इस बड़े नेता के गुंडों ने यूपी मे कर डाला ये बेहद शर्मनाक कांड, ऐसे मंज़र देख फट पड़ा योगी का गुस्सा

मेरठ : सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. लोकतंत्र में विरोध करना पूरी तरह से जायज भी है. मगर लाशों की राजनीति करने वाले कुछ गिद्धों ने दलितों के आंदोलन को हाईजैक करके इसे हिंसक रूप दे दिया है. हिंसा फैलाकर ऐसे नेता अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने में लगे हैं और बदनामी दलित आंदोलन की हो रही है. बाकी राज्यों में भले ये सब चल जाता हो, मगर योगी आदित्यनाथ के राज में ये सब नहीं चलने वाला.

Meerut: People have come to the streets in protest against the change in the SC-ST Act by the Supreme Court. Opposition in democracy is also justified. But some vultures doing corpses of the corpses have hijacked the movement of the Dalits and made it violent. By spreading violence, such leaders are engaged in straightening their political owls and the infamous Dalit movement is being done. All these may go on in the rest of the states, but in the reign of Yogi Adityanath, all these things are not going to run.

राजनीति के लिए बाहुबली बसपा नेता ने जलाया मेरठ
खबर है कि सीएम योगी ने हिंसा फैलाने वालों के साथ सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं. बिना किसी वोटबैंक की परवाह किये सीएम योगी अपने प्रदेश की सुरक्षा में लगे हुए हैं. यूपी पुलिस भी एक्शन में है और हिंसा फैलाने के मामले में यूपी पुलिस ने पूर्व विधायक व बसपा नेता योगेश वर्मा गिरफ्तार कर लिया है.

SSP Manzil Saini of Meerut has revealed that former MLA and BSP leader Yogesh Verma is the main conspirator for spreading violence in the city. Hijacking the Dalit movement, this leader spread riot in Meerut. The mob provoked the crowd and threw a police checkpoint with the help of their goons.

मेरठ की एसएसपी मंजिल सैनी ने खुलासा किया है कि पूर्व विधायक और बसपा नेता योगेश वर्मा ही शहर में हिंसा फैलाने के मुख्य साजिशकर्ता है. दलित आंदोलन को हाईजैक करके इसी नेता ने मेरठ में दंगे फैलाये. भीड़ को उकसाया और अपने गुंडों की मदद से पुलिस चौकी फूँक डाली.

Police charged with sticks
Even the common people were not spared and this leader’s goons burnt the carts of ordinary people. The leader of the leader, who was forced to burn entire Meerut in the light of politics, also carried stones at SSP and DM’s car on Ambedkar road of Kankarkheda. After which the police arrested BSP leader Yogesh Verma, along with his goons.

लाठी चार्ज करके पुलिस ने धर दबोचा
आम लोगों को भी नहीं बक्शा गया और इस नेता के गुंडों ने आम लोगों की गाड़ियां तक जला दीं. राजनीति के चक्कर में पूरे मेरठ को जला डालने पर उतारू इस नेता के गुंडों ने कंकरखेड़ा की अंबेडकर रोड पर एसएसपी और डीएम की गाड़ी पर पथराव भी किया. जिसके बाद पुलिस ने बीएसपी नेता योगेश वर्मा को उसके गुंडों समेत गिरफ्तार कर लिया.

Notorious BSP leader for illegal occupation and felony on land
Tell that the BSP leader Yogesh Verma is known as a Bahubali leader and is notorious for felony, grandfathering in the area. In 2007, Yogesh Verma made the MLA for the first time contesting the election on the BSP ticket. Yogesh Verma is also notorious for illegal occupation of others’ land.

जमीनों पर अवैध कब्जे व् गुंडागर्दी के लिए कुख्यात बीएसपी नेता
बता दें कि बसपा के का नेता योगेश वर्मा एक बाहुबली नेता के रूप में जाना जाता है और इलाके में गुंडागर्दी, दादागिरी करने के लिए कुख्यात है. 2007 में योगेश वर्मा पहली बार बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बना था. योगेश वर्मा दूसरों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने के लिए भी कुख्यात है.

Notorious BSP leader for illegal occupation and felony on land
Tell that the BSP leader Yogesh Verma is known as a Bahubali leader and is notorious for felony, grandfathering in the area. In 2007, Yogesh Verma made the MLA for the first time contesting the election on the BSP ticket. Yogesh Verma is also notorious for illegal occupation of others’ land.

रासुका के अलावा कई अन्य धाराओं में गिरफ्तार
योगी राज में क़ानून की सत्ता चलती है, लिहाजा पब्लिक को परेशान करने वाले, पब्लिक की संपत्ति को जलाने वाले इस गुंडे नेता व् उसके सभी गुंडे समर्थकों पर रासुका के साथ बवाल, आगजनी, पथराव, लूटपाट व तोड़फोड़ की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा. योगी के तेवरों को देख कर साफ़ जाहिर है कि ये दबंग नेता अब लम्बे वक़्त के लिए जेल जाएगा और इसकी जमानत तक नहीं होगी.

Arrested in many other streams besides Rasuka
In the Yogi Raj, the rule of law goes on, therefore, a case will be registered against the rowdy, arson, stone pelting, robbery and sabotage along with Rasuka on this bully leader and all his hideous supporters who are harassing the public, causing the public’s assets to be burnt. . Seeing the yogi’s tactics, it is clear that this dreaded leader will now go to jail for a long time and its bail will not be there.

वहीँ सोशल मीडिया पर योगी की वाहवाही हो रही है. लोगों ने ट्वीट करके योगी से गुहार लगाई है कि जिस तरह यूपी में अपराधियों व् बदमाशों का एनकाउंटर किया जा रहा है. उसी तरह बीएसपी के इस बाहुबली गुंडे नेता का भी एनकाउंटर कर दिया जाए. वहीँ कुछ अन्य लोगों ने योगी को उनके सख्त एक्शन के लिए काफी सराहा है.

The same is being praised by the Yogi on social media. People have tweeted the Yogi tweeting that the way criminals and miscreants are being investigated in UP. Likewise, this Bahubali goons leader of the BSP should be encroached too. Some others have appreciated the Yogi for his strict action.

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https://www.youtube.com/watch?v=VxtYK7YXsQ8&feature=youtu.be

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ब्रेकिंग :CM योगी ने बनाया अबतक का सबसे बड़ा कानून जिसे देख पूरे देश में तहलका,अपराधियों की पतलून हुई गीली

लखनऊ : उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए पहले इसे अपराधमुक्त बनाना ज़रूरी है. इसमें सीएम योगी के राज में पहले से ही अपराधियों की जान हलक में अटकी हुई थी, पिछले 11 महीनों में 1200 से ज़्यादा एनकाउंटर, 40 मोस्टवांटेड अपराधी मौत की नींद सो चुके हैं, जो जेल में करीब 5000 वो अपनी ज़मानत नहीं लेना चाह्ते हैं. लेकिन अब तो सीएम योगी ने यूपी पुलिस को और ताक़त दे दी है अब तो अपराधियों, माफियाओं का काल बनकर उतरेगी पुलिस फाॅर्स.

