PM मोदी का दिल्ल्ली ,हरियाणा और यूपी की जनता को दिया जबरदस्त तोफहा! देख केजरीवाल भी रहा गए सन्न

नई दिल्ली : देश में विकास की बयार बह रही है, पीएम मोदी ने देश की दिशा व् दशा बदलने के लिए बड़े स्तर पर मुहिम छेड़ी हुई है. वामपंथियों व् देश के गद्दारों के मुँह पर तमाचा लगाते हुए मोदी सरकार ने बड़ी कामयाबी हासिल की है, जिससे दिल्ली से लेकर हरियाणा और यूपी तक की जनता में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है.

New Delhi: The country’s development is blowing in the midst of the development, PM Modi has launched a massive campaign to change the direction and direction of the country. Modi government has achieved a big success by hitting the mouth of the Left or the traitors of the country, from which there has been a wave of happiness in the public from Delhi to Haryana and UP.

आधे वक़्त में पूरा हुआ देश का सबसे तेज एक्सप्रेसवे का काम
दिल्ली को प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए मोदी सरकार द्वारा बनाया जा रहा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे 500 दिनों के रेकॉर्ड वक्त में बनकर तैयार होने वाला है. नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक अधिकारी के मुताबिक सरकार ने इसके निर्माण के लिए 910 दिनों का वक्त तय किया था, लेकिन अब यह उससे आधे वक्त में ही बनकर तैयार होने वाला है.

Fastest Expressway in the Country, Completed in half-time
The Eastern Peripheral Expressway being built by the Modi government to get the Delhi out of pollution will be ready in the record time of 500 days. According to an official of the National Highway Authority of India, the government had fixed 910 days for its construction, but now it is going to be ready in half the time.

इसी महीने के अंत में पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. 135 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पलवल, गाजियाबाद और नोएडा को सीधे तौर पर जोड़ेगा. इससे हरियाणा से यूपी और यूपी से हरियाणा जानेवाले वाहनों को दिल्ली से होकर नहीं गुजरना होगा. ना केवल इससे दिल्ली की जनता को प्रदूषण से निजात मिलेगी बल्कि वाहनों को भी ट्रैफिक की समस्या का सामना नहीं करना पडेगा. 11000 करोड़ रुपयों की लागत से बने इसे देश का सबसे तेज एक्सप्रेसवे कहा जा रहा है क्योंकि यहां वाहनों को 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने की अनुमति होगी.

PM Narendra Modi and Union Transport Minister Nitin Gadkari will inaugurate the Expressway later this month. The 135-kilometer long expressway connects Palwal, Ghaziabad and Noida directly. With this, vehicles going from Haryana to UP and Haryana to Haryana will not have to go through Delhi. Not only will it get rid of the pollution of the people of Delhi, but also the vehicles will not face the traffic problem. It is said to be the fastest expressway in the country, built at a cost of Rs 11000 crore, as the vehicles will be allowed to run at a speed of 120 km per hour.

प्रदूषण की समस्या से मिलेगी निजात
दरअसल दिल्ली व् इसके आसपास के इलाके पिछले काफी वक़्त से वायु प्रदूषण की समस्या झेल रहे हैं. इसे रोकने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ऑड-इवन योजना की शुरुआत भी की थी, मगर वो बुरी तरह से असफल हो गयी. वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने तो दिवाली पर पटाखों की बिक्री पर ही रोक लगा दी, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ा. मगर मोदी सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए ऐसा शानदार कदम उठाया है.

Pollution will get rid of the problem
In fact, Delhi and its surrounding areas are suffering from the air pollution problem for long periods of time. To prevent this, Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal had also started the induction plan, but he failed miserably. At the same time, the Supreme Court has banned the sale of fireworks on Diwali, thereby causing anger among the people. But the Modi Government has taken such a great step for its prevention.

इसके चलते सफर का समय कम होगा और दिल्ली में वाहनों के चलते होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी. एनएचआई के चीफ जनरल इंजिनियर बीएस सिंगला ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे की खासियत यह होगी कि इसमें आपको सिर्फ उतना ही टोल चुकाना होगा, जितनी दूरी का सफर आप तय करेंगे. यही नहीं, इस पर टोल कलेक्शन की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था होगी ताकि ट्रैफिक का मूवमेंट बाधित न हो.

This will reduce travel time and reduce the number of pollution caused by vehicles in Delhi. Chief General Engineer of NHI BS Singla said that the specialty of this expressway will be that only you will have toll to pay the same amount of distance, as far as you can decide the distance traveled. Not only this, it will be an electronic arrangement of toll collection so that traffic movement is not obstructed.

ओवरलोड वाहनों को नहीं मिलेगी एंट्री
सिंगला ने कहा, ‘इसके अलावा हमने एक्सप्रेसवे के सभी एंट्री पॉइंट्स पर ऐसे सेंसर लगाए हैं, जिनसे किसी भी ओवरलोडेड वाहन के बारे में पता चल सकेगा और उन्हें एक्सप्रेसवे पर एंट्री नहीं मिलेगी.’ आमतौर पर टोल प्लाजा पर इस तरह के सेंसर लगाए जाते हैं और वाहनों के ओवरलोड पाए जाने पर उन्हें वापस कर दिया जाता है लेकिन, इस एक्सप्रेसवे में एंट्री पॉइंट्स पर ही ऐसे सेंसर होंगे ताकि ओवरलोड वाहन एंट्री ही न कर सकें.

Overload vehicles will not get entry
Singla said, “Apart from this we have installed such sensors on all entry points of Expressway, which will be able to know about any overloaded vehicle and will not get entry on expressway.” Usually, such kind of sensors are installed on toll plaza And they are returned when found overload of vehicles, but only on this expressway there will be such sensors on entry points so that overloaded vehicle ent Ri can not.

ओवरस्पीड पर कटेगा इलेक्ट्रॉनिक चालान, टोल के साथ जुड़ेगा
सिंगला ने कहा, ‘हमने एक्सप्रेसवे के पास पार्किंग की सुविधा भी दी है ताकि ओवरलोडेड ट्रक वहां पर अपना सामान उतार सकें और फिर निश्चित वजन के साथ ही आगे का सफर तय करें. यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है.’ अधिकारी ने कहा कि वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए हर दो किलोमीटर की दूरी पर कैमरे लगाए गए हैं.

Electronic invoices will be deducted at OverSpid, with toll
Singla said, “We have also given the facility of parking near Expressway so that the overloaded trucks can take their belongings there and then with the fixed weight we should go ahead. This is the first of its kind in the country. “The official said that in order to control the speed of the vehicles, cameras have been installed at every two kilometers.

सिंगला ने कहा, ‘गति सीमा से अधिक तेजी से चलने वाले वाहनों का इलेक्ट्रॉनिक चालान काटा जाएगा और वह लोगों को टोल के साथ ही जोड़कर भेजा जाएगा. ओवरस्पीड चलने वाले लोगों पर इससे लगाम कसी जा सकेगी.’

Singla said, “The electronic challan will be deducted for vehicles running faster than the speed limit and it will be sent to the people along with the toll. Those who run overspeed will be able to restrain it.

इस हाइवे के जरिए दिल्ली की सड़कों की हालत पूरी तरह बदल जायेगी, हवा भी साफ़ रहेगी. मोदी सरकार के इस प्रोजेक्ट की सफलता के चर्चे देश-विदेश में जोरशोर से लिए जा रहे हैं. वहीँ आम जनता ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी ख़ुशी प्रकट करते हुए पीएम मोदी व् नितिन गडकरी को धन्यवाद दिया है.

Through this highway, the condition of roads in Delhi will be completely changed, the air will remain clean. The discussions about the success of this project of the Modi government are being thrown out loud in India and abroad. The same general public also expressed their happiness over this project thanking PM Modi and Nitin Gadkari.

