बुलंदशहर – राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन, रामभक्त को डराने के लिए पाकिस्तान से बुलाये गए कट्टरपंथ

Muslims protesting Against ram mandir in Bulandshahar : ऊपर मुस्लिम भीड़ आप जो तस्वीर में देख रहे है ये तस्वीर बुलंदशहर की है जो की दिल्ली के काफी पास उत्तर प्रदेश का एक जिला है 

अधिकतर मीडिया ने इस खबर को दबा दिया है पर इस खबर की पुष्टि सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार ने की है, इसका एक विडियो भी सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार ने जारी किया है जिसे आप नीचे देख सकते है

आज मुसलमानों की भीड़ बुलाई गयी थी अयोध्या में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन के लिए और इसमें सबसे बड़ी चीज ये रही की इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी मुसलमान भी शामिल थे

हिन्दुओ को डराने और अयोध्या में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन कर अपनी शक्ति दिखाने के लिए पाकिस्तानी मुसलमानों को भी बुलाया गया था

इतना ही नहीं जो पाकिस्तानी मुस्लिम इस प्रदर्शन में शामिल है, वो टूरिस्ट वीजा लेकर भारत पहुंचे है, सुदर्शन न्यूज़ के गौरव मिश्रा ने इस खबर की पुष्टि की है

इस भीड़ में भारतीय मुसलमानों के साथ पाकिस्तानी मुसलमान भी शामिल है, राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन और हिन्दुओ को डराने के लिए अपनी शक्ति दिखाने के लिए पाकिस्तानी मुसलमान भी बुलाये गए

बड़ी चीज ये है की प्रशासन ने इस कार्यक्रम के अयोजको के खिलाफ अभी कोई कार्यवाही नहीं की है, जबकि पाकिस्तानी मुसलमान भारत में आकर हिन्दूओ को डराने के लिए अपनी भीड़ दिखा रहे है

source name:dainikbharat

url:dbn.news

संबित पात्रा ने आचार्य प्रमोद को दिया मूंह तोड़ जवाब, कहा -राम रहीम की तरह मत उछलो !

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिवाली के मौके पर अयोध्या में पूजा अर्चना की। सीएम योगी ने अयोध्या में सरयू तट पर भगवान राम की 100 मीटर ऊंची मूर्ति स्थापित करने का भी ऐलान किया है। वहीं दिवाली से पहले अयोध्या में एक साथ 1 लाख 80 हजार दीप जलाकर भव्य दिवाली मनाई गई। अयोध्या पर बीजेपी के इन क्रियाकलापों के मद्देनजर हिंदी समाचार चैनल न्यूज़ 18 ने एक डिबेट शो रखा था जिसका विषय यह था कि क्या बीजेपी अयोध्या की आंधी से जीतेगी चुनाव? इस मुद्दे पर बहस करने के लिए तमाम मेहमानों के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा मौजूद थे तो वहीं बीजेपी के विपक्ष में आचार्य प्रमोद कृष्णन मौजूद थे।

Uttar Pradesh’s Chief Minister Yogi Adityanath worshiped in Ayodhya on the occasion of Diwali. CM Yogi has also announced to set up a 100 meter high statue of Lord Rama on the Sarayu coast in Ayodhya. On the other hand, Diwali was celebrated after the massive Diwali celebrations in Ayodhya by burning one lakh 80 thousand lamps. In view of these activities of BJP on Ayodhya, the Hindi news channel News 18 held a debate show, whether the BJP won by the storm of Ayodhya was the election? In order to debate on this issue, along with all the guests, the National Spokesperson of the BJP was present in the address, while the principal of the BJP, Pramod Krishan was present.

News-18 शो में एक वक्त ऐसा आया कि राम मंदिर के मुद्दे पर आचार्य प्रमोद कृष्णन का उत्तेजित व्यवहार देख संबित पात्रा काफी गुस्सा गए और बोलने लगे कि आप पूरा राम रहीम की तरह नजर आ रहे हैं, उछलना बंद कीजिए और मेरी बात सुनिए।

At the time of the news-18 show that it was a rage to see the excitement of Acharya Pramod Krishnan on Ram temple issue and he began to say that you are seen like the entire Ram Rahim, stop jumping and listen to me.

दरअसल हुआ ये कि आचार्य प्रमोद कृष्णन ने बीजेपी प्रवक्ता से पूछ लिया कि आखिर कब तक राम लला यूं ही टाट के अंदर कैद रहेंगे, आखिर कब बनेगा राम मंदिर। सवाल पूछते हुए आचार्य उग्र हो गए और बीजेपी पर आरोप लगाने लगे कि आप लोग राम का नाम सिर्फ राजनीति करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। आप लोगों ने कहा था कि जब आप बहुमत से सत्ता में आएंगे तो राम मंदिर बनवाएंगे। इस पर संबित पात्रा ने उन्हें शांत रहने की हिदायत दी।

Actually, that Acharya Pramod Krishnan asked the BJP spokesman for how long Rama Lala Yun will be imprisoned under the TAT, when will the Ram temple be built? Asked questions, Acharya got furious and began to accuse BJP of using the name of Ram for the sake of politics. You people had said that when you come to power with majority, you will build a Ram temple. The person concerned asked him to keep quiet.

संबित की बात सुन कर आचार्य और भड़क गए और कहने लगे कि आप बस इतना बताओ कि राम मंदिर कब बनेगा। इस बार संबित पात्रा ने कहा आप शांत हो जाइए, हल्ला करते हुए आप बिल्कुल राम रहीम जैसे लग रहे हैं..उछलना बंद कीजिए। दोनों के बीच इस तीखी नोंक-झोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
source:political report

राम मंदिर मुद्दे पर बोलीं मुस्लिम महिलाएं, कसम खुदा की मंदिर वहीं बनवाएंगे

नई दिल्ली : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर देश में जबरदस्त हलचल शुरू हो चुकी है। VHP की विशाल धर्मसभा में कई लाख हिन्दू का एकसाथ जनसैलाब इकठ्ठा हो रहा है. ऐसे में कई सपा पार्टी तो कई वामपंथी ये खबर फैला रहे हैं कि मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना है. लेकिन इस बीच कई मुस्लिम महिलाओं ने इस भ्रम की धज्जियाँ उड़ा के रख दी है.