Lucknow: It is necessary to make Uttar Pradesh free from crime before making it a terrific region. In the reign of CM Yogi, the lives of the criminals were already stuck in the veil; in the last 11 months, more than 1,200 encounters, 40 most of the convicted criminals have fallen asleep, who do not want to take their bail in about 5000 prisoners. But now the CM Yogi has given more powers to the UP police nowadays criminals will become the era of the Mafias, Police Force.

योगी सरकार ले आयी खतरनाक कानून, सुन अपराधियों की पतलून हुई गीली

अखिलेश सरकार में जिस पुलिस के हाथ बंधे गए थे उनके सीएम योगी ने हाथ खोल दिए हैं. जिन कुख्यात अपराधियों को पुलिस डंडे से रोकने जाती थी वो अब अपराधियों की एक गोली पर गोलियों की बौछार करते हैं क्यूंकि एक वक़्त ऐसा था कि चेन लूटने वाला भी कट्टा रखता था और पुलिस पर गोली चलाकर भाग जाता था. लेकिन अब सीएम योगी का यूपीकोका कानून देख अपराधी की पतलून गीली हो जाएगी.

The Yogi government brought dangerous laws, heard the criminals trousers wet

The CM Yogi has opened his hand in the Akhilesh government, which was held by the hands of the police. The infamous criminals who prevented the police from stalking, now show the bullets of bullets on a tablet of the criminals, because for a moment the chain robber also kept a straighter and ran away by firing on the police. But now the CM Yogi will get the culprit trousers wet watching the UPCOCKA law.

यूपी विधानसभा से UPCOCA बिल पास

अभी मिल रही बहुत बड़ी खबर के मुताबिक अपराध पर लगाम लगाने के लिए लाए गए यूपीकोका बिल को यूपी विधानसभा की मंजूरी मिल गई है. अब ये कानून मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा. योगी सरकार ने मंगलवार को चार महीने के बाद दूसरी बार यूपीकोका बिल को विधानसभा में पेश किया और पारित करा लिया.

UPCOCA Bill passes from UP assembly

According to the very big news now available, UPCoca Bill has been approved by the UP Assembly to curb crime. Now these laws will be sent to the governor for sanction. Yogi Sarkar presented the UPCOCA bill for the second time after four months in the assembly and passed it on Tuesday.

इससे पहले इस बिल को योगी सरकार ने विधानसभा से पास कराया था, लेकिन विधान परिषद में बीजेपी के पास बहुमत न होने के चलते, सपा, कांग्रेस बसपा ने मिलकर इस बिल को गिरा दिया था. ये कोई कश्मीर की धारा 370 नहीं है जिसे विपक्ष की सहमति के बिना पास नहीं कराया जा सके. लेकिन इस बार यूपीकोका बिल को विधान परिषद में भेजने की जरूरत ही नहीं है.

Earlier this bill was passed by the Yogi Government from the assembly, but due to lack of majority in BJP in the Legislative Council, the SP, the Congress BSP, had dropped this bill together. This is not a Section 370 of Kashmir which can not be passed without the consent of the opposition. But this time there is no need to send the UPCoco bill to the Legislative Council.

विपक्ष ने खूब कोशिश करी न हो बिल पास
आने को तो ये कानून पिछले साल ही आ जाता लेकिन तब भी विपक्ष ने टांग अड़ाई थी. संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (यूपीकोका) बिल पिछले साल 21 दिसंबर को भी विधानसभा से पास हो गया था. जिसके बाद बिल को विधान परिषद भेजा गया और विपक्ष ने इसे गिरा दिया.

Opposition has not tried hard enough
The law came to the fore last year, but even then the Opposition blocked the limelight. The organized crime control act (UPCOCA) bill passed on December 21 last year was also passed from the assembly. After which the bill was sent to the Legislative Council and the opposition dropped it.

सपा ने कहा इससे अल्पसंख्यक खतरे में आ जायेंगे
दरअसल समाजवादी को राज्य में सुख शांति से ज़्यादा अपना वोटबैंक प्यारा है. उन्हें तुष्टिकरण की राजनीति से ज़्यादा लगाव है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना था कि यह कानून मुसलमानों को टार्गेट करने के लिए बनाया गया है. इससे सपा प्रवक्ता क्या ये कहना चाह्ते हैं कि सारे अपराधों में कहीं न कहीं मुसलमानों का हाथ होता है ? यही वजह है कि अखिलेश सरकार कभी ऐसा कानून नहीं लायी.

SP said this will bring the minority to danger
In fact, the socialist is more beloved than the state of happiness in the state. They have more love than appeasement politics. Samajwadi Party spokesman Rajendra Chaudhary said that this law was designed to target Muslims. Does the SP spokesperson want to say that there is a hand of Muslims in all the crimes? That is why the Akhilesh government has never brought such a law.


जबकि सरकार का दावा है कि इस कानून के आने से अंडरवर्ल्ड, जबरन वसूली, जबरन कब्जे, वेश्यावृत्ति, अपहरण, फिरौती, धमकी और तस्करी जैसे संगठित अपराधों पर लगाम लेगी.

While the government claims that by coming out of this law, it will rein in organized crime like underworld, forcible recovery, forcible occupation, prostitution, kidnapping, ransom, threats and smuggling.

मकोका की तर्ज़ पर सबसे सख्त है यूपीकोका
आइये अब जब इस कानून को स्वीकृति मिलने ही वाली है तो हम आपको बताते हैं कि अपराधी और विपक्ष के नेता इस कानून से खौफ क्यों खाते हैं. महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ आर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, MCOCA (मकोका) की तर्ज पर बनाए गए यूपीकोका कानून बहुत सख्त है.

UPCOCA is the hardest on the basis of MCOCA
Let us now, when this law is about to be approved, we tell you why the leaders of the criminal and the opposition are afraid of this law. UPCOCA law made on the lines of the Maharashtra Control of Organized Crime Act, MCOCA (MCOCA) is very strict.

आखिर क्यों खौफ खाते हैं अपराधी इस कानून से

यूपीकोका यानी संगठित जुर्मों के खिलाफ बना यह कानून पुलिस को अप्रत्याशित अधिकार और पावर दे देता है. किसी अन्य जुर्म के लिए पुलिस आरोपी को 15 दिनों की रिमांड पर ही जेल में रख सकती है लेकिन यूपीकोका के सेक्शन 28 (3अ) के अंतर्गत बिना जुर्म साबित हुए भी पुलिस किसी आरोपी को 60 दिनों तक जेल में रख सकती है. इस दौरान पुलिस पूछताछ के साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर आम बात है. जिसे सुन अपराधी कि पतलून गीली हो जाती है.

Why are the perpetrators guilty of this law

This law against UPCOCA means organized crime and gives unpredictable rights and power to the police. For any other offense, the police can keep the accused in jail only on remand for 15 days, but under the section 28 (3A) of UPCOCA, the police could be kept in jail for 60 days. During this, third degree torcher is common with police interrogation. Tell the culprit that the trousers become wet.

180 दिनों तक बिना चार्जशीट जेल

आईपीसी की धारा के अंतर्गत किसी को गिरफ्तार करने के 60 से 90 दिनों के अन्दर चार्जशीट दाखिल करनी पड़ती है, वहीं मकोका में यह अवधि 180 दिनों की है. इसी तर्ज पर यूपीकोका में भी 180 दिनों तक बिना चार्जशीट दाखिल किए आरोपी को जेल में रखा जा सकेगा.

