बुलंदशहर – राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन, रामभक्त को डराने के लिए पाकिस्तान से बुलाये गए कट्टरपंथ

Muslims protesting Against ram mandir in Bulandshahar : ऊपर मुस्लिम भीड़ आप जो तस्वीर में देख रहे है ये तस्वीर बुलंदशहर की है जो की दिल्ली के काफी पास उत्तर प्रदेश का एक जिला है 

अधिकतर मीडिया ने इस खबर को दबा दिया है पर इस खबर की पुष्टि सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार ने की है, इसका एक विडियो भी सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार ने जारी किया है जिसे आप नीचे देख सकते है

आज मुसलमानों की भीड़ बुलाई गयी थी अयोध्या में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन के लिए और इसमें सबसे बड़ी चीज ये रही की इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी मुसलमान भी शामिल थे

हिन्दुओ को डराने और अयोध्या में राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन कर अपनी शक्ति दिखाने के लिए पाकिस्तानी मुसलमानों को भी बुलाया गया था

इतना ही नहीं जो पाकिस्तानी मुस्लिम इस प्रदर्शन में शामिल है, वो टूरिस्ट वीजा लेकर भारत पहुंचे है, सुदर्शन न्यूज़ के गौरव मिश्रा ने इस खबर की पुष्टि की है

इस भीड़ में भारतीय मुसलमानों के साथ पाकिस्तानी मुसलमान भी शामिल है, राम मंदिर के खिलाफ प्रदर्शन और हिन्दुओ को डराने के लिए अपनी शक्ति दिखाने के लिए पाकिस्तानी मुसलमान भी बुलाये गए

बड़ी चीज ये है की प्रशासन ने इस कार्यक्रम के अयोजको के खिलाफ अभी कोई कार्यवाही नहीं की है, जबकि पाकिस्तानी मुसलमान भारत में आकर हिन्दूओ को डराने के लिए अपनी भीड़ दिखा रहे है

source name:dainikbharat

url:dbn.news

हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दिया सबसे बड़ा झटका ,चुनाव आयोग को भी लगायी फटकार,जिसे देख PM मोदी समेत कट्टरपंथी के उड़े होश

कोलकाता – बंगाल में आज हालात पाकिस्तान से भी बद्द्तर हो चले हैं असल मायने में कहा जाय तो लोकतंत्र की हत्या सिर्फ बंगाल में हो रही है. कभी दुर्गा पूजा पर मूर्ति विसर्जन पर रोक, तो कभी राम नवमी में शस्त्र यात्रा पर रोक,आर्म्स एक्ट लगाने की धमकी. जबकि खुद तृणमूल के कार्यकर्ता ने विपक्षियों को डराने के लिए तलवार और फरसा लेकर बाइक रैली निकाली, तब कोइ कार्रवाई नहीं हुई.

Kolkata- In today’s situation in Bengal, things have become even bigger than Pakistan. In real terms, if democracy is being done in Bengal only then the killing of democracy is happening. Never stop idol worshiping at Durga Puja, and sometimes threat to impose Arms Act on Ram Navami, to stop arms trade. When the Trinamool worker himself took out a bike rally with the sword and the fross to frighten the opposition, no action was taken.

रामनवमी और हनुमान जयंती पर ज़बरदस्त दंगे और प्रशासन की चुप्पी ममता सरकार ने नहीं दिए कोई कार्रवाई के आदेश, कट्टरपंथी जिहादी बमबाजी,लूटपाट,आगजनी,दुष्कर्म करते रहे, हिन्दू अपने घर छोड़कर पलायन कर रहे, सड़कों पर हिन्दू और रोहिंग्या को घर मिल रहे. इस सबके बाद भी पंचायत चुनाव में ममता की पार्टी के नेता निर्विरोध जीते जरहे हैं क्या आप विश्वास करेंगे?पर ऐसा हो रहा है.

Ramnavmi and Hanuman Jayanti, the silence of administration and the silence of administration, Mamta Government did not give any order to take action, radical jihadist bombardment, looting, arson, abusive, Hindus leaving their homes and fleeing, Hindus and Rohingyas get home on the streets . After all this, even though Mamta’s party leaders are winning uncontested elections in the Panchayat elections, will you believe it? But this is happening.

 

दरअसल हमने आपको कुछ दिन पहले ही बताया था कि कैसे पंचायत चुनाव में बीजेपी पार्टी के प्रत्याशिओं को नामांकन परचा ही भरने नहीं दिया गया. पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ज़ोरदार कोहराम मचा. लगातार छह दिनों से नामांकन दाखिल करने को लेकर एक एक करके हर क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशिओं पर बम से हमले किये गए. हर दिन उनके सर पर मौत मंडराती रही.

Actually, we had told you a few days ago that how the BJP’s candidates were not allowed to fill nomination in Panchayat elections. In the West Bengal, the strong picketing about the three-phase panchayat elections took place. In order to file nominations for six consecutive days, BJP candidates in every field were attacked with bombs. Every day he was hanging on his head.

नौबत तो यहाँ तक आ गयी है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने खुद कड़ा फैसला सुनाया और पुलिस प्रशासन को पंचायत चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को सुरक्षा देने के कड़े आदेश दिए हैं.

It has come so far that the Calcutta High Court has given a tough decision on its own and strict instructions have been given to the police administration to give security to the nominees nominated for the Panchayat elections.

पंचायत चुनाव पंजीकरण अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवारों को को नहीं दिया फॉर्म

यही नहीं भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त सहायक पंचायत चुनाव पंजीकरण अधिकारी बीजेपी उम्मीदवारों को पर्चा के फॉर्म देने से इनकार कर रहा है. पश्चिम बंगाल बीजेपी ने नामांकन पत्र ऑनलाइन उपलब्ध करवाने की मांग की थी. तो इसका क्या यही मतलब निकाला जाय कि कई चुनाव आयोग के अधिकारी भी तृणमूल के इशारे पर काम कर रहे हैं.? इसे कहते हैं सही मायने में लोकतंत्र का गला घोंटना.

चुनाव आयोग को भी लगायी फटकार

दरअसल कोर्ट ने भी माना कि बंगाल में जो पंचायत चुनाव हुए वे सही तरीके से नहीं हुए. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हो रहे पंचायत चुनाव पर 16 अप्रैल तक रोक लगा दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी फटकार लगाते हुए समक्ष तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए.

Election Commission also imposed a rebuke

In fact, the court also admitted that the Panchayat elections in Bengal did not happen in the right way. The court has stayed the elections in West Bengal on April 16. At the same time, the court also ordered the EC to submit a factual report before it.

Panchayat election registration officer not given to BJP candidates

Not only this, the BJP has also alleged that the assistant Panchayat Election Registration Officer appointed by the West Bengal Election Commission is refusing to give the form of the form to the BJP candidates. The West Bengal BJP demanded that the nomination papers be made available online. So, what is the meaning of this, that many EC officials are also working at the behest of the Trinamool? It is said to truly strangle democracy.

हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दिया सबसे बड़ा झटका

तो वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से मना कर दिया जिसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त एक्शन लिया है और बड़ी साज़िश की बदबू आने के बाद पंचायत चुनाव पर ही रोक लगा दी है.

The biggest blow to the Mamta Government is the High Court

So the same Supreme Court refused to interfere in this matter, after which the High Court has taken strict action and after the bad intentions, the panchayat elections have been banned.

दरअसल त्रिपुरा,मेघालय,नागालैंड में जीतने के बाद अमितशाह ने एलान किया था कि कर्णाटक, बंगाल और केरल में भी बीजेपी जल्द आ रही है, जिससे ममता बुरी तरह बौखला गयी थी और बीजेपी को कभी भी सरकार नहीं बनने देगी ऐसी धमकी दी थी.

In fact, after winning in Tripura, Meghalaya and Nagaland, Amit Shah had announced that BJP in Karnataka, Bengal and Kerala was coming soon, due to which Mamta was severely frustrated and that such a threat would not allow BJP to become a government anytime.

लहूलुहान हुआ पंचायत चुनाव

दरअसल जैसे ही बीजेपी प्रत्याशी नामांकन परचा भरने जाते वहां कट्टरपंथियों संग TMC के कार्यकर्ता मिलकर दंगा फसाद शुरू कर देते. जिसके बाद धारा 144 लगाकर पुलिस बीजेपी के लोगों को उठाकर ले जाती और वे परचा नहीं भर पाते थे. शनिवार को दुर्गापुर में भाजपा के कैंप कार्यालय पर हमला हुआ. भाजपा जिलाध्यक्ष लखन घोरुई को तो चाकू मारकर जख्मी कर दिया गया. महिला बीजेपी विधायक के साथ बदसुलूकी और मारपीट की गयी.

Lahululhan Hua Panchayat elections

Actually, as soon as BJP nominee gets nomination, TMC workers along with fundamentalists will start rioting. After which Section 144 imposed by the police, the police took the people of the BJP and they could not fill the paracha. BJP’s camp office was attacked in Durgapur on Saturday. BJP District President Lakhan Gharui was hit with a knife. Female BJP MLA was abused and beaten up.

यही वजह रही कि सैकड़ों सीटों के जब चुनाव परिणाम आये तो उसमे ममता की तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी सभी सीटों पर निर्विरोध जीत गए. मतलब कोई और विरोध करने के लिए खड़ा ही नहीं हुआ. ऐसा कैसे हो सकता है बीजेपी है अन्य पार्टियां है, कोई विपक्षी खड़ा कैसे नहीं हुआ?

The reason for this is that in the hundreds of seats when election results came, Mamata’s Trinamool Congress candidate won uncontested all the seats. It meant no one stood up to protest. How can it be BJP, there are other parties, how did no opposition stand?

