भारत ने अंतरिक्ष में लहराया अपना परचम, इस बड़े कदम को देख अमेरिका समेत देशभर में भूकंप

नई दिल्ली : एक वक़्त वो भी था जब देश के प्रधानमंत्री अपने परिवार के साथ विमान में विदेश यात्राएं किया करते थे अपने बच्चों,पोते, पोतियों के जन्मदिन भी विमान में मनाते थे और तब भी भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO के साइंटिस्ट्स राकेट के पार्ट्स को बैलगाड़ी पर लादकर या साइकिल के पीछे बांध कर ले जाते थे लेकिन आज वही ISRO सिर्फ अपने देश के लिए ही नहीं बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक भरोसेमंद उम्मीद बन रहा है.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक ISRO ने आज एक बार फिर अंतरिक्ष में अपना डंका बजवाया है. धरती का अध्ययन करने वाले उपग्रह (HySIS) हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग का प्रक्षेपण कर दिया गया है। इसरो के अंतरिक्ष यान पीएसएलवी-सी43 के साथ आठ देशों के 31 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से गुरुवार सुबह 09.58 बजे पीएसएलवी-सी43 से उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया.

बता दें कि हाईपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सेटेलाइट (HySIS) का प्राथमिक लक्ष्य पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है। 380 वजनी इस सेटेलाइट को इसरो ने विकसित किया है। यह पीएसएलवी-सी43 अभियान का प्राथमिक उपग्रह है। इसरो के बयान के अनुसार यह उपग्रह सूर्य की कक्षा में 97.957 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया जाएगा। इसकी आयु करीब 5 साल होगी.

भारत का हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (HySIS) इस मिशन का प्राथमिक सैटलाइट है। इमेजिंग सैटलाइट पृथ्वी की निगरानी के लिए इसरो द्वारा विकसित किया गया है। इस उपग्रह का उद्देश्य पृथ्वी की सतह के साथ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम में इंफ्रारेड और शॉर्ट वेव इंफ्रारेड फील्ड का अध्ययन करना है। HySIS एक विशेष चिप की मदद से तैयार किया जाता है जिसे तकनीकी भाषा में ‘ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरे’ कहते हैं.

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धरती के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना आसान हो जाएगा
इस उपग्रह से धरती के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना आसान हो जाएगा क्योंकि लगभग धरती से 630 किमी दूर अंतरिक्ष से पृथ्वी पर मौजूद वस्तुओं के 55 विभिन्न रंगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग या हाइस्पेक्स इमेजिंग की एक खूबी यह भी है कि यह डिजिटल इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी की शक्ति को जोड़ती है.

हाइस्पेक्स इमेजिंग अंतरिक्ष से एक दृश्य के हर पिक्सल के स्पेक्ट्रम को पढ़ने के अलावा पृथ्वी पर वस्तुओं, सामग्री या प्रक्रियाओं की अलग पहचान भी करती है। इससे पर्यावरण सर्वेक्षण, फसलों के लिए उपयोगी जमीन का आकलन, तेल और खनिज पदार्थों की खानों की खोज आसान होगी.

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पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा दिया
कभी थुंबा से शुरू हुआ इसरो का सफर आज बहुत आगे निकल गया है। 21 नवंबर 1963 को भारत केरल के थुंबा से छोड़ा गया था। उस वक्‍त दुनिया के दूसरे बड़े मुल्‍कों को इस बात का अहसास भी नहीं रहा होगा कि भविष्‍य में भारत उनसे इतना आगे निकल जाएगा कि उसको पकड़ पाना भी मुश्किल होगा।लेकिन इसरो ने अपनी विश्‍वसनीयता को बरकरार रखते हुए पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा दिया है.

आलम ये है कि आज भारत अंतरिक्ष में महारत रखने वाले देश अमेरिका, रूस आदि के उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर रहा है। 29 नवंबर 2018 को भारत ने 29 विदेशी उपग्रहों को एक साथ धरती की कक्षा के बाहर स्‍थापित कर अपनी सार्थकता को साबित किया है। यह इसरो का इस वर्ष छठा सफल मिशन था। 15 फरवरी 2017 को इसरो ने एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्‍थापित कर वर्ल्‍ड रिकॉर्ड बनाया था। इस दौरान अमेरिका, इजरायल, कजाखिस्‍तान, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, यूएई के उपग्रहों को छोड़ा गया था। इसमें 96 उपग्रह अकेले अमेरिका के ही थे.

source:dd bhartinews

हैरतअंगेज खुलासा- इस तरह से अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA ने ISRO को बर्बाद करने की साजिश रची

CIA को दुनिया की सबसे बड़ी व प्रभावी जासूसी एजेंसी के रूप में जाना जाता है| CIA अमेरिका में एक समांतर सरकार के रूप में स्थापित हो चुकी है और विभिन्न राष्ट्रों और उनके शासन तंत्र को नियंत्रित करने के लिए इसे विशेषाधिकार दिए गए है।CIA पर दुनिया भर के कई कट्टरपंथियों,राजनायिक हस्तियों की हत्या व अन्य प्रकार के राजनैतिक कांडो के आरोप लगे है।

The CIA is known as the world’s largest and most powerful detective agency. The CIA has been established in the US as a parallel government and has been given the privilege of controlling various nations and their governance mechanisms. On the CIA, many fundamentalists, murderers of political personalities, and other types of political condoms The charges have been charged.

