ब्रेकिंग:अमेरिका के रक्षा मंत्री ने दिया ऐसा बयान जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी

मोदी सरकार के आते ही भारत की छवि दुनिया बहुत उभर कर आई है| पूरी दुनिया ने भारत का लोहा माना है और आज भारत दुनिया के सबसे प्रगतिशील देशों में से एक है| भारत ने अपनी छवि को आगे बढाया तो वहीँ पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दिया| भारत की एहमियत आज दुनिया में क्या है आप खुद देख लीजिये…

As the Modi Government comes, the image of India has emerged very much. The whole world is considered as India’s iron and today India is one of the most progressive countries in the world. If India forwarded its image, then she had to make Pakistan naked before the whole world. What is in the world today in the sense that you see yourself …

अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने अमेरिकी संसद से तत्काल प्रभाव से भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा छूट देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रूस से एस-400 वायु संरक्षण मिसाइल प्रणाली खरीद को रोकने के लिए बनाए गए नए कानून के तहत भारत पर प्रतिबंध लगाने से अमेरिका का ही नुकसान होगा।

US Defense Minister Jim Matisse has urged the US Parliament to give National Security Exemption with immediate effect. He said that the ban on India by the new law created by Russia to prevent the purchase of the S-400 air protection missile system will only harm America.

कांग्रेस की सीनेट सशस्त्र सेवा समिति में सुनवाई के दौरान मैटिस ने अमेरिकी सांसदों से कहा कि भारत और अन्य देशों को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय सुरक्षा छूट दी जानी चाहिए, जो ‘काउंटरिंग अमेरिका एडवर्जरिज थ्रू सेक्शन एक्ट‘ (सीएएटीएसए) के तहत प्रतिबंधों से दूर रहने के लिए रूस के हथियार लेने से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

During the hearing at Congress Senate Armed Services Committee, Matisse told American lawmakers that national security exemption should be given to India and other countries with immediate effect, to stay away from restrictions under the ‘Countering America Advisers Through Section Act’ (CAATSA). Are trying to avoid taking Russia’s weapons.

‘सीएएटीएसए’ पर 2017 अगस्त में हस्ताक्षर किए गए थे जो इस साल जनवरी से प्रभाव में आया। यह प्रावधान ट्रंप प्रशासन को उन देशों या कंपनियों को दंडित करने का अधिकार देता है जो रूस के रक्षा या खुफिया क्षेत्र से जुड़ा कोई लेन देन करता है।

The ‘CAATSA’ was signed in August 2017, which came into effect from January this year. This provision gives the Trump Administration the right to punish those countries or companies who make any transactions related to Russia’s defense or intelligence.

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बोले, ‘एशिया में भारत सबसे महत्वपूर्ण देश’

मैटिस ने अमेरिकी सांसदों से कहा, ‘हम जब इस पूरे क्षेत्र की ओर देखते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण जो है, वह मुझे भारत दिखता है। पृथ्वी पर सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश और शायद एक ऐसा देश जहां हमें कई साझा हित खोजने का अवसर मिल रहा है, ऐसा अवसर सदियों में एक बार ही मिलता है

The ‘CAATSA’ was signed in August 2017, which came into effect from January this year. This provision gives the Trump Administration the right to punish those countries or companies who make any transactions related to Russia’s defense or intelligence.

इस बीच, जिम मैटिस ने भारत-अमेरिका के मौजूदा संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत शायद एक ऐसा देश है जहां अमेरिका को कई साझा हित खोजने का सदियों में एक बार मिलने वाला अवसर हाथ लगा है।

In the meantime, Jim Matisse outlining the existing Indo-US relationship, said that India is probably a country where America has found an opportunity to meet once a year in finding many common interests.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सरकारी एजेंसियों को विदेशों में हथियारों की बिक्री में तेजी लाने और विस्तार करने का आदेश दिया था, जिसमें सहयोगी सेनाओं को मजबूत करने के लिए उन्नत ड्रोन का निर्यात शामिल है। यह कदम भारत जैसे देशों के लिए सहायक होने की उम्मीद है।

US President Donald Trump recently ordered government agencies to expedite and expand arms sales abroad, which includes the export of advanced drones to strengthen the Allies. This move is expected to be helpful for countries like India.

 

यह भी देखे

https://youtu.be/WE3MmmBzG4k

https://youtu.be/o9LQnPMci4I

source political report

गुस्से से ठनका इजराइल का माथा तिल्मिलकर कर दिया ऐसा काम पाक में मची चीख पुकार

नई दिल्ली : कहने को इजराइल एक मणिपुर से भी छोटा देश है लेकिन वो कैसे अपने दुश्मन देश को जवाब को देता है ये उसके अड़ोस-पड़ोस देश भी सहम जाते हैं. इजराइल इंतज़ार करने और बात करने वाले देशों में नहीं है वो सीधा एक्शन लेता है और ऐसा ज़बरदस्त एक्शन लेता है कि दुश्मन सालों तक दुबारा आंख नहीं उठाता. ऐसे में किसी देश की इतनी हिम्मत हो जाए कि वो इजराइल के लड़ाकू जेट को मार गिराए. इसे तो हम यही कहेंगे की “आ बैल मुझे मार”.

