सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया भारतीय सेना के खिलाफ जबरदस्त फैसला, गुस्से में आये जवान,अर्बन नक्सलियों व् जिहादी तत्वों की साजिश हुई नाकाम

नई दिल्ली : देश के कुछ इलाके जो चरमपंथियों के विद्रोह को झेल रहे हैं, वहां केंद्र सरकार द्वारा लगाईं गयी आफ्स्पा के खिलाफ बड़ा षड्यंत्र चल रहा है. कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व पिछले कई वर्षों से सरकार पर आफ्स्पा हटाने का दबाव बनाते आये हैं, मगर जब सरकार के सामने दाल नहीं गली तो अब सेना के जवानों को फंसाये जाने की साजिशें शुरू हो गयी हैं. देश की न्यायपालिका ने भी सेना के जवानों की बात सुनने से इंकार कर दिया है.

जवानों की याचिका खारिज“

अफस्पा मामले में अपने हितों को सुरक्षित करने की गुहार लेकर सेना के 356 जवानों और अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है. जवानों का कहना है कि आंतकवाद निरोधक अभियान के दौरान की गई कार्रवाई की भला कैसे सीबीआई या पुलिस जांच कर सकती है?

दरअसल सेना के जवान अपनी जान दांव पर लगा कर आतंकियों का खात्मा करते हैं, कई बार स्थानीय लोग इन आतंकियों का साथ भी देते हैं, ऐसे में उनके खिलाफ भी एक्शन लेना पड़ता है. मगर अब सेना के जवानों को सीबीआई व् पुलिस का डर दिखाया जा रहा है ताकि आतंकवाद विरोधी अभियान को कमजोर किया जा सके. ऐसा लगने लगा है कि सेना को आतंकियों के साथ-साथ सिस्टम व् न्यायपालिका में घुसे अर्बन नक्सलियों से भी लड़ना पडेगा!

`गुस्से में सेना के जवान!“

याचिका खारिज होने पर जवानों का कहना है कि इस बारे में कोर्ट का आदेश सेना का मनोबल तोड़ने वाला है. इससे आंतरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिए फैसले में कहा था कि AFSPA (आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट) वाले इलाकों में हुई मुठभेड़ की भी पुलिस या CBI जांच हो सकती है.

सेना के लोगों पर भी सामान्य अदालत में मुकदमा चल सकता है. सुप्रीम कोर्ट इन दिनों मणिपुर में हुए सेना के ऑपरेशन्स की CBI जांच की निगरानी भी कर रहा है. दरअसल, सेना के 356 जवानों और अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि देश की सुरक्षा के लिए आर्म्‍ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) के तहत कर्तव्य निर्वहन में किए कार्य के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर उनका उत्पीड़न न किया जाए.

ऐसे में उनके हित सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट दिशा निर्देश जारी करे. याचिका में यह भी मांग है कि सरकार को आदेश दिया जाए कि वह सैनिकों के खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित अभियोजनों और एफआईआर को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए.

अर्बन नक्सली व् जिहादी तत्व कर रहे हैं सेना के खिलाफ साजिश!“

याचिका में ये भी मांग उठाई गई थी कि केंद्र सरकार की पूर्व इजाजत के बगैर अफस्पा में प्राप्त शक्तियों के तहत की गई कार्रवाई के लिए कोई एफआईआर या अभियोजन न हो. उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ जांच हो जो कर्तव्य निर्वहन में लगे सैनिकों को दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दाखिल कर निशाना बना रहें हैं. अनावश्यक एफआईआर दर्ज कर परेशान किए गए सैन्य अधिकारियों को उचित मुआवजा दिलाया जाए.

याचिका में कहा गया था कि अफस्पा के तहत सेना के जवान देश में उग्रवाद और छद्म युद्धों को रोकने के लिए लड़ाई लड़ते हैं. ऐसे में अफस्पा प्रोटेक्शन के अंतर्गत सशस्त्र बलों को मिले अधिकारों में कमी किया जाना देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है.

अफस्पा कानून में संशोधन के बिना सैन्य अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. सैन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार की इजाजत लेनी होगी.

आपको बता दें कि यह याचिका सीमा पर कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा करने वाले जवानों का आत्मविश्वास और मनोबल बनाए रखने के लिए भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों की ओर से सामूहिक तौर पर दाखिल की गई थी.

याचिका में यह भी कहा गया था कि जवान अपने कर्तव्य निर्वहन और देश की संप्रभुता व सुरक्षा कायम रखने के लिए विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं. वे इसके लिए अपना जीवन न्‍यौछावर करने में भी नहीं हिचकते, लेकिन उनके सहयोगियों के खिलाफ कर्तव्य निर्वाहन मे किये गये इन कार्यो के लिए आपराधिक मामला दर्ज कर कार्रवाई हो रही है. जिससे उन्हें याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा. संविधान में भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा को सर्वोपरि माना गया है. ऐसे में अगर सेना को संरक्षण नहीं दिया गया तो देश की सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा होगा.

