खास खबर: सऊदी अरब ने इजराइल को लेकर लिया बड़ा जबरजस्त फैसला, पाक मुस्लिम रोये खून के आंसू ! सभी मुस्लिम देशो में मचा हडकंप

नई दिल्ली : कट्टरपंथी आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने वाला है. सलाफी कट्टरपंथ की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है, ऐसे में आधी सदी से भी ज्यादा वक्त तक तेल पर निर्भर रहने के बाद सऊदी अरब अब कमाई के अन्य साधन तलाश रहा है. ऐसे में सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे देख पाकिस्तान समेत दुनियाभर के मुस्लिमों की मानो दुनिया ही हिल गयी है.

New Delhi: Radical terror is going to end the nomination from the whole world. Saudi Arabia is now coming to the knees, the father of terror in the guise of Salafi fundamentalist. In Saudi Arabia, there is a huge slowdown in the oil business for quite some time, after Saudi Arabia relied on oil for more than half a century, Saudi Arabia is now looking for other means of earning. In such a situation, Saudi Arabia has taken a decision, which is seen by the Muslims all over the world including Pakistan as the world has shaken.

इजराइल के साथ संबंध बहाली के लिए तैयार सऊदी अरब !
सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंध बहाली का प्रस्ताव पेश कर दिया है. जिसे देख दुनियाभर के उन कट्टरपंथी मुस्लिमों की दुनिया ही मानो हिल गयी है, जिन्हे जन्म से केवल यही सिखाया गया कि यहूदी उनके दुश्मन हैं. आइये अब आपको बताते है कि आखिर सऊदी ने ऐसा सनसनीखेज कदम उठाने का फैसला क्यों लिया.

Ready to restart relations with Israel, Saudi Arabia!
Saudi Arabia has proposed a proposal to restore relations with Israel. Who has seen the world of radical Muslims from all over the world shaken, who were taught only from birth that Jews are their enemies. Let us now tell you why Saeed has decided to take such a sensational step.

कंगाली के कगार पर सऊदी
दरसल 2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी, जिससे हालात बदल गए. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में, जहाँ अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी. वहां 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा.

Saudi on the verge of bankruptcy
After the conclusion of the 2014 oil business, there was a sharp slowdown, the situation changed. There is a considerable reduction in Saudi government revenue. The budget deficit record was $ 97 billion last year. This is the reason why Saudi Arabia, which is called the biggest economy of the Gulf region, where no tax was levied so far and the government also offered a lot of subsidies. There will be VAT on all services and products at the rate of 5% on the first quarter of 2018.

इजराइल से दोस्ती के पीछे स्वार्थ ?
इसके पीछे पैसों की यारी है, तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है और ऊपर से ईरान भी तेल बाजार में सऊदी अरब को अच्छी-खासी टक्कर दे रहा है. ऐसे में सऊदी अरब अब अपने दूसरे प्राकृतिक संसाधन यानी रेगिस्तान का रुख कर रहा है. सऊदी किंगडम हजारों किलोमीटर रेगिस्तानी जमीन पर नए-नए शहर बसाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नौकरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

Selfishness behind friendship with Israel?
There is a lot of money behind this, there is a huge slowdown in the oil business and above all, Iran is also giving a good deal to the Saudi Arabian market. In this way, Saudi Arabia is now moving towards its second natural resource ie desert. The Saudi Kingdom is working on plans to set up new cities on thousands of kilometers of desert land, so that jobs and foreign investment can be boosted.

इजराइल ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली कि वो रेगिस्तान में पानी की कमी व् अन्य प्राकृतिक सहूलियतों के बिना भी फल-फूल रहा है. ऐसे में इन शहरों को बसाने के लिए और उन्हें सभी सहूलियतों मुहैय्या कराने के लिए सऊदी अरब को इजराइल की तकनीक की जरुरत तो पड़ेगी ही. इसी चक्कर में सऊदी अरब ‘तेल के खेल’ की मुश्किलों को समझते हुए अब नई संभावनाएं तलाशने पर मजबूर हुआ है.

Israel developed such technology that it is also flourishing in the desert without water scarcity and other natural conveniences. In such a situation, Saudi Arabia will need Israeli technology to settle these cities and to provide them all the facilities. Understanding the difficulties of Saudi Arabia’s “Oil Sports” in this round, it is now forced to explore new possibilities.

अमेरिका की मदद से दोस्ती की पहल !
हालांकि सऊदी अरब, इजराइल के साथ दोस्ती काफी गुपचुप रूप से धीरे-धीरे कर रहा है, ताकि कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क ना जाएँ. अभी सब कुछ पर्दे के पीछे है, लेकिन इस्राइल के चैनल-10 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब ने इस्राइल के साथ समझौते का कदम बढ़ा दिया है. सदियों से जिन्हे अपना दुश्मन माना है, उनसे सीधे जाकर कैसे कह दें कि चलो दोस्ती कर लो. इसलिए इसके लिए सऊदी ने अमेरिका का सहारा लिया है.

Friendship initiative with the help of the US!
However, friendship with Saudi Arabia is very quietly making friendship with Israel so that radical Muslims do not flare up. Now everything is behind the scenes, but according to Israel’s channel-10 report, Saudi Arabia has stepped up the deal with Israel. For centuries, who have believed in their enemies, go straight from them and tell them that let’s be friends. So Saudi has taken the US support for this.

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकर कुश्नर और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुश्नर दोनों अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका के इजराइल से भी बहुत अच्छे संबंध हैं, इसलिए सऊदी अरब ने कुशनर के माध्यम से इजराईल के पास अपना संदेश पहुंचाया है. सऊदी अरब इजराइली व्यापारियों को वीजा देने पर राजी है.

According to the Israeli media reports, Crown Prince Muhammad bin Salman and Kushner, both of Kushner and the Saudi Arabians, by the advice of the American President Trump, are both good friends. There are also good relations with Israel in the US, so Saudi Arabia has conveyed its message to Israel through a Kushanar. Saudi Arabia agreed to give visa to Israeli businessmen.

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