New Delhi: To say that Israel is a country smaller than Manipur but how she gives answers to her enemy country, even her neighboring countries agree. Israel is not in the waiting and talking countries, he takes direct action and takes such a tremendous action that the enemy does not take a second eye again for years. In such a situation, a country should have the courage to kill Israel’s fighter jet. We would say that “bullock kill me”

30 सालों में पहली बार इजराइल ने बरसाई मौत इस देश पर
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक इजराइल ने सीरिया पर वो तबाही मचाई है जो आज से पहले पिछले तीस साल में भी ऐसी भयंकर मंज़र नहीं देखा होगा. इजराइल ने सीरिया के ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमो की ज़ोरदार बरसात कर दी है.

For the first time in 30 years Israel has died on this country.
According to the big news now available, Israel has caused a catastrophe on Syria, which has not seen such a terrible deficiency in the past thirty years before today. Israel has rattled bombs on Syria’s Iranian military bases.

इसराइल के बारे में कहा जाता है कि वो अपने देश में नागरिक नहीं सेना तैयार करता है. वहां के हर नागरिक के लिए सेना में सेवा देना ज़रूरी है. पश्चिम के देश मध्य-पूर्व में एक ठिकाने के रूप में इसराइल को सबसे सुरक्षित देश मानते हैं. अगर अभी भारत में ऐसा नियम लागू कर दिया जाय तो सबके सीने में जलन उठने लगेगी, देश असहिष्णु हो जाएगा और पीएम मोदी को सत्ता से ही उतार दिया जाएगा वोट बैंक पॉलिटिक्स करके.

It is said about Israel that he prepares a civilian army in his country. It is important for every citizen to serve in the army. The West’s country treats Israel as the safest country in the Middle East as a hideout. If such a rule is implemented in India then the burning sensation in everyone’s chest will start rising, the country will become intolerant and PM Modi will be removed from power by vote bank politics.

इसराइली वायुसेना के वरिष्ठ जनरल तोमर बार ने कहा कि साल 1982 के लेबनान युद्ध के बाद यह सीरिया के ख़िलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला है. इसराइली सेना ने पहली बार सीरिया में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा भी किया है. इससे पहले शनिवार को सीरियाई सेना ने एक इसराइली लड़ाकू जेट एफ-16 को मार गिराया था. जबकि विमान में सवार दोनों पायलट बाहर निकलने में कामयाब रहे. हालांकि दोनों घायल हो गए. इनमें से एक की हालत गंभीर है.

Israeli Air Force Senior General Tomar Bar said that it was the biggest attack against Syria since the 1982 Lebanon war. For the first time, the Israeli army has claimed to target the Iranian military bases in Syria. Earlier on Saturday, the Syrian army had killed an Israeli fighter jet F-16. While the two pilots aboard the pilot managed to get out. Although both were injured. One of these conditions is serious.

इसरायली सेना का कहना है कि ईरानी ड्रोन के संचालन केंद्र को नष्ट करने के मकसद से हमारा लड़ाकू जेट सीरिया सीमा के भीतर गया था, तभी उस पर एंटी एयरक्राफ्ट गन से फायर हुआ. विमान के पायलट की जान बच गई है और वह सुरक्षित है. लेकिन लड़ाकू जेट इजराइल में आ कर गिरा. हमले से ध्वस्त हुए विमान का मलबा इजरायली सेना ने वीडियो फुटेज में दिखाया है.

The Israeli army says that in order to destroy the operating center of the Iranian drone, our fighter jet went inside the Syrian border, then it was fired with anti-aircraft guns. The pilot’s life has survived and he is safe. But the fighter jets came to Israel and dropped. The debris of the plane that was destroyed by the attack showed the Israeli army in the video footage.

इसराइल सेना के प्रवक्ता जोनाथन कोनरीकस ने कहा, “हमने ख़ासतौर पर 12 अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया जिनमें से 8 सीरिया की हवाई रक्षा प्रणाली से जुड़े हैं. ये वहीं हैं जिनसे इसराइली विमान पर मिसाइलें दागीं गईं थीं. अन्य चार ठिकाने बेहद ख़ास हैं क्योंकि वो सीरिया के भीतर ईरानी सैन्य ठिकानें थे. ये सभी सीरिया के भीतर ईरान के सैन्य प्रयासों का हिस्सा हैं.”

