सऊदी अरब ने इजराइल को लेकर किया ये बड़ा जबरजस्त फैसला, पाक मुस्लिम रोये खून के आंसू- सभी मुस्लिम देशो में मचा हडकंप

नई दिल्ली : कट्टरपंथी आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने वाला है. सलाफी कट्टरपंथ की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है, ऐसे में आधी सदी से भी ज्यादा वक्त तक तेल पर निर्भर रहने के बाद सऊदी अरब अब कमाई के अन्य साधन तलाश रहा है. ऐसे में सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे देख पाकिस्तान समेत दुनियाभर के मुस्लिमों की मानो दुनिया ही हिल गयी है.

New Delhi: Radical terror is going to end the nomination from the whole world. Saudi Arabia is now coming to the knees, the father of terror in the guise of Salafi fundamentalist. In Saudi Arabia, there is a huge slowdown in the oil business for quite some time, after Saudi Arabia relied on oil for more than half a century, Saudi Arabia is now looking for other means of earning. In such a situation, Saudi Arabia has taken a decision, which is seen by the Muslims all over the world including Pakistan as the world has shaken.

इजराइल के साथ संबंध बहाली के लिए तैयार सऊदी अरब !
सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंध बहाली का प्रस्ताव पेश कर दिया है. जिसे देख दुनियाभर के उन कट्टरपंथी मुस्लिमों की दुनिया ही मानो हिल गयी है, जिन्हे जन्म से केवल यही सिखाया गया कि यहूदी उनके दुश्मन हैं. आइये अब आपको बताते है कि आखिर सऊदी ने ऐसा सनसनीखेज कदम उठाने का फैसला क्यों लिया.

Ready to restart relations with Israel, Saudi Arabia!
Saudi Arabia has proposed a proposal to restore relations with Israel. Who has seen the world of radical Muslims from all over the world shaken, who were taught only from birth that Jews are their enemies. Let us now tell you why Saeed has decided to take such a sensational step.

कंगाली के कगार पर सऊदी
दरसल 2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी, जिससे हालात बदल गए. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में, जहाँ अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी. वहां 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा.

Saudi on the verge of bankruptcy
After the conclusion of the 2014 oil business, there was a sharp slowdown, the situation changed. There is a considerable reduction in Saudi government revenue. The budget deficit record was $ 97 billion last year. This is the reason why Saudi Arabia, which is called the biggest economy of the Gulf region, where no tax was levied so far and the government also offered a lot of subsidies. There will be VAT on all services and products at the rate of 5% on the first quarter of 2018.

इजराइल से दोस्ती के पीछे स्वार्थ ?
इसके पीछे पैसों की यारी है, तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है और ऊपर से ईरान भी तेल बाजार में सऊदी अरब को अच्छी-खासी टक्कर दे रहा है. ऐसे में सऊदी अरब अब अपने दूसरे प्राकृतिक संसाधन यानी रेगिस्तान का रुख कर रहा है. सऊदी किंगडम हजारों किलोमीटर रेगिस्तानी जमीन पर नए-नए शहर बसाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नौकरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

Selfishness behind friendship with Israel?
There is a lot of money behind this, there is a huge slowdown in the oil business and above all, Iran is also giving a good deal to the Saudi Arabian market. In this way, Saudi Arabia is now moving towards its second natural resource ie desert. The Saudi Kingdom is working on plans to set up new cities on thousands of kilometers of desert land, so that jobs and foreign investment can be boosted.

इजराइल ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली कि वो रेगिस्तान में पानी की कमी व् अन्य प्राकृतिक सहूलियतों के बिना भी फल-फूल रहा है. ऐसे में इन शहरों को बसाने के लिए और उन्हें सभी सहूलियतों मुहैय्या कराने के लिए सऊदी अरब को इजराइल की तकनीक की जरुरत तो पड़ेगी ही. इसी चक्कर में सऊदी अरब ‘तेल के खेल’ की मुश्किलों को समझते हुए अब नई संभावनाएं तलाशने पर मजबूर हुआ है.

Israel developed such technology that it is also flourishing in the desert without water scarcity and other natural conveniences. In such a situation, Saudi Arabia will need Israeli technology to settle these cities and to provide them all the facilities. Understanding the difficulties of Saudi Arabia’s “Oil Sports” in this round, it is now forced to explore new possibilities.

अमेरिका की मदद से दोस्ती की पहल !
हालांकि सऊदी अरब, इजराइल के साथ दोस्ती काफी गुपचुप रूप से धीरे-धीरे कर रहा है, ताकि कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क ना जाएँ. अभी सब कुछ पर्दे के पीछे है, लेकिन इस्राइल के चैनल-10 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब ने इस्राइल के साथ समझौते का कदम बढ़ा दिया है. सदियों से जिन्हे अपना दुश्मन माना है, उनसे सीधे जाकर कैसे कह दें कि चलो दोस्ती कर लो. इसलिए इसके लिए सऊदी ने अमेरिका का सहारा लिया है.

Friendship initiative with the help of the US!
However, friendship with Saudi Arabia is very quietly making friendship with Israel so that radical Muslims do not flare up. Now everything is behind the scenes, but according to Israel’s channel-10 report, Saudi Arabia has stepped up the deal with Israel. For centuries, who have believed in their enemies, go straight from them and tell them that let’s be friends. So Saudi has taken the US support for this.

