मुस्लिमों के बड़े नेता वासी रिजवी का ये दावा आपके होश उड़ा देगा,जिसे सुन CM योगी समेतओवैसी की उड़ी नींद

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वासिम रिज़वी ने बंगाल और बिहार में राम नवमी पर हमले, हनुमान जी की मूर्ति को तोड़ने और दंगों पर बड़ा बयान दिया है, उन्होंने हिंसा को रोकने की अपील भी की है, और उन्होंने कहा है की ये जितनी भी हिंसा हो रही है इन सभी में मदरसों का हाथ है, मदरसों में नफरत की शिक्षा दी जा रही है, और इसी कारण हिंसा हो रही है, कभी राम नवमी जुलुस पर हमला किया जा रहा है, तो कहीं हनुमान जी की मूर्ति को तोडा जा रहा है 

Wasim Rizvi, chairman of the Shia Waqf Board, attacked the Ram Navami in Bengal and Bihar, broke the statue of Hanuman and gave a big statement on the riots; they have also appealed to stop violence, and they have said that any violence It is happening in all these madrassas’ hands, madrasas are being taught hatred, and this is why violence is happening, sometimes the Rama Navami Jullus is being attacked, then somewhere Hanuman ji Person is going to be broken

वासिम रिज़वी ने कहा की मदरसों में हिन्दुओ और शियाओं के खिलाफ नफरत का पाठ पढाया जा रहा है, बच्चों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है, और मदरसे ही अभी हो रही हिंसा का कारण है, ये लोग नफरत से भरे हुए है और हिन्दुओ और शियाओं को उनके त्योहारों पर निशाना बना रहे है
Wasim Rizvi said that the teachings of hate are being taught against the Hindus and Shias in the madarsas, the children are being made radical, and the madarsas are the cause of violence now, these people are filled with hatred and Hindus and Shias Is targeting his festivals
 
वासिम रिज़वी ने ये भी कहा की सीमाओं के आसपास (बांग्लादेश) विदेशी भी आकर इस तरह के नफरत की गतिविधियाँ चला रहे है, और भारत और यहाँ के समाज के खिलाफ पूरा एक मिशन चलाया जा रहा है, और जो हिंसा हो रही है उसमे इन्ही तत्वों का हाथ है 
Wasim Rizvi also said that the foreigners (Bangladesh) are also running around the boundaries of this kind of hatred activities, and a complete mission is being run against India and the society here and the violence that is happening in them.Elements have a hand
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ये वो बड़े कारण SC/ST एक्ट में हुए किन बदलावों पर मचा है पूरे देश भर में बवाल

एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव के खिलाफ देशभर में दलित संगठनों ने बंद का ऐलान किया है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लेकर केंद्र सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को महाराष्ट्र के एक मामले को लेकर एससी एसटी एक्ट में नई गाइडलाइन जारी की थी. आइए जानते हैं क्या थी नई गाइडलाइन…

Against the changes made by the Supreme Court in the SC ST Act, the dalit organizations have announced a shutdown across the country. Meanwhile, the Central Government will file a reconsideration petition on the orders of the Supreme Court. Let us know that the Supreme Court had issued a new guideline in the SC ST Act on March 20 on a case related to Maharashtra. Let’s know what was the new guideline

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अधिनियम-1989 के दुरुपयोग पर बंदिश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक फैसला सुनाया था. इसमें कहा गया था कि एससी एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी. इसके पहले आरोपों की डीएसपी स्तर का अधिकारी जांच करेगा. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तभी आगे की कार्रवाई होगी.

Scheduled Caste Scheduled Tribes Act-1989 was passed by the Supreme Court’s historic decision to impose a ban on misuse. It was stated that after the FIR was registered under the SC ST Act, the immediate arrest of the accused would not be. Earlier, the DSP level official will investigate the allegations. If the allegations are found correct then only further action will be taken.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने गाइडलाइन जारी करते हुए कहा था कि संसद ने यह कानून बनाते समय नहीं यह विचार नहीं आया होगा कि अधिनियम का दुरूपयोग भी हो सकता है. देशभर में ऐसे कई मामले सामने आई जिसमें इस अधिनियम के दुरूपयोग हुआ है.

The Supreme Court’s Justice AK Goyal and UU Lalit’s Bench issued the guidelines, saying that while making this legislation, Parliament should not have thought that misuse of the Act can also happen. There have been many such cases in the country which have been misused in this Act.

नई गाइडलाइन के तहत सरकारी कर्मचारियों को भी रखा गया है. यदि कोई सरकारी कर्मचारी अधिनियम का दुरूपयोग करता है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए विभागीय अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी. यदि कोई अधिकारी इस गाइडलाइन का उल्लंघन करता है तो उसे विभागीय कार्रवाई के साथ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई का भी सामना करना होगा.

Under the new guideline, government employees are also kept. If any government employee misuses the act, permission of the departmental officer will be necessary for his arrest. If an officer violates this guideline, he will also face the contempt proceedings of the court with departmental action.

वहीं, आम आदमियों के लिए गिरफ्तारी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की लिखित अनुमति के बाद ही होगी.इसके अलावा बेंच ने देश की सभी निचली अदालतों के मजिस्ट्रेट को भी गाइडलाइन अपनाने को कहा है.

At the same time, arrest for the common man will be done only after the written permission of the Senior Superintendent of Police (SSP) of the district. In addition, the Bench also asked the magistrate of all the lower courts to adopt the guidelines.

इसमें एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी की अग्रिम जमानत पर मजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर और नामंजूर करेंगे.

