दलित हिंसा पर PM मोदी का ठनका माथा BSP पर लिया ये बड़ा एक्शन ,जेल जाएंगे ये बड़े नेता,राहुल, मायावती हैरान

नई दिल्ली : दलित आंदोलन की आड़ में कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अपनी रोटियां सेंकी और पूरे देश में दंगे-फसाद भड़काए. ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब विपक्ष ने आम लोगों के आन्दोलनों का फायदा उठा कर दंगे-फसाद ना करवाए हों. इससे पहले महाराष्ट्र में ‘शौर्य दिवस’ मना रहे दलितों को भड़का कर हिंसा का रूप दिया गया था, वहीँ मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन को भी हिंसक बना दिया गया था. लाशों की राजनीति करने वाली ऐसी पार्टियों के खिलाफ अब मोदी सरकार ने सख्त एक्शन लिया है.

New Delhi: Under the guise of the Dalit movement, some political parties have snatched their bread and rioted all over the country. This is not the first time that the Opposition has taken advantage of common people’s movements to get riots and rioting. Earlier, in Maharashtra, the ‘Shaurya Diwas’, who had been violating the Dalits, had been converted into violence, that too, the peasant movement in Madhya Pradesh was made violent. Now the Modi Government has taken tough action against those parties who have been involved in politics of corpses.

हिंसा के लिए उकसाने वाले कांग्रेस व् बसपा नेता जाएंगे जेल
ये बात खुलकर सामने आ चुकी है कि दलित आंदोलन को हाईजैक करके कांग्रेस और बसपा ने देशभर में हिंसा फैलाई. अब मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि आंदोलन के नाम पर दंगा फैलाने वाले नेताओं को सजा दी जायेगी. अनुसूचित जाति आयोग अब दलित हिंसा की जांच करेगा और दोषी नेताओं को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा.

Beside Congress and BSP leaders who are provocative for violence will go to jail
It is openly exposed that by hijacking the Dalit movement, Congress and BSP have spread violence across the country. Now the Modi Government has decided that the name of the movement will be punished by the leaders who spread rioting. The Scheduled Castes Commission will now examine the Dalit violence and the guilty leaders will be brought behind the bars.

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया ने कहा है कि सोमवार को देश के कई राज्यों में दलित आंदोलन के खिलाफ जो हिंसा हुई, उसके लिए कांग्रेस और बीएसपी जिम्मेदार है. कठेरिया ने कहा कि दलितों का आंदोलन हमेशा शांतिपूर्ण होता है, लेकिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर देशभर में जिस तरह से हिंसा हुई उसे यह बात साफ है कि दलितों के आंदोलन के पीछे हिंसा भड़काने की साजिश रची गई. अनुसूचित जाति आयोग हिंसा की जांच करेगा.

Chairman of the Scheduled Castes Commission Ramshankar Katheria has said that the Congress and the BSP are responsible for the violence against many Dalits in many states on Monday. Katheria said that the movement of dalits is always peaceful, but the manner in which violence took place across the country on the verdict of Supreme Court on Monday it is clear that conspiracy to incite violence behind the Dalit movement was created. The Scheduled Castes Commission will investigate the violence.

कांग्रेस ने की लाशों की राजनीति
कठेरिया ने कहा कि राहुल गांधी ने ट्वीट करके जिस तरह का भड़काऊ बयान दिया, जिसमें कहा गया था कि बीजेपी और आरएसएस के डीएनए में दलित विरोध है. इससे पता चलता है कि इन पार्टियों की मानसिकता क्या है. उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि आजादी के बाद सबसे लंबे समय तक कांग्रेस ने देश पर राज किया है और कांग्रेस ने दलितों के लिए कुछ नहीं किया, इसके बावजूद राहुल गांधी दलितों की दयनीय स्थिति के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

Congress’s corpses politics
Katheria said that the kind of provocative statement made by Rahul Gandhi tweeted, in which it was said that the DNA of BJP and RSS DNA were opposed. This shows what is the mentality of these parties. He said that it is astonishing that after the independence, Congress has ruled the country for the longest time and Congress has not done anything for the dalits, despite this Rahul Gandhi is blaming the BJP for the miserable situation of the Dalits.

