यूपी STFफाॅर्स के हाथ बड़ी कामयाबी ,कई वर्षों से जिसकी तलाश थी ,उसकी जाँच मिला देख अधिकारीयों के उड़े होश

नई दिल्ली : प्रदेश में योगी राज में अपराधियों, गैंगस्टर को चुन चुन के पकड़ा जा रहा है. पूरी तरह से यूपी को अपराध मुक्त करने के लिए स्पेशल टास्क फाॅर्स के ऑपरेशन तेज़ी से चल रहे हैं. पिछली सरकार में तुष्टिकरण की राजनीति के चलते इन्हे हमेशा बचाया गया.

यूपी STF के हाथ बड़ी कामयाबी लगी
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक यूपी एसटीएफ के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. एसटीएफ ने मेरठ से एक लाख के इनामी मोहम्मद अकरम को देर रात मुजफ्फरनगर के खतौली इलाके से गिरफ्तार किया है. उसने पुलिस से हाथापाई की। इस दौरान एसटीएफ के तीन सिपाही चोटिल हो गए। अकरम के खिलाफ करीब 30 मुकदमें दर्ज हैं. STF ने गोली के बदले गोली चलाने की बात कही लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया. बता दें काफी सालों से इसकी पुलिस को तलाश थी.

सटीएफ को इस कुख्यात बदमाश के कब्जे से ढेर सारा असलाह और कारतूस का जखीरा बरामद किया हैं. बड़ी साज़िश को अंजाम देने की साज़िश रच रहा था. डेढ़ साल पहले वह मुजफ्फरनगर से पुलिस की हिरासत से फरार हो गया था और झारखंड की राजधानी रांची में जाकर छिप गया था.

अकरम मुजफ्फरनगर नगर के खालापार मोहल्ले का रहने वाला है और बेहद शातिर बदमाश है. अकरम पर लूट, डकैती, हत्या आदि के 35 से ज्यादा मुकदमे चल रहे हैं. एसटीएफ से मिली जानकारी के मुताबिक मुजफ्फरनगर के खालापार निवासी अकरम मुकीम काला गैंग से जुड़ा हुआ है. जिसके खिलाफ सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ में गंभीर धाराओं में केस दर्ज है.

वामपंथियों के दबाव के चलते नहीं किया एनकाउंटर
विपक्षी, मानवाधिकारी गैंग और कोर्ट के जजों के चक्कर में STF को मज़बूरन इस अपराधी को गिरफ्तार करना पड़ा. दरअसल एक लाख के इनामी बदमाश अकरम ने पुलिस व एसटीएफ पर फायर किया तो एसटीएफ ने भी पुलिस से जवाबी गोली चलाने को कहा, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। खतौली पुलिस को डर था कि कहीं खतौली में भी बवाल न हो जाए, इसलिए उसे गोली मारे बिना ही गिरफ्तार किया. हालाँकि इस मुठभेड़ में तीन STF जवान घायल हो गए.

लेकिन साफ़ देखा जा सकता है कि कुछ वामपंथियों की साज़िश और दबाव के चलते अब पुलिस भी एनकाउंटर करने में कतरा रही है हिचकिचा रही है. चाहे बदमाश कितना फायरिंग करता रहे लेकिन पुलिस उसे सिर्फ गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है. ये वामपंथी मानवाधिकारियों के पेट में तभी दर्द होता है जब अपराधी मरता है, अगर कोई पुलिसवाला शहीद हो जाए तब ये सारे गायब हो जाते हैं.

गोकशी से रखा अपराध की दुनिया में कदम गिरफ्तार किए गए अकरम ने बताया कि उसने 2004 में खालापार में गोकशी से अपराध की शुरुआत की. अकरम ने बताया कि वह रांची के कारगिल चौक पर डेढ़ वर्ष से मोहम्मद उमर नाम से चाय की दुकान चला रहा था.

अपराध की दुनिया में आने से पहले अकरम ने डेढ़ दशक पूर्व इसने एक हिन्दू युवती से प्रेम विवाह किया था, जिसका परिवार और ससुराल वालों ने विरोध किया था। शादी के बाद उसकी पत्नी ने नाम बदलकर मुस्कान रख लिया था.

source ddbharti

url:www.bharti.in

CM योगी ने ओवैसी के मुंह पर मारा करारा तमाचा के ऐसा जबरदस्त जवाब जिसे सुन वामपंथियों में खलबली

नई दिल्ली : सीएम योगी जो बोलते हैं वो बेबाकी से बोलते हैं यही वजह है कि इस वक़्त कई राज्यों में विरोधियों की जबर धुलाई के लिए उन्हें रैली करने के लिए बुलाया जा रहा है. इसी तरह आज सीएम योगी ने ओवैसी के गढ़ में घुस कर रैली करी और वो मुहतोड़ जवाब दिया है जिसे सुन कई कट्टरपंथियों में जलन मची हुई है.

अभी मिल रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर स्टार प्रचारक बनकर हैदराबाद पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी पर जबरदस्त हमला बोल दिया है.

हैदराबाद के निजाम की तरह भगाएंगे
रैली में जनता को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आ गई तो ओवैसी यहां से हैदराबाद के निजाम की तरह भागेंगे.

यूपी सीएम योगी ने तेलंगाना के तांडूर की रैली में कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि तेलंगाना में भाजपा की ही सरकार बनेगी। मैं सभी को आश्वासन दिलाता हूं कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार आ गई तो असदुद्दीन ओवैसी तेलंगाना से उसी तरह भागेंगे, जैसे हैदराबाद के निजाम को भागने पर मजबूर होना पड़ा।

इसके साथ ही उन्होंने राज्य की पीडीपी सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, यह सरकार किसानों और पिछड़ों की हितकारी नहीं है। उन्होंने जनता से भाजपा के लिए आशिर्वाद मांगते हुए कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में विकास हुआ है, वह भी बिना भेदभाव के.

इससे पहले राजस्थान में भी सीएम योगी ने बेबाकी से रैली करते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार आतंकियों को बिरयानी खिलाया करती थी और हम गोली खिलाते हैं. यही वजह है कि वामपंथी मानवाधिकार सीएम योगी के पीछे हाथ धो के पड़े हुए हैं और यूपी के हर एनकाउंटर को हिन्दू मुस्लिम चश्मे से देखने में लगे हुए हैं.

साथ ही सीएम योगी के हाल में हनुमान और दलित वाले बयान पर काफी हंगामा मचा. विपक्षियों को तुरंत मौका मिल गया और उन्होंने सीएम योगी पर आरोप लगा दिया कि उन्होंने भगवान् हनुमान को दलित बता दिया है. जबकि अगर उनकी रैली की वीडियो पूरी सुनी जाय तो पता चलेगा उन्होंने कहा था “हनुमान जी भी सब को एकसाथ लेकर चला करते थे , चाहे दलित हो चाहे पिछड़ा” बस इस बात को तोड़ मरोड़ कर विरोधियों और भीम गैंग ने हनुमान दलित कहकर चिल्लाना शुरू कर दिया.

