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पटना : अभी कुछ ही वक़्त पहले यूपी के कासगंज में तिरंगा यात्रा पर पथराव व् गोलीबारी हुई थी, जिसमे चन्दन गुप्ता नाम के एक युवक की मौत हो गयी थी और इसके बाद वहां दंगे भड़क उठे थे. कुछ वही हाल राम नवमी के मौके पर बिहार व् बंगाल में भी रहा. शोभा यात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा पथराव किया गया, जिसने दंगे का रूप ले लिया. वहीँ मीडिया का एक धड़ा एक बार फिर कट्टरपंथियों के बचाव में खड़ा हो गया है.

Patna: Just a few days ago, there was a stone pelting and firing on the Tiranga yatra in UP, in which a young man named Chandan Gupta was killed and after that there were riots. Some were also in Bihar and Bengal on the occasion of Ram Navami. Shobha Yatra was stoned to death by the extremists, who took the form of riots. At the same time, one faction of the media has once again stood in the defense of the fundamentalists.

क्या है पूरा मामला?

औरंगाबाद में सोमवार को निकाली गई रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों ने पथराव कर दिया, जिसके बाद लोग भड़क उठे. आक्रोशित भीड़ ने कई दुकानों में आग लगा दी और बवाल किया. कट्टरपंथियों के पथराव में शोभायात्रा में शामिल छह से अधिक लोग घायल हुए वहीं कई अधिकारियों को भी चोटें आई हैं.

What is the whole matter?

After the raid on Ramnavmi in Aurangabad on Monday, the fundamentalists hurled stones at them, after which the people got upset. The angry crowd set fire to many shops and made a fire. More than six people involved in the Shobhayatra were injured in the stone pelting stones, while many officials have also been injured.

सवाल ये है कि आखिर शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की ही क्यों गयी? आखिर कब तक लोग कट्टरपंथियों के पत्थर खाते रहेंगे? वहीँ मीडिया का एक धड़ा फिर से सक्रिय हो गया है और दंगों का सारा दोष हिन्दुओं पर ही मढ़ा जा रहा है.

The question is, why did it go rocking on Shobha? After all, how long will people keep on stoning stones of fanaticism? At the same time a faction of the media has been activated and all the blame on the riots is being planted on the Hindus only.

पथराव से गुस्साए हिन्दू युवक

बताया जा रहा है कि कट्टरपंथियों की पत्थरबाजी से गुस्साए कुछ हिन्दू युवकों ने बिहार के समस्‍तीपुर के रोसड़ा कस्‍बे में स्थित जामा मस्जिद पर धावा बोल दिया. युवक मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और उसपर भगवे झंडे फहरा दिए. हालांकि समस्‍तीपुर के एसपी दीपक रंजन के मुताबिक़ जब पुलिस वहां पहुंची तो उन्‍हें भगवा झंडे नहीं मिले, केवल तिरंगा लगा हुआ मिला.

Hindu youth angry with stone pelting

It is being told that some Hindu youths, angry at the stone-throwing stones, attacked the Jama Masjid in Rosda town of Samastipur, Bihar. The youth climbed to the mosque and hoisted the saffron flag on it. However according to SP Deepak Ranjan of Samastipur, when the police arrived there, they did not get the saffron flag, only got the tricolor.

कट्टरपंथी शिक्षा देने वाले एक मदरसे पर भी धावा बोला गया और उसे तहस-नहस कर दिया गया. खबर के मुताबिक रोसड़ा के गुदरी बाजार स्थित मस्जिद के पास से सोमवार को माता दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन को जा रही थी. ये बात कट्टरपंथी युवकों से सहन नहीं हुई और उन्होंने मूर्ति की ओर चप्‍पल फेंक दी. इसी के विरोध में सैकड़ों लोग मस्जिद के पास इकट्ठा होकर आरोपी की बलि देने की मांग करने लगे.

A madrasa who gave fundamental education was also attacked and it was demolished. According to the news, the statue of Mata Durga was going to immersion on Monday near Mosad, situated in Gudri Bazaar in Rosda. This thing was not tolerated by fundamentalist youths and they threw slippers towards the idol. In protest against this, hundreds of people gathered near the mosque and demanded the sacrifice of the accused.

बिहार-बंगाल में कट्टरपंथियों का आतंक

बता दें कि औरंगाबाद में ठाकुरबाड़ी की तरफ से रामनवमी की शोभायात्रा बाजार के लिए प्रवेश किया था. इस्लाम टोली मोड़ के पास कट्टरपंथियों की भीड़ ने अचानक पथराव शुरू कर दिया. जिससे लोग भड़क गए. कट्टरपंथी शोभायात्रा को वहां से जाने तक नहीं देना चाहते थे. बड़ी मुश्किल से मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह जुलूस को पार कराया.

Terror of fanatic in Bihar-Bengal

Please tell that on behalf of Thakurbadi in Aurangabad, Ramanavami’s Shobhayatra entered the market. A crowd of fundamentalists suddenly started stone pelting near Islam Toli Mutt. Thereby, people flared up. The fundamentalists did not want to give Shobhayatra away from there. The police officers present on the spot barely passed the procession.

ये खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते दूसरी और खड़े लोग भड़क उठे और एक-एक कर दुकानों में आग लगाई जाने लगी. एक दर्जन से अधिक दुकानों और गुमटियों को फूंक दिया गया. यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि कट्टरपंथियों द्वारा पत्थरबाजी के बाद ही दंगे की शुरुआत हुई, मगर मीडिया ने बड़ी ही आसानी से सारा दोष आरएसएस व् हिन्दुओं पर ही मढ़ दिया.

The news spread like a fire, and seeing the other people standing standing broke out and each one started setting fire to shops. More than a dozen shops and dummies were blown up. The point here to note is that after the rhetoric by the fundamentalists, the riots took place, but the media easily eased the blame on RSS and Hindus only.

इसी बहाने से नितीश कुमार पर कीचड उछाला जाना भी शुरू हो गया. वहीँ बंगाल में हिन्दुओं के अलावा पुलिस अधिकारी तक दंगों में घायल हो गए, मगर ममता से सवाल पूछने या बंगाल दंगों की खबर चलाने की जगह देश के मीडिया ने बड़ी सफाई से उस खबर को छिपा लिया.

With this excuse Nitish Kumar also started to throw the kitchad. In addition to the Hindus in Bengal, police officials were injured in the riots, but instead of asking questions from Mamata or playing the news of the Bengal riots, the country’s media hid that news with great cleanliness.

यह भी देखे

https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

SOURCE NAME POLITICAL REPORT

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