मगर ऐसा लगने लगा है कि देश के बाहर के दुश्मनों से पहले भारत के सिस्टम में घुसे अर्बन नक्सलियों व् जिहादियों का सफाया ज्यादा आवश्यक हो गया है. कहा जा रहा है कि शिक्षा संस्थानों, मीडिया के अलावा देश की न्यायपालिका तक में अर्बन नक्सलियों की घसपैठ भीतर तक हो चुकी है, जो राष्ट्रद्रोहियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और सेना के मनोबल को तोड़ने वाले फैसले ले रहे हैं.

source dd bharti news

दीपावली, गोधरा, गौरी लंकेश और JNU केस पर फैसले के बाद अब SC ने दिया ये बड़ा फैसला, मच सकता है हाहाकार.

भले ही सरकार में मोदी बैठे हो फिर भी संविधान और कानून तो वही है भारत एक सेक्युलर देश है, और सेक्युलर का मतलब क्या होता है अगर आप दैनिक भारत के नियमित पाठक है तो समझते होंगे सेक्युलर कानून बनाओ, सेक्युलर संविधान बनाओ, सिफारिशों से, कोलोजियम सिस्टम से अपने पसंद के जज बनाओ और जो मन वो करो!

Even though Modi is sitting in the government, the Constitution and the law are the same. India is a secular country, and what is the meaning of secular. If you are a regular reader of daily India, then understand that make a secular law, make a secular constitution, Make your choice of judges from the Colosseum system and do whatever you like.

ये है भारत की पूरी न्याय प्रणाली, अक्टूबर 2017 के महीने में भारत की अदालतें एकदम फुल फॉर्म में है. इस महीने में इन अदालतों ने ये ठान लिया है कि सरे अच्छे काम पुरे करके ही दम लेंगे. और अच्छे काम क्या है ये हम आपको बतातें है. ये महिना तो याद रखने लायक है. भारत की अदालतों कुछ फैसले हम आपको बताते है विभिन्न अदालतों के किस तरह है ये अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है!

This is the complete justice system of India, in the month of October 2017, the courts of India are completely in full form. In these months, these courts have decided that they will only be able to fulfill their good work. And we have to do what is good. This month is worth remembering. The courts of India Some decisions we tell you about is the kind of different courts, they are playing their responsibility.

* गुजरात में हाई कोर्ट ने गोधरा स्टेशन पर हिन्दुओ को जिन्दा जला देने वाले 11 विशेष समुदाय वालो को राहत दे दी, उनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया.

* In Gujarat, the High Court gave relief to 11 special community who gave life to Hindus at Godhra station, changed their execution to life imprisonment.

* सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ दीपावली पर ही पटाखों पर रोक लगा दिया, सिर्फ दीपावली पर जलाये जाने वाले पटाखों से ही प्रदुषण होता है.

* पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हिन्दुओ को सख्त निर्देश दिए है की दीपावली पर पटाखे सिर्फ 6 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 30 मिनट के बीच ही फोड़ने है.

* The Punjab and Haryana High Courts have given strict instructions to Hindus that the firecrackers on Deepawali are to be broken only between 6.00 and 30 minutes to 9.30.

* मुंबई हाई कोर्ट ने नक्सली गौरी लंकेश को लिबरल बताया और उसका समर्थन किया, उसके समर्थन में टिपण्णी की.

* The Bombay High Court named Naxalite Gauri Lankesh as Liberal and supported it, commenting on its support.

* दिल्ली की अदालत ने JNU के 15 देशद्रोहियों को देशद्रोही नारों के मामले में राहत भी दी है.

* Delhi court has given relief to 15 JNU traitors in cases of sedition slogans.

और आज सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्यों का भी समर्थन कर दिया, एक तो रोहिंग्या भारतीय नागरिक नहीं है, क़ानूनी तौर पर भी भारत में नहीं आये, घुसबैठिये है सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा की रोहिंग्या मुसलमानो को मत निकालो, कोई कुछ करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही करो, पर सभी रोहिंग्या मुसलमानो को मत निकालो!

And today the Supreme Court also supported Rohingyas, one is not a Rohingya Indian citizen, not even in law, but also the intruder. The Supreme Court today said that the Rohingya Muslims do not vote, if someone does something against them Take action, but do not vote for all Rohinga Muslims.

मिलार्ड की मानें तो उनका कहना है की, जब तक रोहिंग्या कुछ करते नही उनको यही रहने दो, अगर कुछ करे तो कार्यवाही करना, इसका मतलब तो साफ़ है की सांप के डसने तक इंतज़ार करो. भारत के हिन्दुओं देशवासियों आपको तब तक कुछ नहीं बोलना चाहिए जब तक ये रोहिंग्या आपको जान से न मार दें!