हिंदू संगठनों के साथ मुस्लिम महिलाओं ने भी राम मंदिर निर्माण को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। महिलाओं का कहना है देश में हिंदु-मुस्लिम भाईचारा कायम रखने के लिये राम मंदिर निर्माण जरूरी है। महिलाओं ने ‘कसम खुदा की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे’ लिखे पोस्टर से राम मंदिर निर्माण की इच्छा जताई।

छीपी टैंक स्थित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की सह संयोजक शाहीन परवेज के आवास पर राम मंदिर के पक्ष में आयोजित बैठक में मुस्लिम महिलाओं ने देश में समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। शाहीन ने कहा कि यह देश हमारा है। हम देश के मसलों को एकजुट होकर निपटाएंगे। श्रीराम जन्मभूमि के लिए हमारा फर्ज बनता है कि हम अपने हिंदू भाई-बहनों को खुशी से राम मंदिर निर्माण के लिये सहमति दें।

temple

राष्ट्रीय एकता मिशन की कार्यकारिणी सदस्य सुबुही खान ने कहा श्रीराम मंदिर हमारी सनातन संस्कृति का प्रतीक है। हम तन-मन-धन के साथ मंदिर निर्माण में सहयोग करेंगे। महिलाओं ने कहा राम मंदिर को लेकर मुस्लिम पुरुषों का रुख साफ नहीं है।

हम महिलाओं को ही आगे आकर राम मंदिर निर्माण का कदम उठाना है। बैठक में फातिमा, बानो, हसीना, रजाना, कौसर, कहकशा, परवीन, नसीमा, खातून रेशम, अमबरीन, सबीरा, शबीना सहित अन्य महिलाओं ने हिस्सा लिया।

अयोध्या में सरगर्मियों के बीच जोन में हाई अलर्ट
अयोध्या में चल रही सरगर्मियों के बीच जोन में हाई अलर्ट जारी किया गया है। डीजीपी ने जोन के सभी एसएसपी को निर्देश दिए कि वे अपने जिलों में धार्मिक स्थलों पर फोर्स लगाएं। एसएसपी का कहना है कि कोई लापरवाही नहीं होगी। वहीं, एडीजी प्रशांत कुमार ने निर्देश दिए कि धार्मिक स्थलों पर सतर्कता बरतते हुए भीड़ एकत्र न होने दें। सोशल मीडिया पर नजर रखें।

खुफिया विभाग का फोकस
अयोध्या की सरगर्मी और लोकसभा चुनाव को देखते हुए वेस्ट यूपी पर खुफिया विभाग का सबसे ज्यादा फोकस है। खुफिया विभाग का मानना है कि चुनावी माहौल बनाने के लिए वेस्ट यूपी में सुलगाने की कुछ शरारती तत्व कोशिश करने में लगे हैं।

नायब शहर काजी ने की शांति की अपील

नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन नेशहर की जनता से अपील की है कि लोग किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। यह विवादित प्रकरण अदालत में विचाराधीन है और उन्हें देश के कानून एवं अदालत पर पूरा यकीन है
source:dd barti

भारतीय जिहादियों के खिलाफ इजराइल ने की ये बड़ी कार्यवाही जिसे देख PM मोदी समेत कट्टरपंथियो के उड़े होश

25 अप्रैल, 2018 – इजराइल ने भारत के 13 कट्टरपंथियों को वीजा देने से इंकार कर दिया है, इन कट्टरपंथियों ने इसरायली दूतावास में वीजा के लिए अर्जी दी थी, जिसे इजराइल ने खारिज कर दिया है, ये तमाम कट्टरपंथी भारत की सेक्युलर पार्टियों और वामपंथी संगठनो से जुड़े हुए है, और ये लोग फिलिस्तीन का एजेंडा चलाने के लिए भी कुख्यात रहे है, इन कट्टरपंथियों में मणिशंकर अय्यर जैसे फर्जी हिन्दू नाम वाले कट्टरपंथी भी शामिल है.

April 25, 2018 – Israel has refused to grant visa to 13 fundamentalists of India, these fundamentalists had applied for a visa in the Israeli embassy, ​​which has been rejected by Israel, these all-radical secular parties and leftists of India Organized by organizations, and these people have also been notorious for running the Palestine agenda; among these fundamentalists, Mani Shankar Aiyar, a fake Hindu name, Was also included.

इजराइल द्वारा वीजा खारिज कर दिए जाने के बाद इन सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है, और मणिशंकर ने तो इजराइल को भारत का दुश्मन भी घोषित कर दिया है, इन सभी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है और उस पत्र में इजराइल की आलोचना की है.

All of them have written a letter to Prime Minister Narendra Modi after the visa was rejected by Israel, and Manishankar has also declared Israel as an enemy of India, all of them have written a letter to Prime Minister Modi and in that letter Israel Has criticized.

इन 13 भारतीय कट्टरपंथियों में अग्निवेश, मोहम्मद सलीम, मणिशंकर अय्यर, हरचरण सिंह जोश, जॉन दयाल, अकबर अली खान नियाज फारुख नवीद हामिद ज़िक्रुर रहमान, मोहम्मद अमीन, अबोबकर अहमद जैसे कट्टरपंथी शामिल है, इजराइल ने इन सभी का वीजा रद्द कर दिया है, इनको इजराइल में घुसने नहीं दिया जायेगा.

These 13 Indian fundamentalists include radicals such as Agnivesh, Mohammad Salim, Mani Shankar Aiyar, Harcharan Singh Josh, John Dayal, Akbar Ali Khan Niyaz Farooq Nawad, Hamid Zikr Rehman, Mohammed Amin, Abobakar Ahmad, Israel has canceled all these visas. They will not be allowed to enter Israel.

बता दें की ये भारतीय कट्टरपंथी भारत में भी फिलिस्तीन का एजेंडा चलाते है, साथ ही ये लोग तो भारत विरोधी एजेंडा भी चलाते है, इजराइल ने इन सभी का वीजा रद्द कर इनके मुह पर तमाचा जड़ा है, वैसे आमतौर पर इजराइल भारतीयों को वीजा दे देता है, पर इजराइल भी जानता है की भारत में करोडो ऐसे लोग है जो भारतीय है ही नहीं, और ऐसे ही 13 कट्टरपंथियों का वीजा इजराइल ने ख़ारिज कर दिया.

Explain that these Indian fundamentalists also carry Palestine agenda in India, as well as they also carry anti-India agendas, Israel has canceled all these visas on their faces, while usually giving Israel a visa to the Indians. But Israel also knows that there are millions of people in India who are not Indian, and such 13 hardliners have rejected the visa.

अब ये लोग प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख रहे है, वैसे आपको बता दें की ये वही लोग है जो मोदी को अमरीकी वीजा न मिलने पर खुश हुआ करते थे.

