ईरान से आई इस ख़बर ने उड़ाये पीएम मोदी के होश, कांग्रेस की बड़ी गलती – खामियाजा भुगतेगा पूरा देश

एक ओर पाकिस्तान ने बॉर्डर पर घुसपैठ की कोशिशें तेज की हुई हैं, दूसरी ओर चीन भी डोकलाम में घुसपैठ को लेकर अड़ा हुआ है l दो मोर्चों पर सरकार निपटने की कोशिश कर ही रही थी कि अब ईरान ने भी भारत की पीठ में खंजर घोंपते हुए ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि खाड़ी देशों पर भारत आखिर कितना निर्भर रह सकता है l

On one hand, Pakistan has intensified efforts to infiltrate the border; On the other hand, China is strained with infiltration in Dokalmal. The government was trying to tackle the two fronts, now Iran has dug its backs in India. It has forced to think how much India can depend on the Gulf countries.

ईरान ने फरजाद बी गैस फील्‍ड का काम भारत की जगह रूसी कंपनी को दे दिया है और ईरान ने इसके लिए रूसी ऊर्जा कंपनी गजप्रोम के साथ समझौता कर भी लिया है l

Iran has given the job of Farjad B Gas Field to the Russian company instead of India and Iran has also entered into an agreement with the Russian energy company, Gazprom.

आपको बता दें कि फरजाद बी गैस फील्‍ड को खोजने में भारत सरकार की कंपनी ने ईरान की मदद की थी और उस वक़्त शर्त ये थी कि बदले में ईरान वहां से गैस निकालने का काम भारत को देगा लेकिन गैस फील्ड की खोज होने के बाद ईरान अपने वादे से साफ़ मुकर गया l

Let us tell you that the Government of India’s company had helped Iran to find Farjad B Gas Field and at that time the condition was that in return, Iran will give it to India to remove gas from there but after discovering the gas field, Iran Void

दरअसल 2008 में भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने अपनी अत्याधुनिक तकनीक के इस्तमाल से ईरान की इस गैस फील्ड को खोजा था और चीन के बाद भारत ईरान से सबसे ज्यादा तेल आयात करता है, यानी ईरान को भारत से प्रतिवर्ष मोटी कमाई होती है l

Indeed, ONGC Videsh of India, in 2008, used its latest technology to find this gas field of Iran and after China, India imports the highest oil from Iran, meaning that Iran earns huge revenue annually from India.

पिछले दिनों अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण अमेरिका समेत कई देशों से आर्थिक प्रतिबन्ध झेल रहे ईरान से उस नाजुक वक़्त में भी भारत ने दगा नहीं किया और उससे तेल आयात करना जारी रखा था, लेकिन आर्थिक प्रतिबंध हटते ही ईरान के सुर बदल गए और उसने तेल और गैस की बेहतर कीमत के लिए आक्रामक रुख अपना लिया, जबकि भारत अपनी कंपनियों के पक्ष में ईरान से उदार व्यवहार की उम्मीद कर रहा था, क्योंकि आड़े वक़्त में भारत ने ईरान का साथ जो दिया था l

In the last days due to its nuclear program, India has not reprimanded Iran from that country, including economic sanctions from many countries including the US, and continued to import oil from it, but the tension of Iran changed as the economic sanctions had changed, And took aggressive approach to better price of gas, while India was hoping for liberal behavior from Iran in favor of its companies, because at the helm What India has given to Iran

अब दगाबाज ईरान ने योजना बनायी कि जिस गैस फील्ड को भारत की कंपनी ने खोजा है, उसका एक बड़ा हिस्सा अन्य देशों की कंपनियों को दे दिया जाए और भारतीय कंपनियों के लिए केवल थोड़ा सा हिस्सा छोड़ा जाए l

Now treacherous Iran planned that a large part of the gas field discovered by the company of India should be given to companies of other countries and only a small part of the Indian companies should be left out.

भारतीय कंपनी ओएनजीसी की ओर से ईरान को गैस फील्ड विकसित करने के लिए 11 बिलियन डॉलर के निवेश का प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन ईरान ने दिखा दिया कि वो मुनाफे के लिए किसी को भी धोखा दे सकता है l अब इतने बड़े विश्वासघात के बाद भारत सरकार ने एक्शन लेते हुए ईरान से तेल आयात को 20 फ़ीसदी तक कम कर दिया है l

On behalf of ONGC, Indian company ONGC has also proposed an investment of 11 billion dollars to develop gas fields, but Iran showed that it could deceive anyone for profit. Now after the great betrayal, India By taking action, the government has reduced oil imports from Iran by 20 percent.

