आतंकवाद के जनक सऊदी से आयी सनसनीखेज खबर, जानकर आप भी ख़ुशी से झूम उठेंगे- आखिर आ ही गया ऊँट पहाड़ के नीचे

नई दिल्ली : इस्लामिक आतंकवाद अब दुनिया से पूरी तरह ख़त्म होने ही वाला है. सलाफी इस्लाम की आड़ में आतंकवाद का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी को झेलता चला आ रहा है, जिसके कारण टैक्स फ्री जीवन अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी. बता दें कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब और यूएई में अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी.

New Delhi: Islamic terrorism is now about to end completely with the world. Saudi Arabia, the father of terrorism under the guise of Salafi Islam, is now coming to the knees. Saudi Arabia has been facing heavy recession in the oil business for quite some time, due to which it will be a matter of tax free life. Let us say that no tax was levied in Saudi Arabia and UAE, which was called the biggest economy of the Gulf region, and the government also offered a lot of subsidies.

कंगाली के कगार पर खाड़ी देश
तेल से मोटी कमाई करने वाले इन देशों में आम जनता को सरकार को अपनी कमाई पर ना तो कोई इनकम टैक्स देना होता था और ना ही किसी उत्पाद और सेवा को खरीदने पर कोई सेल्स टैक्स या सर्विस टैक्स देना होता था. मगर कई दशकों से चली आ रही ये परम्परा अब नए साल से ख़त्म हो जायेगी.

Gulf country on the verge of bankruptcy
In these countries, who were making huge profits from oil, the general public had to pay no income taxes to the government on their earnings and neither had any sales tax or service tax for buying a product or service. But this tradition that has been going on for several decades will now end with the new year.

दरअसल यहाँ की सरकारें तेल से होने वाली कमाई के घटने के कारण काफी परेशान है और अब जनता से टैक्स वसूलने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है. इसी के चलते 1 जनवरी 2018 से ये देश वैल्यू एडेड टैक्स व्यवस्था की शुरुआत करने जा रहे है.

Actually, the governments here are very disturbed due to the loss of earnings from oil and now they have no choice other than to tax the public. Because of this, these countries are going to start the Value Added Tax System from January 1, 2018.

वैट की पहल करने वाले दोनों देश गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के सदस्य हैं और इनके अलावा कुवैत, बहरैन, ओमान और कतर भी इसमें शामिल हैं. इन सभी देशों की कमाई का मुख्य जरिया तेल ही था, इसी को बेच-बेच कर इन देशों के पास अकूत दौलत आती थी. मगर पिछले कुछ सालों में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट से यहाँ की सरकारों को काफी घाटा हो रहा है.

Both of the VAT initiatives are members of the Gulf Cooperation Council and besides this Kuwait, Bahrain, Oman and Qatar are also included in this. The main means of earning of all these countries was oil, selling and selling them to these countries came in great wealth. But in the past few years, the decline in oil prices globally is causing a lot of loss to the governments here.

मिडिल ईस्ट में कम होंगे युद्ध के हालात
ख़ास बात ये भी है कि ये देश कभी शान्ति से भी नहीं रहते और आपस में ही युद्ध करते रहते हैं. यमन और सऊदी के बीच तो आये दिन राकेट व् मिसाइलें दागी जाती हैं. वहीँ ईरान का भी सऊदी से छत्तीस का आंकड़ा रहता है. ऐसे में इन देशों का हथियार और युद्ध की तैयारी के क्षेत्र में भी काफी पैसा खर्च होता है, जिसके चलते सरकार की कमाई लगातार कम हो रही है.

The situation in the Middle East will be less
It is also a special thing that these countries do not live in peace anymore and keep fighting in their midst only. Between Yemen and Saudi, racquets and missiles are tainted. There is also a figure of thirty-six from Iran. In such a situation, the amount of money spent in the field of arms and war preparations of these countries is also being used, due to which the government’s earnings are continuously decreasing.

लिहाजा, दोनों देशों में सरकार ने नए साल से वैट के जरिए खाने-पीने के सामान, कपडे, इलेक्ट्रॉनिक और गैसोलीन, फोन, बिजली और पानी सप्लाई समेत होटल जैसे उत्पाद और सेवा पर कम से कम 5 फीसदी टैक्स लगाने का फैसला किया है.

So, in both the countries, the Government has decided to levy at least 5 per cent tax on goods and services such as hotels including food, clothing, electronic and gasoline, phone, electricity and water supply through VAT for the new year.

इसके अलावा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी वैट लगाने की तैयारी की जा रही है और स्कूली शिक्षा में स्कूल यूनीफॉर्म, किताबें, स्कूल बस फीस और लंच जैसी सेवाओं को टैक्स के दायरे में रखा जाएगा.

Apart from this, preparations for VAT are also being made in the field of higher education and in school education, services such as school uniforms, books, school bus fees and lunch will be kept under tax.

गौतलब है कि खाड़ी देशों में बढ़ते राजस्व घाटे के असर को कम करने के लिए 2015 में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में सभी सदस्य देशों ने टैक्स फ्री तमगा हटाते हुए उत्पाद और सेवाओं पर टैक्स लगाने पर सहमति जताई थी. इसके बाद अब 2018 में सऊदी और यूएई इस दिशा में पहला कदम बढ़ा रहे हैं. माना जा रहा है कि इसके बाद अन्य खाड़ी देश भी इसी फॉर्मूले पर अपने-अपने देश में वैट लगाने की पहल करेंगे.

In order to reduce the impact of the growing revenue deficit in the Gulf countries, in 2015, all the member countries in the Gulf Cooperation Council had agreed to impose tax on products and services by removing the tax free limit. After this, Saudi and UAE are now taking the first step in this direction in 2018. It is believed that after this, other Gulf countries will also take initiative to put VAT on this formula in their respective countries.

