G-20 पीएम मोदी की अब तक की बड़ी कूटनीतिक जीत,जो आज तक नहीं हुआ वो पीएम मोदी ने कर दिखाया ,जिसे सुन देशवासी ख़ुशी से झूम उठे

नई दिल्ली : आज मोदी सरकार में भारत तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन गया है. पहले फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठे नंबर की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना तो अब अगले साल तक जापान को पछाड़कर पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. इस प्रगति को अब पूरी दुनिया और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी सराह रहे हैं. तभी तो एक बार फिर G20 सम्मलेन में गए पीएम मोदी और भारत को बड़ी ज़बरदस्त कामयाबी मिली है जो आज तक नहीं हुआ.

अभी G20 सम्मलेन से भारत के लिए बहुत बड़ी खबर आ रही है जिसे सुन हर भारतवासी का सीना गर्व से फूल उठेगा. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। अब भारत 2022 में विश्व के 20 ताकतवर देशों के समूह G-20 की मेजबानी करेगा.

g20

2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं। मोदी सरकार ने 2022 में न्यू इंडिया का नारा भी दिया है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समूह की बैठक की मेजबानी मिलने को एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. जी-20 विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है. ऐसे में भारत में इसका आयोजन होना बहुत ज़्यादा गर्व की बात है. मतलब इन सभी ताक़तवर 20 देशों के राष्ट्रपति भारत आएंगे.

पीएम मोदी ने यहां अर्जेंटीना की राजधानी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में यह घोषणा की. वर्ष 2022 में जी 20 सम्मेलन की मेजबानी इटली को करनी थी. मोदी ने भारत को इसकी मेजबानी मिलने के बाद इसके लिए इटली का शुक्रिया अदा किया. इसके साथ ही उन्होंने जी-20 समूह के नेताओं को 2022 में भारत आने का न्यौता दिया. वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने घोषणा के बाद ट्वीट किया, ‘‘वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं. उस विशेष वर्ष में, भारत जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व का स्वागत करने की आशा करता है. विश्व की सबसे तेजी से उभरती सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में आइए. भारत के समृद्ध इतिहास और विविधता को जानिए और भारत के गर्मजोशी भरे आतिथ्य का अनुभव लीजिए.’’

इससे पहले पीएम मोदी ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रमफोसा के साथ मुलाकात की थी. मोदी ने उन्हें 2019 के गणतंत्र दिवस परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया था. इसे अफ्रीकी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है.

बता दें, आर्थिक और कूटनीतिक मामलों के लिए जी-20 काफी अहम संस्था है. यह विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें भारत, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं.

कांग्रेस सरकार के दस साल में याद दिला दें बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने भारत की अर्थव्यवस्था को खतरनाक बताते हुए FRAGILE FIVE ग्रुप में डाल दिया था. ये बेहद शर्मनाक पल था क्यूंकि इसका मतलब होता है कि भारत ना सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने पडोसी देशों के लिए भी खतरा है.

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ब्रेकिंग – बॉर्डर पर चीन के खिलाफ पीएम मोदी का बड़ा एक्शन, भारतीय सेना के इस कदम से चीन के होश हुए फाख्ता.

कांग्रेस राज में भले ही भारत चीन के साथ हुआ युद्ध हार गया हो, मगर मोदी राज में हालात बदल चुके हैं. भारत की ताकत आज इतनी बढ़ चुकी है कि चीन भारत पर हमला करने की सोच तक नहीं सकता. डोकलाम में चीनी सेना को पीछे हटने पर मजबूर करने के बाद भारत ने चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है.

Though Congress may have lost the war with China in the Congress, but circumstances have changed in Modi Raj. India’s strength has become so big that China can not even think of attacking India. After forced the Chinese army to retreat in Dokalmal, India has taken a big step against China.

तिब्बत के पास चीन सीमा पर भारतीय सेना मुस्तैद
भारत ने अरुणाचल प्रदेश से सटी चीन सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया है. सेना के एक बड़े हिस्से को रणनीतिक तौर पर संवेदनशील माने जाने वाले दिबांग, दाउ देलाइ और लोहित घाटी में तैनात किया गया है. इसके अलावा सेना ने बॉर्डर पर निगरानी भी काफी बढ़ा दी है, जिससे चीन की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.
बताया जा रहा है कि ये कदम चीन के साथ हुए डोकलाम विवाद को ध्यान में रखकर लिया गया है. पिछले साल भारत और चीन की सेनाएं डोकलाम क्षेत्र को लेकर 72 दिनों तक आमने-सामने रही थीं. सेना के अधिकारियों के मुताबिक, अरुणाचल में सेना अपना निगरानी तंत्र विकसित करने में जुटी है, ताकि चीन पर नजर रखी जा सके.

Indian Army Mighty On Tibet Near China Border
India has deployed a large number of troops on the China border from Arunachal Pradesh. A large section of the army has been deployed in strategically sensitive areas like Dibang, Dau Deli and Lohit Valley. Apart from this, the Army has increased the monitoring on the border too, which is keeping an eye on every activity of China.
It is being said that these steps have been taken keeping in view the Docalm controversy with China. Last year, India and China’s armies were facing face-to-face for 72 days in the field of Dokalam region. According to army officials, the Arunachal army is engaged in developing its monitoring system so that China can be monitored.

चीन के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार भारतीय सेना
इलाके की टोह लेने के लिए यहां हेलिकॉप्टर भी भेजे जाते रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि सेनाएं दिबांग, दाउ देलाइ और लोहित घाटियों के खतरनाक इलाकों पर मौजूदगी बढ़ाना चाहती हैं. इनमें 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और घाटी की गहराई में स्थित नदियां भी शामिल हैं. चीन हमेशा ही इन इलाकों को लेकर भारत पर दबाव बनाता रहा है.

ndian army ready to get rid of six Chinese chicks
Helicopters have also been dispatched to take recruitment of the area here. Officials said that the forces want to increase presence on the dangerous areas of Dibang, Daw Daili and Lohit valleys. These include the snowy hills of 17 thousand feet high and the rivers located in the depths of the valley. China has always been pressurizing India on these areas.

अरुणाचल के किबिथु में तैनात सेना के एक अधिकारी ने बताया- “डोकलाम के बाद सेना ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाई है. हम किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.”सभी रणनीतिक इलाकों पर सेना की पैनी नज़र

An army officer posted in Kibrithu, Arunachal Pradesh, said: “After the dawn, the army has increased its activities in this area. We are fully prepared to deal with any threat. “Army’s sharp eyes on all strategic areas

“भारतीय सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्तों (लॉन्ग रेंज पैट्रोल्स) को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है. इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिन के लिए गश्त पर भेजी जाती हैं.” अधिकारी ने बताया कि भारत ये कदम लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) को सुरक्षित बनाए रखने के लिए उठाया है. बता दें कि भारत और चीन बॉर्डर 1962 के बाद से आज तक एक भी गोली नहीं चली है.

“The Indian Army is now focusing on increasing its long range patrols. In this small pieces are sent to patrol for 15 to 30 days. “The official said that India has taken steps to keep the Line of Actual Control (LAC) safe. Please tell us that there has not been a single bullet from India since 1962 till today and China border.

अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि सेना ने भारत, चीन और म्यांमार ट्राई-जंक्शन जैसे अहम रणनीतिक इलाकों को ध्यान में रखते हुए वहां भी सेना तैनात की है. ड्रोन के जरिये भी इलाके पर नज़र रखी जा रही है.

The official said on condition of anonymity that the army has deployed the army there keeping in mind the important strategic areas of India, China and Myanmar Tri-junction. The area is also being tracked through the drone.