गौरतलब है कि सभी पार्टियां वोटरों को लुभाने के लिए जोर-शोर से जुटी है। इसके लिए चुनाव प्रचार के दौरान एक दूसरे पर जमकर हमला बोला जा रहा है। 7 दिसंबर को तेलंगाना की 119 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होना है। वोटिंग के नतीजे 11 दिसंबर को आ जाएंगे

SOURCE DD BHARTI

URL:http://www.ddbharti.in

प्राइवेट स्कूलों पर CM योगी का कानूनी वार, एक झटके में दिखाई औकात,पेरेंट्स लगे ख़ुशी से झूमने

लखनऊ : देशभर में लोग प्राइवेट अस्पतालों और प्राइवेट स्कूलों की लूट से परेशान हैं. लोगों की शिकायत रही है कि प्राइवेट स्कूल वाले पिछले कई दशकों से लगातार छात्रों के परिजनों के साथ खुली लूट करते आये हैं और सरकारें मूक-दर्शक बनी केवल तमाशा देखती रहीं. मगर अब यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए कमर कस ली है.

Lucknow: People across the country are troubled by the loot of private hospitals and private schools. People have been complaining that private schools have been continuously looting with the kin of students for the last several decades and governments have become mute spectators watching only the tamasha. Now, in UP, Chief Minister Yogi Adityanath has gripped the private schools to crack the arbitrariness.

प्राइवेट स्कूलों की लूट के खिलाफ विधेयक
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा शुल्क में सुधार को लेकर मंगलवार को कई बड़े फैसले लिए. योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वो प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों द्वारा जबरन फीस बढ़ोतरी को किसी भी कीमत पर बर्दाशत करने वाले नहीं हैं. यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बीजेपी प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश में स्कूलों के लिये शुल्क नियंत्रण की नयी व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया.

Bill against private school robbery
Yogi Sarkar of Uttar Pradesh took several major decisions on Tuesday for improvement in the education fee. Yogi Sarkar has made it clear that he is not going to afford forcible fee hikes by private schools in any state at any cost. UP Deputy Chief Minister Dinesh Sharma and BJP spokesman Shrikant Sharma announced a press conference and the new system of duty control for the schools in the state was announced.

इस दौरान उन्होंने बताया कि यूपी सरकार नया विधेयक लेकर आई है, जिसका नाम है उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषक शुल्क निर्धारण विधेयक. इसके तहत शुल्क लेने के नये बिंदु तय किए गए हैं, इससे स्कूल पारदर्शी तरीके से फीस ले सकेंगे और किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी. उन्होंने बताया कि अब से विवरण पुस्तिका शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और सालाना शुल्क ही लिये जा सकेंगे.

During this, he told that the UP government has brought a new bill, which is named as the Uttar Pradesh Self-Purpose Charges Bill. Under this, new points have been fixed, so that the schools will be able to charge fees in a transparent manner and there will be no fear of any kind of disturbance. He said that from now on, the details of the booklet, entrance fee, examination fees and annual fees can be made.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा शुल्क को लेकर किए गए कैबिनेट के ये फैसले और ये सारी व्यवस्था साल 2018-19 में लागू होगी. लेकिन फीस व्यवस्था का आधार 2015-16 को ही माना जाएगा.

During the press conference, he said that these decisions made by the cabinet on education fees and these arrangements will be applicable in the year 2018-19. But the fee system will be considered as base 2015-16.

एक नहीं बल्कि साल में 4 बार में दे सकेंगे फीस
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक शुल्क के रूप मे बस शुल्क, भ्रमण शुल्क, शैक्षणिक शिविर शुल्क तभी लिये जा सकेंगे जब छात्र इन क्रिया कलापों मे शामिल होंगे. साथ ही उन्होंने बड़ी राहत देते हुए ऐलान किया कि अब सालाना फीस एक साथ लेने के बजाय छमाही या तिमाही के समय ही ली जा सकेंगी.

Fees to be given in 4 times a year, not one
He said that as an alternative fee, bus charges, excursion fees, educational camping charges will be taken only when the students will be involved in these activities. At the same time, he announced a great relief that instead of taking the annual fees together, it can be taken in half or quarter time.

पांच साल से पहले नहीं बदलेगी ड्रेस
इस फैसले के लागू होने के बाद स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान से कॉपी-किताब या बैग खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे. पांच साल से पहले स्कूल की ड्रेस नहीं बदली जा सकेगी. फिर भी अगर बेहद जरूरी है तो इसका फैसला मंडलायुक्त करेंगे.

Dress will not change before five years
After the implementation of this decision, the school will not be able to force parents to buy copies or bags from any one shop. School dress can not be changed before five years. Even if it is very important, then it will decide its decision.

फीस बढ़ने के साथ ही बढ़ेगी टीचर्स की सैलरी
हर साल फीस बढाने को लेकर जो स्कूलों की मनमानी की जा रही थी उस पर नियंत्रण होगा. अब फीस बढ़ाने के लिए स्कूल में टीचर्स के मासिक वेतन में बढोत्तरी के अनुपात के हिसाब से बढ़ाई जाएगी. साथ ही ये बढ़ोतरी किसी भी सूरत में 5-7 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी.

Teacher’s salary increases as fees rise
The schools which were arbitrarily charged for increasing the fees each year will be under control. Now, in order to increase the fees, teachers will be increased in the proportion of the increase in the monthly salary of the teachers. Also, these increases will not exceed 5-7 percent in any aspect.

स्कूलों को देनी होगी आय की जानकारी
स्कूलों में व्यवसायिक गतिविधियां, जैसे गेस्ट हाउस, दुकानें चला रहे स्कूलों पर नियंत्रण किया जायेगा. साथ ही स्कूल को होने वाली आय की जानकारी देनी होगी और उसका इस्तेमाल स्कूल के लिए करना होगा, छात्रों की फीस कम करने के लिए और टीचर्स के वेतन के लिए करना होगा. आय को स्कूलों के अकांउट में दिखाना पड़ेगा.

Schools will have to pay income information
Business activities in schools, such as guest houses, shops running schools will be controlled. At the same time, the information related to the school will be given and it will be used for the school, to reduce the fees of the students and to get teachers’ salaries. The income will have to be shown in the school account.

3 बार नियम का उल्लंघन करने पर मान्यता रद्द
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि राज्य में मंडल स्तर पर शुल्क नियामक समिति बनेगी. अगर कोई भी स्कूल नियम नहीं मानता है तो पहली बार 1 लाख, दूसरी बार 5 लाख और तीसरी बार नियम नहीं मानने पर मान्यता रद्द कर दी जाएगी.

3 times cancellation of rule violation
In the press conference, he said that the tariff regulatory committee will be formed at the divisional level in the state. If any school does not accept rules, then for the first time, 1 lakh, second time 5 lakh and for the third time the validity will not be canceled.

12वीं क्लास तक सिर्फ एक बार प्रवेश शुल्क लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि ये सारे फैसले मंगलवार को यूपी कैबिनेट में लिए गए हैं. इसे कानूनी रूप से लागू करने में कुछ वक्त लगेगा. उम्मीद है अगले सत्र तक इसे कानूनी रूप से लागू कर दिया जाएगा.

