पहले सरकार बड़ी संख्या में यहां सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके.

सीआरपीएफ की 85 कंपनियां तैनात
प्रदेश के महानिदेशक मुकेश सहाय ने एकीकृत कमान की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के बाद कहा कि कुछ इलाके काफी संवेदनशील हैं, हम वहां शांति बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ की 85 कंपनियां दो जत्थों में बुलवा ली गयी हैं. यदि फिर भी कट्टरपंथियों को काबू में नहीं किया जा सका तो भारतीय सेना की मदद भी ली जायेगी.

बीजेपी सरकार किसी भी कीमत पर अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर करने के लिए प्रतिबद्ध है. मजहबी कट्टरपंथियों के दिमाग ठिकाने लगाने के लिए अब तक कुल 60 हजार पुलिसिकर्मी व पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया जा चुका है. सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया जाएगा और यदि फिर भी स्थिति बिगड़ी तो भारतीय सेना अपने तरीके से कट्टरपंथियों की अक्ल ठिकाने लगाएगी.

तनाव की मुख्य वजह हैं यहाँ अवैध तरीके से रह रहे घुसपैठिये, जिन्हे कांग्रेस व् ममता बनर्जी जैसे कुछ गद्दार नेताओं ने वोटबैंक की खातिर बसाया है. असम सरकार ने कहा है कि वैध नागरिकों की लिस्ट जारी करने के बाद अवैध प्रवासियों की पहचान करके उन्हें उनके देश वापस भेजा जाएगा. ये अवैध अप्रवासी मुख्य रूप से बांग्लादेश के नागरिक व् म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिम हैं.

मुस्लिम नेता कर रहे हैं विरोध
सबसे हैरानी की बात ये है कि यहाँ के लोकल मुस्लिम नेता भी अवैध घुसपैठियों के ही पक्ष में खड़े हैं. इनका कहना है कि सरकार उन्हें बेघर करने की साजिश रच रही है. यहां रह रहे लोगों को एक प्रमाण पत्र सरकार की ओर से जारी किया जाता है, जिसमे यह कहा जाता है कि उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 से पहले से रह रहे हैं लेकिन मुसलमानों को यह प्रमाण पत्र ढूंढने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल कांग्रेस समेत देश की कुछ राजनीतिक पार्टियों ने केवल वोटबैंक की खातिर देश की सुरक्षा को खतरे में डालते हुए इन घुसपैठियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में सुनियोजित तरीके से बसाया था.

असम व् बंगाल में बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये रह रहे हैं और ये देश की सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा बन गए हैं. इनकी संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि इनका देश की राजनीति में काफी दखल बढ़ गया है, साथ ही यहाँ के आम निवासियों के खिलाफ दंगे-फसाद भी करते हैं.

बांग्लादेशी हिन्दुओं को भारत देगा शरण
वहीं इस बारे में असम के वित्तमंत्री और नागरिकता रजिस्टर के इंचार्ज हमेंत विश्व शर्मा का कहना है कि एनआरसी लिस्ट अवैध बांग्लादेशियों की पहचान करने के लिए लायी जा रही है. जिन लोगों का नाम एनआरसी की रजिस्टर में नहीं आएगा, उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा. हम उन्हें भारत से बाहर करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे, लिहाजा इसके लिए पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं. उन्होंने कहा कि हिन्दू बांग्लादेशियों को अपने ही देश में जुल्म का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार की नीति के अनुसार भारत में शरण दी जाएगी.

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source aajtak

मदरसों की आड़ में चल रहे धंधों का बड़ा खुलासा, सच्चाई जान दंग रह जायेंगे- जुड़े है कई बड़े नाम….

