तीन तलाक के बाद कश्मीर में धारा 370 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लिया कड़ा फैंसला, महबूबा को लगा तगड़ा झटका !

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नई दिल्ली : तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है. जहाँ लोकतंत्र की जीत पर पूरा देश खुशियां मना रहा है, वहीँ कई मुस्लिम संगठन मातम मना रहे हैं. मगर सबसे ज्यादा हालात खराब है कश्मीरी अलगाववादियों समेत महबूबा और फारुख अब्दुल्ला की है. जानकारों के मुताबिक़ तीन तलाक के बाद देश में एक और जबरदस्त काम होने जा रहा है, जिससे कश्मीर में अलगाववाद की राजनीति करने वालों के हाथ-पाँव फूल गए हैं.

NEW DELHI: The Supreme Court has banned three divorces, saying that they were unconstitutional. Where the whole country is celebrating the victory of democracy, many Muslim organizations are celebrating the weeds. But the worst situation is bad, including the Kashmiri separatists, Mehbooba and Farooq Abdullah. According to experts, after the three divorces, there is going to be another tremendous work in the country, due to which the people of Kashmir’s politics of separatism have lost their hands and feet.

आर्टिकल 35A होने वाला है ख़त्म!

जिस तरह से तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में था, ठीक उसी तरह से संविधान के अनुच्छेद 35(ए) और धारा-370 के मामले भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाली धारा-370 पर सुप्रीम कोर्ट में बहस शुरू हो गई है और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है कि धारा-370 को कैसे और क्यों खत्म किया जा सकता है. जानकारों के मुताबिक़ अब अगला फैसला कश्मीर से आर्टिकल 35A को ख़त्म किये जाने का आएगा.

Article 35A is going to happen!

In the same way, the case of Article 35 (A) and section 370 of the constitution is also in the Supreme Court in the same way as the case of three divorce cases was in the Supreme Court. The debate has begun in the Supreme Court on Article 370, which gives privilege to Jammu and Kashmir and the Supreme Court has issued a notice to the government and asked for an answer as to how and why Section 370 can be abolished. According to the experts, the next verdict will now come to the end of Article 35A from Kashmir.

जिसके बाद गैर कश्मीरी भारतीय लोग भी कश्मीर में जमीन खरीद पाएंगे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्टिकल 35A के कारण जम्मू-कश्मीर में रह रहे पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी, बाल्मीकी, गोरखा समेत लाखों लोग 60 साल बाद भी ना तो राज्य में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और ना ही इनके बच्चे यहां व्यावसायिक शिक्षा में दाखिला ले सकते हैं.

After which non-Kashmiri Indians will also be able to purchase land in Kashmir. For your information, let us know that millions of people, including Balmiki, Gorkha, who came from western Pakistan, living in J & K due to Article 35A, cannot apply for government jobs in the state either after 60 years or neither have their children Here you can get admission in professional education.

सुप्रीम कोर्ट में है मामला!

एक एनजीओ ने धारा 370 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की हुई है, जिसपर सुनवाई चल रही है. एनजीओ ने अपनी याचिका में आर्टिकल 35A की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह अनुच्छेद कभी संसद में पेश ही नहीं हुआ बल्कि इसे तो राष्ट्रपति के आदेश पर लागू किया गया था. इस प्रावधान को 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने धारा 370 में प्रदत्त राष्ट्रपति के अधिकारों का उपयोग करते हुए ‘संविधान (जम्मू एवं कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश 1954’ को लागू किया था.

Matter in the Supreme Court!

An NGO has appealed to the Supreme Court against Article 370, which is under trial. The NGO has, in its petition, questioning the Constitutionality of Article 35A, said that this article was never present in the Parliament, but it was applied to the President’s order. This provision was enacted in 1954 by the then President Rajendra Prasad using the powers of the President, provided in Section 370, the Constitution (Application for Jammu and Kashmir) Order, 1954.

इस याचिका पर तीन न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई कर रही है और मोदी सरकार भी आर्टिकल 35A को ख़त्म करने की इच्छुक है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला आर्टिकल 35A को ख़त्म करने का जरूर आएगा और देश की सूरत सदा के लिए बदल जायेगी. घाटी में अन्य राज्यों से लोगों के बसने से कश्मीर की राजनीति में बड़ा उलटफेर होगा और पत्थरबाजी व् अलगाववाद सदा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

The bench of three judges is hearing the petition and the Modi government is also keen to end Article 35A. In such a case, the Supreme Court’s next verdict will definitely come to an end for Article 35A and the country will change forever. In the valley, the settlement of people from other states will have a major reversal in Kashmir’s politics and stone-throwing and separatism will end forever.

वहीँ जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती कश्मीर के विशेषाधिकार पर ख़तरा देखकर बुरी तरह बौखला गयी हैं. दरअसल विशेषाधिकार के कारण ही इन टुटपुँजिये नेताओं की राजनीतिक दुकाने चल रही हैं, इसके चलते बौखलाहट खुलकर सामने आने लगी है. महबूबा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 35(ए) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा. फारुख अब्दुल्ला ने तो कश्मीर में विद्रोह की धमकी तक दे दी है.

The Chief Minister of Jammu and Kashmir Mahbuba Mufti has been badly shocked by the danger of Kashmir’s privilege. In fact, due to privilege, these politicians are running political shops of politicians, which has led to frustration. Mehbooba said that any kind of tampering with Article 35 (A) of the Constitution will not be accepted. Farooq Abdullah has given up the threat of a revolt in Kashmir.

सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगेगा, क्योंकि कश्मीर को तोड़ने का उसका सपना एक ही झटके में धराशायी हो जाएगा. ये बात तय है कि तीन तलाक की ही तरह आर्टिकल 35A के ख़त्म होने का वक़्त अब आ गया है.

The biggest blow to Pakistan will be because its dream of breaking Kashmir will be dashed in one stroke. It is certain that the date of the end of Article 35A is now just like the three divorces.
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