दुनिया की सबसी ताकतवर संगठन में शामिल हुआ भारत चीन समेत पाकिस्तान के सूखे प्राण

आजादी के बाद से देश में लगातार कांग्रेस की ही सरकार रही, मगर देश को लूटने में लिप्त कोंग्रेसी नेताओं ने देश की तरक्की की ओर कभी कोई ख़ास ध्यान ही नहीं दिया, यही वजह है कि भारत को तीसरी दुनिया कहा जाने लगा था. मगर पीएम मोदी ने केवल चार ही वर्षों में भारत की तस्वीर बदलकर रख दी है. एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसे देख चीन को जबरदस्त झटका लगा है.

दुनिया के शक्तिशाली संगठन में शामिल हुआ भारत

पीएम मोदी के प्रयासों से भारत अब ऑस्ट्रेलिया ग्रुप का सदस्य बन गया है. यह ग्रुप केमिकल और बायलॉजिकल एजेंट्स के निर्यात पर अपने नियंत्रण के जरिए सुनिश्चित करता है कि इससे रासायनिक या जैविक हथियार न बन सके. परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के शामिल होने के लिए पिछले काफी वक़्त से कोशिश में लगे पीएम मोदी के लिए ये बड़ी सफलता के रूप में देखी जा रही है.

इस उपलब्धि से अप्रसार में भारत की दुनिया में हैसियत बढ़ेगी ओर साथ ही न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में सदस्यता के लिए भी भारत की दावेदारी और भी ज्यादा मजबूत होगी, जिसमें चीन पिछले काफी वक़्त से अड़ंगा लगा रहा है.

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस के साथ भारत भी सीना तान के खड़ा होगा अब

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ग्रुप एक अनौपचारिक संगठन है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले से हैं. पीएम मोदी की दोस्ती के चलते अमेरिका और फ्रांस काफी वक़्त से भारत को इस ग्रुप का मेंबर बनाने की वकालत कर रहे थे.

दरअसल सैन्य इस्तेमाल की संभावना वाले आइटम्स में भारत से सबसे ज्यादा निर्यात होने वाला आइटम केमिकल ही है, मगर ये कोई खतरे की बात नहीं क्योंकि भारत में इस पर नजर रखने की काफी अच्छी व्यवस्था है. अब ग्रुप में एंट्री मिलने से भारत को केमिकल और बायलॉजिकल एजेंट्स के वैश्विक कारोबार में दखल का मौका मिलेगा.

इस उपलब्धि के बाद भारत में फ्रांस के राजदूत अलेक्जेंडर जेगलर ने शुक्रवार को भारत को बधाई दी और इसे पीएम मोदी की कूटनीति की जीत कहा. यहाँ एक बात आपको और बता दें कि पिछले ही साल दिसंबर में पीएम मोदी के प्रयासों से भारत वासेनार अरेंजमेंट का मेंबर बना था.

भारत बनता जा रहा वैश्विक महाशक्ति

इस अरेंजमेंट का मकसद पारंपरिक हथियारों के साथ उन वस्तुओं और तकनीकों के प्रसार में पारदर्शिता और जिम्मेदारी लाना है, जिनका सैन्य इस्तेमाल हो सकता है. इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के ही कारण 2016 के जून में भारत मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का मेंबर भी बना था, जो मिसाइल, यूएवी और संबंधित तकनीक के प्रसार पर नजर रखता है.

इसका मेंबर बनने से भारत को उच्च मिसाइल तकनीक हासिल करने का रास्ता साफ हुआ था. जानकारों के मुताबिक़ अब वो दिन दूर नहीं जब भारत एनएसजी का सदस्य भी बनने जा रहा है. यानी जो काम कांग्रेस पिछले 60 वर्षों में नहीं कर सकी, वो काम मोदी ने केवल चार ही वर्षों में कर दिखाया.

ऐसे में ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि यदि 2019 में भी नरेंद्र मोदी के हाथ में सत्ता आयी, तो भारत चीन को पछाड़ कर एशिया का सबसे ताकतवर मुल्क बन जाएगा.