नई दिल्लीः वामपंथी मीडिया आपको यह सच्चाई कभी नही दिखाता है वह तो हमेशा हिन्दू समाज की बुराईयों को ही दिखाता रहता है और मुस्लिम तुष्टिकरण की निति अपनाता रहता है अगर आप इस खबर को पढना भी चाहेंगे तो अख़बार के आखिरी पन्नो पर मिलेंगी, मगर मगर इस मौलाना की जगह राम रहीम या आशा राम होता तो यह खबर आपको पहले पन्ने पर मिलती, जबकि संत रामपाल से ये केस हटा भी दिया गया है ,

New Delhi: Left media does not show you the truth; it always shows the evils of the Hindu society and continues to adhere to the Muslim appeasement policy. If you want to read this news then you will meet on the last page of the newspaper, but this If you had Ram Rahim or Asha Ram in place of Maulana, then you would get this news on the first page,

यूपी की राजधानी लखनऊ से पुलिस ने एक मदरसे से 51 लड़कियों को छुड़ाया है. बताया जा रहा है कि इस मदरसे का संचालक लड़कियों का यौन शोषण करता था. पुलिस ने इस मदरसे से मुक्त कराई गई लड़कियों के बयान के आधार पर इस मदरसे के संचालक को भी गिरफ्तार कर लिया है. यूपी पुलिस के मुताबिक उन्हें लखनऊ के सआदतगंज इलाके में चल रहे इस मदरसे में छात्राओं के यौन शोषण की शिकायत मिली थी. इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने सआदतगंज थाना क्षेत्र के यासीनगंज में स्थित मदरसा जामिया खदीजातुल लीलनवात में छापा मारा.

Police have rescued 51 girls from a madrasa from Lucknow, UP’s capital. It is being told that the operators of this madrassa used to exploit the girls. On the basis of the statement of girls released from this madrasa, the police has arrested the operator of this madrasa. According to the UP Police, he had received complaints of sexual exploitation of girl students in this madrasa in Sadatganj area of ​​Lucknow. While taking action on this, the police raided the madrasa Jamia Khadiyatul Lilanova located in Yasinganj area of ​​Sadatganj police station area.

पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हंडकंप मच गया, स्‍थानीय लोगों ने पहले तो मदरसे को घेर लिया और पुलिस कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने जब अंदर से 51 लड़कियों को बाहर निकालातब जाकर लोग शांत हुए.

This action of the police resulted in a hindkamp in the entire area, local people first surrounded the madarsa and tried to hinder the police action, but when the police got 51 girls out of the house, people became silent.

लखनऊ के एसपी (वेस्ट) ने बताया कि पुलिस की ज्वाइंट टीम ने सआदतगंज इलाके के मदरसे में छापा मारा, उस मदरसे में मौजूद 51 लड़कियों ने मदरसे के मैनेजर पर यौन शोषण का आरोप लगाया है. मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि यह मदरसा रजिस्टर्ड था भी या नहीं?

Lucknow SP (West) said that the Joint team of the police raided the madrassa of Saadatganj area, 51 girls present in that madrasa have accused the manager of the madrassa as sexually exploited. An FIR has been registered against the manager and he has been arrested. We are also investigating whether this seminary was registered or not?

पुलिस के मुताबिक मदरसे पर ACM और ADM और महिला उप निरीक्षक के द्वारा सभी लड़कियों का बयान लिया गया है. इस दौरान चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और DPO को सूचित कर दिया गया है. जानकारी के मुताबिक मदरसे की छत पर चढ़कर छात्राओं ने पर्ची फेंककर लोगों से मदद की गुहार लगाई थी. वहीं एक पीडि़ता ने संचालक मो. तैयब जिया पर लड़कियां सप्‍लाई करने का भी आरोप लगाया है.

According to the police, the statements of all the girls have been taken by the ACM and ADM and the female sub-inspector on the madrasa. During this time the Child Welfare Committee and the DPO have been notified. According to the information, students climbing on the ceiling of the madarsa had offered a helping hand to the people by throwing a slip. One of the victims was a director Taib Jia has also accused of supplying girls.

यूपी की राजधानी लखनऊ से पुलिस ने एक मदरसे से 51 लड़कियों को छुड़ाया है. बताया जा रहा है कि इस मदरसे का संचालक लड़कियों का यौन शोषण करता था.

