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नई दिल्ली: हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद पर 2007 में हुए विस्फोट के मामले में मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद को सोमवार को हैदराबाद के नामपल्ली आपराधिक कोर्ट ने बरी कर दिया है. उनके साथ ही अन्य पांच आरोपियों को भी बरी कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण कोर्ट ने ये फैसला सुनाया. बरी किए गए अन्य पांच आरोपियों के नाम देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नबा कुमार सरकार, भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भारत भाई और राजेंद्र चौधरी हैं. आपको बता दें कि 2007 में मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट में नौ लोगों की मौत हो गई थी. वहीं करीब 58 लोग घायल हो गए थे.

New Delhi: The main accused Swami Aseemanand has been acquitted by Nampalli Criminal Court of Hyderabad on Monday in connection with the 2007 blast in the famous Mecca Masjid in Hyderabad. Along with them, the other five accused have also been acquitted. According to the information, the court ruled this verdict due to lack of evidence against the accused. The names of the other five accused acquitted are Devender Gupta, Lokesh Sharma, Swami Aseemanand alias Naba Kumar Sarkar, Bharat Mohanlal Ratneshwar alias Bharat Bhai and Rajendra Chaudhary. Let us tell you that nine people died in the blast in Mecca Masjid in 2007. About 58 people were injured there.

 

जानें क्या हुआ था ब्लास्ट वाले दिन
18 मई 2007 को जुमे की नमाज के वक्त दोपहर करीब 1:25 बजे मक्का मस्जिद में पाइप बम धमाका हुआ था. इस ब्लास्ट को मोबाइल की मदद से ऑपरेट किया गया था. ब्लास्ट में मौके पर ही करीब नौ लोगों की मौत हो गई थी. वहीं 58 लोग घायल हो गए थे. ब्लास्ट के बाद हुई जांच में सामने आया था कि जिस बम में धमाका हुआ उसे बम वजुखाना में संगमरमर की बेंच के नीचे लगाया गया था. इसे विशेष तौर पर नमाज के वक्त एक्टिव किया गया. घटना के समय मस्जिद में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे.

Know what happened blast day
On May 18, 2007, at the time of Jumu prayers, at around 1:25 pm, a pipe bomb was exploded in the Mecca Masjid. This blast was operated with the help of mobile. In the blast, only nine people died on the spot. At the same time 58 people were injured. The investigations after the blast came to light that the bomb that was blasted was planted under a marble bench in a bomb vest. It was specially activated at the time of prayer. There were thousands of people present in the mosque at the time of the incident.

— ANI (@ANI) April 16, 2018

मस्जिद में मिले थे 3 और बम, पुलिस फायरिंग में गई थी 5 की जान
ब्लास्ट के बाद मस्जिद में तीन बम और मिले थे, जिनमें से एक दीवार के पास और दो वजुखाने के पास मिले थे. घटना से आक्रोशित लोगों ने विरोध में प्रदर्शन किया था. इस दौरान पुलिस को स्थिति काबू में लेने के लिए फायरिंग करनी पड़ी थी, जिसमें पांच लोग मारे गए थे. ब्लास्ट में शुरुआती जांच पुलिस ने ही की थी, लेकिन बाद में इस केस को सीबीआई को सौंप दिया गया था. साल 2011 में एनआईए ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट को ये केस दे दिया गया. असीमानंद और लक्ष्मण दास महाराज सहित कई नेताओं को 19 नवंबर 2010 को गिरफ्तार किया गया था.

3 more bomb found in mosque, police went firing 5 lives
After the blast, three bombs were found in the mosque, one of which was found near the wall and two vajukahane. People protested by the incident had demonstrated in protest. During this time, the police had to firing in order to control the situation, in which five people were killed. Initial investigation in the blast was done by the police, but later this case was handed over to the CBI. In 2011, the NIA granted this case to the Mecca Masjid Blast. Several leaders including Asimanand and Laxman Das Maharaj were arrested on November 19, 2010.

I had expected it. All the pieces of evidence were engineered, otherwise, there was no Hindu terror angle: RVS Mani, former Under Secretary, Ministry of Home Affairs on all accused in Mecca Masjid blast case acquitted pic.twitter.com/d8lDnqE5cG

— ANI (@ANI) April 16, 2018

11 साल से चल रहा था केस
पिछले 11 सालों से कोर्ट में चल रहे इस मामले में अब तक कई मोड़ आ चुके हैं. मामले के दो मुख्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंगरा को पुलिस इतने सालों में भी पकड़ने में कामयाब नहीं हो सकी. एक प्रमुख अभियुक्त और आरएसएस के कार्यवाहक सुनील जोशी को जांच के दौरान ही गोली मार दी गई थी. वहीं गवाह बनने वाले 160 लोगों में से 54 चश्मदीद अपनी गवाही से मुकर गए थे.

The case was going on for 11 years
For the last 11 years, there have been many changes in the case in the court. The two main accused Sandeep V. Dange and Ramchandra Kalsangra could not get the police caught in so many years. A prominent accused and RSS activist Sunil Joshi was shot during the investigation. At the same time, 54 out of 160 witnesses who had witnessed turned back from their testimony.

स्वामी असीमानंद को इस साल मार्च में अजमेर ब्लास्ट केस में बरी कर दिया गया था. मालेगांव और समझौता धमाके में भी उन्हें जमानत दी जा चुकी है.

Swami Aseemanand was acquitted in the Ajmer Blast case in March this year. They have also been granted bail in Malegaon and Samjhauta blast.

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source political report

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