In this, the magistrate will consider the anticipatory bail on the accused under the SC / ST act and sanction and reject the bail from his discretion.

अब तक के एससी/एसटी एक्ट में यह होता था कि यदि कोई जातिसूचक शब्द कहकर गाली-गलौच करता है तो इसमें तुरंत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जा सकती थी.

In the SC / ST Act so far, it was that if a caste terminology is said to be abusive then it could be arrested immediately by lodging a case.

बता दें कि ऐसे मामलों में कोर्ट अग्रिम जमानत नहीं देती थी. नियमित जमानत केवल हाईकोर्ट के द्वारा ही दी जाती थी. लेकिन अब कोर्ट इसमें सुनवाई के बाद ही फैसला लेगा.

Explain that in such cases the court did not give anticipatory bail. Regular bail was granted only by the High Court. But now the court will take the decision only after hearing.

बता दें कि ऐसे मामलों में कोर्ट अग्रिम जमानत नहीं देती थी. नियमित जमानत केवल हाईकोर्ट के द्वारा ही दी जाती थी. लेकिन अब कोर्ट इसमें सुनवाई के बाद ही फैसला लेगा.

Explain that in such cases the court did not give anticipatory bail. Regular bail was granted only by the High Court. But now the court will take the decision only after hearing.

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कांग्रेस के इस पुराने कर्म का फल भुगत रहा देश, बंगाल से लेकर केरला तक देश में लग गई आग

कोलकाता (31 मार्च) : भारत के मीडिया को कुछ लोग प्रेस्टीट्यूट भी कहते हैं, आज इस खबर को पढ़कर आपको भी लगेगा कि कहीं ना कही ऐसा कहना जायज भी है. पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी के जुलूस के दौरान हुए दंगों के बाद जिस इमाम इमदात उल्लाह राशिद को मीडिया द्वारा हीरो बनाने की कोशिश हो रही है, उसकी बेहद हैरान करने वाली सच्चाई सामने आ रही है.

हीरो नहीं बल्कि बांग्लादेशी घुसपैठिया है इमाम?
आसनसोल के कई लोगों ने भी उन मीडिया रिपोर्ट्स पर हैरानी जताई है, जिनमें इमाम को एक फरिश्ते की तरह दिखाया जा रहा है. जबकि असलियत बिलकुल अलग है लेकिन लगता है कि देश की मीडिया को एक ख़ास धर्म के लोगों के प्रति कुछ ख़ास हमदर्दी है, अमरनाथ आतंकी हमले के वक़्त भी एक ख़ास सम्प्रदाय के व्यक्ति को हीरो बनाने की कोशिश की गयी थी. इसी तरह से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद डॉक्टर कफील को भी हीरो बनाने की पूरी कोशिश की गयी थी, जबकि वो खुद ही दोषी पाया गया था.

मीडिया बता रही है कि नूरानी मस्जिद के इमाम इमदात उल्लाह राशिद इंसानियत की मिसाल पेश की है. इमाम भी कैमरे के सामने खुद को शांतिप्रिय दिखाते हुए कह रहा है कि, “मैंने अपने बेटे को खोया है. इसे मुद्दा न बनाएं. अगर आप मुझसे प्यार करते हैं तो अमन बहाल करें.”

बेटे की मौत की जांच नहीं चाहता इमाम !
इमाम का सबसे छोटा बेटा हाफिज सबकत उल्लाह बुधवार को आसनसोल जिला अस्पताल में मृत मिला था. उसके सर और गले पर चोट के निशान थे. इमाम ने कहा कि मैंने पुलिस में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है. इमाम अपने बेटे की मौत की कोई जांच भी नहीं चाहता.

इमाम का कहना है कि वो 30 साल से आसनसोल में रह रहा है और 25 साल से यहाँ इमाम है. वैसे इस शख्स की उम्र 50 वर्ष के आसपास है, यानि पहले ये कहीं और रहता था, उसके बाद आसनसोल आ गया. अब खुलासा हो रहा है कि ये इमाम शायद भारतीय नागरिक है ही नहीं बल्कि बांग्लादेशी घुसपैठिया है और शायद इसीलिए ये अपने बेटे की मौत की जांच तक नहीं कराना चाहता ताकि सच्चाई खुल ना जाए.

बांग्लादेश के स्कूल में पढता था इमाम का बेटा?
बताया जा रहा है कि इस इमाम के बेटे ने अपने फेसबुक प्रोफाइल में अपने स्कुल का नाम रहमानिया स्कूल लिखा हुआ है, ये स्कूल पश्चिम बंगाल में नहीं बल्कि बांग्लादेश में है. सवाल ये उठ रहे हैं कि बंगाल का आसनसोल इलाका, बांग्लादेश से सटा हुआ तो है नहीं, तो आखिर इसका बेटा बांग्लादेश के स्कूल में कैसे पढ़ रहा था?

बंगाल में सक्रिय राष्ट्रवादी संगठन हिन्दू सह्मंती के प्रमुख तपन घोष ने अब मांग उठाई है कि जल्द से जल्द इस इमाम की जांच होनी चाहिए कि ये भारतीय नागरिक है भी या नहीं, ये भारतीय है या बंगलादेशी और इसके बेटे का बांग्लादेश कनेक्शन क्या है? तपन घोष ने सबकुछ संदिग्ध होने की बात कही है, इसके बेटे की जान दंगाइयों ने ही ली है या वो खुद ही दंगाइयों में शामिल था और दंगा फैलाते वक़्त उसकी जान गयी?