Expressway Yamuna Expressway

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रायबरेली: अमित शाह-योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में लगी आग, धू-धू कर जलने लगा पंडाल

रायबरेली : जैसा कि हम इस बात को भलिभांति जानते हैं कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर सभी पार्टी जोर-शोर से रैली कर रही हैं. जानकारी के अनुसार ‘भाजपा’ अध्यक्ष ‘अमित शाह’ और ‘उत्तर प्रदेश’ के मुख्यमंत्री ‘योदी आदित्यनाथ’ राज्य के ‘रायबरेली’ भाजपा की संकल्‍प परिवर्तन रैली में शामिल होने के लिए गये. वहाँ उनके मंच पर आग लग गई.

Rae Bareli: As we know this, all the parties are rallying enthusiastically about preparations for the 2019 Lok Sabha elections. According to the information, the BJP president Amit Shah and Uttar Pradesh chief minister Yodhi Adityanath went to the Rae Bareli in the state to join the resolution of the rally. There was a fire on their platform.

लोकसभा चुनाव को लेकर रायबरेली में रैली के दौरान अमित शाह और CM योगी के बड़ा हादसा!

जानकारी के अनुसार खबर मिली है कि जैसे ही अमित शाह जनता को संबोधित करने के लिए मंच की तरफ आगे बढ़े तो मंच पर आग लग गई. आग को देख आस-पास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई. खबर मिली है कि इस दौरान अमित शाह के अलावा मुख्‍यमंत्री ‘योगी आदित्‍यनाथ’ भी यहां शामिल हुए थे. दरअसल वहां पर मौजूद लोगों और अन्‍य कर्मियों ने आग पर कुछ ही देर में काबू पा लिया.

According to information, news has been reported that as soon as Amit Shah proceeded towards the platform to address the public, there was a fire on the stage. Seeing the fire a panic broke out in the nearby people. It has been reported that during this period, besides Amit Shah, the chief minister ‘Yogi Adityanath’ also joined here. In fact, the people present there and other personnel managed to overcome the fire shortly after.

खबर मिली है कि यहां पर दोनों नेता शाह और योगी कुछ ही देर में लोगों को संबोधित करने वाले हैं. जानकारी के अनुसार भाजपा अध्यक्ष शाह और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ‘सोनिया गांधी’ के गढ़ रायबरेली के दौरे पर आये हुए हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि अमित शाह और योगी आदित्यनाथ का यह दौरा लोकसभा चुनावों की तैयारी को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.

लोकसभा चुनाव को लेकर रायबरेली में रैली के दौरान अमित शाह और CM योगी के बड़ा हादसा!

It is reported that here both the leaders Shah and Yogi are going to address people in a while. According to information, BJP President Shah and state Chief Minister Yogi Adityanath have come here on a visit to ‘Gandhi Gandhi’ bastion of Rae Bareli. It is speculated that this visit of Amit Shah and Yogi Adityanath is being done keeping in view the preparation of Lok Sabha elections.

ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले चुनावों में अमित शाह रायबरेली द्वारा कांग्रेस के किले में सेंध लगाने की योजना बना रहे हैं और जिसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी उनके साथ दौरे पर आ रहे हैं.

It is being said that in the coming elections, Amit Shah is planning to break into Congress fort by Rae Bareli and for which state’s Chief Minister Yogi is on a tour with him.

लोकसभा चुनाव को लेकर रायबरेली में रैली के दौरान अमित शाह और CM योगी के बड़ा हादसा!

लाखों कार्यकर्ता होंगे शामिल
इस रैली को लेकर दोनों नेताओं के दौरे को लेकर भाजपा के रायबरेली प्रभारी ‘हीरो बाजपेयी’ ने जानकारी देते हुए कहा है कि अमित शाह ‘कांग्रेस’ के गढ रायबरेली में एक जनसभा करेंगे.

Millions of workers will be included
The BJP’s Raebareli in-charge ‘Hero Bajpayee’ has informed about the visit of the two leaders about this rally, saying that Amit Shah will hold a public meeting in Rae Bareli in the ‘Deep Rally’ of Congress.

बाजपेयी ने इसके आगे कहा है कि यह ऐतिहासिक रैली होगी. इस रैली के दौरान लाखों कार्यकर्ता शामिल होंगे. इस जनसभा में ‘योगी आदित्यनाथ’, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ‘महेन्द्र नाथ पाण्डेय’ और दोनों उप मुख्यमंत्री ‘दिनेश शर्मा’ और ‘केशव प्रसाद मौर्य’ भी शामिल होने वाले हैं.

लोकसभा चुनाव को लेकर रायबरेली में रैली के दौरान अमित शाह और CM योगी के बड़ा हादसा!

Bajpai further said that this will be a historic rally. Millions of workers will be involved during this rally. In this public meeting, ‘Yogi Adityanath’, state BJP President ‘Mahendra Nath Pandey’ and both Deputy Chief Ministers Dinesh Sharma and Keshav Prasad Maurya are also going to attend.

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namopress.in

अफजल प्रेमी गैंग का देश के खिलाफ घिनोना षडयंत्र ,CJI पर हामले का ये है कारण

राज्यसभा में राहुल गाँधी की पार्टी कांग्रेस और डेनियल राजा जिसे आप लोग डी राजा के नाम से जानते है, ऐसे तमाम लोगों ने मुख्य जज दीपक मिश्र के खिलाफ महावियोग प्रस्ताव पेश किया है, गुलाम नबी आजाद जो की राज्यसभा में कांग्रेस का नेता है उसने वन्कैया नायडू के सामने 70 से ज्यादा सांसदों के हस्ताक्षर पेश किये है, और मुख्य जज दीपक मिश्र के खिलाफ महावियोग चलाने की मांग करी है

Rahul Gandhi’s party Congress and Daniel Raja in the Rajya Sabha, whom you know by name D Raja, all such people have presented a grand proposal against Chief Justice Deepak Mishra, Ghulam Nabi Azad, who is the leader of the Congress in the Rajya Sabha, More than 70 MPs have signed before Naidu, and have demanded to run the Mahaviya against Chief Judge Deepak Mishra.

चूँकि 50 से ज्यादा सांसदों के हस्ताक्षर है इसलिए अब वन्कैया नायडू को महावियोग पर वोटिंग करवानी होगी, गुलाम नबी आजाद ने इसके बाद कहा की दीपक मिश्र को हटाना बहुत ही जरुरी है क्यूंकि दीपक मिश्र के कारण लोकतंत्र खतरे में है, और इसी वजह से उनकी पार्टी कांग्रेस और उसके सहयोगी महावियोग प्रस्ताव लेकर आये

Since more than 50 MPs are in the signature, therefore, Vankaya Naidu has to vote on Mahaviyoga now, Ghulam Nabi Azad said after that it is very necessary to remove Deepak Mishra because democracy is in danger due to Deepak Mishra, and that is why his Party Congress and its allies came from Mahaviya Proposal

अब ये जो गुलाम नबी आजाद है ये कांग्रेस के वरिष्ट नेता है, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रहे है, और अभी राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य नेता है – ये वही गुलाम नबी आजाद है जो इस्लामिक आतंकवादी जिसने संसद पर हमला किया था, अफज़ल गुरु – उस अफज़ल गुरु के लिए ये गुलाम नबी आजाद लड़ रहे थे, उसके लिए माफ़ी की मांग कर रहे थे, उसे फांसी दिए जाने का सख्त विरोध कर रहे थे, और कह रहे थे की इसे सजा न दी जाये

Now, the Ghulam Nabi Azad is the senior leader of the Congress, the Chief Minister of Jammu and Kashmir, and is the main leader of the Congress in the Rajya Sabha – this is the same Ghulam Nabi Azad, the Islamic terrorist who attacked the Parliament, Afzal Guru – For that Afzal Guru, Ghulam Nabi Azad was fighting, demanding apology for him, he was firmly opposed to hanging him, and saying that he should not be punished.