मुफ्तखोरी ख़त्म होने से आतंक का सफाया
जानकारों के मुताबिक़ तेल से होने वाली घटती कमाई से दुनिया में आतंकवाद में भी भारी कमी आएगी, क्योंकि सऊदी अरब को ही आतंक का जनक माना जाता है. तेल बेचकर आयी अथाह दौलत का इस्तेमाल दुनिया में सलाफी विचारधारा के प्रचार और आतंक को प्रायोजित करने के लिए किया जाता रहा है मगर अब वो दिन लदने लगे हैं.

Elimination of terror by eliminating free poker
According to experts, decreasing earnings from oil will also lead to a huge reduction in terrorism in the world, because Saudi Arabia is considered to be the father of terror. The wealth that came from selling oil has been used to sponsor Salafi ideology and to sponsor terror in the world but now they are starting to struggle.

जैसे-जैसे सऊदी समेत अन्य खाड़ी देशों का तेल व्यापार ठप्प होता जाएगा, वैसे-वैसे पैसे कमाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी और व्यापारिक सम्बन्ध बनाने के लिए दूसरे देशों के साथ अच्छे तालमेल बिठाने पड़ेंगे. सऊदी अरब तो इजराइल के साथ दोस्ती करने को भी काफी उत्सुक दिखाई दे रहा है.

As the oil trade of other Gulf countries, including Saudi, will get stalled, in the same way, it will have to work hard to earn money and in order to have a business relationship, it will have to adjust to other countries. Saudi Arabia is also looking forward to being friendly with Israel.

सऊदी जलवायु बहुत ज्यादा उद्योग व् व्यापार के अनुकूल भी नहीं है, ऐसे में दूसरे देशों पर निर्भर रहना पडेगा. मेहनत से कमाए गए पैसे का महत्व समझ में आएगा

The Saudi climate is not very favorable to the industry and business, in such cases, it will have to depend on other countries. The importance of hard-earned money will be understood.

 

यह भी देखें:

https://www.youtube.com/watch?v=m7CoPymK4gw

 

https://www.youtube.com/watch?v=8WfEyICu_NM

इजराइल के बाद भारतीय सेना में आये ये ज़बरदस्त हथियार, पाकिस्तान फ़ौज में मचा हाहाकार !

नई दिल्ली: पाकिस्तान के मटियामेट होने का वक़्त आ गया है. पीएम मोदी ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफलता पा ली है और अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देशों ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है. वहीँ भारतीय सेना को भी पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाने का सामान मिलने जा रहा है, जिसके बाद एलओसी पर पाकिस्तानी सेना एक भी गोली चलाने की हिम्मत नहीं कर सकेगी|

New Delhi: Pakistan’s deadline has come. PM Modi has succeeded in isolating Pakistan and many other world countries including the US have left Pakistan. In the same way, Indian Army is going to get bricks of Pakistan bricks, after which the Pakistani army will not be able to dare to shoot a single shot.

डीआरडीओ द्वारा बनाये गए वेपन लोकेटिंग रेडार ‘स्वाति’ को तो भारतीय सेना को पहले ही सौंपा जा चुका है. खबर है कि ऐसे 30 रडार भारतीय सेना को जल्द ही मिलने वाले हैं, जिन्हे पाकिस्तान से सटी सीमा और एलओसी पर तैनात किया जाएगा| बता दें कि ‘स्वाति’ के नाम से ही पाक फ़ौज थर-थर काँप उठती है. दरअसल भारत के साथ आमने-सामने लड़े गए सभी युद्धों में पाकिस्तान को हमेशा मुँह की खानी पड़ी है. ऐसे में पाक सैनिक छुप कर सीमा पार से गोलियां, मोर्टार और रॉकेट दागते रहते है|

Weapon locating radar ‘Swati’ created by DRDO has already been handed over to the Indian Army. It is reported that such radars are expected to soon meet the Indian Army, which will be deployed on the border with Pakistan and the LoC. Let us know that the name of ‘Swati’ only raises the Pak army. Indeed, in all the war fought with India, Pakistan has always lost its face. In this way, the Pak soldiers hide the bullets, mortars and rockets from across the border.

भारतीय सेना भी जवाबी कार्रवाई करती तो है लेकिन गोलीबारी करने वाले पाक सैनिकों की सटीक जानकारी न होने की वजह से भारतीय सेना के सामने मुश्किल आती है. मगर 30 स्वाति रडार सिस्टम की एलओसी पर तैनाती के बाद जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से छिप कर हमला होगा, भारतीय सेना के जवानों को तुरंत पता चल जाएगा कि फायरिंग कहां से हो रही है, रॉकेट कहां से दागे जा रहे हैं और उनकी दूरी और ट्रेजेक्टरी क्या है|

The Indian army also responded, but due to lack of accurate information of the Pakistani soldiers firing, the Indian army faces difficulties. But after the deployment of 30 Swati radar system, after the deployment of Pakistan by the side of the LoC, Indian Army personnel will know immediately where the firing is from where the rockets are being pressed and their distance and What is the tragedy?

30 नए स्वाति रडार के जरिए यह सब जानकारी चंद मिनटों में मिल जाएगी और उसके बाद भारतीय सेना सटीक हमला करेगी और पाकिस्तानी पोस्ट या गोलीबारी की जगह को पलक झपकते ही तबाह कर देगी|

Through 30 new Swati radars, all this information will be found in a few minutes and after that the Indian army will attack exact and will destroy the Pakistani post or firing place with a blink of sight.

स्वाति रडार सिस्टम के द्वारा दुश्मन की ओर से हो की जा रही गोलीबारी की सटीक लोकेशन या ठिकाने का पता चल जाता है. ये दुश्मन के मोर्टार रॉकेट लॉन्चर और आर्टिलरी गन को सिर्फ एक से दो मिनट में तबाह करने की ताकत रखता है. स्वाति रडार सिस्टम की रेंज 30 से 50 किलोमीटर तक है|

The exact location of the firing or detection of enemy firing by Swati Radar system is known. It has the power to destroy enemy mortar rocket launcher and artillery guns in just one to two minutes. The Swati radar system ranges from 30 to 50 kilometers.