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकर कुश्नर और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुश्नर दोनों अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका के इजराइल से भी बहुत अच्छे संबंध हैं, इसलिए सऊदी अरब ने कुशनर के माध्यम से इजराईल के पास अपना संदेश पहुंचाया है. सऊदी अरब इजराइली व्यापारियों को वीजा देने पर राजी है.

According to the Israeli media reports, Crown Prince Muhammad bin Salman and Kushner, both of Kushner and the Saudi Arabians, by the advice of the American President Trump, are both good friends. There are also good relations with Israel in the US, so Saudi Arabia has conveyed its message to Israel through a Kushanar. Saudi Arabia agreed to give visa to Israeli businessmen.

यह भी देखे :

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

source political report

गुस्से से ठनका इजराइल का माथा तिल्मिलकर कर दिया ऐसा काम पाक में मची चीख पुकार

नई दिल्ली : कहने को इजराइल एक मणिपुर से भी छोटा देश है लेकिन वो कैसे अपने दुश्मन देश को जवाब को देता है ये उसके अड़ोस-पड़ोस देश भी सहम जाते हैं. इजराइल इंतज़ार करने और बात करने वाले देशों में नहीं है वो सीधा एक्शन लेता है और ऐसा ज़बरदस्त एक्शन लेता है कि दुश्मन सालों तक दुबारा आंख नहीं उठाता. ऐसे में किसी देश की इतनी हिम्मत हो जाए कि वो इजराइल के लड़ाकू जेट को मार गिराए. इसे तो हम यही कहेंगे की “आ बैल मुझे मार”.

New Delhi: To say that Israel is a country smaller than Manipur but how she gives answers to her enemy country, even her neighboring countries agree. Israel is not in the waiting and talking countries, he takes direct action and takes such a tremendous action that the enemy does not take a second eye again for years. In such a situation, a country should have the courage to kill Israel’s fighter jet. We would say that “bullock kill me”

30 सालों में पहली बार इजराइल ने बरसाई मौत इस देश पर
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक इजराइल ने सीरिया पर वो तबाही मचाई है जो आज से पहले पिछले तीस साल में भी ऐसी भयंकर मंज़र नहीं देखा होगा. इजराइल ने सीरिया के ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमो की ज़ोरदार बरसात कर दी है.

For the first time in 30 years Israel has died on this country.
According to the big news now available, Israel has caused a catastrophe on Syria, which has not seen such a terrible deficiency in the past thirty years before today. Israel has rattled bombs on Syria’s Iranian military bases.

इसराइल के बारे में कहा जाता है कि वो अपने देश में नागरिक नहीं सेना तैयार करता है. वहां के हर नागरिक के लिए सेना में सेवा देना ज़रूरी है. पश्चिम के देश मध्य-पूर्व में एक ठिकाने के रूप में इसराइल को सबसे सुरक्षित देश मानते हैं. अगर अभी भारत में ऐसा नियम लागू कर दिया जाय तो सबके सीने में जलन उठने लगेगी, देश असहिष्णु हो जाएगा और पीएम मोदी को सत्ता से ही उतार दिया जाएगा वोट बैंक पॉलिटिक्स करके.

It is said about Israel that he prepares a civilian army in his country. It is important for every citizen to serve in the army. The West’s country treats Israel as the safest country in the Middle East as a hideout. If such a rule is implemented in India then the burning sensation in everyone’s chest will start rising, the country will become intolerant and PM Modi will be removed from power by vote bank politics.

इसराइली वायुसेना के वरिष्ठ जनरल तोमर बार ने कहा कि साल 1982 के लेबनान युद्ध के बाद यह सीरिया के ख़िलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला है. इसराइली सेना ने पहली बार सीरिया में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा भी किया है. इससे पहले शनिवार को सीरियाई सेना ने एक इसराइली लड़ाकू जेट एफ-16 को मार गिराया था. जबकि विमान में सवार दोनों पायलट बाहर निकलने में कामयाब रहे. हालांकि दोनों घायल हो गए. इनमें से एक की हालत गंभीर है.

Israeli Air Force Senior General Tomar Bar said that it was the biggest attack against Syria since the 1982 Lebanon war. For the first time, the Israeli army has claimed to target the Iranian military bases in Syria. Earlier on Saturday, the Syrian army had killed an Israeli fighter jet F-16. While the two pilots aboard the pilot managed to get out. Although both were injured. One of these conditions is serious.

इसरायली सेना का कहना है कि ईरानी ड्रोन के संचालन केंद्र को नष्ट करने के मकसद से हमारा लड़ाकू जेट सीरिया सीमा के भीतर गया था, तभी उस पर एंटी एयरक्राफ्ट गन से फायर हुआ. विमान के पायलट की जान बच गई है और वह सुरक्षित है. लेकिन लड़ाकू जेट इजराइल में आ कर गिरा. हमले से ध्वस्त हुए विमान का मलबा इजरायली सेना ने वीडियो फुटेज में दिखाया है.

The Israeli army says that in order to destroy the operating center of the Iranian drone, our fighter jet went inside the Syrian border, then it was fired with anti-aircraft guns. The pilot’s life has survived and he is safe. But the fighter jets came to Israel and dropped. The debris of the plane that was destroyed by the attack showed the Israeli army in the video footage.