बता दें कि पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही अरुणाचल से सटी चीन सीमा की ओर ध्यान दिया था. कांग्रेस ने तो यहाँ ढंग की सड़कें तक नहीं बनवायी थी, मगर अब ना केवल यहाँ अच्छी सड़कें बनायी जा रही हैं बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल को भी यहाँ तैनात किया जा चुका है. चीनी सेना की किसी भी नापाक हरकत का मुहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना को पूरी तरह से तैयार रखा गया है.

Let me tell you that when PM Modi took over the power, he had taken note of China border beyond Arunachal. The Congress did not even build up the roads of the modes, but now only good roads are being built here but the BrahMos missile has also been deployed here. The Indian Army has been fully prepared to give a counterattack to any of the nefarious movements of the Chinese army.

यह विडियो भी देखे

https://youtu.be/o9LQnPMci4I

https://youtu.be/WE3MmmBzG4k

source political report

दबंग भारत के बाहुबली मोदी जी ने गाड़ा झंडा, आया ऐसा भूचाल, अमेरिका,जापान,कोरिया में मचा गया हड़कंप..

नई दिल्ली : दुनिया भर में आज अचानक से बहुत बड़ा आर्थिक भूचाल खड़ा हो गया है. अमेरिका समेत देशभा रके शक्तिशाली देश इस आर्थिक तूफ़ान की चपेट में आ गए हैं लेकिन मोदी राज के चलते मज़बूत आर्थिक निति की वजह से आज भारत इस बड़े आर्थिक संकट को हँसते हँसते झेल रहा है.

New Delhi: A huge economic storm has suddenly emerged across the world today. A powerful country, including the United States, has been hit by this economic storm, but due to the powerful economic policy due to Modi’s rule, India is today laughing at this big economic crisis laughing.

दुनिया में आया आर्थिक भूचाल, दिग्गज देशों के छूटे पसीने,
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक अमेर‍िकी बाजार में पिछले 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट ने दुनिया भर के शेयर बाजार की हवा निकाल दी. जापान के शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स निक्केई 1,115 अंक यानि 5.2 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 21,567 के स्तर पर कारोबार करता देखा जा रहा है.वहीं हॉगकॉन्ग के प्रमुख इंडेक्स हैंग सेंग में 1,000 अंकों से अधिक यानी यानि 3.2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हो चुकी है. फिलहाल हैंग सेंग लुढ़ककर 31,240 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया है.

Economic storms, world-renowned sweat,
According to the big news now available, the biggest drop in the US market in the past 6 years has led to the worldwide market share of the stock market. The major index of Japan’s stock market, Nikkei, is seen to be trading at 21,567, with a loss of 1,115 points i.e., 5.2 percent. In Hong Kong’s main index, Hang Seng recorded more than 1,000 points, i.e., more than 3.2 percent. It’s done. Hang Seng is currently trading at a level of 31,240.

भारत ने गाड़ा झंडा
हालाँकि भारतीय बाजार ने अन्य देशों के मुकाबले कम गिरावट देखी है, फिलहाल सेंसेक्स 1046.88 अंकों की गिरावट के साथ 33,681.94 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. वहीं, निफ्टी भी फिलहाल 10343 के स्तर पर है. इसमें 323.55 अंकों की गिरावट देखने को मिल रही है. अगर यही सेंसेक्स जो की कांग्रेस के वक़्त था अगर 22000 पर होता तो आज भारत में भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया होता. लेकिन मज़बूर आर्थिक फैसलों के कारण अभी भी 33000 के पार खड़ा है ओर विदेशी मुद्रा भंडार 417 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है.

India flagged the flag
Although the Indian market has witnessed lesser fall than other countries, the Sensex is currently trading at a level of 33,681.94 with a decline of 1046.88 points. At the same time, the Nifty is currently at the level of 10343. There is a decline of 323.55 points in this. If this Sensex, which was at the time of Congress, would have been 22000, then there would have been a financial crisis in India today. But due to strong economic decisions, still standing across 33000 and foreign exchange reserves reached record level of $ 417 billion.

एशिया के बाजार में मची ज़बरदस्त खलबली
इन एशियाई बाजारों के अलावा कोरियाई बाजार का प्रमुख इंडेक्स कोस्पी भी 2.8 फीसदी लुढ़का है और स्ट्रेट्स टाइम्स में भी 2.3 फीसदी से अधिक की गिरावट देखने को मिल रही है. ताइवान के इस प्रमुख इंडेक्स में 310 अंकों की यानि 2.9 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. फिलहाल स्ट्रेट्स टाइम्स 10,635 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया है.वहीं, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 अंक गिरकर खुला है. इसमें 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.

Strong baffle in Asia market
In addition to these Asian markets, the Korean market’s major index Kospi has also rolled 2.8 per cent and the Straits Times has seen a decline of more than 2.3 per cent. This major index of Taiwan is showing a decline of 310 points i.e. 2.9 percent. At present, the Straits Times has been trading at the level of 10,635.Only, Australia’s S & P / ASX is down 200 points. It has seen a decline of 3 per cent.

अमेरिका में आयी 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट
आपको बता दें 2011 के बाद से अमेरिकी बाजार डाउ जोन्स की ये 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट है. सोमवार को डाउ जोन्स इंडस्ट्रीयल एवरेज 1175 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ. इतिहास में यह डाउ जोन्स में एक दिन में आई यह सबसे बड़ी गिरावट है.अमेरिकी बाजार के बड़ी गिरावट के साथ बंद होने का असर एश‍ियाई बाजार पर साफ नजर आ रहा है. एश‍ियाई बाजारों में भी कमजोरी नजर आ रही है. मंगलवार को इस कमजोर का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल रहा है.

America’s biggest decline in 6 years
Tell us, since 2011, the US market Dow Jones has been the biggest fall in this 6 years. Dow Jones Industrial Average closed at 1175 points on Monday. This is the biggest drop in the history of Dow Jones in one day. The impact of closure with the big fall in the US market is clearly visible on the Asian market. There is also a weakness in Asian markets. On Tuesday, the impact of this weakness is also seen on the domestic market.

बॉन्ड यील्ड बढ़ने के डर से शुक्रवार को भी अमेरिकी बाजार में गिरावट देखने को मिली. दरअसल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आशंका जताई जाती है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी. इससे डाउ जोन्स 666 अंक टूटा था.यह गिरावट लंबे समय से चलने वाले बाजार की स्थिरता के लिए चिंता का विषय है. 2016 से डाउ जोन्स विश्व का सबसे बड़ी वैश्विक बिक्री था, लेकिन एशिया से यूरोप, यूरोप से अमेरिका के बाजारों को मुद्रास्फीति की चिंताओं ने हिला दिया.

Ketakutan hasil obligasi juga menunjukkan penurunan di pasar AS pada hari Jumat. Bahkan, peningkatan imbal hasil obligasi diperkirakan akan meningkatkan suku bunga. Karena ini Dow Jones 666 rusak.Penurunan ini adalah masalah perhatian untuk keberlanjutan pasar jangka panjang. Dow Jones adalah penjualan global terbesar di dunia sejak 2016, tetapi pasar Asia dari Eropa, Eropa, Eropa telah mengguncang kekhawatiran inflasi.

समझदारी के साथ बाजार में पैसा लगाइये
तो वहीँ अब इस बड़े आर्थिक संकट को लेकर जानकारों का मानना है कि निवेशकों को सोच समझकर बाजार में फिलहाल निवेश करना चाहिए. उनका कहना है कि अभी गिरावट का दौर जारी और यह दौर कुछ दिन और चल सकता है, इसलिए सभी को समझदारी के साथ बाजार में पैसा लगाना चाहिए.

