G-20 पीएम मोदी की अब तक की बड़ी कूटनीतिक जीत,जो आज तक नहीं हुआ वो पीएम मोदी ने कर दिखाया ,जिसे सुन देशवासी ख़ुशी से झूम उठे

नई दिल्ली : आज मोदी सरकार में भारत तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन गया है. पहले फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठे नंबर की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना तो अब अगले साल तक जापान को पछाड़कर पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. इस प्रगति को अब पूरी दुनिया और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी सराह रहे हैं. तभी तो एक बार फिर G20 सम्मलेन में गए पीएम मोदी और भारत को बड़ी ज़बरदस्त कामयाबी मिली है जो आज तक नहीं हुआ.

अभी G20 सम्मलेन से भारत के लिए बहुत बड़ी खबर आ रही है जिसे सुन हर भारतवासी का सीना गर्व से फूल उठेगा. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। अब भारत 2022 में विश्व के 20 ताकतवर देशों के समूह G-20 की मेजबानी करेगा.

g20

2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं। मोदी सरकार ने 2022 में न्यू इंडिया का नारा भी दिया है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समूह की बैठक की मेजबानी मिलने को एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. जी-20 विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है. ऐसे में भारत में इसका आयोजन होना बहुत ज़्यादा गर्व की बात है. मतलब इन सभी ताक़तवर 20 देशों के राष्ट्रपति भारत आएंगे.

पीएम मोदी ने यहां अर्जेंटीना की राजधानी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में यह घोषणा की. वर्ष 2022 में जी 20 सम्मेलन की मेजबानी इटली को करनी थी. मोदी ने भारत को इसकी मेजबानी मिलने के बाद इसके लिए इटली का शुक्रिया अदा किया. इसके साथ ही उन्होंने जी-20 समूह के नेताओं को 2022 में भारत आने का न्यौता दिया. वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने घोषणा के बाद ट्वीट किया, ‘‘वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं. उस विशेष वर्ष में, भारत जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व का स्वागत करने की आशा करता है. विश्व की सबसे तेजी से उभरती सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में आइए. भारत के समृद्ध इतिहास और विविधता को जानिए और भारत के गर्मजोशी भरे आतिथ्य का अनुभव लीजिए.’’

इससे पहले पीएम मोदी ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रमफोसा के साथ मुलाकात की थी. मोदी ने उन्हें 2019 के गणतंत्र दिवस परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया था. इसे अफ्रीकी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है.

बता दें, आर्थिक और कूटनीतिक मामलों के लिए जी-20 काफी अहम संस्था है. यह विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें भारत, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं.

कांग्रेस सरकार के दस साल में याद दिला दें बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने भारत की अर्थव्यवस्था को खतरनाक बताते हुए FRAGILE FIVE ग्रुप में डाल दिया था. ये बेहद शर्मनाक पल था क्यूंकि इसका मतलब होता है कि भारत ना सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने पडोसी देशों के लिए भी खतरा है.

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भारत पहुंचे फ्रांस के राष्ट्रपति, विमान से उतारते ही लिया ऐसा जबरदस्त फैसला, PM मोदी समेत हैरान रह गयी सारी दुनिया

नई दिल्ली (10 मार्च) : चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद सारा विपक्ष अब मोदी के खिलाफ राजनीति पर उतर आया है. यूपी में सपा, बसपा एक हो गए हैं, वहीँ ममता भी कांग्रेस के साथ मिलकर मोदी के खिलाफ राजनीति कर रही है. मगर दूसरी ओर चुनाव ख़त्म होते ही पीएम मोदी वापस अपने काम में जुट गए हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैलुएन मैकरॉन शुक्रवार देर रात भारत पहुंचे हैं और उनके आते ही एक बेहद शानदार खबर भी सामने आ रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ इमैलुएन मैकरॉन का स्वागत किया. शनिवार को राष्ट्रपति इमैलुएन मैकरॉन और उनकी पत्नी ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धाजंलि दी. इसके बाद हैदराबाद हाउस में दोनों देशों की द्विपक्षीय बैठक हुई जिसमें पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएलमैकरॉन बैठक में मौजूद रहे.