खास बातें
लखनऊ में मदरसे का मैनेजर करता था लड़कियों का यौन शोषण
लड़कियों ने मदरसे की छत से पर्ची फेंक कर की मदद की गुहार
पुलिस ने रेड मारकर 51 लड़कियों को छुड़ाया, मैनेजर को गिरफ्तार किया

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source zee news

हाईकोर्ट में हुआ मनमोहन सिंह और कांग्रेस की ऐसी खौफनाक साजिश का पर्दाफ़ाश, दंग रह गया पूरा देश !

नई दिल्ली : देश की सुरक्षा को खतरे में डालने और अपने वोट बैंक के तुष्टिकरण करने के लिए कांग्रेस सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. 2004 में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने सबसे पहला काम जो किया, वो था POTA क़ानून को हटाने का, जिसे बीजेपी ने पास किया था जब अटल बिहारी वाजपेयी पीएम थे. इस क़ानून के जरिये जांच एजेंसियां उन लोगों को गिरफ्तार करके पूछताछ कर सकती थीं, जिनपर आतंकी घटनाओं से जुड़े होने का शक होता था. मगर अपने वोटबैंक को और इशरत जहाँ व् यासीन भटकल जैसे आतंकियों को बचाने के लिए कांग्रेस ने सत्ता में आते ही इस क़ानून को हटा दिया था |

New Delhi: The Congress government has left no stone unturned to threaten the country’s security and appease its vote bank. The first thing Congress did when it came to power in 2004 was the removal of the POTA law, which the BJP had passed when Atal Bihari Vajpayee was PM. Through this law the investigating agencies could arrest and interrogate those people who were suspected to be involved in terrorist incidents. But to save the terrorists like their vote bank and Ishrat Jahin and Bhatkal, the Congress had removed this law when it came to power.

मगर अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर एक और बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है. मनमोहन सिंह ने जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी को अक्टूबर 2004 में निजी तौर पर पत्र लिखकर भरोसा दिलाया था कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक का दर्जा नहीं दिया जाएगा | आज दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस को उठाते हुए मनमोहन सिंह के उस फैसले पर सवाल उठाया है कि आखिर क्यों उन्होंने शाही इमाम से ऐसा वादा किया. इस पूरी खबर को पढियेगा जरूर, आप हैरान रह जाएंगे. मनमोहन सिंह का वो फैसला अब जांच के दायरे में आ गया है और कोर्ट ने पूछा है कि आखिर ऐसा वादा करने के पीछे मनमोहन सिंह का मकसद क्या था?

But now another very sensational disclosure has happened about former Prime Minister Manmohan Singh. Manmohan Singh had personally written a letter to the Imam Bukhari of Jama Masjid in October 2004 and assured that the Jama Masjid would not be given the status of a protected monument. Today, the Delhi High Court has raised the question of Manmohan Singh’s decision, raising the case, why he made such a promise to the Imam Imam. Of course, you will be surprised at this whole news. The decision of Manmohan Singh has now come under the purview of the investigation and the court has asked, what was the motive behind Manmohan Singh’s promise to make such a promise?

क्या है सारा मामला ?
दरअसल सुहैल अहमद खान नाम के एक व्यक्ति ने हाई कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की थी. पीआईएल में मांग की गई थी कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित किया जाए और उसके अंदर व् आसपास किये गए अतिक्रमण को हटाया जाए. पिछले साल नवंबर में सुहैल अहमद खान ने शाही इमाम के बेटे की दस्तारबंदी को चुनौती देते हुए भी एक पीआईएल दाखिल की थी और मस्जिद के मैनेजमेंट की सीबीआई जांच की मांग की थी | इसी पीआईएल पर सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने हाई कोर्ट को ‘मनमोहन काल’ की एक चिट्ठी सौंपी है. इस चिट्ठी में खुलासा किया गया है कि 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद यूपीए सरकार जामा मस्जि‍द को संरक्षि‍त स्मारक का दर्जा इसलिए नहीं दे सकी क्योंकि खुद प्रधानमंत्री ने ही शाही इमाम को ऐसा ना करने का वादा किया था |

What is the whole matter?
In fact, a person named Suhail Ahmad Khan filed a PIL in the High Court. PIL was demanded that the Jama Masjid be declared a protected monument and the encroachment surrounding it and the surrounding areas should be removed. In November last year, Suhail Ahmad Khan had also filed a PIL challenging the royal imam’s son and demanded a CBI inquiry into the management of the mosque. During the hearing on this PIL, the Archaeological Survey of India has handed over a letter to the High Court ‘Manmohan Kal’. In this letter, it has been disclosed that despite being in power for 10 years, the UPA Government could not provide the Jama Masjid as a protected monument because itself the Prime Minister had promised to not do the same to Imam Imam.