According to Millard, he says that, unless Rohingya does nothing, let them remain the same, if you do anything, take action, it means that wait until the snake’s dusks. Hindus of India, you should not say anything until the Rohingya do not kill you alive.

इन अदालतों के अनुसार आप लोगो को जब कुछ बोलना चाहिए जब ये आपको मार दें आपकी जान जा रही हो तब आप इनके खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाओ. उससे पहले बिलकुल नहीं. मिलार्ड की मानें तो ये बेचारे मासूम है निर्दोष है. जब ये हमारी बहन बेटियों के साथ बुरा सलूक कर चुके होंगे तब इनको लगेगा कि हाँ इस लोगो के खिलाफ कोई कार्यवाहीं करनी चाहिए!

According to these courts, when you want to say something when people kill you, you are going to die, then take some tough action against them. Not at all before that. If Millard believes that this poor person is innocent, then innocent is innocent. When they have done a bad deal with our sister daughters, they will feel that there should be no action against this person.

बिलकुल ही सही ये महीना तो याद रखने लायक ही है, पता नहीं कैसे भारत की अदालतें और मिलार्ड फुल फॉर्म में आ गए हैं. और देश के लिए और देशवासियों के लिए इतना सोच रहे है. इस महीने को याद रखना तो बनता है!

It is worth remembering right this month, I do not know how the courts of India and Millard have come in full form. And thinking so much for the country and for the countrymen. This month is to be remembered.

रविवार को सुप्रीम कोर्ट में बनेगा एक नया इतिहास ऐसा करने वाले होगें पीएम मोदी

नई दिल्ली। देश के इतिहास में ये पहली दफा होगा जब कोई प्रधानमंत्री रविवार के दिन सुप्रीम कोर्ट परिसर में दाखिल होगा। मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी रविवार को बंगाल की खाड़ी के देशों के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीशों की कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे, हालांकि मूल कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शामिल होने की योजना नहीं थी, लेकिन शनिवार को इसमें तब्दीली की गई है।सुप्रीम कोर्ट Supreme Courtकार्यक्रम में बदलाव की खबर आते ही प्रधानमंत्री के सुरक्षा दस्ते ने शनिवार दोपहर तक सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा अपने हाथों में ले ली और दिल्ली पुलिस को बाहर तैनात कर दिया गया, रूटीन सुरक्षा ड्रिल के बाद एसपीजी ने पूरा परिसर खंगाला।

बता दें कि भारत पहले भी बिम्सटेक देशों के न्यायपालिका प्रमुखों की बैठक की मेजबानी कर चुका है, लेकिन यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री इसमें शामिल होंगे। मुख्य न्यायधीशों की कॉन्फ्रेंस एक दिवसीय है। बिम्सटेक में भारत के अलावा नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान शामिल हैं।Justice Ranjan Gogoi sworn

इन विषयों पर चर्चा

जानकारी के मुताबिक, इस राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में सीमा पार आतंकवाद, बहुराष्ट्रीय संगठित अपराध, मानव और नशीले पदार्थों की तस्करी से संबंधित मुकदमों और उनसे जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार विमर्श होगा।

इस कॉन्फ्रेंस में मेजबान भारत की ओर से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत पांच शीर्षस्थ न्यायाधीश शामिल होंगे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसफ, जस्टिस अर्जन कुमार सीकरी और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।

source name:hindi.newsroompost

हिन्दू धर्म की खातीर PM मोदी ने किया ये बड़ा एलान, सोनिया के खुफिया प्रोजेक्ट को किया तबाह

नई दिल्ली : पिछली सभी सरकारों ने अनेक वर्षों से हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया. कोलकाता में तो आज भी तुष्टिकरण के चलते किया जा रहा है. जो कांग्रेस भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल खड़े करती है जो राम मंदिर के विरोध में अपने वकील खड़े करती है वो क़ब से रामसेतु समुंद्रम प्रोजेक्ट की रक्षा कर सकती थी.

New Delhi: All previous governments have played with the feelings of Hindus for many years. In Calcutta, it is still being done due to appeasement. The Congress which raises questions about the existence of Lord Rama, who stood his advocate against the Ram temple, could have protected the Ramsetu Samundram Project from Kabah.

कांग्रेस ही वजह है कि आज रामसेतु को भी राममंदिर की तरह मुद्दा बनाकर कोर्ट में खड़ा कर दिया गया है, लेकिन आज मोदी सरकार ने कोर्ट में अपना कड़ा जवाब हलफनामे के रूप में दे दिया जिससे सभी विरोधियों की बोलती एक झटके में बंद हो जायेगी.

The Congress is the reason that today Ram Sethu has also been made in the court by making a Ram Mandir issue, but today the Modi Government gave its strong answer in the court as an affidavit, which will stop the speech of all the opponents in a setback.