गुलाम नबी आजाद रमजान का भी हवाला दे रहे थे की रमजान में तो बिलकुल भी सजा ने दी जाये, अन्यथा मुसलमानों की भावना भड़क जाएगी, एक तरह से ये कह रहे थे की देश में गृह युद्ध हो जायेगा – ऐसे गुलाम नबी आजाद आज कह रहे है की दीपक मिश्र के कारण लोकतंत्र खतरे में है

Ghulam Nabi Azad was also referring to Ramzan that even in Ramzan, the punishment should be given, otherwise the feeling of Muslims would flare up, in a sense it was saying that there would be a civil war in the country – such Ghulam Nabi Azad said today. Democracy is in danger due to Deepak Mishra

असल में दीपक मिश्र ने आतंकियों को फांसियां दी है, दीपक मिश्र ने वामपंथियों के मन मुताबिक केस उनके पसंदीदा जजों को नहीं दिए है, इसके अलावा राम मंदिर, मुताह, हलाला जैसे तमाम केस दीपक मिश्र ही देख रहे है, खतरा लोकतंत्र को नहीं खतरा वामपंथियों और कांग्रेस को है

In fact, Deepak Mishra has given the terror to the terrorists, Deepak Mishra has not given the case to his favorite judges according to the left mind, besides all the cases like Ram Mandir, Mutha, Halala, Deepak Mishra is watching, danger threatens democracy The leftists and the Congress

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राम मंदिर पर बॉलीवुड से उठा विरोधी स्वर…

New Delhi: सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनायेंगे! रामलला हम आयेंगे, मंदिर वहीं बनायेंगे!! पिछले 25 सालों से यह नारा पुरे देश में गूँज रहा हैं! उत्तरप्रदेश में भाजपा के जीत के बाद श्रीराम भक्तों के वर्षों के इंतजार को आज एक नयी उम्मीद, एक नयी ऊर्जा मिली हैं! अब उत्तरप्रदेश में योगी जी और केंद्र में मोदी जी की सरकार हैं जोकि अयोध्या में राम मंदिर की पक्षधर भी हैं तो देश के सभी राम भक्तों को यह उम्मीद हैं क़ि मंदिर अब जल्द ही बनेगा! इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने भी राम मंदिर पर जल्द सुनवाई करने के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था और अगले साल 8 फरवरी की तारीख तय कर दी है!

New Delhi: Saugandh kills Ram, the temple will be built there! Ramlalah will come, the temple will be built there !! For the last 25 years, this slogan is echoing in the entire country! After BJP’s victory in Uttar Pradesh, waiting for the years of Shriram devotees has got a new hope, a new energy today! Now in Uttar Pradesh, Yogi Ji and in the center are the government of Modiji, who are also the followers of the Ram temple in Ayodhya, then all the Ram devotees of the country are hoping that the temple will be built soon! With this, the Supreme Court had also given its verdict in favor of hearing the Ram temple soon and fixed the date of February 8 next year!

लेकिन देश में मौजूद तथाकथित सेकुलरो की समस्या कुछ और ही हैं! बहुसंख्य समुदाय से ही कुछ लोग धर्मनिरपेक्ष का सिद्धान्त देते हुये कह रहे हैं क़ि अयोध्या में मंदिर की जगह गरीबों के लिये अस्पताल, स्कूल या कोई अन्य सामाजिक कल्याण के लिए भवन का निर्माण किया जाये! बिल्कुल सही बात हैं! अब गरीबों के लिये अस्पताल या कोई सामाजिक कल्याण कभी गलत नहीं हैं, लेकिन मंदिर की जमीन पर ही क्यों ? वो भी उस स्थान पर जिसपर रामलला का जन्म हुआ! जिस स्थान पर सैकड़ो लोगों ने मंदिर के लिये अपने प्राणों की आहुति दी! उसी स्थान पर क्यों ?

But the problem of so-called secularism in the country is different! Some people are saying the principle of secularism from the majority community that instead of the temple in Ayodhya, the building should be constructed for the poor, hospital, school or any other social welfare! That’s right! Now the hospital or any social welfare for the poor is never wrong, but why not only on the temple land? That too is the place on which Ramlal was born! In the place where hundreds of people sacrificed their lives for the temple! Why at the same place?

इसी कड़ी में बॉलीवुड की अभिनेत्री श्रुति सेठ ने अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर अपने ट्विटर अकाउंट से लोगों से एक सवाल पूछा! इस सवाल के जवाब में लोगों ने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की है उसे देखने की बाद अच्छे-अच्छे लोगों के होश उड़ जाएंगे! श्रुति सेठ ने एक ट्वीट के माध्यम से पोल के जरिए एक सवाल किया! इस सवाल में श्रुति सेठ ने लोगों से पूछा है कि “विध्वंस स्थल पर क्या बनाया जाना चाहिए ?”

In this episode, Bollywood actress Shruti Seth asked a question from people about her Ayodhya temple-mosque dispute with her twitter account! After seeing the reaction of the people in response to this question, the senses of good people will fly away! Shruti Seth did a question through a tweet through a tweet! In this question Shruti Seth has asked the people “What should be made at the site of the demolition?”

श्रुति सेठ ने लोगों को इस सवाल के चार विकल्प भी दिए! इन चार विकल्पों में क्रमशः मंदिर, मस्जिद, स्कूल और हॉस्पिटल रखे! श्रुति के इस सवाल पर लोगों ने अपने जो विचार रखे हैं उसे देखने के बाद ओवैसी जैसे नेताओं की तो रातों की नींद ही उड़ जाएगी !

Shruti Seth gave people four options to this question too! In these four options, keep the temple, mosque, school and hospital respectively! After seeing the thoughts of Shruti who have kept their thoughts, then the leaders like Owaisi will sleep in the night!

इस सवाल के जवाब में 59 प्रतिशत लोगों ने मंदिर के निर्माण की बात कही है! वहीँ दूसरे नंबर पर लोगों ने 20 प्रतिशत के साथ हॉस्पिटल को रखा है! तीसरे और चौथे नंबर की बात करें तो 15 प्रतिशत के साथ स्कूल और मात्र 6 प्रतिशत के साथ मस्जिद को चुना है!

In response to this question, 59 percent of the people said the construction of the temple! At the same number, people have kept the hospital with 20 percent! Talk about the third and fourth numbers, the school with only 15 percent and the mosque with only 6 percent is selected!

श्रुति सेठ ने जो पोल अपने ट्विटर अकाउंट के जरिये किया है उस पर लोगों ने श्रुति सेठ को आड़े-हाथों लेते हुए निशाना भी साधा है! श्रुति सेठ ने भी उम्मीद नहीं की होगी कि उनके इस पोल के नतीजे कुछ ऐसे आएँगे!

Shruti Seth, who has done the pole through her Twitter account, has also targeted Shruti Seth on her hands! Shruti Seth too would not have expected that the results of this poll will come in such a way!

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5 दिन में 3 फैसलों से जल भुन गयी कांग्रेस, CJI के खिलाफ छेड़ा विद्रोह,इस नेता ने भी छोड़ा साथ देख, PM मोदी समेत सियासी में मचा हडकंप

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट एक के बाद एक धड़ाधड़ फैसले सुनाये जा रहा है. 5 दिन में तीन फैसले आ गए हैं, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस, मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस, जज लोया केस. तो वहीँ अब गुजरात हाई कोर्ट का 2002 का दंगा केस. इस सबसे कांग्रेस बुरी तरह खीज पड़ी है क्यूंकि फैसले उसके मनमुताबिक नहीं आ रहे हैं. ऐसे में अब कांग्रेस ने CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ ही विद्रोह छेड़ दिया है.

