मोहन भागवत की एक आवाज पर एक होगी हिन्दू जातिया, जबर्दस्त भाषण से उड़े कट्टरपंथियों समेत पाकिस्तान के उड़े होश

hindu muslim

मेरठ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक चल रही है, और इस बैठक में 3 लाख हिन्दुओ ने भाग लिया है, सभी स्वयंसेवक, और इनकी सिर्फ एक ही पहचान – सभी के सभी राष्ट्रवादी हिन्दू, बाकि न कोई ब्राह्मण न क्षत्रिय न दलित और न ही वैश्य, सभी के सभी 1 सामान, सभी राष्ट्रवादी हिन्दू और भारत माता के पुत्र

The meeting of Rashtriya Swayamsevak Sangh is going on in Meerut, and in this meeting, 3 lakh Hindus have participated, all volunteers, and their only identities – all of them nationalist Hindus, none other Brahmin nor Kshatriya dalits neither Vaishya, all the 1 belongings of all, the sons of all nationalist Hindu and Bharat Mata

जो लोग कहते है की वो संघ को ख़त्म कर देंगे, देख लें वो, ये है संघ कर सको ख़त्म तो कर के दिखा दो !

Those who say that they will destroy the Sangh, see that they can do the union, then do it and show them!

3 लाख से ज्यादा राष्ट्रवादी इस बैठक में शामिल हुए, और 1 को भी पैसा देकर नहीं बुलाया गया था, उल्टा इन सभी ने अपनी जेब से पैसा दिया और बैठक के तमाम खर्च उठाये गए, ये राष्ट्रवाद ही है जो ये सभी स्वयंसेवक दूर दूर से अपने खर्च पर बैठक में पहुंचे

More than 3 lakh nationalists participated in this meeting, and 1 was not called for money, in contrast, all of them gave money from their pockets and all the expenses of the meeting were raised, this is nationalism which all these volunteers from far away Arrive at the meeting at your expense

3 लाख से ज्यादा स्वयंसेवको के लिए लगभग साढ़े 6 लाख टिफिन तैयार किये गए, 2 वक्त के खाने के लिए, और ये तमाम खाना आसपास के 1000 घरों में तैयार किया गया था, 1000 अलग अलग घरों में खाना बनाया गया, 6 लाख 50 हज़ार के लगभग टिफिन बनाये गए और स्वयंसेवकों को खाना दिया गया

About 2.5 million tiffins were prepared for more than 3 lakh volunteers, for 2 times to eat, and all these food was prepared in around 1000 houses, food was prepared in 1000 different houses, 6 lakh 50 thousand Almost Tiffin was made and volunteers were given food

किसी ने भी 1 बार भी नहीं पूछा की खाना दलित के घर से आया है, ब्राह्मण के घर से आया, क्षत्रिय के घर से आया, वैश्य के घर से आया, हर तरह के घरों से ये खाना आया और हर तरह के स्वयंसेवक ने इसी खाने को खाया, चाहे वो मोहन भागवत ही हो

No one has even asked 1 times that the food came from the house of the Dalit, came from Brahmin’s house, came from the house of Kshatriya, came from the house of Vaishya, it came from all kinds of homes and every kind of volunteer came to this Eat food, even if it is Mohan Bhagwat

इस देश के दुश्मन संघ के बारे में उलटी सीधी जानकारियां देश में फैलाते है, कोई कहता है संघ दलित विरोधी है, जबकि सच तो ये है की अगर आप संघ की किसी भी शाखा में जाएं, तो वहां आपसे पूछा ही नहीं जाता की आप किस जाति से हैं, अब किसी का नाम रमेश “यादव” हो तब पता चलता है ये यादव है, पर बहुत से ब्राह्मण, क्षत्रिय, दलित और वैश्य रमेश “कुमार” ही लगाते है, पर संघ में किसी की जाति कभी पूछी ही नहीं जाती ये एक तथ्य है

In this country, the information about enemy association spreads in the country, someone says that the Sangh is anti-Dalit, whereas the truth is that if you go to any branch of the union, then you are not asked where you are Now, when someone’s name is Ramesh “Yadav”, it is known that it is Yadav, but many Brahmins, Kshatriya, Dalits and Vaishya Ramesh use “Kumar”, but no one’s caste is ever asked in the Sangh. This is a fact I

नरेंद्र मोदी तो तेली हैं, क्या उनकी जाति पूछकर संघ ने उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर देश का प्रधानमंत्री बनने दिया ? संघ में कोई जाति वाद है ही नहीं, यहाँ सब सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रवादी हिन्दू है और माँ भारती के पुत्र हैं

Narendra Modi is a Teli, by asking his caste, the Sangh has allowed him to become the Chief Minister of Gujarat and then the Prime Minister of the country? There is no caste system in the Sangh, here all is just and only nationalist Hindu and mother is the son of Bharati

आपको एक बात और बताते है, फुर्सत हो तो गूगल कर लें, और हां वहां वामी साइट पर न जाये, महाराष्ट्र में संघ के शिविर में भीमराव आंबेडकर खुद गए थे, वहां के इंचार्ज से उन्होंने पूछा की – यहाँ बहुत लोग काम कर रहे है, आप बताइये की इनमे से दलित कितने है, तो शिविर के इंचार्ज ने आंबेडकर को बताया की, हमने कभी गिने ही नहीं की दलित कितने है, और किस जाति के कौन कौन लोग है, यहाँ सभी हिन्दू है, एक ही पहचान है सबकी, तब आंबेडकर ने स्वयं कहा था – ये जगह ऐसी है जहाँ भेदभाव नहीं !

Let me tell you one more thing, get it done if you are a Google, and yes, you should not go to the Wami site. Bhimrao Ambedkar himself went to Sangh’s camp in Maharashtra, from where he asked – Many people are working here. Tell us how many of the dalits are there, then the charge of the camp told Ambedkar that we have never counted how many Dalits are, and who are the people of which caste, all Hindus here, the same identity is everyone, Then Ambedkar himself had said – This is such a place where there is no discrimination!

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SOURCE NAME:POLITICAL REPORT

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