दरअसल विपक्षी पार्टी खड़ी नहीं हुई ऐसा नहीं है, विपक्ष बीजेपी को खड़ा होने ही नहीं दिया गया. नामांकन परचा ही नहीं भरने दिया गया तो खड़े कहाँ से होते जीतना तो दूर की बात है. ये है ममता सरकार की साज़िश विपक्ष को खड़े ही मत होने दो, ममता हमेशा सत्ता में बनी रहना चाहती हैं ऐसा लगता है जल्द ही बंगाल में सिर्फ बांग्लादेशी और रोहिंग्या रह जायेंगे और हिन्दू अप्ल्संख्यक हो जायेंगे. इसके बाद आने वाले अनेक सालों तक जितने चाहे चुनाव होते रहे कोई विपक्षी कभी सत्ता में नहीं आ पायेगा.

n fact, the opposition party did not stand, it is not so that the Opposition BJP was not allowed to stand up. Nomination was not allowed to fill, then where to stand it is far away. This is Mamata’s conspiracy against the government, let the opposition not stand up, Mamata always wants to remain in power. It seems that soon there will be only Bangladeshi and Rohingya in Bengal and Hindus will become an ascendant. After this, no opposition will ever come to power as long as the elections are held for many years to come.

यह भी देखे
https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

source political report

केरल लव जिहाद केस में बेहद चौकाने वाला खुलासा ,बिक गया इतने करोड़ में सुप्रीम कोर्ट न्याय

नई दिल्ली : क्या अदालतों में वाकई इन्साफ मिलता है? कई मौकों पर ऐसा देखने में आया है कि देश की न्याय व्यवस्था पैसेवालों की गुलाम बनी रहती है. धनबल का प्रयोग करके अपराधी अपने मन माफिक फैसला करवा लेते हैं और किसी के कानो पर जूं तक नहीं रेंगती. गरीबों को न्याय मिलने की कोई उम्मीद तक नहीं होती. अब केरल लव जिहाद मामले में भी एक नया एंगल सामने आया है, जिसने देश की न्याय व्यवस्था पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है.

New Delhi: Do the courts really get justice? On many occasions, it has been observed that the country’s judicial system continues to be a slave of the moneylenders. By using Dhanbal, the criminals make their mind-fix decisions and no one loses their ears on their ears. The poor do not have any hope of getting justice. Now a new angle has also emerged in Kerala Love Jihad case, which has once again questioned the country’s judicial system.

केरल लव जिहाद मामले में बिक गया न्याय?
केरल में हादिया ‘लव जिहाद’ मामले की जांच कर रही जांच एजेंसी एनआई कह-कह कर थक गयी कि उसे जांच के दौरान पुख्ता जानकारी मिली है कि पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) नाम की कट्टरपंथी संस्था लड़कियों को फंसाने के लिए ‘सम्मोहन’ का इस्तेमाल कर रही है. मगर सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी की एक ना सुनी और हादिया के माता-पिता के खिलाफ फैसला सुना दिया.

Justice in Kerala Love Jihad case sold?
The investigating agency NI, who is investigating the Hadia ‘love jihad’ case in Kerala, was tired of saying, “During the investigation, it has been found that the fundamentalist organization, Popular Front of India (PFI), called for ‘hypnotism’ Is using. But the Supreme Court did not listen to one of the investigating agencies and heard the verdict against Hadiya’s parents.

हादिया के माता-पिता का भी कहना था कि पीएफआई द्वारा उनकी बेटी का ब्रेनवाश किया गया है, इसीलिए वो उनकी बोली बोल रही है, मगर सुप्रीम कोर्ट ने कट्टरपंथियों का साथ देते हुए हादिया के माता-पिता के खिलाफ फैसला सुनाया. मगर अब जो खुलासा हुआ है, उससे एक बार फिर ये साबित हो गया है कि इस देश में न्याय पैसेवालों की जेब में रहता है.

Hadia’s parents also had to say that their daughter has been brainwashed by PFI, that is why she is speaking her speech, but the Supreme Court has ruled against the parents of Hadia giving support to the fundamentalists. But now what has been revealed, once again it has been proved that justice in this country is in the pocket of the moneylenders.

1 करोड़ रुपये में पलटा फैसला
खुलासा हुआ है कि हादिया लव जिहाद केस में पीएफआई ने अपनी सारी ताकत और मोटा पैसा झोंका था, ताकि फैसला हादिया के माता-पिता के खिलाफ सुनाया जा सके. ये दावा किसी और ने नहीं बल्कि खुद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने किया है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चले हदिया के मामले को लड़ने के लिए करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

1 crore rupee reversal decision
It is revealed that in the case of Hadia Love Jihad, the PFI had flown all its strength and fat money, so that the decision could be made against Hadiya’s parents. This claim has not been made by any other person but by the Popular Front of India (PFI), that he has spent around Rs 1 crore to fight the case of Hadia, who went to the Supreme Court.

पीएफआई की स्टेट कमेटी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए पीएफआई के महासचिव मोहम्मद बशीर ने कहा कि विभिन्न अधिवक्ताओं को 93,85,000 रुपये का फीस के रूप में भुगतान किया गया है.
Giving this information in a press release issued by the State Committee of the PFI, PFI General Secretary Mohammad Bashir said that various advocates have been paid as fees of Rs 93,85,000.

वामपंथी और कोंग्रेसी वकीलों ने बनाया सच को झूठ
इस दौरान यात्रा एवं अन्य खर्च के लिए 5,17,324 खर्च किए गए जबकि कार्यालय में कागज के काम के लिए 50,000 रुपए का खर्च आया है. इस केस के लिए मोटी फीस लेने वाले वरिष्ठ वकीलों को नियुक्त किया गया. वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल इस केस में सात बार उपस्थित हुए जबकि इंदिरा जयसिंह चार बार, दुष्यंत दवे तीन बार और मार्सुके बफाकी एक बार आए.

Lieutenant and Congressian Lawyers Make The Truth To Lie
During this period, 5,17,324 were spent for travel and other expenses whereas for the work of paper, the expenditure of Rs. 50,000 has been spent. Senior lawyers who were taking high fees for this case were appointed. Senior advocate and Congress leader Kapil Sibal appeared in this case seven times while Indira Jaysingh four times, Dushyant Dave three times and Marsuke came to Buffie once.

देश में लव जिहाद इसी तरह से चलता रहे, इसके लिए बीरान, के.सी. नसीर और के.पी. मोहम्मद शरीफ ने निशुल्क सेवाएं दीं. वहीँ नूर मोहम्मद और पल्लवी प्रताप भी इस मामले में कई अवसरों पर उपस्थित थे.

Love jihad will continue in this way in the country, for this Biran, K.C. Naseer and K.P. Mohammed Sharif provided free services. Even Nur Mohammed and Pallavi Pratap were also present on this occasion in many cases.

देश तोड़ने में जुटे कट्टरपंथी संगठन
यहाँ सवाल ये उठता है कि यदि अखिला उर्फ़ हादिया की शादी का मामला लव जिहाद से जुड़ा नहीं है, तो आखिर कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई ने इस केस में रूचि क्यों ली? क्या पीएफआई शादी के सभी मामलों में इसी तरह से रूचि लेती है?

Fundamentalist organizations engaged in breaking the country
Here the question arises that if the case of Akhila aka Hadiya’s marriage is not related to love jihad, then why did the fundamentalist Islamic organization PFI take interest in this case? Does PFI like this in all cases of marriage?

पीएफआई ने करोड़ों रुपये इस केस के लिए क्यों खर्च किये? क्या इससे जांच एजेंसी एनआईए की बात सच साबित नहीं होती कि हादिया लव जिहाद मामले में पीएफआई पूरी तरह से शामिल है. एनआईए की जांच के अनुसार पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़ी संस्था सत्यसारिणी लव जिहाद के लिए बाकायदा साजिशों का जाल बुनती है.

Why did PFI spend crores of rupees for this case? Does not the fact that the investigating agency NIA does not prove that PFI is fully involved in the case of Hadiya Love Jihad. According to the NIA investigation, the organization associated with the Popular Front of India creates a network of conspiracies for the Satyajrani Love Jihad.

पूरी तरह से ब्रेन वाश की प्रक्रिया अपनायी जाती है, ठीक वैसे ही जैसे आम लोगों को ब्रेनवाश करके आत्मघाती हमलों के लिए तैयार किया जाता है. मगर फिर भी जांच एजेंसी की रिपोर्ट को दरकिनार करके सुप्रीम कोर्ट ने हादिया के माता-पिता के खिलाफ ही फैसला सुना दिया.

The process of complete brain wash is adopted, just like ordinary people are brainwashed and prepared for suicide attacks. However, bypassing the investigating agency’s report, the Supreme Court heard the verdict against the parents of Hadiya.

पैसे की ताकत के सामने हार गए हादिया के माता-पिता
बता दें कि हाई कोर्ट ने इस मामले को लव जिहाद ही करार दिया था और हादिया के निकाह को खारिज कर दिया था. मगर फिर कट्टरपंथी संगठन पीएफआई ने पैसा झोंकना शुरू किया और सिब्बल जैसे बड़े-बड़े वकीलों को नियुक्त किया गया.

Hadia’s parents lost in power before money
Let the high court term this matter as love jihad and rejected Hadiya’s marriage. But then the fundamentalist organization PFI started spinning and big lawyers like Sibal were appointed.

झूठ को तोड़-मरोड़ कर सच का रूप देने में माहिर इन वकीलों की फ़ौज ने अपना कमाल दिखाया और देश की सर्वोच्च अदालत ने घुटने टेकते हुए हादिया की एक मुस्लिम युवक से शादी को खारिज करने के केरल हाई कोर्ट के आदेश को उलटते हुए दोनों को बतौर शौहर-बीवी साथ रहने की इजाजत दे दी.

