अभी अभी: PNB मामले में नया मोड़, बैंक के घोटाले पर सबसे बड़ा एक्शन, जिसे देख कांग्रेस समेत वामपंथियों में हडकंप..

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नई दिल्ली : देश में PNB बैंक के 12000 करोड़ के घोटाले ने देश को हिला के रख दिया था. जिसके बाद सीबीआई, ED , इन्कमटैक्स सब ने मिलकर करीब 7000 करोड़ से ज़्यादा की रकम नीरव मोदी मेहुल चौकसी की संपत्ति से वसूल कर ली है. इसमें PNB बैंक के ही पूर्व जीएम समेत 18 अधिकारीयों को गिरफ्तार किया गया है.

भारत के बैंकिंग इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा
कांग्रेस सरकार और अर्थशास्त्री प्रधनमंत्री के होते हुए इतना बड़ा कांड हो गया है और कभी कोई जांच नहीं करवाई गयी. तो वही अब खुद PNB बैंक पर बड़ी मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. देश के बैंकिंग के इतिहास में सबसे बड़ी घटना PNB के साथ होने जा रही है.

अभी मिल रही ताज़ा खबर अनुसार भारतीय बैंकिंग इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ होगा जब एक बैंक दूसरे बैंक को दिवालिया घोषित करेगा. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब नेशनल बैंक की ओर से जारी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoU) के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने करीब 1000 करोड़ रुपए के लोन दिए थे.

एक बैंक दूसरे बैंक को ही करदेगा डिफाल्टर घोषित
जिसे PNB को आने वाले कुछ ही दिनों में लौटाने होंगे. अगर पंजाब नेशनल बैंक ने 31 मार्च तक एक हजार करोड़ की राशि का भुगतान नहीं किया तो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया PNB को दिवालिया घोषित कर सकता है. साथ ही पीएनबी के लोन को भी (NPA)एनपीए की कैटेगरी में डाला जा सकता है.

इसके लिए कांग्रेस ही ज़िम्मेदार है कि उसने वक़्त रहते कोई एक्शन नहीं लिया. मनमोहन सिंह जैसा इतना बड़ा अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री पद पर दस साल तक बना रहा और चुपचाप आम आदमी का पैसा लुटता हुआ देखता रहा. यही वजह है कि आज भारत पर ये बदनुमा दाग PNB घोटाले के रूप में लगा है.

 

बैंक से सम्बंधित बड़े जानकारों का मानना है कि यदि किसी बैंक का नाम डिफाल्टर्स की सूची में है तो यह बहुत मुश्किल स्थिति है. हालांकि यह ऐसी परिसंपत्ति है जो अन्य एनपीए से काफी अलग है, जहां कारपोरेट घराने उधारकर्ता हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, सीनियर बैंकर ने इसे अजीब स्थिति बताया है. पहली बार किसी बैंक को टेक्निकल तौर पर डिफॉल्टर करार दिया जाएगा.’ फ्रॉड को देखते हुए बैंकों को बकाया रकम के लिए तुरंत पूरी प्रोविजनिंग करनी है और ऐसे लोन को एनपीए भी घोषित करना है. ऐसे नुकसान को दूसरे फंसे हुए लोन से अलग तरीके से दर्ज करना होता है, जिनमें डिफॉल्ट के 90 दिनों बाद एनपीए का टैग लगता है.

यूनियन बैंक के एमडी राजकिरण राय ने कहा, ‘हमारे लिए तो यह पीएनबी के सपॉर्ट वाले डॉक्युमेंट्स पर वैध दावा है. यह हमारे बही-खाते में फ्रॉड नहीं है. हम ऑडिटर्स से राय लेंगे. हालांकि, हम नहीं चाहते हैं कि पीएनबी को डिफॉल्टर के रूप में लिस्ट किया जाए. हमें सरकार या आरबीआई की ओर से दखल दिए जाने की उम्मीद है क्योंकि 31 मार्च तक रिजॉल्यूशन होना है.

एलओयू के इस्तेमाल पर रोक
एलओयू आमतौर पर व्यापार के लिए आसान और सस्ता साधन माना जाता है. कुछ बैंकों ने आरबीआई के अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा भी की है. हाल में एलओयू से धोखाधड़ी के मामलों का खुलासा होने के बाद रिजर्व बैंक ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी.

तो वहीँ इतने बड़े बैंक घोटाले ने देश को हिला के रख दिया है और RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन कोच्चि में आराम से पत्रकारों को भाषण दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था गिर रही है, बेरोज़गारी पर ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान देना होगा, कृषि उद्योग में है भविष्य. यही नहीं हमारा दोगला मीडिया भी रघुराम राजन से बैंक घोटाले पर सवाल करने के बजाय सवाल करता है कि वो ट्विटर पर क्यों नहीं हैं?

बता दें PNB घोटाले के बाद से बैंक घोटालों की जैसे झड़ी सी लग गयी है, OBC बैंक घोटाला, रोटोमैक पेन घोटाला, कनारा बैंक घोटाला, SBI, UNION बैंक, और हाल ही में िद्बि बैंक में भी कई करोड़ का घोटाला सामने आया था.

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SOURCE DAILY KHABAR

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