मोदी सरकार ने हिन्दुओं के पक्ष में लिया बड़ा फैसला, कोर्ट को दिया करारा जवाब

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक आज मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच नौवहन को सुगम बनाने के लिए शुरू की गई सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए रामसेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचागी. कोई और सरकार होती तो अब तक यात्रियों की सुगमता का बहाना बनाकर रामसेतु को धराशायी कर चुकी होती.

Modi government gives big decision in favor of Hindus, court gives reply to court

According to the big news now available today, Modi Government has made it clear that it has not brought any harm to Ram Sethu for the Sethusamudram project, which has started to facilitate shipping between the eastern and western shores of India. If there was any other government then by now it would have made the excuse of travelers easier to dump Ramsetu.

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका पर हमारा रुख साफ है. सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए वैकल्पिक रूट की तलाश की जाएगी. हलफनामें कहा गया है कि सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए रामसेतु को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.

The Central Transport Ministry filed an affidavit before the bench headed by Chief Justice Deepak Mishra and said that our stand on the petition filed by BJP leader Subramanian Swam is clear. Alternative routes will be searched for the Sethusamudram project. The affidavits have been said that any kind of loss will not be provided to Ramsetu for the Sethusamudram project.

कांग्रेस ने तोड़ने की बना रखी थी पूरी योजना

केंद्र ने यह भी कहा कि ‘राष्ट्र हित’ में पौराणिक राम सेतु पर चल रहे काम का कोई असर इस सेतु पर नहीं पड़ेगा. बता दें कि यह प्रोजेक्ट यूपीए सरकार की देन है जिसे रोकने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. वरना सोचिये कांग्रेस आज अगर सत्ता में होती तो अब रामसेतु को भी तुड़वा दिया गया होता. स्वामी ने कहा है वो अब मोदी सरकार के साथ मिलकर रामसेतु को राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिलवाएंगे.

Congress had planned to break the whole plan

The Center also said that there will be no impact on the work on the legendary Ram Setu in the ‘nation’s interest’. Let me tell you that this project is the responsibility of the UPA government, to stop BJP’s senior leader Subramanian Swamy had filed a petition in the Supreme Court. Otherwise, if the Congress had been in power now, then the Ram Sethu would have also been snapped. Swamy has said that he will now get Ramsetu to be the national heritage status of the nation in collaboration with the Modi government.

स्वामी ने शीप चैनल प्रोजेक्ट के खिलाफ जनहित याचिका दायर करते हुए केंद्र को पौराणिक रामसेतु को हाथ न लगाने का निर्देश देने की अपील की थी. गौरतलब है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान रामसेतु को तोड़कर योजना को आगे बढ़ाने का बीजेपी ने पुरजोर विरोध किया था और आंदोलन चलाया था.

Swamy filed a public interest petition against Sheep Chanel Project and directed the Center to direct not to hand over the legendary Ram Sethu. It is worth mentioning that during the tenure of the UPA government, the BJP had strongly opposed the proposal to break the Ram Sethu and move the agitation.

सनातन धर्म की हुई रक्षा : महंत नरेन्द्र गिरी

तो वहीँ अब करोड़ों हिन्दुओं के आस्था के प्रतीक रामसेतु को न तोड़ने को लेकर मोदी सरकार की ओर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे का अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वागत किया है. इलाहाबाद में अखाड़ा परिषद के साधु संतों ने कहा है कि केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने अपने हलफनामे में रामसेतु को तोड़े जाने की बात कही थी. लेकिन अब मौजूदा मोदी सरकार के इस हलफनामे से न केवल राम सेतु बचेगा. बल्कि सनातन धर्म की भी रक्षा होगी.

Sanatan dharma’s protection: Mahant Narendra Giri

So now, the Akhil Bhartiya Akhara Parishad has welcomed the affidavit filed in the Supreme Court towards the Modi Government about not breaking the Ram Sethu symbol of the faith of millions of Hindus. The sadhus saints of the Akhara Parishad of Allahabad have said that the Congress government of the Center had said that in their affidavit the demise of Ram Sethu would be broken. But now this affidavit of the current Modi government will not only save Ram Sethu. Rather Sanatan religion will also be protected.

क्या है सेतुसमुद्रम परियोजना

भारत और श्रीलंका को जोड़ने वाली सेतुसमुद्रम परियोजना में 44.9 नॉटिकल मील (83 किमी) लम्बा एक गहरा जल मार्ग खोदा जाएगा जिसके द्वारा पाक जलडमरुमध्य को मनार की खाड़ी से जोड़ दिया जाएगा. इस परियोजना को अमल में लाने के लिए रामसेतु को तोड़ने की योजना कांग्रेस ने बनायीं थी. लेकिन हिंदू संगठनों ने रामसेतु को तोड़ने का विरोध किया था. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सेतुसमुद्रम परियोजना को 2005 में लाया गया था.