The lawyers of these lawyers showed their amazingness by dividing the lie and the highest court of the country, kneeling on both sides, reversing the order of the Kerala High Court to dismiss the marriage of a Muslim youth of Hadia As allowed to live with Shaheraw-Biwi

यह भी देखे

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अभी-अभी : UP में इस मुस्लिम शख्स ने किया ऐसा भयानक कांड, जिसे देख गुस्से से उबल पड़ा सारा देश

पुलिस के मुताबिक, मेरठ के शोभापुर की निवासी एक दलित युवती माता-पिता की मौत के बाद हस्तिनापुर के गांव में अपनी बहन के साथ रहती है. दो महीने पहले उसके मोबाइल पर एक मिस्ड कॉल आई. मिस कॉल करने वाले युवक से उसका फोन पर ही परिचय हुआ. युवक ने युवती को अपना नाम अमर बताया और दोस्ती कर ली.
झूठी पहचान बताकर की दोस्ती और झूठा प्यार

According to the police, a resident of Shobapur of Meerut lives with his sister in the village of Hastinapur after the death of a dalit girl child. Two months ago, there was a missed call on her mobile. A young caller introduced her to her phone. The young man named the young man his name Amar and made a friendship.
Friendship and false love by telling false identity

करीब दो महीने तक बातचीत करने के बाद मुस्लिम युवक ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और प्रेम प्रसंग के बाद उनका मिलना-जुलना शुरू हो गया. आरोपी ने मंगलवार को किशोरी को शॉपिंग करने के बहाने मवाना बुलाया. वहां कुछ खरीदारी के बाद आरोपी उसे कस्बे के सिनेमा हॉल में ले गया, जहां उसका साथी पहले से ही फिल्म के टिकट लेकर खड़ा था. फिल्म शुरू होने से पहले ही दोनों किशोरी को सिनेमा हॉल में ले गए.

After negotiating for nearly two months, the Muslim youth trapped him in his love trap and after his love affair, he started to meet. On Tuesday, the accused called Mawana to shopping for the teenager. After some shopping there, the accused took her to the cinema hall of the town, where her partner had already stood by the ticket of the film. Before the film started, both the teenagers were taken to the cinema hall.

वहां पर दोनों आरोपियों ने मिलकर किशोरी के साथ गैंगरेप किया. किशोरी ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसके साथ हाथापाई की और जान से मारने की धमकी दी. युवती का आरोप है कि आरोपियों ने वारदात के बारे में किसी को कुछ न बताने की धमकी देकर उसे बाइक से वापस छोड़ने चल दिए. इसी दौरान मौका मिलने पर युवती ने पुलिस को सूचित किया.

There, both the accused ganged up together with the teenager. When the teenager protested, the accused threatened to kill him and kill him. The girl has alleged that the accused threatened to not tell anyone about the incident and let her go back from the bike. During this time the girl informed the police on getting the opportunity.

साजिश के तहत देशभर में किया जा रहा है लव जिहाद
योगी राज में पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए दोनों आरोपियों को मुजफ्फरनगर अड्डे के पास से गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों की पहचान अमीरूद्दीन और वसीम के रूप में हुई. अमीरूद्दीन ही पिछले दो महीने से नाम बदलकर युवती से बातचीत कर रहा था. दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपियों की बाइक भी पुलिस ने जब्त कर ली है.

Love jihad is being done all over the country under the conspiracy
In Yogi Raj the police immediately took action and arrested the two accused from Muzaffarnagar. The accused were identified as Amiruddin and Wasim. Amiruddin was talking to the young woman for the last two months. The case has been filed against both the accused. Police have also seized the bike of the accused.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ पीड़िता की मेडिकल जांच की जा रही है. उसकी तहरीर पर केस दर्ज करते हुए आरोपियों को जेल भेजा जा रहा है. आरोपियों की जेब से आपत्तिजनक वस्तुएं भी बरामद हुई हैं. एसपी राजेश कुमार ने बताया कि सिनेमा हॉल में हुई वारदात को लेकर पड़ताल की जा रही है. आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
नाम, धर्म, पहचान सब कुछ छिपाया

According to police officials, the victim’s medical examination is being done. The accused are being sent to jail while lodging a case against him. The objectionable items were also recovered from the pocket of the accused. SP Rajesh Kumar told that the investigation is being investigated about the incident in the cinema hall. Strict action will be taken against the accused.
Name, religion, identity hidden everything

पीड़िता का कहना है कि युवक हर बार अपना नाम अमर बताता था. वह उसे हिंदू ही समझती थी, लेकिन वारदात के बाद खुलासा हुआ कि उसका असली नाम अमर नहीं बल्कि अमीरुद्दीन है.
केरल से लेकर यूपी, राजस्थान तक फ़ैल गया लव जिहाद

The victim says that the youth used to tell his name Amar every time. He considered it to be a Hindu, but after the incident, it was revealed that his real name was not immortal but Amiruddin.
Love jihad spread from Kerala to UP, Rajasthan

बता दें कि इस तरह के मामले अब देश के कोने-कोने से सामने आने लगे हैं. अभी कुछ ही वक़्त पहले मुम्बई की एक मॉडल ने भी लव जिहाद की शिकायत करते हुए अपने मुस्लिम पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. एनआईए केरल के लव जिहाद मामले की जांच में अभी भी लगी है. राजस्थान के एक शख्स का गुस्सा तो लव जिहाद के लिए इस कदर फूटा कि अपनी गर्ल फ्रेंड को भगाने वाले मुस्लिम शख्स को उसने तलवार से काट डाला और वीडियो वायरल कर दिया.

Let us say that such cases have now started coming out from the corners of the country. Just a few moments ago, a Mumbai-based model also filed a report against her Muslim husband complaining of love jihad. NIA is still investigating the love jihad case of Kerala. The anger of a man from Rajasthan was so fierce for Jihad that he cut off the Muslim man who killed his girlfriend and switched it from the sword and made the video viral.

मामला काफी गंभीर हो गया है और सोशल मीडिया पर लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि सरकार को लव जिहाद के खिलाफ सख्त एक्शन लेना चाहिए.

कला जगत में देखें:

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

source name:political report

CM योगी ने कर डाली ऐसी बड़ी घोषणा, जिसे देख देशभर में ख़ुशी की लहर, विपक्षियों को लगा तगड़ा झटका

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘योगी आदित्यनाथ’ ने अपने गृहक्षेत्र जाकर जनता को संबोधित करते खुशखबरी की

घोषणा की है. जानकारी के अनुसार योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार ‘गोरखपुर’ पहुंचे हैं. उनके इस घोषणा के बाद हिन्दुओं में ख़ुशी का माहौल बना हुआ है. उन्होंने घोषणा करते हुए कहा है कि ‘कैलाश मानसरोवर’ जाने वालों लोगों को राज्य सरकार 1-1 लाख रुपए की सहायता करेगी.

Gorakhpur: Uttar Pradesh’s Chief Minister Yogi Adityanath has announced the good news addressing the public in his home country. According to the information, Yogi Adityanath has reached Gorakhpur for the first time after becoming the Chief Minister. After this announcement, there is an atmosphere of happiness in the Hindus. He has announced that the state government will assist the people going to Kailash Mansarovar Rs 1 lakh each.

मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि अगर राज्य का कोई भी व्यक्ति ‘कैलाश मानसरोवर’ जाना चाहता है तो उसको राज्य सरकार शारीरिक रूप से एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देगी. साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा है कि ‘लखनऊ’, ‘गाजियाबाद’ या ‘नोएडा’ में से किसी एक स्थान पर कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण भी किया जायेगा. इसके आगे उन्होंने कहा है कि ये सभी कार्य एक-एक करके पुरे होते रहेंगे परंतु भरोसा केवल इस बात है कि आपका सहयोग आपका सानिध्य प्राप्त हो.

The Chief Minister Yogi has said that if any person of the state wants to go to Kailash Mansarovar, then the state government will give him financial assistance of one lakh rupees. The Chief Minister also said that Kailash Mansarovar Bhawan will also be constructed at one of the places of ‘Lucknow’, ‘Ghaziabad’ or ‘Noida’. He further said that all these works will continue to be accomplished one by one, but the only thing about trust is that your cooperation is your achievement.

हज हाउस का जवाब है कैलाश मानसरोवर भवन?

जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण की बात कही तो ये सवाल कौंधने लगा कि कहीं मुख्यमंत्री योगी का ये ऐलान अखिलेश सरकार द्वारा गाजियाबाद में बनाये गये भव्य ‘हज हाउस’ का जवाब तो नहीं. आपको बता दें कि यह हज हाउस गाजियाबाद में स्थित है और भाजपा लगातार इसको मुस्लिम तुष्टिकरण बताती रही है.

The answer to Haj’s house is Kailash Mansarovar Bhavan?

When Chief Minister Yogi Adityanath spoke of the construction of the Kailash Mansarovar Bhawan, the question arose that the question of Chief Minister Yogi was not answered by the Akhilesh government’s grand ‘Hajj House’ made in Ghaziabad. Let us tell you that this Haj house is located in Ghaziabad and the BJP has consistently been telling it Muslim appeasement.

मुख्यमंत्री ने बुधवार (28 जनवरी) को कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण लखनऊ, नोएडा या गाजियाबाद में कराने की बात कही. साथ ही मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही साफ कर दिया कि उनकी सरकार विकास सबका करेगी, परंतु तुष्टिकरण किसी का नहीं होगा.

The Chief Minister talked of building Kailash Mansarovar Bhavan on Wednesday (January 28th) in Lucknow, Noida or Ghaziabad. At the same time, the Chief Minister made it clear at the beginning of his speech that his government will do all development, but appeasement will not be of anybody.

मुख्यमंत्री योगी की सभा में शामिल अधिकतर लोगों से बात की गयी तो उनसभी ने कहा है कि अब तक सरकारों ने मुस्लिमों को ‘हज यात्रा’ (मक्का-मदीना) करने के लिए सब्सिडी दी है तो फिर ‘कैलाश मानसरोवर’ के लिए सरकारी मदद क्यों नहीं होनी चाहिए.

Most of the people involved in the meeting of the Chief Minister Yogi were told, so they all said that till now the governments have given subsidies to Muslims for ‘Haj yatra’ (maize-medina) and then why the Government help for ‘Kailash Mansarovar’ Should not be.

ध्यान देने वाली बात यह है कि आज ही योगी सरकार के मंत्री ‘मोहसिन रजा’ ने अमीर मुस्लिमों से अपील की थी कि वे हज यात्रा को जाने के लिए मिलने वाली सब्सिडी छोड़ दें. ये उन्हें सबका साथ सबका विकास का हिस्सा बना देगा.