सबसे ख़ास बात ये है कि इस रडार सिस्टम को फायर सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे सीमा पर होने वाली फायरिंग की जानकारी के साथ दुश्मन को ऑटोमैटिक मुहतोड़ जवाब दिया जा सकेगा. मतलब यहाँ पाक फ़ौज ने मोर्टार दागा और पलक झपकते ही ‘स्वाति’ मोर्टार हमले की जगह का पता लगाते हुए आटोमेटिक हमला कर देगा और दुश्मन के संभलने से पहले ही उसका काम-तमाम हो जाएगा|

The most important thing is that this radar system will be connected to the fire system, allowing the enemy to respond automatically with information about firing on the border. This means that the Pak army will blast the mortar and in the blink of an eye, the ‘Swati’ mortar will attack an automatic attack by attacking the place and it will be full of work before the enemy takes over.

ये रडार सिस्टम रात में भी काम करता है, मतलब पाक फ़ौज जो कायरों की तरह से रात में छिप कर हमला करती है, वो भी इसके कारण रुक जाएगा. 30 नए रडार की तैनाती के बाद पाक सैनिक या आतंकी पहाड़ों में छिपकर अपने पापी मंसूबों को कभी अंजाम नहीं दे पाएंगे, एलओसी से सटे 50 किलोमीटर के दायरे में किसी भी पाकिस्तानी पोस्ट या बंकर से फायरिंग हुई तो अगले ही पल वो पूरा इलाका धुआं-धुआं हो जाएगा|

These radar systems also work in the night, that means the Pak army, which, like the cowardly, attacks in the night, will be stopped, which will also stop because of it. After the deployment of 30 new radars, Pak soldiers or terrorists will not be able to execute their sinners by hiding in the mountains, if any Pakistani post or bunker firing within 50 km radius adjacent to the LoC, then the next time the smoke of the entire area- Smoke will occur.

जिस-जिस इलाके में ‘स्वाति’ की तैनाती हो चुकी है, वहां पाक फ़ौज के हमले बंद हो गए हैं. इसकी वजह यह है कि भारतीय सेना को इस रडार से पाकिस्तान की चौकी और पोस्ट की सटीक लोकेशन मिल जा रही है, जिससे भारतीय सेना भी मुंहतोड़ जवाब दे रही है|

In the area where ‘Swati’ has been deployed, the attacks of the Pak army have ceased. The reason for this is that the Indian Army is getting an accurate post of Pakistan post and post from this radar, which is giving the Indian Army a shocking response.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=4Tyz5onsJbA

https://www.youtube.com/watch?v=dsJje-_3hzs

आखिर क्यों इजराइल इतनी मित्रता दिखा रहा है, क्या कारण है भारत के प्रति इस राजनैतिक प्रेम का…

हम सभी ने देखा की मोदी जब से इजराइल गए हैं सारा इजराइल उनपर प्यार बरसा रहा है| इसके क्या मायने हैं| क्यों इजराइल भारत के प्रधानमन्त्री और भारत, दोनों का दीवाना हो गया है| इजराइल ऐसा क्यों कर रहा है| कहने का मतलब है की दुनिया के सबसे ताकतवर देश में शुमार इजराइल का भारत के साथ क्या लेना देना हो सकता है|

We all have seen hom modiji is loved by israel ever since he decided to vsit israel. what does it mean? why israel prime minister has fallen in love with india. question is what on earth a powerful nation like israel has to do with a country like india.

कयास यह भी लगाये जा रहे हैं की इजराइल से भारत को इनोवेशन का बोहत बड़ा खजाना मिल सकता है| हालाकि इसैल बोहत छोटा सा देश है लेकिन भारत इजराइल से बोह्ह्त कुछ सीख सकता है| इजराइल की कुल जनसँख्या केवल 87 लाख है और क्षेत्रफल केवल 20700 वर्ग किलोमीटर है| यदि तुलना करें तो भारत का क्षेत्रफल इजराइल से 158 गुना ज्यादा है| जबकि जनसंख्या 153 गुना ज्यादा है| ऐसे में बोहत से लोग ये कहेंगे की इन दोनों देशों की तुलना संभव नहीं |

It is also being speculated that from Israel, India can get a great treasure of innovation. Though Ismail is a small country with Bohit, but India can learn something from Bohhat. The total population of Israel is only 87 million and the area is only 20700 square kilometers. If compared, the area of ​​India is 158 times more than Israel. While the population is 153 times more. In such a case, people will say that the comparison of these two countries is not possible.

हम भी यह बात जानते हैं लेकिन इनोवेशन क्षेत्रफल और जनसँख्या की मोहताज नहीं होती| नए आविष्कार और खोज कही भी हो सकती हैं| केवल खोज करने का भाव होना चाहिए| और इजराइल भाव में पीछे नहीं है| और इसीलिए इजराइल को इनोवेशन का केंद्र कहा जाता है| आतंकवाद से लड़ने के नए तरीके हों या खेती करने के नए फोर्मुले, इजराइल ने दोनों ही क्षेत्रो में झंडे गाढ़े हुए हैं| वह जय जवान भी है और जय किसान भी है|

We also know this, but the area of innovation and the population is not appealing. New inventions and discoveries can happen anywhere. There should be a sense of searching only. And Israel is not behind in the spirit. And that is why Israel is called the center of innovation. There are new ways to fight terrorism or the new formulas of farming, Israel has flagged the flags in both areas. He is also a Jai Jawan and Jai is a farmer too.

आतंकवाद से मुकाबला केसे किया जाता है? और सूखी ज़मीन पर खेती केसे होती है? ये इनोवेशन इजराइल ने पूरी दुनिया को करके दिखाया है| इजराइल दुनिया के उन चुनिन्द्दा देशों में शामिल है जो आतंकवाद से किसी भी तरह का कोई भी समझौता कभी भी नहीं करते हैं|

How to counter terrorism? And what is the cultivation of dry land? This innovation has shown to Israel through the whole world. Israel is among the select countries of the world who do not compromise on any kind of terrorism.

