बड़ा खुलासा : तारिक फतह के मुताबिक भारतीय मीडिया कायर है, जो की इस्लामिक आतंकवाद पर चर्चा तक करने से डरती है!

हाल ही में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने भारतीय मीडिया को दुनिया की सबसे घटिया और अविश्वसनीय बताते हुए आखरी दूसरा पायदान दिया और ये माना जा रहा है कि कही ना कही भारतीय मीडिया इस स्थान पर अच्छी भी लगती है। भारत की जनता का भी यही कहना है कि भारत की मीडिया दलाल बन चुकी थी?

Recently, the World Economic Forum gave the Indian media the world’s worst and unbelievable second and second place, and it is believed that none of the Indian media seems good at this place. The people of India also say that the media broker of India has become.

इसी चलते भारत की जनता भारतीय मीडिया पर पूरी तरह विश्वास भी नही करती। सबसे बड़े शर्मनाक बात तो यह है कि आज विश्व भर में भारतीय मीडिया के इन दोगोलेपन को देखा जा चूका है। आज सभी लोग ये जान गए है कि भारतीय मीडिया इन पाकिस्तानियों के हाथों बिक गया था!

This way, the people of India do not even believe in the Indian media completely. The most embarrassing thing is that today the world of Indian media has seen these diagonals. Today all people know that the Indian media has been sold to these Pakistanis.

अब तारिक फतह ने भी भारतीय मीडिया को भी अपने शिकंजे में लिया था और जो बोला उसे सुन बिकाऊ मीडिया के होश उड़ जायेंगे…
Now Tariq Fateh also took the Indian media into its clutches and listening to what he said would get the sensitivity of the lucrative media..

अब तारिक फतह ने भी भारतीय मीडिया को आड़े हाथों लिया है, और भारतीय मीडिया को बुजदिल और नपुंसक तक करार दे दिया है. उनका मानना है की भारतीय मीडिया या तो इस्लामिक आतंकियों से डरती है या फिर इनकी गुलाम बनकार दलाली कर रही है! भारतीय मीडिया को भारतीय कहलाने का कोई अधिकार नहीं है!

Now Tariq Fathah has also taken the Indian media back on the horizon and has given the Indian media a boisterous and impotent one. He believes that the Indian media is either afraid of Islamic terrorists or their slave is doing brokering! Indian media has no right to be called Indian.

असल में हुआ ये था की, 20 जनवरी को अमरीका में डोनाल्ड ट्रम्प का शपथ समारोह था ट्रम्प ने शपथ लिया, और मंच में भाषण देते हुए, “इस्लामिक आतंकवाद को दुनिया से ख़त्म करने की बात कही”.ट्रम्प ने अपने भाषण में कहा की अब इन मुस्लिम आतंकियों को मनमानी नही चलने देंगे. उनके हर हमले का मुहँ तोड़ जवाब देंगे. विश्व से आतंक का नामोनिशान मिटा देंगे!

Actually, it was on January 20 that Trump took oath in Donald Trump’s oath ceremony in the United States, and while delivering a speech at the forum, “talked about ending the Islamic terrorism with the world”. Trump said in his speech Now these Muslim militants will not let the arbitrariness run. They will answer their every attack. The world will wipe out the horror of terror.

तारिक फतह ने कहा की, “ट्रम्प ने भाषण में कहा की वो इस्लामिक आतंकवाद को दुनिया से उखाड़ फकेंगे, पर किसी भी भारतीय मीडिया में हिम्मत नहीं है की, वो डोनाल्ड ट्रम्प के भाषण के इस मसले पर किसी भी प्र्रकार की चर्चा करे, मीडिया ने तो ट्रम्प के भाषण के इस हिस्से को गायब ही कर दिया”तारिक फतह ने ये भी कहा की “भारतीय मीडिया कायर है!

Tariq Fatah said that, “Trump said in the speech that they will uproot Islamic terrorism from the world, but no Indian media has the courage to discuss any question on this issue of Donald Trump’s speech, the media Touched this part of Trump’s speech disappeared. “Tariq Fateh also said that” Indian media is cowardly.

बुजदिल है, जो की इस्लामिक आतंकवाद पर चर्चा तक करने की हैसियत नहीं रखती क्या इनकी इतनी भी हैसियत नहीं के वे इन आतंकियों के खिलाफ जनता को जागरूक कर सके.क्या ये सच्चाई को सामने लेन से कतराती है, ये मीडिया सच्चाई नहीं दिखा सकती, क्योंकि इसमें हिम्मत ही नहीं” सच को जनता के सामने लाने की डरती है इन आतंकियों से दलाल बन चुकी है इनकी!

It is heartwarming, who does not have the capacity to discuss the issue of Islamic terrorism, is not enough of them to make the public aware of these terrorists. Does this truth strike the front lane, this media can not show the truth, Because there is no courage in it. “The fear of bringing the truth to the public is a broker from these terrorists.

यह भी देखे

https://youtu.be/1YmeDP0wOXs

https://www.youtube.com/watch?v=k87GwTUEGuQ&t=18s

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VIDEO: PM मोदी को लेकर मुस्लिम महिलाओं ने दिया ऐसा बयान, बौखलाए मौलाना आत्महत्या को तैयार !

नोटबंदी से कालेधन कुबेरों का अंत करने के बाद अब मोदी सरकार बढ़ती हुई जनसंख्या के नियंत्रण के लिए कानून लाने पर विचार कर रही है. जिसके तहत दो से ज्यादा बच्चे वाले लोगों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाने की सजा होगी. भारत की जनसंख्या दिन दूनी रात चौगुनी रफ़्तार से बढ़ती ही जा रही है. भारत में एक विशेष समुदाय यानि कि मुसलमानों को एक अलग ही क़ानून के तहत चार शादियां करने की छूट भी है, जिसके कारण उनके कई बच्चे होते हैं|

Now after the ban on black money, the Modi government is contemplating to bring legislation to control the growing population. Under which, people with more than two children will be sentenced to not get government jobs. India’s population is increasing day by day by fourfold. A special community in India i.e. Muslims have the freedom to do four marriages under a different law, due to which they have many children.

