कोरोना वायरस: बेंगलुरु में होने वाली RSS की प्रतिनिधिसभा की बैठक रद्द

देशभर में फैल रहे कोरोना वायरस (Coronavirus) को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने रविवार से बेंगलुरू में शुरू होने वाली तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक रद्द कर दी है. इस बात की जानकारी खुद सह सर कार्यवाह भैया जी जोशी ने दी.

In view of Coronavirus spreading across the country, the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) has canceled the three-day meeting of the House of Representatives which started in Bengaluru from Sunday. Bhaiya Ji Joshi himself gave information about this matter.

भैया जी जोशी के मुताबिक अभी देशभर में कोरोना का प्रकोप है. प्रशासनिक अनुरोध के अनुसार अभी सभी को इसकी रोकथाम में लगना है, लिहाजा प्रतिनिधि सभा की बैठक फिलहाल रद्द की जाती है. उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से आह्वान किया है कि बीमारी की रोकथाम के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करें और जागरूकता लाएं.

According to Bhaiyaji joshi, there is an outbreak of corona across the country right now. According to the administrative request, now everyone has to put a stop to it, so the meeting of the House of Representatives is canceled at present. He has called upon all volunteers to cooperate with the administration and bring awareness for the prevention of disease.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक रविवार को बेंगलुरू में तय थी. प्रतिनिधि सभा आरएसएस की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है.

Significantly, the three-day annual meeting of the All India Representative Assembly of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) was scheduled on Sunday in Bengaluru. The House of Representatives is the highest decision making body of the RSS.

आरएसएस और इसके आनुषंगिक संगठनों के 1,500 निर्वाचित प्रतिनिधियों के इस बैठक में भाग लेने की उम्मीद थी. माना जा रहा था कि आरएसएस बैठक के दौरान अपने 15 लाख स्वयंसेवकों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय करने के बारे में कोई फैसला करेगा.

1,500 elected representatives of the RSS and its allied organizations were expected to attend this meeting. During the meeting, it was believed that the RSS would decide to activate its 15 lakh volunteers to bring positive changes in the society.

इस बैठक में संघ आगामी एक साल के कामकाज की रूपरेखा तय करती है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्य्क्ष जे पी नड्डा और संगठन महामंत्री बी एल संतोष को भी इस बैठक में शिरकत करना था.

In this meeting, the Sangh decides the outline of the functioning of the next one year. BJP National President JP Nadda and Organization General Secretary BL Santosh were also to attend this meeting.

अकबरुद्दीन ओवैसी ने पीएम को लेकर की नीचता की सभी हदे पार ,भड़का देश गुस्सा

नई दिल्ली। तेलंगाना विधानसभा चुनाव को लेकर जुबानी जंग छिड़ी हुई है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच वार-पलटवार का सिलसिला जारी तो था ही अब उसमें अकबरुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी टांग अड़ा ही ली है।

असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने रैली को संबोधित करने के दौरान योगी पर तो निशाना साधा ही वहीं पीएम मोदी पर भी जमकर हमला बोला। जिसका वीडियो भी सामने आया है।

बता दें, हैदराबाद के चारमिनार विधानसभा क्षेत्र में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ”चाय वाले, हमें मत छेड़, चाय-चाय चिल्लाते हो, याद रखो इतना बोलूंगा कि कान में से पीक निकलने लगेगा, खून निकलने लगेगा”

योगी पर भी हमला

इसके साथ ही अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा, ”आज एक और आया, वो कैसे-कैसे कपड़े पहनता है, तमाशे जैसा दिखता है। किस्मत से चीफ मिनिस्टर भी बन गया, कह रहा है निजाम की तरह ओवैसी को भगाऊंगा, अरे तू क्या, तेरी हैसियत क्या, तेरी बिसात क्या, तेरे जैसे 56 आए और चले गए, अरे ओवैसी को छोड़ो, उसकी आने वाली 1000 नस्लें भी इस मुल्क में रहेंगी और तुझसे लड़ेंगे। तेरा मुकाबला करेंगे और तेरी मुखालफत करेंगे”।

Akbaruddin Owaisi ने PM MODI पर की ऐसी टिप्पणी, सुनकर आपको भी आएगा गुस्सा

Akbaruddin Owaisi ने PM MODI पर की ऐसी टिप्पणी, सुनकर आपको भी आएगा गुस्सा

Posted by Newsroom Post on Sunday, December 2, 2018

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ और असदुद्दीन ओवैसी के बीच जुबानी जंग चल रही है। तेलंगाना के विकाराबाद के तेंदूर में एक रैली को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यदि बीजेपी सत्ता में आती है तो मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि ओवैसी को तेलंगाना छोड़कर वैसे ही भागना पड़ेगा, जैसे निजाम हैदराबाद छोड़कर भागे थे।