16 बिलियन डॉलर के सौदे पर दस्तखत
बता दें की प्रतिनिधि स्तर की इस बैठक में आतंकवाद, रक्षा और हिंद महासागर में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ कई अहम मुद्दों पर 14 समझौते हुए. मैक्रों के भारत दौरे के पहले दिन शनिवार को फ्रांस और भारतीय कंपनियों के बीच 16 बिलियन डॉलर के समझौतों पर मुहर लगी है. यह बात फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर बतायी है.

सबसे ख़ास बात ये भी है कि भारत और फ्रांस के बीच परमाणु ऊर्जा को लेकर भी समझौता हुआ है. इससेे पहले मैकरॉन राष्ट्रपति भवन पहुंचे, यहां नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. भारत सरकार मैकरॉन के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती.

मैक्रों ने राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत समारोह के दौरान कहा ,’ मैं भारत आकर बहुत खुश हूं और स्वयं को गौरवाविंत महसूस कर रहा हूं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत वर्ष जुलाई में अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान मुझे अपने देश आने का न्यौता दिया था. मेरा इरादा दोनों देशों के बीच खास कर, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहभागिता का एक नये युग की शुरूआत करने का है.’

वाराणसी में वैदिक मंत्रोच्चार से होगा स्वागत
जानकारी के मुताबिक मैक्रों सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा भी करेंगे. वाराणसी में वैदिक मंत्रोच्चार और शहनाई वादन से फ्रांस के राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया जाएगा. वाराणसी में उनके स्वागत के लिए कई सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है.

मैक्रॉन मोदी के साथ 12 मार्च को वाराणसी पहुंचेंगे। इससे पहले दोनों नेता उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर भी जाएंगे. दोनों नेता वहां पर फ्रांस की कंपनी एनवॉयर सोलर प्राइवेट लिमिटेड और नेडा ने दादरकलां गांव में 650 करोड़ से बने 75 मेगावॉट के सोलर पावर प्लांट का उद्घाटन करेंगे. मैक्रॉन मोदी के साथ काशी के घाट घूमेंगे. मैक्रॉन के स्वागत के लिए नृत्य संगीत का एक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा.

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ब्रेकिंग – पीएम मोदी के साथ आया फ्रांस, राहुल गाँधी समेत कोंग्रेसी नेताओं को दिया 440 वोल्ट का जोरदार झटका. हैरान रह गयी सोनिया.

नई दिल्ली : देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी की तमगा पा चुकी कांग्रेस सत्ता की खातिर किस कदर नीचता पर उतर आयी है, इसका अंदाजा आपको ये खबर पढ़कर हो जाएगा. पिछले काफी वक़्त से राहुल गाँधी समेत कई कोंग्रेसी नेता राफेल डील को लेकर पीएम मोदी पर कीचड उछाल रहे हैं. मगर अब फ्रांस ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे कोंग्रेसियों की बोलती बंद हो गयी है.

New Delhi: The Congress, which has won the most corrupt party of the country, has come down to the lowest level due to the power of the Congress, it will be understood by reading this news. For the last several years, many Congress leaders including Rahul Gandhi are rubbing PM Modi over Rafael Deal. Now France has taken a decision that has stopped speaking to the Congress.

राफेल डील में मोदी सरकार को फ्रांस की हरी झंडी
दरअसल गोपनीयता बरकरार रखने के लिए पीएम मोदी इस डील को लेकर कोई जवाब नहीं दे पा रहे थे. इसी बात का फायदा उठाकर राहुल गाँधी पीएम मोदी पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगा रहे थे. मगर अब फ्रांस ने पीएम मोदी की इस मुश्किल को आसान कर दिया है और उन्हें इसपर बात करने की छूट दे दी है.