मौजूदा खबर अनुसार बता दें कि इस समुदाय में ट्रिपल तलाक जैसी प्रथा भी चलन में है जिसके तहत पति अपनी बेगम को सिर्फ तीन बार तलाक कह देने मात्र से अलग हो जाता है और उसके बाद वो दुबारा किसी और से शादी करने के लिए स्वतन्त्र हो जाता है. मोदी सरकार ने अब सोच लिया है कि जिस तरह से ट्रिपल तलाक की कुप्रथा को खत्म किया गया था, अब वो मुस्लिम समुदाय की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रण में लाने के लिए जल्द ही जनसँख्या नियंत्रण बिल लाएगी ताकि समाज को सुधारा जा सके|

According to the current news, the practice of triple divorce in this community is also in practice, under which the husband gets separated from his wife for just three times, and after that she becomes free to marry someone else again. is. The Modi government has now thought that the manner in which the triple divorce had been abolished, now it will bring the population control bill soon to bring the Muslim population under control so that society can be improved.

गौरतलब है कि सुदर्शन न्यूज़ चैनल पर चल रहे एक लाइव डिबेट में जब मुस्लिम महिलाओं से पूछा गया की अब वो प्रधानमंत्री मोदी से ट्रिपल तलाक के बाद कौन सी ऐसी चीज चाहती है जिससे मुस्लिम महिलाओं को राहत मिले. इसके बाद एक-एक करके महिलाओं ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी हर मुस्लिम महिला के सजे भाई से बढ़कर है. उन्होंने वो किया है जो आजतक कोई इंसान और सरकार न कर सकी. मोदी जी से अब हमारी केवल एक ही मांग है|

It is worth mentioning that in a live debate on the Sudarshan News channel when Muslim women were asked that what they now want from Prime Minister Modi after Triple divorce, there is relief for Muslim women. After this, women, on one side, said that Narendra Modi is more than a brother-in-law of every Muslim woman. They did what any person and government could not do till now. Now we have only one demand from Modi ji.

बता दें कि मुस्लिम महिलाओं के मुताबिक अब वो मोदी सरकार से केवल जनसँख्या नियंत्रण बिल चाहती है ताकि मुस्लिम समुदाय की बढती जनसंख्या रोकी जा सके. अगर ये बिल आ जाता है तो मुस्लिम महिलाएं जिन्हें ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर किया जाता था उसपर रोक लग जाएगी और साथ ही तमाम महिलाओं को उनकी पूर्ण स्वतंत्रता भी मिल पायेगी. ऐसे में एक मुस्लिम महिला ने तो यहाँ तक कह दिया कि मोदी सरकार का साथ देने के लिए हर मुस्लिम महिला तैयार है|

According to Muslim women, now they want the people’s control bill from the Modi government so that the growing population of the Muslim community can be stopped. If the bill comes, then the Muslim women who were forced to produce more children will be stopped and all women will also be able to get their full independence. In this way a Muslim woman has even said that every Muslim woman is ready to support the Modi government.

बताते चलें कि मुस्लिम महिलाओं से जब आरएसएस पर उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने कहा कि आरएसएस बहुत ही अच्छा काम कर रही है. वो महिलाओं के हक़ के लिए लडती है और अगर मुस्लिम महिलाओं को जरुरत पड़ी तो वो भी वक़्त आने पर आरएसएस में शामिल हो जाएगी. मुस्लिम महिलाओं के मुँह से ऐसा जवाब सुनकर देश में मौजूद कट्टरपंथियों की नींद जरुर हराम हो जाएगी. ये बदलाव कांग्रेस के मुँह पर भी किसी तमाचे से कम नही है|

Let’s say that when Muslim women were asked about their views on RSS, they said that RSS is doing a very good job. They fight for the rights of women and if Muslim women need it, they will also join the RSS when the time comes. Listening to such a response from the mouth of Muslim women, the sleep of the hardliners present in the country will be totally lost. These changes are not less than any straw on the Congress front.

https://youtu.be/_0My6_0CfaU

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https://www.youtube.com/watch?v=dsJje-_3hzs

https://www.youtube.com/watch?v=4Tyz5onsJbA

तीन तलाक के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों पर सुनाया ऐसा ऐतिहासिक फैसला, मुस्लिम संगठनों के उड़े होश !

नई दिल्ली: गोधरा में कट्टरपंथियों द्वारा ट्रेन में कार सेवकों को जलाने के बाद भड़के गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. क्या 2002 के गुजरात दंगों में धार्मिक स्थलों स्थलों को हुए नुकसान की भरपाई राज्य सरकार को करनी चाहिए? हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य सरकार को क्षतिग्रस्त मस्जिदों को हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा, जिसके बाद 2012 में गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी. आज इस पर फैसला आ गया है|

New Delhi: The Supreme Court has declared a historic decision on the Gujarat riots after the burning of car servants in the train by fanatics in Godhra. Should the state government compensate the damage done to religious sites in the 2002 Gujarat riots? The High Court had ordered that the state government had to pay compensation to the damaged mosques, after which in 2012 the Gujarat government had filed an appeal in the Supreme Court against the order of the High Court. Today the decision has come.

मंगलवार को इस अपील पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार गुजरात दंगों में क्षतिग्रस्त मस्जिदों की भरपाई नहीं करेगी. दरअसल इस्लामिक रिलीफ सेंटर नाम की संस्था ने कोर्ट में याचिका दी थी कि धर्मस्थलों की सुरक्षा राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है. सरकार की गैरजिम्मेदारी से हुए नुकसान की उसे भरपाई करनी चाहिए.

While deciding the appeal on Tuesday, the Supreme Court has overturned the order of the High Court. The Supreme Court said that the government will not compensate the damaged mosques in the Gujarat riots. In fact, the institution called Islamic Relief Center had petitioned in the court that security of the shrines is the responsibility of the state government. It should compensate for the loss of the government’s responsibility.

जिसके बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य के सभी 26 जिलों में दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों की लिस्ट बनाने के लिए कहा था. याचिकाकर्ता इस्लामिक रिलीफ सेंटर ने दावा किया था कि ऐसे स्थलों की संख्या 500 के करीब है, जिन्हे गुजरात दंगों के दौरान नष्ट कर दिया गया था, जबकि राज्य सरकार का कहना था कि संख्या इससे काफी कम है|

After which the High Court was told to make a list of religious sites damaged during the riots in all the 26 districts of the state, while deciding the verdict. The petitioner Islamic Relief Center claimed that the number of such sites is close to 500, which was destroyed during the Gujarat riots, while the state government said that the number is much less than that.

सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि, “संविधान के अनुच्छेद 27 के तहत करदाता को ये अधिकार दिया गया है कि उससे किसी धर्म को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स नहीं लिया जा सकता. ऐसे में, धर्मस्थलों के निर्माण के लिए सरकारी ख़ज़ाने से पैसा देना असंवैधानिक होगा|

During the hearing, the counsel appearing by the Gujarat government had argued that “under Article 27 of the Constitution, the taxpayer has been given the right that it can not be taxed to encourage any religion. In such a situation, it would be unconstitutional to make money for the construction of religious places.

During the hearing, the counsel appearing by the Gujarat government had argued that “under Article 27 of the Constitution, the taxpayer has been given the right that it can not be taxed to encourage any religion. In such a situation, it would be unconstitutional to make money for the construction of religious places.

इसके अलावा ये गुजरात सरकार की आधिकारिक नीति है कि वो धर्मस्थलों को हुए नुकसान की भरपाई नहीं करेगी. राज्य सरकार ने 2001 में आये भूकंप में क्षतिग्रस्त हुए धर्मस्थलों के लिए भी कोई मुआवज़ा नहीं दिया था|

Apart from this, it is the official policy of the Gujarat government that they will not compensate the losses incurred to the shrines. The state government did not pay any compensation for the damaged shrines in 2001 earthquake.

हालांकि इस्लामिक रिलीफ सेंटर के वकील का कहना था कि भारत का संविधान धार्मिक भावनाओं को लेकर काफी उदार है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रफुल्ल गोरड़िया बनाम भारत सरकार मामले में हज सब्सिडी दिए जाने को भी सही ठहराया था. वहीँ सुप्रीम कोर्ट में मामले को सुनने वाली बेंच के अध्यक्ष जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि यदि गुजरात सरकार ने धर्मस्थलों की मदद के लिए कोई कानून बनाया होता और तब भी मुआवजा नहीं देती तो कोर्ट सरकार को आदेश दे सकता था, लेकिन ऐसा तो कोई कानून ही नहीं है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार गुजरात दंगों में क्षतिग्रस्त मस्जिदों की भरपाई नहीं करेगी|

Although lawyers of the Islamic Relief Center said that the Constitution of India is quite liberal about religious sentiments. Earlier, the Supreme Court also upheld the grant of Haj subsidy in Prafulla Gordia versus the Government of India. At the same time, Justice Deepak Mishra, President of the Bench who heard the matter in the Supreme Court, said that if the Gujarat government had made a law to help the shrines and did not pay compensation then the court could order the government, but such a law Not only is it. In such a case, the Supreme Court ruled in favor of the state government saying that the government will not compensate the damaged mosques in the Gujarat riots.

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https://www.youtube.com/watch?v=4Tyz5onsJbA

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हिंदुस्तान से प्रेरणा पाकर, ईरान में इस्लाम के खिलाफ जिहाद- लगे इन नारों से थर्राया पूरा रामल्ला..

ईरान में इस्लाम और वहां की सरकार जिसे एक मौलाना रूहानी चला रहे है, उनके खिलाफ लोगों ने जबरजस्त और भीषण प्रदर्शन शुरू कर दिया है, लोगों ने इस्लाम विरोधी नारे लगाने शुरू किये है, महिलाओं ने भी बुरखा उतारना शुरू कर दिया है, और ईरान की सडको पर भीषण प्रदर्शन चल रहा है

In Iran, the people who are running a Maulana Rouhani, people have begun to perform enormous and horrific demonstrations, people have started putting anti-Islam slogans, women have begun to take off, and Iran There is a horrific demonstration on the road

प्रदर्शन सरकार और इस्लाम दोनों के खिलाफ चल रहा है, और मुसलमान ये भी नारे लगा रहे है की, “हम आर्यन है, हमपर अरबी अल्लाह थोप दिया गया है”, इस तरह के इस्लाम विरोधी नारे ईरान की सडकों पर सुने जा रहे है, और लोग इस्लाम छोड़ने की बात कर रहे है, ये भी कह रहे है की, इस्लाम उनके देश को छोड़कर जाए, देखें वीडियो

The demonstration is going on against both the government and Islam, and the Muslims are also shouting that “we are Aryans, we have been imposed on Arabic”, such anti-Islam slogans are being heard on the streets of Iran, And people are talking about leaving Islam, they are also saying that Islam should leave their country, see video

https://twitter.com/kachalmooferfer/status/946367938784882688

ईरान के लोग इस्लामिक धर्मगुरुओं को कह रहे है की, तुमपर शर्म है तुम हमारे देश को छोड़कर जाओ, लोग ये भी कह रहे है की हमे इस्लामिक शासन अब नहीं चाहिए, इस्लामिक शासन हमारे देश को छोड़कर अरब में जाये, लोग ये भी कह रहे है की हम आर्यन है, हमपर अरबी अल्लाह थोप दिया गया है

The people of Iran are saying to Islamic religious leaders that you are ashamed to leave our country, people are also saying that we do not want Islamic rule now, Islamic rule should leave our country and go to Arabia, people say this also Is that we are Aryan, we have been imposed Arabic Arabic

आपकी जानकारी के लिए बता दें की ईरान पहले एक पारसी देश ही था, बाद में इस्लामिक हमलावरों ने सभी का धर्मांतरण कर दिया, 1970 तक ईरान में काफी हद तक आज़ादी थी, फिर वहां पर शरिया इत्यादि लागू कर दिया गया, महिलाओं को बुर्खों में कैद कर दिया गया, और अब 2017 आते आते ईरान के लोग इस्लामिक शासन से इस तरह परेशान हो गए है की सड़कों पर भीषण प्रदर्शन करने लगे है

For your information, let Iran know that it was only a Parsi country later, after the Islamic invaders converted all of them, until 1970, there was a great extent of freedom in Iran, then Sharia etc. were applied there, women were in bad Captured, and now 2017, the people of Iran have become disturbed by Islamic rule in such a way that they have started to perform horrors on the streets.

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source whatsapp

पाकिस्तान की करतूतों का हुआ फर्दाफाश, मोदी सरकार ने दिया करारा जवाब !

