VIDEO: कश्मीर के आर्टिकल 35A पर PM मोदी का हाहाकारी फैसला, मोदी जी के पैरों में गिर पड़ी महबूबा

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नई दिल्ली: 2014 चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने देश में अच्छे दिन लाने का वादा किया था. अभी-अभी आ रही इस खबर के मुताबिक़ अब देश में वाकई अच्छे दिन आ गए हैं. कश्मीर में वो होने जा रहा है, पहले जिसका जिक्र तक नहीं किया जाता था. मोदी सरकार के दांव से महबूबा समेत कश्मीर के सभी नेताओं की पोल भी खुल गयी है.35A हटने के डर से महबूबा ने शुरू की भागम-भाग

New Delhi: During the 2014 elections, PM Modi promised to bring good days in the country. According to the news coming just now, the days have come really good in the country. He is going to be in Kashmir, which was not mentioned before. With the betrayal of the Modi Government, the poles of all Kashmiri leaders including Mehbooba have also been opened.
35-yr Running away from Mahbuba, fear of retreat

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 35A हटने जा रहा है. इसकी आशंका मात्र से पूरे कश्मीर में बवाल मच गया है. कट्टरप‍ंथयों के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी ये बात हजम नहीं रही है. सभी को अपनी कुर्सी पर गहराता संकट दिखाई देने लगा है. कश्मीरियों की हमदर्द होने का दिखावा करने वाली जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कश्मीर से दिल्ली दौड़ पड़ी हैं.

Article 35A is going to be removed in Jammu and Kashmir. It is only feared that there has been a rift in Kashmir. Along with fanatics, political parties have not digested this thing either. Everyone is beginning to see a profound crisis on their chair. Jammu and Kashmir Chief Minister Mahbuba Mufti Kashmir, who pretends to be a sympathy for the Kashmiris, has run in Delhi.

महबूबा दिल्ली में पीएम मोदी के कदमों पर जा गिरी हैं. बीजेपी की ओर से भी साफ़ कर दिया गया है कि महबूबा की मांग को नहीं माना जा सकता क्योंकि महबूबा के साथ मिलकर सरकार बनाते वक़्त साफ़ कर दिया गया था कि आर्टिकल 35ए दोनों पार्टियों के बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का हिस्सा नहीं था.

Mehbooba has gone on the steps of PM Modi in Delhi. It has also been cleared by BJP that the demand of Mehbooba cannot be considered as it was cleared by the establishment of the government in collaboration with Mehbooba that Article 35A was not part of the Common Minimum Program between the two parties.

अचानक फारूक अब्दुल्ला के घर पहुंची थी महबूबा

Suddenly Farooq reached Abdullah’s house Mahbuba

केवल महबूबा ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पैरों तले भी जमीन खिसकी हुई है. कश्मीर के दोनों ही नेता व् उनकी पार्टियां बौखलाई हुई हैं और देश को व् पीएम मोदी को धमकियां तक दे रही हैं. मंगलवार को महबूबा मुफ्ती भागी-भागी फारूक अब्दुल्ला के घर भी जा पहुंची और करीब आधे घंटे तक इस बारे में चर्चा की गयी कि कैसे मोदी को कश्मीर से 35A हटाने से रोका जाए.

Not only Mehbooba but also the lands of the former Jammu and Kashmir Chief Minister Farooq Abdullah, the land has also slipped down. Both the Kashmiri leaders and their parties have been intimidated and giving threat to the country and PM Modi. On Tuesday, Mehbooba reached Mufti’s house in Farooq Abdullah’s house and for about half an hour it was discussed how Modi was prevented from removing 35A from Kashmir.

बताया जा रहा है कि फारूक अब्दुल्ला ने महबूबा को सुझाव दिया है कि वो कांग्रेस समेत अन्य देश विरोधी पार्टियों से इस बारे में बात करें और सभी मिलकर पीएम मोदी पर दबाव बनाएं. यानी अब देश में जल्द ही कांग्रेस समेत अन्य वामपंथी दल, महबूबा और फारुख अब्दुल्ला के साथ खड़े दिखाई दे सकते हैं. महबूबा इसी सिलसिले में सोनिया गांधी से मिलने भी जा रही हैं.