180 days without charging gel

Under the IPC section, the chargesheet has to be filed within 60 to 90 days of arresting someone, while in Makoca the period is 180 days. On similar lines, in UPCOCA, the accused, who has not filed the charge sheet for 180 days, will be kept in jail.

इसके साथ ही जेल के अन्य कैदियों से मिलने के लिए भी इस कानून के अंतर्गत बहुत सख्ती है. सेक्शन 33 (सी) के अनुसार किसी जिलाधिकारी की परमिशन के बाद ही यूपीकोका के आरोपी साथी कैदियों से मिल सकते हैं, वो भी हफ्ते में एक से दो बार.

In addition to this, it is very strict under the law to meet other prisoners in jail. According to section 33 (C), only after the permissions of a district official, the accused persons of UPCOCA can meet the prisoners, they also have two times in a week.

मुजरिम पाए जाने पर उम्र कैद से लेकर मौत की सजा

यूपीकोका की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बैठेगी और मुजरिम पाए जाने पर उम्र कैद से लेकर मौत की सजा का भी प्रावधान होगा. साथ ही मुजरिम पर 5 से लेकर 25 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. पिछली अखिलेश सरकार में कानून की इतनी ख़राब हालत थी कि माफियाओं के चलते हिन्दुओं के कैराना से पलायन की खबरें आती थी. लेकिन अब एक ऐसा कानून पुलिस को मिलेगा जो संगठित जुर्मों के खिलाफ पुलिस को शक्तिशाली बनाएगा.

Life sentence imprisonment on death penalty if convicted

The special court will sit for the hearing of the UPCOCA and if there is a convict, there will also be provision for life imprisonment and death sentence. At the same time, a fine ranging from 5 to 25 lakh can be imposed on the mujrim. In the previous Akhilesh government, there was such a bad condition of law that due to the mafias the news of migrating from the Karaana of Hindus came. But now a law will be received by the police who will strengthen the police against organized crimes.

जमानत मिलना नामुमकिन

इसके लिए पुलिस के पास अधिकार है कि वो आरोपी के पत्र, टेलीफोन और व्यक्तिगत रूप से किसी से मिलने पर भी रोक लगा दें. किसी भी व्यक्ति पर यूपीकोका लगने के बाद उसे जमानत मिलना नामुमकिन ही है.

Impossible to meet bail

For this, the police have the right to prohibit the person’s letter, telephone and personally meet anyone. It is impossible for any person to get bail after getting UPCCO

अभी तक अपराधी राज्य छोड़ कर भाग रहे थे, अब इस कानून के आ जाने से तो वे दुनिया भी छोड़ने लगेंगे. इससे पहले ही कई खबरें आ चुकी हैं कि कई अपराधी, अपराध का मार्ग छोडकर, सब्जी बेचना पंचर लगाना जैस अकाम शुरू कर चुके हैं.

So far the criminals were leaving the state and now they will also leave the world because of the coming of this law. Already there have been reports that many criminals have started Jas Akam to stop selling criminals and sell vegetables.

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BREAKING:ज़बरदस्त घमासान के बाद राज्यसभा चुनाव के आये चौंकाने वाले नतीजे,2019 के चुनाव जीतने के मनसूबे पर फिरा पानी

ने के मनसूबे को लगा झटका

इस जीत के साथ बीजेपी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार का बदला ले लिया है. राज्यसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद बुआ-भतीजे (साप-बसपा) के बीच हुए गठबंधन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं.

दिनभर चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद यहां देर शाम वोटों की गिनती शुरू हुई. गिनती शुरू होते ही बीजेपी ने आठ सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर ली. इसके बाद मुकाबला बीजेपी के 9वें उम्मीदवार और बीएसपी के भीमराव अंबेडकर के बीच था, लेकिन अनिल अग्रवाल ने दूसरी वरियाता के वोटों में भीमराम को मात दे दी. समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार जय बच्चन ने 38 मत हासिल करके जीत हासिल की है.

बसपा उम्मीदवार की जाएगी अंतरात्मा

उन्नाव जिले के बसपा विधायक अनिल ने मतदान के बाद अंतरात्मा की आवाज पर भाजपा के प्रत्याशी को वोट देने की बात कही और बोले वह अंतरात्मा से आवाज आने के बाद अपने को रोक नहीं सके.

बीजेपी के उम्मीदवार अरुण जेटली, अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, विजय पाल तोमर, कांता कर्दम, अशोक वाजपेयी, हरनाथ यादव, सकलदीप राजभर और अनिल अग्रवाल ने जीत दर्ज की है.

दूसरी तरफ बैलेट पेपर पर हुए विवाद के बाद उत्तर प्रदेश, झारखंड और कर्नाटक में थोड़ी देर के लिए गिनती रोक दी गई थी। हालांकि अब फिर से गिनती शुरू हो चुकी है.हालांकि झारखंड में एक-एक सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीत मिली है.

प्रात: नौ बजे शुरू हुआ मतदान निर्धारित समय चार बजे से लगभग एक घंटा पूर्व तीन बजे ही समाप्त हो गया। तीन वोट नहीं पड़े। इनमें दो विधायक सपा के हरिओम यादव और बसपा के मुख्तार अंसारी, जेल में बंद होने के कारण मतदान नहीं कर सकें.

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अभी-अभी UP राज्‍यसभा चुनाव में मिली हार से भौखलाई BSP, ने BJPको लेकर दे डाला ये विवादित बयान

नई दिल्ली: राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जहां बीजेपी जश्न मना रही है, वहीं चुनाव में मिली हार के बाद बहुजन समाज पार्टी निराश है. यूपी उपचुनाव के नतीजे आने के बाद बीएसपी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि बीएसपी के प्रत्याशी को हराने के लिए मुख्तार अंसारी को वोट डालने से रोका गया. उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी को वोट डालने के लिए कोर्ट ने इजाजत दे दी थी, लेकिन उनको जेल डालकर वोट नहीं डालने दिया गया. सतीश चंद्र मिश्रा ने बीजेपी पर धन और सत्ता के बल पर धांधली का आरोप लगाया है.

BJP को बताया दलित विरोधी
बीएसपी के महासचिव सतीश मिश्रा ने बीजेपी को दलित विरोधी बताया. उन्होंने कहा कि हमने भीमराव अंबेडकर को खड़ा किया था, बीजेपी को इस नाम से ही चिढ़ है. यही वजह है कि उसने पार्टी प्रत्याशी को हराने के लिए हर हथकंडा अपनाया.

ये भी पढ़ें: UP राज्यसभा चुनाव : BJP ने लिया उपचुनाव की हार का बदला, बुआ-भतीजे के गठबंधन को झटका

बीजेपी ने जोर-जबरदस्ती कर लिया वोट
बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने बीजेपी पर गंभीर लगाते हुए कहा कि इन्होंने हमारे विधायक और दूसरे दलों के विधायकों के साथ जोर-जबरदस्ती करके वोट लेने का काम किया गया. इसलिए हम हारे और वो अपने 9वें सदस्य को जीतवाने में कामयाब हुए.

