विडियो: यह है वो बहादुर जो तालिबानियों से लड़कर अकेला ही ले आया चौहान वंश के बहुमूल्य रत्न !

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शेर सिंह राणा का नाम शायद ही कभी अपने पहले सुना हो | बैंडिट क्वीन के नाम से कुख्यात फूलन देवी का नाम तो अपने सुना ही होगा| ये वाही फूलन देवी है जिसने बड़ी ही बेरहमी से 22 ठाकुरों को एक साथ मार दिया था, और इसी का बदला लेने के लियें शेर सिंह राणा ने फूलन देवी को मारने के बारें सोचा |

The name of Sher Singh Rana is rarely heard before. The name of the infamous Phoolan Devi in the name of Bandit Queen will be heard by you. This is the same Phoolan Devi, who had brutally killed 22 Thakurs together, and thought of taking the revenge of Sher Singh Rana to kill Phoolan Devi.

“फूलन देवी के पति उम्मीद के मुताबिक 25 जुलाई 2001 की सुबह शेर सिंह राणा खुद फूलन देवी से मिलने गया था। उसने अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से अपना फर्जी नाम बताया था। मुलाकात के वक्त शेर सिंह राणा ने अपना नाम शेखर बताया था। राणा ने फूलन के सामने उनकी एकलव्य सेना से जुड़ने की मंशा जाहिर की थी। फूलन से राणा की मुलाकात एकलव्य सेना की उत्तराखंड शाखा से जुड़ी सदस्य उमा कश्यप ने करवाई थी।

“According to the expectation of Phoolan Devi’s husband, Sher Singh Rana himself went to meet Phoolan Devi on the morning of 25 July 2001. He told his fake name for the purpose of hiding his identity. During the meeting Sher Singh Rana named his name Shekhar. Rana had expressed the intention to join his Eklavya army in front of Phoolan. Rana met Phoolan from Uda Kashyap, a member of Eklavya Army’s Uttarakhand branch.

और इसके बाद करीब 11 बजे फूलन अपने सरकारी आवास से सनसद भवन चली गईं। उनके जाने के बाद भी शेर सिंह राणा उनके घर पर ही बैठा रहा। क्यूंकि जिस मकसद से वो आया था वो अभी पूरा ही नहीं हुआ था। राणा तब तक फूलन के सरकारी आवास पर बैठ कर इंतज़ार करता रहा जब तक फूलन सांसद से वापस नहीं आईं। दोपहर के करीब 1.30 बज रहे थे तभी फूलन सांसद से वापस आकर अपने सरकारी आवास पहुंचीं ही थी की वहां घात लगाए बैठे राणा ने फूलन पर गोलियां बरसा दीं और फूलन की मौत तुरंत हो गई।

And after this, at around 11 o’clock, Phoolan went to the Parliament House from his official residence. Even after his departure, Sher Singh Rana was sitting at his house. Because the reason for which he came from was not yet complete. Rana waited till he sat on the official residence of Phoolan till Phulan did not come back from MP. About 1.30 pm, when Phoolan Singh came back from the MP, he had reached his official residence. Rana, who was hanging there, sacked the bullets at Phoolan and Phoolan died immediately.

पुलिस के मुताबिक फूलन को 6 गोलियां मारी गई थीं जो कि शेर सिंह और उसके एक साथी ने चलाई थीं | फूलन की हत्या करने के बाद शेर सिंह राणा ने खुद को कानून के हवाले कर दिया। इसके बाद उसने डालनवाला थाने में हुई प्रेस कांफ्रेंस में यह कबूला कि उसने बेहमी से फूलन के हाथों मारे गए 22 क्षत्रियों की हत्या का बदला लिया था।

According to the police, 6 bullets were killed by Phoolan who was run by Sher Singh and one of his companions. After killing Phoolan, Sher Singh Rana handed himself over to the law. After this, he confessed in the press conference held in Dalanwala police station that he had avenged the killing of 22 Kshatriyas who were killed by Phoolan.