इमाम की जांच जरूरी !
तपन घोष ने जांच की मांग करते हुए ये भी कहा है कि कहीं इमाम के बेटे का आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से कोई सम्बन्ध तो नहीं था? दरअसल खुफिया एजेंसियां पहले ही रिपोर्ट दे चुकी हैं कि भारत में घुसे अवैध बांग्लादेशी व् रोहिंग्या घुसपैठिये आतंकवादी वारदात कर सकते हैं, दंगे फैला सकते हैं.

ऐसे में शक और भी ज्यादा गहरा रहा है कि क्या वाकई में इमाम शांतिप्रिय है या फिर जांच कराये जाने से केवल इसलिए इंकार कर रहा है कि कहीं उसके अवैध घुसपैठिए होने का भेद सबके सामने खुल ना जाए. देश के मीडिया को भी मसाला मिल गया, एक इमाम ने अपने बेटे की मौत की जांच से इंकार कर दिया और वो भी एक ख़ास धर्म का निकला, ऐसी खबर तो खूब बिकेगी. बस फिर क्या था, सभी प्रेस्टीटूट्स ने बिना कोई जांच-पड़ताल किये इमाम को हीरो बनाने में जुट गए.

अब इमाम की जांच की मांग की जाने लगी है, मगर तुष्टिकरण में गले तक डूबी बंगाल की ममता सरकार तो खुद ही अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्या घुसपैठियों को राज्य में बसाने पर तुली हुई है, ऐसे में ममता इसकी जांच कराएगी, इसकी उम्मीद ज़रा कम ही है.

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बार काउंसिल का आया बड़ा फैसला,कांग्रेसी वकीलों को पड़ी तगड़ी लात तो अब इसलियें राम मंदिर पर नहीं घुसेड़ेंगे टांग

नई दिल्ली : राम मंदिर किसी भी हालत में ना बन पाए इसकी पूरी कोशिश में कांग्रेस जीतोड़ मेहनत करने में लगी है. अभी 44 सांसद के साथ कांग्रेस जिसके विपक्ष सरकार बनने के भी लाले पड़ गए थे उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास मत प्रस्ताव का फैसला किया है. तो वहीँ अब सुप्रीम कोर्ट के CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने जा रही है. इस बीच बार कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने कांग्रेस के कपिल सिब्बल समेत अन्य वकीलों को ज़ोरदार झटका दिया है.

New Delhi: In the entire effort of the Ram temple, in any condition, the Congress has started working hard. Now with 44 MPs, the Congress, whose opposition to the formation of the government, has also decided to propose an unbelief vote proposal against the Modi government. So he is now going on impeachment against the Supreme Court’s CJI Deepak Mishra. Meanwhile, the Bar Council of India has strongly shocked other lawyers, including Kapil Sibal of Congress.

राम मंदिर, रोहिंग्या पर बार कॉउन्सिल ने सुनाया फैसला, कपिल सिब्बल के निकले आंसू

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अदालत में प्रैक्टिस करने पर ही प्रतिबंध लगा दिया है.

Ram Temple, Bar Council of Barring the decision on Rohingya, Kapil Sibal’s tears turned out

According to the latest news, the Bar Council of India has passed a resolution and banned Congress leader and senior lawyer Kapil Sibal, Abhishek Manu Singhvi and Vivek Tankha from practicing in the court of Chief Justice of India Deepak Mishra.

नया प्रस्ताव उन सांसदों और विधायकों को ऐसी अदालतों या जजों के सामने आने से रोकेगा, जिनका वह विरोध कर रहे हैं. अध्यक्ष मनन मिश्रा ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि हम सांसदों और विधायकों को कोर्ट में प्रैक्टिस से नहीं रोक सकते, लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी हैं. ऐसे वकील, जो सांसद या विधायक भी हैं, अगर वह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव शुरु करते हैं तो वह उन जजों की अदालतों में प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे.

The new proposal will prevent those MPs and MLAs from appearing before such courts or judges who are opposing them. Speaking to the media on Saturday, Chairman Manan Mishra said that Bar Council of India (BCI) has reached the conclusion that we can not stop MPs and MLAs from practicing in the court, but there are some exceptions. Such lawyers, who are also MPs or MLAs, if they initiate impeachment proceedings against the High Court or Judge of the Supreme Court, then they will not be able to practice in those judges’ courts.

चीफ जस्टिस की अदालत में नहीं जा पाएंगे कांग्रेसी वकील

इससे अब ये बड़ी राहत मिलेगी कि CJI दीपक मिश्रा जिस भी केस कि सुनवाई कर रहे होंगे, कांग्रेस के ये वकील कपिल सिब्बल उसमे टांग नहीं अड़ा पाएंगे. बता दें CJI दीपक मिश्रा हर बड़े और गंभीर मामलों की सुनवाई कर रहे हैं. राम मंदिर, रोहिंग्या, आधार, तीन तलाक जैसे सभी मुद्दों पर अब कांग्रेस के चालाक वकील उसमे टांग नहीं अड़ा पाएंगे. इस फैसले से कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लगा है. क्यूंकि राम मंदिर की सुनवाई को कपिल सिब्बल ने ही 2019 तक टलवाने के लिए ने बहुत हाथ पाँव मारे थे.

Congress lawyer not going to court in Chief Justice

This will be a great relief now that whatever the case the CJI Deepak Mishra is hearing, Congress lawyer Kapil Sibal will not be able to hang him. Tell us CJI Deepak Mishra is hearing every major and serious case. On all issues like Ram temple, Rohingya, Aadhaar, three divorces, now the Congress’s clever lawyer will not be able to hang him. This decision has caused a major setback to the Congress. Because the hearing of the Ram temple was too much for Kapil Sibal to hang till 2019.