Make money in the market with sensible
So, now, about this big economic crisis, experts believe that investors should think and invest in the market right now. They say that the continuation of the fall continues and this period can last for a few days, so everyone wisely should invest money in the market

एक तरह से देखा जाय तो अमेरिका की बाजारों के लिए सोमवार का दिन काला दिवस की तरह साबित हुआ है। कल सोमवार को अमेरिकी बाजारों में 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। इस गिरावट के साथ ही अमेरिकी बाजारों ने पिछले एक साल की सारी बढ़त एक दिन में गंवा दी। अमेरिकी बाजारों का एसएंडपी 500 इंडेक्स और डाओ जोंस इंडस्ट्रीयल इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा नीचे गिर गया था.

Di satu sisi, hari Senin untuk pasar Amerika telah terbukti seperti hari yang gelap. Pada hari Senin, penurunan terbesar 6 tahun di pasar AS tercatat. Dengan musim gugur ini, pasar AS kehilangan semua satu tahun terakhir dalam satu hari. Indeks S & P 500 dari pasar AS dan indeks industri Dow Jones turun lebih dari 4 persen.

In a way, Monday’s day for America’s markets has proven like a black day. On Monday, the biggest decline of 6 years in the US markets was recorded. With this fall, US markets lost all the past one year in one day. The S & P 500 index of US markets and the Dow Jones industrial index fell more than 4 percent.

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https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

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SOURCE NAME POLITICAL REPORT

 

 

चीन के डोकलाम से पीछे हटने का था ये बड़ा कारण सच्चाई जान मोसाद सीआईए भी हैरान

लगभग ढाई महीने तक एक-दूसरे के सामने डोकलाम में खड़ी चीन की सेनाएं अब पीछे हट चुकी है दुनिया ने इसे केवल भारत की जीत माना है, क्योंकि भारत तो पहले से ही चीन से दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने का प्रस्ताव रख चुका था. चीन ही अड़ा हुआ था कि भारत बिना किसी शर्त के अपनी सेना को पीछे हटाए. बहरहाल अड़ियल चीन ने आखिर ऐसा फैसला क्यों लिया, इसका खुलासा हो गया है.

China’s army standing in front of each other in front of each other for two and a half months has now retreated; the world has considered it only a victory of India, because India had already proposed to withdraw from the two countries’ forces from China. . China was stunned that India should retract its forces without any condition. However, the imposing China has finally decided to do so, it has been revealed.

चीन में भारत से लड़ने की ताकत ही नहीं

खुलासा हुआ है कि भारतीय सेना की ताकत पीएम मोदी के आने के बाद से काफी बढ़ चुकी है और दुनियाभर के देश आज भारत के समर्थन में खड़े हैं. चीन के पास दरअसल भारत से टक्कर लेने का दम ही नहीं है. चीन केवल अपना हव्वा खड़ा करके भारत को डराने की कोशिश कर रहा था.

China has no power to fight India

It has been exposed that the strength of the Indian Army has increased significantly since the arrival of PM Modi and the countries of the world are standing in support of India today. China does not really have a chance to compete with India. China was only trying to frighten India by setting its own Eve

चीन दरअसल उत्तरी कोरिया की ही तरह एक कम्युनिस्ट देश है. प्रोपगंडा फैलाना, झूठा प्रचार करना कम्युनिस्ट देशों की ख़ास आदत होती है. भारत तो पहले से जानता था कि युद्ध होने पर उसकी जीत निश्चित है, इसीलिए पीएम मोदी चीन की गीदड़ भभकियों को नज़रअंदाज करते हुए अपने अन्य कामों में व्यस्त थे. ताकतवर बोला नहीं करते, वो सीधे कर देते हैं.

China is actually a communist country like North Korea. Propaganda spreading, false propaganda is a special habit of Communist countries. India had already known that his victory was certain when the war was over, so PM Modi was busy with other activities while ignoring the Chinese peacock feudalists. Do not speak powerful, they make it straight.

झूठा प्रोपगंडा फैला कर भारत को डराने की योजना हुई विफल

चीनी सरकारी टेलीविजन सीसीटीवी ने तिब्बत में तैनात माउंटेन ब्रिगेड द्वारा सैन्य अभ्यास का सीधा प्रसारण दिखाया. चीन ऐसा अभ्यास हर साल करता है, फिर भी भारत पर दबाव बनाने के लिए चीनी मीडिया ने झूठ बोल दिया कि डोकलाम मामले से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जंगी साजोसामान तिब्बत भेजा जा रहा है.

Failure to scare India by spreading false propaganda failed

Chinese Government Television CCTV has shown a live demonstration of military exercises by the Mountain Brigade stationed in Tibet. China conducts such practice every year, yet to pressurize India, the Chinese media has lied that a large number of warships are being sent to Tibet to deal with the issue.

पीछे हटने का मौक़ा तलाश रहा था चीन

आखिर तक जब चीन की डाल भारत के सामने नहीं गली, तो उसने पीछे हटने के लिए बहाना तलाशना शुरू कर दिया. ब्रिक्स समिट को सही मौक़ा जानकार तुरंत चीन ने भारत के साथ मांडवली कर ली और अपनी सेना पीछे हटा ली.

China was looking for a retreat

By the end, when China did not put India in front of India, then she started exploring excuses to retreat. The exact information about the BRICS summit was immediately established with China and India withdrew its troops.

हालांकि चीन के थूक कर चाटने को देखकर चीनी नागरिकों को शर्मिंदगी ना हो, इसलिए चीनी मीडिया ने फिर से नया झूठ फैलाना शुरू कर दिया कि सिर्फ भारत ने सेना पीछे हटाई है, चीन की सेना वहां गश्त करती रहेगी. जबकि सच तो ये हैं कि चीन के अंदर भारत का सामना करने का माद्दा ही नहीं है.

Although Chinese citizens do not feel embarrassed by the spitting of China’s spit, the Chinese media again started spreading new lies that only India has retracted the army, China’s army will continue patrolling there. While the fact is that there is no point in trying to face India inside China.

युद्ध करती तो चीनी सेना मार खाती सो अचीन पूरी तरह मटियामेट ही हो जाता. इसलिए मौक़ा देखकर थूका हुआ चाट लिया और चीनी नागरिकों को चीनी सेना की गश्त वाली मीठी गोली दे दी.लग, ऊपर से व्यापार बंद होने पर चीन में भुखमरी फ़ैल जाती.

If the war ensued, then the Chinese army would have been killed, and the entire extent would have been completely demarcated. So, after seeing the opportunity, he licked and spit and gave Chinese citizens a sweet shotgun with a Chinese army patrol. On the other hand, hunger was spread in China when trade was closed from above.

वहीँ अंतररार्ष्ट्रीय मंच पर चीन का नाम खराब होता और अमेरिका को भी दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के खिलाफ एक्शन लेने का मौक़ा मिल जाता.

At the same time, the name of China on the international stage would have been bad and the US also got the opportunity to take action against China regarding the South China Sea.

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ब्रेकिंग! भारतीय सेना ने दिखाया अपना रौद्र रूप, किया ऐसा हमला कि पाक फ़ौज में मची चीख-पुकार

जहाँ एक ओर भारत-चीन के बीच जबरदस्त तनाव चल रहा है, वहीँ पाकिस्तान भी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रह है. बुद्धवार को पाकिस्तान ने ऐसी नीच हरकत कर डाली, जिसके बाद भारतीय सेना ने आपा खोते हुए पाकिस्तानी फ़ौज पर भयानक हमला बोल दिया, जिसमे पाकिस्तान का काफी नुक्सान होने की खबर है.