It is being told that Farooq Abdullah has suggested Mehbooba to talk about this with other anti-national parties including the Congress and put pressure on PM Modi together. That is, now the country can see standing with the other Left parties, Mehbooba and Farooq Abdullah along with Congress soon. Mehbooba is going to meet Sonia Gandhi in this regard too.

वहीँ महबूबा का फारुख अब्दुल्ला से इस बारे में हाथ मिलाना साबित करता है कि दोनों ही पार्टिया केवल नाम के लिए ही विपक्षी हैं, लेकिन मंशा दोनों की एक ही है कि सालों-साल कश्मीरी जनता की आँखों में धूल झोंकी जाए और सत्ता की मलाई खायी जाए.

That is why Mehbooba’s joining hands with Farooq Abdullah proves that both parties are merely opposition to the name, but the motivation is the same for both of them that the dust of the eyes of the Kashmiri people in the eyes of the people and the cream of the people have eaten Go.

बता दें कि आर्टिकल 35A को ख़त्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है और सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आर्टिकल 35A का संविधान की किताबों में कहीं जिक्र तक नहीं है. 14 मई 1954 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदेश से इसे संविधान में जगह मिली थी.

Explain that a petition has been filed in the Supreme Court to end Article 35A and the matter is going on in the Supreme Court. You may be surprised to know that Article 35A does not have any mention in the constitutional books. By the order of President Dr. Rajendra Prasad on 14th May 1954, it got a place in the Constitution.

आखिर क्या है यह धारा 35A? इसके हटने से जम्मू-कश्मीर में क्या बदलाव आ जाएगा? आइये जानते हैं-

What is this Section 35A? What will be the change in Jammu and Kashmir due to its withdrawal? Let’s know-

स्थाई नागरिकता से जुड़ा है पूरा मामला

Full case related to permanent citizenship

पूरा का पूरा मामला राजनीतिक है और जम्मू-कश्मीर की स्थाई नागरिकता से जुड़ा हुआ है. दरअसल, जम्मू-कश्मीर में कुछ लोग तो वहीं के रहने वाले हैं और कुछ लोग आजादी के वक्त अन्य जगहों से आए शरणार्थी हैं. अब किसे राज्य का स्थाई नागरिक मानना है और किसे नहीं, ये तय करने का अधिका धारा 35A के तहत जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को मिला है.

The whole case of the whole is political and connected to the permanent citizenship of Jammu and Kashmir. Actually, some people in Jammu and Kashmir are living there and some people are refugees from other places during Independence. Now, who is supposed to be a permanent citizen of the state and who is not, it has got the assembly of Jammu and Kashmir under section 35A of the decision-making body.

आपको जानकार हैरानी होगी कि यदि जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की भारत के किसी अन्य राज्य के लड़के से शादी करती है तो उस लड़की के सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं. यहाँ तक कि उसके बच्चों को भी कुछ नहीं मिलता. लेकिन यदि जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी पाकिस्तानी से शादी करती है तो उस पाकिस्तानी को कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है और लड़की के कोई अधिकार भी ख़त्म नहीं होते.

You must be surprised that if a girl from Jammu and Kashmir marries another boy from India, then all rights of that girl will be over. Even her children do not get anything. But if a girl from Jammu and Kashmir marries a Pakistani, then that Pakistani gets a citizenship of Kashmir and no rights of the girl also end.

बहरहाल केंद्र सरकार के इरादों से साफ़ है कि वो झुकने वाली नहीं है और इसी साल धारा 35A को ख़त्म करने को मन में ठान चुकी है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक़ भी 2019 के चुनाव से पहले ही बीजेपी कश्मीर को और अयोध्या में राम मंदिर बनवाने को लेकर कई अहम् फैसले ले चुकी होगी.

However, with the intentions of the Central Government, it is clear that it is not going to bend, and this year it has decided to end the Section 35A. According to BJP sources, even before the 2019 election, BJP has taken several egoistic decisions regarding Kashmir and construction of a Ram temple in Ayodhya.

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