Only one entry fee will be charged till the 12th class. He said that all these decisions have been taken in the UP cabinet on Tuesday. It will take some time to implement it legally. Hopefully it will be implemented legally by next session.

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की लूट सदा के लिए ख़त्म
बढ़ती फीस पर नकेल कसने के साथ-साथ बच्चों को यूनिफार्म, कॉपी-किताब बांटने, कॉलेजों में लैबोरेट्री आदि बनाने, स्कूलों में बिजली की समुचित व्यवस्था करवाने के साथ ही परीक्षा के दौरान नकल के खिलाफ और सरकारी टीचरों द्वारा प्राइवेट कोचिंग चलाने के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

Loot of private schools in UP ends forever
In addition to tightening the rising fees, as well as creating unofficial, copy-book, laboratories in colleges, proper arrangement of electricity in schools, against cases against copying and conducting private coaching by government teachers. Instructions have been issued to take strong action against

यानी यूपी में तो कम से कम प्राइवेट स्कूलों की लूट अब पूरी तरह से ख़त्म होगी. छात्रों के परिजनों पर से बोझ कम होगा. योगी आदित्यनाथ जिस तरह से तेजी से फैसले ले रहे हैं और बदलाव ला रहे हैं, उसकी तारीफ़ केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में हो रही है. उनके काम करने की तेजी देख सभी हैरान हैं.

That is, at least in the UP, the loot of at least private schools will now be completely exhausted. The burden will be reduced on students’ families. The way Yogi Adityanath is taking fast decisions and bringing changes, it is praised not only in the country but also abroad. All are surprised to see their working speed.

यह भी देखे

https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

source political report

योगी ने दिए ये बड़े आदेश मुस्लिम बहुल इलाके में घुस यूपी पुलिस,फिर हुआ ऐसा सनसनीखेज खुलासा, जिसे देख सन्न रहा गया सारा देश

लखनऊ : कश्मीर में और बॉर्डर पर देश आतंकवाद से जूझ रहा है, मगर उससे भी बड़ी समस्या देश के अंदर ही अंदर पल रही है. देश के कई इलाके कट्टरपंथियों के गढ़ बन चुके हैं. पिछली सरकारों ने वोटबैंक की खातिर बड़ी जातां से इन जिहादियों को पाला-पोसा, यही कारण है कि आज इन कट्टरपंथियों की हिम्मत इतनी बढ़ चुकी है कि ये खुलकर दंगे-फसाद करने से नहीं चूकते. यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त एक्शन के बाद एक ऐसे ही आतंक के गढ़ का सफाया हुआ है.

Lucknow: In Kashmir and on the border, the country is facing terrorism, but even bigger problems are going on inside the country. Many areas of the country have become strongholds of fundamentalists. The past governments have grown up for the sake of votebank, so that these jihadis are brought to fruition, this is the reason that these fundamentalists have become so energetic today that they do not forget to openly condemn the riots. After the strict action of CM Yogi Adityanath in UP, the fortress of such a terror has been wiped out.

यूपी में अवैध हथियारों का जखीरा
योगी के सीएम बनने के बाद से यूपी पुलिस को सख्त आदेश दिए गए हैं कि जिहादियों का खात्मा किया जाए. यूपी पुलिस के हालिया एक्शन में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिससे पता चल रहा है कि अन्दर ही अंदर यूपी को भी देश का दूसरा बंगाल बनाने की तैयारिया चल रही थी.

Illegal weapons in UP
Since the Yogis became CM, the UP Police have been given strict orders that the jihadis should be eliminated. In the recent action of the UP Police, such cases are coming out, which is going to reveal that in the meantime the UP was also preparing to make the second Bengal of the country.

प्रदेश के अंदर जिहादी अवैध हथियारों की फेक्ट्रियां चला रहे थे, जिन पर योगी सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. अभी हाल में ही मथुरा क्षेत्र के खायरा गाँव में यूपी पुलिस ने छापेमारी की, तो वहां से जो कुछ बरामद हुआ, उसे देख यूपी पुलिस भी हैरान रह गयी.

Inside the state, jihadists were running illegal weapons factories, on which the Yogi Sarkar has started tightening the scourge. Recently, UP police raided Khayra village in Mathura area, and then the UP police were surprised to see what was recovered from there.

हर घर में मिले हथियार
दरअसल खायरा गाँव इस्लामिक बहुल गाँव हैं, जहाँ पूर्ववर्ती सरकारों में पुलिस की जाने की हिम्मत तक नहीं होती थी, लेकिन योगीराज में इन जिहादियों पर शिकंजा कस गया है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में मथुरा के बरसाना क्षेत्र में भी पुलिस ने छापा मारा. बताया जा रहा है कि तालाशी के दौरान यहाँ घर-घर से हथियार व् भारी मात्रा में असलहा बरामद हुआ.

Weapons found in every home
In fact, Khayra village is an Islamic-dominated village, where the previous governments did not have the courage to go to the police, but in Yogiraj there was a screw on these jihadis. Apart from this, the police raided the Barasana area of ​​Mathura in Uttar Pradesh. It is being told that during the Talaashi, weapons and huge amounts of ammunition were recovered from home.

इसके अलावा पुलिस ने यहाँ एक हथियार बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड भी किया. बताया जा रहा है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में जिहादी तत्व अवैध हथियारों की फैक्ट्रियां चला रहे थे और यहाँ से यूपी को दहलाने की बड़ी साजिश रची जा रही थी, लेकिन सीएम योगी के कारण प्रदेश को जलने से बचा लिया गया.

Apart from this, the police also carried out a factory to build a weapon here. It is being told that in the Muslim-dominated areas, jihadi elements were running illegal weapons factories and there was a conspiracy to terrorize the UP from here but due to the CM Yogi, the state was saved from burning.

यूपी को दहलाने की साजिश का पर्दाफ़ाश
पुलिस अधीक्षक देहात आदित्य कुमार शुक्ला ने बताया कि हथियारों की फैक्ट्री चलने के साथ-साथ चोरी के वाहन की मौजूदगी की सूचना पर कल कई थानों के पुलिसबल व् तीन प्लाटून पीएसी लगाकर हाथिया गांव की गहनता से तलाशी ली गई तो न केवल हथियारों की फैक्ट्री मिली, बल्कि 315 बोर की एक देसी रायफल, 315 बोर की एक सीएमपी, 315 बोर के 15 कारतूस, 12 बोर की दो देसी बंदूकें, 12 बोर के 10 कारतूस के अलावा भारी मात्रा में देसी शराब, एक टाटा 407, एक किलो गांजा भी बरामद किया गया.

U.P. to scare the conspiracy of the conspiracy
Deputy Superintendent of Police Aditya Kumar Shukla said that on the information of the presence of theft vehicle as well as police station and three platoon PAC of the police station, after searching the weapon of weapon, with the intensity of the Hathia village it was found not only the weapons factory Instead, a domestic rifle of 315 bore, one CMP of 315 bore, 15 cartridges of 315 bore, two country guns of 12 bore, 10 cartridges of 12 bore, besides large quantities of indigenous shaw B, was recovered a Tata 407, a kg of ganja.

उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में गांव के अली हुसैन, शब्बीर को मौके से गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान दो मोटर साईकिल एवं दो ट्रैक्टर भी बरामद हुए हैं, जिनके सम्बन्ध में जानकारी की जा रही है. अभियुक्तों से बरामद नाजायज असलहों एवं अवैध शराब के मामले मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. पुलिस के अनुसार पांचों अभियुक्त की गिरफ्तारी से अपराधों की कुछ नई पर्तें खुलने की संभावना है.

He said that in this connection, Ali Hussein, Shabbir of the village was arrested from the spot. During the search, two motor cycles and two tractors have also been recovered, in which the information is being sought. The necessary action is being taken by registering the cases of illegal liquor and illegal liquor recovered from the accused. According to the police, the arrest of five accused is likely to open some new lines of crimes.

उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर दंगे-फसाद करके कत्लेआम मचाने की साजिश की रही थी. गौरतलब है कि बंगाल में भी इसी तरह से घर-घर में हथियार व् देसी बम बनाने के कारखाने चलते हैं और इन्ही का इस्तमाल करके वहां हिन्दुओं के खिलाफ दंगे भड़काए जाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल यूपी का भी होने जा रहा था, मगर सीएम योगी की सतर्कता के कारण यूपी में अनहोनी होने से पहले ही टल गयी.

In Uttar Pradesh, there was conspiracy to massacre massacres by massacre. It is noteworthy that in the same way, in the same way, the factories in the house-to-house arms and indigenous bombs run and they are used to stir riots against Hindus. Something similar was going to happen in UP too, but due to the vigilance of the CM Yogi, there was a delay in the UP before it was impossible.

यह भी देखे

https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने पर फट पड़ा ओवैसी का गुस्सा,काँपे जिसे देख अखिलेश और कांग्रेस समेत मुस्लिम मैं हाहाकार

पटना : अभी कुछ ही वक़्त पहले यूपी के कासगंज में तिरंगा यात्रा पर पथराव व् गोलीबारी हुई थी, जिसमे चन्दन गुप्ता नाम के एक युवक की मौत हो गयी थी और इसके बाद वहां दंगे भड़क उठे थे. कुछ वही हाल राम नवमी के मौके पर बिहार व् बंगाल में भी रहा. शोभा यात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा पथराव किया गया, जिसने दंगे का रूप ले लिया. वहीँ मीडिया का एक धड़ा एक बार फिर कट्टरपंथियों के बचाव में खड़ा हो गया है.

Patna: Just a few days ago, there was a stone pelting and firing on the Tiranga yatra in UP, in which a young man named Chandan Gupta was killed and after that there were riots. Some were also in Bihar and Bengal on the occasion of Ram Navami. Shobha Yatra was stoned to death by the extremists, who took the form of riots. At the same time, one faction of the media has once again stood in the defense of the fundamentalists.

क्या है पूरा मामला?

औरंगाबाद में सोमवार को निकाली गई रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों ने पथराव कर दिया, जिसके बाद लोग भड़क उठे. आक्रोशित भीड़ ने कई दुकानों में आग लगा दी और बवाल किया. कट्टरपंथियों के पथराव में शोभायात्रा में शामिल छह से अधिक लोग घायल हुए वहीं कई अधिकारियों को भी चोटें आई हैं.

What is the whole matter?

After the raid on Ramnavmi in Aurangabad on Monday, the fundamentalists hurled stones at them, after which the people got upset. The angry crowd set fire to many shops and made a fire. More than six people involved in the Shobhayatra were injured in the stone pelting stones, while many officials have also been injured.

सवाल ये है कि आखिर शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की ही क्यों गयी? आखिर कब तक लोग कट्टरपंथियों के पत्थर खाते रहेंगे? वहीँ मीडिया का एक धड़ा फिर से सक्रिय हो गया है और दंगों का सारा दोष हिन्दुओं पर ही मढ़ा जा रहा है.

The question is, why did it go rocking on Shobha? After all, how long will people keep on stoning stones of fanaticism? At the same time a faction of the media has been activated and all the blame on the riots is being planted on the Hindus only.

पथराव से गुस्साए हिन्दू युवक

बताया जा रहा है कि कट्टरपंथियों की पत्थरबाजी से गुस्साए कुछ हिन्दू युवकों ने बिहार के समस्‍तीपुर के रोसड़ा कस्‍बे में स्थित जामा मस्जिद पर धावा बोल दिया. युवक मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और उसपर भगवे झंडे फहरा दिए. हालांकि समस्‍तीपुर के एसपी दीपक रंजन के मुताबिक़ जब पुलिस वहां पहुंची तो उन्‍हें भगवा झंडे नहीं मिले, केवल तिरंगा लगा हुआ मिला.

Hindu youth angry with stone pelting

It is being told that some Hindu youths, angry at the stone-throwing stones, attacked the Jama Masjid in Rosda town of Samastipur, Bihar. The youth climbed to the mosque and hoisted the saffron flag on it. However according to SP Deepak Ranjan of Samastipur, when the police arrived there, they did not get the saffron flag, only got the tricolor.

कट्टरपंथी शिक्षा देने वाले एक मदरसे पर भी धावा बोला गया और उसे तहस-नहस कर दिया गया. खबर के मुताबिक रोसड़ा के गुदरी बाजार स्थित मस्जिद के पास से सोमवार को माता दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन को जा रही थी. ये बात कट्टरपंथी युवकों से सहन नहीं हुई और उन्होंने मूर्ति की ओर चप्‍पल फेंक दी. इसी के विरोध में सैकड़ों लोग मस्जिद के पास इकट्ठा होकर आरोपी की बलि देने की मांग करने लगे.

A madrasa who gave fundamental education was also attacked and it was demolished. According to the news, the statue of Mata Durga was going to immersion on Monday near Mosad, situated in Gudri Bazaar in Rosda. This thing was not tolerated by fundamentalist youths and they threw slippers towards the idol. In protest against this, hundreds of people gathered near the mosque and demanded the sacrifice of the accused.

बिहार-बंगाल में कट्टरपंथियों का आतंक

बता दें कि औरंगाबाद में ठाकुरबाड़ी की तरफ से रामनवमी की शोभायात्रा बाजार के लिए प्रवेश किया था. इस्लाम टोली मोड़ के पास कट्टरपंथियों की भीड़ ने अचानक पथराव शुरू कर दिया. जिससे लोग भड़क गए. कट्टरपंथी शोभायात्रा को वहां से जाने तक नहीं देना चाहते थे. बड़ी मुश्किल से मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह जुलूस को पार कराया.

Terror of fanatic in Bihar-Bengal

Please tell that on behalf of Thakurbadi in Aurangabad, Ramanavami’s Shobhayatra entered the market. A crowd of fundamentalists suddenly started stone pelting near Islam Toli Mutt. Thereby, people flared up. The fundamentalists did not want to give Shobhayatra away from there. The police officers present on the spot barely passed the procession.