अभी मिल रही बहुत बड़ी खबर के मुताबिक एक के बाद एक फैसले से कांग्रेस को तगड़े झटके लगने की वजह से अब कांग्रेस बदला लेने पर उतारू हो गयी है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश कर दिया है. कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर उन्हें ये प्रस्ताव सौंपा.

विपक्षी पार्टियों की कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद की अगुवाई में बैठक हुई. इसके बाद कई विपक्षी दलों के नेता उपराष्ट्रपति को प्रस्ताव सौंपने पहुंचे. गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि आज हमने राज्यसभा की 7 राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर राज्यसभा चेयरमैन को महाभियोग का प्रस्ताव सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि 71 सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ ये प्रस्ताव सौंपा है.

कपिल सिब्बल ने कहा लोकतंत्र खतरे में है

सबसे ज़्यादा तकलीफ कांग्रेस के कपिल सिब्बल को हो रही है, सारा खेल भी उनका ही रचाया हुआ है. कपिल सिब्बल ने कहा कि काश हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता. सिब्बल ने कहा कि जब से दीपक मिश्रा चीफ जस्टिस बने हैं तभी से कुछ ऐसे फैसले लिए गए हैं जो कि सही नहीं हैं. सिब्बल ने कहा कि हमारे पास महाभियोग लाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था.

सिब्बल बोले कि हमें उम्मीद थी कि जजों की जो नाराज़गी है, उन सभी को भी ध्यान में रखा जाएगा. और कुछ बदलाव आएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. क्या देश के लोग सबसे बड़े संस्थान को ऐसे स्थिति में ही देखते रहें. सिब्बल ने कहा कि सीजेआई के कुछ प्रशासनिक फैसलों पर आपत्ति है. चीफ जस्टिस पर अपने पद की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्‍होंने कहा कि न्यायपालिका के खतरे में आने से लोकतंत्र पर खतरा है.

CJI ने कपिल सिब्बल को दिखाया था बहार का रास्ता

हम आपको बताते हैं कि क्यों कपिल सिब्बल को इतनी तकलीफ हो रही है दरअसल CJI दीपक मिश्रा वहीँ हैं जिन्होंने राम मंदिर मुद्दे पर कपिल सिब्बल को ज़ोरदार लताड़ लगाते हुए इस केस से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया था. कपिल सिब्बल के बौखलाहट के पीछे वजह ही यही है कि वो राम मंदिर मुद्दे पर वकालत नहीं कर सकते.

एन वक़्त पर मनमोहन सिंह ने भी छोड़ा कांग्रेस का साथ


तो वहीँ अब कांग्रेस के इस बदले के महाभियोग प्रस्ताव में ही फूट पड़ने लगी है. सबसे पहले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. मनमोहन सिंह के अलावा कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी इस मुद्दे पर पार्टी से अलग सुर अलापा है. सलमान खुर्शीद ने कहा कि चाहे जज लोया का मामला हो या कोई अन्य, सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही अंतिम होता है. कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश की विश्वसनीयता पर संदेह नहीं करना चाहिए.

अगर शीर्ष कोर्ट के फैसले को लेकर किसी को कोई आपत्ति है तो पुनर्विचार याचिका, उपचारात्मक याचिका दाखिल कर सकते हैं. लेकिन ऐसे सरेआम महाभियोग लाकर सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश का अपमान करना बिलकुल भी उचित नहीं है.

सलमान खुर्शीद ने कपिल सिब्बल को ज़ोरदार लताड़ा

सलमान खुर्शीद ने कपिल सिब्बल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वकील का काला गाउन और सफेद बैंड पहनने वाले किसी भी आदमी के लिए कोर्ट के फैसले पर सोच समझ कर सवाल उठाने चाहिए. यह संवेदनशील मामला है. उन्होंने कहा कि शीर्ष कोर्ट के फैसले पर राजनीति करने को उचित नहीं कहा जा सकता है.

लोया केस बहाना है, अयोध्या केस निशाना है

वही वकील अश्विनी उपध्याय ने भी कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया “लोया केस बहाना है, अयोध्या केस निशाना है! सेक्युलर लिबरल और अर्बन नक्सली मिलकर सुप्रीम कोर्ट और माननीय चीफ जस्टिस की क्रेडिबिलटी को समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि अयोध्या, बहुविवाह-हलाला-मुताह-मिस्यार जैसे मामलों में भी इसी वर्ष फैसला आयेगा”

अब हम आपको बताते हैं कि कांग्रेस के महाभियोग प्रस्ताव से आखिर हो क्या सकता है.
संविधान के अनुच्‍छेद 124(4) और जजेज (इंक्‍वायरी) एक्‍ट, 1968 में जजों के खिलाफ महाभियोग लाया जाता है. इस तरह का प्रस्‍ताव लोकसभा या राज्‍यसभा में से कहीं भी पेश किया जा सकता है. यह प्रस्‍ताव पेश करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्‍यसभा में 50 सांसदों के हस्‍ताक्षर की जरूरत होती है. इसके साथ ही जज को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से प्रस्‍ताव पास करना जरूरी है.

यदि इस तरह का कोई प्रस्‍ताव पास हो भी जाता है तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्‍यों की एक कमेटी बनाई जाती है. रिपोर्ट तैयार करने के बाद कमेटी उसे लोकसभा के स्‍पीकर या राज्‍यसभा के सभापित को सौंपती है. इसके साथ ही महाभियोग प्रस्‍ताव चाहे किसी भी सदन में लाया जाए, लेकिन उसे पास दोनों सदनों में होना पड़ेगा. प्रस्‍ताव को पास करने के लिए वोटिंग के दौरान सभी सांसदों का दो तिहाई बहुमत हासिल करना जरूरी है. दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्‍ताव पास होने के बाद राष्‍ट्रपति Presidential Order से जज को हटा सकते हैं.

क्या कांग्रेस के पास है संख्याबल?
राज्‍यसभा में कुल 245 सांसद हैं. इस सदन में महाभियोग प्रस्‍ताव पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत यानी 164 सांसदों के वोट की जरूरत होगी. राज्‍यसभा में सत्‍ताधारी एनडीए के 86 सांसद हैं. इनमें से 68 बीजेपी के सांसद हैं. यानी इस सदन में कांग्रेस समर्थित इस प्रस्‍ताव के पास होने की संभावना नहीं है. लोकसभा में कुल सांसदों की संख्‍या 545 है. दो तिहाई बहुमत के लिए 364 सांसदों के वोटों की जरूरत पड़ेगी. यहां विपक्ष बिना बीजेपी के समर्थन के ये संख्‍या हासिल नहीं कर सकता क्‍योंकि लोकसभा में अकेले बीजेपी के ही 274 सांसद हैं.

क्या ये बात कांग्रेस को पता नहीं होगी कि उनके पास उचित संख्याबल ही नहीं है, ज़रूर पता होगी तो फिर ये महाभियोग प्रस्ताव की नौटंकी क्यों?जिसमे कांग्रेस के अपने ही साथ नहीं दे रहे. दरअसल कर्नाटक चुनाव से पहले ऐसी नौटंकी करके चुनाव को प्रभावित करने की बड़ी गहरी योजना पर काम चल रहा है.

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कठुआ मे बच्ची से नहीं हुआ था दुष्कर्म,इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ चौकाने वाल खुलासा जिसे देख मेबूबा मुफ़्ती समेत PM मोदी हैरान

जम्मू। जम्मू संभाग के कठुआ जिले के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की चार्जशीट में जो साक्ष्य और तथ्य पेश किए गए हैं उनमें कई कड़ियां ऐसी हैं, जो आपस में मेल नहीं खातीं। कठुआ जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने एसआईटी को जो बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भेजी है, वह एक नहीं बल्कि दो हैं।

Jammu. The evidence and facts presented in the Chargesheet of gang rape and murder of an eight-year-old girl in Rasana village of Kathua district of Jammu division have many such episodes, which do not match. The medical superintendent of Kathua District Hospital has sent the girl’s post-mortem report to SIT, she is not one but two.