Now these people are writing a letter to Prime Minister Modi, let us tell you that this is the same people who used to be happy when he did not receive US visa.

यह भी देखे

https://youtu.be/WE3MmmBzG4k

https://youtu.be/o9LQnPMci4I

source polotical report

बड़ी खबर: इस मुस्लिम लड़की ने अपनाया हिंदू धर्म, वजह जान PM मोदी समेत मुस्लिम मौलाना के उड़े होश..

New Delhi: उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। यहां की एक मुस्लिम लड़की ने इस्लाम धर्म को छोड़ हिंदू धर्म अपना लिया है। लेकिन इसकी वजह जानकर मौलाना-मौलवी सोच में पड़ गए है।

New Delhi: A change of religion has come out of Haldwani in Uttarakhand. Here a Muslim girl has adopted Hindu religion, leaving Islam religion. But knowing the reason, Maulana-Maulavi has got into thinking.

बता दें बनभूलपुरा कि 22 साल की शहनवाज़ नाम की ये लड़की शुक्रवार को ही सिटी मजिस्ट्रेट के पास जाकर उन्हें शपथपत्र दिया। इस पत्र में धर्म परिवर्तन की जानकारी दी गई थी। इसके साथ ही शहनवाज़ से सुनीता बनी इस लड़की ने अपनी परिजनों और अन्य लोगों के लिए जान का खतरा बताया है। साथ ही उनकी सुरक्षा की गुहार लगाई है।

Tell me that the 22-year-old Shahnawaz, who came to the city magistrate on Friday, gave the affidavit to him. This paper was informed about the change in religion. Along with this, this girl, made from Shahnawaz, Sunita, has told her life and her life as a threat to others. At the same time, they have asked for their protection.

लड़की ने धर्म परिवर्तन के लिए कारण बताते हुए कहा कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं को जीने की पूरी आजादी नहीं मिलती है। इसलिए उसने अपना धर्म बदल लिया है। जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने इस पूरे मामले की जांच के लिए स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया है।

Explaining the reasons for the change in religion, the girl said that in Muslim religion, women do not get full freedom to live. That’s why he has changed his religion. After which the magistrate has notified the local police for the investigation of the entire matter.

शहनवाज़ ने कहा कि हिंदू धर्म में महिलाओं को खुलकर जीने के आज़ादी मिलती है, इसके साथ ही किसी तरह की कोई पांबदी भी नहीं होती, इसलिए उसने ये धर्म अपनाया है। हालांकि अब इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।

Shahnawaz said that in Hindu religion, women get freedom to live freely, there is no papidi of any kind, therefore they adopted this religion. However, the whole issue is being examined now.

यह भी देखे
https://youtu.be/WE3MmmBzG4k

https://youtu.be/o9LQnPMci4I

Source Political Report

 

 

हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दिया सबसे बड़ा झटका ,चुनाव आयोग को भी लगायी फटकार,जिसे देख PM मोदी समेत कट्टरपंथी के उड़े होश

कोलकाता – बंगाल में आज हालात पाकिस्तान से भी बद्द्तर हो चले हैं असल मायने में कहा जाय तो लोकतंत्र की हत्या सिर्फ बंगाल में हो रही है. कभी दुर्गा पूजा पर मूर्ति विसर्जन पर रोक, तो कभी राम नवमी में शस्त्र यात्रा पर रोक,आर्म्स एक्ट लगाने की धमकी. जबकि खुद तृणमूल के कार्यकर्ता ने विपक्षियों को डराने के लिए तलवार और फरसा लेकर बाइक रैली निकाली, तब कोइ कार्रवाई नहीं हुई.

Kolkata- In today’s situation in Bengal, things have become even bigger than Pakistan. In real terms, if democracy is being done in Bengal only then the killing of democracy is happening. Never stop idol worshiping at Durga Puja, and sometimes threat to impose Arms Act on Ram Navami, to stop arms trade. When the Trinamool worker himself took out a bike rally with the sword and the fross to frighten the opposition, no action was taken.

रामनवमी और हनुमान जयंती पर ज़बरदस्त दंगे और प्रशासन की चुप्पी ममता सरकार ने नहीं दिए कोई कार्रवाई के आदेश, कट्टरपंथी जिहादी बमबाजी,लूटपाट,आगजनी,दुष्कर्म करते रहे, हिन्दू अपने घर छोड़कर पलायन कर रहे, सड़कों पर हिन्दू और रोहिंग्या को घर मिल रहे. इस सबके बाद भी पंचायत चुनाव में ममता की पार्टी के नेता निर्विरोध जीते जरहे हैं क्या आप विश्वास करेंगे?पर ऐसा हो रहा है.

Ramnavmi and Hanuman Jayanti, the silence of administration and the silence of administration, Mamta Government did not give any order to take action, radical jihadist bombardment, looting, arson, abusive, Hindus leaving their homes and fleeing, Hindus and Rohingyas get home on the streets . After all this, even though Mamta’s party leaders are winning uncontested elections in the Panchayat elections, will you believe it? But this is happening.

 

दरअसल हमने आपको कुछ दिन पहले ही बताया था कि कैसे पंचायत चुनाव में बीजेपी पार्टी के प्रत्याशिओं को नामांकन परचा ही भरने नहीं दिया गया. पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ज़ोरदार कोहराम मचा. लगातार छह दिनों से नामांकन दाखिल करने को लेकर एक एक करके हर क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशिओं पर बम से हमले किये गए. हर दिन उनके सर पर मौत मंडराती रही.

Actually, we had told you a few days ago that how the BJP’s candidates were not allowed to fill nomination in Panchayat elections. In the West Bengal, the strong picketing about the three-phase panchayat elections took place. In order to file nominations for six consecutive days, BJP candidates in every field were attacked with bombs. Every day he was hanging on his head.

नौबत तो यहाँ तक आ गयी है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने खुद कड़ा फैसला सुनाया और पुलिस प्रशासन को पंचायत चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को सुरक्षा देने के कड़े आदेश दिए हैं.

It has come so far that the Calcutta High Court has given a tough decision on its own and strict instructions have been given to the police administration to give security to the nominees nominated for the Panchayat elections.

