PM मोदी का एक तीर से दो शिकार बूँद बूँद को तरसेगा नापाक और ……

jammu kashmir

नई दिल्ली : पाकिस्तान हमेशा से भारत के लिए सबसे बड़ा सर दर्द रहा है. आजादी के बाद से ही पाकिस्तान, भारत के खिलाफ तरह-तरह की साजिशों को अंजाम देता आया है. नेहरू और जिन्ना की करतूतों का अंजाम भारत आज तक झेल रहा है. कांग्रेस भले ही तुष्टिकरण के चलते पाकिस्तान के खिलाफ कोई कदम ना उठा पायी हो, मगर पीएम मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा एक्शन लिया है, जिससे ना’पाक का सबसे बुरा सपना सच होने जा रहा है.

New Delhi: Pakistan has always been the biggest headache for India. Since independence, Pakistan has come out with a series of conspiracies against India. India has been facing the consequences of Nehru and Jinnah till today. The Congress may not have taken any action against Pakistan due to appeasement, but PM Modi has taken such a action against Pakistan, which is going to be the worst nightmare of Na’pak.

किशनगंगा प्रोजेक्ट का काम पूरा, मोदी करेंगे उदघाटन
भूख-प्यास व् अकाल से ग्रस्त होने का पाकिस्तान का दुःस्वप्न अब सच होने जा रहा है. भारत के जिस प्रोजेक्ट का पाकिस्तान पुरजोर विरोध करता आया है, उसी 5750 करोड़ रुपये के किशनगंगा हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का काम पूरा हो गया है और पीएम मोदी अगले महीने इसका उदघाटन करेंगे.

Kishanganga project will be completed, Modi will inaugurate
Pakistan’s nightmare of hunger and thirst and famine is going to come true. The project of India’s Kishanganga Hydro Electric Project worth Rs. 5750 crores has been completed and the project which has been strongly opposed by Pakistan, and PM Modi will inaugurate it next month.

पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट में खूब अड़ंगे लगाए. पाकिस्तान इस मसले को वर्ल्ड बैंक तक ले गया, मगर पीएम मोदी की कूटनीति के कारण वर्ल्ड बैंक में भी पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी. पाकिस्‍तान इस मसले को इंटरनेशनल कोर्ट ले जाना चाहता था, मगर मोदी के आगे उसकी एक ना चली.

Pakistan has put a lot of pressure in this project. Pakistan took this issue to the World Bank, but due to PM Modi’s diplomacy, Pakistan also had to face the World Bank. Pakistan wanted to take this issue to the International Court, but Modi did not go ahead with his one.

भारत की बिजली की कमी होगी ख़त्म
पाकिस्तान के विरोध के बावजूद पीएम मोदी ने झेलम-चिनाब की सहायक नदियों पर दो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्‍ट पर काम शुरू करवाया था. इसमें किशनगंगा प्रोजेक्‍ट 330 मेगावाट का है, जबकि रातले प्रोजेक्‍ट की क्षमता 850 मेगावाट है. किशनगंगा प्रोजेक्‍ट बन कर तैयार हो चुका है. नदी पर बाँध बनाया जा चुका है.

India’s lack of electricity will end
Despite opposition from Pakistan, PM Modi had started work on two Hydro Electric Projects on Jhelum-Chenab’s tributaries. The Kishanganga project is 330 MW, while the nightly project has a capacity of 850 megawatts. Kishanganga project has been completed. The dam has been built on the river.

इस प्रोजेक्ट के जरिये प्रतिवर्ष लगभग 171 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा, जिससे देश में बिजली की कमी ख़त्म हो जायेगी. मगर ये तो इस प्रोजेक्ट का एक छोटा सा फायदा भर है. असली फायदा तो ये है कि ये प्रोजेक्ट पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सामरिक ताकत को बढ़ाएगा.

Through this project, about 171 million units of electricity will be produced annually, which will reduce the power shortage in the country. But this is a small benefit of this project. The real advantage is that this project will enhance India’s strategic strength against Pakistan.

पाक के खिलाफ सामरिक ताकत बढ़ाएगा ये प्रोजेक्ट
एनएचपीसी के प्रोजेक्ट जनरल मैनेजर अमरेश कुमार ने इस बारे में बात करते हुए मीडिया को बताया कि भारत सिंधु जल समझौते के तहत अपने अधिकार का उपयोग कर रहा है. भारतीय सेना ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में काफी सहायता की व् सुरक्षा मुहैया करवाई.

These projects will boost tactical strength against Pak
Project General Manager of NHPC Amaresh Kumar told the media while talking about the fact that India is using its right under the Indus Water Treaty. The Indian Army has provided adequate assistance and security in fulfilling this project.

हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी के संजय कुमार ने बताया कि बाँध को बनता देखना गर्व की बात है. कई बार तो मुझे खुद को भी ऐसा लगा कि मानो मैं भी सेना का ही एक जवान हूँ, जो देश के लिए अपना दायित्व निभा रहा हूँ. वरना ऐसे हालातों में यहाँ टिकना संभव नहीं.

Sanjay Kumar of Hindustan Construction Company told that it is a matter of pride to see the dam being made. Many times I felt myself even as if I am a soldier of the army, who is carrying out my obligation to the country. Otherwise it is not possible to stay here in such situations.

इस बाँध के जरिये किशनगंगा से नदी के पानी को मोड़कर बिजली बनाने के लिए इस्तमाल किया जाता है और फिर एक नए रुट से पानी को वापस नदी में छोड़ा जाता है, जहाँ से वो पीओके की ओर जा रही झेलम में मिल जाता है. बिजली बनाने के लिए बाँध में तो काफी मात्रा में पानी रोका जाता है, ऐसे में यदि भारत ने बाँध एकाएक खोल दिया, वो भी तब जबकि नदी में काफी मात्रा में पानी पहले से हो, तो पाकिस्तान के कई इलाके बाढ़ में बह जाएंगे.

Through this dam Kishanganga is used to make the electricity by turning the water of the river and then the water is released back into the river from a new route, from where it gets in the Jhelum going towards PoK. In order to make electricity, sufficient water is stopped in the dam, in such a way that if India opened the dam suddenly, then even if there is already a lot of water in the river, many areas of Pakistan will be swept away in the flood.

क्या है सिंधु जल समझौता?
सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में हुआ। इस पर जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दस्तखत किए थे. समझौते के तहत छह नदियों- ब्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी भारत और पाकिस्तान को मिलता है. समझौते के मुताबिक, सतलज, व्यास और रावी का अधिकांश पानी भारत के हिस्से में रखा गया, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया.

What is the Indus Water Treaty?
The Indus Water Treaty was born in 1960. Jawaharlal Nehru and Ayub Khan had signed this on. Under the agreement six water bodies – Beas, Ravi, Sutlej, Indus, Chenab and Jhelum – get water from India and Pakistan. According to the agreement, most of the water from Sutlej, Vyas and Ravi was kept in the part of India, whereas most of the water from Indus, Jhelum and Chenab was in part of Pakistan.

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