कश्मीर में NIA, CRPF, NSG की एक साथ छापेमारी, हुआ ऐसा सनसनीखेज खुलासा, खुफिया एजेंसियों के साथ-साथ PM मोदी के भी उड़े होश !

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नई दिल्ली : जब देशद्रोही तत्व देश के अंदर ही घुल मिलकर घुस जाते हैं तब वे उस दुश्मन से भी ज़्यादा खतरनाक हो जाते हैं जो सीमा पार करके आ रहा होता है. ये देशद्रोही देश को अंदर ही अंदर से खोखला करने लगते हैं ओर इसकी कीमत हमारे जवानों को अपनी शहादत देकर चुकानी पड़ती है.

श्रीनगर जेल में NIA , CRPF , NSG कमांडो की ज़बरदस्त रेड:
हमने आपको पिछले महीने ही बहुत बड़ा खुलासा करके बताया था जब श्रीनगर के अस्पताल से एक आतंकवादी भाग गया था. जिसके बाद बड़ी चौंकाने वाली खबर सामने आयी थी कि दरअसल वो आतंकी भागा नहीं था उसे भगवाया गया था ओर उसकी प्लानिंग श्रीनगर के जेल में ही हो गयी थी. आज भी उसी जेल में सैकड़ों खूंखार आतंकवादी मज़े कर रहे हैं. आज उसी श्रीनगर की जेल में धमाकेदार NIA ने छापेमारी करी है जिसमे बेहद चौकने वाली चीज़ें हाथ लगी हैं.

हाथ लगी ऐसी चीज़े जिसे देख फटी रह गयी सबकी आखें:
अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी यानी NIA ने श्रीनगर सेंट्रल जेल पर छापा मारा है. उसके बाद जांच अधिकारीयों के हाथ ऐसी ज़बरदस्त ख़ुफ़िया चीज़ें हाथ लगी हैं जिसके बाद आप श्रीनगर की कैद आतंकियों की जेल नहीं बल्कि आतंकियों का अड्डा या स्वर्ग कहेंगे तो ज़्यादा बेहतर होगा.

आज उस वक़्त हड़कंप मच गया जब श्रीनगर की जेल में एक साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी के साथ सीआरपीएफ और एनएसजी कमांडोज ने धरपकड़ ओर छापेमारी करी. छापेमारी में श्रीनगर की सेंट्रल जेल से कई प्रतिबंधित सामान बरामद हुए हैं. इस खुलासे के बाद सबसे पहले 40 आतंकवादियों को गुप्त स्थान पर भेज दिया गया है. इन जेलों असिया अंद्राबी, यासीन मालिक जैसे अलगाववादी भी रह चुके हैं.

जेल में पल रहे हैं जिहादी:
श्रीनगर की सेंट्रल जेल में छापेमारी में एनआईए की करीब 20 टीमों, सीआरपीएफ जवानों और एनएसजी कमांडोज ने हिस्सा लिया है. इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने जेल की तमाम बैरकों के निरीक्षण के दौरान कई पाकिस्तानी झंडे, कई दर्जन मोबाइल फ़ोन अनेक सिम कार्ड की भरमार, आईपैड, हिजबुल आतंकी संगठन के पोस्टर, डाटा हार्डवेयर, कई जिहादी प्रतिबंधित किताबें, साहित्य भी बरामद हुआ है.

आपको लगता था कि अरे वाह आतंकवादी गिरफ्तार हो गया अब पुलिस पूछताछ में सब उगलवाएगी अब कोई चिंता नहीं. लेकिन आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जायेगी जब आप जानेंगे कि ये जेल आतंकवादियों के लिए स्वर्ग का काम कर रहीं थी. अंदर का एक एक जेल अधिकारी कौड़ियों के भाव बिक चुका है.

श्रीनगर जेल में पनप रहे आतंकवादी:
श्रीनगर की जेल आतंकवादियों के लिए होटल से ज़्यादा स्वर्गनुमा जगह बन गयी हैं ओर इस जेल में मौज से रह रहे और देश के खिलाफ साज़िश रच रहे मोस्टवांटेड आतंकवादी हैं, यही नहीं कुछ पाकिस्तानी खूंखार आतंकवादी भी श्रीनगर की इस जेल में देश के खिलाफ आराम से षड़यत्र रच रहे हैं.

एनआईए को पाकिस्तानी आतंकी संगठन अल बद्र के आतंकियों द्वारा श्रीनगर जेल में किसी बड़ी साजिश के होने के इनपुट मिले थे, इसके बाद एजेंसी ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया. NIA टीम ने छापे के दौरान जेल के हर कोने की बारीकी से तलाशी ली. तलाशी में ड्रोन की भी मदद ली गई. जिहादी साहित्य और हिज़्बुल आतंकी संगठन के पोस्टर मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों और जेल में बंद कैदियों से एनआईए के अधिकारी गहराई से पूछताछ करने में जुटे हुए हैं.

आतंकी भागा नहीं बल्कि भगवाया गया था:
बता दें पिछले महीने श्रीनगर की सेंट्रल जेल में बंद आतंकी नवीद जट शहर के महाराजा हरि सिंह अस्पताल में इलाज के दौरान हिरासत से फरार हो गया था. वहीं वारदात के बारे में बताते हुए एडीजी मुनीर खान ने कहा था कि नवीद के भागने की साजिश श्रीनगर की सेंट्रल जेल में ही रची गई थी। इसके लिए आतंकियों ने खुद उससे कई बार जेल में जाकर मुलाकात भी की थी.

चल रही हथियारों की ट्रेनिंग और भर्ती:
इसके बाद कुपवाड़ा से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था दानिश गुलाम लोन तथा सोहेल अहमद भट जिन्होंने बेहद ज़बरदस्त खुलासे में बताया था कि आतंकी संगठन अल बदर की ओर से भर्ती होने वाले युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग के लिए सीमा पार भेजा जाता है. इसकी साजिश सेंट्रल जेल के भीतर रची जाती है.

सीआईडी की रिपोर्ट ने खुलासा किया:
पिछले महीने ही जम्मू-कश्मीर सीआईडी की रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि श्रीनगर की सेंट्रल जेल आंतकवादियों की भर्ती करने का एक अड्डा बन गई है. यहां कैदी एक समानांतर प्रशासनिक ढांचा खड़ा कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है जेल अधिकारियों द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने इसे नजरअंदाज किया. रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान में सेंट्रल जेल की भूमिका इतनी महत्त्वपूर्ण हो गई है कि प्रत्येक नए आतंकवादी की भर्ती केवल जेल के भीतर से मंजूरी मिलने के बाद ही होती है.

जवानों के साथ खिलवाड़
ये बेहद ही शर्मनाक बात है एक तरफ यहाँ हमारे सेना के जवान अपनी जान हथेली पर रखकर इन आतंकवादियों को पकड़ते हैं. हालाँकि ज़्यादातर को एनकाउंटर में ठोक दिया जाता है, लेकिन कुछ को ख़ुफ़िया जानकारी हासिल करने के लिए गिरफ्तार भी करना पड़ता है. ऐसे में कई बार हमारे देश के जवान भी शहीद हो जाते हैं. देश की जनता को लगता है वो देश के नाम पर शहादत दे रहे हैं और वहां जेल प्रशासन की ऐसी मिलीभगत सेना के साथ कितना बड़ा धोखा है. इतनी गंभीर मुद्दा सामने आने के बाद अब तो सेना को अपनी खुद की जेल बनानी चाहिए, जिसमे कुख्यात आतंकवादी को रखा जाय. ये तो देश की सुरक्षा और जवानों के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है.

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