पंचायत चुनाव पंजीकरण अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवारों को को नहीं दिया फॉर्म

यही नहीं भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त सहायक पंचायत चुनाव पंजीकरण अधिकारी बीजेपी उम्मीदवारों को पर्चा के फॉर्म देने से इनकार कर रहा है. पश्चिम बंगाल बीजेपी ने नामांकन पत्र ऑनलाइन उपलब्ध करवाने की मांग की थी. तो इसका क्या यही मतलब निकाला जाय कि कई चुनाव आयोग के अधिकारी भी तृणमूल के इशारे पर काम कर रहे हैं.? इसे कहते हैं सही मायने में लोकतंत्र का गला घोंटना.

चुनाव आयोग को भी लगायी फटकार

दरअसल कोर्ट ने भी माना कि बंगाल में जो पंचायत चुनाव हुए वे सही तरीके से नहीं हुए. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हो रहे पंचायत चुनाव पर 16 अप्रैल तक रोक लगा दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी फटकार लगाते हुए समक्ष तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए.

Election Commission also imposed a rebuke

In fact, the court also admitted that the Panchayat elections in Bengal did not happen in the right way. The court has stayed the elections in West Bengal on April 16. At the same time, the court also ordered the EC to submit a factual report before it.

Panchayat election registration officer not given to BJP candidates

Not only this, the BJP has also alleged that the assistant Panchayat Election Registration Officer appointed by the West Bengal Election Commission is refusing to give the form of the form to the BJP candidates. The West Bengal BJP demanded that the nomination papers be made available online. So, what is the meaning of this, that many EC officials are also working at the behest of the Trinamool? It is said to truly strangle democracy.

हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दिया सबसे बड़ा झटका

तो वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से मना कर दिया जिसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त एक्शन लिया है और बड़ी साज़िश की बदबू आने के बाद पंचायत चुनाव पर ही रोक लगा दी है.

The biggest blow to the Mamta Government is the High Court

So the same Supreme Court refused to interfere in this matter, after which the High Court has taken strict action and after the bad intentions, the panchayat elections have been banned.

दरअसल त्रिपुरा,मेघालय,नागालैंड में जीतने के बाद अमितशाह ने एलान किया था कि कर्णाटक, बंगाल और केरल में भी बीजेपी जल्द आ रही है, जिससे ममता बुरी तरह बौखला गयी थी और बीजेपी को कभी भी सरकार नहीं बनने देगी ऐसी धमकी दी थी.

In fact, after winning in Tripura, Meghalaya and Nagaland, Amit Shah had announced that BJP in Karnataka, Bengal and Kerala was coming soon, due to which Mamta was severely frustrated and that such a threat would not allow BJP to become a government anytime.

लहूलुहान हुआ पंचायत चुनाव

दरअसल जैसे ही बीजेपी प्रत्याशी नामांकन परचा भरने जाते वहां कट्टरपंथियों संग TMC के कार्यकर्ता मिलकर दंगा फसाद शुरू कर देते. जिसके बाद धारा 144 लगाकर पुलिस बीजेपी के लोगों को उठाकर ले जाती और वे परचा नहीं भर पाते थे. शनिवार को दुर्गापुर में भाजपा के कैंप कार्यालय पर हमला हुआ. भाजपा जिलाध्यक्ष लखन घोरुई को तो चाकू मारकर जख्मी कर दिया गया. महिला बीजेपी विधायक के साथ बदसुलूकी और मारपीट की गयी.

Lahululhan Hua Panchayat elections

Actually, as soon as BJP nominee gets nomination, TMC workers along with fundamentalists will start rioting. After which Section 144 imposed by the police, the police took the people of the BJP and they could not fill the paracha. BJP’s camp office was attacked in Durgapur on Saturday. BJP District President Lakhan Gharui was hit with a knife. Female BJP MLA was abused and beaten up.

यही वजह रही कि सैकड़ों सीटों के जब चुनाव परिणाम आये तो उसमे ममता की तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी सभी सीटों पर निर्विरोध जीत गए. मतलब कोई और विरोध करने के लिए खड़ा ही नहीं हुआ. ऐसा कैसे हो सकता है बीजेपी है अन्य पार्टियां है, कोई विपक्षी खड़ा कैसे नहीं हुआ?

The reason for this is that in the hundreds of seats when election results came, Mamata’s Trinamool Congress candidate won uncontested all the seats. It meant no one stood up to protest. How can it be BJP, there are other parties, how did no opposition stand?

दरअसल विपक्षी पार्टी खड़ी नहीं हुई ऐसा नहीं है, विपक्ष बीजेपी को खड़ा होने ही नहीं दिया गया. नामांकन परचा ही नहीं भरने दिया गया तो खड़े कहाँ से होते जीतना तो दूर की बात है. ये है ममता सरकार की साज़िश विपक्ष को खड़े ही मत होने दो, ममता हमेशा सत्ता में बनी रहना चाहती हैं ऐसा लगता है जल्द ही बंगाल में सिर्फ बांग्लादेशी और रोहिंग्या रह जायेंगे और हिन्दू अप्ल्संख्यक हो जायेंगे. इसके बाद आने वाले अनेक सालों तक जितने चाहे चुनाव होते रहे कोई विपक्षी कभी सत्ता में नहीं आ पायेगा.

n fact, the opposition party did not stand, it is not so that the Opposition BJP was not allowed to stand up. Nomination was not allowed to fill, then where to stand it is far away. This is Mamata’s conspiracy against the government, let the opposition not stand up, Mamata always wants to remain in power. It seems that soon there will be only Bangladeshi and Rohingya in Bengal and Hindus will become an ascendant. After this, no opposition will ever come to power as long as the elections are held for many years to come.

यह भी देखे
https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

source political report

अभी-अभी ममता का मुहं हुआ काला कट्टरपंथियों,ने मचाया ऐसा खौफनाक कोहराम, जिसे देख डर से सहम उठी जनता

नई दिल्ली : बंगाल की हालत बद्द से बदतर होती जा रही है, जिस तरह पाकिस्तान में बम धमाके होते हैं वैसे ही ये सब अब बंगाल में देखना सामान्य बात हो चली है. अभी राम नवमी में बंगाल में खूनी मंजर देखने को मिला,आखिर में वही हुआ जिसका सबको डर था. हिन्दुओं को घर छोड़कर पलायन करना पड़ा जहाँ कट्टरपंथियों,जिहादियों की जनसँख्या कम हो.

अन्य राज्य में तो कट्टरपंथी सिर्फ हिन्दू त्योहारों पर पत्थरबाज़ी करते हैं, लेकिन बंगाल ने ममता राज में और प्रगति कर ली है यहाँ पत्थरबाज़ी की जगह अब बमबाजी भी होती है. हर कट्टरपंथी अपने घर में बम को ट्रॉफी की तरह सजा के रखता है.