क्या पाकिस्तान से कभी कोई ऐसी आवाज आई है कि उन्हे (पाकिस्तान को) “कांग्रेस” से खतरा है ” सोनिया_गांधी ” से खतरा है ” राहुल_गांधी ” से खतरा है ” आम आदमी पार्टी ” से या ” मुलायम “” लालू ” ” मायावती ” से खतरा है??

Has there ever been any voice from Pakistan that they are threatened with “Congress” (Pakistan) is threatened by “Sonia Gandhi”, “Rahul Gandhi” is in danger from “Aam Aadmi Party” or “Mulayam” “Lalu” from “Mayawati” Is the danger ??

पाक हमेशा सिर्फ एक ही बात बोलता है , कि हमारे लिए ” मोदी ” खतरा है “बीजेपी ” खतरा है और ” RSS ” खतरा है और ही भाषा हमारे देश के सेकुलर भी बोलते है कि- हमें पाकिस्तान से , पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम आंतकवाद से , देश में पनप रहे मुस्लिम कटटरवाद से , ISIS समर्थकों से , देश में जातिवाद , साम्प्रदायीकता व अराजकता फैला रहे ओवेशी/ आजम/ बुखारी/ मुलायम/ममता/ लालू/ मायावती/ केजरीवाल से कोई खतरा नही है|

Pak always speaks only one thing, that “Modi” is a threat to us, “BJP” is at risk and “RSS” is in danger and language also speaks secular of our country – that we are from Pakistan, supported by Pakistan’s Muslim terrorism, From Muslim fundamentalism in the country, there is no threat to the ISIS supporters, there is no threat to the caste/spreading of casteism, communalism and chaos in the country, Azmi / Bukhari / Mulayam / Mamta / Lalu / Mayawati / Kejriwal.

अगर हमें और हमारे देश को खतरा है तो वो नरेन्द्र मोदी  बीजेपी  RSS , विश्वहिन्दू परिषद और देश के हिन्दू व हिन्दूवादी संगठनों से है आखिर ऐसा क्यो? अरे इन भाषाओं को कुछ तो समझो मेरे देशवासीयो  होश में सोचो और समझो गम्भीर बात है भविष्य के लिए और इतने सबके बाबजूद आपको ये समझाना पड़े की वोट किसे देना चाहिए और किसे नहीं, तो ये वाकई शर्मनाक है|

If we and our country are at risk then it is from Narendra Modi, BJP, RSS, Vishwa Hindu Parishad and Hindu and Hindu organizations of the country. Oh, these languages are my countrymen! Think senses and think seriously, for the future and for so many, you have to explain that who should vote and who is not, then it is really embarrassing.

पाकिस्तान से तो कुछ होता नै है | अपने अंदर पल रहे आतंकवाद को तो वो हटा नहीं पा रहा जो उसे धीरे धीरे ख़तम कर रहा है बाकि उसे भारत से शुरू से ही आपत्ति थी चाहे कारगिल युद्ध हो या फिर नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना |

There is nothing wrong with Pakistan. It is not able to remove the terrorism within itself, which is slowly eliminating it, but it was the beginning of the objection to India, whether it was Kargil war or Narendra Modi becoming the Prime Minister.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=aGHeWHD0uXg

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VIDEO: ”निकाह मुताह” जिस पर मुस्लिम समुदाय को बात करने में भी शर्म आती है, जानिये विस्तार से

औरत को बचपन से इतना डराया जाता है कि अगर वह शरीयत और मौलवी के खिलाफ जाएगी तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा. जबकि कुरान खुद सबसे पहले यह कहता है कि तुम खुद पढ़ो और समझो. लेकिन वहां तक बात पहुंचती ही नहीं है. मौलवियों ने व्याख्या करने की बात अपने हक में कर ली है. एक तरफ निकाह में तीन तलाक वही दूसरी तरफ हलाला और मुताह जैसी दरिंदगी भी समाज को दीमक की तरह चाट रही है,

The woman is so scared of her childhood that if she goes against Shariat and Maulvi, then it will happen, it will happen. While the Koran itself first says that you read and understand yourself. But there is no point in reaching the point. The clerics have done the right thing to interpret. On one side there are three divorces in the marriage; the other side like the halala and mutha on the other side is licking the society like a termite,

तीन तलाक के खिलाफ अभियान से मुस्लिम समुदाय के लोगों या मौलवियों को आहत नहीं होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से आज के दौर में तीन तलाक हो रहा है, वह पूरी तरह इस्लाम के खिलाफ है. इससे इस्लाम के जो पांच सिद्धांत हैं, जो हिदायत है, उसमें कोई तब्दीली नहीं होती. जो चीज थोड़ी-सी बदल रही है, वह शरीयत है. अब शरीयत बाद की चीज है, कुरान के डेढ़ सौ साल बाद की. उसका मकसद यही है कि कुरान को समझने और विश्लेषण करने में मदद करे. आज भी हम लोग कुरान को विश्लेषण कर सकते हैं कि आज के दौर में क्या जरूरी है. इस मामले में तो कुरान में बिल्कुल साफ निर्देश हैं कि तीनों तलाक के बीच में एक महीना दस दिन, एक महीना दस दिन का गैप होना चाहिए. तो इसमें समाज को आहत होने या तीन तलाक का बचाव करने की कोई गुंजाइश ही नजर नहीं आती.

The campaign against the three divorces should not hurt the Muslim community or the clerics, because the way in which three divorces are happening today, it is against the whole of Islam. There is no change in the five principles of Islam, which is the instruction. The thing which is changing a bit, it is Sharia. Now Shari’a is the next thing, after 150 years of the Qur’an. His purpose is to help the Qur’an understand and analyze it. Even today, we can analyze the Qur’an that what is needed in today’s era. In this case, there is absolutely clear instructions in the Quran that between the three divorces, there should be one month ten days, one month ten days gap. So there is no scope to hurt the society or defend the three divorces.