Rafael Deal prompts the Modi government for the French flag
Actually, in order to maintain confidentiality, PM Modi was unable to answer any questions regarding this deal. Taking advantage of this, Rahul Gandhi was blaming false allegations of PM Modi. But now France has eased the difficulties of PM Modi and has given them the freedom to talk to it.

भारत और फ्रांस के बीच हुई राफेल डील पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यदि भारत इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ किसी तरह की बहस के लिए डील की कुछ बारीकियों से पर्दा उठाना चाहता है तो फ्रांस सरकार विरोध नहीं करेगी. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में मैक्रों ने कहा कि इस डील में इकोनॉमिक, इंडस्ट्रियल और स्ट्रैटेजिक हितों का पूरा ध्यान रखा गया है.

On the Raphael Deal between India and France, President Francois Emmanuel Macroon has said that if India wants to shed some clarity from the deal for any kind of debate with the opposition on this issue, the French government will not oppose it. In an interview with INDIA TODAY, Macros said that the overall focus of economic, industrial and strategic interests has been taken into this deal.

हालांकि, मैक्रों ने कहा कि यह डील उनके कार्यकाल में नहीं की गई है लेकिन उनका मानना है कि इस डील से दोनों देशों को फायदा हुआ है. डील पर बरती जा रही गोपनियता पर मैक्रों ने कहा कि दोनों देशों के बीच जब किसी मामले पर बेहद सेंसिटिव बिजनेस इंटरेस्ट शामिल रहते हैं तो खुलासे करना उचित नहीं रहता.

However, Macrock said that this deal has not been done during his tenure but he believes that the deal has benefited both the countries. On the confidentiality of the deal, Macros said that it is not advisable to disclose when there is a very sensitive business interest on the case between the two countries.

कांग्रेस को खुलकर जवाब दे सकते हैं मोदी
मैक्रों ने कहा कि इस डील में कॉमर्शियल एग्रीमेंट के तहत प्रतियोगी कंपनियों को डील की बारीकियों की जानकारी नहीं होनी चाहिए. यह कमर्शियल एग्रीमेंट कुछ कंपनियों के हितों से जुड़े हैं लिहाजा इनपर गोपनीयता जायज है.

Modi can openly oppose Congress
Macro said that under the commercial agreement in this deal, competitive entities should not be aware of the merits of the deal. These commercial agreements are related to the interests of some companies, so privacy is justified on them.

मैकरॉन ने कहा कि कुछ टेक्निकल मुद्दों पर रहस्य केवल कॉमर्शियल एग्रीमेंट के कारण है. मैक्रों ने दावा किया कि यदि भारत में मोदी सरकार इस डील पर उठ रहे विवादों के बीच विपक्ष के साथ संवाद में कुछ बारीकियों पर से पर्दा उठाना चाहती है तो उनकी सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी.

Macron said that the secret on some technical issues is only due to a commercial agreement. Macrons claimed that if the Modi government in India wants to take curtains in some dialogue with the opposition between the disputes arising on this deal then their government will not have any objection

.भारत और फ्रांस के बीच इस रक्षा समझौते पर मैक्रों ने कहा यह डील एक अच्छे नेगोसिएशन के माहौल में हुई है. इसके साथ ही यह डील भारत की सुरक्षा के लिए बेहद अहम. मैक्रों के मुताबिक राफेल डील भारत और फ्रांस के बीच वृहद सहमति के एक हिस्से के तौर पर यह डील है. मैक्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि उनके मुताबिक भारत सरकार ने अपने देश का पक्ष अच्छे ढंग से रखा था.