इसराइल सेना के प्रवक्ता जोनाथन कोनरीकस ने कहा, “हमने ख़ासतौर पर 12 अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया जिनमें से 8 सीरिया की हवाई रक्षा प्रणाली से जुड़े हैं. ये वहीं हैं जिनसे इसराइली विमान पर मिसाइलें दागीं गईं थीं. अन्य चार ठिकाने बेहद ख़ास हैं क्योंकि वो सीरिया के भीतर ईरानी सैन्य ठिकानें थे. ये सभी सीरिया के भीतर ईरान के सैन्य प्रयासों का हिस्सा हैं.”

Israel Army spokesman Jonathan Conrecus said, “We specifically target 12 different targets, of which 8 are associated with the Syrian air defense system. These are the only missiles fired on Israeli aircraft. The other four hideouts are very special because they were Iranian military bases within Syria. These are all part of Iran’s military efforts within Syria. ”

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने दी कड़ी चेतवानी, हमारे धैर्य की परीक्षा न ली जाय
अभी खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीरिया से लगी सीमा का दौरा करके इजरायल के धैर्य की परीक्षा न लेने की चेतावनी दी थी. उल्लेखनीय है कि सीरिया में ईरान और चरमपंथी संगठन हिज्बुल्ला राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थन में लड़ रहे हैं। ये दोनों ही इजरायल के खिलाफ हैं। इसलिए सीमा पर जब-तब टकराव होता रहता है.

Israeli PM Benjamin Netanyahu did not take the verdict of Chetwani, our patience
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu himself warned himself not to take a test of Israel’s patience by visiting the border with Syria. It is notable that Iran and extremist organizations in Syria, Hezbollah, are fighting in favor of President Bashar al-Assad. Both of these are against Israel. Therefore, there is a confrontation on the boundary.

इसराइल 1948 में बना. 69 साल का इसराइल क्षेत्रफल के मामले में भारत के मणिपुर से भी छोटा है. आबादी भी 85 लाख के आसपास है.खनिज़ संपदा के मामले में भी इसराइल भारत के सामने कहीं टिकता नहीं है. इसके बावजूद इसराइल का शुमार दुनिया के उन देशों में है, जिनकी तकनीकी और सैन्य क्षमता की मिसाल दुनिया भर में दी जाती है.

Israel was built in 1948. Israel in 69 years of age is smaller than Manipur of India. The population is also around 85 lakh. Even in the case of mineral wealth, Israel does not have any standing in front of India. Despite this, Israel is one of the world’s countries, whose technical and military capabilities are illustrated in the world.

कभी मज़ाक उड़ाया जाता था इजराइल का
इसराइल के गठन के महज दो साल बाद 1950 में देश का पहला व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी अमरीका के लिए भेजा गया. इसराइल बिज़नेस पार्टनर के लिए परेशान था. इसराइल के पास उस तरह के प्राकृतिक संसाधन नहीं थे जिसके आधार पर वो अपनी अर्थव्यवस्था को आकार दे पाता. तब वहां न तेल था और न ही खनिज़ संपदा.

Ever ridiculed Israel
Just two years after the formation of Israel, in 1950 the country’s first business delegation was sent to Southern America. Israel was troubled for business partner. Israel did not have such natural resources on which they could shape their economy. Then there was no oil nor mineral wealth.

कभी इजराइल देश का सभी जगह मज़ाक उड़ाया जाता था लेकिन आज की तारीख़ में इसराइल हाई-टेक सुपरपावर है और वह दुनिया भर में आधुनिक हथियार बेचने के मामले में काफ़ी आगे है. हर साल वो क़रीब 6.5 अरब डॉलर का हथियार बेचता है.

Sometimes Israel was joked all over the country, but in today’s time Israel is a high-tech superpowers and it is quite ahead in terms of selling modern weaponry around the world. Every year he sells close to 6.5 billion dollars of weapons.

यह भी देखे

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

https://www.youtube.com/watch?v=2p5FWA_BBz4

SOURCENAME:POLITICALREPORT

सऊदी अरब ने इजराइल को लेकर किया ये बड़ा जबरजस्त फैसला, पाक मुस्लिम रोये खून के आंसू- सभी मुस्लिम देशो में मचा हडकंप

नई दिल्ली : कट्टरपंथी आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने वाला है. सलाफी कट्टरपंथ की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है, ऐसे में आधी सदी से भी ज्यादा वक्त तक तेल पर निर्भर रहने के बाद सऊदी अरब अब कमाई के अन्य साधन तलाश रहा है. ऐसे में सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे देख पाकिस्तान समेत दुनियाभर के मुस्लिमों की मानो दुनिया ही हिल गयी है.

New Delhi: Radical terror is going to end the nomination from the whole world. Saudi Arabia is now coming to the knees, the father of terror in the guise of Salafi fundamentalist. In Saudi Arabia, there is a huge slowdown in the oil business for quite some time, after Saudi Arabia relied on oil for more than half a century, Saudi Arabia is now looking for other means of earning. In such a situation, Saudi Arabia has taken a decision, which is seen by the Muslims all over the world including Pakistan as the world has shaken.