भारत के इस कदम से तिलमिलाए ईरान ने भारत को होने वाले तेल निर्यात के भुगतान की अवधि को 3 महीने से घटाकर 2 महीने करने का फैसला ले लिया है और इसके साथ ही उसने भारतीय कंपनियों को समुद्री लीज़ पर दी जा रही 80 फीसदी की छूट को घटाकर 60 फीसदी कर दिया है l

Tarnished by this move of India, Iran has decided to reduce the period of payment of oil exports to India from 3 months to 2 months and simultaneously it will offer 80% discount on maritime lease to Indian companies. Reduced to 60 percent.

यानी अब भारतीय तेल कंपनियों को 2 महीने में ही तेल कीमत का भुगतान कर देना होगा और अब उन्हें समुद्री भाड़ा भी सामान्य दर का 40 फीसदी चुकाना होगा l

That is, the Indian oil companies will have to pay oil price within two months and now they will have to pay 40% of the normal rate of sea freight.

इस मामले पर ईरान का कहना है कि भारतीय सरकारी कंपनियों के साथ उसका समझौता केवल गैस फील्ड की खोज और रिसर्च के लिए था, जो अब पूरा हो चुका है. इस समझौते में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि वो भारतीय कंपनियां ही इस गैस फील्ड का विकास करके गैस निकालने का काम करेंगी l ईरान का कहना है कि वो भारत के साथ ही गैस फील्ड में काम करने के लिए बाध्य नहीं है l इसके साथ ईरान ने गैस निकालने के लिए रूसी गेजप्रोम ऑयल कंपनी से समझौता भी कर लिया l

On this matter, Iran says that its agreement with Indian government companies was only for the discovery and research of the gas field, which has now been completed. It has not written anywhere in this agreement that Indian companies will work to evolve gas by developing this gas field. Iran says it is not bound to work in the gas field along with India. To compromise with the Russian Geysprom Oil Company,

दरअसल ये समझौता कांग्रेस सरकार के दौरान ख़त्म हुआ था, घोटाले करने में व्यस्त कांग्रेस सरकार ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया l कांग्रेस सरकार द्वारा फैलाये रायते को समेटने के लिए और समझौते से जुडी इस डील को करने की पीएम मोदी ने काफी कोशिशें की l पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति हसन रौहानी के बीच पिछले साल इस गैस फील्ड को लेकर बातचीत भी हुई, लेकिन सकारात्मक हल नहीं निकल पाया l

In fact, this agreement was exhausted during the Congress government, the Congress government busy in scams did not pay attention to it. PM Modi has made a lot of efforts to reconcile the opinion of the Congress government and to deal with this deal related to the deal. Between PM Modi and Iranian President Hassan Rauhani, the gas field was discussed last year, but a positive solution was not found.

ईरान के मजलिस एनर्जी कमीशन के प्रवक्ता असदोल्लाह घरेखानी ने स्पष्ट कह दिया कि भारतीय कंपनी के साथ केवल फरजाद-बी गैस फील्ड में रिसर्च का समझौता था, जो अब पूरा हो चुका है और उस समझौते में ये कहीं नहीं लिखा है कि गैस निकालने का कॉन्ट्रैक्ट भी भारत को दिया जाएगा, ईरान अपने फायदे के मुताबिक दूसरा साथी भी ढूंढ सकता है l

Iran’s Majlis Energy Commission spokesman Asodollah Gharkani made clear that the only agreement with the Indian company was the agreement of research in the Farjad-B gas field, which has now been completed and in that agreement it has not written anywhere that the contract for the removal of gas It will also be given to India, Iran can find another partner as per its own advantage.

लिहाज़ा कांग्रेस सरकार की इस गलती का खामियाजा अब पूरा देश भुगतेगा और जो हक भारत का था उसे अब नहीं मिलेगा l

Therefore, the fault of the Congress government’s fault will now be paid by the whole country and the right of the country will not be available now.

https://youtu.be/neA9j-iFBhQ

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=aGHeWHD0uXg

https://www.youtube.com/watch?v=xlRRjGN7n7U

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