तो वहीँ इस फैसले के बाद से कांग्रेस बुरी तरह खीज उठी है. कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा ने बार काउंसिल के इस फैसले का विरोध किया था, लेकिन बार काउंसिल ने उनके विरोध यह कहते हुए दरकिनार कर दिया कि वकीलों के पास इसका विरोध करने का अधिकार नहीं है.

So, after this decision, the Congress has been very upset. Kapil Sibal, Abhishek Manu Singhvi and Vivek Tankha opposed this decision of the Bar Council, but Bar Council barred their protest saying that lawyers do not have the right to oppose it

बता दें जिस भी बड़े मुद्दे का बीजेपी का विरोध करना होता है तो कांग्रेस सबसे पहले कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी जैसे वकीलों को ही आगे करवाती थी. लेकिन अब तो वो कोर्ट में कदम भी नहीं रख पाएंगे.

Tell the biggest issue that BJP has to oppose, the Congress would have been advocating advocates like Kapil Sibal and Abhishek Singhvi first. But now he will not be able to move to the court.

काउंसिल के इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस के प्रस्ताव पर ऐसे सांसद हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे, जो कोर्ट में वकालत भी करते हों. इसका मतलब ये हुआ कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी महाभियोग की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे.

After this decision of the Council, such MPs will not be able to sign on the Congress proposal preparing for impeachment against Supreme Court Chief Justice Deepak Mishra, who also advocate in the court. It means that the Congress Rajya Sabha MP Abhishek Manu Singhvi can not be involved in the impeachment process.

दरअसल, बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि ऐसे सांसदों और विधायकों की कोर्ट प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाए. उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 49 का हवाला देते हुए ऐसे नेताओं की कोर्ट प्रैक्टिस को असंवैधानिक बताया था.

In fact, BJP leader Ashwani Upadhyay had petitioned the Supreme Court to ban the court practice of such MPs and legislators. He cited the Court Practice of such leaders as unconstitutional, citing Rule 49 of the Bar Council of India.

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चाइनीज माल की तरह नहीं चल सका चीन का विशाल स्पेस स्टेशन,बड़े धमाके के साथ आ गिरा भारत के इस इलाके में

नई दिल्ली: चीन का निष्क्रिय हो चुका अनियंत्रित स्पेस स्टेशन टियांगोंग-1 सोमवार (2 अप्रैल) तड़के क्रैश हो गया. स्पेस स्टेशन टूटकर दक्षिण प्रशांत महासागर में आकर गिरा है. हालांकि वैज्ञानिकों ने कहा है कि टियांगोंग-1 के गिरने की सही जगह बता पाना मुश्किल है. गनीमत रही कि इस स्पेश स्टेशन के गिरने से किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है. चीन के स्पेस इंजीनियरिंग ऑफिस के मुताबिक 8 टन वजनी टियांगोंग-1 का ज्यादातर हिस्सा समुद्र में गिरने से पहले ही जल गया था. वैज्ञानिकों ने भी स्पेस स्टेशन के धरती पर आने से किसी भी नुकसान की आशंका से इनकार किया था.

New Delhi: China’s disrupted space station Tiangong-1 has crashed in the morning (April 2). The space station has broken down into the South Pacific Ocean. Although scientists have said that it is difficult to find the exact location of the fall of Tianjong-1. There was a loss that there was no loss of life and property due to the fall of this special station. According to China’s Space Engineering Office, most of the 8 tonnes of Tiangong-1 was burnt before it fell into the sea. The scientists also denied the possibility of any damage by coming to the space station.

आग के गोले की तरह गिरा अंतरिक्ष स्टेशन
बताया जा रहा है कि धरती पर गिरते वक्त अंतरिक्ष स्टेशन बहुत ही तेज गति से बिखरने लगा और चमकीले आग के गोले में तब्दील हो गया. देखने में वह उल्का पिंड जैसा लग रहा था. इससे पहले ईएसए ने कहा था, ‘यह बहुत ही तीव्र गति से धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और विखंडित प्रयोगशाला का मलबा न्यूजीलैंड से लेकर अमेरिकी मिडवेस्ट के बीच कहीं भी गिर सकता है. चाइना मैन्ड स्पेस इंजीनियरिंग ऑफिस ने इससे पहले अपने सोशल मीडिया अकाउंट वी चैट पर कहा, ‘‘लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है.

Drop Space Station Like Fireballs
It is being told that while falling on the earth, the space station began to scatter at a very fast pace and turned into a glowing fire shell. He looked like a meteoroid object in view. Earlier, the ESA had said, ‘It will enter the Earth’s atmosphere at very rapid pace and debris of discrete laboratory can fall anywhere between New Zealand to the American Midwest. Earlier, the China Mind Space Engineering Office said on their social media account V chat, “People do not need to worry.

उसमें कहा गया था, ‘यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से नहीं टकराएगा जैसा कि विज्ञान- काल्पनिक फिल्मों में दिखाया जाता है, लेकिन यह चमकीले पदार्थ (लगभग उल्का पिंड जैसा) में तब्दील हो जाएगा और पृथ्वी की तरफ आने के क्रम में यह पूरे आकाश में एक टूटते तारे की तरह घूमते हुए दिखाई देगा.’