कठेरिया ने माना कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका और पहले दायर की गई होती तो उस स्थिति संभाल सकती थी. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में कुछ देरी हुई हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस अहम फैसले के बारे में गहराई से अध्ययन करने के बाद ही अगला कदम

Katheria admitted that a review petition against the Supreme Court decision and if it was filed earlier, could handle that situation. He said that there may be some delay in filing a reconsideration petition, but only after studying deeply about this important decision of the Supreme Court

दंगा फैलाने वाले नेताओं के खिलाफ सरकार के कड़े तेवर
अनुसूचित जाति के अध्यक्ष कठेरिया ने कहा हिंसा किस तरह से भड़की और इसके पीछे कौन लोग थे, इसकी आयोग जांच करेगा और जांच की निगरानी वह खुद करेंगे. उन्होंने कहा कि बहुत जल्दी आयोग जांच पूरी करके हिंसा के दोषी लोगों के बारे में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा.

Strike of government against riot leaders
Scheduled Caste president Katheria said that how the violence would spread and the people behind it, the commission would investigate and monitor the investigation itself. He said that by completing the commission inquiry very soon, he will present his report about the people guilty of violence.

बता दें के यूपी के मेरठ में आगजनी करने वाले बाहुबली नेता और बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है. बताया जा रहा है कि इस दबंग और बाहुबली नेता ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पुलिस चौकी तक फूंक डाली थी. इसकी पत्नी सुनीता वर्मा शहर की मेयर भी है.

Let’s say the Bahubali leader, who was the arsonist in Meerut, UP and former BSP MLA Yogesh Verma has already been taken into custody. It is being told that this dabang and Bahubali leader had teamed up with his supporters to the police post. His wife, Sunita Verma, is also the mayor of the city.

दंगाई नेताओं को किसी कीमत पर बक्शा नहीं जाएगा
सुनीता वर्मा ने अपने पद का फायदा उठाते हुए अपने पति को बचाने की काफी कोशिश भी की मगर योगी सरकार में उसकी एक ना चली और उसके पति को जेल में डाल दिया गया. अपने पद के गुरूर में सुनीता वर्मा बिना किसी पर्ची के ही जेल में अपने पति से मिलने भी जा पहुंची मगर योगी राज में उनकी एक ना चली और बिना पर्ची के उन्हें मिलने नहीं दिया गया.

Riot leaders will not be expelled at any cost
Sunita Verma took a lot of effort to save her husband while taking advantage of her position, but in the Yogi Sarkar, she did not leave one and her husband was jailed. In her post of Gurur, Sunita Verma also went to meet her husband in the jail without any slips, but in the Yogi Raj, one of her absences did not go unnoticed and she was not allowed to meet her.

मेयर साहिबा ने काफी मिन्नतें भी कीं, मगर जेल अधिकारियों ने उन्हें बैरंग वापस लौटा दिया. अब दलित हिंसा की विस्तार से जांच की जायेगी और इसमें शामिल कांग्रेस व् बसपा के नेताओं को जेल भेजा जाएगा. वरना ये नेता कभी सुधरेंगे नहीं और हर बार इसी तरह देश को हिंसा की आग में झोंकते रहेंगे और समाज में फूट डालते रहेंगे.

Mayer Sahib also made a lot of revelations, but the prison officials returned him back. Now dalit violence will be examined in detail and the Congress and BSP leaders involved in it will be sent to jail. Otherwise, these leaders will never improve, and every time this way, the country will continue to bark in the fire of violence and will continue to divide society.

यह भी देखे

https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

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दलित हिंसा के मास्टरमाइंड का नाम आया सामने! योगी ने लिया एक्शन, मायावती-अखिलेश के उड़े होश

मेरठ : सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. लोकतंत्र में विरोध करना पूरी तरह से जायज भी है. मगर लाशों की राजनीति करने वाले कुछ गिद्धों ने दलितों के आंदोलन को हाईजैक करके इसे हिंसक रूप दे दिया है. हिंसा फैलाकर ऐसे नेता अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने में लगे हैं और बदनामी दलित आंदोलन की हो रही है. बाकी राज्यों में भले ये सब चल जाता हो, मगर योगी आदित्यनाथ के राज में ये सब नहीं चलने वाला.