10वीं सीट के लिए थी काटे की टक्कर
आपको बता दें कि यूपी राज्यसभा चुनाव के लिए 10वीं सीट के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. इस सीट पर बीजेपी के अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अंबेडकर के बीच कांटे की टक्कर थी. इस पर बीजेपी ने जीत दर्ज की. गौरतलब है कि पहली वरीयता में बीजेपी के आठ विजयी उम्मीदवारों को 39-39 वोट मिले. सपा की जया बच्चन को 38 वोट मिले. पहली वरीयता की गिनती में दसवीं सीट के लिए बसपा के भीमराव अंबेडकर को 33 वोट मिले और बीजेपी के अनिल अग्रवाल को 22 वोट मिले. इसके बाद ही साफ हो गया था प्रचंड बहुमत वाली बीजेपी की दूसरी वरीयता में जीत तय है.

दो घंटे देरी से शुरू हुई थी गिनती
राज्यसभा चुनाव में वोटों की गिनती दो घंटे देर से शुरू हुई. दरअसल सपा और बसपा ने आरोप लगाया कि सपा के नितिन अग्रवाल और बसपा के अनिल सिंह ने पार्टी को बिना बताए क्रॉस वोटिंग की. लिहाजा उनके वोट अवैध घोषित होने चाहिए. इसके साथ ही सपा के विधायक राजेश यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष के चार बैलट पेपर फाड़े गए हैं. इसके बाद चुनाव आयोग ने फुटेज मंगवाया. जांच के बाद आयोग ने नितिन अग्रवाल और अनिल सिंह के वोट को वैध करार दिया. साथ ही बैलट फाड़ने वाले आरोप को भी खारिज कर दिया.

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ब्रेकिंग:UP राज्यसभा चुनाव : BJP ने लिया उपचुनाव की हार का बदला, बुआ-बबुआ के गठबंधन को लगा तगड़ा झटका..

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर हुए चुनावों में से बीजेपी ने 9 सीटों पर जीत हासिल की है. सपा की जया बच्चन ने भी जीत दर्ज की है. मायावती का एकमात्र उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर बीजेपी के अनिल अग्रवाल के हाथों हार गए. इस जीत के साथ बीजेपी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार का बदला ले लिया है. राज्यसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद बुआ-भतीजे (साप-बसपा) के बीच हुए गठबंधन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं.

Lucknow: Out of the 10 seats in the Rajya Sabha elections in Uttar Pradesh, BJP has won 9 seats. Jaya Bachchan of SP has also won. Mayawati’s only candidate Bhimrao Ambedkar lost to BJP’s Anil Agarwal. With this victory, BJP has taken revenge for the defeats in the by-elections in Gorakhpur and Phulpur Lok Sabha seats. After the defeat in the Rajya Sabha elections, the alliance between the nephew (snakebazar) has been questioned.

दिनभर चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद यहां देर शाम वोटों की गिनती शुरू हुई. गिनती शुरू होते ही बीजेपी ने आठ सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर ली. इसके बाद मुकाबला बीजेपी के 9वें उम्मीदवार और बीएसपी के भीमराव अंबेडकर के बीच था, लेकिन अनिल अग्रवाल ने दूसरी वरियाता के वोटों में भीमराम को मात दे दी. समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार जय बच्चन ने 38 मत हासिल करके जीत हासिल की है.

Counting of votes began late in the evening after the highway dance drama. As the count started, BJP easily won eight seats. After this the contest was between the BJP’s 9th and BSP’s Bhimrao Ambedkar, but Anil Agarwal defeated Bhimaram in the second verbal vote. Samajwadi Party candidate Jai Bachchan has won by winning 38 votes.

बीजेपी के विजयी चेहरे
बीजेपी के उम्मीदवार अरुण जेटली, अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, विजय पाल तोमर, कांता कर्दम, अशोक वाजपेयी, हरनाथ यादव, सकलदीप राजभर और अनिल अग्रवाल ने जीत दर्ज की है. दूसरी वरियता की काउंटिंग ने अनिल अग्रवाल की जीत पर मोहर लगा दी. दूसरी वरीयता में भीमराव अंबेडकर को सिर्फ एक ही वोट मिला.

BJP’s winning faces
BJP candidates Arun Jaitley, Anil Jain, GVL Narasimha Rao, Vijay Pal Tomar, Kanta Kardam, Ashok Vajpayee, Harnath Yadav, Sakaladeep Rajbhar and Anil Agarwal have won the election. Counting of second variant stamped on Anil Agarwal’s victory. Bhimrao Ambedkar got only one vote in second preference.

गठबंधन के बाद भी मायावती को झटका
इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका बीएसपी को लगा है. मायावती ने इन चुनावों के लिए अपने धुर विरोधी रहे समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया था. सपा मुखिया ने भी अपने शेष वोटों को बीएसपी उम्मीदवार को देने का वादा किया था. इसी गठबंधन के आधार पर अखिलेश सिंह ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों में जीत हासिल की थी.

Mayawati shocks even after coalition
The biggest blow to these elections is the BSP. Mayawati had an alliance with the Samajwadi Party, who was anti-incumbent for these elections. SP chief also promised to give his remaining votes to the BSP candidate. On the basis of this alliance, Akhilesh Singh had won in the by-elections held in Gorakhpur and Phulpur Lok Sabha seats.

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राज्यसभा चुनाव : राजा भैया ने आखिरी समय में चला ये बड़ा पैंतरा बुआ बबुआ के उड़े होश..

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनावों की 10 सीटों के लिए जारी मतदान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के करीबी माने जाने वाले कुंडा से निर्दलीय विधायक राजा भैया बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

Lucknow: A big news has emerged between the ongoing elections for the 10 seats of the Rajya Sabha elections in Uttar Pradesh. According to sources, Independent legislator Raja Bhaiya, who is considered close to the Samajwadi Party, can vote for the BJP in the favor of the candidate.

हालांकि अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं हो पाई है। यदि ऐसा होता है तो एक अन्य निर्दलीय विधायक विनोद सरोज का वोट भी बीजेपी के पाले में आ सकता है। गौरतलब है कि विनोद सरोज को राजा भैया का प्रबल समर्थक माना जाता है। यदि ऐसा होता है तो समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

However, the news has not been confirmed yet. If this happens then the vote of another Independent MLA Vinod Saroj may also come in BJP’s favor. Significantly, Vinod Saroj is considered as a strong supporter of Raja Bhaiya. If this happens then the problems of Bahujan Samaj Party along with the Samajwadi Party can also increase.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा भैया के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि यूपी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में राजा भैया के एक समर्थक यशवंत सिंह को मंत्री पद दिया जा सकता है।

According to reports, the security of Raja Bhaiya’s house has been increased. It is being told that Yashwant Singh, a supporter of Raja Bhaiya, can be given the post of minister in the extension of the UPA governmen

यशवंत सिंह ने अपनी MLC की सीट योगी आदित्यनाथ के लिए छोड़ दी थी। यह खबर भी सूत्रों के हवाले से आई है। आपको बता दें कि पहले ही निर्दिलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने अपना वोट भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट देने की बात कही है।

वहीं, बहुजन समाज पार्टी के विधायक अनिल सिंह और समाजवादी पार्टी के विधायक नितिन अग्रवाल द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की खबरें हैं। इन दोनों ही विधायकों ने खुले तौर पर बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की है।

Yashwant Singh left his MLC seat for Yogi Adityanath. This news has come from the sources. Let us tell you that the already unconstitutional MLA Amanmani Tripathi has said that the vote for the vote in the favor of the Bharatiya Janata Party.