Israel Army spokesman Jonathan Conrecus said, “We specifically target 12 different targets, of which 8 are associated with the Syrian air defense system. These are the only missiles fired on Israeli aircraft. The other four hideouts are very special because they were Iranian military bases within Syria. These are all part of Iran’s military efforts within Syria. ”

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने दी कड़ी चेतवानी, हमारे धैर्य की परीक्षा न ली जाय
अभी खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीरिया से लगी सीमा का दौरा करके इजरायल के धैर्य की परीक्षा न लेने की चेतावनी दी थी. उल्लेखनीय है कि सीरिया में ईरान और चरमपंथी संगठन हिज्बुल्ला राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थन में लड़ रहे हैं। ये दोनों ही इजरायल के खिलाफ हैं। इसलिए सीमा पर जब-तब टकराव होता रहता है.

Israeli PM Benjamin Netanyahu did not take the verdict of Chetwani, our patience
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu himself warned himself not to take a test of Israel’s patience by visiting the border with Syria. It is notable that Iran and extremist organizations in Syria, Hezbollah, are fighting in favor of President Bashar al-Assad. Both of these are against Israel. Therefore, there is a confrontation on the boundary.

इसराइल 1948 में बना. 69 साल का इसराइल क्षेत्रफल के मामले में भारत के मणिपुर से भी छोटा है. आबादी भी 85 लाख के आसपास है.खनिज़ संपदा के मामले में भी इसराइल भारत के सामने कहीं टिकता नहीं है. इसके बावजूद इसराइल का शुमार दुनिया के उन देशों में है, जिनकी तकनीकी और सैन्य क्षमता की मिसाल दुनिया भर में दी जाती है.

Israel was built in 1948. Israel in 69 years of age is smaller than Manipur of India. The population is also around 85 lakh. Even in the case of mineral wealth, Israel does not have any standing in front of India. Despite this, Israel is one of the world’s countries, whose technical and military capabilities are illustrated in the world.

कभी मज़ाक उड़ाया जाता था इजराइल का
इसराइल के गठन के महज दो साल बाद 1950 में देश का पहला व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी अमरीका के लिए भेजा गया. इसराइल बिज़नेस पार्टनर के लिए परेशान था. इसराइल के पास उस तरह के प्राकृतिक संसाधन नहीं थे जिसके आधार पर वो अपनी अर्थव्यवस्था को आकार दे पाता. तब वहां न तेल था और न ही खनिज़ संपदा.

Ever ridiculed Israel
Just two years after the formation of Israel, in 1950 the country’s first business delegation was sent to Southern America. Israel was troubled for business partner. Israel did not have such natural resources on which they could shape their economy. Then there was no oil nor mineral wealth.

कभी इजराइल देश का सभी जगह मज़ाक उड़ाया जाता था लेकिन आज की तारीख़ में इसराइल हाई-टेक सुपरपावर है और वह दुनिया भर में आधुनिक हथियार बेचने के मामले में काफ़ी आगे है. हर साल वो क़रीब 6.5 अरब डॉलर का हथियार बेचता है.

Sometimes Israel was joked all over the country, but in today’s time Israel is a high-tech superpowers and it is quite ahead in terms of selling modern weaponry around the world. Every year he sells close to 6.5 billion dollars of weapons.

यह भी देखे

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

https://www.youtube.com/watch?v=2p5FWA_BBz4

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सऊदी अरब ने इजराइल को लेकर किया ये बड़ा जबरजस्त फैसला, पाक मुस्लिम रोये खून के आंसू- सभी मुस्लिम देशो में मचा हडकंप

नई दिल्ली : कट्टरपंथी आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने वाला है. सलाफी कट्टरपंथ की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है, ऐसे में आधी सदी से भी ज्यादा वक्त तक तेल पर निर्भर रहने के बाद सऊदी अरब अब कमाई के अन्य साधन तलाश रहा है. ऐसे में सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे देख पाकिस्तान समेत दुनियाभर के मुस्लिमों की मानो दुनिया ही हिल गयी है.

New Delhi: Radical terror is going to end the nomination from the whole world. Saudi Arabia is now coming to the knees, the father of terror in the guise of Salafi fundamentalist. In Saudi Arabia, there is a huge slowdown in the oil business for quite some time, after Saudi Arabia relied on oil for more than half a century, Saudi Arabia is now looking for other means of earning. In such a situation, Saudi Arabia has taken a decision, which is seen by the Muslims all over the world including Pakistan as the world has shaken.