ये खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते दूसरी और खड़े लोग भड़क उठे और एक-एक कर दुकानों में आग लगाई जाने लगी. एक दर्जन से अधिक दुकानों और गुमटियों को फूंक दिया गया. यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि कट्टरपंथियों द्वारा पत्थरबाजी के बाद ही दंगे की शुरुआत हुई, मगर मीडिया ने बड़ी ही आसानी से सारा दोष आरएसएस व् हिन्दुओं पर ही मढ़ दिया.

The news spread like a fire, and seeing the other people standing standing broke out and each one started setting fire to shops. More than a dozen shops and dummies were blown up. The point here to note is that after the rhetoric by the fundamentalists, the riots took place, but the media easily eased the blame on RSS and Hindus only.

इसी बहाने से नितीश कुमार पर कीचड उछाला जाना भी शुरू हो गया. वहीँ बंगाल में हिन्दुओं के अलावा पुलिस अधिकारी तक दंगों में घायल हो गए, मगर ममता से सवाल पूछने या बंगाल दंगों की खबर चलाने की जगह देश के मीडिया ने बड़ी सफाई से उस खबर को छिपा लिया.

With this excuse Nitish Kumar also started to throw the kitchad. In addition to the Hindus in Bengal, police officials were injured in the riots, but instead of asking questions from Mamata or playing the news of the Bengal riots, the country’s media hid that news with great cleanliness.

यह भी देखे

https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

SOURCE NAME POLITICAL REPORT

राम मंदिर से पहले कोर्ट ने मस्जिदों को लेकर सुनाया अब तक का सबसे कड़ा ऐतिहासिक फैसला, दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय के उड़ा दिए होश

नई दिल्ली : भारत में जो मुद्दे कई वामपंथियों, पत्रकारों, अवार्ड वापसी गैंग और कुछ तथाकथित फिल्मबाजो के लिए असहिष्णुता बन जाते हैं. आज दुनिया के दूसरे देश इस बात को समझ चुके हैं और उनपर ज़ोरदार एक्शन भी ले रहे हैं. अभी सीएम योगी ने मस्जिदों के लम्बे समय से विवाद चले आ रहे ‘अवैध लाउडस्पीकर’ उतरवाए, जिसका लोगो ने विरोध किया और लोकतंत्र की हत्या बता दी. लेकिन अब जर्मन जैसे बड़े देश के कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मस्जिदों के लाउडस्पीकर को हमेशा के लिया बंद करवा दिया है, और इसके पीछे की वजह सुन आप चौंक जाएंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो ऐसा फैसला सुनाना पड़ गया.

जर्मन कोर्ट ने मस्जिद को लेकर सुनाया ऐतिहासिक फैसला
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक जर्मन देश के कोर्ट के फैसले से दो क्रिस्चियन समुदाय के लोगों को बड़ी ऐतिहासिक जीत मिली है. कोर्ट ने मस्जिदों में तेज़ आवाज़ में बजने वाले लाउडस्पीकर को हमेशा के लिए बंद करा दिया है. इसके पीछे जो कोर्ट को शिकायत मिली वो तो बेहद हैरान करने वाली थी. क्रिस्चियन लोगों ने शिकायत करी की न सिर्फ मस्जिदों के लाउडस्पीकर की आवाज़ बेहद परेशान करने वाली और ध्वनि प्रदुषण को बढ़ा रही है बल्कि मस्जिदों में प्रार्थना करते हुए ये चिल्ला के कहा जा रहा है कि “अल्लाह ही एक मात्र भगवान है और वो क्रिस्चियन के jesus से भी ऊपर है और वो सभी भगवानो से ऊपर है.”

ऐसे आवाज़ सुनकर क्रिस्चियन समुदाय की भावनाएं भड़क उठी और उन्होंने कोर्ट से इन्साफ माँगा. जिसके बाद हांस-जोआचिम लेहमैन, 69 वर्षीय शख्स ने कोर्ट से शिकायत में कहा “न सिर्फ ये आवाज़ से प्रदुषण हो रहा है बल्कि ये बहुत कष्टदायी है. इसमें हमारे भगवान jesus का अपमान किया जा रहा है, हम ये नहीं सह सकते.”

हालाँकि वहां भी प्रशांत भूषण जैसे वकील मौजूद हैं बचाव पक्ष के वकील ने कहा “ये धार्मिक आज़ादी है, किसी भी तरीके से क्रिस्चियन भगवान को ठेस पहुंचे ऐसे कोई बात नहीं कही जा रही है. ये एक षड़यत्र है.”

तो वहीँ अब मस्जिद के अधिकारी भी बचाव में कूद पड़े हैं उन्होंने कहा है “हमारी प्रार्थना सिर्फ 2 मिनट की होती है वो भी एक बजे वो भी सिर्फ शुक्रवार को. ये हमारी आज़ादी है और इसके खिलाफ हम नहीं सुनेंगे. हमें अभी तक किसी भी क्रिस्चियन समुदाय से कोई शिकायत नहीं आयी.”

जिसके बाद कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा “हमें दूसरे लोगों की भी आज़ादी का ख्याल रखना चहिये. ये तेज़ आवाज़ में लाउडस्पीकर जो दिन में 5 बार ऐसा शोर फैला रहे हैं जिससे क्रिस्चियन समुदाई की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही है. इन्हे परमिशन सिर्फ सुनाई दे सके इतनी तक की आवाज़ रखने की दी थी. ऐसे में ये नियमो का भी उल्लंघन है. इसलिए अब से सभी मस्जिद पर लाउडस्पीकर की पाबंदी लगायी जाती है.”

प्रदेश में सीएम योगी ने भी लिया था यही फैसला, बढ़ गयी थी असहिष्णुता
आपको बता दें इसे जर्मन देश में क्रिस्चियन लोगों की ऐतिहासिक जीत बताई जा रही है. हालाँकि हमारे देश में जब ऐसा फैसला लेने की कोई हिम्मत दिखाता है तो देश बहुत जल्दी असहिष्णु हो जाता है. फिल्मबाज़ देश छोड़ने की बात करने लगते हैं. ऐसा ही फैसला अभी प्रदेश की सीएम योगी ने भी सुनाया था. जिसके बाद से मस्जिदों से अवैध लाउडस्पीकर उतरवा लिए गए थे. लेकिन इसके बाद ओवैसी समेत कई कट्टरपंथियों ने बवाल मचा दिया था. दरअसल धर्म की आज़ादी के नाम पर कोई भी जनता के बाच ज़हर फैलाता रहता है. बोलने की आज़ादी के नाम पर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’. ऐसे नारे लगाए जाते हैं, भारतीय सेना को बलात्कारी बताया जाता है. लेकिन फिर भी हमारा कोर्ट के जज प्रेस कॉनफेरेन्स करते रहते हैं और लोकतंत्र की हत्या बताते हैं. करोड़ों केस लंबित पड़े रहते हैं, आम आदमी सालों तक चप्पल घिसता रहता है, सुनवाई तक नहीं होती और जज को मनपसंद केस नहीं मिले तो एक दिन में लोकतंत्र की हत्या हो जाती है.