 

कांग्रेस के मंत्री ने ही सिद्धू की साजिश को लेकर किया जबरदस्त खुलासा,अमरिंदर सिंह की खिलाफ बगावत को देख राहुल गाँधी समेत कांग्रेसी खेमे में खलबली

नई दिल्ली : सिद्धू का करतारपुर कॉरिडोर के लिए पाकिस्तान जाना और वहां जा कर मीडिया के सामने राफेल डील का मज़ाक उड़ाने और फिर खालिस्तानियों से हाथ मिलाने फोटो खिचवाने का विवाद अब घमसान का रूप ले रहा है. कांग्रेस आपस में ही भिड़ने लगी है. सिद्धू अपने ही सीएम अमरिंदर सिंह के खिलाफ बयान देने लगे हैं.

सिद्धू की पत्नी ने भी दिखाई बगावत
पहले सिद्धू ने बयान दिया कि वे राहुल गाँधी के कहने पर पाकिस्तान गए थे उसके बाद वे अपने बयान से पलट गए. इसके बाद उन्होंने कहा अमरिन्दर सिंह सिर्फ सेना के कप्तान हैं मेरे असली कप्तान तो राहुल हैं. यही नहीं अब सिद्धू की पत्नी ने भी सीएम अमरिंदर के खिलाफ बागवती सुर दिखाते हुए कहा है कि हम सिर्फ राहुल के सिपाही हैं. इसके बाद कई कांग्रेस मंत्रियों ने सिद्धू से इस्तीफा माँगा, तो वहीँ अब खुद कांग्रेस के मंत्री ने सिद्धू की अलग ही साज़िश को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

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कांग्रेस मंत्री का सिद्धू को लेकर बड़ा खुलासा
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक पंजाब सरकार के खेल मंत्री राणा गुरमीत ने मंत्रिमंडल के सदस्य नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है. राणा ने आरोप लगाया है कि सिद्धू पिछले दो-तीन दिनों से जिस तरह की सीएम अमरिंदर के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि वह पंजाब में तख्तापलट करना चाहते हैं.

पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं
उन्होंने आरोप लगाया कि वह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को कुर्सी से हटाकर खुद इस पद पर बैठना चाहते हैं. यानी की सिद्धू खुद पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इसीलिए आज कल राहुल गाँधी की सबसे ज़्यादा ‘जय जय कार’ कर रहे हैं. यही नहीं इस वक़्त पंजाब कांग्रेस का हर मंत्री सिद्धू के खिलाफ खड़ा हो गया है और उनसे इस्तीफा मांगने लग रहा है.

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अपने ही मुख्यमंत्री की बेइज्जती कर रहे हैं
सिद्धू ने हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना ‘कैप्टन’ बताया था. उनके इस बयान को लेकर अब उन्हीं की पार्टी के मंत्री नाराज दिखाई दे रहे हैं. जहां एक तरफ सिद्धू के इस बयान का पंजाब के कई मंत्री विरोध कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी नवजोत सिंह सिद्धू पर हमला बोला है. स्मृति ईरानी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि पंजाब के मंत्री अपने ही मुख्यमंत्री की बेइज्जती कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इसका जवाब देना चाहिए.

ति ईरानी ने कहा, ‘ये कांग्रेस का मंत्री अपने ही प्रदेश के मुख्यमंत्री का सार्वजनिक अपमान क्यों करता है.. ये जवाब राहुल गांधी को देना होगा. कांग्रेस का एक नेता हिंदुस्तान से ज्यादा पाकिस्तान से प्रेम क्यों करता है. ये जवाब राहुल गांधी को देना होगा. ‘

उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए
इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू के ‘राहुल मेरे कैप्टन हैं’ वाले बयान पर पंजाब सरकार के मंत्री टीआर बाजवा ने कहा था कि ‘अगर सिद्धू कैप्टन साहब (अमरिंदर सिंह) को अपना कैप्टन नहीं मानते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.. राहुल गांधी हमारे भारत के कैप्टन हैं.. लेकिन पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह हैं. सिद्धू साहब एक एक्स्ट्रा ऑडिनरी इंसान हैं.. उनका अभी काफी लंबा भविष्य है.. उन्हें शब्दों का सही तरीके से चयन करना चाहिए.’