एक चीज इसमें और जोड़ना चाहती हूं. इसके बिना ये मांग अधूरी है. मेरे ख्याल से इस मांग में ये भी जोड़ा जाना चाहिए कि औरत को भी उतनी ही आसानी हो खुला लेने में, जितना कि मर्द को है. औरत भी तीन बार ये कह सके और तलाक हो जाए. क्योंकि औरत अगर खुला मांगती है तो अंतत: देता मर्द ही है. अगर वह नहीं चाहे तो उसे मनाना पड़ता है किसी बुजुर्ग से, दोस्त से, या समाज से दबाव डलवाना पड़ता है या कुछ संपत्ति वगैरह देकर मनाना पड़ता है. बच्चों से मिलने का अधिकार छोड़ना पड़ता है या मेहर की रकम छोड़नी पड़ती है. इस तरह कुछ चीजें छोड़कर महिला को तलाक मिलता है. इस सबके बावजूद जो फाइनल प्रोनाउंसमेंट है तलाक का, वह पुरुष ही देता है. महिला सब कुछ दे दे, तब भी तलाक-तलाक-तलाक का घोषणा पुरुष ही करता है. तो मैं समझती हूं कि इसके बिना बात अधूरी रहेगी. इसे न छोड़ा जाए. इस मांग में ये चीज जोड़ी जानी चाहिए कि औरत भी अगर तीन महीने का वक्त लेकर तीन बार तलाक कह दे तो उसे तलाक मान लिया जाना चाहिए.

One thing I want to add to it. Without this the demand is incomplete. I think this should also be added in this demand that the woman is equally as comfortable in getting open, as much as the man. The woman can say it three times and divorces. Because if the woman asks for open then finally it is a man. If he does not want to do it, he has to persevere by pressure from an elderly, friend, or a society, or have to do some work to do so. The right to meet children or to leave the amount of Mehar. In this way, leaving a few things, the woman gets a divorce. Despite all this, the final pro bonoment is divorced, the man only gives it. The woman gives everything, even then the man divides divorce-divorce-divorce. So I understand that the thing will remain incomplete without it. Do not leave it. This thing should be added to this demand that if the woman also demands a divorce for three months, she should be treated as a divorce, she should be treated as a divorce.

औरत के खुला मांगने के मामले शायद ही कभी सुनने को मिलते हैं, क्योंकि उसमें वक्त बहुत लगता है. जब महिला को खुला लेना हो तो उसे एक से दूसरे मौलवी के पास जाना पड़ता है. कभी बरेलवी के पास, कभी दारुल उलूम के पास. वह मौलवी के पास जाती है तो वे हजारों वजहें पूछते हैं कि तुम क्यों खुला लेना चाहती हो | जबकि मर्द को कोई वजह नहीं देनी पड़ती. औरत वजह भी बताए तो उसे खारिज कर देते हैं कि ये वजह तो इस काबिल है ही नहीं कि तुम्हें खुला दिया जाए. इसमें आठ-साल दस साल लग जाते हैं |

The rare cases of women seeking openings are rarely heard because it takes time too much. When the woman has to open, she has to go from one to the other cleric. Ever near Barelavi, sometime near Darul Uloom. When he goes to the cleric, they ask thousands of reasons why you want to open. Whereas the man does not have to give reasons If the woman gives the reason, then she dismisses that this reason is not enough for you to be open. It takes eight years ten years.

मौलवी लोगों के फैसले ज्यादातर महिलाओं के खिलाफ इसलिए होते हैं क्योंकि वे मुख्य धर्मग्रंथ कुरान को मानते ही नहीं हैं. बुनियादी तौर पर यह लड़ाई तीन तलाक की लड़ाई नहीं है, यह कुरान शरीफ को आधार मानने की लड़ाई है | कुरान को मानने की जगह वह शरिया और क्या-क्या चलन है, ये सब बताया करते हैं | जैसे, जो निकाहनामा है उसमें ये लिखा होना चाहिए कि औरत भी अगर चाहे तो वह तलाक ले सकती है लेकिन उसे काट दिया जाता है | कहा जाता है कि निकाह के वक्त तलाक की बात करना अपशकुन है | वे असली कुरान कभी कोट ही नहीं करते |

The decisions of the clerics are mostly against women because they do not believe in the Koran as the main scripture. Basically, this fight is not a fight for three divorces, it is a fight to believe in Koran Sharif. Instead of adhering to the Qur’an, it is the Sharia and what is the trend, they tell all this. As such, in the case of a marriage, it should be written that if a woman wants it, she can get divorced but she is bitten. It is said that talking about divorce at the time of marriage is unfortunate. They do not coat the real Quran ever.

मेरे पास जो भी है वह अल्लाह का दिया हुआ है | अगर अल्लाह की ये ख्वाहिश होती कि मैं इसे छिपाकर रखूं तो वे उसका कुछ न कुछ इंतजाम करते | मुझे सिर से अपना पूरा चेहरा ढककर रखने की क्यों जरूरत है? बुरके से ढकी हुई औरतें घर में भी कहां सुरक्षित हैं? वे कौन लोग हैं जो इस तरह के लिबास या रहन-सहन को ही इज्जत की नजर से देखते हैं?

Whatever is with me is given to Allah. If Allah had wished that I hide it, they would have made some arrangements for him. Why do I need to cover my entire face from the head? Where are the women covered with burqa even at home? Who are those people who look like this kind of veneer or lifestyle?

औरत जात को बचपन से इतना डराया जाता है कि अगर वह शरीयत और मौलवी के खिलाफ जाती है तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा | जबकि कुरान खुद सबसे पहले यह कहता है कि तुम खुद पढ़ो और समझलो | लेकिन वहां तक बात पहुंचती ही नहीं है | मौलवियों ने व्याख्या करने की बात अपने हक में कर ली है | ईरान में एक बेचारी कुर्रतुल ऐन ने दावा किया था कि कुरान में लिखा है कि आखिरी नबी हजरत मुहम्मद होंगे लेकिन मैं तो नादिया (महिला नबी) हूं. उसके बारे में तो कुरान कोई बात कहता नहीं है इसलिए नादिया तो हो ही सकती है. लेकिन उस बेचारी को तो मार दिया गया.

Female caste is so scared in childhood that if she goes against Shariat and Maulvi, then it will happen, it will happen. While the Koran itself first says that you read and understand yourself. But there is no point in reaching the point. The clerics have done the right thing to interpret. A poor Qrratul in Iran had claimed that in the Quran it is written that the last prophet will be Hazrat Muhammad but I am Nadia (female prophet). The Koran does not say anything about it, therefore, Nadia can be. But that poor man was killed.