The point to note is that today’s Yogi Government minister, Mohsin Raza, had appealed to the wealthy Muslims to leave the subsidy for getting Haj pilgrimage. This will make them all part of development with everyone.

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

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योगी सरकार ने मदरसों के लिए जारी किया नया फरमान, जिसे देखे मुस्लिम संगठनो समेत PM मोदी हैरान

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘योगी आदित्यनाथ’ ने जिले के मदरसों को लेकर एक बहुत ही शानदार फैसला सुनाया है. मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद देशभर के मुस्लिम समुदाय में हलचल पेया हो गई है. जानकारी के अनुसार उन्होंने फैसला सुनते हुए कहा है कि राज्य के उन मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, जिनका पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है.

Gorakhpur: Uttar Pradesh’s Chief Minister Yogi Adityanath has given a very good decision about the madarsas of the district. After the decision of the chief minister, there has been a stir in the Muslim community across the country. According to the information, he said while hearing the decision that the madarsas of the state will be closed, which have not been registered on the portal.

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि जिले के 80 से अधिक मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, इनमे से 66 ने तो पंजीकरण भी नहीं कराया है. उधर एक दर्जन से अधिक मदरसों को बंद करने की संस्तुति की गई है. बंद होने वालों में से चार आलिया मदरसे हैं. मतलब इन मदरसों में बोर्ड कक्षाएं चलती हैं. अल्प संख्यक विभाग की जांच में इन मदरसों में मानक पूरे नहीं पाए गए.

According to information received from the sources, the Chief Minister Yogi said that more than 80 madarsas of the district will be closed, 66 of them have not even registered. There is a proposal to close more than a dozen madarsas. Of the closures, four are alia madarsas. Meaning board classes run in these madarsas. Standards were not found in these madrassas in the investigation of the minority department.

जानकारी के अनुसार पता चला है कि सरकार ने मदरसों पंजीकरण के लिए अलग पोर्टल बनाया हुआ है. इस पोर्टल पर सभी मदरसों का पंजीकरण होना आवश्यक है. शिक्षक, छात्र-छात्रा समेत मदरसे से जुड़ी हर तरह की जानकारी इस पोर्टल पर होनी चाहिए, परंतु कई मदरसों का प्रबंधन इसके लिए आगे नहीं आया. सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा है कि जिले में साढ़े तीन सौ से ज्यादा मदरसे हैं, परंतु इनमें से 287 ने ही रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है. पंजीकरण हुआ मदरसों में से भी केवल 266 मदरसों का विवरण पोर्टल पर लॉक किया गया है.

According to information, it has been found that the government has created separate portal for registration of madrassas. Registration of all the madarsas on this portal is necessary. All kinds of information related to the madarsas, including teachers, students, should be on this portal, but the management of many madarsas did not come forward for this. The sources said that there are more than three and a half hundred madrassas in the district, but only 287 of them have been registered. Details of only 266 madrassas have been locked in the portal from the registered madrassas.

जिला अल्पसंख्यक अधिकारी ‘एसपी तिवारी’ नेजानकारी देते हुए कहा है कि रजिस्ट्रेशन कराने वाले मदरसों की जांच कराई गई. इनमें से 14 में मानक पूरे नहीं पाए गए. इन मदरसों को बंद करने की संस्तुति की गई है. साथ ही जिन मदरसों का पंजीकरण नहीं हुआ है, जवाब नहीं मिलने पर उनको भी बंद कर दिया जाएगा.

District minority officer ‘SP Tiwari’ has informed that the examination of the madarsas who got the registration was done. Standards were not found to be completed in 14 of these. The recommendation to close these madarsas has been recommended. Also, the madarsas who have not registered, they will also be closed if the answer is not received.

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कश्मीरी पंडितों के खिलाफ बड़ी साजिश फिर दोहराएगा इतिहास |

19 अक्टूबर को पूरी दुनिया में दीपावली थी, जहाँ हिन्दू अपने इस त्यौहार को धूमधाम से मना रहे थे, पर कश्मीर में एक हिन्दू परिवार को दीपावली पर दिया जलाना बहुत महंगा पड़ा, और हिन्दू परिवार की जान आफत में आ गयी, दिया जलाने के कारण स्थानीय मुसलमान भड़क गए और उन्होंने हिन्दू परिवार पर हमला दिया

On 19th October, there was Diwali in the whole world, where Hindus were celebrating this festival with pomp, but the burning of a Hindu family on Diwali was very costly, and the life of the Hindu family came in disaster, due to the burning of Local Muslims flared up and attacked the Hindu family

मामला है कश्मीर के कुलगाम जिले की है, जहाँ पर 1 ही हिन्दू परिवार रह रहा था, दीपावली पर इस हिन्दू परिवार ने दिया जलाया, जब ये बात स्थानीय मुसलमानो को पता चला तो पूरी भीड़ आ गयी और हिन्दू परिवार पर हमला करते हुए पत्थरबाजी और नारेबाजी की गयी

The matter is of Kulgam district of Kashmir, where only 1 Hindu family was living, this Hindu family burnt Diwali on this Hindu family, when it became known to the local Muslims, the whole crowd came and attacked the Hindu family and stoneing them. Slogan

इस मामले को मीडिया ने पूरी तरह दबा दिया, कुलगाम से 1990 के बाद से ही हिन्दुओ को भगा दिया गया, किसी भी तरह मैनेज करके एक हिन्दू परिवार वही रह गया, वो अपने पूर्वजो की भूमि को छोड़ना नहीं चाहते थे, और इस दिवाली उन्होंने बस दिया जलाया जिसके बाद स्थानीय मुसलमानो ने उस परिवार पर हमला कर दिया

The family has given full testimony of the attack after the burning of Diwali on her, whose video you have seen above but the media has taken full vows to suppress the matter.

जम्मू (जेएनएन)। दक्षिण कश्मीर के जिला कुलगाम के रेनिपोरा गांव में दीपावली के दिन समुदाय विशेष ने एक कश्मीरी पंडित परिवार को घाटी से बेदखल करने का फरमान सुनाया। उसके घर पथराव तक किया गया। मामला उछलते ही पुलिस इसे दो परिवारों का भूमि विवाद बता रही है।

Jammu (JnN). On the day of Diwali in Renipora village of Kulgam, district of South Kashmir, the community special decreed the removal of a Kashmiri Pandit family from the valley. His house was made up to stone pelting. As the matter goes out, the police is telling the land of two families to dispute.

सोशल साइट पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कश्मीरी पंडित दंपती सड़क पर कश्मीर छोड़ने के फरमान के विरोध में प्रदर्शन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय समाचार चैनल के वीडियो में दिखाया गया है कि जिला कृषि अधिकारी अवतार कृष्ण और उनकी पत्नी मुख्य सड़क पर यातायात अवरुद्ध कर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने पड़ोस में रहने वाले तीन भाइयों पर आरोप लगाया कि गांव से निकालने के लिए उन्होंने दीपावली की रात उनके घर पर पथराव किया। उस समय वे घर के बाहर मोमबत्ती जला रहे थे। जैसे-तैसे उन्होंने अपनी जान बचाई।

A video has been viral on the social site, in which Kashmiri Pandit couple is seen appearing in protest against the order to leave Kashmir on the road. In the video of the local news channel it is shown that District Agriculture Officer Avtar Krishna and his wife are blocking the traffic on the main road. They accused the three brothers living in the neighborhood that they took stones at their house on Deepawali night to take them out of the village. At that time they were burning candles outside the house. By the way, they saved their lives.

अवतार ने कहा कि मैं विस्थापित नहीं हूं। मैं घाटी में अपने घर में मुसलमान भाइयों के बीच पूरी गरिमा के साथ रह रहा हूं। उन्होंने राज्य सरकार से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि तीन भाइयों को छोड़ बाकी मुस्लिम भाइयों ने हमेशा उनके साथ अच्छा व्यवहार किया है। वीडियो में शामिल बुजुर्ग कश्मीरी पंडित महिला ने भी पड़ोसियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्रीधर पंत ने कहा कि उन्होंने एडीसी तलत परवेज के साथ शनिवार को पंडित परिवार से मुलाकात की।

Avtar said that I am not displaced. I am living in the valley with full dignity among the Muslim brothers in my house. He demanded protection from the state government and said that except for the three brothers, the other Muslim brothers have always treated them well. The elderly Kashmiri Pandit woman in the video also accused neighbors of harassment. Senior Superintendent of Police Shridhar Pant said that he met the Pandit family on Saturday with ADC Talat Parvez.

पंडित परिवार और उनके पड़ोसी दोनों की भूमि के एक टुकड़े पर नजर है। इसी सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर झगड़ा चला आ रहा है। उन्होंने पहले भी उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया है, जिस पर जांच चल रही है। कानून के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस नियंत्रण कक्ष, कुलगाम में शिकायत मिलते ही पुलिस की एक टीम परिवार की मदद के लिए भेज दी गई थी। पंडित परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है।

Look at a piece of land of the Pandit family and their neighbors. There is a quarrel over possession of this government land. They have filed a case before their complaint, which is under investigation. Action will also be taken under the law. A police spokesman said that once a complaint was received in Police Control Room, Kulgam, a team of police was sent to help the family. The case has been registered against the Pandit family’s complaint.

Look at a piece of land of the Pandit family and their neighbors. There is a quarrel over possession of this government land. They have filed a case before their complaint, which is under investigation. Action will also be taken under the law. A police spokesman said that once a complaint was received in Police Control Room, Kulgam, a team of police was sent to help the family. The case has been registered against the Pandit family’s complaint.