मंत्री राणा गुरमीत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सिद्धू कहते हैं कि उन्हें कांग्रेस के कैप्टन ने पाकिस्तान जाने को कहा था, लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि वह पंजाब सरकार के मंत्री हैं. ऐसे में उनके कैप्टन सीएम अमरिंदर सिंह हैं. अमरिंदर सिंह को कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनाया है, वे उन्हीं की रजामंदी से मुख्यमंत्री बने हैं. ऐसे में सिद्धू का अमरिंदर सिंह को कैप्टन नहीं मानना उनकी मंशा को जाहिर करता है. सिद्धू को समझना चाहिए कि वे अभी भी अमरिंदर सिंह की मर्जी के चलते ही मंत्री हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के मना करने के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखने के लिए पाकिस्तान के बुलावे पर वहां गए थे. वहां से लौटने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने उनसे इस बाबत पूछा तो सिद्धू ने कहा था कि वह कांग्रेस के कैप्टन राहुल गांधी की इजाजत पर पाकिस्तान गए थे. अमरिंदर सिंह की ओर से मना किए जाने के सवाल पर सिद्धू ने उन्हें अभिभावक बताते हुए कुछ भी बोलने से मना कर दिया था.

SOURCE DDBHARTI
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G-20 पीएम मोदी की अब तक की बड़ी कूटनीतिक जीत,जो आज तक नहीं हुआ वो पीएम मोदी ने कर दिखाया ,जिसे सुन देशवासी ख़ुशी से झूम उठे

नई दिल्ली : आज मोदी सरकार में भारत तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन गया है. पहले फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठे नंबर की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना तो अब अगले साल तक जापान को पछाड़कर पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. इस प्रगति को अब पूरी दुनिया और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी सराह रहे हैं. तभी तो एक बार फिर G20 सम्मलेन में गए पीएम मोदी और भारत को बड़ी ज़बरदस्त कामयाबी मिली है जो आज तक नहीं हुआ.

अभी G20 सम्मलेन से भारत के लिए बहुत बड़ी खबर आ रही है जिसे सुन हर भारतवासी का सीना गर्व से फूल उठेगा. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। अब भारत 2022 में विश्व के 20 ताकतवर देशों के समूह G-20 की मेजबानी करेगा.

g20

2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं। मोदी सरकार ने 2022 में न्यू इंडिया का नारा भी दिया है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समूह की बैठक की मेजबानी मिलने को एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. जी-20 विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है. ऐसे में भारत में इसका आयोजन होना बहुत ज़्यादा गर्व की बात है. मतलब इन सभी ताक़तवर 20 देशों के राष्ट्रपति भारत आएंगे.

पीएम मोदी ने यहां अर्जेंटीना की राजधानी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में यह घोषणा की. वर्ष 2022 में जी 20 सम्मेलन की मेजबानी इटली को करनी थी. मोदी ने भारत को इसकी मेजबानी मिलने के बाद इसके लिए इटली का शुक्रिया अदा किया. इसके साथ ही उन्होंने जी-20 समूह के नेताओं को 2022 में भारत आने का न्यौता दिया. वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने घोषणा के बाद ट्वीट किया, ‘‘वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं. उस विशेष वर्ष में, भारत जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व का स्वागत करने की आशा करता है. विश्व की सबसे तेजी से उभरती सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में आइए. भारत के समृद्ध इतिहास और विविधता को जानिए और भारत के गर्मजोशी भरे आतिथ्य का अनुभव लीजिए.’’

इससे पहले पीएम मोदी ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रमफोसा के साथ मुलाकात की थी. मोदी ने उन्हें 2019 के गणतंत्र दिवस परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया था. इसे अफ्रीकी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है.

बता दें, आर्थिक और कूटनीतिक मामलों के लिए जी-20 काफी अहम संस्था है. यह विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें भारत, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं.

कांग्रेस सरकार के दस साल में याद दिला दें बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने भारत की अर्थव्यवस्था को खतरनाक बताते हुए FRAGILE FIVE ग्रुप में डाल दिया था. ये बेहद शर्मनाक पल था क्यूंकि इसका मतलब होता है कि भारत ना सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने पडोसी देशों के लिए भी खतरा है.

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अपने बयान से पलटे नवजोत सिंह सिद्धू, बोले- राहुल जी ने मुझे कभी पाकिस्तान जाने को नहीं कहा

नई दिल्ली : नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्तान दौरे का विवाद और फिर वहां खालिस्तानियों से मिलने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. कल ही सिद्धू ने एलान किया था कि उनके असली कप्तान राहुल गाँधी हैं और वे पाकिस्तान दौरे पर उन्ही के कहने पर गए थे साथ ही अमरिंदर सिंह सिर्फ सेना का कप्तान बताया था.