जब बंगाल जिहादियों के दंगों की आग में जल रहा था, खुद पुलिस के अधिकारी पर बम से हमला हो रहा था. तब ममता दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ तीसरा मोर्चा खड़ा करने और सारे विपक्ष को मोदी के खिलाफ खड़ा कर रही थी और अपने लिए पीएम की कुर्सी बना रही थी. जिससे जो आज बंगाल में हो रहा है कल को वो पूरे देश में हो.

आप आईपीएल में बिजी हैं वह बंगाल में मच गया ग़दर
तो वहीँ अभी तक दंगे की आग शांत भी नहीं हुई थी कि एक बार फिर बंगाल में ग़दर मचना शुरू हो गया है. ममता सरकार पूरे विपक्ष को ख़त्म करने पर तुली हुई हैं. कोई विपक्ष होगा ही नहीं तो हमेशा ममता राज रहेगा. पंचायत चुनाव में नामांकन भरने गए बीजेपी के नेताओं के साथ जो हुआ उसे देख तो आपके भी रौंगटे खड़े हो जायेंगे.

सरेआम पत्थरबाज़ी के साथ बमबाजी कर रहे जिहादी

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर कोहराम मचा हुआ है. पिछले छह दिनों से नामांकन दाखिल करने को लेकर एक एक करके हर क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशिओं पर बम से हमले हो रहे हैं. हर दिन उनके सर पर मौत मंडरा रही है. ममता सरकार विपक्ष को ही समाप्त करने पर तुली हुई है.

कोर्ट ने पुलिस को दिए सख्त आदेश

नौबत तो यहाँ तक आ गयी है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने खुद कड़ा फैसला सुनाया और पुलिस प्रशासन को पंचायत चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को सुरक्षा देने के कड़े आदेश दिए हैं.

बिकाऊ मीडिया बिजी है सलमान में

लेकिन फिर भी शनिवार को हिंसा हुई. राज्य के कई जिलों में पूरे दिन व्यापक हिंसा होती रही, बीरभूम जिले में भाजपा प्रत्याशियों को नामांकन से रोकने के लिए बमबाजी व गोलीबारी की गई, जिसमें दो दर्ज़न लोगों के घायल होने की खबर है और ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा है और हमारा बिकाऊ मीडिया पूरा दिन सिर्फ सलमान पर बिजी है, सलमान को बेल मिली कि नहीं, कब मिलेगी, कैसे मिलेगी, रात में जेल में क्या किया, खाना खाया कि नहीं इस सबसे फुर्सत नहीं मिल रही और कुछ फर्जी सेक्युलर लोग भी IPL शुरू हो गए तो उसमे बिजी हैं.

भाजपा कार्यकर्ता व समर्थक भी पीछे हटने को तैयार नहीं वे जान हथेली पर लेकर नामंकर भर रहे हैं और बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है, विपक्ष को ख़त्म किया जा रहा है कोई मीडिया खबर नहीं दिखा रहा.

भाजपा के नेताओं का आरोप है कि तृणमूल कार्यकर्ता पुलिस की मदद से बैरिकेड लगाकर विरोधी दलों के प्रत्याशियों को नामांकन करने से रोक रहे हैं. मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, पूर्व व पश्चिम ब‌र्द्धमान, हुगली तथा पश्चिम व पूर्व मेदिनीपुर जिलों में भी नामांकन दाखिल करने को लेकर हिंसा होती रही. ऐसा लगता है ममता राज में कट्टरपंथियों को पूरी आज़ादी दे दी गयी है.

मुंह पर कालिख पोत दी गई

हुगली जिले में तो नामांकन करने जा रहीं फॉरबर्ड ब्लॉक की महिला प्रत्याशियों तथा पूर्व विधायक के मुंह पर कालिख पोत दी गई. इधर राज्य चुनाव आयोग भी मौनव्रत रखे हुए है. हिंसा को लेकर भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है, जिस पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया है। सोमवार को फैसला आएगा.

तो अब खुद ममता उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत सार्थक कर रही है. तृणमूल महासचिव एवं मंत्री पार्थ चटर्जी का आरोप है कि माकपा व भाजपा हिंसा करा रही है, क्योंकि उनके साथ जनता नहीं है. नगर विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा है कि विपक्षी दल आपस में मारपीट कर हिंसा फैला रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस को बदनाम कर रहे हैं.

भाजपा जिलाध्यक्ष लखन घोरुई को पर चाकू से हमला

पंचायत चुनाव में नामांकन दाखिल करना भी भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के लिए दुर्गापुर और ब‌र्द्धमान में तो जैसे चुनौती बन गया है. तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हमले से दोनों दलों के समर्थक सकते में हैं. शनिवार को दुर्गापुर में भाजपा के कैंप कार्यालय पर हमला हुआ. भाजपा जिलाध्यक्ष लखन घोरुई को तो चाकू मारकर जख्मी कर दिया गया.

जबकि ब‌र्द्धमान में नामांकन कराने जा रहे माकपा प्रत्याशियों व कटवा में नामांकन कराने जा रहे भाजपा प्रत्याशियों के जुलूस पर बम फेंके गए. हमलों में भाजपा और माकपा के कई समर्थक बुरी तरह जख्मी हुए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं.

क्यों नहीं लगाते पीएम मोदी राष्ट्रपति शासन? समझिये इसे

अब जब बंगाल में इतने बुरे हालत हैं, तो लोग अक्सर सवाल करते हैं कि जब आप लोगों को सब कुछ पता है तो मोदी जी शांत क्यों बैठे हैं क्यों नहीं राष्ट्रपति शासन लगवा देते बंगाल में. लेकिन लोग भावनाओं में बह कर भूल जाते हैं कि संविधान के नियम अनुसार बीजेपी में अभी उतनी शक्ति नहीं है कि वो किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सके. इसके लिए आपको राष्ट्रपति शासन की प्रक्रिया और नियम को समझना होगा.

राष्ट्रपति शासन की ये है प्रक्रिया

राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में हैं. संविधान के आर्टिकल 356 अनुसार राज्य में अशांति स्थापित होने पर राज्यपाल को राष्ट्रपति को रिपोर्ट देनी होती है. जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं लेकिन उससे पहले संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा से दो महीने के अंदर उसे पास होना पड़ता है. दोनों सदनों से पास होने के बाद ही राष्ट्रपति शासन 6 महीना या एक साल तक लग सकता है.