इजराइल के साथ संबंध बहाली के लिए तैयार सऊदी अरब !
सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंध बहाली का प्रस्ताव पेश कर दिया है. जिसे देख दुनियाभर के उन कट्टरपंथी मुस्लिमों की दुनिया ही मानो हिल गयी है, जिन्हे जन्म से केवल यही सिखाया गया कि यहूदी उनके दुश्मन हैं. आइये अब आपको बताते है कि आखिर सऊदी ने ऐसा सनसनीखेज कदम उठाने का फैसला क्यों लिया.

Ready to restart relations with Israel, Saudi Arabia!
Saudi Arabia has proposed a proposal to restore relations with Israel. Who has seen the world of radical Muslims from all over the world shaken, who were taught only from birth that Jews are their enemies. Let us now tell you why Saeed has decided to take such a sensational step.

कंगाली के कगार पर सऊदी
दरसल 2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी, जिससे हालात बदल गए. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में, जहाँ अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी. वहां 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा.

Saudi on the verge of bankruptcy
After the conclusion of the 2014 oil business, there was a sharp slowdown, the situation changed. There is a considerable reduction in Saudi government revenue. The budget deficit record was $ 97 billion last year. This is the reason why Saudi Arabia, which is called the biggest economy of the Gulf region, where no tax was levied so far and the government also offered a lot of subsidies. There will be VAT on all services and products at the rate of 5% on the first quarter of 2018.

इजराइल से दोस्ती के पीछे स्वार्थ ?
इसके पीछे पैसों की यारी है, तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है और ऊपर से ईरान भी तेल बाजार में सऊदी अरब को अच्छी-खासी टक्कर दे रहा है. ऐसे में सऊदी अरब अब अपने दूसरे प्राकृतिक संसाधन यानी रेगिस्तान का रुख कर रहा है. सऊदी किंगडम हजारों किलोमीटर रेगिस्तानी जमीन पर नए-नए शहर बसाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नौकरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

Selfishness behind friendship with Israel?
There is a lot of money behind this, there is a huge slowdown in the oil business and above all, Iran is also giving a good deal to the Saudi Arabian market. In this way, Saudi Arabia is now moving towards its second natural resource ie desert. The Saudi Kingdom is working on plans to set up new cities on thousands of kilometers of desert land, so that jobs and foreign investment can be boosted.

इजराइल ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली कि वो रेगिस्तान में पानी की कमी व् अन्य प्राकृतिक सहूलियतों के बिना भी फल-फूल रहा है. ऐसे में इन शहरों को बसाने के लिए और उन्हें सभी सहूलियतों मुहैय्या कराने के लिए सऊदी अरब को इजराइल की तकनीक की जरुरत तो पड़ेगी ही. इसी चक्कर में सऊदी अरब ‘तेल के खेल’ की मुश्किलों को समझते हुए अब नई संभावनाएं तलाशने पर मजबूर हुआ है.

Israel developed such technology that it is also flourishing in the desert without water scarcity and other natural conveniences. In such a situation, Saudi Arabia will need Israeli technology to settle these cities and to provide them all the facilities. Understanding the difficulties of Saudi Arabia’s “Oil Sports” in this round, it is now forced to explore new possibilities.

अमेरिका की मदद से दोस्ती की पहल !
हालांकि सऊदी अरब, इजराइल के साथ दोस्ती काफी गुपचुप रूप से धीरे-धीरे कर रहा है, ताकि कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क ना जाएँ. अभी सब कुछ पर्दे के पीछे है, लेकिन इस्राइल के चैनल-10 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब ने इस्राइल के साथ समझौते का कदम बढ़ा दिया है. सदियों से जिन्हे अपना दुश्मन माना है, उनसे सीधे जाकर कैसे कह दें कि चलो दोस्ती कर लो. इसलिए इसके लिए सऊदी ने अमेरिका का सहारा लिया है.

Friendship initiative with the help of the US!
However, friendship with Saudi Arabia is very quietly making friendship with Israel so that radical Muslims do not flare up. Now everything is behind the scenes, but according to Israel’s channel-10 report, Saudi Arabia has stepped up the deal with Israel. For centuries, who have believed in their enemies, go straight from them and tell them that let’s be friends. So Saudi has taken the US support for this.

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकर कुश्नर और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुश्नर दोनों अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका के इजराइल से भी बहुत अच्छे संबंध हैं, इसलिए सऊदी अरब ने कुशनर के माध्यम से इजराईल के पास अपना संदेश पहुंचाया है. सऊदी अरब इजराइली व्यापारियों को वीजा देने पर राजी है.

According to the Israeli media reports, Crown Prince Muhammad bin Salman and Kushner, both of Kushner and the Saudi Arabians, by the advice of the American President Trump, are both good friends. There are also good relations with Israel in the US, so Saudi Arabia has conveyed its message to Israel through a Kushanar. Saudi Arabia agreed to give visa to Israeli businessmen.

यह भी देखे :

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

https://youtu.be/BVuWDLCqpCM

source name:politicalreport

 

इजराइल पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले का कुछ इस तरह से लिया बदला, जिसे देख रूस समेत अमेरिका की भी आँखे खुली रह गई..

