बड़ी खबर: अजित भारती का वामपंथी पत्रकार रविश पर बड़ा खुलासा, आप पत्रकार नही बल्कि स्टुडिओ में बैठे….

NDTV रवीश कुमार की पत्रकारिता से लगभग सभी वाकिफ है! वो पत्रकारिता के नाम पर जात-पात, अराजकता और समाज को तोड़ने का कम् करना अच्छे से जानते है! उनके प्राइम टाइम को देखकर ऐसा लगता है की किसी अजेंडे के तहत अपने शब्दों को जनता के बिच परोस रहे है! उनको बहुसंख्योको में ही साड़ी खामिया नजर आती है, देश में कोई भी घटना घटित हो उसे किस ओर मोड़ना है ये उन्हें बखूबी आता है! और एक बात कहना उचित होगा की वो स्टुडिओ में बैठकर पत्रकार काम और बिपक्ष की भूमिका ज्यादा निभाते है!

रविश कुमार के इसी रवैये और पत्रकारिता से आहात, बिहार बेगूसराय के एक ब्लॉगर अजित भारती ने रविश कुमार की साड़ी पोल-पट्टी खोल कर रख दी! आप निचे अजित भारती जी का पूरा पोस्ट देख सकते है! इस लेख का वीडियो आर्टिकल के आखिरी में पोस्ट किया हुआ है जिसे अजित भारती ने ही बनाया है:-

प्रिय रवीश जी,

आपका ‘आकाश में झूठ की धूल’ वाला लेख पढ़ा। मूड ख़राब हो गया। क्योंकि इस झूठ की धूल में आपने भी तो खूब गर्दा उड़ाया है, फिर आप पत्रकारिता के आलोकनाथ क्यों बनना चाह रहे हैं? शुरुआत आपने उस शब्द से की है जो आपके हर चौथे प्राइम टाइम में पाँच मिनट ले लेता है: भय। भय शब्द से आपको इतना प्रेम है कि आपको स्टूडियो से बाहर गए बिना, चार-पाँच ट्रोल करके गरियाने वालों की बातों से भय होने लगा है!

बाहर निकला कीजिए, धूप में विटामिन डी होता है। ये बात मैंने क्यों कही, जबकि इसका कोई संबंध नहीं है? वो इसलिए कि आपकी बातों का भी समाज के वर्तमान परिदृश्य से कोई संबंध नहीं है। आपको अजेंडा चलाना है, वो आप बख़ूबी चला रहे हैं। हो सकता है आप निःस्वार्थ ये कार्य कर रहे हों, राजदीप या सगारिका की तरह नहीं, लेकिन कर आप अजेंडाबाजी ही रहे हैं।

चूँकि आपके मतलब की सरकार नहीं है, तो वो भय का गणतंत्र हो गया और आकाश में झूठ की बदली छा गई? आगे आपने लिखा है कि देश में एक आंदोलन का माहौल था, लोग विकल्प तलाश रहे थे, और एक विकल्प उभरा। आप ये लिखना भूल गए कि देश में आंदोलन का माहौल किस पार्टी के शासनकाल के कारण बना था। आप ये बताना भूल गए कि जनता का आक्रोश, जिसे आपने ‘रेबेल जनादेश’ लिखा है, वो कॉन्ग्रेस की नीतियों और लूट के कारण था।

ये जनादेश भाजपा को मिला, जिसके पुरज़ोर विरोध में आप बिना बात के ही, अपने ही द्वारा बनाए गए सूक्ति वाक्यों के निर्देशन के हिसाब से खड़े दिखते हैं। आक्रोश के जनादेश को भय के जनादेश में बदल दिए जाने की बात कैसे पता चली आपको? क्या इस बात से कि हर रोज ‘भय का माहौल है-भय का माहौल है’ रटने से आप सच में डर में जीने लगे हैं? बार-बार किसी बात को दोहराइएगा तो सच में वैसा विश्वास होने लगता है। आपके साथ वही हुआ है। आप पत्रकार हैं, नेता मत बनिए। पत्रकार का काम ख़बर पहुँचाना होता है, उसे समझने में मदद करनी होती है, पक्ष पकड़कर झूलना नहीं होता। आप झूल रहे हैं क्योंकि आपको आदत हो गई है।