अब लोकसभा में तो बीजेपी को बहुमत है लेकिन राज्यसभा में अभी भी बीजेपी बहुमत से थोड़ा सा दूर है. हालाँकि हाल ही में बीजेपी ने कई राज्यसभा चुनाव जीते हैं लेकिन अभी भी बहुमत के आंकड़े से बस थोड़ा सा पीछे है. इसी वजह से अभी तक तीन तलाक का कानून नहीं बन सका है. क्यूंकि लोकसभा से तो तीन तलाक का बिल पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस ने अड़ंगा मार दिया. आने वाले कुछ और वक़्त बाद राज्यसभा में भी बीजेपी को बहुमत मिल जाये तो कई सारी समस्याएं ख़त्म हो जाएं, जैसे धारा 370, तीन तलाक, हलाला, दो बच्चों का कानून आदि.

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खास खबर: कश्मीर में हुए हमले से मोदी सरकार का क्रोध भड़का, रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ जारी किया नया फरमान, SC भी हुआ भौंचक्का…

नई दिल्ली : ये साफ़ हो चुका है कि सुप्रीम कोर्ट रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार में नहीं भेजना चाहता. इसके लिए कल वो केंद्र सरकार से साफ़ कह चुका है कि जब तक अदालती कार्यवाही चल रही है, तब तक रोहिंग्यों को म्यांमार में वापस ना भेजा जाए. अब दसियों सालों तक कोर्ट में मामला यूँ ही लटकाया जाएगा और तब तक देश की जनता के टैक्स के पैसों से रोहिंग्यों को खाना खिलाया जाएगा. मगर अब खबर आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ मोदी सरकार गुस्से में है.

New Delhi: It is clear that the Supreme Court does not want Rohingya Muslims to send back to Myanmar. For this, yesterday he has been clear from the central government that till the court proceedings are going on, Rohingya will not be sent back to Myanmar. Now, for ten years, the case will be hanged in court, and by that time the money of the people of the country will be fed food for Rohingya. But now the news is that the Modi government against the Supreme Court is angry.

सरकार के मामले में टांग ना अड़ाये सुप्रीम कोर्ट…
केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट अवैध घुसपैठियों के मामले में अपनी टांग ना अड़ाये और इसका फैसला भारत सरकार को ही करने दे. केंद्रीय गृह मंत्रालय के सलाहकार अशोक प्रसाद ने कहा कि देश में जनसांख्यिकीय परिवर्तन और ऐसे प्रशासनिक और कूटनीतिक कारकों पर फैसला लेने का काम सरकार को करने देना चाहिए. रोहिंग्या मुस्लिम देश के लिए ख़तरा हैं और उन्हें हर हाल में निकाला जाएगा.

In the case of the government, the Supreme Court is not …
A senior official of the Union Home Ministry said on Friday that the Supreme Court should not tolerate its involvement in the case of illegal intruders and the decision of the Indian government to do it. Union Home Ministry Advisor Ashok Prasad said that the government should allow the demographic change and the decision on such administrative and diplomatic factors to be done by the government. Rohingya is a threat to the Muslim country and they will be released in every situation.

बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच रोहिंग्यों को देश से ना निकालने का फैसला करीब-करीब सुनाने ही वाला था, मगर सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट का कडा विरोध किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी आदेश का भारत सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय असर पड़ेगा.

In the Supreme Court on Friday, Chief Justice Deepak Mishra, AM Khanvilkar and D.V. Chandrachud’s Benches were about to recite the decision to not remove the Rohingyas from the country, but on behalf of the government, Additional Solicitor General Tushar Mehta of the Supreme Court Against the backdrop, any order by the Supreme Court would have an international impact on the Indian government.

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पीएम मोदी को झुकाना चाहता है कोर्ट…
आइये आपको बताते है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट में चल क्या रहा है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट कुछ ख़ास वजहों से रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत से नहीं निकालना चाहता. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट कह रही हैं कि रोहिंग्या आतंकी संगठनों के प्रभाव में हैं, इसके बावजूद कोर्ट मानवता की आड़ में उन्हें देश में ही बसाये जाने के पक्ष में है.

PM wants to bow down to PM Modi on international stage …
Let us tell you what is going on in the Supreme Court. Actually, the Supreme Court does not want to remove Rohingya Muslims from India due to certain reasons. Intelligence agencies report that Rohingya is under the influence of terrorist organizations, in spite of being under human rights, the court is in favor of restoring them in the country.

यूएन से लेकर कई विदेशी एजेंसियां भी रोहिंग्यों को भारत से ना निकालने पर जोर दे रही हैं, हालांकि मोदी सरकार ने अपना रुख कडा किया हुआ है. सुप्रीम कोर्ट अच्छी तरह जानता है कि यदि उसने रोहिंग्यों को ना निकालने का फरमान जारी कर दिया, तो मोदी सरकार पर रोहिंग्यों को रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ जाएगा और पीएम मोदी के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी

From the UN, many foreign agencies are also insisting on not withdrawing Rohingyas from India, although the Modi government has made its stand strong. The Supreme Court knows very well that if he decides not to remove Rohingyas, then international pressure will be increased to keep the Rohingya on the Modi Government and there will be big problems for PM Modi.

रोहिंग्यों की याचिका ही गैर-कानूनी है…
देश की न्यायपालिका निष्पक्ष फैसले करती है, यदि आप भी ऐसा सोचते हैं तो आपकी ये ग़लतफ़हमी अभी दूर हो जायेगी. दरअसल रोहिंग्या मुस्लिमों की ओर से भारत के संविधान के अनुछेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी है, कायदे से ये याचिका तुरंत रद्द की जानी चाहिए थी क्योंकि अनुछेद 32 देश के नागरिकों के लिए है, ना कि अवैध घुसपैठियों के लिए.

Rohingyue’s petition is illegal …
The country’s judiciary makes unbiased decisions, if you think so, then your misconception will soon be gone. Actually Rohingya Muslims have filed a petition in the Supreme Court under Article 32 of the Constitution of India, the petition should have been canceled immediately because the Article 32 is for the citizens of the country and not for the illegal intruders.

इसके बावजूद ना केवल सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली, बल्कि उस पर सुनवाई करते हुए रोहिंग्यों के पक्ष में फैसला तक सुनाने पर उतारू थे. हालांकि फैसला अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया गया है, मगर साफ़ है कि सुप्रीम कोर्ट फैसला रोहिंग्यों के पक्ष में ही सुनाएगा.