सन 1972 के उस दिन अगर इजरायल ने 234 अरब छापामारों को रिहा कर दिया होता तो आज इजराइल के 11 ओलंपिक खिलाड़ी जिंदा होते| मगर ऐसा नही हुआ क्यूँकि देशहित में सोचते हुए इजरायल ने उन आातंकवादियों के सामने घुटने टेकना मंजूर नही किया जिन्होंने म्यूनिख ओलंपिक के दौरान 11 इजराइली खिलाड़ियों को बंधक बना रखा था| छापामारों को रिहा करने से इनकार कर देने पर उन 11 खिलाड़ियों को अरब आतंकवादियों ने मार डाला|इजराइल ने अपने बेशकीमती खिलाड़ियों को खो दिया|

उस वक़्त तो इजराइल जनहित के चलते अपने खिलाड़ियों को बचा नही पाया लेकिन बाद में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उन सारे षड्यंत्रकारी हमलावरों को खोज -खोज कर एक- एक कर मार डाला जो उन 11 इजराइली खिलाड़ियों की हत्या के जिम्मेवार थे|मोसाद ने करीब 20 वर्षों में इस पुरे कार्य को अंजाम दिया| हत्यारों को मोसाद ने अलग अलग देशों जैसे की इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, लेबनान, एथेंस और साइप्रस में घुस कर मारा| इस घटना के बाद अरब-इजरायल तनाव और भी बढ़ गया था| इजरायल की जनता ने भी उसकी परवाह नहीं की|आतंकवादियों से निपटने को लेकर वहां की जनता में दो तरह की राय नहीं होती|

ये सारा वाक्य है 5 सितंबर, 1972 का ,इजराइल के म्यूनिख में 20वां ओलंपिक खेल मेला लगा हुआ था| ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एडवर्ड हीथ सहित दुनिया के कई देशों की महत्वपूर्ण हस्तियां वहां उपस्थित थीं| किसी को ऐसा कोई अंदेशा भी नही था की जल्द ही इस खेल के मैदान में एक ऐसा खूनी खेल खेला जाना वाले है जो यहाँ लाशों के ढेर लगा देगा पर कुछ ऐसा ही हुआ|अरब छापामारों ने अपने कुछ साथी बंधियों की रिहाई के लिए वहां धावा बोल दिया| अरब छापामार दस्ता दीवार फांद कर ओलंपिक गांव में प्रवेश कर गये|उन्होंने मोर्चाबंदी करके इजरायली क्वार्टर पर कब्जा कर लिया| यह पुरुष खिलाड़ियों का ठिकाना था| दो इजरायली खिलाड़ियों को तो उन लोगों ने मौके पर मार भी दिया|

बाद में एक खिलाड़ी सोश्काल्वस्की ने इस सारी घटना को ब्यान करते हुए कि “जब अरब छापामार उनके क्वार्टर में दाखिल हुए तो उनका दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था| उस खुले दरवाजे से उन्होंने गोलियां चलाना शुरू दिया| मैं भागने में सफल हुआ और खिड़की से भाग निकला और तब तक पड़ोस में छिपा रहा जब तक पश्चिम जर्मनी की पुलिस ने स्थिति को संभाल नहीं लिया| मैंने लोगों की चीख पुकार सुनी थी”|

सोश्काल्वस्की के अनुसार नकाबपोश छापामारों की संख्या नौ या दस थी|छापामारों ने नौ इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया| वे 234 अरब छापामारों की इजरायल से रिहाई की मांग करने लगे| वे चाहते थे कि इन 234 लोगों को सुरक्षित मिस्र पहुंचा दिया जाए|स्वाभाविक ही था कि हमले की खबर से पूरा ओलंपिक गांव सनसनी और तनाव से भर उठा|इजरायल ने अपने विशेष दस्ते म्यूनिख भेजने के लिए खा पर जर्मन सरकार ने उसे अस्वीकार कर दिया. इस घटना की खबर सुनकर पश्चिम जर्मनी के प्रधानमंत्री बिली ब्रांट खुद बॉन से म्यूनिख पहुंच गए|उन्होंने छापामारों के सामने प्रस्ताव रखे कि जितना चाहें आप पैसे ले लें, पर इजरायली खिलाडि़यों को छोड़ दें, या फिर इजरायलियों की जगह जर्मनों को बंधक रख लें|

लेकिन छापामारों ने शर्तें नामंजूर कर दीं| उन्होंने कहा कि जब तक 234 छापामारों को रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक इन्हें छोड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता| जर्मन अधिकारी उनसे आग्रह करते रहे, छापेमार अपनी जिद पर अड़े रहे| इस बीच उन लोगों ने एक और धमकी दे दी.|उन्होंने कहा कि यदि एक खास समय सीमा के अंदर उनकी मांग नहीं मानी जाएगी तो वे हर दो घंटे पर एक इजरायली बंधक को मारते जाएंगे|

अरब छापामारों ने यह मांग करनी शुरू कर दी कि उन्हें बंधकों समेत किसी अरब देश में सुरक्षित भेज दिया जाए अन्यथा वे किसी भी इजरायली खिलाड़ी को जिंदा नहीं छोड़ेंगे| पर इजरायल 234 अरब छापामारों को छोड़ने को किसी कीमत पर कतई तैयार नहीं था|अंततः वे सब ओलंपिक खेल गांव की हवाई पट्टी तक बस से लाए गए| तब तक जर्मन पुलिस उस हवाई पट्टी पर हेलिकॉप्टर द्वारा पहुंचाई जा चुकी थी| पुलिस घात लगाकर बैठी हुई थी| जर्मन पुलिस ने कार्रवाई शुरू की| अरब छापामारों ने खुद को घिरा हुआ देखकर सभी इजरायली बंधकों को मार डाला|