क्या लिखा है पत्र में ?
सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि मनमोहन सिंह ने यह पत्र 20 अक्टूबर 2004 को लिखा था. यानी प्रधानमंत्री बनने के ठीक बाद. पीएम ने चिट्ठी में लिखा था कि उन्होंने संस्कृति मंत्रालय और एएसआई को निर्देश दे दिया है कि वे मरम्मत का काम तय वक्त में पूरा कर दें. इस मरम्मत का अनुरोध इमाम ने 10 अगस्त 2004 के लेटर में किया था. पीएम ने उन्हें लेटर में यह भी बताया था कि मंत्रालय ने तय किया है कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जाएगा | हैरानी की बात है कि जामा मस्जिद एक संरक्षित स्मारक नहीं है लेकिन इसके बावजूद 1956 से भारत सरकार लगातार इसके रख-रखाव का काम अपने खर्च पर करती आ रही है. यानि जनता के टैक्स का पैसा एक धर्म की इबादत स्थल के रख-रखाव में खर्च होता रहा है, जोकि पूरी तरह से गैर-कानूनी है. जामा मस्जिद की इमारत पर शाही इमाम और वक्फ बोर्ड अपना दावा ठोकते आये हैं लेकिन इसके रख-रखाव का पैसा अपनी जेब से नहीं भरते बल्कि भारत के संस्कृति मंत्रालय से लेते हैं. अरे ये लोग तो बिजली का बिल तक जमा नहीं करते और हर जगह एयर कंडीशनिंग आपको दिख जायेगी |

What is written in the letter?
The most interesting thing is that Manmohan Singh wrote this letter on October 20, 2004. That is, immediately after becoming the Prime Minister. The PM wrote in the letter that he has instructed the Ministry of Culture and ASI to complete the repair work in due time. This repair was requested by Imam on August 10, 2004. The PM had also told him in the letter that the ministry has decided that the Jama Masjid will not be declared a protected monument. Surprisingly, the Jama Masjid is not a protected monument but in spite of this, since 1956, the Indian government has been continuously doing its maintenance work at its expense. That is, the public tax has been spent in the maintenance of the place of worship of a religion, which is totally illegal. Imperial Imams and Waqf boards have been claiming their claims on the building of Jama Masjid but do not fill up the maintenance money of their pockets but from the Ministry of Culture of India. These people do not deposit the electricity bill and air conditioning will be visible everywhere.

अब जानिये अंदर की बात !
आइये अब आपको बताते हैं वो राज की बात जो कोई मीडिया आपको नहीं बताएगा. दरअसल नियमानुसार यदि किसी इमारत को संरक्षित स्मारक का दर्जा दे दिया गया तो उसे सार्वजनिक मीटिंग या सम्मेलनों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. केंद्र से विशेष अनुमति लिए बिना एक संरक्षित स्मारक का उपयोग स्वागत, पार्टियों, सम्मेलनों या मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए नहीं किया जा सकता | लेकिन जामा मस्जिद अब राजनीतिक गतिविधियों, बैठकों, वोट बैंक की राजनीति और कई अन्य अवैध व्यवसायों का केंद्र बन चुका है. और भी ज्यादा चौंकाने वाली बात तो ये है कि 2004 में मनमोहन सिंह के पीएम बनने से पहले 2002 में ही जामा मस्जिद में चल रहीं आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों के बारे में और शाही इमाम अहमख बुखारी द्वारा मस्जिद का दुरुपयोग के बारे में दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी |

Now know the inside thing!
Let’s now tell you the matter of the secret which no media will tell you. Actually, if a building is given a protected monument status, it can not be used for public meetings or conferences. Without a special permission from the Center, a protected monument can not be used for reception, parties, conferences or entertainment programs. But Jama Masjid has now become a center for political activities, meetings, vote bank politics and many other illegal occupations. Even more alarming thing is that were running before Manmohan Singh became the Prime Minister in 2004, the Jama Masjid in 2002, the Delhi High Court about the terror and abuse of the mosque by about anti-state activities and Imam Ahmk Bukhari A petition was filed in

सब कुछ जानते हुए भी मौन रहे मनमोहन सिंह !
रईसुद्दीन नाम के एक शख्स ने एक पीआईएल दाखिल करके आरोप लगाया था कि, “अहमद बुखारी और उनके पिता ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों का अवैध इस्तेमाल शुरू कर दिया था और यहाँ सभी प्रकार की अवैध गतिविधियां, अवैध बाज़ार, आतंकवादी गतिविधियां यहाँ होती हैं और साथ ही कई असामाजिक तत्व भी इस स्मारक में आश्रय लेते हैं ” | जिसके बाद हाई कोर्ट ने इस मुद्दे की जांच करने के लिए दिल्ली सरकार के लेफ्टिनेंट गवर्नर को नोटिस जारी किया था. ये सब जानने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने अपने वोट बैंक की खातिर जामा मस्जिद में परोक्ष रूप से आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों को बचाये रखा. मनमोहन सिंह को शर्म आनी चाहिए कि आतंकवादी देश के लिए बड़ा ख़तरा बन गए, ये जानने के बावजूद वो मौन रहे और सोनिया गांधी के हाथों कठपुतली बने रहे |

Manmohan Singh, who was silent knowing everything!
A man named Raisuddin had filed a PIL alleging that, “Ahmed Bukhari and his father had started illegal use of the areas surrounding the Jama Masjid for their personal use and here all illegal activities, illegal market Terrorist activities are here, as well as many anti-social elements also take shelter in this memorial. ” After which the High Court issued notice to the Lieutenant Governor of Delhi Government to look into the issue. In spite of knowing this, the Congress government has indirectly protected terrorism and anti-national activities in Jama Masjid for its vote bank. Manmohan should be ashamed that terrorists became a big threat to the country, despite knowing this, he remained silent and remained a puppet in Sonia Gandhi’s hands.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=aGHeWHD0uXg

https://www.youtube.com/watch?v=xlRRjGN7n7U

अभी अभी : इस गद्दार अभिनेत्री को करणी सेना ने दे डाली ये खुली धमकी, बचाव में कूदा भाई सामान खान !

कुछ लोगों का मानना है की एक्टर्स की कोई गलती नहीं है, गलती तो लेखक और डायरेक्टर की है, जो लेखक स्क्रिप्ट लिखता है, डायरेक्टर जो कहता है,एक्टर तो बस परफॉर्म करता है, पद्मावती फिल्म के लिए उसके एक्टर्स को दोषी ठहरना ठीक नहीं है, कई सारे लोगों का यही तर्क रहता है |

Some people believe that there is no fault of the actors, the mistake is by the writer and the director, the author writes the script, the director who says, the actor just performs the work, it is not right to blame his actors for the Padmavati film This is the logic of many people.

आप इस तर्क में बिलकुल भी मत आइये, कारण हम आपको बताते है, वो भी बहुत ही आसान शब्दों में, देखिये कोई भी फिल्म लेने से पहले एक्टर उसकी कहानी तो पढता है, उसे क्या रोल करना है, डायलॉग क्या होंगे, क्या पहनना होगा, एक्टर स्क्रिप्ट देखता है, फिर फिल्म का साइनिंग अमाउंट बताकर फिल्म करने की हामी भरता है यानि एक्टर को पता है की वो क्या करने वाला है, क्या करने वाली है, और उसका उस काम को समर्थन रहता है, तभी तो वो एक्टर वो काम करता है, काफी सरल है ये समझना, अब इसी दीपिका को आप इस्लाम की आयशा का रोल करने को कहेंगे, तो क्या करेगी ?, नहीं करेगी, पर इसे पद्मावती बनाकर नाचना हो, राधा बनकर नाचना हो, ये करेंगी, भैया जितना दोषी डायरेक्टर है, ये सभी फिल्मबाज़, फिल्म में काम करने वाला 1-1 फिल्मबाज़, और निर्माता, ये सब बराबर के दोषी है, सिर्फ डायरेक्टर और लेखक नहीं |