तो वहीँ अब चारों तरफ उनकी आलोचना होने लगी थी यही नहीं खुद कांग्रेस के नेता उनके पीछे हाथ धो के पड़ गए हैं. इस साबके के बीच आज नवजोत सिंह सिद्धू ने बड़ा यू टर्न मार लिया है.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू शनिवार को अपने उस बयान से पलट गए जिसमें उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाने को पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था. अपने बयान से यू-टर्न लेते हुए सिद्धू ने शनिवार को कहा कि राहुल गांधी ने मुझे कभी पाकिस्तान जाने को नहीं कहा.

सिद्धू ने अपने बयान पर सफाई देते हुए ट्वीट किया, ‘तोड़-मरोड़ करने से पहले तथ्य को जान लें. राहुल गांधी जी ने मुझे कभी पाकिस्तान जाने को नहीं कहा. पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के व्यक्तिगत आमंत्रण पर मैं वहां गया था.’

पाकिस्‍तान में करतारपुर कॉरीडोर के शिलान्‍यास कार्यक्रम में शिरकत करके लौटे कांग्रेस नेता और पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पर उन्‍हीं की पार्टी के नेता उनके कपड़े फाड़ने लगे हैं. सिद्धू ने कार्यक्रम से लौटने के बाद कहा था ‘मेरे कैप्‍टन राहुल गांधी हैं, उन्‍हें जहां जरूरत लगी, मुझे भेजा.’ इस पर पंजाब के मंत्री तृप्‍त राजिंदर बाजवा ने सिद्धू से इस्‍तीफा मांगा है.

बाजवा ने शनिवार को कहा ‘अगर राहुल गांधी की बात है तो वह हम सबके कैप्‍टन हैं. पंजाब में हमारे कैप्‍टन अमरिंदर सिंह हैं. अगर सिद्धू साहब के मन में कोई आशंका है कि पंजाब के कैप्‍टन कैप्‍टन अमरिंदर सिंह नहीं हैं तो मेरे ख्‍याल से उनकी नैतिक जिम्‍मेदारी बनती है कि वह कैबिनेट से इस्‍तीफा दे दें. मैं सिद्धू साहब से अपील करना चाहूंगा बाकी मानना ना मानना उनका काम है. सिद्धू साहब आप स्‍पेशल व्‍यक्ति हो, आप पर रब की मेहर है.’

बाजवा ने आगे कहा ‘सिद्धू साहब आपको रब ने एक्‍स्‍ट्रा क्‍वालिटी दी है. मैं आपसे अपील करुंगा, आपके सपने बहुत बड़े हैं. रब करे आपके सपने पूरे हों. लेकिन जिस तरह से आप बिना सोचे-समझे बोले जा रहे हो, मेरा ख्‍याल है यह तेजी आपको कहीं पहुंचने नहीं देगा. अगर मेरी बात का बुरा लगे तो मुझे माफ कर देना. हमारे कैप्‍टन कैप्‍टन अमरिंदर सिंह है. हिंदुस्‍तान में हम सबके कैप्‍टन राहुल गांधी है.’

उन्‍होंने कहा ‘सिद्धू साहब को समझ नहीं आ रहा कि उन्‍हें क्‍या कहना है और क्‍या नहीं कहना है. उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्‍हें पाकिस्‍तान भेजा है लेकिन आज वह उस बात से मुकर गए.’

बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फेंस के दौरान सिद्धू ने कहा था कि उन्हें राहुल गांधी ने ही पाकिस्तान भेजा था. उन्होंने कहा, ‘मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं, उन्होंने ही भेजा है हर जगह.’ सिद्धू ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुझे पाकिस्तान जाने से मना किया था. लेकिन करीब 20 कांग्रेसी नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व के कहने पर मैं पाकिस्तान गया था. पंजाब के सीएम मेरे पिता के समान हैं. मैं उनसे पहले ही बता चुका था कि मैं पाकिस्तान जाऊंगा. मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं और सीएम साहब के कप्तान भी राहुल गांधी हैं.