आगे आपने लिखा है कि ऐसा माहौल बना दिया गया है कि आदमी सवाल नहीं कर सकता। आपको सवाल पूछने नहीं दिया गया, तो आपको लगता है कि कोई भी सवाल नहीं कर पा रहा? आप रोज प्राइम टाइम में जो अंजेंडाबाजी करते हैं, और सवाल पूछते हैं वो क्या है? हवाहवाई बातें करते हुए, किसी से व्यक्तिगत घृणा पालकर, उसे अपनी इच्छा से ‘अवतार’ कहते हुए, आप खुद ही उसे अपने घृणा के लिए मूर्ति के रूप में हर रोज तराश रहे हैं। आपको इससे किक मिलती है कि कोई सामने है जिसको आप जो चाहे कह सकते हैं, क्योंकि आपके पास माइक है।

आपने ये भी लिखा है कि आप जब उँगली उठाने लगे तो लोग आपसे सवाल पूछने लगे। ग़ज़ब बात है! आपको क्या यूएन से इम्यूनिटी मिली हुई है कि आपकी घटिया पत्रकारिता पर भी सवाल न उठे? आप मोदी के द्वारा इंटरव्यू न दिए जाने पर ये लिख रहे हैं कि देश में कोई सवाल ही नहीं पूछ पा रहा, और आपसे ये पूछ लिया गया कि कॉन्ग्रेस के काल में आप चुप क्यों थे, हिन्दुओं पर हमले के वक्त प्राइम टाइम क्यों नहीं, प्रणय रॉय कांड पर जाँच एजेंसियों की बातों पर सवाल क्यों नहीं, तब तो आप नई दुल्हन बनकर भारत में बाघों की घटती संख्या पर लेख लिखने लगते हैं! आपसे सवाल क्यों न किया जाय?

फिर आपको योजना आयोग के भंग कर दिए जाने से समस्या होती है मानो आपके मामाजी की नौकरी लगी थी, वो चली गई। किसी सरकार को उसकी उपयोगिता समझ में नहीं आई, और संवैधानिक दायरे में रहकर उसने एक जड़वत् संस्था को भंग कर दिया तो क्या दिक्कत है? उसकी जगह नीति आयोग आया, और अपना काम कर रहा है। आपको ये क्यों लगता है कि पचास साल पहले बनी संस्था की प्रासंगिकता आज भी बनी ही रहेगी? हो सकता है कि जिस विजन के साथ योजना आयोग को बनाया गया, वो हर पाँच साल पर परिणाम न दे पा रहा हो। हो सकता है वहाँ एक नए नजिरए की ज़रूरत थी, जिसे नई सरकार ने अपनाया। आपको इसके भंग होने से क्या प्रॉब्लम है?

उसके अगले पैराग्राफ़ में आप नीचे गिरते-गिरते बहुत नीचे गिर जाते हैं। लगता है कि आपको शब्द संख्या पूरा करने का टार्गेट था, और आपने ये पैराग्राफ़ घुसेड़ दिया। इस पैराग्राफ़ से साबित हो जाता है कि आपको सरकार की नीतियों से नहीं, उस व्यक्ति से विशेष घृणा है। आप लिखते हैं कि मोदी का खुद को प्रधान सेवक कहना एक झूठ था। ये झूठ क्यों और कैसे है, इसका कारण आप ये बताते हैं कि नेहरू जी ने ये बात बहुत पहले कही थी। मेरा सवाल ये है सर कि मोदी ने ये बात कहाँ क्लेम कर दिया कि वो खुद को प्रधान सेवक कहने वाला पहला आदमी है? आप तो इतनी नीचता पर उतर आए कि इसको प्लेजेरिज्म तक कह डाला!