अमूमन मृतका की एक ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट अस्पताल से भेजी जाती है। दो डॉक्टरों की रिपोर्ट में भी अंतर है, जिससे यह मामला और पेचीदा हो गया है। यह तथ्य तब सामने आए जब आरोपितों के वकील असीम साहनी को कठुआ अस्पताल से दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दोनों रिपोर्ट में कहीं पर भी बच्ची के साथ दुष्कर्म का कोई जिक्र तक नहीं है।

Usually the same post-mortem report of the deceased is sent from the hospital. There is a difference in the reports of two doctors, which has made this case more complicated. This fact came up when the accused attorney Asim Sahni received two postmortem reports from Kathua Hospital. The shocking fact is that there is no mention of misbehavior with the girl anywhere in both reports.

पहली रिपोर्ट : शरीर पर छह जख्म, खोपड़ी सलामत

पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची के शरीर पर छह जख्म हैं, जबकि दूसरी रिपोर्ट में सात जख्म का जिक्र है। एक जख्म कान के पास लगभग दो सेंटीमीटर है। यह जख्म ऐसा होता है जो गिरने की वजह से भी आमतौर पर होता है। खोपड़ी में कोई फ्रेक्चर नहीं है।

First report: Six injuries on the body, scalp safe

The first report says that there are six wounds on the baby’s body, while the second report mentions seven wounds. A wound ear is around two centimeters. The wound is such that it is also usually due to the fall. There is no fracture in the skull.

क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में दावा किया गया है कि बच्ची का गला घोटने के बाद उसके सिर पर पत्थर मारा गया। अगर पत्थर मारा जाए तो जख्म की तीव्रता अधिक होती। बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह थ्योरी भी मेल नहीं खा रही।

Crime Branch’s charge sheet claimed that after the child’s throat was hit, his stone was hit. If the stone is hit, the intensity of the injury is high. This theory does not match with the girl’s post-mortem report.

मौत का कारण सांस रुकने से हार्ट अटैक बताया

पुलिस ने 17 जनवरी को रसाना के जिस स्थान से शव बरामद किया, वहां पर उसे पत्थर मारने का दावा क्राइम ब्रांच ने किया है, लेकिन उस पत्थर पर भी खून का निशान नहीं है। इससे यह साबित होता है कि बच्ची की मौत पहले हो चुकी थी। अगर बच्ची की हत्या 17 जनवरी को होती तो पत्थर पर खून के निशान जरूर होते।

Death caused due to respiratory heart attack

The crime branch has claimed that the police had stoned stone on the spot from where Rasna recovered the body on January 17, but that stone is not even a sign of blood. This proves that the child had died earlier. If the girl was killed on 17th January then there would be blood clots on stone.

इतना जरूर कहा गया है कि बच्ची की मौत का कारण सांस रुकने से हुए हार्ट अटैक से बताया गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि बच्ची के पेट में नशीले दवाई मिली है। जहां तक बच्ची के शरीर पर चोट के निशान की बात है तो उसके दाहिने बाजू, पेट और निचले हिस्सों पर खरोचें हैं।

It has been said that the reason for the death of the child is due to the heart attack caused by respiratory failure. However, it has also been reported in the report that the child has received narcotic medicine in the stomach. As far as the child’s body is concerned about injury marks, its right side, abdomen and lower parts are scratches

दूसरी रिपोर्टः जांघ पर खरोंचे और हाइमन था फटा

दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जांघ पर कुछ खरोंच पाई गई हैं, जो गिरने के कारण भी हो सकती हैं। रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह किया गया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि बच्ची का हाइमन फटा हुआ है। श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि हाइमन घुड़सवारी, तैराकी, साइकलिंग, जोर का काम आदि करने से भी टूट सकता है।

Second report: thighs and hymen cracked on thighs

In the second post-mortem report, some scratches have been found on the thigh, which may also be due to fall. The biggest disclosure in the report is that there has been no misbehavior with the girl. It is of course that the child’s hymen is torn. The Gynecologist at the Sri Maharaja Gulab Singh (SMGS) hospital says that hymen can break apart from riding, swimming, cycling, etc.

रिपोर्ट में बच्ची के गुप्तांग और एफएसएल भेजे गए कपड़ों में भी कोई वीर्य नहीं पाया गया है। हालांकि क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में यह दावा जरूर किया है कि जांच के लिए एफएसएल में भेजे गए कपड़े धो दिए गए थे

In the report, there is no semen in the clothes sent to the child’s genitals and FSL. Although the crime branch has claimed in the charge sheet that the clothes sent to FSL for the investigation were washed away

हत्या कहीं और होने का अंदेशा

पुलिस की बड़ी चूक यह भी है कि उसने आरोपितों के अंडर गारमेंट्स भी एफएसएल में नहीं भेजे। अगर भेजे होते तो जांच में कुछ मदद मिल सकती थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची के गुप्तांग में हल्का खून का धब्बा जरूर है। यह चोट के कारण भी हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बच्ची का शव जिस दिन मिला, उसकी मौत 36 से 72 घंटे पहले हुई है। इससे लगता है कि हत्या कहीं और की गई और शव रसाना में फेंका गया।

The fear of murder is somewhere else

The big mistake of the police is also that he did not send the underarm garments of the accused to FSL. If sent, there could be some help in the investigation. It is said in the report that there is a slight bleeding stain in the baby’s genitalia. It can also be caused by injury. It has also been stated in the post-mortem report that the date of the baby’s body was found on 36-72 hours prior to the death. It seems that the murder was done elsewhere and the body was thrown into the rasana.

मिले बाल पर भी उठे सवाल

एक और चौंकाने वाली बात यह है कि बच्ची के बाल, जिन्हें देवस्थान से बरामद करने का दावा किया गया, वह मार्च में क्राइम ब्रांच ने दिल्ली एफएसएल को भेजे। सवाल यह उठता है कि क्या देवस्थान की 17 जनवरी के बाद कोई सफाई नहीं हुई, लेकिन ऐसा नहीं है। इस देवस्थान पर लोग रोजाना नतमस्तक होते हैं।

Raised question

Another shocking thing is that the child’s hair, which was claimed to be recovered from Devasthan, was sent to the crime branch in Delhi by FSL Delhi in March. The question arises whether there was no cleaning after 17th January of Devasthanan but it is not so. People on this temple are worshiped daily.

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया सबसे बड़े केस में जबरदस्त फैसला,कांग्रेसी वामपंथी समेत दोगले पत्रकारों को लगा ज़ोरदार झटका

नई दिल्ली : आज देश में इतनी ज़्यादा विरोधियों ने असहिष्णुता फैला के रख दी है. जब 2g के आरोपी को यही कोर्ट बरी कर देते हैं तब ये कोर्ट कांग्रेस के लिए भगवान बन जाते हैं, सत्य की जीत बताई जाती है लेकिन जब कोर्ट कांग्रेस और वामपंथी के मनमुताबिक फैसला नहीं सुनाते है तब मिनटों में यही जज बदनाम कर दिए जाते हैं.

New Delhi: Today, more opposition in the country has kept the intolerance spread. When the court acquits the 2G accused, then these courts become God for the Congress, the truth is said to be victory, but when the court does not pronounce the verdict of the Congress and the Left, then the same judges are defamed in minutes. .

लेकिन हद तो तब हो रही है जब सुप्रीम कोर्ट के अभी अभी सबसे बड़े केस में फैसले सुनाये जाने से कांग्रेस से ज़्यादा कई दोगले पत्रकारों को तकलीफ हो रही वे जज की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.