What is Sethusamudram Project

In the Sethusamudram project connecting India and Sri Lanka, a deep water route of 44.9 nautical miles (83 km) will be dug by which the Pak Strait will be connected to the Bay of Manar. The Congress had planned to break Ram Sethu to implement this project. But Hindu organizations had opposed the demolition of Ram Sethu. BJP leader Subramanian Swamy filed a petition in the Supreme Court. The Sethusamudram project was brought in 2005.

बता दें रामसेतु सिर्फ एक आस्था का विषय नहीं है खुद अमेरिका के वैज्ञानिकों ने ज़बरदस्त रिपोर्ट दी थी. उन्होंने बताया था कि रामसेतु कई हज़ारों साल पहले बना है ये एक अद्भुत नायाब है, ऐसा सेतु बनाना लगभग असंभव. इसमें जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है वे मानव कि सोच से भी परे है. रामायण अनुसार खुद भगवन राम के हाथो से स्पर्श किये गए ये पत्थर हैं जो पानी पर तैरते हैं और उनसे ही इस अद्भुत पुल का निर्माण हुआ है. इसे खत्म करना मतलब इतिहास ही मिटा देना होगा.

Let’s say that Ram Sethu is not just a matter of faith, America’s scientists gave a tremendous report. He had told that Ram Sethu has been created thousands of years ago. It is an amazing one, making such a bridge is almost impossible. The stones used in it are beyond human thought. According to the Ramayana, these stones, which are touched by the hands of Lord Ram himself, float on the water, and this wonderful bridge has been created from them. Finishing it will mean erasing the history itself.

आज करोड़ों विदेशी भारत यात्रा पर इतना ज़्यादा क्यों आते हैं क्यूंकि भारत ने अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को संजोय के रखा हुआ है. जबकि पूरी दुनिया में वे या समय के साथ मिट चुकि हैं या तो कट्टरपंथियों द्वारा मिटाई जा चुकि हैं उनकी जगह ऊँची ऊँची इमारतों ने ले ली है लेकिन भारत आज भी मौजूद हैं और हमारी भ्रष्ट सरकारें इसे तोडना चाहती थी.

Why crores of foreigners today are so much on a trip to India because India has kept its historical heritage at stake. Whereas in the whole world they are missing out on time or have been abolished by the fundamentalists, they have been replaced by high-rise buildings, but India is still present and our corrupt governments wanted to break it.

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यह भी देखें :

https://www.youtube.com/watch?v=m7CoPymK4gw

 

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5 दिन में 3 फैसलों से जल भुन गयी कांग्रेस, CJI के खिलाफ छेड़ा विद्रोह,इस नेता ने भी छोड़ा साथ देख, PM मोदी समेत सियासी में मचा हडकंप

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट एक के बाद एक धड़ाधड़ फैसले सुनाये जा रहा है. 5 दिन में तीन फैसले आ गए हैं, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस, मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस, जज लोया केस. तो वहीँ अब गुजरात हाई कोर्ट का 2002 का दंगा केस. इस सबसे कांग्रेस बुरी तरह खीज पड़ी है क्यूंकि फैसले उसके मनमुताबिक नहीं आ रहे हैं. ऐसे में अब कांग्रेस ने CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ ही विद्रोह छेड़ दिया है.

अभी मिल रही बहुत बड़ी खबर के मुताबिक एक के बाद एक फैसले से कांग्रेस को तगड़े झटके लगने की वजह से अब कांग्रेस बदला लेने पर उतारू हो गयी है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश कर दिया है. कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर उन्हें ये प्रस्ताव सौंपा.

विपक्षी पार्टियों की कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद की अगुवाई में बैठक हुई. इसके बाद कई विपक्षी दलों के नेता उपराष्ट्रपति को प्रस्ताव सौंपने पहुंचे. गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि आज हमने राज्यसभा की 7 राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर राज्यसभा चेयरमैन को महाभियोग का प्रस्ताव सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि 71 सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ ये प्रस्ताव सौंपा है.

कपिल सिब्बल ने कहा लोकतंत्र खतरे में है

सबसे ज़्यादा तकलीफ कांग्रेस के कपिल सिब्बल को हो रही है, सारा खेल भी उनका ही रचाया हुआ है. कपिल सिब्बल ने कहा कि काश हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता. सिब्बल ने कहा कि जब से दीपक मिश्रा चीफ जस्टिस बने हैं तभी से कुछ ऐसे फैसले लिए गए हैं जो कि सही नहीं हैं. सिब्बल ने कहा कि हमारे पास महाभियोग लाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था.