Meerut: People have come to the streets in protest against the change in the SC-ST Act by the Supreme Court. Opposition in democracy is also justified. But some vultures doing corpses of the corpses have hijacked the movement of the Dalits and made it violent. By spreading violence, such leaders are engaged in straightening their political owls and the infamous Dalit movement is being done. All these may go on in the rest of the states, but in the reign of Yogi Adityanath, all these things are not going to run.

राजनीति के लिए बाहुबली बसपा नेता ने जलाया मेरठ!
खबर है कि सीएम योगी ने हिंसा फैलाने वालों के साथ सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं. बिना किसी वोटबैंक की परवाह किये सीएम योगी अपने प्रदेश की सुरक्षा में लगे हुए हैं. यूपी पुलिस भी एक्शन में है और हिंसा फैलाने के मामले में यूपी पुलिस ने पूर्व विधायक व बसपा नेता योगेश वर्मा गिरफ्तार कर लिया है.

Bahubali BSP leader for politics burnt to Meerut!
It is reported that the CM Yogi has ordered to deal with the violence spread strictly. Regardless of the vote bank, the CM Yogi is engaged in the security of his state. UP police is also in the action and in the case of violence, UP Police arrested former MLA and BSP leader Yogesh Verma.

मेरठ की एसएसपी मंजिल सैनी ने खुलासा किया है कि पूर्व विधायक और बसपा नेता योगेश वर्मा ही शहर में हिंसा फैलाने के मुख्य साजिशकर्ता है. दलित आंदोलन को हाईजैक करके इसी नेता ने मेरठ में दंगे फैलाये. भीड़ को उकसाया और अपने गुंडों की मदद से पुलिस चौकी फूँक डाली.

SSP Manzil Saini of Meerut has revealed that former MLA and BSP leader Yogesh Verma is the main conspirator for spreading violence in the city. Hijacking the Dalit movement, this leader spread riot in Meerut. The mob provoked the crowd and threw a police checkpoint with the help of their goons.

लाठी चार्ज करके पुलिस ने धर दबोचा!
आम लोगों को भी नहीं बक्शा गया और इस नेता के गुंडों ने आम लोगों की गाड़ियां तक जला दीं. राजनीति के चक्कर में पूरे मेरठ को जला डालने पर उतारू इस नेता के गुंडों ने कंकरखेड़ा की अंबेडकर रोड पर एसएसपी और डीएम की गाड़ी पर पथराव भी किया. जिसके बाद पुलिस ने बीएसपी नेता योगेश वर्मा को उसके गुंडों समेत गिरफ्तार कर लिया.

Charged by the sticks, the police caught!
Even the common people were not spared and this leader’s goons burnt the carts of ordinary people. The leader of the leader, who was forced to burn entire Meerut in the light of politics, also carried stones at SSP and DM’s car on Ambedkar road of Kankarkheda. After which the police arrested BSP leader Yogesh Verma, along with his goons.

जमीनों पर अवैध कब्जे व् गुंडागर्दी के लिए कुख्यात बीएसपी नेता!
बता दें कि बसपा के का नेता योगेश वर्मा एक बाहुबली नेता के रूप में जाना जाता है और इलाके में गुंडागर्दी, दादागिरी करने के लिए कुख्यात है. 2007 में योगेश वर्मा पहली बार बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बना था. योगेश वर्मा दूसरों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने के लिए भी कुख्यात है.

Notorious BSP leader for illegal possession and felony on land!
Tell that the BSP leader Yogesh Verma is known as a Bahubali leader and is notorious for felony, grandfathering in the area. In 2007, Yogesh Verma made the MLA for the first time contesting the election on the BSP ticket. Yogesh Verma is also notorious for illegal occupation of others’ land.