But the extent has come when the Supreme Court is hearing the judgment of the judge in relation to the judgment of the most senior case, due to which many journalists are suffering from the Congress.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर इस स्थिति को जारी रखा तो ये बहुत बड़ा खतरा होगा. जिस तरह से इस केस में याचिका डाली गई है ये सीधा न्यायपालिका पर हमला है. जो जज इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, उनपर भी सीधा हमला किया गया था.

The Supreme Court said that if this situation continues, then it will be a very big danger. The way the petition has been filed in this case, this is an attack on the direct judiciary. The judges who were hearing this case were also directly attacked.

बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच कर रही थी. इस याचिका को कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन सहित कई अन्य पक्षकारों की ओर से दायर किया गया था.

Please tell that the hearing of this case was being done by a bench of Chief Justice Deepak Mishra, Justice M. Khanvilkar and Justice DV Chandrachud. This petition was filed on behalf of Congress leaders Tahsin Poonawala, journalist BS Lone, and many other parties including the Bombay Lawyer’s Association.

इसमें बड़ा हाथ वकील प्रशांत भूषण का भी है. वकील से सामाजिक कार्यकर्ता बने प्रशांत भूषण ने सोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर को फर्जी बताया. साथ ही आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी मानने से इंकार कर दिया.

There is also a big hand lawyer Prashant Bhushan. Prashant Bhushan, a social worker from the lawyer, said that the encounter of Sohrabuddin Sheikh is a fake. Also refused to accept the official post mortem report.

जस्टिस लोया की मौत को लेकर कांग्रेसी आस लगाए बैठे थे कि कोई साज़िश रच लेंगे मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा षड़यंत्र रचा गया. जज लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का केस देख रहे थे. उनकी साधारण दिल के दौरे से होने वाली मौत को कांग्रेस ने संदिग्ध और एक साजिश के तहत मौत बताया.

The Congressmen were sitting on the pretext that Justice Loya’s death was a big conspiracy against Modi Government. Judge Loya was watching the case of Sohrabuddin encounter. The Congress is suspected of death due to his simple heart attack and death under a conspiracy.

कांग्रेस ने अपनी पूरी ताक़त इस केस में झोंक दी थी जिसके बाद अब कोर्ट में शांतिपूर्ण बहस नहीं बल्कि चीख चीख कर जज पर दबाव और आरोप लगाए जाने लगे थे. इस फैसले को भी CJI दीपक मिश्रा देख रहे हैं, तभी कांग्रेस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने जा रही थी.

The Congress had thrown its full force in this case, after which there was no peaceful debate in the court but screaming screaming and pressure was being made on the judge. This decision was also seen by CJI Deepak Mishra, when Congress was going to introduce impeachment against Deepak Mishra.

बता दें दिसंबर 2014 में जस्टिस लोया की नागपुर में मौत हो गई थी जिसे दिल का दौरा से मौत का कारण बताया गया था. जस्टिस लोया की मौत के बाद जिन जज ने इस मामले की सुनवाई की, उन्होंने अमित शाह को मामले में बरी कर दिया था. बस तब से कांग्रेस इस केस के पीछे हाथ धो के पड़ी थी.

In December 2014 Justice Loya was killed in Nagpur, who was told to have died due to heart attack. After the death of Justice Loya, the judge who had heard the case, had acquitted Amit Shah in the case. Since then the Congress had to wash hands behind this case.

यहाँ तक की जज लोया के परिवार को भी परेशान किया जा रहा था. जज लोया के बेटे अनुज लोया ने कुछ दिन पहले ही प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे को बड़ा करने पर नाराजगी जताई थी. अनुज ने कहा था कि उनके पिता की मौत प्राकृतिक थी, कृपया उनकी मौत को राजनितिक मुद्दा न बनाएं.

Even the family of Judge Loya was being disturbed. Judge Loya’s son Anuj Loya had resented a few days ago by press conference and raised the issue. Anuj had said that his father’s death was natural, please do not make his death a political issue.

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कठुआ कांड में हुआ बहुत बेहद ज़बरदस्त खुलासा, निकला हवाला कनेक्शन जिसे देख PM मोसी समेत वामपंथी हैरान

नई दिल्ली : कठुआ रेप कांड में हर दिन नए नए खुलासे सामने आ रहे हैं, सबसे पहले दोगले मीडिया ने जानबूझ बच्ची की फोटो और नाम वायरल किया, जबकि निर्भया केस में ऐसा नहीं हुआ था. जिसके बाद कोर्ट ने 10 लाख जुर्माना और दुबारा करने पर 6 साल जेल की सजा का फैसला 10 मीडिया हाउस को लेकर सुनाया.

New Delhi: Every new new disclosures are coming out every day in the Kathua Rap Caper; First of all, the double-minded media intentionally made the photograph and name of the child viral, whereas this was not done in the fearless case. After which, the court told a 10-million fine and a six-year jail sentence for redressing 10 media houses.

इसके बाद दोगले फिल्मबाज़ ने बिना सोचे समझे मंदिर,हिन्दू धर्म को लेकर अपने आप में हिन्दू होने पर शर्म आने लगी ऐसे फोटो डाली. तो वहीँ वामपंथियों ने हिन्दू धर्म का अपमान और कुछ नीच पत्रकार ने तो भगवान राम और भगवान शिव को लेकर अश्लील तसवीरें डाल दी.

After this, the double-comedy filmmaker thoughtlessly took the photographs of the Hindu, Hindu religion, and became ashamed of himself. So the same leftists insulted Hindu religion and some dishonest journalists put obscene images about Lord Rama and Lord Shiva.

कठुआ कांड में हुआ बहुत ज़बरदस्त खुलासा, निकला हवाला कनेक्शन

लेकिन ये सब तो कुछ भी नहीं इस सब के पीछे का असली खेल तो अभी तक आपको मालूम ही नहीं है. इन घटिया लोगों बच्ची की लाश पर भी पैसे कमाने का धंधा बना लिया. कठुआ कांड में अब हवाला कांड का बड़ा ज़बरदस्त खुलासा हुआ है जिसे देख आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे. मतलब इन लोगों ने एक छोटी बच्ची जिसके साथ रेप हुआ हो हत्या हुई हो उसकी मौत पर भी धंधा करना शुरू कर दिया है.सीधा बीच में लोग पैसा छाप रहे हैं और मोदी सरकार से इन्साफ मांग कर आमरण अनशन पर बैठने का ढोंग रच रहे हैं.

Extremely revealing happened in the Kathua Kand, the quoted Hawala connection

But all this is nothing but the real game behind all this so far you do not even know. These poor people also made the business of making money on the child’s corpse. The hawala scandal has now been revealed in the Kathua scandal, which will see your ropes stand. It means that these people, who have been raped with whom they have been raped, have begun to practice even on the death of their own people.In the middle of the day, people are printing money and demanding justice from the Modi government and pretending to sit on fast for hunger strike

वायरल हुआ ऑडियो

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक कठुआ कांड में बच्ची की फोटो और नाम को आखिर किस वजह से वायरल किया गया. कठुआ कांड में पीड़ित बच्ची का नाम और उसकी तस्वीर शव मिलने के दूसरे दिन से ही वायरल होने लगा था. जानबूझकर इस बच्ची की तस्वीर और उसके नाम को वायरल किया गया। इन सवालों के बीच एक वायरल ऑडियो क्लिप ने सनसनी फैला दी है, जिसमें दो लोग सीधे तौर पर इन फोटो को वायरल करने की जिम्मेदारी लेते नजर आ रहे हैं.

Viral done audio

According to the big news now available, the photograph and name of the child in the Kathua Kabadh was finally viral due to which. The name of the victim and her photo was found to be viral from the second day of the carcass. Intentionally the picture of this girl and her name was viral. Among these questions, a viral audio clip has spread sensation, in which two people seem to be directly taking responsibility for viralizing these photos.