और उनकी मंशा अफगानिस्तान जा कर सम्राट पृथ्वीराज चौहान की समाधि भारत लाना था।” इस बात की तस्दीक संयुक्त पुलिस आयुक्त के के पॉल ने भी दिल्ली में की थी। उन्होंने कहा था, वह खुद चलकर पुलिस थाने आया और आत्मसमर्पण कर दिया। ” मगर कहानी यहीं ख़तम नहीं होती दोस्तों कहानी तो यहाँ से शुरू होती है| आपने उपर पढ़ा की शेर सिंह राणा ने कबूला की उसका इरादा तो अफ्घनिस्तान जाकर पृथ्वीराज चौहान जी की अस्थियाँ लाने का था |

And their motives were to go to Afghanistan to bring the Samadhi of Lord Pratishtha Chauhan to India. “The fact that the Joint Commissioner of Police K Paul also did in Delhi. He had said that he himself came to police station and surrendered. “But the story does not end there. Friends story starts here. You read above that Sher Singh Rana had his intentions of Kabula to go to Afghanistan and bring the bones of Prithviraj Chauhan ji.

आइये जानते हैं उन्होंने यह सब कैसे किया यह सच है कि शेर सिंह राणा अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियाँ अफ़ग़ानिस्तान से लाकर वापिस हिंदुस्तान में सम्मान पूर्वक गंगा में विसर्जित करायी| मगर आपको यह सब दो लाइन में पढ़कर जितना आसान लग रहा है सच्चाई उस्ससे कहीं अधिक कठिन थी |शेर सिंह राणा फूलन देवी की हत्या के केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे फिर भी अफ्घनिस्तान पहुंचे वो भी बिना वीसा, पस्स्प्पोर्ट अवम तीन देशों की इज्जाजत के बिना और वहां से महाराज पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों को, जो की सदियों से मुघ्ल्लों के कब्जे में थीं और उनके बाद तालिबानियों के कब्जे में थी उंसे छुडाकर फिर तीन देशों की सीमाओं को पार करके हिंदुस्तान में वापिस सकुशल लाये|

Let’s know how he did all this. It is true that Sher Singh Rana brought the bones of last Hindu emperor Prithviraj Chauhan from Afghanistan and repatriated him in the Ganga in Hindustan. But it seems as simple as reading it in two lines. The truth was much more difficult than that. Sher Singh Rana was locked in Delhi’s Tihar Jail in the case of killing Phoolan Devi, but he also came to Afghanistan without visa, Without permission and from there, the bones of Maharaj Prithviraj Chauhan, who had been in possession of Mughals for centuries and after them was captured by the Taliban After rescuing the boundaries of three countries, they would be able to return to India.

तारिख १७ फरवरी २००४ हत्या करने के मात्र ४ साल के अंदर ही राणा तिहाड जेल से फर्रार हो चुके थे | वही तिहाड़ जेल जिसमें कैदी एक बार अन्दर गया तो या तो सुधर कर बहार निकलता है या फिर बाहर अति है उस्की लाश, और इसी वजह से राणा सुर्ख़ियों में आचुके थे और १७ मई २०१४ को ही फिर से गिरफ्तार करलिये गए | मगर इस बीच उन्होंने डुप्लीकेट पासपोर्ट बनवाया और कोलकाता से होते हुए के बांग्लादेश से पाकिस्तान और फिर अफ्घनिस्तान पहुँच गए और वहां भी जा कर खोज ही निकाली वो जगह जो तालिबानी आतंकियों से घिरी हुई थी |और फिर बनाया एक विडियो जिसे आप आगे देखकर रेह्जयेंगे दंग |और फिर वहां से अस्थियाँ लेकर वापिस हिंदुस्तान आये उत्तर प्रदेश के गज़ाबाद जिले में आकर अस्थियों का पूरे हिन्दू रीति रिवाज से विसर्जन कराया |यह ही नहीं राणा ने इस पूरे घटनाक्रम की vcd भी बनायीं थी |

Within 4 years of the date of murder, 17 February 2004, Rana had gone to Tihar Jail. In the same Tihar Jail, the prisoner once went inside, either goes out of the way, or out of the lotus body, and because of this, Rana had been in the headlines and was arrested again on May 17, 2014. But in the meantime he made a duplicate passport and through Kolkata, he reached Pakistan and then Afghanistan, and went there and searched only the place which was surrounded by Taliban militants. And then a video that you will see after seeing the riots, | And then from there, returning the bones from Hindustan came to Gazabad district of Uttar Pradesh and come from the entire Hindu customs of the atheists. Rgn made | it was Rana made by vcd of the development itself.

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