On this defense agreement between India and France, Macros said that the deal has happened in the atmosphere of a good negotiation. At the same time, this deal is very important for India’s security. According to Macro Rafael Deal, it is a deal as part of a broad agreement between India and France. Macro told INDIA TODAY that according to him, the Indian government had kept its country’s favor in good shape.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल यूपीए सरकार ने 600 करोड़ रुपये में एक राफेल का सौदा किया था, मगर अब मोदी सरकार को एक राफेल करीब 1600 करोड़ रुपये का पड़ेगा. इसी को लेकर राहुल, पीएम मोदी पर हमलावर थे. वो इस डील को पीएम मोदी का घोटाला बता रहे थे.

What is the whole matter?
In fact, the UPA government had made a deal with Rafael for Rs 600 crore, but now the Modi government will have to shell out a Rafhel about Rs 1600 crore. Rahul was an attacker on PM Modi. He was calling this deal a scam of PM Modi.

जबकि हकीकत ये है कि कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय में जो डील हुई थी वो सिर्फ राफेल विमान की थी. उसमें हथियार और दूसरे उपकरण शामिल नहीं थे. मोदी सरकार की डील में हथियार व् विमान में इस्तमाल होने वाले कल-पुर्जे व् उपकरण भी शामिल हैं और इसी कारण डील के पैसे भी बढ़ गए हैं.

Whereas the reality is that the deal that was done during the UPA government’s tenure was only of the Raphael aircraft. It did not include weapons and other equipment. The Modi government’s deal also includes equipment and equipment used in the arms and aircraft, and this is why deal money has also increased.

मोदी का शानदार फैसला
यहाँ भी मोदी सरकार की बुद्धिमानी साफ़ नज़र आ रही है. दरअसल विमान उड़ाने में कई नट-बोल्ट खराब हो जाते हैं, जो पार्ट्स इंपोर्ट करने पड़ते हैं तो वो बहुत महंगे मिलते हैं. उनकी खरीद प्रक्रिया में लंबा समय भी लगता है. जिसके चलते विमान लंबे समय तक हैंगर में ही खड़े रह जाते और उड़ नहीं पाते थे.

Modi’s splendid decision
Here the intelligence of the Modi government is clearly visible. Indeed, many nuts-bolts are damaged in flying airplanes, which they have to import parts, they get very expensive. Their purchase process also takes a long time. Because of which the aircraft could not stand and fly in the hanger for a long time.

इसलिए मोदी सरकार ने जरूरी कल-पुर्जे पहले ही खरीदने का फैसला किया है ताकि जरुरत के वक़्त विमान में किसी भी तरह की कमी ना रह जाए. हर वक़्त भारत के पास ये विमान चालू हालत में होने चाहिए ताकि देश के दुश्मनों का सामना करने के लिए सेना पूरी तरह तैयार रह सके.

Therefore, the Modi government has decided to purchase the necessary components beforehand so that there is no shortage of aircraft in the air during the need. At all times, these aircraft should be in current condition so that the army can be fully prepared to face the enemies of the country.

मगर ये सच छिपाकर कोंग्रेसियों ने देश को गुमराह करने की कोशिशें की. पीएम मोदी पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की. मगर देश की जनता ने फिर भी कांग्रेस को वोट नहीं दिए और राहुल गाँधी लगातार हार का सामना करते जा रहे हैं.

But by concealing this truth the Congressis tried to mislead the country. PM Modi tried to defame him by making false allegations of corruption. But the people of the country still did not vote for Congress and Rahul Gandhi is facing constant defeat.

यह भी देखे

https://youtu.be/1YmeDP0wOXs

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

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बड़ी खबर: रक्षा मंत्री निर्मला का बड़ा सनसनीखेज बयान, फ्रांस को लेकर किया ये बड़ा फ़ैसला, पाकिस्तान और चीन में बढ़ा तैनाव !

देश की नयी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस को लेकर ये खास फ़ैसला लिया है. देश की नयी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार एक के बाद एक फ़ैसले लेती जा रही हैं और अब देश की सीमाओं को और पुख्ता करने और वायुसेना को और ताक़त देने के मकसद से एक बड़ा कदम उठाया है.

