आतंकवाद के जनक सऊदी से आयी सनसनीखेज खबर, जानकर आप भी ख़ुशी से झूम उठेंगे- आखिर आ ही गया ऊँट पहाड़ के नीचे

नई दिल्ली : इस्लामिक आतंकवाद अब दुनिया से पूरी तरह ख़त्म होने ही वाला है. सलाफी इस्लाम की आड़ में आतंकवाद का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी को झेलता चला आ रहा है, जिसके कारण टैक्स फ्री जीवन अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी. बता दें कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब और यूएई में अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी.

New Delhi: Islamic terrorism is now about to end completely with the world. Saudi Arabia, the father of terrorism under the guise of Salafi Islam, is now coming to the knees. Saudi Arabia has been facing heavy recession in the oil business for quite some time, due to which it will be a matter of tax free life. Let us say that no tax was levied in Saudi Arabia and UAE, which was called the biggest economy of the Gulf region, and the government also offered a lot of subsidies.

कंगाली के कगार पर खाड़ी देश
तेल से मोटी कमाई करने वाले इन देशों में आम जनता को सरकार को अपनी कमाई पर ना तो कोई इनकम टैक्स देना होता था और ना ही किसी उत्पाद और सेवा को खरीदने पर कोई सेल्स टैक्स या सर्विस टैक्स देना होता था. मगर कई दशकों से चली आ रही ये परम्परा अब नए साल से ख़त्म हो जायेगी.

Gulf country on the verge of bankruptcy
In these countries, who were making huge profits from oil, the general public had to pay no income taxes to the government on their earnings and neither had any sales tax or service tax for buying a product or service. But this tradition that has been going on for several decades will now end with the new year.

दरअसल यहाँ की सरकारें तेल से होने वाली कमाई के घटने के कारण काफी परेशान है और अब जनता से टैक्स वसूलने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है. इसी के चलते 1 जनवरी 2018 से ये देश वैल्यू एडेड टैक्स व्यवस्था की शुरुआत करने जा रहे है.

Actually, the governments here are very disturbed due to the loss of earnings from oil and now they have no choice other than to tax the public. Because of this, these countries are going to start the Value Added Tax System from January 1, 2018.

वैट की पहल करने वाले दोनों देश गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के सदस्य हैं और इनके अलावा कुवैत, बहरैन, ओमान और कतर भी इसमें शामिल हैं. इन सभी देशों की कमाई का मुख्य जरिया तेल ही था, इसी को बेच-बेच कर इन देशों के पास अकूत दौलत आती थी. मगर पिछले कुछ सालों में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट से यहाँ की सरकारों को काफी घाटा हो रहा है.

Both of the VAT initiatives are members of the Gulf Cooperation Council and besides this Kuwait, Bahrain, Oman and Qatar are also included in this. The main means of earning of all these countries was oil, selling and selling them to these countries came in great wealth. But in the past few years, the decline in oil prices globally is causing a lot of loss to the governments here.

मिडिल ईस्ट में कम होंगे युद्ध के हालात
ख़ास बात ये भी है कि ये देश कभी शान्ति से भी नहीं रहते और आपस में ही युद्ध करते रहते हैं. यमन और सऊदी के बीच तो आये दिन राकेट व् मिसाइलें दागी जाती हैं. वहीँ ईरान का भी सऊदी से छत्तीस का आंकड़ा रहता है. ऐसे में इन देशों का हथियार और युद्ध की तैयारी के क्षेत्र में भी काफी पैसा खर्च होता है, जिसके चलते सरकार की कमाई लगातार कम हो रही है.

The situation in the Middle East will be less
It is also a special thing that these countries do not live in peace anymore and keep fighting in their midst only. Between Yemen and Saudi, racquets and missiles are tainted. There is also a figure of thirty-six from Iran. In such a situation, the amount of money spent in the field of arms and war preparations of these countries is also being used, due to which the government’s earnings are continuously decreasing.

लिहाजा, दोनों देशों में सरकार ने नए साल से वैट के जरिए खाने-पीने के सामान, कपडे, इलेक्ट्रॉनिक और गैसोलीन, फोन, बिजली और पानी सप्लाई समेत होटल जैसे उत्पाद और सेवा पर कम से कम 5 फीसदी टैक्स लगाने का फैसला किया है.

So, in both the countries, the Government has decided to levy at least 5 per cent tax on goods and services such as hotels including food, clothing, electronic and gasoline, phone, electricity and water supply through VAT for the new year.

इसके अलावा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी वैट लगाने की तैयारी की जा रही है और स्कूली शिक्षा में स्कूल यूनीफॉर्म, किताबें, स्कूल बस फीस और लंच जैसी सेवाओं को टैक्स के दायरे में रखा जाएगा.