It was said, ‘This spacecraft will not hit Earth, as it is shown in science-fiction movies, but it will be transformed into a bright matter (almost like a meteoroid) and in the order of coming towards the Earth, A rotating star will look like roaming. ‘

ये भी पढ़ें: अनियंत्रित स्पेस स्टेशन से तबाही की थी आशंका

7 साल पहले अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था ‘टियांगोंग-1’
टियांगोंग-1- ‘हैवेनली पैलेस’ को सितंबर 2011 में कक्ष में स्थापित किया गया था, जो चीन का अपना एक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में अति महत्त्वपूर्ण कदम था. इस स्थिति के लिए लोग सोशल मीडिया पर चीनी सरकार की आलोचना कर रहे हैं.

Read also: Fear of devastation from uncontrolled space station

7 years ago was established in space ‘Tiangong-1’
Tiangong-1- ‘Heavenly Palace’ was established in the room in September 2011, which was a very important step towards establishing China’s own space station. For this situation, people are criticizing the Chinese government on social media.

2011 में चीन ने किया था लॉन्च
इस अंतरिक्ष स्टेशन को चीनी अंतरिक्ष एजेंसी चाइना नेशनल स्‍पेस एडमिनिस्‍ट्रेशन (CNSA) ने 29 सितंबर, 2011 को लॉन्च किया था. इसका वजन 8.5 टन बताया जा रहा था. इसकी लंबाई 10 मीटर और चौड़ाई 3 मीटर थी. यह तियांगोंग प्रोग्राम का हिस्‍सा था और इस प्रोग्राम का पहला सक्रिय हिस्‍सा भी था.

China Launches 2011
This space station was launched by the Chinese Space Agency China National Space Administration (CNSA) on September 29, 2011. It was being said to be 8.5 tons. Its length was 10 meters and the width was 3 meters. It was part of the Tiangong program and was also the first active part of the program.

ये भी पढ़ें- धरती पर गिरेगा चीन का स्पेस स्टेशन, दुनिया के 80% शहरों पर मंडरा रहा खतरा

चीन के इस बेकाबू स्पेस स्टेशन में खतरनाक रसायन भरे थे. इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि जब भी यह धरती से टकराएगा तबाही लाएगा. वैज्ञानिकों का मानना था कि पृथ्‍वी के वातावरण में प्रवेश करते ही इसका मलबा हजारों किलोमीटर दूर तक फैल सकता है. यह मलबा आबादी क्षेत्रों पर भी गिर सकता है. लेकिन गनीमत रही कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

Read also – China’s Space Station will fall on Earth, the danger of cruising on 80% of the world’s cities

In China’s uncontrollable space station, there were dangerous chemicals. Therefore, it was feared that whenever it collides with the earth, there will be a catastrophe. Scientists believed that its debris could spread thousands of kilometers on entering the Earth’s atmosphere. This debris can also fall on populated areas. But there was no such thing that there was nothing like this

2016 में खोया था नियंत्रण
दो साल की अभियान अवधि बढ़ाने के बाद 21 मार्च, 2016 को चीन ने इसकी सेवाएं आधिकारिक रूप से बंद कर दिया था. चीनी स्‍पेस एजेंसी ने तियांगोंग-1 पर से लांचिंग के पांच साल बाद और सेवाएं बंद करने के कुछ महीनों बाद ही नियंत्रण खो दिया था. इसके बाद वैज्ञानिकों ने 2017 के आखिर में इसके धरती के वातावरण में प्रवेश करके जलकर नष्‍ट होने की आशंका जताई थी.

https://youtu.be/tcioUe_eYUg

Control was lost in 2016
On March 21, 2016, after China extended its two-year campaign period, China officially shut down its services. The Chinese Space Agency lost control after a few years of launching from Tiangong-1 and after a few months of shutting down the services. After this, scientists feared that they would enter the Earth’s atmosphere by the end of 2017.

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कर्णाटक चुनाव से पहले गुजरात में कांग्रेस का बवाल,खतरनाक साजिश का हुआ पर्दफाश,जनेऊधारी के कपडे उतरने की बारी

पिछले 2 दिनों से भारतीय मीडिया गुजरात को लेकर एक खबर बहुत बड़े पैमाने पर चला रही है! जरा सोचिये की आखिर इस खबर को किसके इसारे पर चलाया जा रहा है! क्या झूठी खबर फैलाकर राजनितिक पार्टिया सत्ता हासिल करना चाहती है! मीडिया के साथ साथ कई बड़े बड़े नेता भी इस खबर को ट्वीट कर रहे है – बताया जा रहा है की गुजरात में एक दलित लड़के को सवर्णों ने इसलिए मार दिया क्यूंकि दलित युवक घोडा खरीदकर लाया और उसने घोड़े को राइड किया, भारतीय मीडिया और विपक्षी दल के नेता इस खबर को तेजी से फैला रहे है! ताकि गुजरात सरकार को बदनाम किया जाये जिसका फायदा आगामी आने वाले चुनावो में हो सके!

कुछ दिनों पहले भी जब बामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या हुयी थी तब भी कुछ पत्रकार और नेता बिना किसी सबूत के हिंदूवादी संगठनों पर इल्जाम लगाना शुरू कर दिया था! और अब इस मामले में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है! पहले हम आपको दिखाते है इस खबर को भारतीय मीडिया के अलावा कितने बड़े बड़े नेता फैला रहे है, फिर आपको पूरा सच भी दिखायेंगे!

Even a few days ago, when journalist Gauri Lankesh was murdered, some journalists and leaders had started charging Hindus outfits without any evidence! And now in this case, something similar is happening! First we show you how many big leaders are spreading this news besides the Indian media, then you will also show the whole truth!