https://www.facebook.com/AjeetBh/videos/1894617383906278/

एक पत्रकार का इस बात को प्लेजेरिज्म कहना हद दर्जे की बेवक़ूफ़ी है क्योंकि जो तर्क आपने दिए हैं उस हिसाब से नेहरू के द्वारा इस्तेमाल किए हुए शब्द, क्रिया, विशेषण, संज्ञा आदि तो पहले भी किसी ने बोले होंगे, तो क्या नेहरू को मैं चोर कह दूँ? या आप जो शब्द लिख रहे हैं उसे अमीर खुसरो ने पहले कहा तो मैं आपको प्लेजेरिज्म करने वाला बता दूँ? ये किस तरह की पत्रकारिता है भाई?

आपको दुःख होता है कि आपके पेश

यह भी देखे

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/hsfxfSRtdUs

source name :political report

VIDEO: NDTV के रविश ने जब गाँववालों से मोदी के खिलाफ सवाल किये, तो गाँववालों ने दिया करारा जवाब!

रविश कुमार पत्रकारिता के वजह से कम और विवादों के वजह से ज्यादा सुर्ख़ियो में रहते है, कभी मोदी विरोधी खबरों के लिए तो कभी धर्म-जाती के नाम पर भेद भाव करने के लिए! और तो और हिन्दुओं को भी जाती में बांटकर खबरे दिखाने के लिए रविश के साथ साथ उनका चॅनेल NDTV काफी मशहूर रहा है | अभी कुछ महीनो पहले रविश कुमार के भाई के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए थे जिसपर रविश कुमार ने छुपी साध रखी थी |

Ravish Kumar is more interested in journalism because of journalism and because of controversy, sometimes for the anti-Modi news, then to divide the name of religion and caste! And along with Ravish, his channel, NDTV, has been quite famous for sharing the news in the caste and other Hindus. Just a few months ago, criminal cases against Ravish Kumar’s brother had been registered on which Ravish Kumar had kept the secret.

ज्ञात हो की रविश कुमार और NDTV ने JNU मसले पर भी कन्हैया को हीरो बनाने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ा था, जबकि कैन्हैया और उसके साथ यूनिवर्सिटी कैंपस में कश्मीर की आज़ादी और देश विरोधी नारे लगाने के दोषी थे! हलाकि उस समय बहुत से पत्रकार कह रहे थे की वीडियो झूठा था, लेकिन जाँच में पाया गया की JNU में देशविरोधी नारे लगे थे और 4 वीडियो सही पाये गए है जिनके साथ कोई छेड़ छाड़ नहीं की गई थी |

It should be known that Ravish Kumar and NDTV had left no stone unturned to make Kanhaiya a hero even on the JNU issue, while Cainhaiya and along with him were guilty of Kashmiri freedom and anti-nation slogans in the university campus! However, many journalists were saying that the video was false, but the investigation found that there were anti-country slogans in JNU and 4 videos were found correct, with whom no teaser was fired.

NDTV अपने देश विरोधी रवैये के वजह से सुर्खियों में खूब रहता है, राष्ट्रवादियों ने तो चॅनेल की बंद करने की मांग कई बार सोशल मीडिया पर उठाई है! अभी हाल ही में संबित पात्रा ने भी NDTV के बहिष्कार करने की बात कहि थी! क्युकी न्यूज़ एंकर निधि राजदान ने संबित के साथ बत्तमीजी करते हुए चॅनेल से जाने को कहा था |

NDTV is full of headlines because of its anti-national attitude; nationalists have even raised the demand for the closure of the channels on social media several times! More recently, the concerned Patra also talked abo

ut the boycott of NDTV! The Cookie News Anchor Fund Razdan had asked to go to the channel while chatting with him.