इजराइल के साथ संबंध बहाली के लिए तैयार सऊदी अरब !
सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंध बहाली का प्रस्ताव पेश कर दिया है. जिसे देख दुनियाभर के उन कट्टरपंथी मुस्लिमों की दुनिया ही मानो हिल गयी है, जिन्हे जन्म से केवल यही सिखाया गया कि यहूदी उनके दुश्मन हैं. आइये अब आपको बताते है कि आखिर सऊदी ने ऐसा सनसनीखेज कदम उठाने का फैसला क्यों लिया.

Ready to restart relations with Israel, Saudi Arabia!
Saudi Arabia has proposed a proposal to restore relations with Israel. Who has seen the world of radical Muslims from all over the world shaken, who were taught only from birth that Jews are their enemies. Let us now tell you why Saeed has decided to take such a sensational step.

कंगाली के कगार पर सऊदी
दरसल 2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी, जिससे हालात बदल गए. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में, जहाँ अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी. वहां 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा.

Saudi on the verge of bankruptcy
After the conclusion of the 2014 oil business, there was a sharp slowdown, the situation changed. There is a considerable reduction in Saudi government revenue. The budget deficit record was $ 97 billion last year. This is the reason why Saudi Arabia, which is called the biggest economy of the Gulf region, where no tax was levied so far and the government also offered a lot of subsidies. There will be VAT on all services and products at the rate of 5% on the first quarter of 2018.

इजराइल से दोस्ती के पीछे स्वार्थ ?
इसके पीछे पैसों की यारी है, तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है और ऊपर से ईरान भी तेल बाजार में सऊदी अरब को अच्छी-खासी टक्कर दे रहा है. ऐसे में सऊदी अरब अब अपने दूसरे प्राकृतिक संसाधन यानी रेगिस्तान का रुख कर रहा है. सऊदी किंगडम हजारों किलोमीटर रेगिस्तानी जमीन पर नए-नए शहर बसाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नौकरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

Selfishness behind friendship with Israel?
There is a lot of money behind this, there is a huge slowdown in the oil business and above all, Iran is also giving a good deal to the Saudi Arabian market. In this way, Saudi Arabia is now moving towards its second natural resource ie desert. The Saudi Kingdom is working on plans to set up new cities on thousands of kilometers of desert land, so that jobs and foreign investment can be boosted.

इजराइल ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली कि वो रेगिस्तान में पानी की कमी व् अन्य प्राकृतिक सहूलियतों के बिना भी फल-फूल रहा है. ऐसे में इन शहरों को बसाने के लिए और उन्हें सभी सहूलियतों मुहैय्या कराने के लिए सऊदी अरब को इजराइल की तकनीक की जरुरत तो पड़ेगी ही. इसी चक्कर में सऊदी अरब ‘तेल के खेल’ की मुश्किलों को समझते हुए अब नई संभावनाएं तलाशने पर मजबूर हुआ है.

Israel developed such technology that it is also flourishing in the desert without water scarcity and other natural conveniences. In such a situation, Saudi Arabia will need Israeli technology to settle these cities and to provide them all the facilities. Understanding the difficulties of Saudi Arabia’s “Oil Sports” in this round, it is now forced to explore new possibilities.

अमेरिका की मदद से दोस्ती की पहल !
हालांकि सऊदी अरब, इजराइल के साथ दोस्ती काफी गुपचुप रूप से धीरे-धीरे कर रहा है, ताकि कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क ना जाएँ. अभी सब कुछ पर्दे के पीछे है, लेकिन इस्राइल के चैनल-10 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब ने इस्राइल के साथ समझौते का कदम बढ़ा दिया है. सदियों से जिन्हे अपना दुश्मन माना है, उनसे सीधे जाकर कैसे कह दें कि चलो दोस्ती कर लो. इसलिए इसके लिए सऊदी ने अमेरिका का सहारा लिया है.

Friendship initiative with the help of the US!
However, friendship with Saudi Arabia is very quietly making friendship with Israel so that radical Muslims do not flare up. Now everything is behind the scenes, but according to Israel’s channel-10 report, Saudi Arabia has stepped up the deal with Israel. For centuries, who have believed in their enemies, go straight from them and tell them that let’s be friends. So Saudi has taken the US support for this.

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकर कुश्नर और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुश्नर दोनों अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका के इजराइल से भी बहुत अच्छे संबंध हैं, इसलिए सऊदी अरब ने कुशनर के माध्यम से इजराईल के पास अपना संदेश पहुंचाया है. सऊदी अरब इजराइली व्यापारियों को वीजा देने पर राजी है.

According to the Israeli media reports, Crown Prince Muhammad bin Salman and Kushner, both of Kushner and the Saudi Arabians, by the advice of the American President Trump, are both good friends. There are also good relations with Israel in the US, so Saudi Arabia has conveyed its message to Israel through a Kushanar. Saudi Arabia agreed to give visa to Israeli businessmen.

यह भी देखे :

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

https://youtu.be/BVuWDLCqpCM

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