ये ऊपर आप देख रहे है की किस तरह इंडियन एक्सप्रेस नाम का अख़बार और NDTV इस खबर को चला रहा है की गुजरात में घोडा राइड करने पर सवर्णों ने दलित की हत्या कर दी, ये सिर्फ 2 मीडिया का हम आपको उदाहरण दे रहे है, बाकि सभी सेक्युलर मीडिया इस खबर को चला रही है! यहाँ तक की कांग्रेस के बड़े नेता भी इस खबर को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे है!

On top of this, you see how the newspaper of Indian Express and NDTV is running the news that while riding a horse in Gujarat, the upper castes killed Dalits, we are giving examples of just 2 media, but All the secular media is running this news! Even big leaders of Congress are sharing this news on social media!

https://www.facebook.com/jitendrapratapsingh111/videos/1621702954593357/

इस खबर के बारे में पुरे देश को सोशल मीडिया व्हाट्सप्प के माध्यम से बताया जा रहा है की गुजरात में घोडा राइड करने पर सवर्णों ने दलित लड़के को मार दिया, इस खबर को फ़ैलाने का मकसद है की दलितों और बाकि हिन्दुओ के बीच में खाई को अधिक से अधिक गहरा करना, और हिन्दुओ को बुरी तरह तोड़ देना, अब आप इस खबर के सच को देखिये!

About this news, the entire country is being told through social media whotsap that if the horse riding in Gujarat, the upper castes killed the dalit boy, the purpose of spreading the news is that the ditch between the Dalits and the rest of Hindus Deepen deeper, and break the Hindus badly, now you see the truth of this news!

दलित युवक दलित युवक प्रदीप राठोड की हत्या पर देखिये भावनगर के एसपी प्रवीण मल ने क्या कुछ कहा- “प्राथमिक जांच में कोई सबूत नहीं पाया गया है कि वह एक घोड़ा रखने के लिए मार डाला गया था। इस हत्या के पीछे कुछ व्यक्तिगत विवाद हो सकते है! आगे की जांच चल रही है”

Look at the murder of a Dalit youth Dalit youth Pradeep Rathore. Bhavnagar SP Praveen Mal said something – “There is no evidence in the preliminary investigation that he was killed to keep a horse. There can be some personal dispute behind this murder! Further investigation is going on ”

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चीन घुसपैठ से सनका PM मोदी का माथा दिए जबर्दस्तआदेश ,भारतीय सेना के इस कदम से चीन के होश हुए फाख्ता

नई दिल्ली (01 अप्रैल) : विश्वासघाती देश चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. एक ओर तो चीन, भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद कर रहा है, वहीँ दूसरी ओर भारतीय इलाकों पर भी उसने अपनी पैनी निगाहें जमाई हुई हैं. डोकलाम में भारतीय सेना के सामने घुटने टेकने के बावजूद चीनी सैनिक आयेदिन भारतीय इलाकों में घुसपैठ कर रहे हैं. चीन की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए भारतीय सेना द्वारा अब कठोर कदम उठाये जा रहे हैं.

New Delhi (April 01): The treacherous country China does not seem to care about its antics. On the one hand, China is helping Pakistan against India, on the other hand, on the other side of Indian territory, she has seen her sharp eyes. Despite kneeling in front of the Indian Army in Dokalmal, Chinese soldiers are infiltrating in Indian territory. Now the harsh steps are being taken by the Indian Army to establish a solid base of China.

चीनी सेना के इलाज के लिए ब्रह्मोस मिसाइल और होवित्‍जर तोप
अभी हाल ही में चीनी सैनिकों द्वारा अरुणाचल में घुसपैठ की खबरें आयी थीं, हांलाकि भारतीय जवानों ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया था. वहीँ मोदी सरकार ने चीन के बिगड़ते तेवरों का इलाज करने का मन बना लिया है.

Brahmos missile and howitzer cannon for the treatment of Chinese army
More recently, reports of infiltration of Chinese troops in Arunachal were received, however Indian soldiers had driven them away from there. That’s why the Modi Government has made a mind to treat the deteriorating tensions of China.

लद्दाख और अरुणाचल की सीमाओं पर चीन की सक्रियता को देखते हुए मोदी सरकार ने सीमा पर पहले से कहीं ज्‍यादा जवानों को गश्‍त पर लगा दिया है. जवानों के अलावा भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों और होवित्‍जर तोपों की भी तैनाती कर दी है. इससे तिब्‍बत से लगते चीन सीमा पर भारतीय सेना की ताकत मजबूत हो गई है.

Looking at China’s activism on the borders of Ladakh and Arunachal Pradesh, the Modi government has put more troops on patrol than before on the border. Apart from the jawans, India has also deployed Brahmos missiles and Howitzers. This strengthens the strength of the Indian Army on the Chinese border with Tibet.

चीनी सेना कर रही उकसाने वाली हरकतें
आपको बता दें कि सात महीने पहले सिक्किम-भूटान-तिब्बत के ट्राई जंक्शन डोकलाम में भारत और चीनी सेना के बीच 72 दिनों तक गतिरोध जारी रहा था, जो राजनयिक प्रयासों के जरिए खत्‍म हो गया था. लेकिन चीन ने इस क्षेत्र में फिर न केवल सेना की तैनाती बढ़ा दी है बल्कि उसने हैलीपेड बनाने से लेकर घातक हथियारों को भी बॉर्डर पर जमा कर लिया है. चीन के इस कदम से लद्दाख और अरुणाचल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है.