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इस आतंक के घर पर घुस कर मोदी सरकार ने कर दिखाया 56 इंच सीने की फौलादी ताक़त, देख वामपंथियों की भी फटी रह गयी आँखें

पीएम मोदी का 2014 में लिया हुआ संकल्प हर गांव हर घर में बिजली देना तेज़ी से पूरा हो रहा है. ऐसे-ऐसे गाँव जहाँ 70 साल से बिजली नहीं पहुंची थी, जिन्हे बल्ब क्या होता है ये तक नहीं पता था. ऐसे गांवों को मोदी सरकार की योजना के तहत बिजली दी गयी. तो वहीँ इस बार मोदी सरकार ने लाल आतंक के घर में घुसकर ऐतिहासिक और साहसी कदम उठाया है जिसे देख आप भी चौंक पड़ेंगे.

The resolution taken by PM Modi in 2014 is being completed fast in every village every household. In such villages where the electricity did not reach for 70 years, they did not know what the bulb was. Such villages were given power under the Modi government’s plan. So this time this time the Modi government has entered the house of the Red Terror and has taken historical and courageous steps which you will be surprised to see.


अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के गांव में 15 साल बाद बिजली पहुंची है. आपको बता दें सुकमा एक नक्सल प्रभावित इलाका हुआ करता था. लेकिन अब जवानों को खुली छूट और आधुनिक हथियार के साथ बुलेट प्रूफ जैकेट दिए गए हैं जिसके बाद लाल आतंकियों के घर मे घुसकर जवान उनका एनकाउंटर कर रहे हैं या वे खुद डर के आत्मसमर्पण कर रहे हैं.

According to the latest news now, electricity has reached the village of Sukma district of Chhattisgarh after 15 years. Let me tell you Sukma used to be a naxal affected area. But now the jawans have been given free exemption and bullet proof jackets with modern weapons, after which the young men are encroaching them by entering the house of the red warriors or they are surrendering themselves to fear.

नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में लोग बिजली जैसी सुविधाओं के लिए मोहताज थे. लाल आतंकियों के रहने से यहाँ जब भी बिजली पहुंचने की कोशिश की गयी नक्सलियों ने उसमे खलल डाला. नक्सलियों को विकास से सख्त नफरत है. ये उन मज़दूरों को भी मार देते हैं जो इनके गांव में पुल, सड़क, या रेल पटरी बिछाते हैं. यही वजह है कि मज़दूरों की भी सुरक्षा में CRPF की मज़बूत फाॅर्स को सुरक्षा के लिए तैनात करना पड़ता है.

Orang-orang di daerah yang terkena Naxal dikagumi karena fasilitas yang berhubungan dengan listrik. Di mana pun Teroris Merah tinggal, kapan pun orang Naxal berusaha mencapai kekuasaan, mereka mengganggu mereka. Naxal memiliki kebencian yang kuat untuk pengembangan. Mereka juga membunuh para pekerja yang memasang jembatan, jalan, atau rel kereta api di desa mereka. Inilah alasan mengapa ketakutan yang kuat terhadap CRPF harus dikerahkan untuk melindungi para pekerja.

जब भी बिजली पहुंचाने की कोशिश हुई नक्सलियों ने उसमें बाधा डाला. बिजली के तारों को उखाड़ फेंका और ट्रांसफॉर्मर फूंक दिए जिससे गांवों तक बिजली न पहुंचे, JCB मशीनों में आग लगा दी. नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र के चिंतलनाल गांव में 15 साल बाद बिजली पहुंची है. अब धीरे धीरे हर गांव से नक्सलियों को समाप्त किया जा रहा है और विकास स्थापित किया जा रहा है..

Whenever the Naxalites tried to disperse, Naxals obstructed them. Overthrow the electric wires and blow up the transformer, so that the villages did not get electricity, JCB set fire to machines. Power has reached 15 years in Chintnall village of Naxal-affected area. Now slowly the Naxalites are being eliminated from every village and development is being done.

याद दिला दें जब भी सुकमा जिले का नाम आता है तो लोगों को CRPF के शहीद जवान ज़रूर याद आते हैं. सुकमा जिले को नक्सियों के साथ मुठभेड़ के लिए जाना जाता है. यहाँ चालाकी से घात लगाकर नक्सलियों ने जवानों पर हमला बोला था. अप्रैल 2010 में नक्सियों ने सीआरपीएफ पर हमला कर दिया था जिसमें 75 जवान शहीद हो गए थे.

