PM मोदी ने जो कहा कर दिखाया, कांग्रेस के इस सबसे बड़े नेता पर सर्जिकल स्ट्राइक, देश भर में मचा सियासी आतंक..

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नई दिल्ली : एक कहावत बहुत मशहूर है कि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी. कितने भी घपले बाज, घोटालेबाजी कर लें कितने ही साज़िशे रच ले कितने ही आरोप प्रत्यारोप करले लेकिन कानून के सही हाथों में आते ही कानून के शिकंजे से बचना नामुमकिन हो जाता है. अभी-अभी बहुत बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ आयी है. पीएम मोदी ने आखिरकार वो काम कर दिखाया जिसका उन्होंने वादा किया था. कांग्रेस के सबसे बड़े नेता पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है, जिसने सुबह सुबह लोगों को नींद से जगा दिया है.

सुबह सुबह पीएम मोदी की कांग्रेस के ऊपर सर्जिकल स्ट्राइक
अभी मिल रही खबर के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय वित्‍त मंत्री और वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को सीबीआई ने सुबह-सुबह चेन्‍नई से गिरफ्तार कर लिया है. कार्ति की गिरफ्तारी बहुचर्चित आईएनएक्स मीडिया के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है. सीबीआई का कहना है कि कार्ति जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, इसलिए सीबीआई ने उन्हें उनके घर में से दबोच लिया है.

इससे पहले कोर्ट के रहमोकरम पर चिदंबरम लंदन भाग गए थे. लेकिन जैसे ही वो लंदन से लौटे तुरंत सीबीआई एक्शन में आयी और दुबारा विदेश भागने से पहले ही चेन्नै स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे पहले करती चिदंबरम बार बार विदेश जाने की बात कर रहा था बेटी की पढाई का नाम लेकर लेकिन सीबीआई के ज़बरदस्त दबाव की वजह से कोर्ट इजाज़त नहीं दे सका.

अब बहुत जल्द कांग्रेस प्रेस कॉनफेरेन्स करके इसे बदले की कार्रवाई बता देगी. जब कार्रवाई नहीं होती तब कहते हैं अगर घोटाला किया है, हेराफेरी करी है और सबूत हैं तो जेल भेज दो.

सीबीआई के निशाने पर अब सारे खेल का मास्टरमाइंड
कोंग्रेसियों ने अपने 60 सालों के राज में देश को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सबसे बड़ी बात ये भी है कि लूट सबने मिल बाँट के की है. अपनी जान बचाने के लिए जांच एजेंसियों से लेकर न्यायपालिका तक में अपने चाटुकार भी घुसाए हुए हैं. मगर अब कोंग्रेसी नेताओं का भी चारा चोर लालू जैसा अंजाम होना तय है. इस केस की सीबीआई जांच में बाप चिदंबरम भी पूरे निशाने पर हैं. बेटे चिदंबरम के बाद अब बाप चिदंबरम का भी नंबर लगने वाला है.

गौरतलब है कि कि इससे पहले 26 फरवरी को दिल्ली की एक अदालत ने कार्ति चिदंबरम के चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) एस भास्कररमन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. भास्कररमन को आईएनएक्स मीडिया से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था

 

ता दें कि विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने आईएनएक्स मीडिया को वर्ष 2007 में विदेशी पूंजी जुटाने की अनुमति दी थी. इस मामले में कार्ति का नाम आया है। उस समय कार्ति + के पिता पी. चिदंबरम तत्कालीन यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे। ईडी ने यह भी दावा किया था कि सीए भास्कर रमन ने गलत तरीके से अर्जित संपत्ति के प्रबंधन में कार्ति की मदद की थी.

चिदंबरम के घर पर ईडी का छापा
यही नहीं इससे पहले हमने आपको बहुत बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 13 जनवरी को वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के दिल्ली स्थित घर पर छापा मारा था, वहां छापेमारी के दौरान उनके हाथ जो फाइल लगी है, उसने ईडी के अधिकारियों के होश उड़ा दिए. इस फाइल में ईडी को एक बेहद गोपनीय रिपोर्ट मिली है, जो शायद प्रधानमंत्री अथवा कोर्ट के अलावा किसी अन्य के पास होनी ही नहीं चाहिए थी.

हाथ लगे ऐसे ख़ुफ़िया दस्तावेज
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ईडी के सूत्रों ने बताया है कि यह अतिगोपनीय रिपोर्ट रिपोर्ट एयरसेल मैक्सिस घोटाले से जुड़ी है, जिसकी कॉपी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी. यानी ये रिपोर्ट केवल और केवल सुप्रीम कोर्ट के पास ही होनी चाहिए थी, तो फिर ये बेहद गोपनीय जांच रिपोर्ट आखिर चिदंबरम के पास कैसे पहुंच गयी?

यही नहीं जो रिपोर्ट सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में भेजी थी, उसपर हस्ताक्षर किये थे, मगर ईडी को पी चिदंबरम के घर से जो रिपोर्ट मिली है, उसपर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसका मतलब ये रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले ही सीबीआई दफ्तर से लीक होकर चिदंबरम के पास पहुंच गयी थी.

यहाँ स्थिति की गंभीरता को समझिये, इन कोंग्रेसी नेताओं के खिलाफ कोई फैसला क्यों नहीं हो पाता कभी भी? क्योंकि इनके पालतू हर जांच एजेंसी में घुसे हुए हैं, पैसों के लिए अपनी आत्मा तक बेच देने वाले ऐसे भ्रष्ट अधिकारी कोर्ट में किसी रिपोर्ट के पहुंचने से पहले ही इन भ्रष्ट नेताओं की टेबल पर उस रिपोर्ट को पहुंचा देते हैं.

जिसके बाद वकीलों के झुंड उस रिपोर्ट की मदद से पहले ही सजग हो जाते हैं और दलीलें तैयार कर लेते हैं. चिदंबरम तो खुद भी वकील है. कुछ इसी तरह से 2जी केस के आरोपियों को भी बरी करवा लिया गया. सिस्टम में अंदर तक घुन लग चुका है, जो इतनी जल्दी तो साफ़ नहीं होने वाला.

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