भारत की बहुत बड़ी वैज्ञानिक जीत, मेनचेस्टर विश्वविद्यालय ने किया आजतक का सबसे बड़ा खुलासा – पूरे विश्व ने मानी हार !

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हमारे सेक्युलर शिक्षा व्यवस्था ने हमे बताया की ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज, यानि गरूत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज यूरोप के आइसक न्यूटन ने की, आज किसी भारतीय बच्चे से ये सवाल कर लो की ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज किसने की तो वो न्यूटन का नाम लेगा |

Our secular education system told us that the discovery of the theory of gravity, that is, the theory of gravitation was discovered by Isaac Newton of Europe, ask an Indian child today to find out the theory of Gravity, who will take the name of Newton.

जबकि सच ये है की ग्रेविटी का सिद्धांत भारत के लोगों को न्यूटन के जन्म से पहले से पता था क्यूंकि इस सिद्धांत की खोज भारत के ऋषि मुनियों ने न्यूटन के जन्म से बहुत पहले ही कर लिया था, न्यूटन ने बस भारतीय ग्रंथों से इस सिद्धांत को चोरी किया और सबको बताने लगा की ग्रेविटी की खोज तो मैंने की है |

While the truth is that Gravity’s theory was that the people of India knew well before Newton’s birth because this sermon was discovered by Sage Munis of India long before Newton’s birth, Newton just gave this theory to Indian texts Stealing and began to tell everyone that I have discovered Gravity.

असल में ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज ऋषि कणाद ने हज़ारों साल पहले ही किया था, और उन्होंने बाकायदा संस्कृत में ग्रेविटी के सिद्धांत के बारे में लिखा भी था, न्यूटन का जन्म तो 1642 में हुआ था, उस से पहले से भारतीय ग्रंथों में ग्रेविटी का जिक्र था, ऋषि कणाद तो जीजस के जन्म से भी पहले ग्रेविटी की खोज कर अपने लिपियों में लिख चुके थे, यानि न्यूटन के जन्म से भी 1500 साल से ज्यादा पहले ही भारत के ऋषि ने ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज की थी |

In fact, Gravity’s theory was discovered by Rishi Kanad thousands of years ago, and he had also written about the theory of Gravity in Sanskrit, Newton was born in 1642, before that from Gravity in Indian texts It was mentioned that Rishi Kanad had also written in his scripts before the birth of Jesus, in the form of gravity, i.e., more than 1500 years before the birth of Newton, the sage of India The theory of rivet was discovered.

न्यूटन ने बस हिन्दू ग्रंथों को पढ़ा, उसका ट्रांसलेशन किया और खुद को प्रचारित कर दिया, पर अब न्यूटन के ही देश यानि ब्रिटैन के मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ जॉर्ज घेवरघिसी जोसफ ने स्वीकार किया है की यूरोप के बहुत से अविष्कार असल में भारतीय (हिन्दू) धर्मग्रंथों से लिए गए, और लोगों ने खुद को प्रचारित किया की उन्होंने खोज की, जिसमे न्यूटन भी शामिल है |

Newton just read, translated and publicized the Hindu texts, but now Professor of the University of Newton, Newton, i.e. the University of Manchester, Dr. George Gervard Georges has admitted that many inventions of Europe are actually Indian (Hindu) ) Were taken from the scriptures, and people publicized themselves that they searched, which included Newton.

डॉ जॉर्ज ने स्वीकार किया की, न्यूटन ने जो ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज का दावा किया था, वो असल में भारतीय ऋषि कणाद ने न्यूटन के जन्म से भी पहले लिख दिए थे, ग्रेविटी के सिद्धांत का अविष्कार न्यूटन ने नहीं बल्कि हिन्दू ऋषियों ने भारत में किया था |

Dr. George acknowledged that Newton had claimed the discovery of the theory of Gravity; it was originally written by Indian sage Kanad even before the birth of Newton; the theory of Gravity was not invented by Newton but the Hindu Rishis of India Did in

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनचेस्टर ने जांच के बाद खुलासा किया की, ब्रिटैन से जेसुइट मिशनरी के लोग 15 सदी में भारत गए थे,यानि न्यूटन के जन्म से पहले, और भारत के लोगों ने उन्हें ग्रेविटी के सिद्धांत की बातें बताई थी, जेसुइट मिशनरी भारत से कई सारी लिपियाँ ब्रिटैन ले आया, और बाद में 16वी सदी में न्यूटन ने इनका ट्रांसलेशन किया और इसके बाद घोषणा करि की उन्होंने ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज कर ली है |

After the investigation, the University of Manchester disclosed that the people of Jesuit missionary from Britain had gone to India in the 15th century, before Newton’s birth, and the people of India told him about the theory of Gravity, many from Jesuit missionary India All the scripts brought Brittany, and later Newton translated it into the 16th century, and then announced that he has discovered the theory of gravity.

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी ने ये भी बताया की जेसुइट मिशनरी भारत से बहुत सी लिपियाँ लेकर आयी थी, और यूरोप में उन्ही लिपियों का ट्रांसलेशन बहुत से लोगों ने किया और कई सारे अविष्कारों का दावा किया, अनेकों अविष्कार जिनका दावा यूरोप में किया गया, वो असल में भारत में पहले से ही खोज ली गयी थी, और न्यूटन के अलावा कई और लोगों ने इसी तरह की चोरियां करी, ग्रेविटी के सिद्धांत की खोज का श्रेय भारतीय ऋषि कणाद को जाता है न की न्यूटन को |

Manchester University also told that Jesuit missionary had brought many scripts from India, and in Europe many of those scripts were translated by many people and claimed many inventions, many invests, which were claimed in Europe, were actually In India it was already discovered, and besides Newton many more people used to do similar thieves, the discovery of the theory of Gravity, the Indian sage Kanaad goes to Newton.

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source nampopress.in

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