Remind whenever the name of Sukma district comes, then people definitely remember the CRPF’s martyr soldiers. Sukma district is known for its encounter with the Naxals. Naxalites attacked the soldiers by ambushing them here. In April 2010, the Naxals attacked the CRPF, in which 75 jawans were killed.

तो वहीँ गांव वालों का कहना है कि अपने गांव में बिजली की सुविधा मिलने के बाद हमें बहुत खुशी हो रही है. अब हम बिजली से मिलने वाली सारी सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे. हम अपने घरों में टीवी और फ्रिज इस्तेमाल कर सकते हैं.

So the villagers say that we are very happy after getting the facility of electricity in our village. Now we will be able to take advantage of all the power facilities available. We can use TVs and fridges in our homes.

आपको बता दें पीएम मोदी ने अपने 2014 के लक्ष्य को करीब करीब पूरा कर लिया है. ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत कुल 18,452 गांवों में से लगभग 2 प्रतिशत ही गांव ऐसे बचे हैं जहां बिजली पहुंचाई जानी बाकी है.

Let me tell you PM Modi has almost completed his 2014 goal. Rural Electrification Program under the Deendayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana, only about two percent of the total 18,452 villages are left where the electricity is yet to be provided.

ये गांव ऐसे हैं जहां आजादी के करीब 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए बिजली से वंचित सभी 18,452 गांवों को 1,000 दिनों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा था जो मई 2018 में पूरा हो रहा है.

These villages are such that even after 70 years of independence electricity was not reached. Addressing the nation on 15th August 2015, Prime Minister Narendra Modi had set a target of electrifying all 18,452 villages deprived of power in 1,000 days, which is being completed in May 2018.

बिजली मंत्रालय के गर्व पोर्टल के अनुसार, 31 मार्च तक कुल 18,452 गांवों में से 16,783 गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है. वहीं 1,204 गांव ऐसे हैं जहां कोई नहीं रहता जबकि 32 गांवों को चारागाह के रूप में चिन्हित किया गया है. अब केवल 433 गांव ही ऐसे बचे हैं जहां बिजली पहुंचाई जानी है। इन बचे गांवों में बिजली पहुंचाने का काम जारी है.

According to the proud portal of the Ministry of Power, till March 31, out of 18,452 villages, 16,783 villages have been provided power. There are 1,204 villages where no one lives, while 32 villages have been identified as pastures. Now only 433 villages are left where electricity is to be delivered. The work of generating power in these remaining villages continues.

चाहे दस घर हो या पचास हर गाँव देश का अहम् हिस्सा है, वोटबैंक की पॉलिटिक्स करने वालों को कभी ऐसे गांवों पर तरस नहीं आया. इसीलिए हमेशा उनके साथ भेदभाव हुआ. अभी कुछ महीने पहले ही महाराष्ट्र में समुद्र में टापू पर बसे गांव जिनमे 100 घरों को बिजली पहुंचाने का असंभव कार्य पूरा किया गया. समुद्र में बिजली की तारें बिछाकर बिजली पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा काम था. लेकिन अंततः लोगों के चेहरों पर मुस्कान थी.

Whether ten houses or fifty villages in every village is an integral part of the country, politicians of the vote bank have never felt sorry for such villages. That is why they have always been discriminated against. Just a few months ago, the impossible task of providing electricity to 100 households in the coastal villages of Maharashtra in the coastal areas of Maharashtra was completed. It was a very challenging and risky task to reach power by laying electric wires in the sea. But eventually people had a smile on their faces.

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दबंग भारत के बाहुबली मोदी जी ने गाड़ा झंडा, आया ऐसा भूचाल, अमेरिका,जापान,कोरिया में मचा गया हड़कंप..

नई दिल्ली : दुनिया भर में आज अचानक से बहुत बड़ा आर्थिक भूचाल खड़ा हो गया है. अमेरिका समेत देशभा रके शक्तिशाली देश इस आर्थिक तूफ़ान की चपेट में आ गए हैं लेकिन मोदी राज के चलते मज़बूत आर्थिक निति की वजह से आज भारत इस बड़े आर्थिक संकट को हँसते हँसते झेल रहा है.

New Delhi: A huge economic storm has suddenly emerged across the world today. A powerful country, including the United States, has been hit by this economic storm, but due to the powerful economic policy due to Modi’s rule, India is today laughing at this big economic crisis laughing.

