हाईकोर्ट में हुआ मनमोहन सिंह और कांग्रेस की ऐसी खौफनाक साजिश का पर्दाफ़ाश, दंग रह गया पूरा देश !

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नई दिल्ली : देश की सुरक्षा को खतरे में डालने और अपने वोट बैंक के तुष्टिकरण करने के लिए कांग्रेस सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. 2004 में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने सबसे पहला काम जो किया, वो था POTA क़ानून को हटाने का, जिसे बीजेपी ने पास किया था जब अटल बिहारी वाजपेयी पीएम थे. इस क़ानून के जरिये जांच एजेंसियां उन लोगों को गिरफ्तार करके पूछताछ कर सकती थीं, जिनपर आतंकी घटनाओं से जुड़े होने का शक होता था. मगर अपने वोटबैंक को और इशरत जहाँ व् यासीन भटकल जैसे आतंकियों को बचाने के लिए कांग्रेस ने सत्ता में आते ही इस क़ानून को हटा दिया था |

New Delhi: The Congress government has left no stone unturned to threaten the country’s security and appease its vote bank. The first thing Congress did when it came to power in 2004 was the removal of the POTA law, which the BJP had passed when Atal Bihari Vajpayee was PM. Through this law the investigating agencies could arrest and interrogate those people who were suspected to be involved in terrorist incidents. But to save the terrorists like their vote bank and Ishrat Jahin and Bhatkal, the Congress had removed this law when it came to power.

मगर अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर एक और बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है. मनमोहन सिंह ने जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी को अक्टूबर 2004 में निजी तौर पर पत्र लिखकर भरोसा दिलाया था कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक का दर्जा नहीं दिया जाएगा | आज दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस को उठाते हुए मनमोहन सिंह के उस फैसले पर सवाल उठाया है कि आखिर क्यों उन्होंने शाही इमाम से ऐसा वादा किया. इस पूरी खबर को पढियेगा जरूर, आप हैरान रह जाएंगे. मनमोहन सिंह का वो फैसला अब जांच के दायरे में आ गया है और कोर्ट ने पूछा है कि आखिर ऐसा वादा करने के पीछे मनमोहन सिंह का मकसद क्या था?

But now another very sensational disclosure has happened about former Prime Minister Manmohan Singh. Manmohan Singh had personally written a letter to the Imam Bukhari of Jama Masjid in October 2004 and assured that the Jama Masjid would not be given the status of a protected monument. Today, the Delhi High Court has raised the question of Manmohan Singh’s decision, raising the case, why he made such a promise to the Imam Imam. Of course, you will be surprised at this whole news. The decision of Manmohan Singh has now come under the purview of the investigation and the court has asked, what was the motive behind Manmohan Singh’s promise to make such a promise?

क्या है सारा मामला ?
दरअसल सुहैल अहमद खान नाम के एक व्यक्ति ने हाई कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की थी. पीआईएल में मांग की गई थी कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित किया जाए और उसके अंदर व् आसपास किये गए अतिक्रमण को हटाया जाए. पिछले साल नवंबर में सुहैल अहमद खान ने शाही इमाम के बेटे की दस्तारबंदी को चुनौती देते हुए भी एक पीआईएल दाखिल की थी और मस्जिद के मैनेजमेंट की सीबीआई जांच की मांग की थी | इसी पीआईएल पर सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने हाई कोर्ट को ‘मनमोहन काल’ की एक चिट्ठी सौंपी है. इस चिट्ठी में खुलासा किया गया है कि 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद यूपीए सरकार जामा मस्जि‍द को संरक्षि‍त स्मारक का दर्जा इसलिए नहीं दे सकी क्योंकि खुद प्रधानमंत्री ने ही शाही इमाम को ऐसा ना करने का वादा किया था |

What is the whole matter?
In fact, a person named Suhail Ahmad Khan filed a PIL in the High Court. PIL was demanded that the Jama Masjid be declared a protected monument and the encroachment surrounding it and the surrounding areas should be removed. In November last year, Suhail Ahmad Khan had also filed a PIL challenging the royal imam’s son and demanded a CBI inquiry into the management of the mosque. During the hearing on this PIL, the Archaeological Survey of India has handed over a letter to the High Court ‘Manmohan Kal’. In this letter, it has been disclosed that despite being in power for 10 years, the UPA Government could not provide the Jama Masjid as a protected monument because itself the Prime Minister had promised to not do the same to Imam Imam.