You do not come in this argument at all, because we tell you, in that very simple words, before taking any film, the actor reads his story, what he has to roll, what the dialog will be, what will we wear , The actor watches the script, then the movie signifies the amount to be signed by the movie, that is, the actor knows what he is going to do, what he is going to do, and his work is supported by that So, the actor does that work, it is quite simple to understand, now you will be asked to do the role of Islam’s role in this Deepika, what will you do, will not do it, but you have to dance it like a Padmavati, dance to Radha and dance. The brother is as guilty as the director, all these film-makers, 1-1 filmmakers working in the film, and the producer, these are all equally guilty, not just directors and writers.

फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर पैदा हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज डेट नजदीक आ रही है, विरोध के स्वर भी तेज होते जा रहे हैं. करणी सेना के एक सदस्य ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी दी है. करणी सेना के नेता महीपाल सिंह मकराना ने गुरुवार को धमकी दी कि अगर बालीवुड फिल्म पद्मावती पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया और दीपिका पादुकोण अपनी भड़काऊ बातों से भावनाओं को भड़काना बंद नहीं करती हैं तो महाकाव्य रामायण में जिस तरह सूर्पणखा की नाक काट दी गई थी उसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी |

The controversy surrounding the movie ‘Padmavati’ is constantly increasing. As the film’s release date is approaching, the voices of protest are getting stronger. A member of the Karani army has threatened to cut the nose of actress Deepika Padukone. Karan Sena leader Mahipal Singh Makrana on Thursday threatened that if Bollywood film Padmavati was not banned and Deepika Padukone does not stop provoking emotions with her provocative words, then in the epic Ramayana, in the way the nuptial nose was cut Type of action will be taken.

दीपिका पादुकोण इस फिल्म में नायिका की मुख्य भूमिका में है और फिल्म 1 दिसंबर को पूरे भारत में रिलीज होने वाली है. करणी सेना की ओर से इस दिन भारत बंद का एलान किया गया है. अब एक और धमकी सामने आई है. उत्तर प्रदेश के क्षत्रिय समाज ने दीपिका और फिल्म निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की गर्दन काटने वाले को 5 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. पद्मावती पर बैन लगाने की मांग करते हुए ठाकुर अभिषेक सोम ने इनाम की घोषणा की | समाजवादी पार्टी से जुड़े अभिषेक ने देश छोड़ने या गर्दन काटने की धमकी दी |

Deepika Padukone is in the lead role of the heroine in the film and the film is going to be released all over India on December 1. On this day the Bandh has been announced by the Army on behalf of the Army. Now another threat has emerged. Uttar Pradesh’s Kshatriya Samaj has announced a reward of Rs 5 crore for the neck cutter of Deepika and film producer-director Sanjay Leela Bhansali. Demanding ban on Padmavati, Thakur Abhishek Som announced the reward. Abhishek associated with Samajwadi Party threatens to leave the country or to cut neck.

दीपिका पादुकोण तो कुख्यात रही है, अपने समाज विरोधी दुःख के लिए, समाज को दूषित करने के, असामाजिक सेक्स फैलाने के लिए दीपिका पादुकोण ने एक वीडियो सन्देश बनाया था जिसमे ये बोल रही थी की, मैं जहाँ मन वहां सेक्स करूँ, शादी से पहले करूँ, शादी के बाद करू, जिस से मन उस से करूँ और यही दीपिका पादुकोण जिसकी अब फिल्म पद्मावती का विरोध हो रहा है, तो कह रही है की भारत एक धकियानूसी देश है, एक रूढ़िवादी देश है, जिस देश से पैसा कमाकर मैडम रोटी खाती है, उसे ही गालियां देती है, साफ़ होता है की दीपिका पादुकोण किस मानसिकता की महिला है |

Deepika Padukone has been notorious, for her anti-social suffering, Deepika Padukone had created a video message in order to contaminate the society, to spread anti-social sex in which she was saying, where I am having sex there, before marriage Let me do it after marriage, which I can do with him and Deepika Padukone, whose film is now being opposed to Padmavati, is saying that India is a tropical country, a conservative country It is clear that Deepa Padukone is a woman of mentality.