While there is tremendous tension between India and China, Pakistan itself is not even aware of its impractical movements. On Wednesday, Pakistan had made such a negative move, after which the Indian Army had a terrible attack on the Pakistani army losing its temper, in which there was a lot of loss to Pakistan.

पाक फ़ौज को कारगिल की दिलाई याद!
दरअसल बुधवार को पाकिस्तानी फ़ौज ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में सीजफायर का उल्लंघन करते हुए भारी गोलीबारी और मोर्टार से हमला कर दिया. जिसके बाद भारतीय सेना ने पाक फ़ौज पर ऐसा भीषण हमला किया, जैसा कारगिल युद्ध के बाद आजतक नहीं किया था.

Remembering Kargil’s handling of Pak army!
In fact, on Wednesday, Pakistani troops violated the siegefire in Poonch sector of Jammu and Kashmir and attacked with heavy firing and mortars. After that the Indian army did such a fierce attack on the Pak army, as Kargil did not do it after the war.

गुस्से में थी कि पाक फ़ौज से जुडी जो भी चीज सामने दिखी, उसे ही उड़ा दिया गया. पीओके में मेढ़र सेक्टर में भारतीय सेना ने कई पाक बंकरों को तबाह करते हुए सामने दिखने वाले पाक सैन्य वाहनों को भी उड़ा दिया. ऐसा भीषण हमला जिसे देख पाक फ़ौज में हड़कंप मच गया और अपने साथियों को मारे जाते देख पाक फ़ौज के सैनिक अपनी-अपनी जान बचाकर युद्ध मैदान से एक बार फिर भाग खड़े हुए.

Anything related to the Pak army was fired, it was blown away. In the PoK, the Indian Army in the Mercury Sector also blown up Pak Pakshi vehicles which were seen in front of the devastating many Pak bunkers. Seeing such a fierce attack that saw the Pak army rushing and killing their comrades, the Pak army soldiers managed to save their lives once again from the battlefield.

स्कूलों पर शैलिंग!
दरअसल पाकिस्तान की फ़ौज हर बार भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर हमला करती है लेकिन इस बार तो नीचता की सभी हदें पार करते हुए पाक फ़ौज ने बच्चों के स्कूलों को भी निशाना बनाया. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक पाक फ़ौज ने 25 स्कूलों पर मोर्टार से हमला किया. बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में मोर्टार आकर गिरे.

Schools Shale!
Indeed, Pakistan’s army attacks every time by targeting Indian nationals, but this time, crossing all the limits of meanness, the Pak army also targeted children’s schools. According to the local administration, the Pak army attacked the 25 schools with mortar. It is being told that mortar has fallen in the school premises.

पाक फ़ौज की इस नीचता पूर्ण हरकत को देखते हुए सभी प्रभावित स्कूलों को बंद कर दिया गया है. पुंछ के जिला विकास कमिश्नर ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनज़र स्कूल बंद कर दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि यदि जरुरत पड़ी तो इलाके के अन्य स्कूलों को बंद करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं.

All affected schools have been closed in view of this malafide failure of the Pak army. Poonch district development commissioner said that schools have been closed in view of security. He told that if necessary, instructions for closure of other schools in the area can also be given.

मंगलवार को नौशेरा में की थी फायरिंग!
बता दें कि मंगलवार को पाक फ़ौज ने एलओसी पर नौशेरा सेक्टर में मोर्टार से हमला किया था. जिसके कारण इलाके के 9 स्कूलों में लगभग 200 बच्चे और स्कूल स्टाफ के सदस्य स्कूलों में फंस गए थे. सभी बच्चे पूरा दिन स्कूलों में फंसे रहे. जिसके बाद सेना ने बुलेट प्रूफ वाहनों की मदद से उनकी जान बचाते हुए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले गए. सेना के अलर्ट रहने और सही वक़्त पर एक्शन लेने के कारण किसी भी बच्चे की जान नहीं गयी.

Nowshera firing was done on Tuesday!
Let us know that on Tuesday the Pak army had attacked the LoC with mortar in Naushra sector. Due to which around 200 children and school staff members were stuck in schools in 9 schools of the area. All children are stuck in school all day long. After which the army took them to safer places while saving their lives with the help of bullet-proof vehicles. No child was killed due to the army’s alert and taking action on the right time.

वहीं नौगाम सेक्टर में पाकिस्तान फ़ौज की गोलीबारी में भारतीय सेना के एक जवान की जान चली गयी थी. जिसके बाद सेना ने आपा खोते हुए पाकिस्तान फ़ौज को बारूद से नहला दिया. गौरतलब है कि अभी कुछ ही वक़्त पहले पाकिस्तान में भी स्कूल पर आतंकियों ने हमला किया था, जिसमे कई बच्चों व् अध्यापकों की जान चली गयी थी. इस घटना पर पाकिस्तान ने काफी बवाल मचाया था और भारत में भी इस घटना का विरोध किया गया था.

At the same time, the firing of a Pakistani soldier in the navigat sector was lost. After that, the army gave up the Pakistan Army with gunpowder while losing its temper. It is worth noting that at least a few days ago, in Pakistan, the school was attacked by terrorists, in which many children and teachers died. Pakistan had played a great deal on this incident and in India too the incident was opposed.

जिसके बाद पाक फ़ौज ने जिम्मेदार आतंकियों पर हवाई हमले करके उन्हें मार गिराया था. आज उसी पाकिस्तान को भारतीय बच्चों पर हमला करते शर्म नहीं आयी. इस नीचता का जो भी सबक उन्हें सिखाया जाए वो ही कम है.

After that, the Pak army had attacked and assaulted the responsible terrorists by attacking them. Today, the same Pakistan has not come ashamed to attack Indian children. The lesson that this lesson can be taught to them is very less.

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

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ब्रेकिंग–अमेरिका ने दी नेहरू से जुडी ऐसी खुफिया जानकारी जिसने पूरी दुनिया को रख दिया हिलाकर !

नेहरू के कारण भारत से छिन गया “अक्साई चिन”

भारत-चीन के बीच हुए युद्ध में भारत की हार को नेहरू की विफलता तो कई लोग कहते आये हैं लेकिन सीआईए की ये रिपोर्ट पढ़कर तो आपकी आँखें ही फटी रह जाएंगी. आपको बता दें कि हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक करोड़ से अधिक पुराने ‘गोपनीय’ दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं. सीआईए के इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद फ्रांसीसी मूल के तिब्बत विशेषज्ञ “क्लाड अर्पी” ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि यदि नेहरू प्रशासन समय रहते सतर्क हो जाता तो चीन कभी “अक्साई चिन” भारत से नहीं छीन पाता.

Aksai Chin” disappeared from India due to Nehru

Many people have said that Nehru’s failure to defeat India’s defeat in the war between India and China, but after reading these reports of CIA, your eyes will be torn apart. Let us know that recently the US intelligence agency CIA has made more than 10 million old ‘confidential’ documents public. After coming out of these CIA documents, French-origin Tibet expert “Claude Arpi” has claimed in a report that if the Nehru administration becomes alert during the time, then China could never take away “Aksai Chin” from India.

सीआईए की चेतावनी को किया दरकिनार
“क्लाड अर्पी” की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय सरकार को सीआईए की ओर से इस बारे में चेतावनी भी दी गयी थी लेकिन नेहरू की अक्ल पर पत्थर पड़े हुए थे इसलिए उन्होंने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया. अर्पी के मुताबिक 1953 में सीआईए को पता था कि चीन अपनी सीमा पर भारी संख्या में सैनिक और निर्माण सामग्री जमा कर चुका था. इतना ही नहीं, 1957 में तो एक चीनी अखबार ने ये खबर तक छापी कि चीनी सरकार ने शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाली1200 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कर लिया है, लेकिन नेहरू का ध्यान इस ओर नहीं गया.