Apart from this, preparations for VAT are also being made in the field of higher education and in school education, services such as school uniforms, books, school bus fees and lunch will be kept under tax.

गौतलब है कि खाड़ी देशों में बढ़ते राजस्व घाटे के असर को कम करने के लिए 2015 में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में सभी सदस्य देशों ने टैक्स फ्री तमगा हटाते हुए उत्पाद और सेवाओं पर टैक्स लगाने पर सहमति जताई थी. इसके बाद अब 2018 में सऊदी और यूएई इस दिशा में पहला कदम बढ़ा रहे हैं. माना जा रहा है कि इसके बाद अन्य खाड़ी देश भी इसी फॉर्मूले पर अपने-अपने देश में वैट लगाने की पहल करेंगे.

In order to reduce the impact of the growing revenue deficit in the Gulf countries, in 2015, all the member countries in the Gulf Cooperation Council had agreed to impose tax on products and services by removing the tax free limit. After this, Saudi and UAE are now taking the first step in this direction in 2018. It is believed that after this, other Gulf countries will also take initiative to put VAT on this formula in their respective countries.

मुफ्तखोरी ख़त्म होने से आतंक का सफाया
जानकारों के मुताबिक़ तेल से होने वाली घटती कमाई से दुनिया में आतंकवाद में भी भारी कमी आएगी, क्योंकि सऊदी अरब को ही आतंक का जनक माना जाता है. तेल बेचकर आयी अथाह दौलत का इस्तेमाल दुनिया में सलाफी विचारधारा के प्रचार और आतंक को प्रायोजित करने के लिए किया जाता रहा है मगर अब वो दिन लदने लगे हैं.

Elimination of terror by eliminating free poker
According to experts, decreasing earnings from oil will also lead to a huge reduction in terrorism in the world, because Saudi Arabia is considered to be the father of terror. The wealth that came from selling oil has been used to sponsor Salafi ideology and to sponsor terror in the world but now they are starting to struggle.

जैसे-जैसे सऊदी समेत अन्य खाड़ी देशों का तेल व्यापार ठप्प होता जाएगा, वैसे-वैसे पैसे कमाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी और व्यापारिक सम्बन्ध बनाने के लिए दूसरे देशों के साथ अच्छे तालमेल बिठाने पड़ेंगे. सऊदी अरब तो इजराइल के साथ दोस्ती करने को भी काफी उत्सुक दिखाई दे रहा है.

As the oil trade of other Gulf countries, including Saudi, will get stalled, in the same way, it will have to work hard to earn money and in order to have a business relationship, it will have to adjust to other countries. Saudi Arabia is also looking forward to being friendly with Israel.

सऊदी जलवायु बहुत ज्यादा उद्योग व् व्यापार के अनुकूल भी नहीं है, ऐसे में दूसरे देशों पर निर्भर रहना पडेगा. मेहनत से कमाए गए पैसे का महत्व समझ में आएगा

The Saudi climate is not very favorable to the industry and business, in such cases, it will have to depend on other countries. The importance of hard-earned money will be understood.

 

यह भी देखें:

https://www.youtube.com/watch?v=m7CoPymK4gw

 

https://www.youtube.com/watch?v=8WfEyICu_NM

सऊदी अरब ने इजराइल को लेकर किया ये बड़ा जबरजस्त फैसला, पाक मुस्लिम रोये खून के आंसू- सभी मुस्लिम देशो में मचा हडकंप

नई दिल्ली : कट्टरपंथी आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने वाला है. सलाफी कट्टरपंथ की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है, ऐसे में आधी सदी से भी ज्यादा वक्त तक तेल पर निर्भर रहने के बाद सऊदी अरब अब कमाई के अन्य साधन तलाश रहा है. ऐसे में सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे देख पाकिस्तान समेत दुनियाभर के मुस्लिमों की मानो दुनिया ही हिल गयी है.

New Delhi: Radical terror is going to end the nomination from the whole world. Saudi Arabia is now coming to the knees, the father of terror in the guise of Salafi fundamentalist. In Saudi Arabia, there is a huge slowdown in the oil business for quite some time, after Saudi Arabia relied on oil for more than half a century, Saudi Arabia is now looking for other means of earning. In such a situation, Saudi Arabia has taken a decision, which is seen by the Muslims all over the world including Pakistan as the world has shaken.

इजराइल के साथ संबंध बहाली के लिए तैयार सऊदी अरब !
सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंध बहाली का प्रस्ताव पेश कर दिया है. जिसे देख दुनियाभर के उन कट्टरपंथी मुस्लिमों की दुनिया ही मानो हिल गयी है, जिन्हे जन्म से केवल यही सिखाया गया कि यहूदी उनके दुश्मन हैं. आइये अब आपको बताते है कि आखिर सऊदी ने ऐसा सनसनीखेज कदम उठाने का फैसला क्यों लिया.