The country’s new defense minister, Nirmala Sitharaman, took another major step and took a special decision regarding France. The country’s new Defense Minister, Nirmala Sitharaman is taking one step after another and now has taken a major step to strengthen the borders of the country and to strengthen the IAF.

गुरुवार को ग्वालियर पहुँचीं रक्षामंत्री कहा कि फ्रांस से राफेल विमान को लेकर बुधवार को ही उनके पास फ्रांस की रक्षा मंत्री का फोन आया है, जिसमें राफेल विमान की डील को लेकर अच्छी बात हुई है. दरअसल भारत और फ्रांस के बीच होने वाले सबसे महत्वपूर्ण सौदे राफेल विमानों की डील सबसे बड़ी है. भारत और फ्रांस की इस सामरिक डील में कहीं न कहीं ग्वालियर भी है क्योंकि 27 जुलाई 2013 में फ्रांस के तत्कालीन रक्षामंत्री वाय वेस ली ड्रियान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ग्वालियर भी आया था.

Defense Minister, who reached Gwalior on Thursday, said that on Wednesday about the Rafael aircraft from France, he has received a phone call from the Defense Minister of France, in which there is good talk about the deal of Rafael aircraft. Indeed, the most important deal between India and France is the deal of Rafael planes. This strategic deal of India and France is also somewhere in Gwalior as there was a delegation of Gwalior under the leadership of the then French Defense Minister Y Veis Le Dreyan in July 27, 2013.

ग्वालियर पहुंची रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिराज के कॉकपिट में बैठकर फाइटर विमान की कई बारीकियों को करीब से जाना और समझा. इस दौरान रक्षामंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें रक्षामंत्री का दायित्व इस निर्देश के साथ दिया कि वह तीनों सैन्य अमले के हर एक जवान की समस्याओं, चुनौतियों को करीब से समझते हुये उनका निराकरण कर सकें.

Defense Minister Nirmala Sitharaman, who arrived at Gwalior, sat in the cockpit of Miraj and got close to the many nuances of fighter aircraft. During this, the Defense Minister said that the Prime Minister had given him the responsibility of the Defense Minister with the directive that he could solve the problems, challenges and challenges of each of the three army personnel and solve them.

इसके अलावा समान काम, समान वेतन सहित सीमा पर तैनात जवानों को अच्छे भोजन सहित बुनियादी सुविधाएं मिलें. उन्होंने कहा कि उन्हें इन मसलों पर कई सुझाव अधिकारियों और जवानों के जरिये मिले हैं, जिन पर पॉलिसी के तहत कार्य जारी है.

Apart from this, the jawans deployed along the border with equal work, equal pay, get basic facilities including good food. He said that he has got many suggestions on these issues through officers and jawans, who are under the policy.

ग्वालियर एयरबेस पर करीब चार घंटे तक ग्वालियर एयरबेस पर रही देश की रक्षामंत्री ने उम्मीद जताई कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो फ्रांसीसी मिराज की तरह आगामी दिनों में राफेल ग्वालियर के एयरबेस की शान बन सकता है. अगर एमओयू प्रभावी होता है, तो ग्वालियर उन एयरबेस में शामिल हो सकता है, जहां फ्रांस के फाइटर जेट की दूसरी पीढ़ी गर्जना करेगी.

The country’s Defense Minister on Gwalior Airbase, who was on Gwalior Airbase for nearly four hours, hoped that if everything was okay, like the French Mirage, the glory of RAFEL Gwalior’s airbase could come in the coming days. If the MOU is effective, then Gwalior can join the airbase, where the second generation of French jet fighter will roar.