अभी मैंने अपनी किताब ‘डिनाइड बाइ अल्लाह’लिखी तो तलाक, हलाला, खुला, मुताह आदि पर सच्ची कहानियों के सहारे तमाम सारे सवाल उठाए कि कुरान क्या कहता है, शरीयत क्या कहती है, संविधान क्या कहता है और हो क्या रहा है, तो उस पर फतवा जारी हो गया कि ये तो मुसलमान हैं ही नहीं. इन्हें ये सब कहने का कोई हक नहीं है. हमारा तो कहना है कि हम मुसलमान हैं या नहीं हैं, लेकिन हमारे साथ जो हो रहा है उस पर हम क्यों टिप्पणी नहीं कर सकते. जब रूपकंवर को जलाया गया और उसे सती का नाम दिया गया, हम हर विरोध और हर जुलूस में शामिल थे. इस तरह अगर कोई हिंदू या ईसाई भी है तो वह क्यों नहीं बोल सकता?

Now I have written all the questions in my book, ‘Dinaid By Allah’, then divorces, halala, open, mutha etc., with the help of true stories that what the Quran says, what Shari’a says, what the constitution says and what is happening The fatwa was issued on that it was not a Muslim, nor was it a Muslim. They have no right to say all this. Ours is to say that we are Muslims or not, but why can not we comment on what is happening with us. When the metaphor was burnt and given the name of Sati, we were involved in every protest and every procession. If such a person is a Hindu or a Christian then why can not he speak?

तलाक तो एक अहम मुद्दा है कि जल्दबाजी में किसी ने तलाक दे दिया और उसे भी अलगाव मान लिया गया, लेकिन एक और मुद्दा जो इससे जुड़ा है, वो है हलाला. इसमें ये व्यवस्था है कि मर्द ने जल्दबाजी में तलाक दे दिया, अब वह पछता रहा है, अपना फैसला वापस लेना चाहता है तो वह ऐसा कर नहीं सकता. उस औरत की पहले किसी और से शादी हो और वह अमल में लाई जाए. फिर या तो उसका तलाक हो या वह मियां मर जाए, तब पहला शौहर उससे शादी कर सकता है. ये प्रथा बीते कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़ गई है. एक बार तलाक हो गया और फिर मियां-बीवी चाहें तो भी उनके पास सूरत नहीं है, सिवाय एक प्रताड़ना भरी प्रक्रिया से गुजरने के. औरतों की वह प्रताड़ना जब बढ़ी है तो औरतें एक होकर आगे आ रही हैं. वे चाहती नहीं कि हड़बड़ी में तलाक हो जिसे सुधारने के लिए हलाला झेलना पड़ता है. ये बहुत शर्मनाक है कि अपने पति के पास ही वापस जाने के लिए एक रात किसी और मर्द के साथ रहें. इस पर बात होनी चाहिए. मुस्लिम महिलाओं की मानसिक बुनावट ऐसी है कि वे जल्दी आवाज नहीं उठातीं. अब सूरत ऐसी बन गई है कि पचास-साठ हजार पढ़ी-लिखी महिलाएं इकट्ठा होकर विरोध में आगे आ रही हैं.

Divorce is an important issue that someone in a hurry has divorced and it is considered as isolation, but another issue which is related to it is that Halala is. There is a system in it that the man divorced hastily, now he is repenting, wants to withdraw his decision, he can not do it. That woman should get married before anyone else and she should be brought to justice. Then either he is divorced or he dies, then the first husband can marry him. This practice has increased a lot in the last few years. Once they got divorced, and if they want Mian-Bīvī, they do not even have a chance, except to go through a torture process. When the woman’s harassment has increased, then the women are coming forward together. They do not want to be divorced in a hurry, which is to get rid of

दूसरी एक प्रथा है मुताह. वह एक तरह का फौरी विवाह है. उसके दिन तय होते हैं कि वह दस दिन, सौ दिन या कुछ निर्धारित दिन का हो सकता है. हालांकि, इसके ऐतिहासिक संदर्भ पर मुझे शक है लेकिन माना जाता है कि जब फौजें चलती थीं तो जहां फतह मिलती थी, सैनिक वहां की औरतों से बलात्कार करते थे. अगर बच्चे हो जाते थे तो वे नाजायज कहे जाते थे. इसलिए फौरी विवाह का सिस्टम बनाया गया. इसमें जितने दिन का करार होगा, उसके बाद वह खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा. हाल में कई मामले ऐसे सामने आए हैं कि खाड़ी देशों से महीने-दो महीने के लिए मर्द वापस आते हैं तो उनको वक्त बिताने के लिए कोई चाहिए. जिम्मेदारी भी नहीं निभानी है. दूसरे उनको इस्लाम का भी डर है कि जन्नत मिलेगी कि नहीं मिलेगी. मजा भी करना है. तो वे यहां आकर इस तरह की फौरी शादियां करते हैं. इसमें तो एक बार कोई लड़की फंस गई तो उसकी शादी कभी नहीं होती. फिर उसे मुताही बोलते हैं. जैसे-जैसे उसकी जवानी ढलती है, उसके पैसे घटते जाते हैं. यहां तक होता है कि कई औरतों को सिर्फ खाने-कपड़े पर रखा जाता है, उनका यौन उत्पीड़न किया जाता है और वे घर का काम भी करती हैं. यह एक तरह की कानूनी वेश्यावृत्ति है. इसमें मौलवी भी खबर रखते हैं कि किसके घर की लड़की सयानी हो गई है और किसके घर का लड़का लौटने वाला है. वे इसमें बिचौलिये की भूमिका निभाते हैं. अब ये सब मसले कभी नहीं उठते कि मुस्लिम समुदाय को भी इस पर बात करने में शर्म आती है. इसे सिर्फ महिलाएं झेलती हैं.