सिब्बल बोले कि हमें उम्मीद थी कि जजों की जो नाराज़गी है, उन सभी को भी ध्यान में रखा जाएगा. और कुछ बदलाव आएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. क्या देश के लोग सबसे बड़े संस्थान को ऐसे स्थिति में ही देखते रहें. सिब्बल ने कहा कि सीजेआई के कुछ प्रशासनिक फैसलों पर आपत्ति है. चीफ जस्टिस पर अपने पद की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्‍होंने कहा कि न्यायपालिका के खतरे में आने से लोकतंत्र पर खतरा है.

CJI ने कपिल सिब्बल को दिखाया था बहार का रास्ता

हम आपको बताते हैं कि क्यों कपिल सिब्बल को इतनी तकलीफ हो रही है दरअसल CJI दीपक मिश्रा वहीँ हैं जिन्होंने राम मंदिर मुद्दे पर कपिल सिब्बल को ज़ोरदार लताड़ लगाते हुए इस केस से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया था. कपिल सिब्बल के बौखलाहट के पीछे वजह ही यही है कि वो राम मंदिर मुद्दे पर वकालत नहीं कर सकते.

एन वक़्त पर मनमोहन सिंह ने भी छोड़ा कांग्रेस का साथ


तो वहीँ अब कांग्रेस के इस बदले के महाभियोग प्रस्ताव में ही फूट पड़ने लगी है. सबसे पहले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. मनमोहन सिंह के अलावा कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी इस मुद्दे पर पार्टी से अलग सुर अलापा है. सलमान खुर्शीद ने कहा कि चाहे जज लोया का मामला हो या कोई अन्य, सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही अंतिम होता है. कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश की विश्वसनीयता पर संदेह नहीं करना चाहिए.

अगर शीर्ष कोर्ट के फैसले को लेकर किसी को कोई आपत्ति है तो पुनर्विचार याचिका, उपचारात्मक याचिका दाखिल कर सकते हैं. लेकिन ऐसे सरेआम महाभियोग लाकर सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश का अपमान करना बिलकुल भी उचित नहीं है.

सलमान खुर्शीद ने कपिल सिब्बल को ज़ोरदार लताड़ा

सलमान खुर्शीद ने कपिल सिब्बल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वकील का काला गाउन और सफेद बैंड पहनने वाले किसी भी आदमी के लिए कोर्ट के फैसले पर सोच समझ कर सवाल उठाने चाहिए. यह संवेदनशील मामला है. उन्होंने कहा कि शीर्ष कोर्ट के फैसले पर राजनीति करने को उचित नहीं कहा जा सकता है.

लोया केस बहाना है, अयोध्या केस निशाना है

वही वकील अश्विनी उपध्याय ने भी कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया “लोया केस बहाना है, अयोध्या केस निशाना है! सेक्युलर लिबरल और अर्बन नक्सली मिलकर सुप्रीम कोर्ट और माननीय चीफ जस्टिस की क्रेडिबिलटी को समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि अयोध्या, बहुविवाह-हलाला-मुताह-मिस्यार जैसे मामलों में भी इसी वर्ष फैसला आयेगा”

अब हम आपको बताते हैं कि कांग्रेस के महाभियोग प्रस्ताव से आखिर हो क्या सकता है.
संविधान के अनुच्‍छेद 124(4) और जजेज (इंक्‍वायरी) एक्‍ट, 1968 में जजों के खिलाफ महाभियोग लाया जाता है. इस तरह का प्रस्‍ताव लोकसभा या राज्‍यसभा में से कहीं भी पेश किया जा सकता है. यह प्रस्‍ताव पेश करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्‍यसभा में 50 सांसदों के हस्‍ताक्षर की जरूरत होती है. इसके साथ ही जज को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से प्रस्‍ताव पास करना जरूरी है.

यदि इस तरह का कोई प्रस्‍ताव पास हो भी जाता है तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्‍यों की एक कमेटी बनाई जाती है. रिपोर्ट तैयार करने के बाद कमेटी उसे लोकसभा के स्‍पीकर या राज्‍यसभा के सभापित को सौंपती है. इसके साथ ही महाभियोग प्रस्‍ताव चाहे किसी भी सदन में लाया जाए, लेकिन उसे पास दोनों सदनों में होना पड़ेगा. प्रस्‍ताव को पास करने के लिए वोटिंग के दौरान सभी सांसदों का दो तिहाई बहुमत हासिल करना जरूरी है. दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्‍ताव पास होने के बाद राष्‍ट्रपति Presidential Order से जज को हटा सकते हैं.

क्या कांग्रेस के पास है संख्याबल?
राज्‍यसभा में कुल 245 सांसद हैं. इस सदन में महाभियोग प्रस्‍ताव पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत यानी 164 सांसदों के वोट की जरूरत होगी. राज्‍यसभा में सत्‍ताधारी एनडीए के 86 सांसद हैं. इनमें से 68 बीजेपी के सांसद हैं. यानी इस सदन में कांग्रेस समर्थित इस प्रस्‍ताव के पास होने की संभावना नहीं है. लोकसभा में कुल सांसदों की संख्‍या 545 है. दो तिहाई बहुमत के लिए 364 सांसदों के वोटों की जरूरत पड़ेगी. यहां विपक्ष बिना बीजेपी के समर्थन के ये संख्‍या हासिल नहीं कर सकता क्‍योंकि लोकसभा में अकेले बीजेपी के ही 274 सांसद हैं.