दुनिया में आया आर्थिक भूचाल, दिग्गज देशों के छूटे पसीने,
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक अमेर‍िकी बाजार में पिछले 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट ने दुनिया भर के शेयर बाजार की हवा निकाल दी. जापान के शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स निक्केई 1,115 अंक यानि 5.2 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 21,567 के स्तर पर कारोबार करता देखा जा रहा है.वहीं हॉगकॉन्ग के प्रमुख इंडेक्स हैंग सेंग में 1,000 अंकों से अधिक यानी यानि 3.2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हो चुकी है. फिलहाल हैंग सेंग लुढ़ककर 31,240 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया है.

Economic storms, world-renowned sweat,
According to the big news now available, the biggest drop in the US market in the past 6 years has led to the worldwide market share of the stock market. The major index of Japan’s stock market, Nikkei, is seen to be trading at 21,567, with a loss of 1,115 points i.e., 5.2 percent. In Hong Kong’s main index, Hang Seng recorded more than 1,000 points, i.e., more than 3.2 percent. It’s done. Hang Seng is currently trading at a level of 31,240.

भारत ने गाड़ा झंडा
हालाँकि भारतीय बाजार ने अन्य देशों के मुकाबले कम गिरावट देखी है, फिलहाल सेंसेक्स 1046.88 अंकों की गिरावट के साथ 33,681.94 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. वहीं, निफ्टी भी फिलहाल 10343 के स्तर पर है. इसमें 323.55 अंकों की गिरावट देखने को मिल रही है. अगर यही सेंसेक्स जो की कांग्रेस के वक़्त था अगर 22000 पर होता तो आज भारत में भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया होता. लेकिन मज़बूर आर्थिक फैसलों के कारण अभी भी 33000 के पार खड़ा है ओर विदेशी मुद्रा भंडार 417 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है.

India flagged the flag
Although the Indian market has witnessed lesser fall than other countries, the Sensex is currently trading at a level of 33,681.94 with a decline of 1046.88 points. At the same time, the Nifty is currently at the level of 10343. There is a decline of 323.55 points in this. If this Sensex, which was at the time of Congress, would have been 22000, then there would have been a financial crisis in India today. But due to strong economic decisions, still standing across 33000 and foreign exchange reserves reached record level of $ 417 billion.

एशिया के बाजार में मची ज़बरदस्त खलबली
इन एशियाई बाजारों के अलावा कोरियाई बाजार का प्रमुख इंडेक्स कोस्पी भी 2.8 फीसदी लुढ़का है और स्ट्रेट्स टाइम्स में भी 2.3 फीसदी से अधिक की गिरावट देखने को मिल रही है. ताइवान के इस प्रमुख इंडेक्स में 310 अंकों की यानि 2.9 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. फिलहाल स्ट्रेट्स टाइम्स 10,635 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया है.वहीं, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 अंक गिरकर खुला है. इसमें 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.

Strong baffle in Asia market
In addition to these Asian markets, the Korean market’s major index Kospi has also rolled 2.8 per cent and the Straits Times has seen a decline of more than 2.3 per cent. This major index of Taiwan is showing a decline of 310 points i.e. 2.9 percent. At present, the Straits Times has been trading at the level of 10,635.Only, Australia’s S & P / ASX is down 200 points. It has seen a decline of 3 per cent.

अमेरिका में आयी 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट
आपको बता दें 2011 के बाद से अमेरिकी बाजार डाउ जोन्स की ये 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट है. सोमवार को डाउ जोन्स इंडस्ट्रीयल एवरेज 1175 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ. इतिहास में यह डाउ जोन्स में एक दिन में आई यह सबसे बड़ी गिरावट है.अमेरिकी बाजार के बड़ी गिरावट के साथ बंद होने का असर एश‍ियाई बाजार पर साफ नजर आ रहा है. एश‍ियाई बाजारों में भी कमजोरी नजर आ रही है. मंगलवार को इस कमजोर का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल रहा है.

America’s biggest decline in 6 years
Tell us, since 2011, the US market Dow Jones has been the biggest fall in this 6 years. Dow Jones Industrial Average closed at 1175 points on Monday. This is the biggest drop in the history of Dow Jones in one day. The impact of closure with the big fall in the US market is clearly visible on the Asian market. There is also a weakness in Asian markets. On Tuesday, the impact of this weakness is also seen on the domestic market.