Bypassing CIA’s Warning
According to the report of “Claude Arpi”, the Indian government was warned on behalf of the CIA but stones were laid on Nehru’s sentiment, so he did not take this warning seriously. According to Arpi, in 1953, the CIA knew that China had accumulated a large number of military and construction material on its border. Not only that, in 1957, a Chinese newspaper published it to the news that the Chinese government has built a 1200-kilometer long road connecting Xinjiang and Tibet, but Nehru’s attention did not go towards it.

चीन भारतीय इलाकों में सड़के बना रहा था, नेहरू आँखें मूंदे बैठे थे
सीआईए की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी अखबार कुआंग-मिंग जी-पाओ ने 6 अक्टूबर, 1957 को इस बारे में खबर छापी थी कि दुनिया के सबसे ऊंचे हाईवे शिनजियांग-तिब्बत हाईवे का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. अखबार ने ये भी बताया था कि इस हाईवे पर ट्रायल के लिए कई दिनों से ट्रक भी दौड़ रहे थे.

China was making roads in Indian territory, Nehru was sitting idle
According to the CIA report, Chinese newspaper Qiang-Ming-ji-Pao published a news on October 6, 1957 that the construction of the world’s tallest highway Xinjiang-Tibet Highway has been completed. The newspaper had also told that trucks were also running for several days for trial on this highway.

इतना ही नहीं तत्कालीन विदेश सचिव ने 1958 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को इस सड़क के भारत के अक्साई चीन इलाके से होकर गुजरने के बारे में बताया तब भी नेहरू के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी. नेहरू तो मानो अपनी ही दुनिया में खोये हुए थे या फिर उनमे रत्तीभर भी राजनीतिक समझ नहीं थी इसलिए उन्हें दिख ही नहीं रहा था कि उनकी नाक के नीचे क्या चल रहा था.

Not only this, when the then Foreign Secretary told about the passing of this road in the Aksai Chin area of ​​India in 1958, when Nehru’s ears would not be lined up. Nehru was as if he was lost in his own world or there was no political understanding in him, so he could not see what was going on under his nose.

दो साल बाद होश आया नेहरू को
बाद में नेहरू ने 1959 में संसद ये बात स्वीकार भी कर ली कि चीन की ये सड़क भारतीय इलाके से होकर गुजरती है. क्लाड अर्पी के मुताबिक़ इस अत्यंत महत्वपूर्ण खबर को नेहरू तक पहुंचने में करीब दो साल लग गए. इन दो सालों में आईबी के तत्कालीन निदेशक बीएन मलिक को भी इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि चीन ने भारतीय इलाके “अक्साई चिन” में हाइवे बना लिया है.

Two years later, the senses came to Nehru
Nehru later accepted the Parliament in 1959 that this road of China passes through the Indian territory. According to Claude Arpi, it took almost two years to reach this extremely important news to Nehru. In these two years, the then IB director, BN Malik, did not even realize that China has made a highway in the Indian territory “Aksai Chin”.

 

चीन का हाईवे बन गया, उसके बनने की खबर भी छप गयी उसके भी करीब 5 महीने बाद 1958 में भारतीय विदेश सचिव सुबीमल दत्त ने नेहरू को बताया कि ऐसा लग रहा है कि चीन द्वारा बनाया गया 1200 किलोमीटर लंबा हाईवे भारत के अक्साई चिन से होकर गुजर रहा है.

China’s highway was created, the news of its formation was also printed, about five months later, in 1958, Indian Foreign Secretary Subimal Dutt told Nehru that it seems that the 1200 km long highway built by China is through Aksai Chin of India Passing.

राजनीतिक समझ का आभाव
हैरानी कि बात तो ये है कि नेहरू को इस बात का पता चलने के बाद भी उन्हें यही लगा कि चीन को इस हाईवे से कोई फायदा होगा ही नहीं. काफी जोर देने के बाद नेहरू ने दबे मन से इलाके के जमीनी निरीक्षण के लिए मंजूरी दी लेकिन अक्साई चिन के हवाई सर्वे को लेकर कोई उत्सुकता नहीं दिखाई. इतना सब होने के बाद नेहरू ने सुझाव दिया कि भारत चीन को अपना नक्शा भेज दे लेकिन अनौपचारिक तौर पर.

Lack of political understanding
Surprisingly, even after Nehru discovered this, he felt that China would not have any advantage over this highway. After a lot of emphasis, Nehru apologized for the land inspection of the area but there was no curiosity about Aksai Chin air survey. After all this, Nehru suggested that India send its map to China but informally

अंत में जब भारतीय सैनिक अक्साई चिन के जमीनी निरीक्षण के लिए गए तो चीनी सैनिकों ने उन्हें मार दिया. इतनी बड़ी घटना के होने के बाद भी 18 अक्टूबर 1958 को भारतीय विदेश सचिव ने चीनी राजदूत को केवल एक ‘अनौपचारिक नोट’ दिया, जिससे हालात पर कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा.

Finally, when Indian soldiers went to Aksai Chin’s ground inspection, the Chinese soldiers killed them. Even after this huge incident, on October 18, 1958, the Indian Foreign Secretary gave only an ‘informal note’ to the Chinese ambassador, which did not make any difference to the situation.

नेहरू ने किया संसद को गुमराह
क्लाड ने अपनी इस रिपोर्ट में नेहरू पर भारत की संसद को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा है कि 22 अप्रैल 1959 को सांसद बृज राज सिंह ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से संसद में सवाल किया कि चीन ने अपने नक्शे में भारतीय इलाके को चीन का हिस्सा दिखाया है, इस बारे में भारत सरकार क्या कर रही है? तो नेहरू ने जवाब दिया, ‘मैं माननीय संसद सदस्य को सुझाव दूंगा कि वो कभी हॉन्ग कॉन्ग तो कभी कहीं और छपी मीडिया रिपोर्ट पर ज्यादा ध्यान न दिया करें’.

Nehru did mislead Parliament
Claude also accused Nehru of misleading Parliament of India in his report. He wrote that on April 22, 1959, Parliamentarian Brij Raj Singh asked the media report in Parliament that China has shown Indian part of China in its map, what is the Government of India doing about it? Nehru replied, “I would suggest to the Honorable Parliament that he never paid more attention to Hong Kong and nowhere else on the media report.”

क्लाड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अगस्त, 1959 में भारत के प्रधानमन्त्री नेहरू ने संसद में स्वीकार कर लिया कि चीन ने भारत के अक्साई चिन में सड़क बना ली है. यानी एक प्रकार से अक्साई चिन पर चीन की प्रभुसत्ता को नेहरू ने अपनी मौन स्वीकृति दे दी थी. चीन भारत पर कब्जे की योजनाएं बना कर उनपर अमल करता रहा और नेहरू अपनी अय्याशियों में खोये रहे. कहा जाता है कि उन्हें मिले भारत रत्न पुरस्कार के लिए अपना नाम उन्होंने खुद ही रिकमेंड कर दिया था.

Claude has written in his report that in August, 1959, Indian Prime Minister Nehru accepted it in Parliament that China had made a road in Aksai Chin of India. That is, in a way, Nehru gave his silence to China’s sovereignty on Aksai Chin. China continued to implement its plans to occupy India and Nehru lost its expenditure. It is said that he got his name for the Bharat Ratna award he got himself automatically.