क्या ये बात कांग्रेस को पता नहीं होगी कि उनके पास उचित संख्याबल ही नहीं है, ज़रूर पता होगी तो फिर ये महाभियोग प्रस्ताव की नौटंकी क्यों?जिसमे कांग्रेस के अपने ही साथ नहीं दे रहे. दरअसल कर्नाटक चुनाव से पहले ऐसी नौटंकी करके चुनाव को प्रभावित करने की बड़ी गहरी योजना पर काम चल रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया सबसे बड़े केस में जबरदस्त फैसला,कांग्रेसी वामपंथी समेत दोगले पत्रकारों को लगा ज़ोरदार झटका

नई दिल्ली : आज देश में इतनी ज़्यादा विरोधियों ने असहिष्णुता फैला के रख दी है. जब 2g के आरोपी को यही कोर्ट बरी कर देते हैं तब ये कोर्ट कांग्रेस के लिए भगवान बन जाते हैं, सत्य की जीत बताई जाती है लेकिन जब कोर्ट कांग्रेस और वामपंथी के मनमुताबिक फैसला नहीं सुनाते है तब मिनटों में यही जज बदनाम कर दिए जाते हैं.

New Delhi: Today, more opposition in the country has kept the intolerance spread. When the court acquits the 2G accused, then these courts become God for the Congress, the truth is said to be victory, but when the court does not pronounce the verdict of the Congress and the Left, then the same judges are defamed in minutes. .

लेकिन हद तो तब हो रही है जब सुप्रीम कोर्ट के अभी अभी सबसे बड़े केस में फैसले सुनाये जाने से कांग्रेस से ज़्यादा कई दोगले पत्रकारों को तकलीफ हो रही वे जज की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.

But the extent has come when the Supreme Court is hearing the judgment of the judge in relation to the judgment of the most senior case, due to which many journalists are suffering from the Congress.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर इस स्थिति को जारी रखा तो ये बहुत बड़ा खतरा होगा. जिस तरह से इस केस में याचिका डाली गई है ये सीधा न्यायपालिका पर हमला है. जो जज इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, उनपर भी सीधा हमला किया गया था.

The Supreme Court said that if this situation continues, then it will be a very big danger. The way the petition has been filed in this case, this is an attack on the direct judiciary. The judges who were hearing this case were also directly attacked.

बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच कर रही थी. इस याचिका को कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन सहित कई अन्य पक्षकारों की ओर से दायर किया गया था.

Please tell that the hearing of this case was being done by a bench of Chief Justice Deepak Mishra, Justice M. Khanvilkar and Justice DV Chandrachud. This petition was filed on behalf of Congress leaders Tahsin Poonawala, journalist BS Lone, and many other parties including the Bombay Lawyer’s Association.

इसमें बड़ा हाथ वकील प्रशांत भूषण का भी है. वकील से सामाजिक कार्यकर्ता बने प्रशांत भूषण ने सोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर को फर्जी बताया. साथ ही आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी मानने से इंकार कर दिया.

There is also a big hand lawyer Prashant Bhushan. Prashant Bhushan, a social worker from the lawyer, said that the encounter of Sohrabuddin Sheikh is a fake. Also refused to accept the official post mortem report.

जस्टिस लोया की मौत को लेकर कांग्रेसी आस लगाए बैठे थे कि कोई साज़िश रच लेंगे मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा षड़यंत्र रचा गया. जज लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का केस देख रहे थे. उनकी साधारण दिल के दौरे से होने वाली मौत को कांग्रेस ने संदिग्ध और एक साजिश के तहत मौत बताया.

The Congressmen were sitting on the pretext that Justice Loya’s death was a big conspiracy against Modi Government. Judge Loya was watching the case of Sohrabuddin encounter. The Congress is suspected of death due to his simple heart attack and death under a conspiracy.

कांग्रेस ने अपनी पूरी ताक़त इस केस में झोंक दी थी जिसके बाद अब कोर्ट में शांतिपूर्ण बहस नहीं बल्कि चीख चीख कर जज पर दबाव और आरोप लगाए जाने लगे थे. इस फैसले को भी CJI दीपक मिश्रा देख रहे हैं, तभी कांग्रेस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने जा रही थी.

The Congress had thrown its full force in this case, after which there was no peaceful debate in the court but screaming screaming and pressure was being made on the judge. This decision was also seen by CJI Deepak Mishra, when Congress was going to introduce impeachment against Deepak Mishra.