अपने ऊपर दिवाली के दिए जलाने के बाद हुए हमले की पूरी गवाही इस परिवार ने दी है जिसका वीडियो भी आपने ऊपर देख लिया पर मीडिया ने इस मामले को दबाने की पूरी कसम उठाई हुई है

ये विडियो भी देखें :

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VIDEO: ”निकाह मुताह”जिस पर मुस्लिम समुदाय को बात करने में भी शर्म आती है,जानिये विस्तार से

औरत को बचपन से इतना डराया जाता है कि अगर वह शरीयत और मौलवी के खिलाफ जाएगी तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा. जबकि कुरान खुद सबसे पहले यह कहता है कि तुम खुद पढ़ो और समझो. लेकिन वहां तक बात पहुंचती ही नहीं है. मौलवियों ने व्याख्या करने की बात अपने हक में कर ली है. एक तरफ निकाह में तीन तलाक वही दूसरी तरफ हलाला और मुताह जैसी दरिंदगी भी समाज को दीमक की तरह चाट रही है,

The woman is so scared of her childhood that if she goes against Shariat and Maulvi, then it will happen, it will happen. While the Koran itself first says that you read and understand yourself. But there is no point in reaching the point. The clerics have done the right thing to interpret. On one side there are three divorces in the marriage; the other side like the halala and mutha on the other side is licking the society like a termite,

तीन तलाक के खिलाफ अभियान से मुस्लिम समुदाय के लोगों या मौलवियों को आहत नहीं होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से आज के दौर में तीन तलाक हो रहा है, वह पूरी तरह इस्लाम के खिलाफ है. इससे इस्लाम के जो पांच सिद्धांत हैं, जो हिदायत है, उसमें कोई तब्दीली नहीं होती. जो चीज थोड़ी-सी बदल रही है, वह शरीयत है. अब शरीयत बाद की चीज है, कुरान के डेढ़ सौ साल बाद की. उसका मकसद यही है कि कुरान को समझने और विश्लेषण करने में मदद करे. आज भी हम लोग कुरान को विश्लेषण कर सकते हैं कि आज के दौर में क्या जरूरी है. इस मामले में तो कुरान में बिल्कुल साफ निर्देश हैं कि तीनों तलाक के बीच में एक महीना दस दिन, एक महीना दस दिन का गैप होना चाहिए. तो इसमें समाज को आहत होने या तीन तलाक का बचाव करने की कोई गुंजाइश ही नजर नहीं आती.

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The campaign against the three divorces should not hurt the Muslim community or the clerics, because the way in which three divorces are happening today, it is against the whole of Islam. There is no change in the five principles of Islam, which is the instruction. The thing which is changing a bit, it is Sharia. Now Shari’a is the next thing, after 150 years of the Qur’an. His purpose is to help the Qur’an understand and analyze it. Even today, we can analyze the Qur’an that what is needed in today’s era. In this case, there is absolutely clear instructions in the Quran that between the three divorces, there should be one month ten days, one month ten days gap. So there is no scope to hurt the society or defend the three divorces.

एक चीज इसमें और जोड़ना चाहती हूं. इसके बिना ये मांग अधूरी है. मेरे ख्याल से इस मांग में ये भी जोड़ा जाना चाहिए कि औरत को भी उतनी ही आसानी हो खुला लेने में, जितना कि मर्द को है. औरत भी तीन बार ये कह सके और तलाक हो जाए. क्योंकि औरत अगर खुला मांगती है तो अंतत: देता मर्द ही है. अगर वह नहीं चाहे तो उसे मनाना पड़ता है किसी बुजुर्ग से, दोस्त से, या समाज से दबाव डलवाना पड़ता है या कुछ संपत्ति वगैरह देकर मनाना पड़ता है. बच्चों से मिलने का अधिकार छोड़ना पड़ता है या मेहर की रकम छोड़नी पड़ती है. इस तरह कुछ चीजें छोड़कर महिला को तलाक मिलता है. इस सबके बावजूद जो फाइनल प्रोनाउंसमेंट है तलाक का, वह पुरुष ही देता है. महिला सब कुछ दे दे, तब भी तलाक-तलाक-तलाक का घोषणा पुरुष ही करता है. तो मैं समझती हूं कि इसके बिना बात अधूरी रहेगी. इसे न छोड़ा जाए. इस मांग में ये चीज जोड़ी जानी चाहिए कि औरत भी अगर तीन महीने का वक्त लेकर तीन बार तलाक कह दे तो उसे तलाक मान लिया जाना चाहिए.

One thing I want to add to it. Without this the demand is incomplete. I think this should also be added in this demand that the woman is equally as comfortable in getting open, as much as the man. The woman can say it three times and divorces. Because if the woman asks for open then finally it is a man. If he does not want to do it, he has to persevere by pressure from an elderly, friend, or a society, or have to do some work to do so. The right to meet children or to leave the amount of Mehar. In this way, leaving a few things, the woman gets a divorce. Despite all this, the final pro bonoment is divorced, the man only gives it. The woman gives everything, even then the man divides divorce-divorce-divorce. So I understand that the thing will remain incomplete without it. Do not leave it. This thing should be added to this demand that if the woman also demands a divorce for three months, she should be treated as a divorce, she should be treated as a divorce.

औरत के खुला मांगने के मामले शायद ही कभी सुनने को मिलते हैं, क्योंकि उसमें वक्त बहुत लगता है. जब महिला को खुला लेना हो तो उसे एक से दूसरे मौलवी के पास जाना पड़ता है. कभी बरेलवी के पास, कभी दारुल उलूम के पास. वह मौलवी के पास जाती है तो वे हजारों वजहें पूछते हैं कि तुम क्यों खुला लेना चाहती हो. जबकि मर्द को कोई वजह नहीं देनी पड़ती. औरत वजह भी बताए तो उसे खारिज कर देते हैं कि ये वजह तो इस काबिल है ही नहीं कि तुम्हें खुला दिया जाए. इसमें आठ-साल दस साल लग जाते हैं.

The rare cases of women seeking openings are rarely heard because it takes time too much. When the woman has to open, she has to go from one to the other cleric. Ever near Barelavi, sometime near Darul Uloom. When he goes to the cleric, they ask thousands of reasons why you want to open. Whereas the man does not have to give reasons If the woman gives the reason, then she dismisses that this reason is not enough for you to be open. It takes eight years ten years.

मौलवी लोगों के फैसले ज्यादातर महिलाओं के खिलाफ इसलिए होते हैं क्योंकि वे मुख्य धर्मग्रंथ कुरान को मानते ही नहीं हैं. बुनियादी तौर पर यह लड़ाई तीन तलाक की लड़ाई नहीं है, यह कुरान शरीफ को आधार मानने की लड़ाई है. कुरान को मानने की जगह वह शरिया और क्या-क्या चलन है, ये सब बताया करते हैं. जैसे, जो निकाहनामा है उसमें ये लिखा होना चाहिए कि औरत भी अगर चाहे तो वह तलाक ले सकती है लेकिन उसे काट दिया जाता है. कहा जाता है कि निकाह के वक्त तलाक की बात करना अपशकुन है. वे असली कुरान कभी कोट ही नहीं करते.

The decisions of the clerics are mostly against women because they do not believe in the Koran as the main scripture. Basically, this fight is not a fight for three divorces, it is a fight to believe in Koran Sharif. Instead of adhering to the Qur’an, it is the Sharia and what is the trend, they tell all this. As such, in the case of a marriage, it should be written that if a woman wants it, she can get divorced but she is bitten. It is said that talking about divorce at the time of marriage is unfortunate. They do not coat the real Quran ever.

मेरे पास जो भी है वह अल्लाह का दिया हुआ है. अगर अल्लाह की ये ख्वाहिश होती कि मैं इसे छिपाकर रखूं तो वे उसका कुछ न कुछ इंतजाम करते. मुझे सिर से अपना पूरा चेहरा ढककर रखने की क्यों जरूरत है? बुरके से ढकी हुई औरतें घर में भी कहां सुरक्षित हैं? वे कौन लोग हैं जो इस तरह के लिबास या रहन-सहन को ही इज्जत की नजर से देखते हैं?

Whatever is with me is given to Allah. If Allah had wished that I hide it, they would have made some arrangements for him. Why do I need to cover my entire face from the head? Where are the women covered with burqa even at home? Who are those people who look like this kind of veneer or lifestyle?

औरत जात को बचपन से इतना डराया जाता है कि अगर वह शरीयत और मौलवी के खिलाफ जाती है तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा. जबकि कुरान खुद सबसे पहले यह कहता है कि तुम खुद पढ़ो और समझो. लेकिन वहां तक बात पहुंचती ही नहीं है. मौलवियों ने व्याख्या करने की बात अपने हक में कर ली है. ईरान में एक बेचारी कुर्रतुल ऐन ने दावा किया था कि कुरान में लिखा है कि आखिरी नबी हजरत मुहम्मद होंगे लेकिन मैं तो नादिया (महिला नबी) हूं. उसके बारे में तो कुरान कोई बात कहता नहीं है इसलिए नादिया तो हो ही सकती है. लेकिन उस बेचारी को तो मार दिया गया.

Female caste is so scared of childhood that if she goes against Shariat and Maulvi, then it will happen, it will happen. While the Koran itself first says that you read and understand yourself. But there is no point in reaching the point. The clerics have done the right thing to interpret. A poor Qrratul in Iran had claimed that in the Quran it is written that the last prophet will be Hazrat Muhammad but I am Nadia (female prophet). The Koran does not say anything about it, therefore, Nadia can be. But that poor man was killed.

अभी मैंने अपनी किताब ‘डिनाइड बाइ अल्लाह’लिखी तो तलाक, हलाला, खुला, मुताह आदि पर सच्ची कहानियों के सहारे तमाम सारे सवाल उठाए कि कुरान क्या कहता है, शरीयत क्या कहती है, संविधान क्या कहता है और हो क्या रहा है, तो उस पर फतवा जारी हो गया कि ये तो मुसलमान हैं ही नहीं. इन्हें ये सब कहने का कोई हक नहीं है. हमारा तो कहना है कि हम मुसलमान हैं या नहीं हैं, लेकिन हमारे साथ जो हो रहा है उस पर हम क्यों टिप्पणी नहीं कर सकते. जब रूपकंवर को जलाया गया और उसे सती का नाम दिया गया, हम हर विरोध और हर जुलूस में शामिल थे. इस तरह अगर कोई हिंदू या ईसाई भी है तो वह क्यों नहीं बोल सकता?