In spite of this, not only the Supreme Court accepted the petition, but instead hearing on it, he would come forward to hear the decision in favor of the Rohingyas. Although the verdict has been postponed till the next hearing, but it is clear that the Supreme Court will pronounce the verdict in favor of Rohingyon only.

मानवता वगैरहा कि बातें करना तो सब ढोंग है, अगर रत्ती भर मानवता होती इन जजों में तो कश्मीरी पंडित एक दशक से भी अधिक वक़्त से अपने ही राज्य से निर्वासित ना घूम रहे होते. कश्मीर में सेना के जवानों पर पत्थर फेकने वालों पर पेलेट गन चलाने पर रोक ना लगाई गयी होती. दरअसल अंतर्राष्ट्रीय दबाव के सामने भारत की न्यायपालिका कैसे घुटने टेकती है, ये बात साफ़ हो चुकी है.

It is all a pretense to talk about humanity, if there is humanity, in these judges, the Kashmiri Pandit could not have been displaced from their own state for more than a decade. In Kashmir, there were no restrictions on the execution of pellet guns on those who throw stones at army jawans. In fact, how the Indian judiciary knocks in front of international pressure, it has become clear.

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बसपा के इस बड़े नेता ने किया शरिया का बेहद चौकाने वाला खुलासा

प्रधानमंत्री मोदी चाहे सबका साथ सबका विकास का नारा देते है, देश के अधिकतर हिन्दू भी इसमें भरोसा करते है, वासुदेव कुटुम्बकम में भरोसा करते हो, पर दूसरी तरफ क्या मानसिकता चल रही है, इसकी जानकारी भी सबको होनी चाहिए, और एक ऐसा ही विडियो सामने आया है, जहाँ बसपा का एक मुस्लिम नेता कह रहा है की हमे सबसे एकता नहीं करनी, बस मुस्लमान और दलित एकजुट करने है, हमे सिर्फ मुस्लिम-दलित एकता करनी है और जैसे ही हम एक होकर बहुमत हो जायेंगे, दूसरों को ऐसे ही कुचल देंगे

Whether Prime Minister Modi is giving a slogan to everyone’s development, most of the Hindus in this country also believe in it, Vasudev is confident in the family, but on the other hand the mentality is going on, everyone should also know about it, and one such video It has come to light, where a Muslim leader of BSP is saying that we do not have the most unity, just to unite Muslims and the Dalits, we have to do Muslim-Dalit unity and Jai Areas we will be seen to be the majority, will crush such others

ये बसपा नेता गुजरात का प्रतीत हो रहा है चूँकि टीवी चैनल इलाके का नाम अहमदाबाद बता रहा है, बता दें की ऐसे लोग खुलेआम बता रहे है की इनकी मानसिकता क्या है और ये किस काम में लगे हुए है, दलितों के मन में हिन्दुओ के प्रति नफरत क्यों भरी जा रही है, कारण ये है की दलितों को हिन्दुओ से अलग कर अपने साथ मिला लिया जाये, और फिर बाकि हिन्दुओ के साथ ये क्या करने वाले है ये खुद बता रहा है की कुचल देंगे जैसे ही बहुमत में आये, यानि जनसँख्या जब ज्यादा हो जाएगी, फिर दुरसों को कुचल दिया जायेगा

These BSP leaders seem to be Gujarat because the name of the TV channel area is being told, tell us that such people are openly telling them what their mentality is and what work they are engaged in, in the minds of Dalits, towards Hindus Why is hatred being filled up, the reason is that the Dalits should be separated from Hindus and mixed with them, and then what is going to do with the other Hindus, it is telling themselves that they will crush as they are Were in the majority, ie, the population will be over when, again Durson be crushed

बता दें की जिग्नेश मेवनी जो की गुजरात का एक कथित दलित नेता है, वो अपनी रैलियों में अल्लाह हु अकबर के नारे लगवाता है, कहता है जय श्री राम नहीं बोलूँगा, इसके साथ साथ ये भी कहता है की मेरी बहन की शादी मुस्लिम से करवाता, साफ़ है की ये जो बसपा नेता कह रहा है इसे हलके में लेना काफी खतरनाक हो सकता है चूँकि जिग्नेश मेवनी जैसे लोग इनके साथ खड़े है

Explain that Jignesh Mavni, who is a alleged Dalit leader of Gujarat, invokes the slogans of Allah Hu Akbar in his rallies, says Jai Shree Ram will not say, along with this also says that my sister married the Muslim. It is clear that these BSP leaders are saying that taking it lightly can be dangerous because people like Jignesh Mavni are standing with them

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राम मंदिर को लेकर धारा 370 के बाद अब यूपी चुनावों में ‘यूनिफार्म सिविल कोड पर ये है PM मोदी की ये बड़ी योजना,जिसे देख महबूबा समेत कांग्रेस के भी उड़े होश

नई दिल्ली : बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ चुनी गई, पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही बड़े-बड़े फैसले लेने भी शुरू किये. कई सुधार कार्य किये जा चुके हैं. नोटबंदी, जीएसटी के अलावा डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट उप इंडिया जैसे कई अहम् फैसले ले कर पीएम मोदी ने भारत में आर्थिक क्रान्ति ला दी है.

New Delhi: BJP was elected with a huge majority in the 2014 Lok Sabha election, PM Modi started taking big decisions as soon as possible. Many improvements have been done. Apart from note-taking, in addition to GST, Digital India, Make in India, Star Vice India, PM Modi has brought economic revolution in India.

किसका इन्तजार है पीएम मोदी को?
अमेरिका, इजराइल समेत अन्य सभी देशों के साथ भारत के सम्बन्ध भी काफी मजबूत हुए हैं. मगर फिर भी राम मंदिर जैसे कई मुद्दों पर मोदी सरकार अभी तक कुछ ख़ास कर नहीं सकी. दरअसल इतनी जीत के बावजूद बीजेपी के साथ अभी भी समस्या ये है कि उसके पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है.

Who is waiting for PM Modi?
India’s relations with all other countries, including the US, Israel, have also been strong enough. Yet, on many issues like the Ram Temple, the Modi Government has not been able to do anything special yet. Actually despite this win, the problem with the BJP is that he does not have a majority in the Rajya Sabha.

राम मंदिर का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है और विपक्ष, खासतौर पर तुष्टिकरण में अंधी कांग्रेस इस मामले को अभी और लटकाने पर तुली हुई है. तारीख पर तारीख दी जा रही हैं. बीजेपी नेता सुब्रमणियम स्वामी ने तो राम मंदिर के लिए सरकार से विधेयक लाने तक को कह दिया, मगर पीएम मोदी ने ऐसा नहीं किया.

