अभी अभी: सुप्रीम कोर्ट ऐसी हरकत देख, इन वरिष्ठ पत्रकारों ने SC को दिया बड़ा झटका…

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है और भारत में गंगा जमुनी संस्कृति के तहत विभिन्न समुदायों के लोग शादियों से यहां प्यार और भाईचारे के साथ रहते हुए आ रहे है! आजादी के बाद बने संविधान के तहत सभी वर्ग के लोगों को वो अधिकार दिए गए है जिससे वो अपनी सामजिक स्थिति को बेहतर बना सके बिना किसी विभेद के! लेकिन राजनीती की आकांक्षा अपने राजनितिक स्वार्थ के लिए हमेसा से भारत की गंगा जमुनी संस्कृति को दुसित करते आयी है! यह बात काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि यतो धर्मस्य जया की बात करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अब उसी एक छद्म सेकुलर बाद के ऊपर उतर आई है जिसको देखकर इस देश में यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या इस देश को एक बार फिर से अपने कानून के ऊपर सोचना पड़ेगा क्योंकि संवैधानिक शक्तियों का जिस प्रकार से दुरुपयोग किया जा रहा है!

India is the world’s largest democratic country and under the Ganga-Jamuni culture in India, people of different communities are coming here with weddings with love and brotherhood! Under the constitution made after independence, people of all classes have been given the right to make their social status better without any difference! But the ambition of politics has come to nurture the Ganga Jamuni culture of India, for its political selfishness! It is very unfortunate that the Supreme Court of the Supreme Court, who has talked about the religion of Jaya, has now come down to the same paradoxical posture which has to be forced to think in this country whether this country will once again have its own law Will have to think above the way the constitutional powers are being misused!

आज सुप्रीम कोर्ट की इस रवैये की वजह से कोई भी व्यक्ति देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा करने को तैयार नहीं है पहले 2G केस में आरोपियों का छूट जाना उसके बाद से लालू यादव को ढाई सौ करोड़ के घोटाले में भी केवल 3 साल की सजा होना यह सारी बातें बताती है कि हमारे देश के कानून के अंदर बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जिन को दुरुस्त करने की बहुत आवश्यकता है तभी हमारा कानून ज्यादा सशक्त और मजबूत बन पाएगा और इसको लेकर किए जा रहे हैं सारे वादे भी जमीन पर उतर आएंगे लेकिन फिलहाल जो खबर हम आज आपको बताने जा रहे हैं उसको सुनकर हर उस बड़े सनातनी का हृदय व्यतीत होगा जो सदैव ही हिंदुत्व के बारे में सोचता है!

Today, because of this attitude of the Supreme Court, no person is willing to count on the judicial system of the country. Earlier, in the 2G case, the accused would be released, since then Laloo Yadav has been convicted only in the scam of Rs 2.5 crore. It says all these things that there are a lot of things inside the law of our country which needs a lot to be corrected only then our law will become more powerful and strong and All promises that are being done will also come to the ground. But at the moment, the news we are going to tell you today will be the heart of every big conscience, who always thinks of Hindutva!

इस बार एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय में गाए जाने वाले तमसो मा ज्योतिर्गमय वाली कविता को गाने के लिए केंद्र सरकार को एक नोटिस दिया है और कहा गया है कि यह हिंदुत्व को बढ़ावा दे रहा है इसके ऊपर कई लोगों ने अपनी उंगली उठाते हुए बताया है कि आ रहे हैं इतनी देर से क्यों कि खुद देश का सुप्रीम कोर्ट भी यतो धर्मस्य चयन के सिद्धांत पर चलता है तो इस हिसाब से सत्यमेव जयते को भी हटा देना चाहिए क्योंकि वह भी हिंदुत्व को प्रमोट करता है और इस हिसाब से तो अर्ली टू बेड अर्ली टू राइज वाली पोयम को भी हटा देना चाहिए क्योंकि यह क्रिश्चियनिटी को सपोर्ट करता है?

This time, hearing a public interest petition, the Supreme Court of India has given a notice to the central government to sing the poem Tamoso Ma Jyotigamayam in the Central School and it has been said that it is promoting Hindutva. Many people have raised their finger saying that they are coming so long that why the Supreme Court of India itself also runs on the principle of religion selection, then this is Should also remove Truth always wins the Saab because he also promoted Hindutva and accordingly should be early to bed removes the poet by Early to rise because it supports Christianity?

लेकिन आज राजनीती का स्तर इस कदर निचे गिरते हुए जा रहा है की अब आज कोर्ट द्वारा केंद्रीय स्कूलों में प्रातः प्रार्थना पर केंद्र सरकार से सवाल करना ये बताता है कि अब हम हिन्दू भाई बहन प्रार्थना के लिए भी कोर्ट के आदेश का इंतजार करेंगे क्या दिन आ गए है हिंदुस्तान के! राजनीती ने अब प्रार्थना का भी धर्म ढूंढ लिया लेकिन अफ़सोस की बात ये है की आतंकवाद का धर्म आज तक पता नहीं चला! अब ईश्वर से सद्बुद्धि की मांग करना और नेक राह पर चलने का आशीर्वाद मांगना भी धार्मिक हो गया है अब स्कूल में बच्चों की प्राथना पे भी सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान लेना किस ओर इसारा कर रहा है ये समझने में ज्यादा समय नहीं लगेगा!

But today the level of politics is declining so low that nowadays, questioning the Central Government on the request of central schools in the court today shows that now we will await the order of the court for Hindu Bhai Sister prayers. Hindustan has come! Politics has now found a religion of prayer, but it is a matter of regret that the religion of terrorism has not been known till date! Now seeking the blessings of God and seeking the blessings of righteousness, it has become religious now. Now it is not too much time to understand what is going on in the eyes of the Supreme Court on the prayer of children in school.

रोहित सरदाना, मानव गुप्ता, स्वेता सिंह और निशांत चतुर्वेदी जैसे पत्रकारों में तो ट्विटर पर अपनी राय/ नाराजगी भी जाहिर की है! उनके ट्वीट इस प्रकार हैं:-

ये भी देखें:

https://youtu.be/27wySC5YcBQ

https://youtu.be/yRjJWWjiQVA

source aajtak

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