आज इजराइल के बने हथियार पूरी दुनिया में आतंकवादियों पर मौत बनकर बरस रहे हैं|
Today the weapons made by Israel are roaming on the terrorists throughout the world.

इतिहास गवाह है की भारतीय जनता पार्टी की सरकार से इजराइल के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं| इससे पहले पूर्व प्रधानमन्त्री अटल विहारी बाजपेयी के नेत्रत्व वाली सर्कार के समय भी तत्कालीन इजराइल के प्रधानमन्त्री अरियल शेरोन भारत की यात्रा करने वाले पहले इसरायली प्रधानमंती बने|

History is witness that Israel’s relations with the Bharatiya Janata Party government have always been good. Earlier, even during the reign of the Prime Minister Atal Bihari Vajpayee’s leadership, then Israel’s prime minister Ariel Sharon became the first Israeli prime minister to visit India.

कांग्रेस पार्टी पर ये आरोप लगते रहे हैं की उन्होंने इजराइल को नज़रंदाज़ किया| हालांकि पी वी नरसिंह राव के कार्यकाल में इजराइल से कूटनीतिक बातचीत की औपचारिक शुरुआत हुई थी|

The Congress party has been accusing that they ignored Israel. However, during the tenure of P.V. Narasimha Rao, formal formation of diplomatic negotiations was initiated by Israel.

इतिहास गवाह है की भारतीय जनता पार्टी की सरकार से इजराइल के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं| इससे पहले पूर्व प्रधानमन्त्री अटल विहारी बाजपेयी के नेत्रत्व वाली सर्कार के समय भी तत्कालीन इजराइल के प्रधानमन्त्री अरियल शेरोन भारत की यात्रा करने वाले पहले इसरायली प्रधानमंती बने|

History is witness that Israel’s relations with the Bharatiya Janata Party government have always been good. Earlier, even during the reign of the Prime Minister Atal Bihari Vajpayee’s leadership, then Israel’s prime minister Ariel Sharon became the first Israeli prime minister to visit India.

भारत और इजराइल में क्या समानताएं हैं और दोनों देशों को एक साथ क्यों काम करना चाहिए और इजराइल को ये बात समझ में आती है इसीलिए इजराइल भारत देश के साथ जुड़ने को बेताब है| अधिक जाने के लिए निचे विडियो देखें|

What are the similarities between India and Israel and why both countries should work together and Israel understands this, so Israel is desperate to be associated with India. Watch the video below to learn more.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=8ImzYyVUuNQ

क्यों आज भी अकेला ही दुनिया को धूल चटा सकता है इजराइल, आतंकियों का काल है इजराइल !

इजरायल अपने सृजन के पहले ही क्षण से विवादित राष्ट्र रहा है। यह अरब देशों के अपने अस्तित्व के अगले दिन पर एक क्रूर हमले का सामना करना पड़ा, और उस दिन से इज़राइल प्रत्येक गुजरते दिन अपनी ताकत बनाने में जुड़ा हुआ है। यह एक अत्यंत प्रतिकूल परिस्थिति में मौजूद है जहां हर पड़ोसी राष्ट्र इसे नष्ट करना चाहता है। और यही कारण था कि इसराइल को अपने पड़ोसियों के साथ कई पूर्ण पैमाने पर युद्धों से लड़ना पड़ा और यह कई दशकों से अपने पड़ोसियों के साथ एक दैनिक झड़पों में शामिल हो गया। पूर्व-आजादी के लड़ाकों की नींव पर निर्मित, द्वार विश्व युद्ध II के हथियारों के साथ आपूर्ति की गई, इसराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 1960 और 1970 के दशक में, अपनी अद्वितीय जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय बहिष्कारों की वजह से, दोनों ने अपनी अपनी सैन्य तकनीकों का विकास करना शुरू किया, साथ ही साथ सर्वश्रेष्ठ विदेशी तकनीक को बढ़ाने के लिए |

Israel has been a disputed nation right from the very first moment of its creation. It faced a brutal attack from Arabian countries right on the very next day of its existence, and since that day Israel has been indulged in building its strength with each passing day. It exists in an extremely hostile neighborhood where every neighboring nation wants to destroy it. And that was the reason why Israel had to fight multiple full scale wars with its neighbors and it is indulged in a daily skirmishes with its neighbors for many decades.
Built on a foundation of pre-independence militias, supplied with cast-off World War II weapons, the Israel Defense Forces (IDF) have enjoyed remarkable success in the field. In the 1960s and 1970s, both because of its unique needs and because of international boycotts, Israel began developing its own military technologies, as well as augmenting the best foreign tech.

इज़राइली सैनिक 1 9 48 के बाद से इसराइल ने अपने मानव पूंजी को सशस्त्र बलों में बदलने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया है। आईडीएफ ने भर्ती, प्रशिक्षण और प्रतिधारण के सिस्टम विकसित किए हैं जो इसे दुनिया के कुछ सबसे सक्षम, सक्षम सैनिकों के क्षेत्र में पेश करने की अनुमति देते हैं। कोई भी तकनीक काम नहीं करती है, जब तक कि उनके पास स्मार्ट, समर्पित, अच्छी तरह प्रशिक्षित ऑपरेटर नहीं है, ताकि उन्हें अपनी पूरी क्षमता पर कार्य कर सकें। 1 9 48 के बाद से इसराइल के नागरिकों के लिए एक अनिवार्य रक्षा सेवा है, और हम मानते हैं कि इस नीति ने एक शानदार परिणाम दिया है।

The Israeli Soldier Since 1948 Israel has initiated a programme to convert its human capital to the armed forces. The IDF has developed systems of recruitment, training, and retention that allow it to field some of the most competent, capable soldiers in the world. None of the technologies work unless they have smart, dedicated, well-trained operators to make them function at their fullest potential. Israel has a mandatory Defense Service for its Citizens since 1948, and we believe this policy has given a tremendous results.