जाहिर है जब ये एजेंसी पूरी दुनिया मे अपना वर्चस्व स्थापित कर चुकी है तो भारत कैसे अछूता रह जाए। भारत मे कई ऐसीे घटनायें घटी जिसमे CIA के शामिल होने पर संदेह जाहिर हुए है..विशेष रूप से CIA ने भारतीय प्रद्योगिकी और विज्ञान से सम्बंधित कार्यक्रमो में जासूसी और गहराई तक घुसपैठ कर बहुत नुकसान पहुंचाया है| हमारे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिको को CIA ने कथित तौर पर मौत के घाट भी उतार दिया .. इन सब के पीछे सिर्फ एक कारण रहा वो भारत को शक्ति सम्पन्न बनने से रोकना था| जिससे भारत सदा अमेरिका पर अपनी जरूरतों  ( टेक्नोलॉजी और expertise) के लिए निर्भर बना रहे।

Clearly, when this agency has established its supremacy in the whole world then how can India remain untouched? There have been many incidents in India that have expressed suspicion about the involvement of the CIA. In particular, the CIA has done a lot of harm in the activities related to Indian technology and science by penetrating into spies and depth. The CIA also reportedly killed many important scientists for the death. It was the only reason behind all this that he had to stop India from becoming power-hungry. So that India has always been dependent on America for its needs (technology and expertise).

इस लेख में आपके सामने ऐसे बहुत से तथ्य रखूँगा जिससे आपको पता लगेगा कि किस तरह से अमेरिकी एजेंसी ने एक घृणित रणनीति के तहत हमारे प्रौधोगिकी कार्यक्रम और वैज्ञानिको को नष्ट किया। श्री नाम्बी नारायण,पूर्व वैज्ञानिक,ISRO अपनी आत्मकथा में ISRO में बिताए अपने कार्यकाल के बारे में लिखते है,विशेष रूप से जब उन्हें 1994 के जासूसी प्रकरण में गलत तरीके से फंसा दिए गया था| 1994 में ISRO के महत्वपूर्ण दस्तावेजो व रहस्यो को बेचने के आरोप में श्री नारायण पर लगे पर 1998 में CBI कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपो से मुक्त किया.इस केस के चलते श्री नाम्बी ने अपने एक साथी वैज्ञानिक डी,सशिकुमार के साथ 50 दिन जेल में बिताए।

In this article, I will put many facts in front of you that will tell you how the American agency destroyed our technology programs and scientists under a disgusting strategy. Mr. Nambi Narayan, a former scientist, writes about his tenure in ISRO in his autobiography, especially when he was wrongfully implicated in the 1994 spy case. In 1994, Shri Narayan was accused of selling ISRO’s important documents and secrets, but in 1998 the CBI Court and the Supreme Court freed them from these allegations. Due to this case, Mr. Nambi had 50 days with one of his fellow scientists D. Sashikumar Spend the jail.

अपनी पुस्तक orbit of memories में उन्होंने CIA द्वारा भारतीय पुलिस और खुफिया ऑफिसर्स का इस्तेमाल कर उनके और ISRO के खिलाफ किये गए षडयंत्रो का खुलासा किया है,CIA ने भारतीय क्रायोजेनिक राकेट इंजन प्रोग्राम के निर्माण व विकास को रोकने के लिए ये षड्यंत्र किया था,उनके अनुसार उनपे जासूसी का ये केस अमेरिकी फ्रांसीसी एजेंसियों द्वारा इस तरह से बनाया गया था की उनके ही कार्यकाल में ISRO को एक कब्रिस्तान बनाकर उसमें वैज्ञानिको को दफन कर दिया जाता|

In his book orbit of memories, he has disclosed the conspiracies made against him and the ISRO by the CIA using Indian Police and Intelligence Officers, the CIA had conspired to stop the construction and development of the Indian Cryogenic Rocket Engine Program, According to him, these cases of espionage were made by US-French agencies in such a way that in their own tenure, by making ISRO a graveyard The scientists were buried in it.