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मोदी के राज में रुपया मनमोहन के राज से भी कमज़ोर हो चुका

कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी और विपक्ष लगातार प्रधान मंत्री मोदी और उनकी सरकार पर रुपये के गिरते मूल्य के लिए हमला कर रहे थे| प्रधान मंत्री मोदी की छवि को खराब करने के प्रयास में कांग्रेस इतना नीचे गिर गई कि उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी गिरते मूल्य के मुद्दे को बार बार उठाया।

लेकिन अब जब रुपया मजबूत हो रहा है और निरंतर पुनरुत्थान दिखा रहा है तो कांग्रेस और विपक्षी अपने घरों में छिप कर बैठ गये है और उनके पास कहने के लिए एक शब्द भी नहीं है। हाँ!! बिलकुल सही रुपये का मूल्य अब सकरात्मक दिशा की और बड़ रहा है। यह तीन महीने में पहली बार 70 के नीचे पहुंच गया है|

शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे की तेजी के साथ 70 के नीचे पहुंचा गया|गुरुवार को एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 51 पैसे की शानदार बढ़त के साथ 70.11 के स्तर पर खुला है जो 28 अगस्त के बाद सबसे ज्यादा उच्चतम स्तर है| वहीं, कारोबार के शुरुआती आधे घंटे में ही रुपया 70 प्रति डॉलर के स्तर के नीचे आ गया. रुपया फिलहाल 69.98 प्रति डॉलर के स्तर पर है.
डॉलर के मूल्य में गिरावट और रुपया के मूल्य में वृद्धि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की टिप्पणी कि “केंद्रीय बैंक की बेंचमार्क ब्याज दर तटस्थ स्तर के करीब होने की संभावना है” के बाद आया।

रुपया को मजबूत करने में मजबूत विदेशी फंड प्रवाह ने भी योगदान दिया गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस महीने भारतीय बाजार में अक्टूबर में 38,906 करोड़ रुपये की निकासी की तुलना में 9,080 करोड़ रुपये डाले हैं जिससे घरेलू मुद्रा में मजबूती आई है। भारतीय बाजार में धन की मुद्रास्फीति रुपये के मूल्य में वृद्धि का कारण बनती है क्योंकि देश में प्रवेश करने के बाद विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू मुद्रा की मांग अधिक की जाती है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण भी रुपये के मूल्य में पुनरुत्थान करने में मदद मिली है। भारत कच्चे तेल की जरूरतों का 81 प्रतिशत आयात करता है और अमेरिका और चीन के बाद तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है। चूंकि कच्चे तेल की कीमतों का डॉलर में भुगतान किया जाता है, इसलिए कच्चे तेल के कम दर के दौरान रूपये को डॉलर में कम मात्रा में परिवर्तित करना पड़ता है जिससे अमेरिकी मुद्रा कमजोर होती है। घरेलू इक्विटी बाजार में मार्ट रिकवरी ने भी रुपये को मजबूत करने में योगदान दिया है|

यहां तक कि मनी मार्केट में भी, बुधवार को तेल की कीमतों में निरंतर गिरावट और केंद्रीय बैंक से समर्थन खरीदने के कारण सरकारी बॉन्ड तेजी से बढ़े है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से रुपया को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के चालू और राजकोषीय घाटे पर हो रही चिंता भी कम होगी|

इस महीने अब तक रुपये के मूल्य में 5 फीसदी से ज्यादा की बड़त हुई है। बुधवार को घरेलू मुद्रा 17 पैसे बढ़कर 70.62 हो गई थी।
कांग्रेस और विपक्ष बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि रुपया का मूल्य इतने सारे कारकों पर निर्भर करता है लेकिन फिर भी वे मोदी सरकार पर हमला करते हैं और उन्हें मूल्य में गिरावट के लिए दोषी ठहराते हैं

source:politcal report

मोदी सरकार ने दी देश की जनता को सबसे बड़ी खुशखबरी जिसे देख जनता खुसी से झूम उठे लोग

नई दिल्ली : मोदी सरकार ने देश की जनता को महंगाई से भारी भरकम राहत का तोहफा दिया है. काफी वक़्त से रसोई गैस की कीमतों को लेकर लोग परेशान थे ऐसे में अब इस बड़ी राहत से लोग भी खुश हुए हैं लेकिन विपक्षी पार्टी अभी भी बेचैन हो रहे हैं. मोदी सरकार ने साल के अंतिम महीने में देश भर में उन करोड़ों लोगों को गिफ्ट दिया है जो एलपीजी सिलेंडर का प्रयोग करते हैं.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक रसोई गैस (एलपीजी) की बढ़ती कीमतों से आम आदमी को बड़ी राहत मिली है. सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलेंडर 6.52 रुपये सस्ता हुआ है जबकि बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का बाजार मूल्य 133 रुपये कम हुआ है.

बता दें कि LPG उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य पर रसोई गैस सिलेंडर खरीदना होता है. हालांकि, सरकार साल भर में 14.2 किलो वाले 12 सिलेंडरों पर सीधे ग्राहकों के बैंक खाते में सब्सिडी डालती है.

देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने कहा है कि दिल्ली में 14.2 किलो के सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत 507.42 रुपये से घटकर 500.90 रुपये रह गई. नई कीमत शुक्रवार मध्यरात्रि से प्रभावी हो गईं हैं.

इंडियन ऑयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती से बिना सब्सिडी वाली रसोई गैस के दाम में 133 रुपये कम किए गए हैं. दिल्ली में अब इसकी (14.2 किलो) कीमत 809.50 रुपये प्रति सिलेंडर होगी. बता दें कि सभी ग्राहकों को बाजार कीमत पर ही रसोई गैस सिलेंडर खरीदना होता है. हालांकि, सरकार सालभर में 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी देती है, जिसमें सब्सिडी की राशि सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में डाल दी जाती है.

लपीजी की औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दर और विदेशी मुद्रा विनिमय दर के अनुरूप एलपीजी सिलेंडर के दाम तय होते हैं जिसके आधार पर सब्सिडी राशि में हर महीने बदलाव होता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं तो सरकार अधिक सब्सिडी देती है और जब कीमतें कम होती है तो सब्सिडी में कटौती की जाती है.

टैक्स नियमों के अनुसार, रसोई गैस पर जीएसटी की गणना ईंधन के बाजार मूल्य पर ही तय की जाती है. ऐसे में सरकार ईंधन की कीमत के एक हिस्से को तो सब्सिडी के तौर पर दे सकती है लेकिन कर का भुगतान बाजार दर पर ही करना होता है.

इसी के चलते बाजार मूल्य यानी बिना सब्सिडी वाले एलपीजी के दाम में गिरावट से सब्सिडी वाली रसोई गैस पर कर गणना का प्रभाव कम होने से इसके दाम में कटौती हुई है. कंपनी ने कहा कि दिल्ली में दिसंबर में 2018 में बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर का दाम 942.50 रुपये से कम होकर 809.50 रुपये रह गया. इसमें 133 रुपये की कमी आई है.

गौरतलब है कि पिछले छह सप्ताह में पेट्रोल के दाम में 9.6 रुपये तथा डीजल में 7.56 रुपये लीटर की कटौती हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में नरमी के साथ ईंधन के दाम कम हुए हैं.
source dd bhartinews

बंगाल और ओडिसा दोनों पर तुगन खान ने हमला किया था, पर बंगाल इस्लामिक है जबकि ओड़िया हिन्दू, ऐसा क्यों ?

इतिहास जो हमें जानना चाहिए ….बंगाल (बांग्लादेश सहित) आज इस्लामी हो गया, वहीँ ओडिसा आज भी 96% हिन्दू है …. कैसे ? जबकि दोनों ही इलाकों पर इस्लामिक हमलावरों ने सन 1000 के बाद एक साथ हमला किया था, फिर ऐसा क्या हुआ की बंगाली बोलने वाले लोग आज अधिकतर इस्लामिक है, मुसिलम है, पर ओड़िया बोलने वाले लोग हिन्दू है, कभी आपने इसका कारण सोचा है ?

History which we should know …. Bengal (including Bangladesh) today became Islamic, yet Odisha is still 96% Hindu … How? Whereas Islamic attackers attacked both the areas together after 1000 AD, then what happened that the people who spoke Bengali today are mostly Islamic, muslim, but the people who speak Oriya are Hindus, have you ever thought of the reason?

सन 1248 ( 13वी शताब्दी ) इस्लामिक हमलावर तुगन खान ने उडीसा पर हमला किया । उस समय वहां पर राजा नरसिम्हादेवा का राज था । राजा नरसिम्हादेव ने फ़ैसला किया कि इस्लामी हमलावर को इसका जवाब छल से दिया जाना चाहिये । उन्होने तुगन खान को ये संदेश दिया कि वो भी बंगाल के राजा लक्ष्मणसेन की तरह समर्पण करना चाहते हैं, जिसने बिना युद्ध लडे तुगन खान के सामने हथियार डाल दिये थे।

1248 (13th Century) Islamic invader Tuhin Khan attacked Orissa. At that time there was the rule of King Narasimaveda. King Narasimha Deo decided that the answer to the Islamic attacker should be given in a trick. He gave this message to Tujan Khan that he too wanted to surrender like King Laxmansena of Bengal, who had put arms in front of a warrior, Tuhin Khan.