The other is a custom that is Mutta. She is a kind of fast marriage. His days are fixed that he can be of ten days, hundred days or a few days. However, I doubt it on its historical context but it is believed that when the forces were moving, where the Fatah was found, the soldiers used to rape women there. Had children been called, then they were called illegitimate. So the immediate marriage system was created. After all the deal will be there, after that it will end itself. Recently, a number of cases have emerged that if the men return from Gulf countries for months or two months, then they need someone to spend time. There is also no responsibility to be done. Others also fear Islam that there will be Paradise or not. Have fun too. So they come here and do such fast weddings. In this, once a girl gets stuck, she is never married. Then he speaks bitterly. As his youth moves, his money decreases. Even so, many women are kept on clothes, they are sexually assaulted and they also do homework. This is a kind of legal prostitution. In it, the clerics also keep a note of whose girl’s home has become childless and whose son is going to return. They play the role of middlemen in it. Now all these issues never arise that the Muslim community is ashamed to talk about it. It only takes women

तलाक के साथ एक अहम मुद्दा है हलाला. इसमें ये है कि मर्द ने जल्दबाजी में तलाक दे दिया, अब वह अपना फैसला वापस लेना चाहता है तो वह ऐसा कर नहीं सकता. उस औरत की पहले किसी और से शादी हो और वह अमल में लाई जाए. फिर या तो उसका तलाक हो या वह मियां मर जाए, तब पहला शौहर उससे शादी कर सकता है. ये बहुत शर्मनाक है

An important issue with divorce is Halala. It is here that the man divorced in a hurry, now he wants to take his decision back so that he can not do it. That woman should get married before anyone else and she should be brought to justice. Then either he is divorced or he dies, then the first husband can marry him. It is very embarrassing

दूसरी बात ये है कि तलाक के अलावा जितनी रूढ़ियां हैं पर्दा वगैरह, इनको कभी तार्किक ढंग से चुनौती नहीं दी गई. आप सीधे-सीधे बहस में उतरिए, बातचीत कीजिए. मैं कहती हूं कि मेरे पास जो भी है वह अल्लाह का दिया हुआ है. अब उसको देखते हुए मेरा चेहरा तो अल्लाह ने दिया है. तो अगर अल्लाह की ये ख्वाहिश होती कि मैं इसे छिपा कर रखूं तो वे उसका कुछ न कुछ इंतजाम करते. मुझे सिर से अपना पूरा चेहरा ढंककर रखने की क्यों जरूरत है? ये सब बेकार की बातें हैं कि औरत घर में रहेगी तो सुरक्षित रहेगी, खुद को ढंककर रखेगी तो सुरक्षित रहेगी. बुरके से ढंकी हुई औरतें घर में भी कहां सुरक्षित हैं? हमारे समाज में मर्द कहता है कि तुम ऐसे रहो तो सुरक्षित हो. औरतों में आत्मविश्वास की कमी है, इसलिए वे भी मान लेती हैं कि हम इसी तरह सुरक्षित हैं. वे सोचती हैं कि जैसा कहा जा रहा है, वे वैसे ही रहेंगी तो उनको इज्जत की नजर से देखा जाएगा. वे कौन लोग हैं जो इस तरह के लिबास या रहन-सहन को ही इज्जत की नजर से देखते हैं? उनकी सोच और उनकी मानसिक बनावट पर कभी बात नहीं होती जो कहते हैं कि उसका मुंह खुला था, पहुंचा ऊंचा था या बाजू खुली थी, इसलिए उसे छेड़ा गया.

The second thing is that unlike divorce, the curtains, etc., have never been challenged in a logical manner. You get straight into the debate, negotiate. I say that whatever I have, Allah has given it. Now seeing my face, Allah has given my face. If Allah had wished that I hide it, they would have made some arrangements for him. Why do I need to cover my whole face from the head? All these things are worthless that if the woman remains in the house then she will be safe and keep herself covered then she will be safe. Where are the women covered with burqa even at home? In our society, the man says that if you stay like this then be safe. There is a lack of confidence in women, so they also agree that we are equally safe. They think that if they are going to be like they are being said they will be seen with respect. Who are those people who look like this kind of veneer or lifestyle? There is nothing to say about their thinking and their mental texture which says that his mouth was open, reached high or the side was open, so he was teased.

दो बातें मुसलमान औरतों के पक्ष में जाती हैं. वे बाकी समुदायों की औरतों के बराबर में रह रही हैं. आज उसके पास सब अधिकार हैं. संविधान हमें बराबरी देता है. जो हक हिंदू औरत को है, वही हक मुसलमान औरत को भी है और उसे यह मिलना चाहिए. हम अपनी लड़ाई इस्लाम के नजरिये से न लड़कर इस्लाम और संविधान दोनों के मद्देनजर लड़ेंगे. और संविधान कहीं भी कुरान के आड़े नहीं आ रहा है. वह कहीं से भी खतरे में नहीं आ रहा है.

Two things Muslims go in favor of women. They are living in equal communities of the rest of the communities. Today, he has all the rights. The Constitution equals us. The right is to the Hindu woman, the same woman belongs to the Muslim woman and she should get it. We will fight our efforts not to fight the Islamic view of Islam and the Constitution in the light of both. And the constitution is not being obstructed anywhere in the Koran. He is not in danger from anywhere.

आंबेडकर से किसी ने पूछा था कि पर्सनल लॉ का अलग से प्रावधान क्यों रखा गया है, क्या सभी के लिए एक-समान कानून अच्छा नहीं होगा? उसके जवाब में उन्होंने एक लेख लिखा जिसमें कहा कि समान नागरिक संहिता इतनी बेहतरीन चीज है कि समुदाय भी कुछ समय बाद इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि हमें समान नागरिक संहिता को अपनाना चाहिए, न कि पर्सनल लॉ को अपनाना चाहिए. लेकिन ऐसा हुआ नहीं, अब वजह जो भी रही हो. कम से कम मुसलमानों में तो बिल्कुल नहीं हुआ. अब काफी सारी चीजें आज के दौर में देखते हैं कि काफी कुछ बदलाव शुरू हो गया था. उसे तगड़ा झटका लगा 1986 में, जब शाहबानो के केस को पलट दिया गया. उससे हम लोगों को बहुत नुकसान हुआ.

Someone from Ambedkar had asked why the separate law has been provided separately, will not the same law be good for everyone? In response, he wrote an article in which said that the common civil code is such a wonderful thing that the community will also reach the conclusion after some time that we should adopt the same civil code, not the personal law we should adopt. But that did not happen, now whatever the reason is At least Muslims did not happen at all. Now a lot of things are seen in today’s era that a lot of changes have started. He had a great shock in 1986, when the case of Shah Bano was overturned. We have a lot of harm to the people.