रासुका के अलावा कई अन्य धाराओं में गिरफ्तार!
योगी राज में क़ानून की सत्ता चलती है, लिहाजा पब्लिक को परेशान करने वाले, पब्लिक की संपत्ति को जलाने वाले इस गुंडे नेता व् उसके सभी गुंडे समर्थकों पर रासुका के साथ बवाल, आगजनी, पथराव, लूटपाट व तोड़फोड़ की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा. योगी के तेवरों को देख कर साफ़ जाहिर है कि ये दबंग नेता अब लम्बे वक़्त के लिए जेल जाएगा और इसकी जमानत तक नहीं होगी.

Apart from Rasuka, arrested in several other streams!
In the Yogi Raj, the rule of law goes on, therefore, a case will be registered against the rowdy, arson, stone pelting, robbery and sabotage along with Rasuka on this bully leader and all his hideous supporters who are harassing the public, causing the public’s assets to be burnt. . Seeing the yogi’s tactics, it is clear that this dreaded leader will now go to jail for a long time and its bail will not be there.

वहीँ सोशल मीडिया पर योगी की वाहवाही हो रही है. लोगों ने ट्वीट करके योगी से गुहार लगाई है कि जिस तरह यूपी में अपराधियों व् बदमाशों का एनकाउंटर किया जा रहा है. उसी तरह बीएसपी के इस बाहुबली गुंडे नेता का भी एनकाउंटर कर दिया जाए. वहीँ कुछ अन्य लोगों ने योगी को उनके सख्त एक्शन के लिए काफी सराहा है.

The same is being praised by the Yogi on social media. People have tweeted the Yogi tweeting that the way criminals and miscreants are being investigated in UP. Likewise, this Bahubali goons leader of the BSP should be encroached too. Some others have appreciated the Yogi for his strict action.
यह भी देखे
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BREAKING:ज़बरदस्त घमासान के बाद राज्यसभा चुनाव के आये चौंकाने वाले नतीजे,2019 के चुनाव जीतने के मनसूबे पर फिरा पानी

ने के मनसूबे को लगा झटका

इस जीत के साथ बीजेपी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार का बदला ले लिया है. राज्यसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद बुआ-भतीजे (साप-बसपा) के बीच हुए गठबंधन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं.

दिनभर चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद यहां देर शाम वोटों की गिनती शुरू हुई. गिनती शुरू होते ही बीजेपी ने आठ सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर ली. इसके बाद मुकाबला बीजेपी के 9वें उम्मीदवार और बीएसपी के भीमराव अंबेडकर के बीच था, लेकिन अनिल अग्रवाल ने दूसरी वरियाता के वोटों में भीमराम को मात दे दी. समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार जय बच्चन ने 38 मत हासिल करके जीत हासिल की है.

बसपा उम्मीदवार की जाएगी अंतरात्मा

उन्नाव जिले के बसपा विधायक अनिल ने मतदान के बाद अंतरात्मा की आवाज पर भाजपा के प्रत्याशी को वोट देने की बात कही और बोले वह अंतरात्मा से आवाज आने के बाद अपने को रोक नहीं सके.

बीजेपी के उम्मीदवार अरुण जेटली, अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, विजय पाल तोमर, कांता कर्दम, अशोक वाजपेयी, हरनाथ यादव, सकलदीप राजभर और अनिल अग्रवाल ने जीत दर्ज की है.

दूसरी तरफ बैलेट पेपर पर हुए विवाद के बाद उत्तर प्रदेश, झारखंड और कर्नाटक में थोड़ी देर के लिए गिनती रोक दी गई थी। हालांकि अब फिर से गिनती शुरू हो चुकी है.हालांकि झारखंड में एक-एक सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीत मिली है.

प्रात: नौ बजे शुरू हुआ मतदान निर्धारित समय चार बजे से लगभग एक घंटा पूर्व तीन बजे ही समाप्त हो गया। तीन वोट नहीं पड़े। इनमें दो विधायक सपा के हरिओम यादव और बसपा के मुख्तार अंसारी, जेल में बंद होने के कारण मतदान नहीं कर सकें.