अब क्या होगा सपा और बसपा का?
नितिन अग्रवाल और अनिल सिंह के बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के बाद बीएसपी प्रत्याशी मुश्किल में फंस गए हैं। दरअसल, उत्‍तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी प्रत्याशी को कम से कम 37 प्रथम वरीयता की वोटों की जरूरत है।

There are reports of cross voting by Bahujan Samaj Party legislator Anil Singh and Samajwadi Party legislator Nitin Agarwal. Both of these MLAs have openly announced to vote in favor of BJP.

राज्य की 403 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास कुल 324 सीटें हैं ऐसे में बीजेपी अपने 8 प्रत्याशियों को आसानी से राज्यसभा में भेज सकती है। इसके बावजूद उसके पास 28 वोट बच जाएंगे। समाजवादी पार्टी के पास 47 विधायक हैं.

BJP and its allies have a total of 324 seats in the state’s 403-member assembly, in which the BJP can easily send its 8 candidates to the Rajya Sabha. Despite this, it will save 28 votes. The Samajwadi Party has 47 MLAs.

ऐसे में वह अपने एक प्रत्याशी को आसानी से जिता सकती है और उसके पास 10 वोट बच जाएंगे। बहुजन समाज पार्टी के पास 19 विधायक हैं और वह अपने दम पर किसी प्रत्याशी को राज्यसभा नहीं भेज सकती। इसके लिए उसे सपा के 10, कांग्रेस के 7 और राष्ट्रीय लोकदल के एक विधायक का समर्थन चाहिए।

In such a way, he can easily win one of his candidates and 10 votes will be saved. Bahujan Samaj Party has 19 MLAs and it can not send any candidate to the Rajya Sabha on their own. For this, he needs support of SP 10, Congress 7 and one MLA from the National Lok Dal.

ये विडियो बी देखें-:

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

SOURCE POLITICAL REPORT

CM योगी ने कर डाली ऐसी बड़ी घोषणा, जिसे देख देशभर में ख़ुशी की लहर, विपक्षियों को लगा तगड़ा झटका

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘योगी आदित्यनाथ’ ने अपने गृहक्षेत्र जाकर जनता को संबोधित करते खुशखबरी की

घोषणा की है. जानकारी के अनुसार योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार ‘गोरखपुर’ पहुंचे हैं. उनके इस घोषणा के बाद हिन्दुओं में ख़ुशी का माहौल बना हुआ है. उन्होंने घोषणा करते हुए कहा है कि ‘कैलाश मानसरोवर’ जाने वालों लोगों को राज्य सरकार 1-1 लाख रुपए की सहायता करेगी.

Gorakhpur: Uttar Pradesh’s Chief Minister Yogi Adityanath has announced the good news addressing the public in his home country. According to the information, Yogi Adityanath has reached Gorakhpur for the first time after becoming the Chief Minister. After this announcement, there is an atmosphere of happiness in the Hindus. He has announced that the state government will assist the people going to Kailash Mansarovar Rs 1 lakh each.

मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि अगर राज्य का कोई भी व्यक्ति ‘कैलाश मानसरोवर’ जाना चाहता है तो उसको राज्य सरकार शारीरिक रूप से एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देगी. साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा है कि ‘लखनऊ’, ‘गाजियाबाद’ या ‘नोएडा’ में से किसी एक स्थान पर कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण भी किया जायेगा. इसके आगे उन्होंने कहा है कि ये सभी कार्य एक-एक करके पुरे होते रहेंगे परंतु भरोसा केवल इस बात है कि आपका सहयोग आपका सानिध्य प्राप्त हो.

The Chief Minister Yogi has said that if any person of the state wants to go to Kailash Mansarovar, then the state government will give him financial assistance of one lakh rupees. The Chief Minister also said that Kailash Mansarovar Bhawan will also be constructed at one of the places of ‘Lucknow’, ‘Ghaziabad’ or ‘Noida’. He further said that all these works will continue to be accomplished one by one, but the only thing about trust is that your cooperation is your achievement.

हज हाउस का जवाब है कैलाश मानसरोवर भवन?

जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण की बात कही तो ये सवाल कौंधने लगा कि कहीं मुख्यमंत्री योगी का ये ऐलान अखिलेश सरकार द्वारा गाजियाबाद में बनाये गये भव्य ‘हज हाउस’ का जवाब तो नहीं. आपको बता दें कि यह हज हाउस गाजियाबाद में स्थित है और भाजपा लगातार इसको मुस्लिम तुष्टिकरण बताती रही है.

The answer to Haj’s house is Kailash Mansarovar Bhavan?

When Chief Minister Yogi Adityanath spoke of the construction of the Kailash Mansarovar Bhawan, the question arose that the question of Chief Minister Yogi was not answered by the Akhilesh government’s grand ‘Hajj House’ made in Ghaziabad. Let us tell you that this Haj house is located in Ghaziabad and the BJP has consistently been telling it Muslim appeasement.

मुख्यमंत्री ने बुधवार (28 जनवरी) को कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण लखनऊ, नोएडा या गाजियाबाद में कराने की बात कही. साथ ही मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही साफ कर दिया कि उनकी सरकार विकास सबका करेगी, परंतु तुष्टिकरण किसी का नहीं होगा.

The Chief Minister talked of building Kailash Mansarovar Bhavan on Wednesday (January 28th) in Lucknow, Noida or Ghaziabad. At the same time, the Chief Minister made it clear at the beginning of his speech that his government will do all development, but appeasement will not be of anybody.

मुख्यमंत्री योगी की सभा में शामिल अधिकतर लोगों से बात की गयी तो उनसभी ने कहा है कि अब तक सरकारों ने मुस्लिमों को ‘हज यात्रा’ (मक्का-मदीना) करने के लिए सब्सिडी दी है तो फिर ‘कैलाश मानसरोवर’ के लिए सरकारी मदद क्यों नहीं होनी चाहिए.

Most of the people involved in the meeting of the Chief Minister Yogi were told, so they all said that till now the governments have given subsidies to Muslims for ‘Haj yatra’ (maize-medina) and then why the Government help for ‘Kailash Mansarovar’ Should not be.

ध्यान देने वाली बात यह है कि आज ही योगी सरकार के मंत्री ‘मोहसिन रजा’ ने अमीर मुस्लिमों से अपील की थी कि वे हज यात्रा को जाने के लिए मिलने वाली सब्सिडी छोड़ दें. ये उन्हें सबका साथ सबका विकास का हिस्सा बना देगा.

The point to note is that today’s Yogi Government minister, Mohsin Raza, had appealed to the wealthy Muslims to leave the subsidy for getting Haj pilgrimage. This will make them all part of development with everyone.

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https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

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SOURCE NAME POLITICAL REPORT

2019 में SP-BSP और BJP का bada प्लान क्या जीतेगी ये पार्टी….