क्या लिखा है पत्र में ?
सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि मनमोहन सिंह ने यह पत्र 20 अक्टूबर 2004 को लिखा था. यानी प्रधानमंत्री बनने के ठीक बाद. पीएम ने चिट्ठी में लिखा था कि उन्होंने संस्कृति मंत्रालय और एएसआई को निर्देश दे दिया है कि वे मरम्मत का काम तय वक्त में पूरा कर दें. इस मरम्मत का अनुरोध इमाम ने 10 अगस्त 2004 के लेटर में किया था. पीएम ने उन्हें लेटर में यह भी बताया था कि मंत्रालय ने तय किया है कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जाएगा | हैरानी की बात है कि जामा मस्जिद एक संरक्षित स्मारक नहीं है लेकिन इसके बावजूद 1956 से भारत सरकार लगातार इसके रख-रखाव का काम अपने खर्च पर करती आ रही है. यानि जनता के टैक्स का पैसा एक धर्म की इबादत स्थल के रख-रखाव में खर्च होता रहा है, जोकि पूरी तरह से गैर-कानूनी है. जामा मस्जिद की इमारत पर शाही इमाम और वक्फ बोर्ड अपना दावा ठोकते आये हैं लेकिन इसके रख-रखाव का पैसा अपनी जेब से नहीं भरते बल्कि भारत के संस्कृति मंत्रालय से लेते हैं. अरे ये लोग तो बिजली का बिल तक जमा नहीं करते और हर जगह एयर कंडीशनिंग आपको दिख जायेगी |

What is written in the letter?
The most interesting thing is that Manmohan Singh wrote this letter on October 20, 2004. That is, immediately after becoming the Prime Minister. The PM wrote in the letter that he has instructed the Ministry of Culture and ASI to complete the repair work in due time. This repair was requested by Imam on August 10, 2004. The PM had also told him in the letter that the ministry has decided that the Jama Masjid will not be declared a protected monument. Surprisingly, the Jama Masjid is not a protected monument but in spite of this, since 1956, the Indian government has been continuously doing its maintenance work at its expense. That is, the public tax has been spent in the maintenance of the place of worship of a religion, which is totally illegal. Imperial Imams and Waqf boards have been claiming their claims on the building of Jama Masjid but do not fill up the maintenance money of their pockets but from the Ministry of Culture of India. These people do not deposit the electricity bill and air conditioning will be visible everywhere.

अब जानिये अंदर की बात !
आइये अब आपको बताते हैं वो राज की बात जो कोई मीडिया आपको नहीं बताएगा. दरअसल नियमानुसार यदि किसी इमारत को संरक्षित स्मारक का दर्जा दे दिया गया तो उसे सार्वजनिक मीटिंग या सम्मेलनों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. केंद्र से विशेष अनुमति लिए बिना एक संरक्षित स्मारक का उपयोग स्वागत, पार्टियों, सम्मेलनों या मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए नहीं किया जा सकता | लेकिन जामा मस्जिद अब राजनीतिक गतिविधियों, बैठकों, वोट बैंक की राजनीति और कई अन्य अवैध व्यवसायों का केंद्र बन चुका है. और भी ज्यादा चौंकाने वाली बात तो ये है कि 2004 में मनमोहन सिंह के पीएम बनने से पहले 2002 में ही जामा मस्जिद में चल रहीं आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों के बारे में और शाही इमाम अहमख बुखारी द्वारा मस्जिद का दुरुपयोग के बारे में दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी |

Now know the inside thing!
Let’s now tell you the matter of the secret which no media will tell you. Actually, if a building is given a protected monument status, it can not be used for public meetings or conferences. Without a special permission from the Center, a protected monument can not be used for reception, parties, conferences or entertainment programs. But Jama Masjid has now become a center for political activities, meetings, vote bank politics and many other illegal occupations. Even more alarming thing is that were running before Manmohan Singh became the Prime Minister in 2004, the Jama Masjid in 2002, the Delhi High Court about the terror and abuse of the mosque by about anti-state activities and Imam Ahmk Bukhari A petition was filed in

सब कुछ जानते हुए भी मौन रहे मनमोहन सिंह !
रईसुद्दीन नाम के एक शख्स ने एक पीआईएल दाखिल करके आरोप लगाया था कि, “अहमद बुखारी और उनके पिता ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों का अवैध इस्तेमाल शुरू कर दिया था और यहाँ सभी प्रकार की अवैध गतिविधियां, अवैध बाज़ार, आतंकवादी गतिविधियां यहाँ होती हैं और साथ ही कई असामाजिक तत्व भी इस स्मारक में आश्रय लेते हैं ” | जिसके बाद हाई कोर्ट ने इस मुद्दे की जांच करने के लिए दिल्ली सरकार के लेफ्टिनेंट गवर्नर को नोटिस जारी किया था. ये सब जानने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने अपने वोट बैंक की खातिर जामा मस्जिद में परोक्ष रूप से आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों को बचाये रखा. मनमोहन सिंह को शर्म आनी चाहिए कि आतंकवादी देश के लिए बड़ा ख़तरा बन गए, ये जानने के बावजूद वो मौन रहे और सोनिया गांधी के हाथों कठपुतली बने रहे |

Manmohan Singh, who was silent knowing everything!
A man named Raisuddin had filed a PIL alleging that, “Ahmed Bukhari and his father had started illegal use of the areas surrounding the Jama Masjid for their personal use and here all illegal activities, illegal market Terrorist activities are here, as well as many anti-social elements also take shelter in this memorial. ” After which the High Court issued notice to the Lieutenant Governor of Delhi Government to look into the issue. In spite of knowing this, the Congress government has indirectly protected terrorism and anti-national activities in Jama Masjid for its vote bank. Manmohan should be ashamed that terrorists became a big threat to the country, despite knowing this, he remained silent and remained a puppet in Sonia Gandhi’s hands.

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