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अभी-अभी UP राज्‍यसभा चुनाव में मिली हार से भौखलाई BSP, ने BJPको लेकर दे डाला ये विवादित बयान

नई दिल्ली: राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जहां बीजेपी जश्न मना रही है, वहीं चुनाव में मिली हार के बाद बहुजन समाज पार्टी निराश है. यूपी उपचुनाव के नतीजे आने के बाद बीएसपी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि बीएसपी के प्रत्याशी को हराने के लिए मुख्तार अंसारी को वोट डालने से रोका गया. उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी को वोट डालने के लिए कोर्ट ने इजाजत दे दी थी, लेकिन उनको जेल डालकर वोट नहीं डालने दिया गया. सतीश चंद्र मिश्रा ने बीजेपी पर धन और सत्ता के बल पर धांधली का आरोप लगाया है.

BJP को बताया दलित विरोधी
बीएसपी के महासचिव सतीश मिश्रा ने बीजेपी को दलित विरोधी बताया. उन्होंने कहा कि हमने भीमराव अंबेडकर को खड़ा किया था, बीजेपी को इस नाम से ही चिढ़ है. यही वजह है कि उसने पार्टी प्रत्याशी को हराने के लिए हर हथकंडा अपनाया.

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बीजेपी ने जोर-जबरदस्ती कर लिया वोट
बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने बीजेपी पर गंभीर लगाते हुए कहा कि इन्होंने हमारे विधायक और दूसरे दलों के विधायकों के साथ जोर-जबरदस्ती करके वोट लेने का काम किया गया. इसलिए हम हारे और वो अपने 9वें सदस्य को जीतवाने में कामयाब हुए.

10वीं सीट के लिए थी काटे की टक्कर
आपको बता दें कि यूपी राज्यसभा चुनाव के लिए 10वीं सीट के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. इस सीट पर बीजेपी के अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अंबेडकर के बीच कांटे की टक्कर थी. इस पर बीजेपी ने जीत दर्ज की. गौरतलब है कि पहली वरीयता में बीजेपी के आठ विजयी उम्मीदवारों को 39-39 वोट मिले. सपा की जया बच्चन को 38 वोट मिले. पहली वरीयता की गिनती में दसवीं सीट के लिए बसपा के भीमराव अंबेडकर को 33 वोट मिले और बीजेपी के अनिल अग्रवाल को 22 वोट मिले. इसके बाद ही साफ हो गया था प्रचंड बहुमत वाली बीजेपी की दूसरी वरीयता में जीत तय है.

दो घंटे देरी से शुरू हुई थी गिनती
राज्यसभा चुनाव में वोटों की गिनती दो घंटे देर से शुरू हुई. दरअसल सपा और बसपा ने आरोप लगाया कि सपा के नितिन अग्रवाल और बसपा के अनिल सिंह ने पार्टी को बिना बताए क्रॉस वोटिंग की. लिहाजा उनके वोट अवैध घोषित होने चाहिए. इसके साथ ही सपा के विधायक राजेश यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष के चार बैलट पेपर फाड़े गए हैं. इसके बाद चुनाव आयोग ने फुटेज मंगवाया. जांच के बाद आयोग ने नितिन अग्रवाल और अनिल सिंह के वोट को वैध करार दिया. साथ ही बैलट फाड़ने वाले आरोप को भी खारिज कर दिया.

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ब्रेकिंग:UP राज्यसभा चुनाव : BJP ने लिया उपचुनाव की हार का बदला, बुआ-बबुआ के गठबंधन को लगा तगड़ा झटका..

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर हुए चुनावों में से बीजेपी ने 9 सीटों पर जीत हासिल की है. सपा की जया बच्चन ने भी जीत दर्ज की है. मायावती का एकमात्र उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर बीजेपी के अनिल अग्रवाल के हाथों हार गए. इस जीत के साथ बीजेपी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार का बदला ले लिया है. राज्यसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद बुआ-भतीजे (साप-बसपा) के बीच हुए गठबंधन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं.

Lucknow: Out of the 10 seats in the Rajya Sabha elections in Uttar Pradesh, BJP has won 9 seats. Jaya Bachchan of SP has also won. Mayawati’s only candidate Bhimrao Ambedkar lost to BJP’s Anil Agarwal. With this victory, BJP has taken revenge for the defeats in the by-elections in Gorakhpur and Phulpur Lok Sabha seats. After the defeat in the Rajya Sabha elections, the alliance between the nephew (snakebazar) has been questioned.