इजरायल ने अपने बहुमूल्य खिलाड़ियों की जान की परवाह नहीं की|वह अरब छापामारों के दबाव में नहीं आया| इजरायल को यह अफसोस जरूर रहा कि पश्चिम जर्मन सरकार ने उसके विशेष पुलिस दस्ते को म्यूनिख नहीं पहुंचने दिया| बदले का इजरायल का वह बहादुराना कदम भारत जैसे आतंक पीड़ित देश के लिए एक खास सबक बन सकता है|

म्यूनिख में इन खिलाड़ियों का समरक बनाया है|इन बहादुर खिलाड़ियों को अपनी जान की आहुति देनी पड़ी |

यह भी देखें:

https://youtu.be/LvTwV08DsAo

https://youtu.be/gxWa3r-mlh0

source post card

 

बड़ी खबर: PM मोदी के आने के बाद देखिये कैसे फर्क आ गया इन सभी देशों के साथ…

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की बैठक में हिस्सा लेने जल्द ही स्विट्जरलैंड के दावोस जाएंगे, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के पीएम शाहिद खाकन अब्बासी से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) विजय गोखले ने बताया कि प्रधानमंत्री की दावोस यात्रा बेहद संक्षिप्त होगी, महज 24 घंटे के लिए। जिस समय मोदी वहां होंगे, उस समय ट्रंप वहां नहीं होंगे। ऐसे में ट्रंप से उनकी मुलाकात नहीं हो पाएगी। जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मिलने का उनका कोई कार्यक्रम नहीं है।

गोखले ने यह भी बताया कि पीएम मोदी और पाकिस्तान के नए पीएम की मुलाकात की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री का संबोधन 23 जनवरी को होगा। इससे पहले 22 जनवरी को वह ग्लोबल सीआईओ के राउंडटेबल सम्मेलन को संबोधित करेंगे। फिलहाल इसमें 60 सीईओ के हिस्सा लेने की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें 20 भारतीय हैं।

सम्मेलन में भारत की ओर से योगाचार्य भी आकर्षण होंगे। इसे विश्व आर्थिक मंच के नियमित कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यहां से 2 एक्सपर्ट जाएंगे, जो हर रोज क्लासेज उपलब्ध कराएंगे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद से हीं नरेंद्र मोदी ने अपनी नीतियों और नजरिए से पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं दुनिया के सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेताओं में शामिल हैं। दुनिया के तमाम देशों से भारत के संबंध इससे पहले इतने अच्छे कभी नहीं रहे। अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, चीन और इजरायल समेत तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते रहे हैं।

भारत के 6 दिवसीय दौरे पर आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और कार्यशैली के कायल हो गए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी पूरी तरह से भारत के विकास के लिए समर्पित हैं। उन्होंने पीएम मोदी को महान देशभक्त बताया और कहा कि पीएम मोदी वही करते हैं, जो भारत के लिए अच्छा होता है।

दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर चुके हैं। पिछले वर्ष जून में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद यात्रा की थी। इस दौरान दोनों नेताओं में मुलाकात हुई और फिर दोनों ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी का अपना सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे।

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में शामिल हैं। पीएम शिंजो आबे भी कई मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं। पिछले वर्ष सितंबर में शिंजो आबे ने जब भारत का दौरा किया था, तब अहमदाबाद में पीएम मोदी ने उनके साथ रोड शो किया था। इस मौके पर दोनों नेताओं ने अहमदाबाद-मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर उन्होंने पीएम मोदी की प्रगतिशील सोच की तारीफ करते हुए है कि अब दोनों देशों का सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय नहीं रहा है, बल्कि यह सामरिक और वैश्विक साझेदारी में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानव अधिकार और कानून का नियम जैसे बुनियादी मूल्यों को साझा करते हैं। उस वक्त आबे ने अपने भाषण में जय इंडिया, जय जापान का नारा भी दिया था।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ पीएम मोदी के मजबूत संबंध जगजाहिर हैं। 2015 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। भारत आने से पहले ओबामा ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की थी, उन्होंने चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर का जिक्र करते हुए कहा था कि यह भारतीयों की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। ओबामा ने कहा था कि पीएम मोदी का विजन एकदम साफ है और उनकी ऊर्जा प्रभावित करने वाली है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी विकास के रास्ते में रोड़े अटकाने वाले मुद्दों को फौरन हटाने को तैयार हो जाते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना कर चुके हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में जब टर्नबुल भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत तरक्की और विकास के असाधारण रास्ते पर बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई पीएम मैल्कम टर्नबुल ने कहा कि हमारा भारत के साथ मजबूत रिश्ता है और इसे और मजबूत करना है। हम इतिहास और मूल्यों के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं।