पैसा बहुत जल्दी आपस में ही बंटवारा करवा देता है. पंजाब केसरी मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार आठ वर्ष की मासूम बच्ची के नाम पर पैसे हड़पने का मामला सामने आया है. यह आरोप कोई और नहीं बल्कि एक गुज्जर-बकरवाल नेता द्वारा ही अपने एक साथी पर लगाए जा रहे हैं. नजाकत खटाना नाम शख्स ने यह आरोप एडवोकेट तालिब हुसैन, दीपिका सिंह राजावत और शेहला रशीद(JNU) पर लगाए हैं.

The money quickly divides itself together. According to Punjab Kesari Media reports, a case of money grab was taken in the name of the innocent child of eight years. This allegation is being imposed on none other than a Gujjar-Bakarwal leader on one of his associates. The accused, Najkat Khatana, has imposed this accusation on Advocate Talib Hussain, Deepika Singh Rajawat and Shehla Rashid (JNU).

बच्ची के नाम पर दो करोड़ हड़प लिए

खटाना का एक आडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमे वो इन तीनों पर आरोप लगा रहा है कि इन्होंने बच्ची के नाम पर पैसों की उगाही की और फिर पैसे हड़प लिए हैं. खटाना ने तालिब हुसैन पर आरोप लगाया कि उसने बच्ची के नाम पर दो करोड़ हड़प किए हैं.

2 crore for the girl’s name

An audacious account of the case has become viral on social media in which he is accusing these three that he raised money in the name of the child and then grabbed the money. Khatana accused Talib Hussain that he had committed two crore rupees in the name of the child.

खटाना ने कहा, ” कौन है तालिब है. उसने क्या किया बच्ची के लिए. मैने और मेरे साथियों ने बच्ची की फोटो वायरल करवाई. हमने प्रोटेस्ट किया. तालिब तो बाद में आया. वो उस दीपिका और शहेला के साथ कभी जहाज में दिल्ली जाता है तो कभी बातें करता है. वो पैसे खा रहा है.

Khatana said, “Who is Talib?” What did she do for the girl? My friends and my colleagues took viral photos of the girl. We have been protested. Talib came later. He goes to Delhi in the ship with Deepika and Shehela and then he talks. That’s eating money.

आइये जानते हैं कि ये तालिब हुसैन कौन है?
ट्विटर पर सोनम महाजन ने तालिब हुसैन को लेकर खुलासा किया है कि ये एक मुस्लिम दलित और खिलिस्तानी का मूवमेंट चलाता है जिसे अलगाववादी और ISI तो सपोर्ट करती है. ये जिग्नेश मवानी का करीबी है, ये कश्मीर में हुर्रियत का करीबी है और जेएनयू में आज़ादी गैंग का बहुत खास है.

Let us know who is this Talib Hussein?
On Twitter, Sonam Mahajan has disclosed about Talib Hussain that he runs a Muslim Dalit and Khilstani movement, which separatists and ISI support then. This is close to Jignesh Mawani, close to the Hurriyat in Kashmir and is very special in the JNU freedom gang.

ये बात खुद खटाना ने भी मानी हैं, खटाना सिर्फ यहीं नहीं रूकता है उसने खुद बताया कि तालिब के संबंध हुरिर्यत के साथ हैं. इस पूरे मामले की NIA जांच होनी चाहिए. पता चलना चाहिए कि आखिर पैसा कहां से आ रहा है। उसने कहा कि बच्ची को इन्साफ दिलाने की वजाय यह लोग पैसे कमाने में लगे हुए हैं.

This thing has been accepted by itself, the affair just does not stop here, she herself has told that the relationship with Talib is with Huririyat. This whole case should have NIA investigations. You should know where the money is coming from. He said that people are engaged in earning money rather than giving justice to the girl.


सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो क्लिप में 60-70 लाख की राशि दो लोगों को दिए जाने की बात हो रही है, जो इस मामले को बढ़ा चढ़ाकर उठा रहे हैं। ऐसे में यह सीधे तौर पर हवाला का मामला है, जिसकी राशि कहां से और किसके लिए भेजी जा रही है.

In the viral audio clip on social media, there is talk of giving 60-70 lakhs to two people who are raising the issue. In such a case, it is a matter of hawala, whose amount is being sent from and for whom.

यही वजह है कि दुष्कर्म की घटनाएं तो बिहार, आसाम, महाराष्ट्र में इससे भी भयंकर हुई लेकिन उसमे मौलवी और शांति समुदाय का नाम होने से उठाया नहीं गया.ना ही राहुल गाँधी उनके लिए कैंडल मार्च निकाली और ना ही उनके लिए बिकाऊ मीडिया ने ब्रेकिंग न्यूज़ चलायी और ना ही कोई फिल्मबाज़ आगे आया.

This is the reason that the incidents of rape were even worse in Bihar, Assam, Maharashtra, but it has not been raised from the name of the cleric and the peace community. Nor did Rahul Gandhi get a candle march for him nor did the media for him break News started, and no filmmaker came forward.

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खुद PM मोदी ने खोला सर्जिकल स्ट्राइक में ये बड़ा राज, लन्दन में मच गया हंगामा, वाह रे गुजराती दिमाग

सितंबर 2016 भारत के सरहद को पार कर भारतीय सेना के जांबाज़ जवानों ने पाकिस्तान में घुस कर आतंकियों के कैंप को खाक में मिलाया था। भारतीय जवानों के दिलेरी के चर्चे विश्व भर में गूंज उठा था। बुधवार को एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक का डंका ब्रिटन के आंगन में बज गया। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हॉल में ‘भारत की बात, सबके साथ’ कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के समक्ष प्रधानमंत्री मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा, “ये मोदी है, उसी भाषा में जवाब देना जानता है।”

September 2016 Crossing the Indian border, the Indian Army’s junk soldiers entered Pakistan and merged the camp of the terrorists. Discussions of Indian jawans were echoing around the world. On Wednesday, once again, the surgical strike dunker ring in the British courtyard. Prime Minister Modi in front of Indian community in the program ‘Talk about India’ in the Central Hall of Westminster in London, Prime Minister Modi said in response to a question on surgical strikes, “It is Modi, knows how to answer in the same language . ”

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे चेतावनी दी और कहा, “आतंकवाद निर्यात करने वालों को पता होना चाहिए कि अब हिंदुस्तान बदल चुका है।” यह साफ तौर पर पाकिस्तान को दी गयी चेतावनी थी कि अब देश के हालात बदल चुके हैं। देश का नायकत्व सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए समर्थ है। सर्जिकल स्ट्राइक पर लोगों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत का चरित्र अजेय और विजयी रहने का है। किसी के हक़ को छीनना ये भारत का चरित्र नहीं है। लेकिन जब कोई आतंकवाद एक्सपोर्ट करने का उद्योग बनाकर बैठा हो, मेरे देश के निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया जाता हो, युद्ध लड़ने की ताक़त नहीं हो और पीठ पर वार करने के प्रयास होते हों तो ये मोदी है, उसी भाषा में जवाब देना जानता है।”

Indian Prime Minister Narendra Modi warned him without calling Pakistan and said, “Those exporters of terrorism should know that Hindustan has changed now.” This was clearly the warning given to Pakistan that now the situation of the country has changed. Are there. The country’s heroism is capable of making right decisions at the right time. In response to a question asked by the people on the surgical strike, Prime Minister Modi said, “India’s character is invincible and victorious. It is not India’s character to snatch someone’s right. But when there is an industry of exporting terrorism, innocent innocent people of my country are killed, do not have the strength to fight, and if there are attempts to strike back, then this is Modi, the answer in the same language Knows to give. ”

मोदी ने अपने भारतीय सेना के जवानों की प्रशंसा करते हुए कहा ” टैंट में सोए हुए हमारे जवानों को रात को कुछ बुजदिल आकर मौत के घाट उतार दें आप में से कोई चाहेगा मैं चुप रहूं? क्या उनको ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए? इसलिए सर्जिकल स्ट्राइक किया गया। मुझे अपनी सेना पर गर्व है, जवानों पर गर्व है। जो योजना बनीं थी उसको शत प्रतिशत कार्यरत किया और सूर्योदय होने से पहले वापस लौटकर आ गए।”

Modi praised the soldiers of his Indian Army and said, “Our soldiers sleeping in the tent come to the night with some boastfulness. Any of you would want to keep quiet? Should they give the answer to brick or not to stone? That’s why surgical strikes were done. I am proud of my army, proud of the soldiers. Hundred percent of the plans that were made were brought back and came back before sunrise.