दिनभर चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद यहां देर शाम वोटों की गिनती शुरू हुई. गिनती शुरू होते ही बीजेपी ने आठ सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर ली. इसके बाद मुकाबला बीजेपी के 9वें उम्मीदवार और बीएसपी के भीमराव अंबेडकर के बीच था, लेकिन अनिल अग्रवाल ने दूसरी वरियाता के वोटों में भीमराम को मात दे दी. समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार जय बच्चन ने 38 मत हासिल करके जीत हासिल की है.

Counting of votes began late in the evening after the highway dance drama. As the count started, BJP easily won eight seats. After this the contest was between the BJP’s 9th and BSP’s Bhimrao Ambedkar, but Anil Agarwal defeated Bhimaram in the second verbal vote. Samajwadi Party candidate Jai Bachchan has won by winning 38 votes.

बीजेपी के विजयी चेहरे
बीजेपी के उम्मीदवार अरुण जेटली, अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, विजय पाल तोमर, कांता कर्दम, अशोक वाजपेयी, हरनाथ यादव, सकलदीप राजभर और अनिल अग्रवाल ने जीत दर्ज की है. दूसरी वरियता की काउंटिंग ने अनिल अग्रवाल की जीत पर मोहर लगा दी. दूसरी वरीयता में भीमराव अंबेडकर को सिर्फ एक ही वोट मिला.

BJP’s winning faces
BJP candidates Arun Jaitley, Anil Jain, GVL Narasimha Rao, Vijay Pal Tomar, Kanta Kardam, Ashok Vajpayee, Harnath Yadav, Sakaladeep Rajbhar and Anil Agarwal have won the election. Counting of second variant stamped on Anil Agarwal’s victory. Bhimrao Ambedkar got only one vote in second preference.

गठबंधन के बाद भी मायावती को झटका
इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका बीएसपी को लगा है. मायावती ने इन चुनावों के लिए अपने धुर विरोधी रहे समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया था. सपा मुखिया ने भी अपने शेष वोटों को बीएसपी उम्मीदवार को देने का वादा किया था. इसी गठबंधन के आधार पर अखिलेश सिंह ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों में जीत हासिल की थी.

Mayawati shocks even after coalition
The biggest blow to these elections is the BSP. Mayawati had an alliance with the Samajwadi Party, who was anti-incumbent for these elections. SP chief also promised to give his remaining votes to the BSP candidate. On the basis of this alliance, Akhilesh Singh had won in the by-elections held in Gorakhpur and Phulpur Lok Sabha seats.

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2019 में SP-BSP और BJP का bada प्लान क्या जीतेगी ये पार्टी….

राज्‍यसभा के लिए 23 मार्च को होने जा रहे चुनावों के मद्देनजर यूपी की 10वीं सीट प्रतिष्‍ठा का प्रश्‍न बन गई है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस सीट के लिए बसपा ने सपा से तालमेल कर पूर्व एमएलए भीमराव अंबेडकर को अपना प्रत्‍याशी बनाया है. वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के लिए अहम इसलिए हो गई है क्‍योंकि यदि इस सीट से बसपा का प्रत्‍याशी जीतता है तो 2019 में सपा-बसपा गठबंधन पर मुहर लगनी तय है. बीजेपी यह भी समझती है कि ऐसा होने की स्थिति में उसके लिए बड़ी चुनौती पेश हो सकती है क्‍योंकि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा-बसपा गठबंधन होने पर बीजेपी को यूपी में 50 सीटों का नुकसान हो सकता है.

In view of the elections going to the Rajya Sabha on March 23, UP has become a question of UP’s 10th seat reputation. This is because the BSP has made the former MLA MLA Bhimrao Ambedkar as its candidate for the seat. On the other hand, it has become important for the BJP because if the BSP candidate wins this seat, then the SP-BSP combine will be stamped in 2019. The BJP also understands that in the event of such a situation, a big challenge can be faced for it, as per the media reports, if the SP-BSP combine is held, the BJP may lose 50 seats in UP.