मेर्कवा टैंक:
1 9 7 9 में मर्कवा टैंक आईडीएफ में शामिल हो गया और इसके घरेलू डिजाइन और निर्माण में अस्थिर विदेशी आपूर्ति की समस्याओं से परहेज किया गया, जबकि इजरायल को केंद्रीय पर्यावरण के बजाय अपने पर्यावरण के लिए अनुकूलित डिजाइनों पर ध्यान केंद्रित करने की इजाजत भी देनी थी। कई तरह के 1600 मेर्कवों ने सेवा में प्रवेश किया है, रास्ते में कई सौ अभी भी हैं। यह अपनी गतिशीलता, सटीक और गति के लिए प्रसिद्ध है हाल ही में गाजा युद्धों में, आईडीएफ ने फिलक्का की स्थिति में घुसने के लिए मेर्कवाओं का इस्तेमाल किया है जबकि सक्रिय रक्षा प्रणालियों ने कर्मचारियों को सुरक्षित रखा है। इसराइल ने भी संशोधनों को विकसित किया है जो शारिरी और कम तीव्रता से निपटने में मर्कवाओं की क्षमताओं को बढ़ाती है।

Merkava Tank:
The Merkava tank joined the IDF in 1979 and its domestic design and construction avoided problems of unsteady foreign supply, while also allowing the Israelis to focus on designs optimized for their environment, rather than for Central Europe. Around 1,600 Merkavas of various types have entered service, with several hundred more still on the way. It is famous for its maneuverability, precision and speed. In both of the recent Gaza wars, the IDF has used Merkavas to penetrate Palestinian positions while active defense systems keep crews safe. Israel has also developed modifications that enhance the Merkavas’ capabilities in urban and low-intensity combat.

एफ -115 थंडर लड़ाकू विमान:
इज़राइली वायु सेना ने 1 9 70 के दशक के बाद से एफ -15 के वेरिएंट ले जाया है, और यह ईगल की दुनिया का सबसे बहुमुखी और प्रभावी उपयोगकर्ता बन गया है। इजरायलियों ने वायु वर्चस्व और हड़ताल के प्रयोजनों के लिए एफ -15 को परिपूर्ण किया है संभ्रांत पायलटों द्वारा लाया गया, आईएएफ के एफ -15 भारतीय मध्य पूर्व में विमान के सबसे घातक स्क्वाड्रन बने रहते हैं।

F-15I Thunder Fighter Jet :
The Israeli Air Force has flown variants of the F-15 since the 1970s, and has become the world’s most versatile and effective user of the Eagle. Israelis have perfected the F-15 both for air supremacy and for strike purposes. Flown by elite pilots, the F-15Is of the IAF remain the most lethal squadron of aircraft in the Middle East.

जेरिको III परमाणु मिसाइल प्रणाली:
जेरिको 1 बैलिस्टिक मिसाइल ने 1 9 70 के दशक की शुरुआत में सेवा में प्रवेश किया, अंततः जेरिको द्वितीय और जेरिको III की जगह ले ली। जेरिको III क्षेत्र में सबसे उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल है, संभवतः मध्य पूर्व में न केवल हड़ताली लक्ष्यों में सक्षम है, लेकिन यूरोप, एशिया और संभवत: उत्तर अमेरिका में भी। जेरिको 1 बैलिस्टिक मिसाइल ने 1 9 70 के दशक की शुरुआत में सेवा में प्रवेश किया, अंततः जेरिको द्वितीय और जेरिको III की जगह ले ली। जेरिको III क्षेत्र में सबसे उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल है, संभवतः मध्य पूर्व में न केवल हड़ताली लक्ष्यों में सक्षम है, लेकिन यूरोप, एशिया और संभवत: उत्तर अमेरिका में भी। यरीहो III यह सुनिश्चित करता है कि इजरायल पर कोई परमाणु हमला विनाशकारी प्रतिशोध के साथ मिलेगा, खासकर जब यह संभव नहीं है कि इजराइल पहले हड़ताल से निहत्थे हो सकता है। बेशक, कोई भी संभावित इजरायल के शत्रु परमाणु हथियार नहीं हैं, ये मिसाइल पूरे क्षेत्र में यरूशलेम की परिक्रमात्मक परमाणु श्रेष्ठता देते हैं।

Jericho III Nuclear Missile System :
The Jericho I ballistic missile entered service in the early 1970s, to eventually be replaced by the Jericho II and Jericho III.The Jericho III is the most advanced ballistic missile in the region, presumably capable of striking targets not only in the Middle East, but also across Europe, Asia, and potentially North America. The Jericho I ballistic missile entered service in the early 1970s, to eventually be replaced by the Jericho II and Jericho III.The Jericho III is the most advanced ballistic missile in the region, presumably capable of striking targets not only in the Middle East, but also across Europe, Asia, and potentially North America. The Jericho III ensures that any nuclear attack against Israel would be met with devastating retaliation, especially as it is unlikely that Israel could be disarmed by a first strike. Of course, given that no potential Israeli foe has nuclear weapons, these missiles give Jerusalem presumptive nuclear superiority across the region.

 

डॉल्फिन क्लास पनडुब्बी:
इजरायल के परमाणु निवारक में डॉल्फिन वर्ग की भूमिका लगभग निश्चित रूप से गहराई से अतिरंजित हो गई है। निवारक गश्ती करने के लिए एक डीजल बिजली पनडुब्बी की क्षमता बिल्कुल सीमित है, भले ही वे कौन-सा ऑर्डनेंस लेते हैं हालांकि, डॉल्फिन आईडीएफ द्वारा आवश्यक अन्य सभी अभियानों के लिए एक प्रभावी मंच बना रहता है।  समुद्री टोहों में सक्षम, दुश्मन जहाजों को डूबने या अन्यथा हस्तक्षेप करने में सक्षम है, और विशेष शक्तियों को अप्रतिबंधित तटीय क्षेत्रों में वितरित करने के लिए, डॉल्फ़िन एक प्रमुख इजरायल सुरक्षा निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं, और इस क्षेत्र में सबसे संभावित घातक अंडरसेई बलों में से एक है।

 

Dolphin Class Submarine:
The role of the Dolphin class in Israel’s nuclear deterrent has almost certainly been wildly overstated. The ability of a diesel electric submarine to carry out deterrent patrols is starkly limited, no matter what ordnance they carry. However, the Dolphin remains an effective platform for all sorts of other missions required by the IDF. Capable of maritime reconnaissance, of sinking or otherwise interdicting enemy ships, and also of delivering Special Forces to unfriendly coastlines, the Dolphins represent a major Israeli security investment, and one of the most potentially lethal undersea forces in the region.