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

SOURCE POLITICAL REPORT

योगी सरकार ने मदरसों के लिए जारी किया नया फरमान, जिसे देखे मुस्लिम संगठनो समेत PM मोदी हैरान

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘योगी आदित्यनाथ’ ने जिले के मदरसों को लेकर एक बहुत ही शानदार फैसला सुनाया है. मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद देशभर के मुस्लिम समुदाय में हलचल पेया हो गई है. जानकारी के अनुसार उन्होंने फैसला सुनते हुए कहा है कि राज्य के उन मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, जिनका पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है.

Gorakhpur: Uttar Pradesh’s Chief Minister Yogi Adityanath has given a very good decision about the madarsas of the district. After the decision of the chief minister, there has been a stir in the Muslim community across the country. According to the information, he said while hearing the decision that the madarsas of the state will be closed, which have not been registered on the portal.

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि जिले के 80 से अधिक मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, इनमे से 66 ने तो पंजीकरण भी नहीं कराया है. उधर एक दर्जन से अधिक मदरसों को बंद करने की संस्तुति की गई है. बंद होने वालों में से चार आलिया मदरसे हैं. मतलब इन मदरसों में बोर्ड कक्षाएं चलती हैं. अल्प संख्यक विभाग की जांच में इन मदरसों में मानक पूरे नहीं पाए गए.

According to information received from the sources, the Chief Minister Yogi said that more than 80 madarsas of the district will be closed, 66 of them have not even registered. There is a proposal to close more than a dozen madarsas. Of the closures, four are alia madarsas. Meaning board classes run in these madarsas. Standards were not found in these madrassas in the investigation of the minority department.

जानकारी के अनुसार पता चला है कि सरकार ने मदरसों पंजीकरण के लिए अलग पोर्टल बनाया हुआ है. इस पोर्टल पर सभी मदरसों का पंजीकरण होना आवश्यक है. शिक्षक, छात्र-छात्रा समेत मदरसे से जुड़ी हर तरह की जानकारी इस पोर्टल पर होनी चाहिए, परंतु कई मदरसों का प्रबंधन इसके लिए आगे नहीं आया. सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा है कि जिले में साढ़े तीन सौ से ज्यादा मदरसे हैं, परंतु इनमें से 287 ने ही रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है. पंजीकरण हुआ मदरसों में से भी केवल 266 मदरसों का विवरण पोर्टल पर लॉक किया गया है.

According to information, it has been found that the government has created separate portal for registration of madrassas. Registration of all the madarsas on this portal is necessary. All kinds of information related to the madarsas, including teachers, students, should be on this portal, but the management of many madarsas did not come forward for this. The sources said that there are more than three and a half hundred madrassas in the district, but only 287 of them have been registered. Details of only 266 madrassas have been locked in the portal from the registered madrassas.

जिला अल्पसंख्यक अधिकारी ‘एसपी तिवारी’ नेजानकारी देते हुए कहा है कि रजिस्ट्रेशन कराने वाले मदरसों की जांच कराई गई. इनमें से 14 में मानक पूरे नहीं पाए गए. इन मदरसों को बंद करने की संस्तुति की गई है. साथ ही जिन मदरसों का पंजीकरण नहीं हुआ है, जवाब नहीं मिलने पर उनको भी बंद कर दिया जाएगा.

District minority officer ‘SP Tiwari’ has informed that the examination of the madarsas who got the registration was done. Standards were not found to be completed in 14 of these. The recommendation to close these madarsas has been recommended. Also, the madarsas who have not registered, they will also be closed if the answer is not received.

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

SOURCE POLITICAL REPORT

योगी का धमाकेदार एक्शन,बड़े खुलासे देख दंग रह जायेंगे आप,दाने-दाने को मोहताज हुए माफिया,सोते रहे अखिलेश

लखनऊ : सीएम योगी ने सालों से चली आ रही बर्बाद शिक्षा व्यवस्था पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करी थी. सभी परीक्षा ग्रहों में cctv कैमरे से कड़ी नज़र और पुलिस का कड़ा पहरा. यही नहीं जिन शिक्षकों ने भी नक़ल कराई उनपर सीधा FIR दर्ज की गयी. इस वजह से यूपी में बड़ा नक़ल माफिया का तबाह हुआ. फर्जीवाड़े में लिप्त करीब एक लाख छात्र परीक्षा देने ही नहीं आये. तो वहीँ अब खुद Special Task Force को बड़ी कामयाबी मिली है जिसमे बेहद हैरत अंगेज़ का खुलासा सामंने आया है.

योगी राज में बड़ा एक्शन, माफिया का भंडाफोड़ से हुआ खुलासा
अभी मिल रही खबर के मुताबिक नक़ल माफिया बुरी तरह बौखला उठे हैं क्यूंकि योगी सरकार ने उनका जीना हराम कर दिया है. उत्तर प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस परीक्षाओं तथा अन्य महाविद्यालयों की स्नातन, परास्नातक, एलएलबी सहित परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवाने वाले बड़े नक़ल माफिया गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सदस्यों की गिरफ़्तारी करी है.

अखिलेश सरकार में पले बढे माफिया
इस गिरोह के खुलासे को देख आपकी भी आखें फटी रह जाएंगी. अखिलेश सरकार के दौरान मज़े में रह रहे नक़ल माफिया ने साल 2014, 2015, 2016 और 2017 में छह सौ से ज्यादा गैर मेधावी छात्र इस गोरखधंधे के जरिए पासआउट होकर डॉक्टर भी बन चुके हैं. स्पेशल फाॅर्स अब पता लगा रही है कि किन कॉलेजों में किस-किस छात्र की कॉपियां बदली गईं. इसके बाद इन पासआउट छात्रों को भी साजिश का आरोपी बनाया जाएगा.

आम ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़
अब ज़रा सोचिये, ऐसे छात्र बड़े फर्जीवाड़े से जब छात्र डॉक्टर बनेगे तो क्या तो वो लोगो का इलाज करेंगे. क्या ये आम आमदी की ज़िन्दगी से बहुत बड़ा खिलवाड़ नहीं है. पिछली सरकार में मज़े से पल रहे ये नक़ल माफिया दवारा बनाये गए डॉक्टर की वजह से ही BRD हॉस्पिटल जैसे कांड होते हैं जब छोटे छोटे बच्चे मौत की नींद सो जाते हैं. इनमे से ही कोई फर्जी डॉक्टर कल फिर डॉक्टर कफील बनकर खड़ा होगा और अन्य मौतों का ज़िम्मेदार होगा.

ये फर्जी डॉक्टर उस पेड़ का वो बीज हैं जिसे बोया तो साल 2014 में गया था लेकिन अगर आज इनका पर्दाफाश नहीं होता तो ना जाने ये कितनी ज़िन्दगी के साथ जुआ खेल रहे होते. और ना जाने अभी कितने और झोलाछाप फर्जी डॉक्टर कितने राज्यों में घूम रहे होंगे.

इस घोटाले पर पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा एसटीएफ को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस परीक्षाओं तथा महाविद्यालयों की स्नातक, परास्नातक, एलएलबी सहित अन्य परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवाने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचनाएं प्राप्त हो रही थीं.