यह मामला इसलिए भी रोचक हो गया है क्‍योंकि बसपा सुप्रीमो ने पहले ही ऐलान किया है कि सपा के साथ उनका तालमेल फिलहाल उपचुनावों और राज्‍यसभा चुनावों में है. गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में तो बसपा अपने वोटबैंक में सपा प्रत्‍याशी के खाते में ट्रांसफर कराने को सफल रही, जिसके दम पर सपा ने बीजेपी को हराकर जीत दर्ज की. अब राज्‍यसभा चुनाव में सपा की बारी है कि वह अपने मतों को बसपा के खाते में ट्रांसफर कराकर उसको जिताए. यदि सपा ऐसा करने में कामयाब नहीं रहती है तो बसपा के साथ उसके संभावित गठबंधन पर पेंच फंस सकता है. बीजेपी की रणनीति भी फिलहाल इस संभावित गठबंधन को रोकने के लिए इसीलिए राज्‍यसभा में बसपा प्रत्‍याशी को हराने की है.

This matter has also become interesting because BSP supremo has already announced that their coordination with SP is currently in bye-elections and in the Rajya Sabha elections. In the Gorakhpur and Fulpur bye-elections, the BSP was successful in transferring the SP candidate to the vote bank, on which, the SP won the victory by defeating BJP. Now, in the Rajya Sabha elections, the SP’s turn is that they win their votes by transferring their votes into BSP’s account. If SP fails to do so, then the BSP can screw on its possible alliance with the BSP. BJP’s strategy is to defeat the BSP candidate in the Rajya Sabha so as to prevent this alliance from happening right now.

राज्‍यसभा चुनाव: यदि BSP प्रत्‍याशी नहीं जीता तो क्‍या उसके बाद भी SP से होगा गठबंधन?

Rajya Sabha elections: If BSP does not win the candidate, then will the SP be allocated?

amit shah
अमित शाह ने नाराज चल रहे सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात कर उनको मना लिया है.(फाइल फोटो)

amit shah
Amit Shah has met the angry Upa Subhaspa leader Om Prakash Rajbhar and convinced them. (File photo)

वोटों का गणित
इसी कड़ी में बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने यूपी में सहयोगी सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के नेता ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात कर उनको मना लिया है. योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से बीजेपी से नाराज चल रहे थे और उन्‍होंने राज्‍यसभा चुनावों में बगावती तेवर अख्तियार कर लिए थे. इसलिए मौके की गंभीरता को देखते हुए अमित शाह ने राजभर से मुलाकात में देरी नहीं की. अपना दल ने पहले ही बीजेपी को समर्थन का ऐलान कर रखा है. इस प्रकार बीजेपी ने अपने 324 वोटों को अपने पाले में रखने की पूरी व्‍यवस्‍था कर ली है.

Mathematics of votes
In this episode, BJP President Amit Shah has congratulated him on meeting with his colleague Suhdev Bharatiya Samaj Party (Subhaspa) leader Omprakash Rajbhar in UP. In the Yogi government, Om Prakash Rajbhar was angry with BJP for some time and he had made a rebellion in the Rajya Sabha elections. Therefore, considering the severity of the spot, Amit Shah did not delay meeting the state. Your party has already declared support to BJP. Thus, BJP has made complete arrangements to keep its 324 votes in its own right.

उत्तर प्रदेश: राज्यसभा चुनाव में सपा, कांग्रेस और रालोद के भरोसे बसपा

सपा-बसपा को टेंशन
राज्‍य की 31 राज्‍यसभा सीटों में से 10 पर चुनाव होने हैं. इनमें से आठ बीजेपी और एक सपा के खाते में जानी तय है. 10वीं सीट के लिए बसपा ने सपा से तालमेल कर अपने उम्‍मीदवार को उतारा है. राज्‍यसभा की एक सीट में जीत हासिल करने के लिए 37 वोट की दरकार है. बसपा के 19 और सपा के 47 विधायक हैं. सपा के एक प्रत्‍याशी के जीतने के बाद उसके पास 10 वोट अतिरिक्‍त होंगे. इसके अलावा कांग्रेस के सात और रालोद के एक वोट का भी समर्थन बसपा को मिलेगा. इस प्रकार बसपा के किसी तरह 37 वोट हो रहे हैं लेकिन यहीं पर सपा नेता शिवपाल यादव और नरेश अग्रवाल की भूमिका अहम हो जाती है.