दो चीजें एक साथ हुईं. इधर शाहबानो के केस को पलट दिया गया. उधर पाकिस्तानी तानाशाह जियाउल हक ने 1981-82 में हुदूद कानून लागू किया. उसके तहत बहुत सारी ऐसी चीजें पाकिस्तान में हुईं जो औरतों के खिलाफ गईं. इससे यहां के मौलवियों को यह कहने का मौका मिला कि देखो पाकिस्तान में शरीयत मान ली गई है और तुम लोग नहीं मान रहे हो. शाहबानो का केस उसी का नतीजा था. जबकि आप नंदिता हक्सर की किताब पढ़िए तो सारी मुसलमान औरतें शाहबानो के पक्ष में खड़ी थीं कि उसे उसका हक मिलना चाहिए.

Two things happened together. Here the case of Shah Bano was reversed. On the other hand, Pakistani dictator Jiaul Huq introduced the Hudood Act in 1981-82. There were many such things in Pakistan that went against women who went against women. This gave an opportunity to the clerics to say that Shari’a has been adopted in Pakistan and you are not accepting it. The case of Shah Bano was the result of him. While you read Nandita Haksar’s book, all the Muslim women stood in favor of Shah Bano, that he should get his right.

देखिए, धर्मगुरु किसी भी धर्म का हो, वह मौका लपकने की फिराक में रहता है. शाहबानो के समय का मौका भी मौलवियों ने लपक लिया. उस समय के मंत्री थे जेडआर अंसारी. उन्होंने धमकी दी कि मैं संसद के सामने आग लगा लूंगा तो सारे मर्द घबरा गए कि नहीं-नहीं, कुछ भी हो जाए लेकिन मर्द किसी कम्युनिटी का नहीं जलना चाहिए. औरतें दहेज के लिए या दूसरी वजहों से जलाई जाएं तो जलें. लेकिन मर्द नहीं जलना चाहिए. मौलवी लोग कहते हैं कि मुसलमान के मसले पर सिर्फ मुसलमान बोलें. शाहबानो के केस को कोर्ट में जस्टिस चंद्रचूड़ हेड कर रहे थे. वे जज हैं, इस्लामिक लॉ पर डिग्री है, लेकिन आप कहेंगे कि नहीं, वे हिंदू हैं इसलिए वे अथॉरिटी नहीं हैं. इससे काम नहीं चलेगा. बात-बहस से कोई रास्ता निकलेगा.

Look, the religious leader belongs to any religion, he is in the waiting position to seize the opportunity. The time of Shahbano’s time was also taken by the clerics. The then ministers were Z.R. Ansari. They threatened that if I set fire to Parliament, then all the men were scared or not – no, nothing should happen but the men should not burn any community. Burns for women for dowry or for other reasons. But men should not burn. Maulvi people say that Muslims should speak only on the issue of Muslims. Justice Chandrachud was heading the court in Shah Bano case. They are judges, there is a degree on Islamic law, but you will say no, they are Hindus, therefore they are not the authorities. This will not work. There will be a way out of the debate.

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https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

मौलाना का घटिया बयान “राम को बेच रही है बीजेपी” – साम्बित ने पात्रा दिया ऐसा मुँहतोड़ जवाब की हो गयी बोलती बंद।

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद एक दशक से लंबे समय तक बने रहे हैं और इस मामले को अक्सर “संवेदनशील” और “भावुक” मुद्दा कहा जाता है। विभिन्न नेताओं के बीच विभिन्न कारणों के चलते अतीत में कई सरकारें इस मामले का हल ढूंढने में विफल रही हैं।

The Ram temple and the Babri Masjid dispute in Ayodhya have remained for a decade and it is often called the “sensitive” and “passionate” issue. Due to various reasons among various leaders, many governments in the past have failed to find a solution to the issue.

कथित तौर पर, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर इकट्ठा करना शुरू किया और कहा कि यह आश्वस्त है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार भी है।राजस्थान में भरतपुर से राम मंदिर के निर्माण के लिए दो ट्रक पत्थर पहुँचाये गये ।और यह संवेदनशील मुद्दे पर विकास का पहला पड़ाव है।

Allegedly, the Vishwa Hindu Parishad (VHP) started collecting stones for the construction of the Ram Temple in Ayodhya and said that it is convinced that there is a BJP government in Uttar Pradesh. To build Ram Mandir from Bharatpur in Rajasthan Two truck stones were transported. And this is the first stop for development on sensitive issues.

इसके बाद, विभिन्न विभिन्न राजनीतिक दलों के पैनल के सदस्यों के बीच विभिन्न समाचार चैनलों पर चर्चा की जाने वाली यह गर्म विषय था। वीएचपी ने इस कदम से समुदायों और राजनीतिक दलों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। एक समाचार चैनल पर बहस के दौरान मौलाना साजिद रशीदी ने एक बार फिर भगवान राम का अपमान करने की कोशिश की और एक अपमानजनक वक्तव्य दिया जो हर हिंदू के खून को उगल देगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी भगवान राम को अपने लाभों के लिए बेच रही है।। भाजपा प्रवक्ता समिताब पत्रा ने उसके बाद मौलाना को मुँहतोड़ जवाब दिया।

After this, it was a hot topic to discuss various news channels among the panel members of various different political parties. VHP has created a tension between the communities and the political parties through this move. During the debate on a news channel, Maulana Sajid Rashidi once again tried to insult Lord Rama and gave an abusive statement which would spark the blood of every Hindu. He said that BJP is selling Lord Rama for its benefits .. BJP spokesman Samitab Patra then postponed the maulana.

कई मौकों पर विपक्षी नेता और मौलाना ने भगवान राम का अपमान किया और राम मंदिर के निर्माण के समर्थन में भाजपा पर अपमानजनक टिप्पणी की। लेकिन इस मौलाना ने अपनी सीमा को पार कर दिया, जिसके लिए उन्हें भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के जवाब ने मौलाना का मुंह बंद कर दिया गया।

On several occasions, opposition leader and Maulana insulted Lord Rama and in support of the construction of the Ram temple, he made derogatory comments on the BJP. But this maulana crossed the border, for which the maulana was silenced by the reply of the BJP spokesperson.

 

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