NDTV पत्रकार रविश कुमार को कौन नही जानता ये वही पत्रकार हैं जो अपने चैनल में जात पूछते हैं। रविश कुमार एक गाँव पहुंचा. मोदी जी के नोटबंदी अभियान के खिलाफ कुछ “जन आक्रोश” की तस्वीरें इकठ्ठा करने. लेकिन ये क्या, वहां तो कुछ और ही हो गया! और जो भी हुआ, कसम से हमें तो देख के परम-आनंद की अनुभूति हो गई! ये आज का सबसे मस्त वाला विडियो है |

Who does not know NDTV journalist Ravish Kumar is the same journalist who asks for going to his channel. Ravish Kumar reached a village. Collect photos of some “public resentment” against Modi’s note-taking campaign. But what is there, there is only something else! And whatever happened, we experienced the ultimate bliss of seeing us! This is the most fun video of today.

देखिये ये मजेदार विडियो जब NDTV का रविश कुमार, जबरदस्ती गांववालों से मोदी जी के खिलाफ नोटबंदी पर कुछ कहने के लिए पुरजोर कोशिश की, जिसके बाद गांव वालो ने देखिये किया किया:-

See this funny video when Ravish Kumar of NDTV, forcefully tried to say something about the ban on Modi ji against the journalists, after which the villagers did the following: –

sourcename:politicalreport

वामपंथी पत्रकार राजदीप और रविश ने फिर उगला जहर, रोहित सरदाना ने दिखाई औकात- भिड़े तीनों पत्रकार !

रविवार को हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया। बीजेपी ने जयराम ठाकुर को प्रदेश का मुख्यमंत्री औऱ भाजपा विधायक दल का नेता घोषित किया। जयराम ठाकुर के सीएम बनने की बात मीडिया में आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में राजदीप ने लिखा- जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैंl 11 बीजेपी मुख्यमंत्रियों में (नॉर्थ ईस्ट के बाहर) सिर्फ रघुबर दास और शिवराज सिंह चौहान ओबीसी हैं, बाकी ब्राह्मण, राजपूत और ऊंची जाति के हैंl राजनैतिक तौर पर भारत अब भी नहीं बदला हैl राजदीप अपने इस ट्वीट पर ट्रोल होने लगे। लोग उन्हें पत्रकार होकर जाति-पाति की बात करने के लिए जमकर कोसा।

On Sunday, the name of the new Chief Minister of Himachal Pradesh was announced. BJP declared Jayaram Thakur as the leader of the state’s chief minister and BJP legislature party. Senior journalist Rajdeep Sardesai made a tweet after Jayaram Thakur came to the media about the issue of becoming CM. Rajdeep wrote in this tweet: Jayaram Thakur is the Chief Minister of Himachal Pradesh. 11 BJP Chief Ministers (out of North East) are only Raghubar Das and Shivraj Singh Chauhan OBC, the rest are Brahmin, Rajput and upper caste. India is still not politically Changed l Rajdeep started to troll on this tweet. People are being reporter to him as a journalist and they are very fond of talking to caste

यूजर्स ने उन्हें बीजेपी पर निशाना साधने के लिए लिखा कि इस समय देश का प्रधानमंत्री ओबीसी है, गुजरात के सीएम विजय रुपाणी अल्पसंख्यक हैं और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दलित हैं।

Users wrote to him to target BJP, at this time the Prime Minister of the country is OBC, Gujarat’s CM Vijay Rupani is a minority and President Ramnath Kovind is a Dalit.