Ready to restart relations with Israel, Saudi Arabia!
Saudi Arabia has proposed a proposal to restore relations with Israel. Who has seen the world of radical Muslims from all over the world shaken, who were taught only from birth that Jews are their enemies. Let us now tell you why Saeed has decided to take such a sensational step.

कंगाली के कगार पर सऊदी
दरसल 2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी, जिससे हालात बदल गए. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में, जहाँ अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी. वहां 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा.

Saudi on the verge of bankruptcy
After the conclusion of the 2014 oil business, there was a sharp slowdown, the situation changed. There is a considerable reduction in Saudi government revenue. The budget deficit record was $ 97 billion last year. This is the reason why Saudi Arabia, which is called the biggest economy of the Gulf region, where no tax was levied so far and the government also offered a lot of subsidies. There will be VAT on all services and products at the rate of 5% on the first quarter of 2018.

इजराइल से दोस्ती के पीछे स्वार्थ ?
इसके पीछे पैसों की यारी है, तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है और ऊपर से ईरान भी तेल बाजार में सऊदी अरब को अच्छी-खासी टक्कर दे रहा है. ऐसे में सऊदी अरब अब अपने दूसरे प्राकृतिक संसाधन यानी रेगिस्तान का रुख कर रहा है. सऊदी किंगडम हजारों किलोमीटर रेगिस्तानी जमीन पर नए-नए शहर बसाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नौकरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

Selfishness behind friendship with Israel?
There is a lot of money behind this, there is a huge slowdown in the oil business and above all, Iran is also giving a good deal to the Saudi Arabian market. In this way, Saudi Arabia is now moving towards its second natural resource ie desert. The Saudi Kingdom is working on plans to set up new cities on thousands of kilometers of desert land, so that jobs and foreign investment can be boosted.

इजराइल ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली कि वो रेगिस्तान में पानी की कमी व् अन्य प्राकृतिक सहूलियतों के बिना भी फल-फूल रहा है. ऐसे में इन शहरों को बसाने के लिए और उन्हें सभी सहूलियतों मुहैय्या कराने के लिए सऊदी अरब को इजराइल की तकनीक की जरुरत तो पड़ेगी ही. इसी चक्कर में सऊदी अरब ‘तेल के खेल’ की मुश्किलों को समझते हुए अब नई संभावनाएं तलाशने पर मजबूर हुआ है.

Israel developed such technology that it is also flourishing in the desert without water scarcity and other natural conveniences. In such a situation, Saudi Arabia will need Israeli technology to settle these cities and to provide them all the facilities. Understanding the difficulties of Saudi Arabia’s “Oil Sports” in this round, it is now forced to explore new possibilities.

अमेरिका की मदद से दोस्ती की पहल !
हालांकि सऊदी अरब, इजराइल के साथ दोस्ती काफी गुपचुप रूप से धीरे-धीरे कर रहा है, ताकि कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क ना जाएँ. अभी सब कुछ पर्दे के पीछे है, लेकिन इस्राइल के चैनल-10 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब ने इस्राइल के साथ समझौते का कदम बढ़ा दिया है. सदियों से जिन्हे अपना दुश्मन माना है, उनसे सीधे जाकर कैसे कह दें कि चलो दोस्ती कर लो. इसलिए इसके लिए सऊदी ने अमेरिका का सहारा लिया है.

Friendship initiative with the help of the US!
However, friendship with Saudi Arabia is very quietly making friendship with Israel so that radical Muslims do not flare up. Now everything is behind the scenes, but according to Israel’s channel-10 report, Saudi Arabia has stepped up the deal with Israel. For centuries, who have believed in their enemies, go straight from them and tell them that let’s be friends. So Saudi has taken the US support for this.

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकर कुश्नर और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुश्नर दोनों अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका के इजराइल से भी बहुत अच्छे संबंध हैं, इसलिए सऊदी अरब ने कुशनर के माध्यम से इजराईल के पास अपना संदेश पहुंचाया है. सऊदी अरब इजराइली व्यापारियों को वीजा देने पर राजी है.

According to the Israeli media reports, Crown Prince Muhammad bin Salman and Kushner, both of Kushner and the Saudi Arabians, by the advice of the American President Trump, are both good friends. There are also good relations with Israel in the US, so Saudi Arabia has conveyed its message to Israel through a Kushanar. Saudi Arabia agreed to give visa to Israeli businessmen.

यह भी देखे :

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

https://youtu.be/k87GwTUEGuQ

source political report