राज्‍यसभा के लिए 23 मार्च को होने जा रहे चुनावों के मद्देनजर यूपी की 10वीं सीट प्रतिष्‍ठा का प्रश्‍न बन गई है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस सीट के लिए बसपा ने सपा से तालमेल कर पूर्व एमएलए भीमराव अंबेडकर को अपना प्रत्‍याशी बनाया है. वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के लिए अहम इसलिए हो गई है क्‍योंकि यदि इस सीट से बसपा का प्रत्‍याशी जीतता है तो 2019 में सपा-बसपा गठबंधन पर मुहर लगनी तय है. बीजेपी यह भी समझती है कि ऐसा होने की स्थिति में उसके लिए बड़ी चुनौती पेश हो सकती है क्‍योंकि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा-बसपा गठबंधन होने पर बीजेपी को यूपी में 50 सीटों का नुकसान हो सकता है.

In view of the elections going to the Rajya Sabha on March 23, UP has become a question of UP’s 10th seat reputation. This is because the BSP has made the former MLA MLA Bhimrao Ambedkar as its candidate for the seat. On the other hand, it has become important for the BJP because if the BSP candidate wins this seat, then the SP-BSP combine will be stamped in 2019. The BJP also understands that in the event of such a situation, a big challenge can be faced for it, as per the media reports, if the SP-BSP combine is held, the BJP may lose 50 seats in UP.

यह मामला इसलिए भी रोचक हो गया है क्‍योंकि बसपा सुप्रीमो ने पहले ही ऐलान किया है कि सपा के साथ उनका तालमेल फिलहाल उपचुनावों और राज्‍यसभा चुनावों में है. गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में तो बसपा अपने वोटबैंक में सपा प्रत्‍याशी के खाते में ट्रांसफर कराने को सफल रही, जिसके दम पर सपा ने बीजेपी को हराकर जीत दर्ज की. अब राज्‍यसभा चुनाव में सपा की बारी है कि वह अपने मतों को बसपा के खाते में ट्रांसफर कराकर उसको जिताए. यदि सपा ऐसा करने में कामयाब नहीं रहती है तो बसपा के साथ उसके संभावित गठबंधन पर पेंच फंस सकता है. बीजेपी की रणनीति भी फिलहाल इस संभावित गठबंधन को रोकने के लिए इसीलिए राज्‍यसभा में बसपा प्रत्‍याशी को हराने की है.

This matter has also become interesting because BSP supremo has already announced that their coordination with SP is currently in bye-elections and in the Rajya Sabha elections. In the Gorakhpur and Fulpur bye-elections, the BSP was successful in transferring the SP candidate to the vote bank, on which, the SP won the victory by defeating BJP. Now, in the Rajya Sabha elections, the SP’s turn is that they win their votes by transferring their votes into BSP’s account. If SP fails to do so, then the BSP can screw on its possible alliance with the BSP. BJP’s strategy is to defeat the BSP candidate in the Rajya Sabha so as to prevent this alliance from happening right now.

राज्‍यसभा चुनाव: यदि BSP प्रत्‍याशी नहीं जीता तो क्‍या उसके बाद भी SP से होगा गठबंधन?

Rajya Sabha elections: If BSP does not win the candidate, then will the SP be allocated?

amit shah
अमित शाह ने नाराज चल रहे सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात कर उनको मना लिया है.(फाइल फोटो)

amit shah
Amit Shah has met the angry Upa Subhaspa leader Om Prakash Rajbhar and convinced them. (File photo)

वोटों का गणित
इसी कड़ी में बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने यूपी में सहयोगी सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के नेता ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात कर उनको मना लिया है. योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से बीजेपी से नाराज चल रहे थे और उन्‍होंने राज्‍यसभा चुनावों में बगावती तेवर अख्तियार कर लिए थे. इसलिए मौके की गंभीरता को देखते हुए अमित शाह ने राजभर से मुलाकात में देरी नहीं की. अपना दल ने पहले ही बीजेपी को समर्थन का ऐलान कर रखा है. इस प्रकार बीजेपी ने अपने 324 वोटों को अपने पाले में रखने की पूरी व्‍यवस्‍था कर ली है.

Mathematics of votes
In this episode, BJP President Amit Shah has congratulated him on meeting with his colleague Suhdev Bharatiya Samaj Party (Subhaspa) leader Omprakash Rajbhar in UP. In the Yogi government, Om Prakash Rajbhar was angry with BJP for some time and he had made a rebellion in the Rajya Sabha elections. Therefore, considering the severity of the spot, Amit Shah did not delay meeting the state. Your party has already declared support to BJP. Thus, BJP has made complete arrangements to keep its 324 votes in its own right.

उत्तर प्रदेश: राज्यसभा चुनाव में सपा, कांग्रेस और रालोद के भरोसे बसपा

सपा-बसपा को टेंशन
राज्‍य की 31 राज्‍यसभा सीटों में से 10 पर चुनाव होने हैं. इनमें से आठ बीजेपी और एक सपा के खाते में जानी तय है. 10वीं सीट के लिए बसपा ने सपा से तालमेल कर अपने उम्‍मीदवार को उतारा है. राज्‍यसभा की एक सीट में जीत हासिल करने के लिए 37 वोट की दरकार है. बसपा के 19 और सपा के 47 विधायक हैं. सपा के एक प्रत्‍याशी के जीतने के बाद उसके पास 10 वोट अतिरिक्‍त होंगे. इसके अलावा कांग्रेस के सात और रालोद के एक वोट का भी समर्थन बसपा को मिलेगा. इस प्रकार बसपा के किसी तरह 37 वोट हो रहे हैं लेकिन यहीं पर सपा नेता शिवपाल यादव और नरेश अग्रवाल की भूमिका अहम हो जाती है.

Uttar Pradesh: SP, Congress and RLD depend on BSP

Tension to SP-BSP
There are 10 elections out of 31 state seats in the state. Of these, it is decided to go to account of eight BJP and one SP. For the 10th position, the BSP has fielded its candidate by adjusting to the SP. To win a seat in the Rajya Sabha, 37 votes are needed. There are 19 BSP MLAs and 47 MLAs of SP. After winning a candidate of SP, he will have 10 votes more. Apart from this, a vote of seven Congress and RLD will also be supported by the BSP. Thus, the BSP is getting 37 votes, but the role of SP leader Shivpal Yadav and Naresh Agarwal is very important.

इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि बीजेपी के आठ प्रत्‍याशी जीतने के बाद उसके पास 28 वोट अतिरिक्‍त होंगे. इसलिए अपने नौवें प्रत्‍याशी को जिताने के लिए उसको महज नौ वोटों की दरकार है. इसलिए सपा और बसपा के ऐसे विधायकों पर भी बीजेपी की नजर है जो अगले चुनाव में उसके टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्‍छा रखते हैं. बीजेपी को इस कड़ी में तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल चुका है. इसके अलावा निषाद पार्टी के एकमात्र विधायक का भी उसको समर्थन मिल चुका है. यह इसलिए दिलचस्‍प है क्‍योंकि निषाद पार्टी के संस्‍थापक के पुत्र प्रवीण निषाद गोरखपुर से सपा के टिकट पर लोकसभा उपचुनाव में जीते हैं.

One big reason for this is that after winning the BJP’s eight candidates, it will have 28 votes more. Therefore, to win his ninth candidate, he needs only nine votes. That is why the BJP and the BSP legislators also have the eyes of the BJP who wish to contest the elections on their ticket in the next election. BJP has got support of three independents in this episode. Apart from this, the only MLA of Nishad party has got support. This is interesting because Pravin Nishad, the son of the founder of Nishad party, lives in Gorakhpur in Lok Sabha by-election on SP ticket.