बॉन्ड यील्ड बढ़ने के डर से शुक्रवार को भी अमेरिकी बाजार में गिरावट देखने को मिली. दरअसल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आशंका जताई जाती है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी. इससे डाउ जोन्स 666 अंक टूटा था.यह गिरावट लंबे समय से चलने वाले बाजार की स्थिरता के लिए चिंता का विषय है. 2016 से डाउ जोन्स विश्व का सबसे बड़ी वैश्विक बिक्री था, लेकिन एशिया से यूरोप, यूरोप से अमेरिका के बाजारों को मुद्रास्फीति की चिंताओं ने हिला दिया.

Ketakutan hasil obligasi juga menunjukkan penurunan di pasar AS pada hari Jumat. Bahkan, peningkatan imbal hasil obligasi diperkirakan akan meningkatkan suku bunga. Karena ini Dow Jones 666 rusak.Penurunan ini adalah masalah perhatian untuk keberlanjutan pasar jangka panjang. Dow Jones adalah penjualan global terbesar di dunia sejak 2016, tetapi pasar Asia dari Eropa, Eropa, Eropa telah mengguncang kekhawatiran inflasi.

समझदारी के साथ बाजार में पैसा लगाइये
तो वहीँ अब इस बड़े आर्थिक संकट को लेकर जानकारों का मानना है कि निवेशकों को सोच समझकर बाजार में फिलहाल निवेश करना चाहिए. उनका कहना है कि अभी गिरावट का दौर जारी और यह दौर कुछ दिन और चल सकता है, इसलिए सभी को समझदारी के साथ बाजार में पैसा लगाना चाहिए.

Make money in the market with sensible
So, now, about this big economic crisis, experts believe that investors should think and invest in the market right now. They say that the continuation of the fall continues and this period can last for a few days, so everyone wisely should invest money in the market

एक तरह से देखा जाय तो अमेरिका की बाजारों के लिए सोमवार का दिन काला दिवस की तरह साबित हुआ है। कल सोमवार को अमेरिकी बाजारों में 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। इस गिरावट के साथ ही अमेरिकी बाजारों ने पिछले एक साल की सारी बढ़त एक दिन में गंवा दी। अमेरिकी बाजारों का एसएंडपी 500 इंडेक्स और डाओ जोंस इंडस्ट्रीयल इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा नीचे गिर गया था.

Di satu sisi, hari Senin untuk pasar Amerika telah terbukti seperti hari yang gelap. Pada hari Senin, penurunan terbesar 6 tahun di pasar AS tercatat. Dengan musim gugur ini, pasar AS kehilangan semua satu tahun terakhir dalam satu hari. Indeks S & P 500 dari pasar AS dan indeks industri Dow Jones turun lebih dari 4 persen.

In a way, Monday’s day for America’s markets has proven like a black day. On Monday, the biggest decline of 6 years in the US markets was recorded. With this fall, US markets lost all the past one year in one day. The S & P 500 index of US markets and the Dow Jones industrial index fell more than 4 percent.

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बड़ी खबर: PM मोदी के आने के बाद देखिये कैसे फर्क आ गया इन सभी देशों के साथ…

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की बैठक में हिस्सा लेने जल्द ही स्विट्जरलैंड के दावोस जाएंगे, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के पीएम शाहिद खाकन अब्बासी से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) विजय गोखले ने बताया कि प्रधानमंत्री की दावोस यात्रा बेहद संक्षिप्त होगी, महज 24 घंटे के लिए। जिस समय मोदी वहां होंगे, उस समय ट्रंप वहां नहीं होंगे। ऐसे में ट्रंप से उनकी मुलाकात नहीं हो पाएगी। जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मिलने का उनका कोई कार्यक्रम नहीं है।

गोखले ने यह भी बताया कि पीएम मोदी और पाकिस्तान के नए पीएम की मुलाकात की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री का संबोधन 23 जनवरी को होगा। इससे पहले 22 जनवरी को वह ग्लोबल सीआईओ के राउंडटेबल सम्मेलन को संबोधित करेंगे। फिलहाल इसमें 60 सीईओ के हिस्सा लेने की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें 20 भारतीय हैं।

