NGT कोर्ट का बंगाल में ममता सरकार पर टूटा जबरदस्त कहर, इतनी बड़ी लापरवाही की चुकाई भारी कीमत, सन्न रह गए वामपंथी

नई दिल्ली : आज कल पूरा देश बढ़ते प्रदुषण से परेशान है खासतौर पर दिल्ली. लेकिन इसके पीछे बाकी राज्य भी कई हद तक ज़िम्मेवार हैं क्यूंकि वे इसके लिए जो कदम उठाये जाने चाहिए वे उन्हें नहीं उठा रहे हैं. ऐसे में अब NGT कोर्ट ने लाइन से सभी राज्यों को रिमांड पर ले लिया है पहले पंजाब फिर दिल्ली तो अब ममता बनर्जी के ऊपर कड़ा कहर टूट पड़ा है.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक कोलकाता और हावड़ा में वायु प्रदूषण कम करने में विफल रही पश्चिम बंगाल सरकार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। दो साल पहले ही एनजीटी ने इससे संबंधित निर्देश दिया था, लेकिन राज्य सरकार इस पर खरा नहीं उतर सकी.

कोलकाता और हावड़ा में वायु प्रदूषण कम करने में विफल रही पश्चिम बंगाल सरकार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। दो साल पहले ही एनजीटी ने इससे संबंधित निर्देश दिया था, लेकिन राज्य सरकार इस पर खरा नहीं उतर सकी. पीठ ने कहा कि उक्त आदेश इसलिए दिया गया क्योंकि एनजीटी के वर्ष 2016 के आदेश में वायु प्रदूषण रोकने के लिए जो उपाय सुझाए थे, उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू नहीं किया.

ऑफर तीन हफ्ते के अंदर ममता सरकार ने ये जुरमाना नहीं भरा तो दो प्रति महीने जुर्माने की राशि एक करोड़ रुपये बढ़ती जाएगी. मतलब जितना विलम्ब राशि उतनी ज़्यादा बढ़ती जायेगी.

बता दें राज्य में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए खंडपीठ ने वर्ष 2016 में पहले के निर्देश में एनजीटी द्वारा अनुशंसित कई उपायों को लागू नहीं करने के लिए यह जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने कोलकाता और हावड़ा के जुड़वां शहरों में डीजल वाहनों की संख्या कम करने के लिए वैकल्पिक तंत्र शुरू करने जैसे उपायों की सिफारिश की थी, धूम्रपान उत्सर्जन की निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग डिवाइस (आरएसडी) शुरू करने, कम्प्यूटरीकृत निगरानी स्टेशन तैयार करने को कहा गया था लेकिन राज्य सरकार ने इनमें से किसी भी आदेश का पालन नहीं किया।

अन्य उपायों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में डंपिंग साइटों में अपशिष्ट जलने से रोकने, जुड़वां शहरों में गैर-बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों की प्रविष्टि की निगरानी आदि का निर्देश भी दिया गया था जिसे राज्य सरकार ने नहीं माना है।

दो साल की मध्यवर्ती अवधि के बाद एनजीटी ने यह जानना चाहा था कि राज्य पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन निर्देशों को लागू करने के लिए कोई कदम उठाया था या नहीं। एनजीटी ने एक विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर 2016 के आदेश पारित किए थे, लेकिन पर्यावरणविद्

सुभाष दत्ता ने हाल में एक अवमानना ​​याचिका दायर की थी जिसके कारण ट्रिब्यूनल द्वारा जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को अनुवर्ती कार्रवाई योजना और जुर्माना के भुगतान के संबंध में आठ जनवरी 2019 तक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है

source:dd bharti

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