Now I have written all the questions in my book, ‘Dinaid By Allah’, then divorces, halala, open, mutha etc., with the help of true stories that what the Quran says, what Shari’a says, what the constitution says and what is happening The fatwa was issued on that it was not a Muslim, nor was it a Muslim. They have no right to say all this. Ours is to say that we are Muslims or not, but why can not we comment on what is happening with us. When the metaphor was burnt and given the name of Sati, we were involved in every protest and every procession. If such a person is a Hindu or a Christian then why can not he speak?

तलाक तो एक अहम मुद्दा है कि जल्दबाजी में किसी ने तलाक दे दिया और उसे भी अलगाव मान लिया गया, लेकिन एक और मुद्दा जो इससे जुड़ा है, वो है हलाला. इसमें ये व्यवस्था है कि मर्द ने जल्दबाजी में तलाक दे दिया, अब वह पछता रहा है, अपना फैसला वापस लेना चाहता है तो वह ऐसा कर नहीं सकता. उस औरत की पहले किसी और से शादी हो और वह अमल में लाई जाए. फिर या तो उसका तलाक हो या वह मियां मर जाए, तब पहला शौहर उससे शादी कर सकता है. ये प्रथा बीते कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़ गई है. एक बार तलाक हो गया और फिर मियां-बीवी चाहें तो भी उनके पास सूरत नहीं है, सिवाय एक प्रताड़ना भरी प्रक्रिया से गुजरने के. औरतों की वह प्रताड़ना जब बढ़ी है तो औरतें एक होकर आगे आ रही हैं. वे चाहती नहीं कि हड़बड़ी में तलाक हो जिसे सुधारने के लिए हलाला झेलना पड़ता है. ये बहुत शर्मनाक है कि अपने पति के पास ही वापस जाने के लिए एक रात किसी और मर्द के साथ रहें. इस पर बात होनी चाहिए. मुस्लिम महिलाओं की मानसिक बुनावट ऐसी है कि वे जल्दी आवाज नहीं उठातीं. अब सूरत ऐसी बन गई है कि पचास-साठ हजार पढ़ी-लिखी महिलाएं इकट्ठा होकर विरोध में आगे आ रही हैं.

Divorce is an important issue that someone in a hurry has divorced and it is considered as isolation, but another issue which is related to it is that Halala is. There is a system in it that the man divorced hastily, now he is repenting, wants to withdraw his decision, he can not do it. That woman should get married before anyone else and she should be brought to justice. Then either he is divorced or he dies, then the first husband can marry him. This practice has increased a lot in the last few years. Once they got divorced, and if they want Mian-Bīvī, they do not even have a chance, except to go through a torture process. When the woman’s harassment has increased, then the women are coming forward together. They do not want to be divorced in a hurry, which is to get rid of

दूसरी एक प्रथा है मुताह. वह एक तरह का फौरी विवाह है. उसके दिन तय होते हैं कि वह दस दिन, सौ दिन या कुछ निर्धारित दिन का हो सकता है. हालांकि, इसके ऐतिहासिक संदर्भ पर मुझे शक है लेकिन माना जाता है कि जब फौजें चलती थीं तो जहां फतह मिलती थी, सैनिक वहां की औरतों से बलात्कार करते थे. अगर बच्चे हो जाते थे तो वे नाजायज कहे जाते थे. इसलिए फौरी विवाह का सिस्टम बनाया गया. इसमें जितने दिन का करार होगा, उसके बाद वह खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा. हाल में कई मामले ऐसे सामने आए हैं कि खाड़ी देशों से महीने-दो महीने के लिए मर्द वापस आते हैं तो उनको वक्त बिताने के लिए कोई चाहिए. जिम्मेदारी भी नहीं निभानी है. दूसरे उनको इस्लाम का भी डर है कि जन्नत मिलेगी कि नहीं मिलेगी. मजा भी करना है. तो वे यहां आकर इस तरह की फौरी शादियां करते हैं. इसमें तो एक बार कोई लड़की फंस गई तो उसकी शादी कभी नहीं होती. फिर उसे मुताही बोलते हैं. जैसे-जैसे उसकी जवानी ढलती है, उसके पैसे घटते जाते हैं. यहां तक होता है कि कई औरतों को सिर्फ खाने-कपड़े पर रखा जाता है, उनका यौन उत्पीड़न किया जाता है और वे घर का काम भी करती हैं. यह एक तरह की कानूनी वेश्यावृत्ति है. इसमें मौलवी भी खबर रखते हैं कि किसके घर की लड़की सयानी हो गई है और किसके घर का लड़का लौटने वाला है. वे इसमें बिचौलिये की भूमिका निभाते हैं. अब ये सब मसले कभी नहीं उठते कि मुस्लिम समुदाय को भी इस पर बात करने में शर्म आती है. इसे सिर्फ महिलाएं झेलती हैं.

The other is a custom that is Mutta. She is a kind of fast marriage. His days are fixed that he can be of ten days, hundred days or a few days. However, I doubt it on its historical context but it is believed that when the forces were moving, where the Fatah was found, the soldiers used to rape women there. Had children been called, then they were called illegitimate. So the immediate marriage system was created. After all the deal will be there, after that it will end itself. Recently, a number of cases have emerged that if the men return from Gulf countries for months or two months, then they need someone to spend time. There is also no responsibility to be done. Others also fear Islam that there will be Paradise or not. Have fun too. So they come here and do such fast weddings. In this, once a girl gets stuck, she is never married. Then he speaks bitterly. As his youth moves, his money decreases. Even so, many women are kept on clothes, they are sexually assaulted and they also do homework. This is a kind of legal prostitution. In it, the clerics also keep a note of whose girl’s home has become childless and whose son is going to return. They play the role of middlemen in it. Now all these issues never arise that the Muslim community is ashamed to talk about it. It only takes women

तलाक के साथ एक अहम मुद्दा है हलाला. इसमें ये है कि मर्द ने जल्दबाजी में तलाक दे दिया, अब वह अपना फैसला वापस लेना चाहता है तो वह ऐसा कर नहीं सकता. उस औरत की पहले किसी और से शादी हो और वह अमल में लाई जाए. फिर या तो उसका तलाक हो या वह मियां मर जाए, तब पहला शौहर उससे शादी कर सकता है. ये बहुत शर्मनाक है

An important issue with divorce is Halala. It is here that the man divorced in a hurry, now he wants to take his decision back so that he can not do it. That woman should get married before anyone else and she should be brought to justice. Then either he is divorced or he dies, then the first husband can marry him. It is very embarrassing

दूसरी बात ये है कि तलाक के अलावा जितनी रूढ़ियां हैं पर्दा वगैरह, इनको कभी तार्किक ढंग से चुनौती नहीं दी गई. आप सीधे-सीधे बहस में उतरिए, बातचीत कीजिए. मैं कहती हूं कि मेरे पास जो भी है वह अल्लाह का दिया हुआ है. अब उसको देखते हुए मेरा चेहरा तो अल्लाह ने दिया है. तो अगर अल्लाह की ये ख्वाहिश होती कि मैं इसे छिपा कर रखूं तो वे उसका कुछ न कुछ इंतजाम करते. मुझे सिर से अपना पूरा चेहरा ढंककर रखने की क्यों जरूरत है? ये सब बेकार की बातें हैं कि औरत घर में रहेगी तो सुरक्षित रहेगी, खुद को ढंककर रखेगी तो सुरक्षित रहेगी. बुरके से ढंकी हुई औरतें घर में भी कहां सुरक्षित हैं? हमारे समाज में मर्द कहता है कि तुम ऐसे रहो तो सुरक्षित हो. औरतों में आत्मविश्वास की कमी है, इसलिए वे भी मान लेती हैं कि हम इसी तरह सुरक्षित हैं. वे सोचती हैं कि जैसा कहा जा रहा है, वे वैसे ही रहेंगी तो उनको इज्जत की नजर से देखा जाएगा. वे कौन लोग हैं जो इस तरह के लिबास या रहन-सहन को ही इज्जत की नजर से देखते हैं? उनकी सोच और उनकी मानसिक बनावट पर कभी बात नहीं होती जो कहते हैं कि उसका मुंह खुला था, पहुंचा ऊंचा था या बाजू खुली थी, इसलिए उसे छेड़ा गया.

The second thing is that unlike divorce, the curtains, etc., have never been challenged in a logical manner. You get straight into the debate, negotiate. I say that whatever I have, Allah has given it. Now seeing my face, Allah has given my face. If Allah had wished that I hide it, they would have made some arrangements for him. Why do I need to cover my whole face from the head? All these things are worthless that if the woman remains in the house then she will be safe and keep herself covered then she will be safe. Where are the women covered with burqa even at home? In our society, the man says that if you stay like this then be safe. There is a lack of confidence in women, so they also agree that we are equally safe. They think that if they are going to be like they are being said they will be seen with respect. Who are those people who look like this kind of veneer or lifestyle? There is nothing to say about their thinking and their mental texture which says that his mouth was open, reached high or the side was open, so he was teased.

दो बातें मुसलमान औरतों के पक्ष में जाती हैं. वे बाकी समुदायों की औरतों के बराबर में रह रही हैं. आज उसके पास सब अधिकार हैं. संविधान हमें बराबरी देता है. जो हक हिंदू औरत को है, वही हक मुसलमान औरत को भी है और उसे यह मिलना चाहिए. हम अपनी लड़ाई इस्लाम के नजरिये से न लड़कर इस्लाम और संविधान दोनों के मद्देनजर लड़ेंगे. और संविधान कहीं भी कुरान के आड़े नहीं आ रहा है. वह कहीं से भी खतरे में नहीं आ रहा है.

Two things Muslims go in favor of women. They are living in equal communities of the rest of the communities. Today, he has all the rights. The Constitution equals us. The right is to the Hindu woman, the same woman belongs to the Muslim woman and she should get it. We will fight our efforts not to fight the Islamic view of Islam and the Constitution in the light of both. And the constitution is not being obstructed anywhere in the Koran. He is not in danger from anywhere.