आपको बता दें कि राफेल से पहले फ्रांस के मिराज 2000 भी यहां मौजूद हैं और राफेल अंतरराष्ट्रीय रक्षा उत्पाद के बाजार में पांचवीं पीढ़ी के दुर्लभ विमानों में से एक है

Let us tell you that Mirage 2000 of France is also here before Rafael, and Rafael is one of the fifth generation rare aircraft in the international defense product market.

देश की रक्षा मंत्री बनने के बाद अल्प प्रवास पर गुरुवार को ग्वालियर पहुंचीं निर्मला सीतारमण ने इस दौरान एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश को बार-बार 56 इंच का सीना दिखाने की जरुरत नहीं है. उन्होंने कहा कि एलओसी से संबंधित मामलों को डील कर रहे हैं और रक्षा से जुड़े मामलों में जमीनी स्तर पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर सीजफायर उल्लंघन के कुछ मामले सामने आ रहे हैं, आतंकी घटनाएं हुई हैं और ऐसे सभी संबंधित मामलों को लेकर रक्षा मंत्रालय गंभीर है.

Nirmala Sitharaman, who reached Gwalior on Thursday after being appointed Defense Minister of the country, gave a big statement during this time that the country does not need to show a 56-inch chest repeatedly. They said that they are dealing with matters related to the LoC and work on the field related to defense is going on at the grassroots level. He said that there are some cases of seizure violation on the border, terror incidents have taken place, and the Defense Ministry is serious about all such matters.

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी कोशिश है कि देश को नुकसान न हो, और साथ ही महायुद्ध के हालात न बनें, हमें बार-बार 56 इंच का सीना दिखाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि हालात विपरीत बनते हैं, तो सेनाएं हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. रक्षामंत्री ने ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन का निरीक्षण किया और इस दौरान साथ ही सुखोई, मिराज, मिग-21 और जगुआर जैसे फाइटर विमानों के बारे में बारीकी से जानकारी भी ली.

Nirmala Sitharaman said that it is our effort that the country should not be harmed, as well as the situation of World War II, we do not need to show a 56-inch chest repeatedly. He said that if the situation becomes contrary, then the forces are ready to deal with every situation. The Defense Minister inspected the Gwalior Air Force Station and during this time, he also briefly got information about fighter aircraft like Sukhoi, Miraj, MiG-21 and Jaguar.

पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा पर बढ़ते झगड़े के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने खास बयान दिया. उन्होंने कहा कि सीमा से संबंधित मुद्दों को व्यापक तरीके से संभाला जा रहा है. हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इससे देश को नुकसान न हो. सीतारमण ने यह भी कहा, ‘हम जंग के रास्ते पर नहीं जा रहे, लेकिन मैं यह कहना चाहूंगी कि हमारी सेनाएं किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं.’

Defense Minister Nirmala Sitharaman gave a special statement amidst growing conflicts with Pakistan and China. He said issues related to border are being handled in a broad way. However, it is also being ensured that this does not harm the country. Sitharaman also said, “We are not going on the path of war, but I would like to say that our armies are ready to deal with any situation.”

सीतारमण ने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है, जब पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन के मामले थमने के नाम नहीं ले रहे. शुक्रवार को ही पाकिस्तान की ओर से स्नाइपर फायरिंग में बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया. यह घटना अर्निया सेक्टर में हुई. घायल होने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जवान की पहचान कॉन्स्टेबल ब्रिजेंद्र बहादुर के तौर पर हुई है। वह यूपी के बलिया जिले के रहने वाले थे.

Sitharaman has given this statement at a time when the issue of violation of the seizure violation by Pakistan is not taking place. On Friday, a BSF jawan died in the sniper firing on behalf of Pakistan. This incident happened in Arnia sector. After being injured, he was taken to the hospital, where doctors declared him dead. The young man has been identified as Constable Brigendra Bahadur. He was a resident of Ballia district of UP.

