सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया भारतीय सेना के खिलाफ जबरदस्त फैसला, गुस्से में आये जवान,अर्बन नक्सलियों व् जिहादी तत्वों की साजिश हुई नाकाम

नई दिल्ली : देश के कुछ इलाके जो चरमपंथियों के विद्रोह को झेल रहे हैं, वहां केंद्र सरकार द्वारा लगाईं गयी आफ्स्पा के खिलाफ बड़ा षड्यंत्र चल रहा है. कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व पिछले कई वर्षों से सरकार पर आफ्स्पा हटाने का दबाव बनाते आये हैं, मगर जब सरकार के सामने दाल नहीं गली तो अब सेना के जवानों को फंसाये जाने की साजिशें शुरू हो गयी हैं. देश की न्यायपालिका ने भी सेना के जवानों की बात सुनने से इंकार कर दिया है.

जवानों की याचिका खारिज“

अफस्पा मामले में अपने हितों को सुरक्षित करने की गुहार लेकर सेना के 356 जवानों और अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है. जवानों का कहना है कि आंतकवाद निरोधक अभियान के दौरान की गई कार्रवाई की भला कैसे सीबीआई या पुलिस जांच कर सकती है?

दरअसल सेना के जवान अपनी जान दांव पर लगा कर आतंकियों का खात्मा करते हैं, कई बार स्थानीय लोग इन आतंकियों का साथ भी देते हैं, ऐसे में उनके खिलाफ भी एक्शन लेना पड़ता है. मगर अब सेना के जवानों को सीबीआई व् पुलिस का डर दिखाया जा रहा है ताकि आतंकवाद विरोधी अभियान को कमजोर किया जा सके. ऐसा लगने लगा है कि सेना को आतंकियों के साथ-साथ सिस्टम व् न्यायपालिका में घुसे अर्बन नक्सलियों से भी लड़ना पडेगा!

`गुस्से में सेना के जवान!“

याचिका खारिज होने पर जवानों का कहना है कि इस बारे में कोर्ट का आदेश सेना का मनोबल तोड़ने वाला है. इससे आंतरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिए फैसले में कहा था कि AFSPA (आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट) वाले इलाकों में हुई मुठभेड़ की भी पुलिस या CBI जांच हो सकती है.

सेना के लोगों पर भी सामान्य अदालत में मुकदमा चल सकता है. सुप्रीम कोर्ट इन दिनों मणिपुर में हुए सेना के ऑपरेशन्स की CBI जांच की निगरानी भी कर रहा है. दरअसल, सेना के 356 जवानों और अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि देश की सुरक्षा के लिए आर्म्‍ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) के तहत कर्तव्य निर्वहन में किए कार्य के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर उनका उत्पीड़न न किया जाए.

ऐसे में उनके हित सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट दिशा निर्देश जारी करे. याचिका में यह भी मांग है कि सरकार को आदेश दिया जाए कि वह सैनिकों के खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित अभियोजनों और एफआईआर को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए.

अर्बन नक्सली व् जिहादी तत्व कर रहे हैं सेना के खिलाफ साजिश!“

याचिका में ये भी मांग उठाई गई थी कि केंद्र सरकार की पूर्व इजाजत के बगैर अफस्पा में प्राप्त शक्तियों के तहत की गई कार्रवाई के लिए कोई एफआईआर या अभियोजन न हो. उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ जांच हो जो कर्तव्य निर्वहन में लगे सैनिकों को दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दाखिल कर निशाना बना रहें हैं. अनावश्यक एफआईआर दर्ज कर परेशान किए गए सैन्य अधिकारियों को उचित मुआवजा दिलाया जाए.

याचिका में कहा गया था कि अफस्पा के तहत सेना के जवान देश में उग्रवाद और छद्म युद्धों को रोकने के लिए लड़ाई लड़ते हैं. ऐसे में अफस्पा प्रोटेक्शन के अंतर्गत सशस्त्र बलों को मिले अधिकारों में कमी किया जाना देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है.

अफस्पा कानून में संशोधन के बिना सैन्य अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. सैन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार की इजाजत लेनी होगी.

आपको बता दें कि यह याचिका सीमा पर कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा करने वाले जवानों का आत्मविश्वास और मनोबल बनाए रखने के लिए भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों की ओर से सामूहिक तौर पर दाखिल की गई थी.

याचिका में यह भी कहा गया था कि जवान अपने कर्तव्य निर्वहन और देश की संप्रभुता व सुरक्षा कायम रखने के लिए विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं. वे इसके लिए अपना जीवन न्‍यौछावर करने में भी नहीं हिचकते, लेकिन उनके सहयोगियों के खिलाफ कर्तव्य निर्वाहन मे किये गये इन कार्यो के लिए आपराधिक मामला दर्ज कर कार्रवाई हो रही है. जिससे उन्हें याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा. संविधान में भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा को सर्वोपरि माना गया है. ऐसे में अगर सेना को संरक्षण नहीं दिया गया तो देश की सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा होगा.

मगर ऐसा लगने लगा है कि देश के बाहर के दुश्मनों से पहले भारत के सिस्टम में घुसे अर्बन नक्सलियों व् जिहादियों का सफाया ज्यादा आवश्यक हो गया है. कहा जा रहा है कि शिक्षा संस्थानों, मीडिया के अलावा देश की न्यायपालिका तक में अर्बन नक्सलियों की घसपैठ भीतर तक हो चुकी है, जो राष्ट्रद्रोहियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और सेना के मनोबल को तोड़ने वाले फैसले ले रहे हैं.

source dd bharti news

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