राजदीप सरदेसाई के इस ट्वीट पर आम लोगों के साथ ही उनके ही हमपेशे आज तक के न्यूज़ एंकर रोहित सरदाना ने भी निशाना साधा। दरअसल रोहित सरदाना ने भी राजदीप सरदेसाई के बाद एक ट्वीट किया है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस ट्वीट के जरिए रोहित सरदाना ने राजदीप सरदेसाई और रवीश कुमार पर एक साथ तंज कसा है। दरअसल रोहित सरदाना आए दिन सोशल मीडिया में राजदीप और रवीश की मुखालफत करते नजर आते रहे हैं।

Rajdeep Sardesai’s tweet on this tweet, along with the public, News Anchor Rohit Sardana, even today, to his side, also targeted. Indeed, Rohit Sardana has also made a tweet after Rajdeep Sardesai. It is estimated that through this tweet, Rohit Sardana has tensed together on Rajdeep Sardesai and Ravi Kumar. Actually Rohit Sardana has been seen appearing in the social media against Rajdeep and Ravi.

रोहित सरदाना के ट्वीट को देख लोग भी समझ गए कि उन्होंने एक तीर से दो निशाने लगाए हैं। सरदाना के इस ट्वीट पर यूजर्स राजदीप और रवीश दोनों को ट्रोल करने लगे।

https://twitter.com/yugpurushg/status/944949567648276491

यह भी देखें:

https://youtu.be/aGHeWHD0uXg

https://youtu.be/xlRRjGN7n7U

source jansatta.com

रविश कुमार को महंगा पड़ा हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलना, हिन्दुओं ने दे डाला ऐसा मुंहतोड़ जवाब !

हिन्दू समाज को आतंकी बताने वाले सारे सेक्युलर अब गौरी लंकेश का नाम तक नहीं ले रहे, पहले ये लोग दिन भारत में कम से कम 2000 बार गौरी लंकेश का नाम लिया करते थे, और हिन्दुओ को आतंकी, कातिल घोषित करने की कोशिश करते थे

All the secularists who call terrorists of the Hindu society are no longer taking the name of Gauri Lankesh, they used to name Gauri Lankesh at least 2000 times in India, and used to try to declare Hindus as terrorists and murderers.

कर्णाटक में तो कांग्रेस की ही सरकार है, इसलिए वहां की पुलिस आरएसएस के इशारे पर काम कर रही है ऐसा भी नहीं है, पहले गौरी लंकेश का हत्यारे अकबर अली की पहचान हुई, और अब एक और पहचान की गयी है, अकबर अली को हथियार किसने दिया था, जिस से उसने गौरी लंकेश की हत्या की,

In Karnataka, it is the Congress government that is why the police is not working on the direction of the RSS, it is not so, the identity of Akbar Ali, the murderer of Gauri Lankesh, was first identified, and now another identity has been given to Akbar Ali. Who gave it, for which he killed Gauri Lankesh,

अब इसकी जानकारी देखिये:

https://twitter.com/AskAnshul/status/939940644209934336

ताहिर हुसैन ने गौरी लंकेश की हत्या के लिए बन्दुक की सप्लाई की थी जिस से गौरी लंकेश को गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी, आपसी रंजिश में ही उसकी हत्या की गयी थी, गौरी लंकेश एक वामपंथी थी, इस्लामिक चरमपंथियों के साथ मिलकर हिन्दुओ के खिलाफ एजेंडा चलाती थी, इस्लामिक चरमपंथियों ने ही उसकी हत्या कर दी

Tahir Hussain had supplied guns for the assassination of Gauri Lankesh, for which Gauri Lankesh was shot dead and murdered only in a mutual rivalry; Gauri Lankesh was a leftist, together with Islamic extremists, Hindus Against the agenda, Islamic extremists murdered him

एक और बड़ी जानकारी ये भी है की ये ताहिर हुसैन, हिन्दू नाम रखकर भी घूम रहा था इसने अपना हिन्दू नाम रखा हुआ था “अनूप गौड़ा”, ये सारे जिहादी अपराध करने के लिए हिन्दू नाम लेकर घूम रहे है, पकडे जाने पर ही इनकी असली पहचान सामने आती है

Another big information is that this Tahir Hussein was also going on with the name of Hindu, it had named his Hindu name “Anup Gauda”, all of whom are going on hindu with a name for jihadi crime; Real identity is revealed