आपको बता दें कि बीते तीन दिनों से पाकिस्तान द्वारा सीमा पर सीजफायर उल्लंघन जारी है. बुधवार और गुरुवार को बिना किसी उकसावे पाकिस्तान की ओर से इंटरनैशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल पर की गई फायरिंग में तीन भारतीय जवान घायल हो गए थे. भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दो पाकिस्तानी जवान मार गिराए थे। इस साल अगस्त तक पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन के 285 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, 2016 में पूरे साल के दौरान 228 सीजफायर उल्लंघन के मामले सामने आए थे.

Let us tell you that for the last three days, the seizure of infringement on the border continues to be Pakistan. Three Indian soldiers were injured in firing on International Border and Line of Control from Pakistan without any provocation. India retaliated with two Pakistani soldiers who were killed. By August this year, 285 cases of seizure violation have been reported from Pakistan. At the same time, cases of violation of 228 siegefire during the whole year were revealed in 2016.

सीमा पर झगड़ा सिर्फ पाकिस्तान के मोर्चे पर नहीं है. चीन से भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर टकराव लगातार जारी है. सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में तो दोनों देशों की फौज महीनों तक एक दूसरे के सामने जमी रही. वहीं, लद्दाख में पेंगॉन्ग झील के नजदीक भी दोनों देशों के जवानों में झड़प की खबरें सामने आ चुकी हैं. भारतीय सेना प्रमुख भी भविष्य में कई मोर्चों पर एक साथ जंग की आशंका जता चुके हैं.

The quarrel over the border is not just on the Pakistan front. There is continuous confrontation with China on Line of Actual Control. In the Sikkim sector, the army of both countries remained in front of each other for months. At the same time, news of the clash has come out in the two countries, near the Lake of Pengong in Ladakh. The Indian Army chief has also feared a war with many fronts in the future.

आपको बता दें कि निर्मला सीतारमण तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ रोज़ बैठक कर रही हैं. रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए है कि तीनों सेनाओं के लिए जरूरी साजो-सामान और हथियारों की खरीद में बिल्कुल भी देरी नहीं होनी चाहिए.

Let us tell you that Nirmala Sitharaman is meeting daily with the heads of all the three forces. The Defense Minister has given clear instructions to the officials that there should not be any delay in procurement of necessary equipment and weapons for the three services.

रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं और कोस्ट गार्ड से ऐसे सभी बेसों और जगहों की जानकारी मांगी हैं जहां वह जा सकती हैं और अगले एक साल में रक्षा मंत्री ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात के कच्छ से लेकर उत्तर पूर्व में अरुणाचल बॉर्डर तक तीनों सेनाओं के हर बेस में जाने का लक्ष्य रखा है.

The Defense Minister has sought information from all three forces and coast guards where he can go and in the next one year, the Defense Minister ranges from Siachen to the world’s highest battlefield and Kanyakumari and Kutch of Gujarat to the north east. By Arunachal border, the goal of going to every base of the three armies has been fixed.

महिला रक्षा मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारमण ने साउथ ब्लॉक में अपने ऑफिस में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करना शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों में निर्मला सीतारामण काम के बल पर अपनी अलग पहचान बनाने में जुट गई हैं.

Narmala Seitraman, as the Defense Minister of Women, has started working from 9 am to 9 pm in South Block in his office and in the coming days

source dainik bharat

बड़ी खबर: PM मोदी के आने के बाद देखिये कैसे फर्क आ गया इन सभी देशों के साथ…

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की बैठक में हिस्सा लेने जल्द ही स्विट्जरलैंड के दावोस जाएंगे, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के पीएम शाहिद खाकन अब्बासी से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) विजय गोखले ने बताया कि प्रधानमंत्री की दावोस यात्रा बेहद संक्षिप्त होगी, महज 24 घंटे के लिए। जिस समय मोदी वहां होंगे, उस समय ट्रंप वहां नहीं होंगे। ऐसे में ट्रंप से उनकी मुलाकात नहीं हो पाएगी। जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मिलने का उनका कोई कार्यक्रम नहीं है।