जासूसी के इस मामले में मालदीव की एक महिला को जासूस के रूप में तैयार किया गया जिसके पास ऐसे रहस्य थे जिसका कोई पुलिस रिकॉर्ड,राजनेता,पत्रकारों की जानकारी में न हो लेकिन उनका उपयोग ज्ञात और अज्ञात रूप से CIA की साजिश के लिए इस्तेमाल हुए। इस साल जून में पूर्व मुख्यमंत्री और सी.पी.एम. के वरिष्ठ नेता वी.एस अच्युतानंदन ने सीबी मैथ्यू की लिखित एक पुस्तक जारी की थी जो इस ISRO के इस जासूसी केस की जांच टीम के अध्यक्ष थे। नाम्बी नारायण जब इस मामले से बरी हुए तब उन्होंने सीबी से इस बारे में बात की थी।

In this case of espionage, a woman from Maldives was created as a detective who had such a secret that no police record, politician, journalists should be in the information but their use was known and used for the conspiracy of the CIA. . In June this year, the former Chief Minister and CPM Senior leader VS Achuthanandan had released a book written by CB Mathew, who was the president of the investigation team of this detective case of ISRO. When Nambi Narayan was acquitted of this case, he talked to CB about this.

मैथ्यू ने नारायण से कहा था कि उन्हें अनजाने में अब तक डीजीपी मधुसूदन के केस में उलझाए रखा गया था। नारायण ने षड्यंत्र के पीछे काम करने वाले सभी लोगो को उजागर करने के गहन जांच की मांग की है। नाम्बी नारायण को छोड़कर सभी अभियुक्तो को CBI ने 1998 में बरी कर दिया था| इन अभियुक्तो में बंगलोर के एक कारोबारी एस.के शर्मा और चन्द्रशेखर भी शामिल थे,इनके अनुसार इन्हें कथित तौर पर इस षड्यंत्र को पूरा करने के लिए किए गए व्यापारिक सौदे के विभिन्न पहलूओ को देखने का काम दिया गया| इनके साथ 2 महिलाये मरियम राशिदा और सौज़िया हसन तथा मालदीव की 2 और महिलाओं को शामिल किया जो “हनी ट्रैप” बनाती थी ।

Matthew had told Narayana that he was unaware of being entangled in the case of DGP Madhusudan till now. Narayan has demanded a thorough probe to highlight all the people working behind the conspiracy. Excepting Nambi Narayan, all the accused were acquitted by the CBI in 1998. These accused, including a businessman from Bangalore, S. K. Sharma and Chandrashekhar, were allegedly given the task of looking at various aspects of the trading deal to meet this conspiracy. Along with them, 2 women included Miriam Rishida and Souzaiah Hassan and 2 more women from Maldives who made “Honey Trap”.

जब भारत अंतरिक्ष मे उड़ान भर रहा था और हमारी उपलब्धियों का टीवी पर प्रसारण हो रहा था हम तिरुवनंतपुरम में अपने घर में बैठे थे और मेरा टीवी भी बंद पड़ा था। मुझे इस उपलब्धि पर गर्व|लेकिन पिछले 18 सालों से जो यंत्रणा में झेल रहा हूँ उसने मुझे तोड़कर रख दिया। न्यायालय ने हम वैज्ञानिको के पक्ष में फैसला दिया जिससे राहत मिली पर देश का वैज्ञानिक वर्ग इससे सन्तुष्ट नही है बल्कि हतोत्साहित ही हुआ है|

When India was flying in space and our achievements were being broadcast on TV, we were sitting in my house in Thiruvananthapuram and my TV was also closed. I am proud of this achievement but for the past 18 years, the machinery which I am suffering in, has broken me down. The court gave the verdict in favor of the scientists, which got relief but the scientific class of the country is not satisfied with it but has been discouraged.

हम भारत की प्रगति के लिए कठोर तप करते हुए नई प्रौद्योगिकी का निर्माण करते है| लेकिन हमारा शिकार हमारे ही सिस्टम का प्रयोग करते हुए विदेशी कर जाते है.. वैज्ञानिको के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नही है| बल्कि ऐसे मुकदमों से छूटने के बाद राज्य हमे मुआवजा राशि तक नही देता है| भारत आगे भी बढ़ना चाहता है पर अपने ही लोगो की बलि चढाकर| ये कैसा व्यवहार है| इससे तो वैज्ञानिक हतोत्साहित हो रहे है।

We create new technology while harsh perseverance for the progress of India. But our victims go abroad using our own system. There is no security system for the scientists. Rather than being released from such laws, the state does not give us the compensation amount. India wants to grow even further but sacrifices its own people. What is this behavior? This is why the scientists are getting discouraged.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=xlRRjGN7n7U

https://www.youtube.com/watch?v=aGHeWHD0uXg