तुगन खान ने बात मान ली और कहा कि वो अपना समर्पण “पूरी” शहर में करे, इस्लाम कबूल करे और जगन्नाथ मंदिर को मस्जिद में बदल दे । राजा नरसिम्हादेव राज़ी हो गए और इस्लामिक लश्कर “पूरी” शहर की तरफ़ बढने लगा, इस बात से अन्जान कि ये एक जाल।है। राजा नरसिम्हादेव के हिंदू सैनिक शहर के सारे चौराहों , गली के नुक्कड़ ओर घरों में छुप गये।

Tujan Khan accepted the offer and said that he should dedicate his dedication to the “whole” city, accept Islam and convert the Jagannath temple into a mosque. King Narasimadhe agreed and the Islamic militant started moving towards the “whole” city, unaware that it is a trap. The Hindu soldiers of King Narasimhadev hid all the intersections of the city, the streets and the houses in the streets.

जब तुगन खान के इस्लामिक लश्कर ने जगन्नाथ मंदिर के सामने पहुंचे, उसी समय मंदिर की घंटिया बजने लगी और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष करते हिंदू सैनिको ने इस्लामिक लश्कर पर हमला कर दिया। दिनभर युद्ध चला, ज्यादातर इस्लामिक लश्कर को कब्जे में कर लिया गया और कुछ भाग गये । इस तरह की युद्धनीति का उपयोग पहले कभी नहीं हुआ था । किसी हिंदू राजा द्वारा जेहाद का जवाब धर्मयुद्ध के द्वारा दिया गया हो।

When the Islamic LeT of Tujan Khan reached the Jagannath temple, at that time the temple bells started and the Hindu soldiers praising ‘Jai Jagannath’ attacked the Islamic LeT. The war was going on throughout the day, mostly the Islamic LeT was captured and some fled. This kind of battle was never used before. Jihad has been answered by a Hindu king by the Crusades.

राजा नरसिम्हादेवा ने इस विजय के उपलक्ष्य में ” कोनार्क” मंदिर का निर्माण किया । गूगल पर कम से कम ज़रूर देखिये इस शानदार मंदिर को । अगर लड़ोगे तो जीतने की गुंजाइश तो होगी ही, मुर्दे लड़ नहीं सकते इसीलिए वो धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करते हैं । और दुनिया को यह दिखाते है कि धर्म के अनुयायी है. और उसका पालन करते है।

King Narasamideva constructed the “Konark” temple in honor of this victory. At least look at this magnificent temple on Google. If you fight, then there will be room for victory. They can not fight, hence they pretend to secularism. And show the world that there is a follower of religion. And follow him.

बंगाली भाषा जहाँ थी वहां का राजा लक्ष्मणसेन ने बिना लड़े हथियार डाल दिया, नतीजा देखिये, आज अधिकतर बंगाली बोलने वाले लोग मुसलमान है, बंगाल सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि बांग्लादेश भी बंगाल ही था, आज अधिकतर बंगाली लोग मुसलमान है, बंगाल इस्लामिक है, वहीँ ओड़िया बोलने वाले लोग 96% हिन्दू है।

Where the Bengali language was, the King Laxmansen put the weapon without any war, see the result, today most Bengali speakers are Muslims, Bengal is not only West Bengal but Bangladesh was also Bengal, today most Bengali people are Muslims, Bengal is Islamic , Those who speak Oriya are 96% Hindu.

source : dainik-bharat.org

जब योगी आदित्यनाथ के सामने बच्ची हिंदी भी नहीं पढ़ पाई, फिर CM ने जो किया उसे देख आपकी आँखे फटी की फटी रहा जाएगी

नई दिल्ली। देश की शिक्षा का हाल कितना बुरा है ये आमतौर पर हम सभी जानते हैं। अक्सर इससे जुड़ा कोई ना कोई उदाहरण हमारे सामने आता ही रहता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अचानक जब एक स्कूल में निरीक्षण करने पहुंच गए तो चौंकाने वाला हाल सामने आ गया। यूपी के सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि यहां पढ़ने वाले छात्र हिंदी तक ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं। हालांकि ये भी सच है कि हर साल स्कूली शिक्षा के लिए बड़ा बजट जारी होता है, लेकिन वो कहां जाता है क्या होता है, ये भी जारी करने वाले ही बता सकते हैं।बता दें कि योगी श्रावस्ती जिले के पांडेपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय गए थे। वहां उन्होंने देखा कि कक्षा तीसरी की छात्रा हिंदी का एक पाठ भी नहीं पढ़ पाई। उन्होंने किताब पढ़ने को कहा तो छात्रा रटी रटाई प्रार्थना सुनाने लगी लेकिन किताब नहीं पढ़ पाई। योगी ने शिक्षिका से पूछा कि कितने बच्चे पढ़ पाते हैं। इस पर शिक्षिका ने कहा कि बच्चे कमजोर हैं तो नाराज योगी ने शिक्षिका को फटकार लगा दी।