सोम ने कहा, “दीपिका ने इस भूमिका को निभाकर राजपूत महिलाओं का अपमान किया है. कोई भी राजपूत महिला सार्वजनिक रूप से नृत्य नहीं करती. निर्देशक संजय लीला भंसाली को देश के राजपूत समाज के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की है. उन्हें दंडित किया जाना चाहिए.” उधर, दीपिका को मिल रही धमकियों के मद्देनजर मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री की सुरक्षा बढ़ा दी. संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) देवेन भारती ने बताया, ‘‘संगठन द्वारा नाक काटने की धमकी दिए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की सुरक्षा बढ़ा दी है .’’ उन्होंने कहा कि हम धमकी के बाद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करा रहे हैं . पुलिस अभिनेत्री मुंबई स्थित घर और कार्यालय में सुरक्षा मुहैया कराएगी. पुलिस पहले ही फिल्मकार संजय लीला भंसाली को सुरक्षा प्रदान कर चुकी है |

Som said, “Deepika has insulted Rajput women by playing this role, no Rajput woman does not dance in public, director Sanjay Leela Bhansali has no information about Rajput society of the country. They have to be tampered with. They should be punished. ” On the other hand, in the wake of the threats to Deepika, Mumbai Police increased the security of the actress. Joint Commissioner of Police (law and order) Deven Bharti said, “After the threat of nose cutting by the organization, Mumbai police has increased the security of actress Deepika Padukone.” He said that we should provide adequate protection after threat Are there. The police actress will provide security at the home and office in Mumbai. Police has already provided security to filmmaker Sanjay Leela Bhansali.

और आज करनी सेना ने दीपिका पादुकोण को माकूल जवाब दिया, और करनी सेना के प्रमुख महिपाल सिंह मकराना ने तो यहाँ तक कह दिया की क्षत्रिय महिला पर हाथ तो नहीं उठाएंगे, पर दीपिका पादुकोण जैसे महिलाओं को जो समाज को दूषित करने का काम करती है, उनकी नाक काट दी जाएगी | इस बीच फिल्म की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने कहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं है जो फिल्म को रिलीज होने से रोक सकता है. दीपिका ने कहा, “यह डरावनी स्थिति है, बिल्कुल भयभीत करने वाली. हमने अब तक क्या हासिल किया है और एक राष्ट्र के रूप में हमारी क्या उपलब्धि है. प्रगति के बजाय हम अवनति की ओर उन्मुख हुए हैं.” फिल्म पद्मावती में शाहिद कपूर और रणवीर सिंह भी मुख्य भूमिका में हैं. इस फिल्म को सीबीएफसी की हरी झंडी का अभी इंतजार है |

And today the Karni army responded favorably to Deepika Padukone, and Karni army chief Mahipal Singh Makrana even said that Kshatriya will not take the hand on the woman, but Deepika Padukone, who works for contaminating the society , His nose will be cut off. Meanwhile, film actress Deepika Padukone has said that there is nothing that can stop the film from releasing. Deepika said, “This is a horror situation, it is intimidating, what we have achieved so far and what is our achievement as a nation, instead of progress, we have been oriented towards demotion.” Shahid Kapoor and Ranvir Singh are also in the lead role in the movie Padmavati. The film is awaiting the CBFC’s green signal.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

source: zeenews.india.com

मुफ्त का खाने वाले इन गद्दारों में से कोई भी नहीं आया कुलभूषण के समर्थन में !