अब गौरी लंकेश को मारने वाले, हथियार सप्लाई करने वाले सभी इस्लामिक चरमपंथी है, अब जो लोग रविश कुमार, केजरीवाल टाइप के लोग दिन भर में 2000 बार गौरी लंकेश का नाम ले रहे थे, अब ये लोग गौरी लंकेश का नाम लेने को तैयार तक नहीं है, क़त्ल किया, हथियार सप्लाई किया इस्लामिक शक्तियों ने और इन लोगों ने गालियां दी हिन्दुओ को, क्या ये सेक्युलर ब्रिगेड अब हिन्दुओ से माफ़ी मांगेगी ?

Now all the Islamic extremists who have killed Gauri Lankesh, are the weapons suppliers, now people of Ravi Shankar, Kejriwal type people were taking the name of Gauri Lankesh by the name of Gauri Lankesh every day, now they are ready to take the name of Gauri Lankesh Is not the murdered, the weapons supplied by the Islamic powers and these people have abused the Hindus, will the secular brigade now apologize to Hindus?

यह भी देखें :

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

भारत ने एक बार फिर जिद्दी चीन को दी करारी शिकस्त, मिनटों में किया चीन को…

भारत ने रक बार फिर चीन को ऐसा जवाब दिया है, जिसकी चीन ने कभी उम्मीद नहीं की थी. मोदी सरकार ने एक बार फिर चीन को ये बता दिया कि उसकी जो जिदें पहले  चल रही थी, अब वैसा नहीं हो सकता. आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही चीनी राष्टपति शी जिनपिंग ने चीनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा था. जिस पर भारत ने चीन को शांति का पाठ पढ़ाया था!

India has repeatedly responded to China, which China had never expected. The Modi government once again told China that the stance that was going on earlier can not be the same. Let you know that a few days ago, Chinese President Xi Jinping asked the Chinese army to be prepared for war. On which India had taught China the lessons of peace.

भारत को चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के नए कार्यकाल में दोनों देशों के बीच शांति और स्थिरता की उम्मीद है और इधर अपने नए कार्यकाल की शुरआत में ही चीन ने राष्टपति ने आक्रामक तेवर दिखलाए है. शी जिनपिंग ने चीन की सेना को युद्ध जीतने के तरीकों पर काम करने का निर्देश दिया तो दूसरी तरफ भारत की तरफ से इस मामले में सयंमित रुख सामने आ रहा है!

India is hopeful of peace and stability between the two countries during the new term of China’s President Xi Jinping, and in the beginning of its new term, China has shown an aggressive position by the President. Shi Jinping instructed the Chinese army to work on ways to win the war, on the other hand, there is a stance on the side of India.

विदेश मंत्रालय के प्रवकता ने कहा है कि वन बेल्ट वन रोड और कश्मीर पर हमारा रुख साफ है. उन्होंने कहा कि ” हमारा रुख बदला रुख नहीं है. हम वैसी कोनेक्ट्विती चाहते है. जिसमें खुलापन हो, आजादी हो और जिसमें सबकी बराबर की भागीदारी हो. डोकलाम में सैनिकों का जमावड़ा है और क्या चीनी सेना ने भारत को इस बारे में बताया है? इस सवाल के जवाब में रवीश कुमार ने कहा कि एक न्यूज रिपोर्ट में चीन के सैनिकों का चीन की सीमा के अंदर कथित जमावड़ा बताया गया है!

The Ministry of External Affairs has said that our approach to Forest belt One Road and Kashmir is clear. He said, “Our attitude is not change, we want a conception that there is openness, freedom and in which there is equal participation of all.” There is a gathering of soldiers in Dokalam and whether the Chinese army has told India about it? Responding to this question, Ravish Kumar said that in a news report, China’s soldiers are said to have been alleged gathering inside the Chinese border.