चीन और उसके नेता प्रधानमंत्री मोदी की ताकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कई मौके पर पीएम मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं और देश ही नहीं बल्कि वैश्विक मसलों पर उनके विचारों से सहमति जता चुके हैं। पीएम मोदी ने 2014 में जब देश की बागडोर संभाली थी, उसी वर्ष सितंबर में चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा हुआ था। उस दौरे में पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के स्वागत में अहमदाबाद में साबरमती के तट पर स्वागत के विशेष इंतजाम किए थे। पिछले वर्ष जुलाई में जर्मनी के हैमबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिक्स देशों की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प को सराहनीय बताया था।

यह भी देखें :

https://youtu.be/LvTwV08DsAo

https://youtu.be/gxWa3r-mlh0

ब्रेकिंग न्यूज़: PM मोदी ने इसलिए बदला इस जानी मानी सडक का नाम, कांग्रेस समेत वामपंथियों में हडकंप…

नई दिल्लीः रविवार को 6 दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने दौरे की शुरुआत तीन मूर्ति मार्ग पहुंच शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ की. अपनी पत्नी सारा के साथ तीन मूर्ति चौक पहुंचने पर इजरायली पीएम ने भारत के सेना प्रमुक जनरल बिपिन रावत और भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर ने मुलाकात की. इसके बाद इजरायली पीएम नेतन्याहू और पीएम मोदी ने तीन मूर्ति मार्ग पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. इजरायली पीएम ने विजिटर्स बुक पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजिटर बुक में हस्ताक्षर किए.

बता दें कि इजरायल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से पहले तीन मूर्ति चौक का नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा चौक और तीन मूर्ति मार्ग का नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा मार्ग किया गया है.

तीन मूर्ति का इजरायल से रिश्ता
राजधानी दिल्ली के तीन मूर्ति मार्ग पर जो तीन कांस्य मूर्तियां लगी हुई हैं वह हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लांसर्स का प्रतिनिधित्व करती हैं. यह सभी 15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा माने जाते हैं. इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पता चलेगा कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 23 सितंबर 1918 में इस बिग्रेड ने हाइफा पर विजयी हमला किया था. प्रथम विश्व युद्ध में शहर की आजादी के लिए 44 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राण का बलिदान दिया था. आज तक, 61वीं कैवलरी ब्रिगेड 23 सितंबर को स्थापना दिवस या ‘हाइफा दिवस’ मनाती है.

इस हमले को विजयी हमला इसलिए कहा गया क्योंकि मुस्लिम तुर्कों से फिलिस्तीनी नागरिकों को आजाद कराने के लिए भारत के तीन राज्य (जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर) से सैनिकों को इजरायल भेजा गया था. इजरायल की मदद करते हुए भारतीय सैनिकों ने हाइफा शहर में जंग लड़ी थी.

पीएम मोदी ने विजिटर बुक में अपने संदेश में लिखा
‘ हाइफा में भारतीय सैनिकों की शहादत का जिक्र 100 साल पहले भी इतिहास के पन्नों किया गया है. उन वीरों की शहादत को तीन मूर्ति पर याद किया जा रहा है. इस जगह को तीन मूर्ति-हाइफा चौक नाम दिया जाना ऐतिहासिक क्षण है. इजरायल के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में, हम वीर सैनिकों को श्रद्धाजंलि देते हैं. निस्वार्थ, बलिदान और तपस्या की महान भारतीय परंपरा को नमन.’

हाइफा के शहर पर रखा गया नाम
गौरतलब है कि पिछले वर्ष इजरायल की यात्रा पर जाने से पहले पीएम मोदी ने दिल्ली के सीएम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई काउंसिल की बैठक में तीन मूर्ति चौक और तीन मूर्ति मार्ग का नाम बदलकर दिया गया था. इनमें इजरायल के शहर हैफा का नाम जोड़ा गया था. तब से यह मार्ग तीन मूर्ति हैफा चौक और तीन मूर्ति हैफा मार्ग के नाम से जाना जा रहा है.

23 सितंबर को हाइफा दिवस
23 सितंबर को हुए युद्ध में भारतीय सेना के 44 जवान शहीद हो गए थे. जवानों की शहादत को याद करते हुए हर साल हाइफा में 61 कैवलरी 23 सितंबर को जयंती दिवस या ‘हाइफा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. वहीं, बात भारत और इजरायल के रिश्तों की जाए तो दोनों देशों के बीच पिछले एक दशक में 670 अरब रुपये का कारोबार हुआ है. 1990 से ही दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध बेहद ही अहम रहे हैं. इजरायल ने भारत को हथियार बेचने की मंशा से रिश्तों को मजबूत किया और कामयाब भी रहा.

यह भी देखें:

https://youtu.be/27wySC5YcBQ

https://youtu.be/yRjJWWjiQVA

source zee news

बड़ी खबर: इजराइल के हाहाकारी फैंसले से मुस्लिमों में छाया मातम.. पाक हुआ सदमे में

पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजराइल दौरा बहुत सुर्खियों में था और कहा जा रहा था कि इजराइल से केवल आधुनिक हथियारों के लिए डील हुई है अपितु इजराइल के साथ रक्षा और खुफिया विभाग में भी अहम दरतावेज़ों और नए प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए सन्धियाँ हुई हैं लेकिन अब इजराइल से एक ऐसी खबर आ रही है जिससे भारत के कई मुस्लिम सकते में आ सकते हैं।

In the past, India’s Prime Minister Narendra Modi’s visit to Israel was in great headlines and it was being said that Israel has only been dealing with modern weapons, but to work with Israel on important documents and new projects in defense and intelligence. There have been treaties, but now there is a news from Israel that many Muslims of India can come in.