शामिल थे विश्वविद्यालय के कर्मचारी
मुखबिर की सूचना पर मेडिकल क्षेत्र में दुर्गापुरम, गढ़ हापुड़ रोड बन रहे मकान पर मेरठ पुलिस के साथ रात डेढ़ बजे छापा मारकर बिजनौर के मूल निवासी कविराज को गिरफ्तार कर लिया. इसके पास से विश्वविद्यालय से सम्बद्ध मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज बेगराज मन्सूरपुर की एमबीबीएस की द्वितीय वर्ष की परीक्षा की लिखी हुई दो उत्तर पुस्तिका बरामद हुई.

गिरफ्तार आरोपी कविराज ने पूछताछ में बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवाने में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यलाय के उत्तर पुस्तिका अनुभाग एवं अन्य अनुभागों के कर्मचारी संदीप, पवन तथा कपिल उसके साथ शामिल हैं. ये लोग विश्वविद्यालय में बाहर से लिखी हुई उत्तर पुस्तिकाओं को बदल देते हैं.

चला रहे थे बड़े स्तर पर गोरखधंधा
कविराज ने बताया कि एमबीबीएस के छात्रों से एक पेपर की उत्तर पुस्तिका बदलने के एवज में एक लाख बीस हजार से लेकर एक लाख पचास हजार रुपए तक वसूलते हैं. इसमें से दस हजार रुपए विश्वविद्यालय की खाली उत्तर पुस्तिका लाने के लिए संदीप को दिए जाते हैं. पैंतीस हजार रुपए से लेकर पैंसठ हजार रुपए तक लिखित उत्तर पुस्तिका बदलने के लिए पवन एवं कपिल को दिए जाते हैं.

उसने बताया कि संदीप विश्वविद्यालय से खाली उत्तर पुस्तिकाएं लाकर उसे देता है तथा इन उत्तर पुस्तिकाओं को छात्रों से लिखवाकर वह उन्हें पवन तथा कपिल को दे देता है. पवन एवं कपिल उन उत्तर पुस्तिकाओं के ऊपर के पेज को मूल उत्तर पुस्तिका के ऊपर के पेज को बदलकर पन्च करके उत्तर पुस्तिका अनुभाग में रख देते हैं।

करोड़ों के अवैध कारोबार हुआ चौपट
पवन विश्वविद्यालय में वरिष्ठ लिपिक इन्चार्ज उत्तर पुस्तिका अनुभाग एवं कपिल तथा संदीप विश्वविद्यालय में संविदा कर्मचारी हैं. उसने यह भी बताया कि वह वर्ष 2014 से उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवा रहा है और लगभग प्रत्येक वर्ष 100-150 छात्रों के विभिन्न पेपरों की उत्तर पुस्तिका बदलवा देता है तथा करोडों का अवैध कारोबार कर चुका है.

यह भी देखें:

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

CM योगी का ऐसा ताबड़तोड़ एक्शन जिसे पुरे दारुल उलूम में मचा ऐसा हड़कंप,,किया हैरतअंगेज़ एलान,वामपंथियों में मचा बवाल

लखनऊ : उत्तरप्रदेश में सीएम योगी ने मदरसों के फर्जीवाड़ों को लेकर ऐसा ज़बरदस्त एक्शन लिया कि दारुल उलूम तक में आज हड़कंप मच गया है. अखिलेश सरकार के बाद जैसे ही सीएम योगी ने सभी मदरसों को ऑनलाइन करके ब्यौरा माँगा हज़ारों मदरसों की पोल खुल गयी. पिछली सरकारें इन्हे सरकारी खजाने से करोड़ों रूपए लुटाती रही लेकिन तुष्टिकरण में कभी ये जांच करना ज़रूरी नहीं समझा की पैसा जा कहा रहा है.

Lucknow: In Uttar Pradesh, CM Yogi took such a tremendous action about the fake fines of the madarsas that there was a stir in Darul Uloom today. After the Akhilesh government, as soon as CM Yogi opened the papers of thousands of madrassas asking for details of all the madarsas online. The previous governments looted millions of rupees from the public exchequer, but it is not necessary to investigate this in a pleading that money is being said to go.

सीएम योगी के एक्शन से पूरे दारुल उलूम में मचा हड़कंप

जब योगी सरकार सत्ता में आयी तो सबसे पहले जांच करवाई जिसमे खुलासा हुआ कि हज़ारों मदरसे सिर्फ कागज़ी हैं, न तो कोई शिक्षक है और ना ही कोई छात्र फिर भी ये मदरसों के नाम पर करोड़ों रूपए सालों से भेजे जा रहे थे. तो वहीँ अब योगी सरकार की अन्य जांच से बचने के लिए खुद दारूल उलूम ने बड़ा एलान किया है.

The action of CM Yogi stirred the whole of Darul Uloom

When the Yogi government came to power, first of all to investigate that thousands of madarsas were mere paperwork, neither teachers nor any students were still being sent for millions of rupees in the name of these madarsas. So now, for the other investigation of the Yogi Government, Darul Uloom himself has made a big announcement.

अभी मिल रही ताज अखबार के मुताबिक मदरसों के कामकाज में राज्य सरकारों के दखल से बचने के लिए दारुल उलूम देवबंद ने 3,000 से ज्यादा मदरसों से कहा है कि वे सरकारी सहायता लेना बंद कर दें. ये मदरसे दारुल उलूम देवबंद से संम्बद्ध हैं. इनकी ज्यादा संख्या यूपी में ही है. योगी सरकार ने मदरसों पर काफी सख्ती की है. इससे ऐसा लगता है कि मदरसा प्रबंधक अब यूपी सरकार के दखल से बचने का रास्ता निकाल रहे हैं.

To avoid the interference of State Governments in the functioning of the madrassas, Darul Uloom Deoband has asked more than 3,000 madrassas to stop taking government help, according to the newspaper Taj Taj founding. These madrassas are affiliated with Darul Uloom Deoband. More of them are in the UP. Yogi Sarkar has strictly adhered to the madarsas. It seems that the madrassa manager is now pulling the way out of the intervention of the UPA Government.

मदरसा प्रबंधन की रब्ता-ए-मदरिस (आमसभा) में आठ बड़े निर्णय लिए गए हैं. इनमें एक निर्णय एड यानी आर्थिक सहायता न लेने का निर्देश भी था. इसके अलावा, सभी मदरसों के प्रबंधन से यह कहा गया है कि वे अपने प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड अपडेट रखें और गैर मुसलमानों के साथ भी सौहार्द्रपूर्ण रिश्ते रखें. इसके लिए गैर मुस्लिमों को मुसलमानों के तमाम त्योहारों और उत्सवों में आमंत्रित करने को भी कहा गया है

Eight major decisions have been taken in the Rabta-e-Madaris (General Assembly) of Madarsa Management. Among them, there was also a decision not to take any financial assistance. Apart from this, the management of all the madarsas has been told that they keep records of their property and keep harmonious relationships with non-Muslims. It has also been asked to invite non-Muslims in all the festivals and festivals of the Muslims.