उन्होंने कहा कि जिस जगह पर भारत और चीन के सैनिक आमने सामने हुए थे उसमें 28 अगस्त को आमना-सामना ख़त्म होने के बाद कोई बदलाव नहीं आया है और यथास्थिति अभी भी कायम है. उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई भी अटकल लगाना गलत है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि शी जिनपिंग के दोबारा कम्युनिस्ट पार्टी का जनरल सेकेट्री चुने जाने पर प्रधानमंत्री ने बधाई दी है और हम उम्मीद करते है कि पार्टी कांग्रेस की दिशा और नीति द्विपक्षीय संबंधो को आगे बढ़ाएगी. स्थिरता और शांति को भी आगे बढ़ाएगी!

He said that there was no change in the place where the soldiers of India and China had come face to face after the confrontation ended on 28 August and the status quo still persisted. He said that it is wrong to make any speculation about this. The Foreign Ministry spokesman said on Friday that the Prime Minister has congratulated Shi Jinping on being elected the General Secretary of the Communist Party, and we expect the party’s direction and policy to move forward bilateral relations. Stability and peace will also move forward.

आपको बता दें कि दूसरी बार चीन के प्रेसिडेंट बनने के बाद शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानि चीन की सेना से कहा कि वह जंग के लिए तैयार रहे. गौरतलब है कि चीन की सेना में इस वक्त 23 लाख जवान और अफसर है और यह दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी है!

Let me tell you that after becoming the Chinese President for a second time, Xi Jinping told the People’s Liberation Army that he was ready for the war. Significantly, the Chinese army currently has 23 lakh soldiers and officers and it is the world’s largest army.

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस में इस हफ़्ते ही जिनपिंग को बतौर प्रेजिडेंट दूसरा टर्म दिया गया है। हॉन्ग कॉन्ग के साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट अखबार की ख़बर के मुताबिक़ शीर्ष सैन्य अधिकारियों की गुरुवार रात हुई बैठक में शी ने उन्हें पार्टी के प्रति वफादार रहने का आदेश दिया और इसके साथ ही जंग जीतने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करने, नए सुधारों की शुरुआत करने, सैन्य इकाई का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीकों से करने और सख्त से सख्त मानदंडों के अनुरुप सैनिकों का नेतृत्व करने को भी कहा।

This week, Jinping has been given the second term as a President in the Communist Party of China this week. According to the news of Hong Kong’s South China Morning Post newspaper, in a meeting of the top military officers on Thursday night, Shi ordered him to be loyal to the party and to focus on ways to win the war, initiate new reforms In order to manage military units in scientific ways and to lead the soldiers in line with strict strict norms.

विदेश नीति पर आम जनता के सवालों का सरल ढंग से जवाब देने के मकसद से प्रवक्ता ने अपने ट्विटर हैंडल @MEAIndia पर शुक्रवार को लाइव सीरीज की शुरुआत की। इसमें एक सवाल पूछा गया कि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत और जापान किस तरह जुड़ रहे हैं ? इस पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत और जापान संबंध चीन के मुकाबले के लिए नहीं, बल्कि अपने मेरिट पर खड़े हैं।

In order to give simple answers to the questions of the general public on foreign policy, the spokesperson started the Live Series on Twitter on his twitter handle @Mayayandia. One question was asked, how are India and Japan joining in combating the growing influence of China? On this, the spokesman said that India and Japan are standing on their merit, not for China’s competition.

यह भी देखें!

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : newsspirit.com

बड़ी खबर: कोर्ट ने सुनाया आज तक ये बड़ा फैसला, NDTV को लगा जोरदार झटका !