हालांकि यह उनपर सीधा असर नहीं डालेगा लेकिम वो इमाम या मुस्लिम धर्मगुरु जो राजनीति की ठेकेदारी चलाते हैं उनके लिए एक मुद्दा तैयार हो राह है जिसको वो ऊनी सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करेंगे।खबर है कि इज़राइल ने एक बेहद ही सनसनीखेज़ कदम उठाया है। इजरायल के दैनिक अख़बार हराजात ने गत शुक्रवार को ये बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि इजरायल ने हजारों अरबों ( मुस्लिमों) की नागरिकता को रद्द करना शुरू कर दिया है और उसका इरादा उनको देश से निकालने का है।

Although this will not directly affect them, an issue for them, whether they are the Imam or the Muslim cleric who runs the contract of politics, will be ready for the winnability of the people. The report is that Israel has taken a very sensational step. The Israeli daily newspaper Harassment said on Friday that Israel has started canceling citizenship of thousands of Arabs (Muslims) and his intention is to remove them from the country.

इजरायल के अधिकारियों ने पिछले दो वर्षों में दक्षिणी नेवेज क्षेत्र में हजारों – इजरायली अरबों की नागरिकता को रद्द कर दिया है. इजरायल के गृह मंत्रालय ने इन अरबों की नागरिकता से लेकर निवास तक को बदल दिया है । उधर रिपोर्ट आने के बाद खलबली मच गयी है और इज़राइल के अरबों समेत पूरे मुस्लिम देशों में चिंता की लहर दौड़ गयी है। दूसरी तरफ़ इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया करते हुए नेनेसेट (इजरायल की संसद) के एक अरब सदस्य तालाब अबू अरर ने मांग की है कि चाहे कुछ भी हो लेकिन मंत्रालय को इस कदम को वापस लेना ही होगा और अरबों के साथ ये नहीं किया जा सकता।सूत्रों का कहना है कि जब इजरायल के अरब निवासियों ने अपना राष्ट्रीय पहचान पत्र या पासपोर्ट नवीनीकृत करने के लिए आवेदन किया तब बेर्शेबा (नेवेज के सबसे बड़े शहर) में मंत्रालय के कार्यालय द्वारा नागरिकता छिनने की जानकारी मिली और वे दंग रह गए ,

Israeli officials have canceled the citizenship of thousands of Israeli Arabs in the southern Nevez region over the past two years. The Israeli Interior Ministry has changed the citizenship of these billions from residence to residence. There has been a stir since the report has arrived and a wave of anxiety has raged across the Muslim countries, including the Arabs of Israel. On the other hand, responding to this report, one billion members of the Nenets (Israeli Parliament), Talab Abu Arar has demanded that whatever it may be, the ministry will have to take this step back and this can not be done with the Arabs. Sources say that when the Arabs of Israel applied to renew their national identity card or passport, then the ministry in Beersheba (the largest city of Negez) The information was found by the office of Citizenship and they were stunned,

यानी ये सब इतनी चालाकी और चुपके से किया गया कि मुस्लिमों को इसकी भनक तक नहीं लगी।इजराइल एक ऐसा देश रहा है जहां के नागरिकों को सदैव ही मुस्लिम देशों ने स्वीकार नहीं किया है और यदि कड़ा वह इजराइल पर हमले करते ही रहते हैं लेकिन 6 डेज वॉर के नाम से प्रचलित उस लड़ाई को कभी नहीं भूलते जब इजराइल ने एक साथ 6 मुस्लिम देशों को परास्त किया था और वो भी अपने दम पर।यह इजराइल की सफल कूटनीतिक चाल ही कहिये की अब अमेरिका भी यहूदियों और इजराइल के सम्मान करता है और वह भी इजराइल से पंगा लेने की कोशिश नहीं करता।

That is, all this was done with cleverly and secretly that the Muslims did not even know it. Israel has been a country where the citizens of the country have not always accepted the Muslim countries and if they are hard, they continue to attack Israel. 6 Do not forget that fight prevailing in the name of the War War when Israel had defeated 6 Muslim nations together and also on their own. Say this to Israel’s successful diplomatic tactics. Now America also honors Jews and Israel and does not even try to get rid of Israel.

इजराइल की यही कुछ खूबियाँ हैं जिसके कारण भारत के 15वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के हित को ध्यान में रखते हुए इजराइल से हाथ मिलाया हैम यरः कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि रॉ और मोसाद ने एक साथ पाकिस्तान पर काम करना शुरू कर दिया है और अगले कुछ सालों में इजराइल और भारत मिलकर कुछ इतना बड़ा करने जा रहे हैं जो पूरे विश्व सहित अमेरिका की भी आंखें चोंधियाँ देगा, आप बस प्रतीक्षा कीजिये उस पावन क्षण का

This is Israel’s only specialty, due to which India’s 15th Prime Minister Shri Narendra Modi has joined hands with Israel in view of the country’s interest. Hmmm: Those who are saying are also saying that RAW and MOSAD started working together on Pakistan. And in the next few years, Israel and India are going to make something big enough that the eyes of the world, including the whole world, will give flocks, you just wait It’s that holy moment