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https://youtu.be/1YmeDP0wOXs

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PNB बैंक के इस घोटाले को लेकर राजनाथ सिंह के आये इस एक्शन में नीरव मोदी समेत PM मोदी हैरान

देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर नीरव मोदी को अमेरिका से भी खींचकर ले आएंगे.

On the country’s largest bank scam, Union Home Minister Rajnath Singh said that Neerav will bring Modi from America as well as the need arises.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत की अब कोई गुंजाइश नहीं है. आतंकवाद फैलाने का रवैया और सुलह की कोशिशें साथ-साथ नहीं चल सकतीं है. भरोसा दिलाया कि सेना देशवासियों का मस्तक नीचा नहीं होने देगी.

He said that there is no room for dialogue with Pakistan now. Attempts to spread terrorism and reconciliation efforts can not go hand in hand. Assured that the army will not let the heads of the nation down

हम आपको बता दें कि महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि यहां पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री से पत्रकारों ने सवाल किया कि मुफ्ती महबूबा(जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री) पाकिस्तान से बातचीत की पक्षधर हैं, जबकि आपकी पार्टी के लोग तो पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात कह रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि इस समय जैसे हालात है ऐसे में पाकिस्तान के साथ बातचीत का कोई औचित्य नहीं है. सेना द्वारा जरूरी कदम उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पत्थरबाजों से मुकदमे उनमें सुधार की बुनियाद पर वापस लिए गए हैं.

Let us tell you that the Chief Guest as the chief guest who arrived here on the foundation day of Mahatma Jyotiba Phule Ruhalkhand University, journalists asked that Mufti Mehbooba (Chief Minister of Jammu and Kashmir) favors to negotiate with Pakistan, while the people of your party Talking to teach a lesson? On this, he replied that there is no justification for talks with Pakistan in such a situation at this time. The necessary steps are being taken by the army. He said that the lawsuit from stone makers has been withdrawn on the basis of their improvement.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सबसे बड़े बैकिंग घोटाले पर बात करते हुए कहा कि ऐसी प्रभावी कार्रवाई की जाएगी जिससे आगे कोई भी इस तरह की हरकत करने के बारे में सोचेगा भी नहीं. उन्होंने कहा कि घोटाले का आधा पैसा वसूल किया जा चुका है. और यह भी बताया कि घोटाला 2011 से चल रहा है. हमारी सरकार में तो पकड़ में आया. अब दंडात्मक कार्रवाई हो रही है.

Talking on the biggest banking scam, Home Minister Rajnath Singh said that such effective action will be taken, so that no one will think about doing such acts any further. He said that half of the scam has been recovered. And also told that the scam is going on since 2011. In our government then came in the grip. Now the punitive action is taking place.

इसके पहले विवि के स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा था कि इंफोसिस के इंजीनियर और अलकायदा के आतंकवादी, दोनों ही युवा हैं. और शिक्षित भी हैं. बस उनमे सोच का अंतर है. इंफोसिस को दुनिया में विकास के नाम से जाना जाता है और अलकायदा को दहशत के नाम से जाना जाता है.

Earlier, at the establishment day function of the University, he had said that Infosys engineers and terrorists of Al Qaeda are both young. They are also educated. Just the difference of thinking in them. Infosys is known in the world as development and al-Qaeda is known as terror.

 


पुरातन छात्र राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सीईओ राहुल जौहरी, पोस्ट मास्टर जनरल जितेंद्र गुप्ता, केसर चीनी मिल के उपाध्यक्ष शरद मिश्रा, पूर्व कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी, पूर्व कुलपति एमडी तिवारी, मैकेनिकल इंजीनिय¨रग के पूर्व शिक्षक एवं भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, एकेटीयू के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक मुख्य अतिथि के हाथों सम्मानित हुए.

Former student of Rajasthan High Court, Gangaram Mulchandani, CEO of Rahul Dravid, postmaster general Jitendra Gupta, vice president of Kesar Sugar Mill Sharad Mishra, former Vice-Chancellor Professor Zahid Hussain Zaidi, former Vice-Chancellor MD Tiwari, Mechanical Engineering Former teacher and BJP spokesman Sudhanshu Trivedi, VC of Ekateu Prof. Vinay Pathak, chief guest Hands honored.

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डोकलाम के बाद चीन ने भारत पर फिर बोला हमला PM मोदी समेत सेना हाईअलर्ट

नई दिल्ली: मालदीव के राजनीतिक संकट के बीच चीन ने धमकी भरे अंदाज में भारत से कहा है कि अगर उसने इस मामले में सैन्य कार्रवाई की तो वह भी खामोश नहीं बैठेगा. सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में यह बात कही गई है. संपादकीय में कहा गया है कि मालदीव इस समय संकट से जूझ रहा है, ऐसे में भारत को भी संयम से काम लेना चाहिए. संपादकीय में मौजूदा राजनीतिक संकट को मालदीव का आतंरिक मामला बताते हुए कहा गया है कि अगर भारत सैन्य दखल देता है तो चीन भी जवाबी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा.

New Delhi: China has said in a threatening manner to the Maldives political crisis that if she takes military action in this matter she will not even be silent. This is said in the official newspaper Global Times editorial. In the editorial it has been said that Maldives is struggling this time, in this way, India should also work with restraint. Terming the current political crisis in the editorial as an internal matter of Maldives, if India gives military intervention, then China will also be forced to retaliate.

मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन करने वालों को निशाने पर लेते हुए ‘माले में अनधिकृत सैन्य हस्तक्षेप रोका जाना चाहिए’ शीर्षक से लिखे गए संपादकीय में इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मानकों के हिसाब से सही नहीं बताया गया है. संपादकीय में साफ-साफ कहा गया है कि सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का सम्मान करना चाहिए. साथ ही संपादकीय में इस बात पर रोशनी डाली गई है कि अगर मालदीव में हालात और बिगड़ते हैं तो अंतरराष्ट्रीय तंत्र के जरिए इसका समाधान निकाला जाना चाहिए.

Taking advantage of the support of military intervention in the Maldives, editorials titled ‘Males should stop unauthorized military intervention should be stopped’, it has not been told according to the standards of international relations. The editorial clearly states that all countries should respect each other’s principle of sovereignty, independence, regional integrity and non-interference. In the editorial, it has been highlighted that if the situation in the Maldives worsens, then the solution should be resolved through the international system.

अन्य देशों के अंदरूनी मामलों में कोई दखल नहीं, मालदीव संकट पर पाकिस्तान ने कहा

5 फरवरी को मालदीव में आपातकाल
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने बीते 6 फरवरी को को अपने देश में उत्पन्न संकट को समाप्त करने के लिए भारत सरकार से सैन्य हस्पक्षेप का आग्रह किया था. इसके एक दिन पहले (5 फरवरी) राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश में आपातकाल की घोषणा की और देश के प्रधान न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश को जेल में बंद कर दिया. नशीद ने ट्वीट कर कहा कि वह ‘मालदीव के लोगों की ओर से भारत से ‘सेना समर्थित’ राजनयिक भेजने का आग्रह कर रहे हैं ताकि पूर्व राष्ट्रपति मैमून अब्दुल गयूम समेत राजनीतिक बंदियों व न्यायाधीशों को रिहा करवाया जा सके.”

No interference in internal affairs of other countries, Pakistan says on Maldives crisis

Emergency in Maldives on 5th February
Former Maldivian President Mohamed Nasheed had urged the Indian government to call for a military outcry to end the crisis in his country on February 6. A day before (5 February) President Abdullah Yameen announced an emergency in the country and closed the chief justice of the country and the other judge in jail. Nasheed tweeted that he was urging people from Maldivians to send ‘military-backed’ diplomats from India so that political prisoners and judges, including former President Mamun Abdul Gayoom, could be released.