सम्मेलन में भारत की ओर से योगाचार्य भी आकर्षण होंगे। इसे विश्व आर्थिक मंच के नियमित कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यहां से 2 एक्सपर्ट जाएंगे, जो हर रोज क्लासेज उपलब्ध कराएंगे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद से हीं नरेंद्र मोदी ने अपनी नीतियों और नजरिए से पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं दुनिया के सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेताओं में शामिल हैं। दुनिया के तमाम देशों से भारत के संबंध इससे पहले इतने अच्छे कभी नहीं रहे। अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, चीन और इजरायल समेत तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते रहे हैं।

भारत के 6 दिवसीय दौरे पर आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और कार्यशैली के कायल हो गए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी पूरी तरह से भारत के विकास के लिए समर्पित हैं। उन्होंने पीएम मोदी को महान देशभक्त बताया और कहा कि पीएम मोदी वही करते हैं, जो भारत के लिए अच्छा होता है।

दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर चुके हैं। पिछले वर्ष जून में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद यात्रा की थी। इस दौरान दोनों नेताओं में मुलाकात हुई और फिर दोनों ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी का अपना सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे।

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में शामिल हैं। पीएम शिंजो आबे भी कई मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं। पिछले वर्ष सितंबर में शिंजो आबे ने जब भारत का दौरा किया था, तब अहमदाबाद में पीएम मोदी ने उनके साथ रोड शो किया था। इस मौके पर दोनों नेताओं ने अहमदाबाद-मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर उन्होंने पीएम मोदी की प्रगतिशील सोच की तारीफ करते हुए है कि अब दोनों देशों का सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय नहीं रहा है, बल्कि यह सामरिक और वैश्विक साझेदारी में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानव अधिकार और कानून का नियम जैसे बुनियादी मूल्यों को साझा करते हैं। उस वक्त आबे ने अपने भाषण में जय इंडिया, जय जापान का नारा भी दिया था।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ पीएम मोदी के मजबूत संबंध जगजाहिर हैं। 2015 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। भारत आने से पहले ओबामा ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की थी, उन्होंने चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर का जिक्र करते हुए कहा था कि यह भारतीयों की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। ओबामा ने कहा था कि पीएम मोदी का विजन एकदम साफ है और उनकी ऊर्जा प्रभावित करने वाली है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी विकास के रास्ते में रोड़े अटकाने वाले मुद्दों को फौरन हटाने को तैयार हो जाते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना कर चुके हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में जब टर्नबुल भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत तरक्की और विकास के असाधारण रास्ते पर बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई पीएम मैल्कम टर्नबुल ने कहा कि हमारा भारत के साथ मजबूत रिश्ता है और इसे और मजबूत करना है। हम इतिहास और मूल्यों के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं।

चीन और उसके नेता प्रधानमंत्री मोदी की ताकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कई मौके पर पीएम मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं और देश ही नहीं बल्कि वैश्विक मसलों पर उनके विचारों से सहमति जता चुके हैं। पीएम मोदी ने 2014 में जब देश की बागडोर संभाली थी, उसी वर्ष सितंबर में चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा हुआ था। उस दौरे में पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के स्वागत में अहमदाबाद में साबरमती के तट पर स्वागत के विशेष इंतजाम किए थे। पिछले वर्ष जुलाई में जर्मनी के हैमबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिक्स देशों की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प को सराहनीय बताया था।

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https://youtu.be/LvTwV08DsAo

https://youtu.be/gxWa3r-mlh0

ताजा खबर: उत्तर कोरिया ने जापान पर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, अमेरिका समेत जापान में हाहाकार !

नई दिल्ली: दुनियाभर की चेतावनियों को धता बता कर उत्तर कोरिया ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया ने कहा कि उसने एक नये अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जिसकी जद में पूरा अमेरिकी महाद्वीप आ गया है. सरकारी टेलीविजन द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने ह्वासोंग-15 मिसाइल का परीक्षण करने की घोषणा की. अमेरिका ने इस परिक्षण पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए इसे दुनिया के लिए खतरा बताया है. अमेरिकन समय के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने बुधवार की सुबह बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया.

New Delhi: Defying the warnings from around the world, North Korea has once again tested ballistic missile. North Korea, equipped with nuclear weapons, said that he has successfully tested a new intercontinental ballistic missile that has reached the entire American continent. According to the information provided by the official television, the North Korean leader Kim Jong-un announced the test of the Hwang-15 missile. While expressing strong reaction to the test, the US has described it as a threat to the world. According to American time, North Korea tested ballistic missile on Wednesday morning.