यह भी देखे

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

दुनिया को नहीं पता इजराइल का ये राज़, आज हुआ खुलासा तो पाकिस्तान की हुई पैन्ट गीली !

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद से ही भारत-इजराइल के संबंधों का तेजी से बहुआयामी विकास हो रहा है | दोनों ही देशों की सरकारें घोर राष्ट्रवादी हैं, और विचारों का समान होना दोनों राष्ट्रों के संबंधों को मजबूती प्रदान करता है | दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में आपसी साझेदारी है |

Since the formation of a government in the center under the leadership of Narendra Modi, there is a rapid multi-dimensional development of Indo-Israel relations. Governments of both the countries are deeply nationalist, and the views being equal are the strengths of the two countries. There is a mutual partnership between the two countries in many areas.

भारतीय गुप्तचर संस्था रॉ के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी वी बालचंद्रन के मुताबिक़ इन कारणों से इसराइल और भारत के संबंध परवान चढ़े | 1968 में रॉ इंटेलिजेंस ब्यूरो से अलग हो गई. उसके पहले भी भारत के इसराइल से अनौपचारिक संबंध थे | तब दोनों देशों के बीच के संबंध आने वाले सुरक्षा ख़तरों को लेकर थे | उस वक़्त आतंकवाद का ख़तरा उतना नहीं था, लेकिन फ़लस्तीनी चरमपंथियों से खतरा था | मसलन 1975-76 में ख़बरें आईं कि जापान की रेड आर्मी मुंबई आकर विमान अगवा कर सकती है |

According to V. Balachandran, a former senior official of the Indian Institute of Intelligence, these relations led to the relation between Israel and India. Separated from the Raw Intelligence Bureau in 1968. Even before that India had informal relations with Israel. Then the relations between the two countries were related to security threats. At that time the threat of terrorism was not so much, but there was danger from the Palestinian extremists. For instance, in 1975-76 there were reports that Japan’s Red Army could come to Mumbai and aboard the plane.

कहा जाता है कि 1962 में चीन युद्ध और बाद में 1965 और 1971 में पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी भारत को इसराइल से मदद मिली | पिछले महीने संसद में गज़ा संकट पर बहस के दौरान भी यह बात भाजपा सांसद तरुण विजय ने उठाई, पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने इसका खंडन किया | पूर्व रॉ अधिकारी वी बालचंद्रन कहते हैं, ”1962 या 1971 में इसराइल के साथ भारत के सुरक्षा संबंध नहीं थे | भारत और इसराइल वीआईपी सुरक्षा या चरमपंथी हमलों की आशंका को लेकर सहयोग कर रहे थे | तब इसराइल भारत की पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों की जटिलता से वाक़िफ़ नहीं था” | रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी की सोच थोड़ी अलग है |

It is said that India got help from Israel during the war in China in 1962 and later in Pakistan war in 1965 and 1971. Even during the debate on the Gaza crisis in parliament last month, BJP MP Tarun Vijay raised the issue, but Congress leader Ghulam Nabi Azad denied this. Former Raw Officer V Balachandran says, “India did not have security relations with Israel in 1962 or 1971. India and Israel were cooperating with the fear of VIP security or extremist attacks. Then Israel was not convinced of the complexity of relations with India of Pakistan and China. “Defense expert Rahul Bedi’s thinking is a bit different.

वो कहते हैं, ”1965 और 1971 में इसराइल ने भारत को गुप्त जानकारियां देकर मदद की | भारतीय सुरक्षा या ख़ुफ़िया अधिकारी साइप्रस या तुर्की के रास्ते इसराइल जाते थे | वहां उनके पासपोर्ट में छाप नहीं लगती थी | उन्हें मात्र एक काग़ज़ दिया जाता था, जो उनके इसराइल आने का सुबूत होता था | 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या ने भारत-इसराइल संबंधों को नई मज़बूती दी | राजीव गांधी नए प्रधानमंत्री बने. वीआईपी सुरक्षा के लिए एसपीजी और एनएसजी का गठन हुआ |

He says, “In 1965 and 1971, Israel helped India by giving secret information. Indian security or intelligence officers used to go to Cyprus via Cyprus or Turkey. There was no impression in their passport. They were given only a paper, which was proof of their coming to Israel. The assassination of Prime Minister Indira Gandhi in 1984 gave new relations to India-Israel relations. Rajiv Gandhi became the new Prime Minister SPG and NSG were formed for VIP security.

राहुल बेदी बताते हैं कि इन जवानों को ट्रेनिंग इसराइली जवानों की ट्रेनिंग की तर्ज पर दी गई | पिछले साल एक ख़बर छपी जिसमें भारतीय एजेंसी रॉ पर आरोप लगे कि उसने पीयूष इन्वेस्टमेंट और हेक्टर लीज़िंग एंड फ़ाइनेंस कंपनी के नाम से दो कंपनियां फ़्लोट कीं और इनके नाम पर दिल्ली में दो फ़्लैट खरीदे जहां मोसाद के भारतीय स्टेशन प्रमुख को कथित तौर पर 1989 से 1992 के बीच रखा गया| रॉ के पूर्व अधिकारी वी बालचंद्रन को कथित तौर पर इन कंपनियों से संबंधित बताया गया था |

Rahul Bedi explains that these soldiers were given training on the lines of training of Israeli soldiers. Last year a tabloid appeared in which the Indian agency RAW was charged that he floated two companies under the name of Piyush Investment and Hector Leasing and Finance Company and bought two flats in Delhi under his name, where the Indian station chief of MOSSAD was allegedly reportedly from 1989 Between 1992 V. Balachandran, former RAW officer, was reportedly related to these companies.