Chinese provocative actions
Let us tell you that seven months ago there was a stalemate between India and the Chinese army in the Trio junior Docmal of Sikkim-Bhutan-Tibet, which had been stalled for 72 days, which ended with diplomatic efforts. But China has not only increased the deployment of the army in this area but also made helipads from the deadly weapons and deposited them on the border. With China’s move, tension has increased once again in Ladakh and Arunachal Pradesh.

लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की बटालियन
मगर मोदी सरकार किसी भी हाल में चीन की नापाक चालों को सफल नहीं होने दे रही है. किसी भी स्थिति में चीनी सेना को धूल चटाने के लिए ना केवल ब्रह्मोस जैसी शक्तिशाली मिसाइलों की तैनाती की गयी है बल्कि होवित्जर तोपों की तैनाती भी की जा चुकी है. इसके अलावा भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती भी की है.

B-battalion of T-72 tanks in Ladakh and Sikkim
But the Modi Government is not allowing any of the nefarious movements of China to succeed. In any situation, not only the powerful missiles like Brahmos have been deployed to dust the Chinese army, but the hovitzer guns have also been deployed. Apart from this, India has also deployed T-72 tanks in eastern Ladakh and Sikkim.

वायुसेना भी अलर्ट पर
इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है. किसी भी पल आर-पार की लड़ाई के लिए सेना को पूरी तरह से तैयार रखा गया है. सीमावर्ती इलाकों पर पैनी नज़र रखी जा रही है. चीनी सैनिक कोई नापाक योजना ना बना रहे हों, इसके लिए सेना पूरी तरह से अलर्ट है.

Air Force also on alert
Apart from this, Sukhoi-30 MKI squadrons in the North-East have also been dropped. The army is fully prepared for any moment crossing the battle. The border areas are being monitored on the border areas. The Army is completely alert for the Chinese soldiers not making any nefarious plans

दरअसल चीन पहले भी भारत के साथ विश्वासघात कर चुका है. 1962 में भी चीन ने चुपके से बिना किसी चेतावनी के पीछे से आक्रमण कर दिया था. उस वक़्त तो जवाहर लाल नेहरू की नाकाम नीतियों के कारण भारत को पराजय का मुँह देखना पड़ गया था, मगर अब हालात बदल चुके हैं और मोदी सरकार द्वारा उठाये गए कदमों को देख कर स्पष्ट है कि वो चीन को हलके में नहीं ले रही.

Indeed, China has already betrayed India. In 1962, China also secretly attacked from behind without warning. At that time, due to the failed policies of Jawaharlal Nehru, India had to face defeat, but now things have changed and after seeing the steps taken by the Modi government, it is clear that they are not taking light on Chin

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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी को कहा कुछ ऐसा की PM मोदी समेत पूरा सदन रहा गया दंग

नई दिल्ली : राज्यसभा ने बुधवार को अपने करीब 60 सदस्यों को विदाई दी जो सेवानिवृत्त हो रहे हैं! इस मौके पर सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों ने अपना विदाई भाषण दिया! सदस्यों की विदाई के मौके पर देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू एक अलग अंदाज में नजर आए! राज्यसभा को अलविदा कह रहे नेताओं की विदाई कार्यक्रम के दौरान सभापति ने चुटकी ली! इसी दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेणुका चौधरी से वेंकैया नायडू ने कुछ ऐसी बात कह दी कि पूरा सदन उनकी बात पर ठहाके मार कर हंसने लगा!

New Delhi: Rajya Sabha farewell to nearly 60 members on Wednesday, who are retiring! On this occasion, the retired members gave their farewell speech! On the occasion of the farewell of the members, Vice-President and Rajya Sabha Chairman Venkaiah Naidu appeared in a different style! During the farewell program of the leaders saying goodbye to the Rajya Sabha, the Chairman quipped! Meanwhile, Venkaiah Naidu, senior Congress leader Renuka Chowdhury, has said something like this that the whole House started laughing at her talk.

दरअसल रेणुका चौधरी ने अपने विदाई भाषण के दौरान वेंकैया नायडू का जिक्र करते हुए कहा, ‘सर, कई लोग मेरे वजन को लेकर चिंतित रहते हैं लेकिन मेरा काम कुछ ऐसा है कि मुझे लोगों को अपना वजन दिखाना पड़ता है!’ इस बात का जबाब देने में सभापति को देर नहीं लगी! नायडू ने कहा, ‘‘‘मेरा सरल सुझाव है कि आप अपना वजन कम करें और पार्टी का वजन (प्रभाव) बढाने के लिए प्रयास करें’ उनकी इस टिप्पणी पर सदन में हंसी की लहर फैल गयी! उपराष्ट्रपति के इस चुटीले अंदाज पर सदन में जमकर ठहाके लगे!

Actually Renuka Chowdhary, while referring to Venkaiah Naidu during her farewell speech, said, “Sir, many people are worried about my weight, but my job is something that I have to show my weight to the people!” The chairman was not late in giving! Naidu said, “My simple suggestion is that you lose weight and try to increase the weight (effect) of the party.” The wave of laughter spread in the House on this comment! Upon this silly assumption of Vice President, in the House!

आगे रेणुका चौधरी ने अपने भाषण के दौरान हुई कई घटनाओं का जिक्र किया! उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि नज्मा हेपतुल्लाह के खिलाफ पूरे सदन ने उन्हें डिप्टी चेयर के पद के लिए समर्थन दिया! साथ ही उन्होंने सदन में महिलाओं की 11 फीसदी संख्या का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है!