गोखले ने यह भी बताया कि पीएम मोदी और पाकिस्तान के नए पीएम की मुलाकात की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री का संबोधन 23 जनवरी को होगा। इससे पहले 22 जनवरी को वह ग्लोबल सीआईओ के राउंडटेबल सम्मेलन को संबोधित करेंगे। फिलहाल इसमें 60 सीईओ के हिस्सा लेने की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें 20 भारतीय हैं।

सम्मेलन में भारत की ओर से योगाचार्य भी आकर्षण होंगे। इसे विश्व आर्थिक मंच के नियमित कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यहां से 2 एक्सपर्ट जाएंगे, जो हर रोज क्लासेज उपलब्ध कराएंगे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद से हीं नरेंद्र मोदी ने अपनी नीतियों और नजरिए से पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं दुनिया के सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेताओं में शामिल हैं। दुनिया के तमाम देशों से भारत के संबंध इससे पहले इतने अच्छे कभी नहीं रहे। अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, चीन और इजरायल समेत तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते रहे हैं।

भारत के 6 दिवसीय दौरे पर आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और कार्यशैली के कायल हो गए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी पूरी तरह से भारत के विकास के लिए समर्पित हैं। उन्होंने पीएम मोदी को महान देशभक्त बताया और कहा कि पीएम मोदी वही करते हैं, जो भारत के लिए अच्छा होता है।

दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर चुके हैं। पिछले वर्ष जून में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद यात्रा की थी। इस दौरान दोनों नेताओं में मुलाकात हुई और फिर दोनों ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी का अपना सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे।

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में शामिल हैं। पीएम शिंजो आबे भी कई मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं। पिछले वर्ष सितंबर में शिंजो आबे ने जब भारत का दौरा किया था, तब अहमदाबाद में पीएम मोदी ने उनके साथ रोड शो किया था। इस मौके पर दोनों नेताओं ने अहमदाबाद-मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर उन्होंने पीएम मोदी की प्रगतिशील सोच की तारीफ करते हुए है कि अब दोनों देशों का सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय नहीं रहा है, बल्कि यह सामरिक और वैश्विक साझेदारी में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानव अधिकार और कानून का नियम जैसे बुनियादी मूल्यों को साझा करते हैं। उस वक्त आबे ने अपने भाषण में जय इंडिया, जय जापान का नारा भी दिया था।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ पीएम मोदी के मजबूत संबंध जगजाहिर हैं। 2015 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। भारत आने से पहले ओबामा ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की थी, उन्होंने चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर का जिक्र करते हुए कहा था कि यह भारतीयों की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। ओबामा ने कहा था कि पीएम मोदी का विजन एकदम साफ है और उनकी ऊर्जा प्रभावित करने वाली है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी विकास के रास्ते में रोड़े अटकाने वाले मुद्दों को फौरन हटाने को तैयार हो जाते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना कर चुके हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में जब टर्नबुल भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत तरक्की और विकास के असाधारण रास्ते पर बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई पीएम मैल्कम टर्नबुल ने कहा कि हमारा भारत के साथ मजबूत रिश्ता है और इसे और मजबूत करना है। हम इतिहास और मूल्यों के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं।

चीन और उसके नेता प्रधानमंत्री मोदी की ताकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कई मौके पर पीएम मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं और देश ही नहीं बल्कि वैश्विक मसलों पर उनके विचारों से सहमति जता चुके हैं। पीएम मोदी ने 2014 में जब देश की बागडोर संभाली थी, उसी वर्ष सितंबर में चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा हुआ था। उस दौरे में पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के स्वागत में अहमदाबाद में साबरमती के तट पर स्वागत के विशेष इंतजाम किए थे। पिछले वर्ष जुलाई में जर्मनी के हैमबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिक्स देशों की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प को सराहनीय बताया था।

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