नरेश अग्रवाल
सपा से राज्‍यसभा टिकट नहीं मिलने से नाराज नरेश अग्रवाल ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. सूत्रों के मुताबिक इसकी राजनीतिक कीमत के रूप में उन्‍होंने बीजेपी को आश्‍वस्‍त किया है कि उनका बेटा और हरदोई से सपा विधायक नितिन अग्रवाल बीजेपी के पक्ष में वोट करेगा. यदि ऐसा कोई एक वोट भी कम हो जाता है तो बसपा का उम्‍मीदवार राज्‍यसभा नहीं पहुंच पाएगा.

Naresh agarwal
Angry over the absence of a Rajya Sabha ticket from the SP, Naresh Agarwal has taken the charge of BJP. According to sources, in the form of its political cost, he has assured the BJP that his son Nitin Agrawal, SP MLA from Hardoi, will vote in favor of BJP. If such a single vote gets reduced then the BSP candidate will not be able to reach the Rajya Sabha.

शिवपाल यादव
सपा में शिवपाल यादव गुट हाशिए पर है. सपा नेतृत्‍व के साथ उनके रिश्‍तों में खटास जगजाहिर है. इसके अलावा बसपा के साथ शिवपाल के रिश्‍ते 1995 के गेस्‍टहाउस कांड के बाद कटु रहे हैं. ऐसे में उनके गुट की बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

Shivpal Yadav
Shivpal Yadav in the SP is marginalized. The saga of their relationship with the SP leadership is evident. Apart from this, Shivpal’s relationship with BSP is bitter after the 1995 guest house scandal. In such a situation, the possibility of cross voting in favor of BJP of its faction can not be ruled out.

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SOURCE ZEENEWS

ब्रेकिंग: गोरखपुर फूलपुर मे हार के बाद, CM योगी ने दी ऐसी पटखनी,बुआ बबुआ चारों खाने चित..

इलाहाबाद। फूलपुर उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद हुए चुनाव में ब्लॉक प्रमुख के 6 में से 5 सीटों पर भाजपा ने सपा-बसपा गठबंधन वाले प्रत्याशियों को सीधे पटखनी दे दी। 6 में से 1 सीट पर बसपा के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।

Allahabad. In the elections held after the defeat of the, BJP has given directly to the SP-BSP combine candidates in five out of 6 of the block chief’s election. The BSP candidate has won 1 of the 6 seats.

उपचुनाव के बाद बसपा-सपा के मिलन से उपजे समीकरण का यहां असर देखने को नहीं मिला और सीधे तौर पर गठबंधन वाले प्रत्याशियों को ब्लॉक प्रमुख के चुनावों में मात खानी पड़ी। अविश्वास प्रस्ताव के कारण इलाहाबाद की 6 ब्लॉक प्रमुख की सीटें खाली हुई थी।

After the by-election, the equation produced by the meeting of BSP-SP did not get any effect, and directly the alliance candidates had to be defeated in the elections of the block chief. Due to the no confidence motion, the seats of 6 block chiefs of Allahabad were vacant.

मुस्कुराए भाजपाई

उपचुनाव के बाद लगातार निराश, हैरान-परेशान व आरोपों के दौर से गुजरने के साथ मंथन में जुटे भाजपाइयों के लिए इलाहाबाद जिले में मुस्कुराने का मौका मिल गया है। भाजपाइयों के लिए जसरा, सोरांव, उरूवा, मेजा, धनूपुर और फूलपुर से अच्छी खबर आई है ।

Smiling BJP

After the by-elections, after being disappointed, surprised and troubled, the BJP has got a chance to smile in the Allahabad district. For the BJP, good news has come from Jasra, Sorond, Uruwa, Meja, Dhanupur and Phulpur.

इनमें मेजा छोड़कर 5 सीटों पर भाजपा जीती और जीत से उत्साहित भाजपा के लिये जिले में फिर से अपनी पकड़ मजबूत बनाने का मौका मिल गया है। यह सभी सीटें अविश्वास प्रस्ताव के बाद खाली हुई थी। इन सीटों से प्रमुखों को हटा दिया गया था जिस पर फिर से विश्वास मत के चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है।

The BJP has won 5 seats and has got the opportunity to strengthen its hold in the district for the BJP, which is excited by the victory. All these seats were vacant after the no confidence motion. The seats were removed from these seats on which again the BJP candidates won the election of confidence vote.


फूलपुर ब्लाक

फूलपुर उपचुनाव के दौरान फूलपुर विधानसभा से सपा बसपा गठबंधन ने सर्वाधिक अंतर से जीत हासिल की थी। यहां सपा प्रत्याशी नागेंद्र को सर्वाधिक बढ़त मिली थी, लेकिन फूलपुर ब्लाक के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी गीता सिंह ने जीत हासिल की और उन्होंने समाजवादी पार्टी की सुषमा पासी को 45 मतों के भारी अंतर से हरा दिया।

Phulpur Block

During the Phulpur by-election, the SP BSP coalition won from Phulpur Assembly with the highest margin. Nagendra, the SP candidate, got the highest margin, but Gita Singh won the BJP by-election in Phulpur Block and defeated Sushma Pasi of Samajwadi Party by a huge margin of 45 votes.

बता दें कि यहां पूर्व विधायक विजमा यादव की बेटी ज्योति यादव ब्लॉक प्रमुख थी, लेकिन सूबे में जब भाजपा सरकार आई तो ज्योति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। उसके बाद अब भाजपा ने इस सीट को अपने कब्जे में कर लिया है।

Let us know that Jyoti Yadav, daughter of former MLA Vizya Yadav was the block chief, but when the BJP came to power in the province, a no-confidence motion was brought against Jyoti. After that the BJP has now occupied this seat.

उरुवा ब्लॉक

इसी प्रकार उरुवा में भाजपा प्रत्याशी जगत बहादुर पटेल को जीत मिली। जगत के खिलाफ सपा के उम्मीदवार वर्तमान प्रमुख महेश राज यादव व निर्दल प्रत्याशी के रूप में कलेक्टर बिंद ने अपना नामांकन वापस ले लिया जिसके कारण यह निर्विरोध प्रमुख चुने गए।

Urwa block

Similarly, BJP candidate Jagat Bahadur Patel won in Uruva. In the form of SP candidate against the current Chief of the current Mahesh Raj Yadav and Nirdhal candidate, Collector Bind withdrew his nomination which led to it being elected unopposed.

जसरा ब्लॉक

जसरा ब्लॉक में भाजपा की स्नेहलता ने जीत दर्ज कर कमल खिला दिया। हलांकि इस सीट पर सपा बसपा ने सीधे तौर पर अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था, लेकिन निर्दल प्रत्याशी रही शालिनी को सपा-बसपा ने अपना समर्थन दे दिया था। इससे मुकाबला दिलचस्प हो गया था, लेकिन जब परिणामों की घोषणा हुई तो स्नेहलता ने एकतरफा जीत हासिल कर जसरा ब्लॉक भाजपा के खाते में डाल दिया।

Jasra Block

The BJP’s snehalata in Jasra block gave victory to the lotus. Although the BSP did not directly win any candidate on this seat, the SP-BSP had given its support to Shalini, who was the nominated candidate. The contest was interesting, but when the results were announced, Snehlata won a one-sided victory and put Jasra block in BJP’s account.