Renuka Chaudhary further mentioned many events during his speech! He said that he is happy that the entire House against Najma Heptullah gave him support for the post of Deputy Chairperson! He also mentioned about 11 percent of women in the House saying that there is a need to increase women’s participation!

इस विदाई कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता रजनी पाटिल ने भी अपना भाषण दिया! उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उन्होंने लोकसभा और राजयसभा का अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया। इस पर वेंकैया नायडू ने फिर से चुटकी ली और कहा कि ‘अब फिर से लोकसभा में चली जाइए।’ उनकी इस बात पर फिर से सदन ठहाकों से गूंज उठा!

Congress leader Rajni Patil also gave a speech during this farewell program! He said that he is happy that he successfully completed his tenure of Lok Sabha and Rajya Sabha. On this, Venkaiah Naidu picks up again and said, ‘Now go back to the Lok Sabha again.’ His resignation was again raised in the House!

वहीं संसद की कार्यवाही नहीं चलने से चिंतित, राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सांसदों से आग्रह किया कि वे “राजनीति के स्तर” में गिरावट नहीं लायें तथा खुद को अधिक मर्यादित तरीके से व्यवस्थित करते हुए नयी शुरुआत करें! नायडू ने यह भी कहा कि ऊपरी सदन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 2010 में महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने के बावजूद “बहुत कम” है और उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि सभी राजनैतिक दल इसे प्राथमिकता देंगे!

Concerned not to proceed with the proceedings of Parliament, Rajya Sabha Speaker Venkaiah Naidu urged the MPs not to bring down the “level of politics” and start a new one by organizing itself in a more limited way! Naidu also said that the representation of women in Upper House is “very little” despite the passage of the Women’s Reservation Bill in 2010 and they expressed the hope that all political parties will give it priority!

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लाशों के ढेर पर PM बनने की चाह वाली ममता को हिंदु पत्रकार मानक गुप्ता ने मारा जोरदार तमाचा,याद दिलाये अटल जी के ये बड़े शब्द |

बिहार में और बंगाल में दोनों जगहों पर राम नवमी पर दो समुदायों के बिच भड़के हिंसा ने पुरे देश में चिंता बढ़ा दी है! पर बिहार और बंगाल में अलग अलग रिएक्शन हुआ, और एक बड़ा फर्क तो ये है की बिहार में बीजेपी शासन में शामिल है, जबकि बंगाल में ममाता बनर्जी, बिहार में पुलिस भी काम कर रही है, पर बंगाल में पुलिस खुद सुरक्षित नहीं है, उसके आईपीएस अफसर का हाथ उड़ा दिया जा रहा है, फिर भी दंगाइयों पर कार्यवाही नहीं हो रही है!

Violence has raised anxiety over the whole of the country in Bihar and between two communities on both Ram Navy in Bengal. But there was a different reaction in Bihar and Bengal, and one major difference is that in Bihar BJP is included in the rule, whereas in Bengal, Mamata Banerjee, Bihar police is also working, but the police itself is not safe in Bengal, His IPS officer is being handed over, yet the rioters are not being prosecuted!

इसी कड़ी में पत्रकार मानक गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर का हवाला देते हुए एक तीखा सवाल पूछा, उन्होंने कहा की “ममाता बनर्जी को कोई राजधर्म बताने वाला है क्या ?” क्यूंकि बंगाल जल रहा है, पुलिस का कुछ अता पता नहीं, पर ममाता बनर्जी तो राजनितिक गोटियाँ सेंकने में व्यस्त है! ममता बनर्जी प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए है और बीजेपी के खिलाफ सभी विपक्षी पार्टयों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है!

In this episode, the journalist standard Gupta asked a tighter question citing the news in the Indian Express, he said, “Is there any state religion to tell Mamata Banerjee?” Since Bengal is burning, the police do not know anything at all. Mamata Banerjee is busy baking political guts! Mamata Banerjee is camping in Delhi to dream of becoming the Prime Minister and is trying to unify all the opposition parties against the BJP!\

मानक गुप्ता ने ये भी कहा की – “आसनसोल से जान बचाकर भागने वाले अधिकतर लोग हिन्दू ही है, और वो लोग इतने डरे हुए है की वापस अपने घरों में भी आने से डर रहे है”! बंगाल में आलम यह है की खुद बंगाल पुलिस भी सुरक्षित नहीं है! और जब बंगाल के राजयपाल ने आसनसोल का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने की बात कही तो ममता सरकार की तरफ से उनसे कहा गया की उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने में सरकार असमर्थ है!

Standard Gupta also said that “Most of the people who escape from Asansol are Hindus, and they are so scared that they are scared to come back to their homes”! Alam in Bengal is that the Bengal police itself is not safe too! And when the Bengal governor visited Asansol and asked to take stock of the situation, on behalf of the Mamta government he was told that the government is unable to provide adequate security to him!

आपकी जानकारी के लिए बता दें की बंगाल की स्तिथि ये है की वहां का स्थानीय हिन्दू पलायन को मजबूर है, वहीँ बंगाल में लगातार रोहिंग्या और बंगलादेशी घुसाए जा रहे है, कदाचित हिन्दुओ को भागकर इन इलाकों में अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को बसाने की मंशा है!

For your information, let us know that the condition of Bengal is that local Hindus are forced to flee there, and Rohingya and Bangalandis are constantly being persuaded in Bengal, perhaps Hindus have the intention of running illegal Bangladeshi and Rohingyas in these areas. !

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