भारत में तो आपको पाकिस्तान के समर्थको की पूरी फ़ौज मिल जाएगी, सिर्फ जिहादी तत्व ही नहीं बल्कि सेक्युलर और वामपंथियों की पूरी एक फ़ौज है जो हर मसले पर पाकिस्तान के समर्थन का झंडा भारत में बुलंद करते है, चाहे वो भारत के फिल्मबाज़ हो या नेता हो, मीडिया के लोग हो या बुद्धिजीवी हो|

In India, you will find a whole army of supporters of Pakistan, not only jihadi elements, but also a whole army of secular and leftists who raise the flag of Pakistan’s support on every issue in India, whether it is India’s filmmaker or leader Yes, people of the media or intellectuals.

कई बार तो हमे ऐसा प्रतीत होता है की, पाकिस्तान की जनसँख्या से भी अधिक पाकिस्तान समर्थक तो भारत के अंदर ही मौजूद है, और ऐसे लोग भारत की संसद में भी है, उदाहरण के तौर पर कल आपने नरेश अग्रवाल का बयान सुन ही लिया, जो की भारत की राज्यसभा का सदस्य है, हमारी संसद में बैठता है|

Many times, it appears that more Pakistan supporters than Pakistan’s population exist within India, and such people are also in the Parliament of India, for example, yesterday you have heard the statement of King Agarwal, Who is a member of the Rajya Sabha of India, sits in our Parliament

कुलभूषण जाधव की पत्नी और माता के साथ पाकिस्तान ने दरिंदगी सा सलूक किया, दोनों भारतीय महिलाओं का दरिंदे पाकिस्तान ने अपमान किया, इसका विरोध भारत में राष्ट्रवादियों ने किया, इसके अलावा किसी भी सेक्युलर वामपंथी ने इसका विरोध नहीं किया, खैर, देखिये इसी मुद्दे पर ये ख़ास ट्वीट जो आया है वकील प्रशांत पटेल की ओर से|

Pakhilis fought with the wife and mother of Kulbhushan Jadhav; Pakistan condemned the poverty of both Indian women; It was opposed by nationalists in India; Apart from this, no secular leftist opposed it; Well, see this issue But this special tweet has come from lawyer Prashant Patel.

पाकिस्तान के बहुत से कलाकार, फिल्मबाज़, संगीतकार और अन्य तरह के बहुत से पाकिस्तानी कलाकार, यहाँ तक की भारत में मेडिकल वीजा पर आने वाले हज़ारो पाकिस्तानी, 1 भी ऐसा पाकिस्तानी नहीं है जो को कुलभूषण जाधव के समर्थन में आया| कुलभूषण के परिवार, उनकी माता और पत्नी के साथ पाकिस्तान ने दरिंदगी की, पर 1 भी पाकिस्तानी जो भारत में इलाज करवा चूका है, 1 भी पाकिस्तानी कलाकार जो भारत से करोडो कमा चूका है, 1 भी पाकिस्तानी ने कुलभूषण की माता और पत्नी से दुर्व्यवहार का विरोध नहीं किया|

Many Pakistani artists, filmmakers, musicians and many other types of Pakistani artists, even thousands of Pakistanis coming to the medical visa in India, 1 is not a Pakistani who came in support of Kulbhushan Jadhav. Pakistan, with the family, her mother and wife of Kulbhushan, has made a living, but also one Pakistani who has been treated in India; 1 also Pakistani artist who has earned a million rupees from India; 1 Pakistani also abused Kulbhushan’s mother and wife Did not protest

पाकिस्तानी कलाकारों की बात तो छोड़िये, भारत के फिल्मबाज़ जो पाकिस्तानियों को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में घुसाते है, उदाहरण के तौर पर आमिर खान, शाहरुख़ खान, सलमान खान, करण जौहर जैसे लोग, कुलभूषण के समर्थन में इन सभी में से भी किसी का मुँह नहीं खुला, किसी ने पाकिस्तान का विरोध नहीं किया|

Leave the talk of Pakistani artists, filmmakers of India who enter Pakistanis in the Indian film industry, for example, people like Aamir Khan, Shahrukh Khan, Salman Khan, Karan Johar, in support of Kulabhushan Not open, nobody opposes Pakistan.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=aGHeWHD0uXg

https://www.youtube.com/watch?v=xlRRjGN7n7U