इससे पहले आज तक कभी मदरसों से इतने मिलनसार एलान नहीं हुए. ये योगी सरकार की सख्ती और फर्जीवाड़े मदरसों के खुलासे का ही नतीजा है कि अब खुद मदरसे सरकारी सहायता लेने से मना कर रहे हैं.

Never before have there been so many friendly declarations from the madarsas. This is the result of the revelation of the strictly and fraudulent madarsas of the Yogi government that now the madarsa themselves are refusing to seek government help.

सरकारी सहायता लेने के पीछे इनका एक अपना भी स्वार्थ छिपा हुआ है. असल में जो मदरसे सरकारी सहायता लेते हैं उन्हें स्कूलों के लिए बने राज्य सरकार के निर्देश का पालन करना पड़ता है. योगी सरकार ने मदरसों को राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा फैराने का निर्देश दिया था, कई मदरसों ने इसका बखूबी से पालन किया लेकिन कई कट्टर सोच रखने वालों ने इसे अपने तौहीन समझा और फैसला मानने से इंकार कर दिया.

Their selfishness is hidden behind government help. In fact, the madarsa who seek government help has to follow the instructions of the state government made for schools. The Yogi Sarkar had directed the madarsas to spread the national flag of the tricolor; many madarsas followed it well, but many hardliners thought it as their downhill and refused to accept the verdict.

ऐसे ही कई देशहित फैसलों को मदरसे लागू ना कर पाएं इसीलिए दारूल उलूम से ये एलान किया गया है कि मदरसे सरकारी सहायता राशि न लें. इससे पहले दारुल उलूम कई तरह के फतवे कभी योग पर फतवा ऐसे जारी करता रहता है.

Similarly, many of the countrywide decisions can not be implemented by the madarsa so that it has been announced from Darul Uloom that madarsa does not take government assistance. Before this, many types of fatwas used to continue issuing fatwas on yoga.

बता दें यूपी के मदरसों के लिए पिछले साल एक पोर्टल बनाकर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने और स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण और राष्ट्रगान की वीडियोग्राफी करने का एक देशभक्ति वाला निर्देश जारी किया था. लेकिन कई मदरसों ने इसे देशभक्ति थोपना समझा. दरअसल यूपी में सबसे ज़्यादा

For the madarsas of UP last year, a portal was created by making a portal mandatory and issued a patriotic direction for flag hoisting on Independence Day and videography of national anthem. But many madarsas understood to impose patriotism. Actually the most in UP

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

source political report

ब्रेकिंग:cm योगी का बड़ा खुलासा जनता को विकासवाद राष्ट्रवाद नही बल्कि

हमारी महान जनता और उनकी मानसिकता ने फिर एक बार साबित कर दिया की हमारी जनता को न विकास चाहिए और न ही राष्ट्रवाद, जनता को चाहिए सिर्फ जातिवाद और मुफ्त की ढेर सारी चीजें, हम ऐसे ही कहते रहते है की चीन हमसे आगे है क्यूंकि वहां के नेता सही रहे है, भैया वहां की जनता सही रही है, ये नेता कोई आसमान से नहीं टपकते, जनता सही हो तो नेता सही ही होता है

Our great public and their mentality once again proved that our people do not want development or nationalism, the public should just have a lot of racism and free things, we keep saying that China is ahead of us because there The leader is right, brother is right there, the leader does not touch the sky, if the people are right then the leader is right.

बिहार के अररिया में जनता ने लालू यादव की पार्टी को जिताया, सीट पर 45% मुस्लिम है, RJD को वोट मिला 56%, यानि 12% हिन्दू वोट भी RJD को मिला, इसमें यादव इत्यादि ही है, बिहार में यादवों की आबादी कोई 12-14% ही है, लालू यादव को ये लोग विकास के लिए थोड़ी देते है, जाति के लिए देते है

In the Araria of Bihar, the public won Lalu Yadav’s party, 45% of the seats were Muslim, the RJD got 56% votes, i.e. 12% Hindu votes also got RJD, Yadav in it etc., Bihar’s population is 12 -14% only, these people give Lalu Yadav a little for development, give to the caste

गोरखपुर और फूलपुर में दलित और यादव वोट एकजुट हुआ, मुस्लिम वोट पहले से एकजुट है और इस तरह वहां सपा का प्रत्याशी जीता, अब दलितों और यादवों को विकास थोड़ी चाहिए, वो तो मायावती को, अखिलेश को विकास के लिए थोड़ी, जाति के नाम पर ही तो वोट देते है, जनता विकास को वोट नहीं देती, न ही राष्ट्रवाद को वोट देती है, वो सिर्फ जाती को वोट देती है

Dalits and Yadavs voted together in Gorakhpur and Phulpur, the Muslim vote is already united and thus won the SP’s candidate there, now the Dalits and Yadavs need development for a little bit, then Mayawati, Akhilesh for a little development, caste names But only they vote, the public does not vote for development, nor does the vote for nationalism, he just votes the caste

आप योगी सरकार के 1 साल के काम को देखिये, एंटी रोमियो दल बनाया, बेटियों के प्रति होने वाले अपराध में कमी आयी है, अवैध कत्लखाने योगी सरकार ने बंद कराये, बहुत से लोग जो कैराना छोड़कर भाग चुके थे काफी लोग अब वापस अपने घरों में है, लाखों किसानो के लोन योगी सर्कार ने माफ़ कर दिए है, प्रदेश में गड्ढा मुक्त सड़कें की है, अब सड़क ख़राब होती है तो जल्दी बना दी जाती है, प्रदेश में इन्वेस्टर समिट भी करवा दिए

You see the 1 year work of the Yogi government, created anti-Romeo party, crime against daughters has come down; illegal slaughter by the Yogi Sarkar, many people who had left the Kairana, and many people now come back to their homes The loan Yogi of the millions of farmers has forgiven the government, the road is in the state of the pit-free roads, now the road is bad, then it is quickly made and investor summit is also done in the state.

इसके अलावा अपराध पर नकेल कसा, अपराधियों पर नकेल कसा, माफिया राज ख़त्म किया, आतंक और भय का वातावरण ख़त्म किया, पर इन सबके बाबजूद लोगों ने जाति को वोट दिया, फिर एक बार हमारी जनता ने साफ़ कर दिया की इसे न विकास चाहिए न ही राष्ट्रवाद, इसे सिर्फ जातिवाद चाहिए, हमारे पिछड़ेपन का यही तो एक बड़ा कारण है, अब क्या सपा और बसपा विकास करेंगे ? खैर जनता को जो पसंद है वही होता है, जातिवाद पसंद है तो जातिवाद ही सही चाहे वो बर्बादी की तरफ ले जा रहा हो !

Apart from this, people have cast their vote on the crime, how to counter crime, how to mask the criminals, end the mafia rule, terror and fear, but all of them voted for the caste, once again our people have cleared that it should not grow. Neither nationalism, it should be just racist, this is a big reason for our backwardness, now what will SP and BSP develop? Well, whatever the public likes, racism is like, if racism is right, it is taking the side of waste!

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

SOURCENAME:DANIK BHARAT