बालचंद्रन कहते हैं कि जो कुछ होता है वो सरकार की सहमति से होता था |कई बार विदेश से आने वाले अधिकारी नहीं चाहते थे कि किसी को पता चले | 1990 के दशक में श्रीनगर में मुस्लिम चरमपंथियों ने सात इसराइली पर्यटकों को जासूस होने के शक पर अगवा कर लिया | पांच पर्यटक किसी तरह भाग गए लेकिन एक पर्यटक और एक चरमपंथी मारे गए | एक अन्य पर्यटक को अलगाववादी संगठन जेकेएलएफ़ के सदस्यों ने बचाया |

Balachandran says that whatever happens happens with the consent of the government. Many times the officials coming from abroad did not want anyone to know. In the 1990s, Muslim extremists in Srinagar kidnapped seven Israeli tourists on the suspicion of being a spy. Five tourists fled somehow but a tourist and a extremist were killed. Another tourist rescued by separatist organization JKLF members.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

हिन्दुओ के कत्लेआम पर भारत को मुश्किल वक्त में अकेला न समझे, मिलकर देंगे मुहं तोड़ जवाब: इजराइल

इजराइल और वहां की मीडिया ने फिर एक बार साबित किया है की इजराइल हिन्दुओ और भारत का हितैषी है, बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानो ने 100 से ज्यादा हिन्दुओ का कत्लेआम किया है, हिन्दू महिलाओं का बलात्कार और अपहरण कर धर्मांतरण करवाया है,हिन्दू बच्चों को क़त्ल कर जमीन के अंदर गाड़ा है

Israel and the media there once again proved that Israel is friendly to Hindus and India; Rohingya Muslims have killed more than 100 Hindus in Burma; Hindu women have been raped and kidnapped and converted to Hindu religion. Taxis buried inside the ground

हिन्दुओ के कई शव निकाले जा चुके है, हिन्दू कैमरे के सामने कह चुके है की उनके लोगों को रोहिंग्या मुसलमानो ने मारा है, एक हिन्दू महिला ने तो ये भी बताया की बकरीद पर जानवर नहीं मिला तो हिन्दुओ को काटकर रोहिंग्या मुसलमानो ने बकरीद मनाई

Many bodies of Hindus have been taken away; Hindus have said in front of the camera that their people have been killed by Rohingya Muslims, a Hindu woman also told that the animals were not found on the goat, then the Rohingya Muslims were forbidden by cutting the Hindus.

हिन्दू के कत्लेआम पर दुनिया चुप है, सभी सेक्युलर और वामपंथी चुप है ,पर इजराइल और वहां की मीडिया ने हिन्दुओ के कत्लेआम का मुद्दा उठाया है,इजराइल और वहां की मीडिया में हिन्दुओ के कत्लेआम के खिलाफ आवाज उठी है ,इजराइल ने दुनिया से कहा है की,

The world is silent on the slaughter of the Hindus; all secular and leftist are silent, but Israel and the media have raised the issue of the massacre of Hindus; There is a voice against the massacre of Hindus in Israel and its media, Israel has said to the world That is,

आप ये ट्विट भी देख सकते है:

You can also see these tweets:

आप रोहिंग्या मुसलमानो के लिए आवाज उठा रहे हो पर आप बर्मा में क़त्ल किये गए हिन्दुओ पर चुप हो, जिनका क़त्ल रोहिंग्या मुसलमानो ने किया है,इजराइल की मीडिया ने कहा है की, हिन्दुओ की आवाज भी उठाई जानी चाहिए

You are raising voice for Rohingya Muslims, but you are silent on the Hindus murdered in Burma, who have been murdered by Rohingya Muslims, the media of Israel has said that the voice of Hindus should also be raised

क्यूंकि हिन्दू भी इंसान है, और उनके भी मानवाधिकार है,संयुक्त राष्ट्र हो, एमनेस्टी इंटरनेशनल हो, और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां हो, ये सभी रोहिंग्या मुसलमानो के लिए तो आंसू बहा रहे है पर बर्मा के हिन्दुओ पर सभी चुप है
पर हिन्दुओ के समर्थन में इजराइल और वहां की मीडिया सामने आयी है,

Because Hindus are also human, and they have human rights, be United Nations, Amnesty International, and other international agencies, all these Rohingya Muslims are shedding tears, but the Hindus of Burma are all silent
But in support of Hindus, Israel, and its media have come forward,

इजराइल ने साबित किया है की वो हिन्दुओ का हितैषी है,दुनिया में भले हिन्दुओ का कोई नहीं पर यहूदी समाज और इजराइल हिन्दुओ के पक्ष में है,और हिन्दू को भी इंसाफ मिलना चाहिए, मैं हिन्दुओं के समर्थन में हूँ, चाहे कोई हो या न हो मैं हमेश हिन्दुओं का समर्थन करूंगा,

Israel has proved that it is a benefit of Hindus, but none in the world but Hindu society and Israel are in favor of Hindus, and Hindus should also get justice, I am in support of Hindus, whether there is any Yes, I will support the Hindus,

 

 

बड़ी खबर : पाकिस्तान और चीन के खिलाफ ये एक बड़ा कदम मिटा देगा इनका नामोनिशान : अनिल अंबानी

हमारा एक भी जवान नही मारा जाएगा, और हम बस इस एक कदम से चीन का नामोनिशान मिटा देंगे : अनिल अंबानी

चाहे चीन और पाकिस्तान कितना भी साजिस कर ले भारत के खिलाफ कोई भी आतंकी हमले की तैयारी कर ले लेकिन भारत का बाल भी बांका नही कर सकता. और ये बात साबित कर दिया है भारत के 2 महान उद्योगपतियों तथा उसकी कंपनी ने। इन्होने ये बात साबित कर दी है की भारत देश का कोई भी दुश्मन चाहे जो मर्जी कर ले परन्तु उसको खत्म करना उनके बसकी बात नही है. भारत इतना कमजोर देश नही है कि इन छोटी – छोटी मुश्किलों से डर जाये.