आंबेडकर से किसी ने पूछा था कि पर्सनल लॉ का अलग से प्रावधान क्यों रखा गया है, क्या सभी के लिए एक-समान कानून अच्छा नहीं होगा? उसके जवाब में उन्होंने एक लेख लिखा जिसमें कहा कि समान नागरिक संहिता इतनी बेहतरीन चीज है कि समुदाय भी कुछ समय बाद इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि हमें समान नागरिक संहिता को अपनाना चाहिए, न कि पर्सनल लॉ को अपनाना चाहिए. लेकिन ऐसा हुआ नहीं, अब वजह जो भी रही हो. कम से कम मुसलमानों में तो बिल्कुल नहीं हुआ. अब काफी सारी चीजें आज के दौर में देखते हैं कि काफी कुछ बदलाव शुरू हो गया था. उसे तगड़ा झटका लगा 1986 में, जब शाहबानो के केस को पलट दिया गया. उससे हम लोगों को बहुत नुकसान हुआ.

Someone from Ambedkar had asked why the separate law has been provided separately, will not the same law be good for everyone? In response, he wrote an article in which said that the common civil code is such a wonderful thing that the community will also reach the conclusion after some time that we should adopt the same civil code, not the personal law we should adopt. But that did not happen, now whatever the reason is At least Muslims did not happen at all. Now a lot of things are seen in today’s era that a lot of changes have started. He had a great shock in 1986, when the case of Shah Bano was overturned. We have a lot of harm to the people.

दो चीजें एक साथ हुईं. इधर शाहबानो के केस को पलट दिया गया. उधर पाकिस्तानी तानाशाह जियाउल हक ने 1981-82 में हुदूद कानून लागू किया. उसके तहत बहुत सारी ऐसी चीजें पाकिस्तान में हुईं जो औरतों के खिलाफ गईं. इससे यहां के मौलवियों को यह कहने का मौका मिला कि देखो पाकिस्तान में शरीयत मान ली गई है और तुम लोग नहीं मान रहे हो. शाहबानो का केस उसी का नतीजा था. जबकि आप नंदिता हक्सर की किताब पढ़िए तो सारी मुसलमान औरतें शाहबानो के पक्ष में खड़ी थीं कि उसे उसका हक मिलना चाहिए.

Two things happened together. Here the case of Shah Bano was reversed. On the other hand, Pakistani dictator Jiaul Huq introduced the Hudood Act in 1981-82. There were many such things in Pakistan that went against women who went against women. This gave an opportunity to the clerics to say that Shari’a has been adopted in Pakistan and you are not accepting it. The case of Shah Bano was the result of him. While you read Nandita Haksar’s book, all the Muslim women stood in favor of Shah Bano, that he should get his right.

देखिए, धर्मगुरु किसी भी धर्म का हो, वह मौका लपकने की फिराक में रहता है. शाहबानो के समय का मौका भी मौलवियों ने लपक लिया. उस समय के मंत्री थे जेडआर अंसारी. उन्होंने धमकी दी कि मैं संसद के सामने आग लगा लूंगा तो सारे मर्द घबरा गए कि नहीं-नहीं, कुछ भी हो जाए लेकिन मर्द किसी कम्युनिटी का नहीं जलना चाहिए. औरतें दहेज के लिए या दूसरी वजहों से जलाई जाएं तो जलें. लेकिन मर्द नहीं जलना चाहिए. मौलवी लोग कहते हैं कि मुसलमान के मसले पर सिर्फ मुसलमान बोलें. शाहबानो के केस को कोर्ट में जस्टिस चंद्रचूड़ हेड कर रहे थे. वे जज हैं, इस्लामिक लॉ पर डिग्री है, लेकिन आप कहेंगे कि नहीं, वे हिंदू हैं इसलिए वे अथॉरिटी नहीं हैं. इससे काम नहीं चलेगा. बात-बहस से कोई रास्ता निकलेगा.

Look, the religious leader belongs to any religion, he is in the waiting position to seize the opportunity. The time of Shahbano’s time was also taken by the clerics. The then ministers were Z.R. Ansari. They threatened that if I set fire to Parliament, then all the men were scared or not – no, nothing should happen but the men should not burn any community. Burns for women for dowry or for other reasons. But men should not burn. Maulvi people say that Muslims should speak only on the issue of Muslims. Justice Chandrachud was heading the court in Shah Bano case. They are judges, there is a degree on Islamic law, but you will say no, they are Hindus, therefore they are not the authorities. This will not work. There will be a way out of the debate.

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source political report

बड़ी खबर: मुगलों और नेहरु के हजारो षड्यंत्रों के बाद हिन्दू आज ज़िन्दा है तो उसका कारण मात्र यह शख्स है

पहले वो सब ठप्पे के साथ इफ़्तार पार्टियाँ करते थे, टोपियाँ पहनते थे, सजदे करते थे, नमाज़ पढ़ने का ढोंग करते थे क्योंकि हितैषी तो ये मुसलमानों के भी नहीं थे। ये सब करने के पीछे कारण केवल एक ही था मुसलमानों के थोकबंद वोट बटोरना। चंद रियायतें दे देना, इनके दिलों में हिंदुओं के प्रति नफ़रत पैदा करना और मुसलमानों के ज़्यादा तलवे चाटना कि हिंदुओं में भी मुसलमानों के प्रति नफ़रत पैदा होने लगी थी।

Earlier, all those parties used to perform Ipat parties, used to wear hats, worshiped, used to pretend to read namaz because they were not even Muslims. The only reason behind doing all this was to collect bulk vote of Muslims. To give a few concessions, to create hatred towards the Hindus in their hearts and to lick more sweets of the Muslims, even among the Hindus, started becoming a victim of hatred towards the Muslims.

कांग्रेस, वामपंथी, समाजवादी पार्टी, लालू, मुलायम, ममता बैनर्जी, केजरीवाल जैसे तमाम नेताओं और पार्टियों ने इतने ज़्यादा मुसलमानों के तलवे चाटे कि देश के हिंदुओं में हीन भावना पैदा होने लगी थी। ये नेता हिन्दू होकर भी हिंदुओं को गालियाँ देने, उनका अपमान करने से चूकते नहीं थे। जब भी कोई आतंकी घटना होती तो ये यही कहते थे कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता लेकिन हिंदुओं को झूठे केस में फँसाकर इनको आतंक का धर्म दिख गया। याद कीजिये चिदंबरम का देश की संसद में ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का प्रयोग करना, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा,असीमनन्द जैसे कई निर्दोष हिंदुओं को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार करके अंतहीन यातनाएँ देना। ये सभी लोग मोदी सरकार के आने के बाद इन यातनाओं से मुक्त हुए हैं और जेल से रिहा हुए हैं अगर आज भी कांग्रेस सरकार में होती तो इन लोगों की शायद लाशें भी किसी को न मिलतीं।

All the leaders and parties like the Congress, Leftists, Samajwadi Party, Lalu, Mulayam, Mamta Banerjee, Kejriwal used to laugh so many Muslims that there was inferiority among the Hindus of the country. These leaders did not hesitate to abuse the Hindus, to insult them, even after becoming a Hindu. Whenever there was a terrorist incident, it used to say that there was no religion of terror but they were found to be the religion of terror by trapping the Hindus in a false case. Remember, Chidambaram should use the term ‘saffron terrorism’ in the country’s parliament, arresting innocent Hindus without any evidence, endless tortures by arresting Colonel Purohit, Sadhvi Pragya, Asimanand, without any evidence. All these people have been released from these tortures after being Modi government and have been released from jail. Even if the Congress was in the government today, probably the bodies of these people would not be available to anyone.

याद कीजिये दिग्विजयसिंह का मुंबई के 26/11 हमले में संघ को दोषी बताने वाली क़िताब का विमोचन करना जबकि सारी दुनिया उस वक़्त भी देख रही थी कि सारे आतंकी पाकिस्तान से आये थे। वो तो क़साब ज़िंदा पकड़ा गया वरना कांग्रेस इसमें भी कई निर्दोष हिंदुओं को फँसाकर उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर देते।

Remember Digvijay Singh’s release of the book condemning the Sangh in Mumbai’s 26/11 attacks, while the whole world was also watching that all the terrorists came from Pakistan. That Kasad was caught alive or else the Congress would ruin his life by trapping many innocent Hindus in it too.

देश और हिंदुत्व के शत्रु यही नेता आज मंदिरों की घंटियां बजाने, पूजा अर्चना करने और माथा टेकने को मजबूर हो गए हैं। कभी मंदिर जाने वालों को लड़कियाँ छेड़ने वाला कहने वाला राहुल गाँधी आज खुद को जन्मजात हिन्दू बता रहा है, जबकि ये भी खबर है राहुल गाँधी दो पासपोर्ट हैं जिनमें से एक नाम उनका नाम रॉउल विंसी है। सोनिया गाँधी का मुस्लिम और ईसाई प्रेम किसी से छिपा नहीं है। बाटला हाउस एनकाउंटर में रोने वाली सोनिया आज परदे के पीछे जाकर क्यों बैठी है? बाबा विश्वनाथ की धरती पर जाकर बीमार (?) हुई सोनिया उसके बाद से कभी कहीं नज़र आईं क्या?

The enemies of the country and Hindutva have been forced to play bells of temples, to worship and worship the forehead. Rahul Gandhi, who once said that girls going to the temple, is telling a congenital person, while today it is also reported that Rahul Gandhi has two passports, one of which is his name, Raúl Vínsi. Sonia Gandhi’s Muslim and Christian love is not hidden from anyone. Sonia, who is crying at the Batla House encounter, why is she sitting behind the scenes today? Baba Vishwanath went to the earth and sick? (Sonia?) Have you ever seen somewhere since then?

