बड़ी खबर: कोर्ट ने सुनाया आज तक ये बड़ा फैसला, NDTV को लगा जोरदार झटका !

NDTV पर लगातार शिकंजा कसता ही जा रहा है जहाँ पर बोगस लेन-देन होने की वजह से NDTV के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई होनी है और जिसके खिलाफ हुई याचिका को भी अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।दिल्ली हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के फैसले के खिलाफ मीडिया हाउस एनडीटीवी की वह याचिका खारिज कर दी है

Continuous scandal on NDTV is being tightened, where the petition against NDTV has to be heard due to bogus transactions and the petition against it has now been rejected by the court.Delhi High Court has decided the income tax department’s decision Media House against NDTV has rejected the petition

जिसमें एनडीटीवी ने आयकर विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2008-9 और 2009-10 के लिए उसके खिलाफ पुन: आकलन की प्रक्रिया शुरू करने को चुनौती दी थी।अदालत ने कहा कि विभाग के पास यह मानने की वजह है कि संबंधित वर्षों के लिए दिखाया गया कुछ लेन-देन ‘बोगस’ था। यह खबर आते ही प्रणय रॉय के पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक कर रह गयी है।

In which NDTV had challenged the income tax department to initiate the process of re-assessment against him for the financial year 2008-9 and 2009-10. The court said that the department has reason to believe that it has been shown for the relevant years. Some transactions were ‘bogus’. As news comes, the land under the feet of Pranay Roy is slipping away.

कोर्ट में न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट और न्यायमूर्ति नाजमी वजीरी के पीठ ने विभाग द्वारा अस्थायी रूप से चैनल की अचल संपत्तियां, नॉन करेंट निवेश और कर रिफंड को कुर्क करने के आदेश को भी खारिज करने से इनकार कर दिया।आयकर विभाग को आशंका है कि एनडीटीवी इन संपत्तियों बेच सकती है।

In the court, Justice S. The bench of Justice Ravindra Bhat and Justice Najmi Waziri refused to reject the order to temporarily suspend the channel’s fixed assets, non-current investment and tax refunds. The IT department is suspecting that NDTV can sell these properties is.

अदालत ने एनडीटीवी बाकी की पुन: आकलन की प्रक्रिया और अस्थायी कुर्की आदेश को चुनौती देने की याचिका पर 10 अगस्त को निर्णय दिया था, लेकिन इस 42 पृष्ठ के आदेश को बुधवार को अपलोड किया गया है। अस्थायी कुर्की आदेश को उचित ठहराते हुए पीठ ने कहा कि एनडीटीवी इस संपत्तियों की बिक्री कर सकती है, इसको लेकर जताई जा रही आशंका उचित है और इससे कर देनदारी की वसूली की प्रभावित हो सकती है। इससे यह बात भी सामने आ जायेगी की आखिर NDTV पर उस समय की UPA सरकार ने कितनी मेहरबानियां की हुई थी और कहीं ऐसा तो नहीं कि NDTV के कुछ पत्रकार जैसे रवीश कुमार बरखा दत्त और निधि राजदान जैसे बिकाऊ पत्रकारों का भी हिसा इस दलाली में शामिल हो?

The court had on August 10 decided on the petition to challenge the rest of the NDTV rest and the temporary attachment order, but the order of this 42 page has been uploaded on Wednesday. Justifying the provisional attachment order, the bench said that NDTV can sell these properties, the fears being expressed about it may be appropriate and it may affect the recovery of tax liability. This will also reveal that after the NDATV, the UPA government had done so much time, and it was not such that some of the journalists of NDTV such as Raviish Kumar Barkha Dutt and Nidhi Razdan were also included in this brokerage. Ho?

कोर्ट में इस फैसले की अगली सुनवाई से यह बात आईने की तरह साफ हो जाएगी कि यह मामला न सिर्फ बोगस लेन-देन का है बल्कि इसके पीछे वो बड़ी मछलियां भी जाल में फंसेंगी जिन्होंने इस पूरे मामले में अपने मुनाफे के लिए कानून से खिलवाड़ करने की सोची थी।अब हथकड़ियां जल्द ही उन हाथों में हो होगी।

The next hearing of this verdict in the court will make it clear that this matter is not just a bogus transaction but the big fish will also be trapped in the net, who, for the sake of their profit, It was thought of.Now the handcuffs will soon be in those hands.

 

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