चीन की भारत को चेतावनी
इससे पहले 7 फरवरी को चीन ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत को मालदीव में हस्तक्षेप को लेकर चेताया था और कहा है कि देश के राजनीतिक संकट में बाहरी ‘हस्तक्षेप’ से स्थिति और जटिल होगी. चीन ने इन आरोपों से इनकार किया है कि वह मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का समर्थन कर रहा है. उसने कहा कि बीजिंग दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है.

China warns India
Earlier on February 7, China had indirectly warned India about the interference in the Maldives and said that the situation would be complicated by external ‘interference’ in the political crisis of the country. China has denied the allegations that he is supporting the President of Maldives President Abdullah Yameen. He said that Beijing adheres to the policy of not interfering in the internal affairs of other countries.

नहीं चाहते कि डोकलाम के बाद मालदीव भी भारत से टकराव का मुद्दा बने: चीन

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा था, “मालदीव में मौजूदा स्थिति उसका आंतरिक मामला है. इसे संबंधित पक्षों को बातचीत और आपसी संपर्क से समुचित तरीके से सुलझाना चाहिए.” गेंग ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मालदीव में कार्रवाई करने के बजाए देश की संप्रभुता का सम्मान कर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए. कार्रवाई करने से मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है.”

Do not want Maldives to become a problem of conflict after India after Dolaam: China

Chinese Foreign Ministry spokesman Geng Shuang had said, “The present situation in the Maldives is its internal matter, it should be resolved properly by the parties concerned through dialogue and mutual contact.” Geng said, “Instead of taking action in the Maldives, the international community should respect the sovereignty of the country and play a positive role.


पूर्व राष्ट्रपति ने किया था भारत से सैन्य हस्तक्षेप का आग्रह
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने 6 फरवरी को नई दिल्ली से मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप का आग्रह किया था. भारत के करीबी नशीद को 2012 में साजिश के तहत सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत ने अपने तल्ख बयान में कहा था कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन द्वारा देश में आपातकाल लगाना और देश के प्रधान न्यायाधीश व पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम को गिरफ्तार करना काफी परेशान करने वाला कदम है.

Former President had urged military intervention from India
Former Maldivian President Mohamed Nasheed had urged military intervention in Maldives on 6th February from New Delhi. Nasheed of India was ousted from power in 2012 under the conspiracy. After this whole incident, India had said in its strong statement that it was a matter of great concern for President Abdullah Yameen to impose an emergency in the country and arrest the chief justice of the country and arrest former President Abdul Gayoom.

 

क्या है मामला:
मालदीव की सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले गुरुवार (1 फरवरी) को विपक्ष के नौ हाई-प्रोफाइल राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और उनके खिलाफ चलाये गए मुकदमों को राजनीति से प्रेरित बताये जाने के बाद से ही देश में राजनीतिक संकट के बादल छा गये थे. घटना के बाद मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये. राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी जिसके कुछ ही घंटों बाद सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद और एक अन्य न्यायाधीश अली हमीद को गिरफ्तार कर लिया गया.

What is the case:
Only after the Supreme Court of Maldives, on Thursday (February 1st) to release 9 high-profile political prisoners of the Opposition and prosecutions against them were politically motivated, the country had experienced a crisis of political crisis. After the incident, Maldivian President Abdullah Yameen refused to accept the order of the Supreme Court, which triggered protests across the country. The President announced an emergency in the country, a few hours after Supreme Court Chief Justice Abdullah Saeed and another judge Ali Hamid were arrested.

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https://youtu.be/6KzO3XxanXM

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अभी-अभी :नापाक सेना ने किया ऐसे भयानक हथियार,से घिनोना काम जिसे देख भारत समेत अमेरिका भी भड़क उठा |

नई दिल्ली : पाकिस्तान ने केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर का जीना हराम किया हुआ है. खासतौर पर अमेरिका के साथ तो ऐसा विश्वासघात किया है, जसे देख पूरे अमेरिका में गुस्सा भड़क उठा है. अमेरिका काफी वक़्त से पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का मन बना रहा है, अब लगता है वो वक़्त आने वाला है.

New Delhi: Pakistan has not only survived the world but also the world. Especially with America, such betrayal has been seen, as the whole United States has got angry. The US has long been looking forward to taking tough action against Pakistan, now it seems that the time is coming.

पाकिस्तान भारत के खिलाफ कर रहा अमेरिकी हथियारों का दुरूपयोग
दरअसल अमेरिका ने पाकिस्तान को तालिबान के खिलाफ इस्तमाल करने के लिए टीओडब्ल्यू-2 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलें दी थी. मगर पाकिस्तान ने अमेरिका को दगा देते हुए ना तो तालिबान के खिलाफ कोई कार्रवाई की, बल्कि इन मिसाइलों का इस्तमाल करके वो अब नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय चौकियों को निशाना बना रहा है.

Misuse of American Weapons Against Pakistan India
Indeed, the US had given TOW-2 anti-tank guided missiles to use Pakistan against the Taliban. But Pakistan did not take any action against the Taliban, insulting America, but using these missiles, he is now targeting Indian checkpoints on the LoC.

भारत ने अमेरिका के सामने इसकी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. अमेरिका ने पाकिस्तान को ऐसी 2000 मिसाइलें अक्तूबर 2007 में आत्मरक्षा और अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए दी थीं. पहले खबर आयी थी कि पाकिस्तान चीनी मिसाइलों का इस्तमाल कर रहा है, मगर अब ताजा जानकारी के मुताबिक़ पाकिस्तान अमेरिकी मिसाइलों का इस्तमाल भारतीय सेना पर हमले के लिए कर रहा है.

India has filed its formal complaint to the US. The US had given Pakistan 2000 such missiles to use in October 2007 for self-defense and against the Taliban in Afghanistan. The first news was that Pakistan is using Chinese missiles, but according to the latest information, Pakistan is using US missiles to attack the Indian Army.

वाइट हाउस तक पहुंचा पाकिस्तान का कच्चा-चिट्ठा
पिछले हफ्ते इसी मिसाइल के हमले में सेना के कैप्टन कपिल कुंडू और दो जवान शहीद हुए थे. इस साल इन मिसाइलों के हमले में नौ जवान शहीद हो चुके हैं. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की इस हरकत को लेकर भारत ने ठोस सबूत भी अमेरिका को दिए हैं. भारत ने कहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान से मुकाबले के लिए दी गई मिसाइलों का इस्तेमाल एलओसी पर हो रहा है.

Pakistan’s Crude Blog accessed to White House
Captain Kapil Kundu of the army and two jawans were martyred in the attack of the same missile last week. Nine jawans have been killed in the attacks of these missiles this year. It is being said that India has given concrete proof to the US about this move of Pakistan. India has said that the missiles used for fighting Taliban in Afghanistan are being used on the LoC.

पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन कर इसकी आड़ में आतंकवादियों की घुसपैठ करा रहा है. जानकारी के मुताबिक़ सेना एलओसी पर दागे गए एंटी टैंक मिसाइल के टुकड़ों को दिल्ली मुख्यालय लेकर आई है. इन टुकड़ों को अति गोपनीय तरीके से अमेरिकी प्रतिनिधियों को दिखाया गया है. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी भारत अमेरिका से पाकिस्तान को बेचे जाने वाले खतरनाक हथियारों को लेकर आपत्ति जता चुका है.

Pakistan is infiltrating terrorists under the guise of violating ceasefire. According to the information, the Army has brought the pieces of the anti-tank missile fired on the LoC to Delhi Headquarters. These pieces have been shown to US representatives in a highly secretive way. It is being told that before this, India has expressed objection to the dangerous weapons being sold to the US from Pakistan.