NDTV पर लगातार शिकंजा कसता ही जा रहा है जहाँ पर बोगस लेन-देन होने की वजह से NDTV के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई होनी है और जिसके खिलाफ हुई याचिका को भी अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।दिल्ली हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के फैसले के खिलाफ मीडिया हाउस एनडीटीवी की वह याचिका खारिज कर दी है

Continuous scandal on NDTV is being tightened, where the petition against NDTV has to be heard due to bogus transactions and the petition against it has now been rejected by the court.Delhi High Court has decided the income tax department’s decision Media House against NDTV has rejected the petition

जिसमें एनडीटीवी ने आयकर विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2008-9 और 2009-10 के लिए उसके खिलाफ पुन: आकलन की प्रक्रिया शुरू करने को चुनौती दी थी।अदालत ने कहा कि विभाग के पास यह मानने की वजह है कि संबंधित वर्षों के लिए दिखाया गया कुछ लेन-देन ‘बोगस’ था। यह खबर आते ही प्रणय रॉय के पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक कर रह गयी है।

In which NDTV had challenged the income tax department to initiate the process of re-assessment against him for the financial year 2008-9 and 2009-10. The court said that the department has reason to believe that it has been shown for the relevant years. Some transactions were ‘bogus’. As news comes, the land under the feet of Pranay Roy is slipping away.

कोर्ट में न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट और न्यायमूर्ति नाजमी वजीरी के पीठ ने विभाग द्वारा अस्थायी रूप से चैनल की अचल संपत्तियां, नॉन करेंट निवेश और कर रिफंड को कुर्क करने के आदेश को भी खारिज करने से इनकार कर दिया।आयकर विभाग को आशंका है कि एनडीटीवी इन संपत्तियों बेच सकती है।

In the court, Justice S. The bench of Justice Ravindra Bhat and Justice Najmi Waziri refused to reject the order to temporarily suspend the channel’s fixed assets, non-current investment and tax refunds. The IT department is suspecting that NDTV can sell these properties is.

अदालत ने एनडीटीवी बाकी की पुन: आकलन की प्रक्रिया और अस्थायी कुर्की आदेश को चुनौती देने की याचिका पर 10 अगस्त को निर्णय दिया था, लेकिन इस 42 पृष्ठ के आदेश को बुधवार को अपलोड किया गया है। अस्थायी कुर्की आदेश को उचित ठहराते हुए पीठ ने कहा कि एनडीटीवी इस संपत्तियों की बिक्री कर सकती है, इसको लेकर जताई जा रही आशंका उचित है और इससे कर देनदारी की वसूली की प्रभावित हो सकती है। इससे यह बात भी सामने आ जायेगी की आखिर NDTV पर उस समय की UPA सरकार ने कितनी मेहरबानियां की हुई थी और कहीं ऐसा तो नहीं कि NDTV के कुछ पत्रकार जैसे रवीश कुमार बरखा दत्त और निधि राजदान जैसे बिकाऊ पत्रकारों का भी हिसा इस दलाली में शामिल हो?

The court had on August 10 decided on the petition to challenge the rest of the NDTV rest and the temporary attachment order, but the order of this 42 page has been uploaded on Wednesday. Justifying the provisional attachment order, the bench said that NDTV can sell these properties, the fears being expressed about it may be appropriate and it may affect the recovery of tax liability. This will also reveal that after the NDATV, the UPA government had done so much time, and it was not such that some of the journalists of NDTV such as Raviish Kumar Barkha Dutt and Nidhi Razdan were also included in this brokerage. Ho?

कोर्ट में इस फैसले की अगली सुनवाई से यह बात आईने की तरह साफ हो जाएगी कि यह मामला न सिर्फ बोगस लेन-देन का है बल्कि इसके पीछे वो बड़ी मछलियां भी जाल में फंसेंगी जिन्होंने इस पूरे मामले में अपने मुनाफे के लिए कानून से खिलवाड़ करने की सोची थी।अब हथकड़ियां जल्द ही उन हाथों में हो होगी।

The next hearing of this verdict in the court will make it clear that this matter is not just a bogus transaction but the big fish will also be trapped in the net, who, for the sake of their profit, It was thought of.Now the handcuffs will soon be in those hands.