The Ram temple case is also stuck in the Supreme Court and in the opposition, especially the appeasement, the blind Congress is bent on hanging the issue right now. Date is being given on the date. BJP leader Subramanian Swamy even asked the government to bring the bill to the Ram temple, but PM Modi did not do it.

राम मंदिर को लेकर पीएम मोदी की योजना
इसके पीछे फिर वही वजह है कि राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के कई बेहद अहम बिल अटके पड़े हैं. तीन तलाक के बिल को ही ले लीजिये, विपक्ष तुष्टिकरण के चक्कर में उसके पीछे पड़ा है. सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी राज्यसभा में बहुमत मिलते ही एक के बाद एक कई बड़े फैसलों से देश का इतिहास बदलने की योजना पर काम कर रहे हैं.

PM Modi’s plan for Ram temple
This is the reason behind this that due to the absence of majority in the Rajya Sabha, PM Narendra Modi has stuck several important bills of the government. Take the three divorce bills, the opposition is behind him in the affair of appeasement. According to the sources, PM Modi is working on a plan to change the history of the country with one of the many big decisions after one, after getting majority in the Rajya Sabha.

2015 में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार कहा था कि राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण राम मंदिर का काम फंसा हुआ है. केंद्र सरकार चाहे कि कानून बनाकर मंदिर का रास्ता साफ कर दे तो वो ऐसा नहीं कर पाएगी, क्योंकि राज्यसभा में वो बिल गिर जाएगा.

In 2015, Home Minister Rajnath Singh had once said that the Ram temple’s work was stuck due to lack of majority in the Rajya Sabha. If the Central Government clears the path of the temple by making laws, then he will not be able to do that because the bill will fall in the Rajya Sabha.

एक साथ फुल फॉर्म में आएंगे मोदी
एक बार राज्यसभा में बहुमत मिल जाए तो पीएम मोदी खुलकर बड़े फैसले लेने के इन्तजार में प्रयासरत हैं, जिनमे राम मंदिर के अलावा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाली धारा 370 को खत्म करना और समान नागरिक संहिता को लागू करना शामिल है. यानी ना केवल राम मंदिर का मुद्दा पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा बल्कि नेहरू की दी हुई कश्मीर की समस्या भी सदा के लिए ख़त्म हो जायेगी.

Modi will come in full form together
Once there is a majority in the Rajya Sabha, then PM Modi is openly waiting to take decisions, including the elimination of Article 370, which is specially given to Jammu and Kashmir, besides implementing the same civil code besides Ram temple. That is, not only will the issue of Ram Temple completely end, but the problem of Nehru’s given Kashmir will end forever.

कश्मीरी पंडितों के अलावा देश के अन्य लोग भी जम्मू-कश्मीर जा कर बस सकेंगे. साथ ही समान नागरिक संहिता को लागू करने से मुसलमानों का अलग पर्सनल क़ानून भी ख़त्म हो जाएगा. इसके अलावा भी पीएम मोदी कई अहम् फैसले सरलता से ले सकेंगे. जीएसटी, नोटबंदी जैसे फैसले तो केवल शुरुआत भर हैं.

Apart from Kashmiri Pandits, other people of the country will also be able to go to Jammu and Kashmir. Simultaneously, implementing the same civil code will separate the separate personal law of the Muslims. Apart from this, PM Modi will be able to take many ego decisions easily. The decisions like GST, notebook are just beginning.

राम मंदिर, समान नागरिक कानून, कश्मीर से धारा 370 हटाने और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने जैसे वादों को पूरा करने के लिए सरकार को संसद में संविधान संशोधन करना जरूरी होगा. इसके लिए सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में बहुमत भी जरूरी है.

In order to fulfill the promises of Ram temple, uniform civil law, Article 370 from Kashmir and holding elections together in the entire country, the government must amend the Constitution in Parliament. For this, not only the Lok Sabha but also the majority in the Rajya Sabha.

पीएम मोदी को दूसरा कार्यकाल जरूरी
यह समझना मुश्किल नहीं है कि जनता ने जिस काम के लिए बीजेपी की सरकार को चुना था वो इसलिए नहीं हो पा रहा है, क्योंकि सरकार उनके लिए जरूरी बिलों को संसद में पास ही नहीं करवा सकती. ऐसे तमाम बिल लोकसभा में तो पास हो जाते हैं, लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस उन्हें अटका देती है. तीन तलाक पर पाबंदी का बिल भी इन्हीं में से एक है.

PM Modi needs second term
It is not difficult to understand that the work that the BJP chose for the BJP government is not being able to get it because the government can not make necessary bills for them in Parliament. All such bills are passed in the Lok Sabha, but in the Rajya Sabha, the Congress sticks to them. The ban on the three divorces is also one of these.


ऐसे में बीजेपी के लिए 2019 का चुनाव जीतना जरूरी है, क्योंकि इसके बाद ही मोदी अपने असली अंदाज में काम कर पाएंगे. फिलहाल हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2019 के आम चुनावों के फौरन बाद होंगे, जबकि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और तेलंगाना का चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ होगा. इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनावों से ठीक पहले 2018 के आखिर में छत्तीगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान के विधानसभा चुनाव होने हैं.

In such a situation, it is important for BJP to win the 2019 election, because only after this will Modi be able to work in his true style. At present, the assembly elections in Haryana, Jammu and Kashmir, Jharkhand and Maharashtra will be held shortly after the general elections of 2019, while the elections of Andhra Pradesh, Arunachal Pradesh, Odisha, Sikkim and Telangana will be held with the Lok Sabha elections. Apart from this, just before the 2019 Lok Sabha elections, elections to Chhattisgarh, Karnataka, Madhya Pradesh, Mizoram and Rajasthan will be held in the end of 2018.

जिस तरीके से बीजेपी ने वामपंथी गढ़ में फ़तेह पायी है, यदि ऐसा ही प्रदर्शन आने वाले चुनावों में भी जारी रहा तो भारत की जनता पीएम मोदी का ऐसा रूप देखेगी, जिसकी उसने कल्पना तक नहीं की होगी. सही मायनों में तब भारत की राजनीति के स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी.

The manner in which the BJP has won in the left wing, if the same performance continues in the forthcoming elections then the people of India will see PM Modi’s form which he has not even imagined. In truth, then the golden age of India’s politics will start.

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