सोरांव ब्लॉक

सोरांव ब्लॉक भी पहले सपा के कब्जे में था और यहां समाजवादी पार्टी के संदीप यादव ब्लॉक प्रमुख थे लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद इनके खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था जिसके बाद हुए चुनाव में भाजपा के आलोक पांडे ने यहां पर कमल खिलाया सपा ने इस सीट पर राजाराम यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था। एकतरफा मुकाबले में आलोक पांडे ने 60 वोटों के साथ जीत दर्ज की।

Sorang block

The Sarod Block was also in the possession of the SP and Sandeep Yadav of the Samajwadi Party was the block chief, but after the BJP Government came, there was a no-confidence motion against them, after which the BJP’s Alok Pandey gave a lotus here to the SP. Rajaram Yadav had made his candidature for the seat. In a one-sided match, Alok Pandey won with 60 votes.

धनूपुर और मेजा ब्लॉक

धनूपुर ब्लॉक में भी भाजपा का परचम लहराया। यहां भाजपा प्रत्याशी अमृत लाल ने सपा बसपा समर्थित प्रत्याशी लालचंद को हरा दिया और कमल खिलाते हुए भाजपाइयों को मुस्कुराने का मौका दे दिया। इस सीट पर सपा का कब्जा तय माना जा रहा था लेकिन वोटों के बिखराव को गठबंधन समेट नहीं सका और अमृत लाल ने जीत दर्ज की।

Dhanupur and Meja Block

In the Dhanupur block, the BJP’s paramount wig Here BJP candidate Amrit Lal defeated SP BSP supporter Lalchand, while feeding lotus gave BJP the opportunity to smile. The seat of SP was supposed to be fixed in this seat but the scarcity of votes could not be reconciled by the coalition and Amrit Lal won the election.

मेजा ब्लॉक

मेजा ब्लॉक में भाजपा का जादू नहीं चला और बसपा के पूर्व विधायक राजबली जैसल की पत्नी राजकुमारी ने यहां सपा के समर्थन से बड़ी जीत हासिल की। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी को राजकुमारी ने एकतरफा हराते हुए जीत हासिल की। यहां भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ 12 वोट मिले थे, जबकि बसपा प्रत्याशी ने 98 वोटों के साथ एक तरफा जीत हासिल की।

Meza block

The BJP’s magic did not come in Meja block and Rajkumari, wife of former BSP legislator Rajbali Jaisal, won a major victory with the support of SP here. In this seat, the BJP won a victory by defeating the princess by one-sided. The BJP candidate got only 12 votes, while the BSP candidate won with a single margin of 98 votes.

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बड़ी खबर:चुनाव नतीजों को लेकर बीजेपी में दौड़ी एक बार ख़ुशी की लहर ! वही हुआ जिसका सभी को था डर !

11 मार्च को यूपी और बिहार में उपचुनाव हुए थे जिनके नतीजे 11 मार्च को आये. इस उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा तो विपक्ष इस जीत को लेकर इतनी ज्यादा खुश है कि फूले नहीं समां रही है.

On March 11, UP and Bihar had by-elections, whose results came on March 11. In this bye-election, BJP lost, the Opposition is so happy with the victory that the bloating is not being understood.

बीजेपी की विरोधी इस जीत पर इतना जश्न मना रहे हैं कि वह भूल रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के अधिकतर राज्यों से बीजेपी ने विपक्षीय पार्टियों को सफाया कर दिया है. अभी हाल ही में एक ऐसी खबर आ रही है जिसने विरोधियों के जश्न पर लगाम लगा दी है.

The BJP’s opponents are celebrating this victory so much that they forget that under the leadership of Prime Minister Narendra Modi, BJP has wiped out opposition parties from most of the states of the country. There is a recent news that has reinforced opponents’ celebration.

जानकारी के लिए बता दें कि राजस्थान से चुनावों को लेकर ऐसी खबर आ रही है जिसने यूपी की जीत को फीका कर दिया है. राजस्थान राज्यसभा से बीजेपी से तीनों उम्मीदवारों ने निर्विरोध चुनाव जीत कर विरोधियों के जश्न पर लगाम लगा दी है. राजस्थान से बीजेपी के डॉ. किरोडी लाल मीणा, मदन लाल सैनी और भूपेंद्र यादव को 15 मार्च को निर्विरोध चुन लिया गया है.

For information, let us know that news from Rajasthan is coming up with news that has faded UP’s victory. Three candidates from Rajasthan Rajasthan Rajya Sabha have won the uncontested election and have restrained the protesters. Rajasthan’s Dr Kirodi Lal Meena, Madan Lal Saini and Bhupendra Yadav have been elected unopposed on March 15.

सूत्रों के अनुसार बताया गया कि भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल ही नहीं किया. जिसके बाद तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है. राजस्थान विधानसभा के सचिव पृथ्वी राज ने बताया कि नामांकन पत्रों की जाँच के बाद बीजेपी की तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन विजयी घोषित किया गया है.

According to sources, no other candidate has filed nomination papers other than the BJP’s three candidates. After which the three candidates have been elected unopposed. Rajasthan Rajya Sabha Secretary Prithviraj said that after the scrutiny of nomination papers, the three candidates of the BJP have been declared elected unopposed.

राजस्थान से आये इन नतीजों ने विपक्ष की ख़ुशी पर पानी फेर दिया है. इससे पहले भी पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में बीजेपी ने अपनी जीत का परचम लहराया है. त्रिपुरा में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाकर इतिहास रच दिया है. इस जीत ने सभी के होश उड़ा दिए हैं.

These results from Rajasthan have reversed the happiness of the Opposition. Even before this, BJP in the three states of the northeast has wiped out their victory. In Tripura, BJP has created history by forming a government with a full majority. This victory has spawned everyone.

यूपी में गठबंधन को लेकर लग सकता है मायावती को झटका
मायावती ने एक राज्यसभा टिकट पाने के लिए समाजवादी पार्टी से गठबंधन तो कर लिया लेकिन वह ये भूल गई कि उसके लिए अब भी उनके लिए एक विधायक की जरूरत और पड़ेगी जो कि नरेश अग्रवाल के बेटे हैं. इससे तो यही लगता है कि मायावती और समाजवादी पार्टी का यह गठबंधन ज्यादा नहीं टिक पाएगा क्योकि मायावती का या उनके किसी सदस्य का राज्यसभा में जाना बहुत मुश्किल है.

Mayawati jolts over coal alliance
Mayawati got an alliance with Samajwadi Party to get a Rajya Sabha ticket but she forgot that she will still need a legislator for her, who is the son of Naresh Agrawal. From this, it seems that Mayawati and Samajwadi Party’s alliance will not survive because it is very difficult for Mayawati or any member of her to go to the Rajya Sabha.

मायावती ने राज्यसभा की टिकट के लालच में यह गठबंधन किया लेकिन अब तो यही लग रहा है कि यह गठबंधन यहीं तक का रह जाएगा. वहीँ अखिलेश यादव का काम भी अब पूरा हो ही गया है.

Mayawati made this alliance in the greed of the Rajya Sabha ticket, but now it seems that this alliance will remain so far. The work of Akhilesh Yadav is still complete.

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source mailonnews.com