Even if China and Pakistan prepare for any terrorist attack against India, how much can be prepared, but India’s child can not even make money. And this fact has proved that two great industrialists and their company of India. He has proved this fact that whatever the will of the country is any enemy, but it is not a matter of settling on him. India is not such a weak country that is afraid of these small things.

राफेल डिफ्फेन्स तथा रिलायंस के बीच हुआ साझा :-                                                                                                                                                                                                                                     दरअसल भारत सरकार ने दूसरे देशों की गतिविधियों को देख कर एक बहुत ही अहम् निर्णय लिया है जिसके तहत हवाई शक्तियों को मजबूत बनाने की बात सामने आई है। जिस तरह चीन और पाकिस्तान के बीच स्थलीय सड़क बन रही है इन सबको मात देने को तैयार भारत ने लिया अहम फैसला. भारत ने ऐसा महत्वपूर्ण फैसला लिया है जिससे भारत के दुश्मनों के पैरों तले जमीन निकल जाएगी. ये लोग डर से कांपने लगेंगे.

The sharing between Rafael Diffens and Reliance:                                                                                                                                                                                                                               In fact, the Government of India has taken a very high decision by looking at the activities of other countries, under which it has come to strengthen the air forces. Just as the terrestrial road between China and Pakistan is being formed, India has decided to overcome all these important decisions taken by India. India has taken such an important decision which will bring the land under the feet of the enemies of India. These people will start tremble with fear.

 

सभी राज्य साथ देंगे मिसाइल बनाने में :-                                                                                                                                                                                                                                                      इस योजना के तहत इन दो कंपनियों ने मिलकर हर राज्य में मिसाइल बनाने की इकाइयों तथा देश से बाहर जाने की सारी हवाई पट्टियों के निर्माण की जिम्मेदारी अपने सर पर ली है। इन दो कंपनियों ने ये जिम्मा उठाया है कि हवाई पट्टियों के निर्माण तथा मिसाइल का सारा खर्च ये उठाएंगे. हर राज्य को इतना मजबूत बनाना है कि कभी भी मुसीबत आने पर ये राज्य उनका डटकर सामना करने में सक्षम हों. और हर मुमकिन कोशिश कर दुश्मनों को हरा सके.

All the states will work together to make missiles: –                                                                                                                                                                                                                        Under this scheme, these two companies together have taken the responsibility to build missile-making units and all the air strips leaving the country. These two companies have taken up the responsibility to build airbases and collect all the expenses of the missile. It is to make every state so strong that once the trouble comes, the state will be able to face them bitterly. And can be able to defeat enemies by every possible effort.

सिर्फ इंदौर में खर्च होंगे 1300 करोड़ :-                                                                                                                                                                                                                                                        सिर्फ इंदौर के समीप निर्माण कार्य में खर्च होंगे 1300 करोड़ ये तो सिर्फ एक शुरुआती राशि है और इसके साथ ही 3000 लोगो को रोजगार भी मिलेगी। ऐसा होने से भारत की ततक और भी बढ़ जाएगी. इअसा होने से भारत अपनी हवाई शक्तियों को मजबूत करके चीन और पाकिस्तान की हमला करने की सारी उम्मीदों पर पानी फेर देगा. भारत की सुरक्षा की ओर ये एक ऐसा बड़ा कदम है जो भारत के खिलाफ आतंक फैलाने और भारत को हानि पहुँचाने का सोच रहे हैं।

Only Rs 1,300 crore will be spent in Indore: –                                                                                                                                                                                                                                       Only around Indore will be spending 1300 crore in construction work, it is just an initial amount and it will also get jobs for 3,000 people. By doing so, India’s tautak will increase further. With this, India will reinforce all hope of attacking China and Pakistan by strengthening its air power. This is a major step towards the security of India that is planning to spread panic against India and harm India.

यहां के उद्योगपति ने भी देश के लिए कुछ न कुछ बड़ा करने की ठान लिए हैं। इसके उपरांत भारत में स्वदेशी रक्षा उपकरणों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे होगा ये की देश को कभी किसी दुसरे देश पर निर्भर नही होना पड़ेगा. देश की रक्षा के लिए सारे हथियार देश में ही बनेंगे. ताकि बेरोजगार को रोजगार भी मिल सके और देश आर्थिक रूप से उन्नति भी कर सके जरुरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा हथियार बना सके।

The industrialist here has also decided to do something big for the country. After this, indigenous defense equipments will also be encouraged in India. It will happen that the country will never have to depend on any other country. All weapons will be made in the country to protect the country. So that the unemployed can also get employment and the country can make economic progress and create the maximum weapon to protect the country.

मोदी के इजरायल दौरे के बाद उठाया गया यह बड़ा कदम अब होगा देश के विरोधियों के मुँह पर जोरदार तमाचा. क्योंकि अब हर राज्य में ऐसी कंपनिया स्थापित की जाएगी जो इन विरोधियों के मुहं तोड़ जवाब दे सके। अब से हमारे देश के एक भी सैनिक नही मारे जाने चाहिए : अनिल अंबानी

This big move, taken after Modi’s visit to Israel, will now be a big hit on the faces of the country’s opponents. Because now in every state, such companies will be set up which can break the mouth of these opponents. An Indian soldier should not be killed anymore: Anil Ambani

अनिल अम्बानी ने अपने कंपनी रिलायंस के साथ इस साझा में भाग लिया हैं साथ ही साथ निवेश करते हुए यह बयान दिया है कि हमारे देश के एक भी सैनिक नही मारे जाने चाहिए वरना चीन को मिट्टी में मिला दूंगा।

Anil Ambani has taken part in this share with his company Reliance and while investing, it has made a statement that not one single soldier of our country should be killed or else we will get China into the soil.

https://youtu.be/tSvh2gioW7I

यह वीडियो भी देखें!

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : thenamopress.com