दक्षिण कोरिया की मीडिया के मुताबिक, दक्षिणी प्योंगान प्रांत से इस मिलाइल को जापान के सागर में छोड़ा गया था. इसका धमाका दूर तक सुना गया. यह एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल थी. उत्तर कोरिया ने भी ताल ठोकते हुए कहा कि अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ह्वासोंग-15 का परीक्षण सफलता पूर्वक हुआ है.

According to the media of South Korea, this millet was left in the Sea of Japan from the southern Pyongyan province. Its blast heard far far away. It was an intercontinental ballistic missile. North Korea also said that the trial of the intercontinental ballistic missile (ICBM) Hwasong-15 has been successful.

जापान के रक्षा मंत्री ने कहा कि यह मिसाइल उनके विशेष आर्थिक जोन में गिरी है. जापान ने भी इस परिक्षण की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आपात बैठक बुलाई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी किम जोंग उन की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि हम संभाल लेंगे राजनीतिक विशेषज्ञ इसे उत्तरी कोरिया की अमेरिका को खुली चुनौती मान कर चल रहे हैं. बता दें कि उत्तर कोरिया अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए लगातार परमाणु परिक्षण कर रहा है. उत्तर कोरिया ने पिछले साल नौ सितंबर को पांचवां परमाणु परीक्षण किया था. उसने एक सप्ताह पहले ही छठा परीक्षण किया और दावा किया कि यह एक हाइड्रोजन बम था जो मिसाइल पर लगाया जा सकता है.

The Defense Minister of Japan said that the missile has fallen into its special economic zones. Japan has also convened an emergency meeting condemning this test in strong words. American President Donald Trump also acknowledged the challenge of Kim Jong, who said, “We will handle it, political analysts are treating it as an open challenge to North Korea.” Explain that North Korea is continuously testing nuclear while increasing its military strength. North Korea conducted a fifth nuclear test on September 9 last year. He did a sixth test a week ago and claimed that it was a hydrogen bomb that could be mounted on the missile.

इस कदम की वैश्विक स्तर पर निंदा हुई. इसके बाद इस साल जुलाई में भी दो अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था.

अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मेटिस ने उत्तरी कोरिया के इस कदम को पूरी दुनिया के लिए ख़तरा बताया है. इससे पहले सितंबर में भी उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन एक परीक्षण कर चुके हैं. बता दें कि अमेरिका कई बार उत्तर कोरिया को चेतावनी दे चुका है कि वह परमाणु परीक्षण या अन्य प्रकार के सैन्य परीक्षण ना करे. ऐसा करना उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त महासभा मे मौजूद नेताओं के समक्ष 19 सितंबर को चेतावनी दी कि अगर किम जोंग उन का परमाणु हथियारों से लैस शासन अपने पड़ोसियों के लिए खतरा बना रहता है तो अमेरिका को उत्तर कोरिया को तबाह करना पड़ सकता है.

This step has been condemned globally. After this, in July this year, two intercontinental ballistic missiles were tested.

US Defense Secretary James Matis called North Korea’s threat to the whole world. Earlier in September, even North Korea’s ruler Kim Jong has done a test. Tell us that America has warned North Korea many times that it does not conduct nuclear tests or other types of military tests. This may prove to be harmful for him. President Donald Trump warned on September 19 before the leaders present in the United Nations General Assembly that if Kim Jong, his nuclear armed government remains a threat to its neighbors, then the United States may have to destroy North Korea.

दुनियाभर की चेतावनियों को धता बता कर उत्तर कोरिया ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. अमेरिका ने इसे दुनिया के लिए खतरा बताया है.

Defying the warnings from around the world, North Korea has once again tested ballistic missiles. America has called it a threat to the world.

खास बातें
बुधवार तड़के उत्तर कोरिया ने किया बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण
दक्षिणी प्योंगान प्रांत से मिसाइल जापान के सागर में दागी गई थी
मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक जोन गिरी, बुलाई आपात बैठक

Special things
North Korea did ballistic missile test Wednesday
Missile from southern Pyongyon province was torn into the Sea of Japan
Missile Special Economic Zone Zone of Japan, convening emergency meeting

यह भी देखें :

https://youtu.be/KZmJrB0_U64

source aajtak