Uttar Pradesh: SP, Congress and RLD depend on BSP

Tension to SP-BSP
There are 10 elections out of 31 state seats in the state. Of these, it is decided to go to account of eight BJP and one SP. For the 10th position, the BSP has fielded its candidate by adjusting to the SP. To win a seat in the Rajya Sabha, 37 votes are needed. There are 19 BSP MLAs and 47 MLAs of SP. After winning a candidate of SP, he will have 10 votes more. Apart from this, a vote of seven Congress and RLD will also be supported by the BSP. Thus, the BSP is getting 37 votes, but the role of SP leader Shivpal Yadav and Naresh Agarwal is very important.

इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि बीजेपी के आठ प्रत्‍याशी जीतने के बाद उसके पास 28 वोट अतिरिक्‍त होंगे. इसलिए अपने नौवें प्रत्‍याशी को जिताने के लिए उसको महज नौ वोटों की दरकार है. इसलिए सपा और बसपा के ऐसे विधायकों पर भी बीजेपी की नजर है जो अगले चुनाव में उसके टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्‍छा रखते हैं. बीजेपी को इस कड़ी में तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल चुका है. इसके अलावा निषाद पार्टी के एकमात्र विधायक का भी उसको समर्थन मिल चुका है. यह इसलिए दिलचस्‍प है क्‍योंकि निषाद पार्टी के संस्‍थापक के पुत्र प्रवीण निषाद गोरखपुर से सपा के टिकट पर लोकसभा उपचुनाव में जीते हैं.

One big reason for this is that after winning the BJP’s eight candidates, it will have 28 votes more. Therefore, to win his ninth candidate, he needs only nine votes. That is why the BJP and the BSP legislators also have the eyes of the BJP who wish to contest the elections on their ticket in the next election. BJP has got support of three independents in this episode. Apart from this, the only MLA of Nishad party has got support. This is interesting because Pravin Nishad, the son of the founder of Nishad party, lives in Gorakhpur in Lok Sabha by-election on SP ticket.

नरेश अग्रवाल
सपा से राज्‍यसभा टिकट नहीं मिलने से नाराज नरेश अग्रवाल ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. सूत्रों के मुताबिक इसकी राजनीतिक कीमत के रूप में उन्‍होंने बीजेपी को आश्‍वस्‍त किया है कि उनका बेटा और हरदोई से सपा विधायक नितिन अग्रवाल बीजेपी के पक्ष में वोट करेगा. यदि ऐसा कोई एक वोट भी कम हो जाता है तो बसपा का उम्‍मीदवार राज्‍यसभा नहीं पहुंच पाएगा.

Naresh agarwal
Angry over the absence of a Rajya Sabha ticket from the SP, Naresh Agarwal has taken the charge of BJP. According to sources, in the form of its political cost, he has assured the BJP that his son Nitin Agrawal, SP MLA from Hardoi, will vote in favor of BJP. If such a single vote gets reduced then the BSP candidate will not be able to reach the Rajya Sabha.

शिवपाल यादव
सपा में शिवपाल यादव गुट हाशिए पर है. सपा नेतृत्‍व के साथ उनके रिश्‍तों में खटास जगजाहिर है. इसके अलावा बसपा के साथ शिवपाल के रिश्‍ते 1995 के गेस्‍टहाउस कांड के बाद कटु रहे हैं. ऐसे में उनके गुट की बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

Shivpal Yadav
Shivpal Yadav in the SP is marginalized. The saga of their relationship with the SP leadership is evident. Apart from this, Shivpal’s relationship with BSP is bitter after the 1995 guest house scandal. In such a situation, the possibility of cross voting in favor of BJP of its faction can not be ruled out.

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https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

SOURCE ZEENEWS