नई दिल्ली। देश की शिक्षा का हाल कितना बुरा है ये आमतौर पर हम सभी जानते हैं। अक्सर इससे जुड़ा कोई ना कोई उदाहरण हमारे सामने आता ही रहता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अचानक जब एक स्कूल में निरीक्षण करने पहुंच गए तो चौंकाने वाला हाल सामने आ गया। यूपी के सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि यहां पढ़ने वाले छात्र हिंदी तक ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं। हालांकि ये भी सच है कि हर साल स्कूली शिक्षा के लिए बड़ा बजट जारी होता है, लेकिन वो कहां जाता है क्या होता है, ये भी जारी करने वाले ही बता सकते हैं।बता दें कि योगी श्रावस्ती जिले के पांडेपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय गए थे। वहां उन्होंने देखा कि कक्षा तीसरी की छात्रा हिंदी का एक पाठ भी नहीं पढ़ पाई। उन्होंने किताब पढ़ने को कहा तो छात्रा रटी रटाई प्रार्थना सुनाने लगी लेकिन किताब नहीं पढ़ पाई। योगी ने शिक्षिका से पूछा कि कितने बच्चे पढ़ पाते हैं। इस पर शिक्षिका ने कहा कि बच्चे कमजोर हैं तो नाराज योगी ने शिक्षिका को फटकार लगा दी।

शिक्षा व्यवस्था के बाद योगी ने स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता भी जांची। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन शिकायतों के समाधान में देरी पर नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि जल्द से जल्द समाधान करें नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें। गुरुवार को योगी ने बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों का दौरा किया ।

जो किया उसे देख आपकी आँखे फटी की फटी रहा जाएगी

नई दिल्ली। देश की शिक्षा का हाल कितना बुरा है ये आमतौर पर हम सभी जानते हैं। अक्सर इससे जुड़ा कोई ना कोई उदाहरण हमारे सामने आता ही रहता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अचानक जब एक स्कूल में निरीक्षण करने पहुंच गए तो चौंकाने वाला हाल सामने आ गया। यूपी के सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि यहां पढ़ने वाले छात्र हिंदी तक ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं। हालांकि ये भी सच है कि हर साल स्कूली शिक्षा के लिए बड़ा बजट जारी होता है, लेकिन वो कहां जाता है क्या होता है, ये भी जारी करने वाले ही बता सकते हैं।बता दें कि योगी श्रावस्ती जिले के पांडेपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय गए थे। वहां उन्होंने देखा कि कक्षा तीसरी की छात्रा हिंदी का एक पाठ भी नहीं पढ़ पाई। उन्होंने किताब पढ़ने को कहा तो छात्रा रटी रटाई प्रार्थना सुनाने लगी लेकिन किताब नहीं पढ़ पाई। योगी ने शिक्षिका से पूछा कि कितने बच्चे पढ़ पाते हैं। इस पर शिक्षिका ने कहा कि बच्चे कमजोर हैं तो नाराज योगी ने शिक्षिका को फटकार लगा दी।

नई दिल्ली। देश की शिक्षा का हाल कितना बुरा है ये आमतौर पर हम सभी जानते हैं। अक्सर इससे जुड़ा कोई ना कोई उदाहरण हमारे सामने आता ही रहता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अचानक जब एक स्कूल में निरीक्षण करने पहुंच गए तो चौंकाने वाला हाल सामने आ गया। यूपी के सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि यहां पढ़ने वाले छात्र हिंदी तक ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं। हालांकि ये भी सच है कि हर साल स्कूली शिक्षा के लिए बड़ा बजट जारी होता है, लेकिन वो कहां जाता है क्या होता है, ये भी जारी करने वाले ही बता सकते हैं।बता दें कि योगी श्रावस्ती जिले के पांडेपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय गए थे। वहां उन्होंने देखा कि कक्षा तीसरी की छात्रा हिंदी का एक पाठ भी नहीं पढ़ पाई। उन्होंने किताब पढ़ने को कहा तो छात्रा रटी रटाई प्रार्थना सुनाने लगी लेकिन किताब नहीं पढ़ पाई। योगी ने शिक्षिका से पूछा कि कितने बच्चे पढ़ पाते हैं। इस पर शिक्षिका ने कहा कि बच्चे कमजोर हैं तो नाराज योगी ने शिक्षिका को फटकार लगा दी।

शिक्षा व्यवस्था के बाद योगी ने स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता भी जांची। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन शिकायतों के समाधान में देरी पर नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि जल्द से जल्द समाधान करें नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें। गुरुवार को योगी ने बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों का दौरा किया ।