कांग्रेस की गलतियों की सजा भुगत रहा देश
वैसे देखा जाए तो इस सारी समस्या के पीछे कांग्रेस ही जिम्मेदार है. सबसे पहले तो जवाहर लाल नेहरू ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कश्मीर समस्या पाल ली. इसके बाद अगले 60 सालों तक कांग्रेस की किसी भी सरकार ने अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत नहीं किये, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे रूस नाराज हो जाएगा.

Congress is facing punishment for Congress’s mistakes
By the way, the Congress is responsible for all this problem. First of all, Jawaharlal Nehru rejected the proposal of Sardar Vallabh Bhai Patel and resolved the Kashmir problem. After this, for the next 60 years, any Congress Congress did not strengthen relations with the United States because they feared that Russia would be angry with it.

जिसके कारण अमेरिका की नजदीकी पाकिस्तान के साथ हो गयी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता हासिल करने के बाद अपनी चाणक्य कूटनीति का परिचय देते हुए ना केवल रूस बल्कि अमेरिका के साथ भी घनिष्ठ सम्बन्ध बना लिए.

Which led to the close proximity to the United States of Pakistan. After acquiring power, Prime Minister Narendra Modi made a close relationship with Russia and the United States, not only introducing his Chanakya diplomacy.

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग में इजाफा हुआ है. साल 2015 में भारत और अमेरिका के बीच 10 साल के डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को रिन्यू हुआ था. इसके एक साल बाद अमेरिका ने भारत को बड़े रक्षा भागीदार का दर्जा दे दिया.

Defense cooperation between India and the United States has increased. In 2015, the 10-year Defense Framework Agreement between India and the United States was renewed. A year later, the US gave India the status of a large defense partner.

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https://youtu.be/6KzO3XxanXM

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बड़ी खबर: नक्सलियों के कैंप पर छापा, कांग्रेस समेत अमेरिका तक हडकंप, जुड़े हैं काई बड़े नाम !

नई दिल्ली : पिछले 60 सालों से देश की क्या गत बना दी गयी थी, ये देखकर आपकी आँखें फटी रह जाएंगी | राजनीति के चलते देश के कोने-कोने पर उग्रवादियों को पाला गया, अवैध घुसपैठियों को बसाया गया. मोदी सरकार में अब सारे काले कारनामों की पोल खुल रही है | नक्सलियों के खिलाफ मिशन चला रहे सुरक्षाबलों ने झारखंड में चतरा जिले के बेरियाचक गांव में कुछ ठिकानों पर छापा मारा. वहां झोपड़ियों में उन्होंने जो देखा, उसे देख उनके भी पैरों तले जमीन खिसक गयी |

New Delhi: Your eyes will be torn apart by seeing what was done in the past 60 years. Due to politics, the militants were rehabilitated on the corner of the country, illegal intruders were settled. Now the poles of all black exploits are open in the Modi government. The security forces running the mission against the Maoists raided some hideouts in Berichak village of Chartra district in Jharkhand. Seeing what they saw in the huts, the ground beneath their feet fell.

झारखंड में चतरा जिले के बेरियाचक गांव में एक झोपडी में छापे के दौरान उग्रवादियों के ऐसे अत्याधुनिक हथियार मिले, जिसे देखकर पुलिस के होश उड़ गए | बताया जा रहा है कि पुलिस को उग्रवादियों के ठिकाने से 5.56 एम- 4 कोल्ट राइफल मिली है |

During the raid in a hut in Beriakak village of Chartra district, Jharkhand got such sophisticated weaponry of militants, which saw the sensation of police. It is being told that the police has got 5.56 M-4-cot rifle from the hideout of the militants.

यह राइफल कोई मामूली हथियार नहीं, बल्कि बेहद अत्याधुनिक है और इसका इस्तेमाल फिलहाल अमेरिकी सेना करती है | इस बारे में एएसपी अभियान अश्विनी मिश्रा ने बताया कि उग्रवादी संगठन के मुखिया बृजेश गंजू के छिपे होने की खबर पर बेरियाचक गांव में रेड मारी गई | लेकिन मौके से वह फरार हो गया | पुलिस को मौके से एके- 56 राइफल और 5.56 एम 4 कोल्ट राइफल मिली |

This rifle is not a modest weapon but is very sophisticated and it is used by the US Army at the moment. ASP campaign Ashwini Mishra said that the news of the disappearance of the leader of the militant organization, Brajesh Ganju, was raided at Beriyachak village. But he escaped from the spot. Police got AK-56 assault rifle and 5.56 M 4 long rifle from the spot.

दुनिया की सबसे खतरनाक हथियारों में गिनी जाने वाली एम- 4 कोल्ट राइफल कुछ दिन पहले ही कश्मीर में मारे गए जैश ए मोहम्मद के आतंकी तलाहा रशीद के पास भी मिली थी | सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात से हैरान है कि आखिर इतने खतरनाक हथियार आतंकी और नक्सलियों के पास आ कहां से रहे हैं |

The M-4-cot rifle, which was to be counted among the world’s most dangerous weapons, was also found near Talha Rashid, a terrorist of Jaish-e-Mohammed, killed in Kashmir a few days ago. Security agencies are now surprised that after all such dangerous weapons came from terrorists and Naxalites.

बताया जाता है कि 5.56 एम फोर राइफल ऑटोमेटिक मोड में एक बार में 3 सेकंड में 30 गोली फायर करती है | यानी एक मिनट में 600 गोली फायर करती है | इसे करीबी लड़ाई के लिए यह दुनिया का खतरनाक हथियार माना जाता है. इसकी ताकत का अंदाजा आप किसी बात से लगा सकते हैं कि 1800 मीटर की दूरी से भी गोली मारने पर यह शरीर के आरपार छेद कर निकल सकती है |

It is said that 5.56 M four rifle fire fire 30 bulbs in 3 seconds at a time in automatic mode. That is to fire 600 bullets in a minute. This is considered to be the world’s dangerous weapon for a close fight. You can guess about its power by pointing out that even after shooting at a distance of 1800 meters, it can get out of the body through holes.

पुलिस के मुताबिक, झारखंड में अब तक इतने खतरनाक हथियार नहीं मिले हैं. पीएलएफआई, एमसीसी, टीएसपीसी, जेजेएमपी जैसे सक्रिय नक्सली और उग्रवादी गुट के पास अब तक कारबाइन, एके-47, इंसास और एसएलआर जैसे हथियार ही मिले हैं| अमेरिकी हथियार उग्रवादियों के पास कैसे इसकी जांच की जा रही है |

According to the police, so many dangerous weapons have not been found in Jharkhand so far. The active Naxalites and militant groups like PLF, MCC, TSPC, JJMP, have got weapons like carbine, AK-47, INSAS and SLR so far. How is it being investigated by US arms insurgents?

बहरहाल अब मोदी सरकार नक्सलियों के खिलाफ सख्त है और उनका जड़-मूल से विनाश करने के आदेश दिए हुए हैं | जिसके बाद नक्सलियों के नेटवर्क लगातार ध्वस्त होते जा रहे हैं. कांग्रेस द्वारा 60 सालों में खोदे गए गड्ढे भरे जा रहे हैं | अनुमान के मुताबिक़ 2019 तक नक्सलियों का नामो-निशान तक मिट चुका होगा |

However, now the Modi government is strict against the Naxalites and they have been ordered to destroy their roots. After which the Naxalites’ networks are constantly being demolished. The potholes are being filled by the Congress in 60 years. According to the estimate, by the year 2019, the Naxalites will have lost their names

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