आज हिंदुओं में शक्ति कहाँ से आई? कौन है वो जिसने सोते हुए हिंदुओं को जगाया है? वही है न 67 साल का ऊर्जावान, राष्ट्रभक्त, कर्मवीर जो कभी दूसरे धर्म का अपमान नहीं करता लेकिन अपने धर्म का पालन पूरी आन बान और शान के साथ करता है, जो सारी दुनिया के सामने जय श्रीराम के नारे लगाता है, जो जापान के प्रधानमंत्री के साथ गंगा आरती करता है, जो दुबई के शाही परिवार से मंदिर के लिए ज़मीन लेकर आता है। विदेशों में रहने वाले मित्र बताते हैं कि आज दुनिया भारतीयों को सम्मान की दृष्टि से देखने लगी है।

Where did the power come from Hindus today? Who is he who has awakened the Hindus while sleeping? That is the 67 years of energetic, nationalist, Karmaveer who never insulted another religion, but followed his religion with full faith and honor, which is shouting Jai Shriram in front of the whole world, which is the Prime Minister of Japan Ganga accompanies the Aarti, which brings the land from the royal family of Dubai to the temple. Friends in foreign countries show that today the world has started looking at Indians with respect.

वो बहुत कुछ हमें दे चुका है और देते ही जा रहा है, वो कभी किसी एक धर्म की बात नहीं करता वो हमेशा 130 करोड़ भारतीयों की बात करता है, इसके पहले वो 6 करोड़ गुजरातियों की बात करता था।

He has given us a lot and has been giving it, he does not talk about any one religion, he always talks about 130 million Indians, before that he used to talk about 6 crore Gujaratis.

ये GST की शुरुआती परेशानियां, ये मंदी का दौर सब कुछ अस्थायी है, ज़रा इतिहास खंगालो उसने भूकम्प से तबाह गुजरात को देश का सबसे उन्नत प्रदेश बना दिया, वो भी तब, जब उसे कोई भी प्रशासनिक अनुभव नहीं था। जबकि आज वो आग में तपकर, तेज धार में कटकर नायाब सोना हीरा बन चुका है। उसकी ईमानदारी, मज़बूती, कठोर परिश्रम का लोहा तो उसके दुश्मन भी मानते हैं, वो भारत को और हिंदुत्व को इतनी ऊँचाई पर ले जायेगा जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं कि होगी।

These are the initial troubles of GST, this recession is all temporary, everything is history. It has destroyed the earthquake and made Gujarat the most advanced state of the country, even then, when it did not have any administrative experience. Whereas today he has become a precious gold diamond by cutting it in the fire and drifting in the fire. The iron of his honesty, strength, hard work, even his enemies believe that, he will take India and Hindutva to such a height which we have never imagined.

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खास खबर :रोहिंग्या को लेकर कोर्ट पर PM मोदी सरकार का क्रोध भड़का, रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ जारी किया नया फरमान, वामपंथियों के वकील समेत SC भी हुआ भौंचक्का…

नई दिल्ली : ऐसा लगता है जैसे हमारे देश में कोर्ट के पास और कोई मुद्दा ही नहीं है जो दूसरे देश से भागे आये रोहिंग्या के मुद्दे को ज़बरदस्त उछाला जा रहा है. पिछले साल से चले आ रहे रोहिंग्या मुद्दे पर आज मोदी सरकार ने कोर्ट को कड़ा जवाब दिया है.

New Delhi: It seems as if there is no issue with the court in our country, the issue of Rohingya being run away from other countries is being thrown out. On the issue of Rohingya issue since last year, Modi Government has given a tough response to the court today.

दरअसल रोहिंग्या मुसलमानों के बचाव पक्ष में वकील प्रशांत भूषण की अपील पर सुनवाई चल रही है. भूषण ने रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने के विरोध में ये अपील दायर की हुई है. कोर्ट ने मोदी सरकार से सवाल किया था कि आखिर क्यों मानवता के आधार पर लाखों रोहिंग्या को भारत में घुसा लेना नहीं चाहिए.

In fact, hearings are being heard on the appeal of advocate Prashant Bhushan in the defense of Rohingya Muslims. This appeal has been filed against Bhushan for sending Rohingya refugees back to Myanmar. The court had questioned the Modi government why why should not lakhs of Rohingya have to enter India on the basis of humanity.

मोदी सरकार का सुप्रीम कोर्ट में करारा जवाब

अभी मिल रही खबर के मुताबिक अवैध रूप से भारत के विभिन्न राज्यों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने हलफनामे में कड़ा जवाब दिया. मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, पहली बात वह उन्हें मज़बूर नहीं कर सकती कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत आने दिया जाए.

Modi government’s verdict in Supreme Court

According to the news now available, the Modi Government has given a strong answer in the affidavit in the Supreme Court on the petition filed against the decision of illegal Rohingya Muslims returning to Myanmar living in different states of India. Modi Government told the Supreme Court; First thing he can not force him to allow Rohingya Muslims to come to India.

मोदी सरकार ने कोर्ट के सामने साफ किया कि जिनके पास वैलिड ट्रेवल सर्टिफिकेट होगा उन्हें ही भारत में आने की अनुमति होगी. मोदी सरकार ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने कहा कि रोहिंग्या मुसलमान अगर बिना वैलिड सर्टिफिकेट के भारत में आते हैं तो यह राष्ट्रहित में नहीं होगा. ये देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़ा है. खुद भारत कि सुरक्षा एजेन्सिया रोहिंग्या को खतरा मानती हैं.

The Modi government clarified to the court that those who have a valid travel certificate will be allowed to come to India. The Modi government said in front of Chief Justice Deepak Mishra’s bench that if Rohingya Muslims come to India without a valid certificate, then it will not be in national interest. It is related to internal and external security of the country. India itself considers security jejuno Rohingya a threat.


तो वहीँ रोहिंग्या के बचाव पक्ष ने सवाल किया कि श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों को तो भारत में प्रवेश दिया जाता है. जिसका मोदी सरकार ने बड़ी बेबाकी से जवाब देते हुए कहा “रोहिंग्या मुसलमानों की तुलना श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों से नहीं की जा सकती है, क्यूंकि द्विपक्षीय संधि के तहत तमिल शरणार्थियों को भारत आने की इजाजत दी गई थी. जबकि म्यांमार के साथ ऐसी कोई संधि नहीं है.”

So the Rohingya defense defended the question that Sri Lankan Tamil refugees are allowed to enter India. The Modi government, in response to the remark, said, “Rohingya Muslims can not be compared to Sri Lankan Tamil refugees, because the Tamil refugees were allowed to come to India under the bilateral treaty. Whereas there is no such treaty with Myanmar. ”
रोहिंग्या मुसलमानों के मामले में सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहले भी कह चुकी है कि इनकी गतिविधियां सन्दिग्ध हैं. खुफिया एजेंसियों के पास सबूत हैं कि उनमें से कई के तार अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथी आतंकवादी संगठनों से जुड़े हैं. लिहाजा इनको वापस म्यांमार भेजना ही उचित होगा. लेकिन फिर भी कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च तक टाल दी है.

In the case of Rohingya Muslims, the government has already said in the Supreme Court that their activities are suspicious. Intelligence agencies have evidence that many of them are linked to international fundamentalist terrorist organizations. So it would be appropriate to send them back to Myanmar. But still the court has now postponed the next hearing of this case till March 19.

अभी तक कश्मीरी पंडित तरस रहे हैं इन्साफ के लिए

हमारे देश में लाखों कश्मीरी पंडितों को अभी तक कश्मीर में वापस नहीं भेजा जा सका है. कश्मीर से कट्टरपंथियों ने बड़ी संख्या में नरसंहार करके कश्मीरी पंडितों को घर छोड़कर पलायन करने पर मज़बूर कर दिया लेकिन कोर्ट उस मुद्दे पर कभी कोई फैसला नहीं सुनाता. बल्कि इसे कई साल पुराना मुद्दा बताकर टाल दिया जाता है. वहां कोर्ट को मानवता नहीं दिखाई देती जबकि रोहिंग्या मुद्दे पर कोर्ट को मानवता दिखाई दे रही है.

So far the Kashmiri Pandits are craving for justice

In our country millions of Kashmiri Pandits have not yet been able to return to Kashmir. Kashmiri fundamentalists massacred a large number of Kashmiri Pandits after leaving the house and forced them to flee, but the court never issues a decision on that issue. Rather, it is postponed as a matter of many years old issue. There the court does not see humanity, while on the Rohingya issue the court is showing humanity.

जब तक कोर्ट में रोहिंग्या के मुद्दे को घसीटा जाएगा तब तक ना जाने कितने रोहिंग्या भारत में घुस चुके होंगे. अभी कुछ दिन पहले ही एक वीडियो वायरल हुआ जिसे बड़े सोशल एक्टिविस्ट्स ने पोस्ट किया. इसमें दो ट्रक भरा कर रोहिंग्या मुस्लमान बंगाल में घुसते दिखाई दे रहे थे. गौरव प्रधान सोनम महाजन सभी ने ये वीडियो पोस्ट किया था जो की बंगाल का बताया जा रहा था. बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि रोहिंग्या का वे खुले दिल से स्वागत करती हैं.

Unless the Rohingya issue is dragged in the court, then how many Rohingyas have entered India? Just a few days ago a video was viral, posted by big social activists. In it, Rohingya Muslims were seen roaming in Bengal by filling two trucks. Gaurav Pradhan Sonam Mahajan all posted this video which was being told of Bengal. Bengal CM Mamta Banerjee had said that she welcomes Rohingya with an open heart.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जम्मू कश्मीर के स्थानीय अखबारों में रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर चिंता जाहिर की गई थी. 27 फरवरी को प्रकाशित कराए गए विज्ञापन में कहा गया है कि ‘रोहिंग्या एक टाइम बम हैं, जम्मू को बचाने के लिए इन्हें यहां से निकालें.’ इसके अगले दिन यानी 28 फरवरी को जारी किए गए विज्ञापन में कहा गया है कि ‘अमन पसंद जम्मूवासियों पर रोहिंग्याओं का बड़ा खतरा मंडरा रहा है. सभी एक हो कर जम्मू को बचाएं.’

 

It is noteworthy that a few days ago there was concern about Rohingya Muslims in the local Jammu and Kashmir local newspapers. The advertisement published on 27th February said that “Rohingya is a time bomb, to save them out of here, to save Jammu.” The advertisement issued on the following day i.e. 28th February has said that ‘Aman Choice Jammu But there is a big threat of Rohingya. Save all by one by one. ‘

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source india mirror