प्रधान मंत्री मोदी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सर्जिकल स्ट्राइक की खबर भारत के नागरिक या दुनिया को पता चलने से पूर्व ही पाकिस्तान को बता दिया गया था ताकि वे लाशों को हटा सकें और यह भारत की नेक दिली थी कि उन्होंने सबसे पहले पाकिस्तान को इस बारे में बताना यॊग्य समझा। पाकिस्तान इस बात से मुकरता आया है कि भारत ने उस पर कोई सर्जिकल स्ट्राईक किया था। भारत में भी कुछ लोग भारतीय जवानों द्वारा की गयी इस दिलेरी के कार्य पर सवाल उठाकर साक्ष मांग रहे थे। ऐसे लोगों को सही सही जवाब देते हुए ब्रिटन के आंगन से मोदी जी ने अपना जलवा दिखा दिया है। अब डर डर के जीने के दिन गये हैं, क्यों कि यह मोदी सरकार है। पत्थर का जवाब गोलियों से देना वे जानते हैं।

Prime Minister Modi also highlighted that the news of the surgical strike was informed before the citizen of India or the world before the world was informed so that they could be able to remove the corpses and it was good for India that they were the first to declare Pakistan It’s worth explaining about this. Pakistan has come to the point that India had any surgical strikes on it. Even in India, some people were demanding the testimony by questioning the work of this demonstration by the Indian soldiers. With the correct answer to such people, Modi ji has shown his ignorance in the British courtyard. Now the fear has gone on the day of fear, because it is the Modi government. They know the answer to the stones by bullets.

आपकी जानकारी के लिए बतादें कि चोगम (कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ़ गवर्नमेंट मीटिंग) सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए स्वयं ब्रिटन के युवराजा प्रिंस चार्ल्स ने सिर्फ मोदी जी को व्यक्तिगत निमंत्रण दिया था, इतना ही नहीं महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने स्वयं व्यक्तिगत चिट्ठी लिख कर मोदी जी को सम्मेलन में आमंत्रित किया था। कितनी गर्व की बात है हम भारतीयों के लिए कि विश्व सम्मान की नज़रिये से देखता है मोदी जी को। भारत का सम्मान विश्व पटल पल बढ़ता ही जा रहा है। यह सब मोदी के प्रयासों के काराण ही हुआ है।

For your information, please tell us that Prince Charles himself had personally invited Modi to participate in the Chogam (Commonwealth Heads of Government Meeting) conference, and not only did Queen Elizabeth II write personally Was invited to the conference. How proud it is for the Indians that we see the world with respect to the respect of Mr. Modi The honor of India is going to increase the momentum of the world. All this has happened only because of Modi’s efforts.

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मक्का मस्जिद के केस में आया नया मोड़ रविन्द्र रेडी ने किया ये बडा कारनामा जिसे देख चीफ जस्टिस समेत जनता के उड़े होश

नई दिल्ली : मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस का फैसला सुनने के बाद स्पेशल एनआई जज रविंद्र रेड्डी के इस्तीफे को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. गुरुवार (19 अप्रैल) को दोनों कोर्ट ने जज रेड्डी के इस्तीफे को खारिज करते हुए तुरंत काम कर लौटने को कहा है. पीटीआई के मुताबिक रेड्डी ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट का फैसला सुनाने के बाद जज रेड्डी ने अपने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला दिया था और कहा था कि इस्तीफे का फैसले से कोई लेना-देना नहीं है. जज रेड्डी के इस्तीफे के बाद एक अधिकारी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा था कि वह काफी समय से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे.

New Delhi: After hearing the decision of the Mecca Masjid Blast case, the special NI judge Ravindra Reddy’s resignation has been rejected by Andhra Pradesh and Telangana High Court. On Thursday (April 19th), both the courts asked the Judge Reddy to return to work immediately after rejecting the resignation. According to PTI, after hearing the decision of the Mecca Masjid Blast, Judge Reddy had cited personal reasons for his resignation and had said that there was nothing to do with the decision of resignation. After the resignation of Judge Reddy, an official said while referring to the media that he was contemplating resigning for a long time

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को खत लिखकर दिया था इस्‍तीफा
रेड्डी, चौथे एडीशनल मेट्रोपॉलिटन सेशन जज थे. उन्‍होंने मेट्रोपोलिटन सेशंस जज और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को खत लिखकर इस्‍तीफा दिया. उन्‍होंने इस्‍तीफा स्‍वीकार किए जाने तक 15 दिनों के तत्‍काल अवकाश की अर्जी भी दी थी. वह 2014 से मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस की सुनवाई कर रहे थे. हैदराबाद में चौथे एडीशनल मेट्रोपोलिटन सेशंस कोर्ट को एनआईए केसों को देखने के लिए अधिकृत किया गया था.

High Court Chief Justice had written down the letter
Reddy was the fourth Additional Metropolitan session judge. He resigned by writing a letter to the Metropolitan Sessions Judge and the High Court Chief Justice. He had also applied for a 15-day immediate leave until he accepted the resignation. He was hearing the Mecca Masjid blast case since 2014. Fourth Additional Metropolitan Sessions Court in Hyderabad was authorized to look into NIA cases.


The resignation of NIA special court judge Ravinder Reddy, who delivered verdict in #MeccaMasjidBlast case, has been rejected by High Court of Andhra Pradesh and Telangana. He has been asked to attend to his duties immediately: Sources pic.twitter.com/JQWLdLcpJh

— ANI (@ANI) April 19, 2018

पांच आरोपियों को कोर्ट ने किया था बरी
एनआईए की एक मेट्रोपोलिटन अदालत के फैसले के बाद असीमानंद के वकील जे. पी. शर्मा ने कहा था, ‘अभियोजन मुकदमे का सामना करने वाले पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा है. इसलिए अदालत ने उन्हें बरी कर दिया.’ शर्मा ने कहा था, ‘बरी हुए आरोपियों में देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नब कुमार सरकार, भरत मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी शामिल हैं.’

Five accused were acquitted by court
After the decision of a Metropolitan court of NIA, Aseemanand’s lawyer J. P. Sharma had said, “The prosecution has failed to prove the charge against the five accused who face the trial. So the court acquitted him. ‘ Sharma had said, “The acquittals of the accused include Devendra Gupta, Lokesh Sharma, Swami Aseemanand alias Nab Kumar Sarkar, Bharat Mohanlal Rateswar alias Bharat Bhai and Rajendra Chaudhary.”

क्या है मक्का मस्जिद केस
मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के दौरान एक बड़ा विस्फोट हुआ था जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 अन्य जख्मी हो गए थे.

What is maize mosque case
On May 18, 2007 in Mecca Masjid, a major explosion took place during Jumu prayers, in which nine people died and 58 others were injured.

यह भी देखे
https://youtu.be/o9LQnPMci4I

https://youtu.be/WE3MmmBzG4k

source political report