ब्रेकिंग न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई आज, नीव रखने की तारीख हो सकती है ये…सुन विपक्षियों में मची खलबली..

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुनवाई होने वाली है। ऐसा माना जा रहा है कि कोर्ट में आज लगातार सुनवाई की तारीख तय हो सकती है। खबरों के मुताबिक इस केस के पक्षकारों का कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है, इस मामले को और नहीं टाला जाना चाहिए, जल्द से जल्द निर्णय सुनाने की जरूरत है।

new Delhi. The Supreme Court is scheduled to hear on Wednesday the Ayodhya Ram Janmabhoomi-Babri Masjid land dispute case. It is believed that the date of continuous hearing can be fixed in the court today. According to the news, the parties of this case say that now the Supreme Court is hopeful that this matter should not be avoided, the need to make the decision as soon as possible.

आपको बता दें की जो विपक्ष है वो बिलकुल भी नही चाहता है की राम मंदिर की नीव रखी जाए, कट्टरपंथी कांग्रेस कपिल सिब्बल जैसे लोग बिलकुल भी नही चाहते है की राम मंदिर बने वो चाहते है की बाबरी मस्जिद ही बने लेकिन ऐसा नही होगा क्योंकि देर हो सकती है पर अयोध्या राम जन्म भूमि पर राम मंदिर ही बनेगा..

Let us tell you that the Opposition does not want to keep the foundation of the Ram temple, people like the radical Congress Kapil Sibal do not want to be the Ram temple, they want the Babri Masjid to be made but it will not be because it is late May be but Ayodhya Ram will be the Ram temple on the birthplace.

पिछली बार 1 फरवरी को इस मामले की सुनवाई हुई थी, तब वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और गीता सहित 20 धार्मिक पुस्तकों से इस्तेमाल किए तथ्यों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन न होने की वजह से सुनवाई टालनी पड़ी थी। सुनवाई के दौरान पिटीशनर्स के वकील ने कहा था कि अयोध्या विवाद लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। इस पर चीफ जस्टिस बोले- ऐसी दलीलें मुझे पसंद नहीं, यह सिर्फ भूमि विवाद है।

The last hearing was held on February 1, when the hearing of the facts used by 20 religious books including Valmiki Ramayana, Ramcharitmanas and Geeta had to be stopped due to lack of translation in English. During the hearing, the petitioner’s lawyer had said that the Ayodhya dispute is related to people’s feelings. Chief Justice said on this – I do not like such arguments, this is just a land dispute.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाइकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ 13 याचिका दायर की गई थी। इस मामले से जुड़ी सभी अपील पर कोर्ट एक ही साथ सुनवाई करेगा, कोर्ट में पहले मुख्य पक्षकारो को जिरह का मौका मिलेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितम्बर 2010 को इस मामले में फ़ैसला सुनाते हुए विवादित स्थल को विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।

Explain that 13 petitions were filed against the Allahabad High Court verdict in the Supreme Court. The court will hear the same on all appeals related to this case, in the court, the main parties will get a chance to cross-examine. The Allahabad High Court had ordered the division of the disputed site between the Sunni Waqf Board, Nirmohi Akhara and Lord Rama Lala to the disputed site on 30 September 2010.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को न्यायिक तरीके से सुलझाने के बजाय मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने को कहा था लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।

Earlier, the Supreme Court had asked the Ayodhya Ram Janmabhoomi-Babri Masjid to resolve the dispute rather than judicially, to solve a peaceful solution to the issue, but no positive result has been reached so far.

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