बता दें दिसंबर 2014 में जस्टिस लोया की नागपुर में मौत हो गई थी जिसे दिल का दौरा से मौत का कारण बताया गया था. जस्टिस लोया की मौत के बाद जिन जज ने इस मामले की सुनवाई की, उन्होंने अमित शाह को मामले में बरी कर दिया था. बस तब से कांग्रेस इस केस के पीछे हाथ धो के पड़ी थी.

In December 2014 Justice Loya was killed in Nagpur, who was told to have died due to heart attack. After the death of Justice Loya, the judge who had heard the case, had acquitted Amit Shah in the case. Since then the Congress had to wash hands behind this case.

यहाँ तक की जज लोया के परिवार को भी परेशान किया जा रहा था. जज लोया के बेटे अनुज लोया ने कुछ दिन पहले ही प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे को बड़ा करने पर नाराजगी जताई थी. अनुज ने कहा था कि उनके पिता की मौत प्राकृतिक थी, कृपया उनकी मौत को राजनितिक मुद्दा न बनाएं.

Even the family of Judge Loya was being disturbed. Judge Loya’s son Anuj Loya had resented a few days ago by press conference and raised the issue. Anuj had said that his father’s death was natural, please do not make his death a political issue.

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कठुवा काश में आया नया मोड़ JNU कनेक्शन पर CBI समेत ANI के उड़े होश दे

कठुवा कांड की सच्चाई धीरे धीरे सामने आनी ही है, और अब बहुत कुछ ऐसा निकलकर आ रहा है, जो की मीडिया की मनगढ़ंत कहानी से बिलकुल उलट है

The truth of the Kathwa scandal is coming out slowly, and now there is a lot like coming out, which is totally opposite to the fabricated story of the media.

जम्मू में एक वकील है जिसका नाम है दीपिका ठुसू उर्फ़ दीपिका सिंह राजावत, ये जम्मू में वकील है, और ये लड़की के साथ रेप हुआ, मुहीम की एक बड़ी खिलाडी है, ये कठुवा केस में लड़की का रेप हुआ उस पक्ष के साथ है और वकील है, खुद को ये वकील बिलकुल निष्पक्ष बता रही है

In Jammu there is a lawyer whose name is Deepika Thoussus alias Deepika Singh Rajawat, it is a lawyer in Jammu, and raped with this girl, is a big player of the Muhim, in the Kathwa case, the girl’s rape happened with that side and The lawyer is telling himself this lawyer is absolutely fair

और मीडिया भी इसकी खूब तारीफ कर रही है की ये इंसानियत के लिए दरिंदो के खिलाफ लड़ रही है, अब खुद को जो वकील निष्पक्ष बता रही है उसके JNU के आज़ादी इंशाल्लाह गैंग से कनेक्शन सामने आ चुके है और ये मैडम तो JNU की शेहला रशीद की मित्र है, और दोनों की तस्वीर आप ऊपर देख सकते

And the media is also very much appreciating that it is fighting against human beings for humankind, now the lawyer who is telling the fair is himself the connection to JNU’s freedom-inductive gang, and that Madam, JNU’s Shehla Rashid Has a friend, and you can see the picture of both

इसके साथ साथ ये जो वकील दीपिका ठुसू है, ये इंदिरा जयसिंह नाम की दिल्ली की महिला के साथ काम करती है, और ये इंदिरा जयसिंह सुप्रीम कोर्ट में चल रहे रोहिंग्यों के केस में एक्टिव है, अब जो दीपिका ठुसू खुद को निष्पक्ष बताकर इंसानियत के लिए लड़ने वाला बता रही है, उसके JNU के आज़ादी गैंग और रोहिंग्यों के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने वालो से संबंध सामने है

Along with this, the lawyer who is Deepika, she works with Indira Jaysingh, a woman from Delhi, and she is active in the case of Rohingya in Indira Jaysingh Supreme Court, now Deepika Padukone herself, telling herself as unbiased. The fighter is telling, the JNU’s freedom gang and the Rohingyas have a relationship with the fighters in the Supreme Court.

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सुप्रीम कोर्ट ने धारा 370 को लेकर देश को दिया बड़ा झटका बिपिन रावत समेत PM मोदी रह गए सन्न

नई दिल्ली : कश्मीर में आतंकवाद तेज़ी से खत्म हो रहा है, अभी सेना ने 3 बड़े ऑपरेशन से 13 आतंकवादी मार गिराए. लेकिन आज भी कश्मीरी पंडितों अपने इन्साफ को लेकर इंतज़ार कर रहे हैं. कांग्रेस की वजह से आज कश्मीर में अलग झंडा, अलग संविधान है. ना जाने कितने जवान अब तक कश्मीर में शहीद हो चुके हैं.

New Delhi: Terrorism in Kashmir is ending fast, now the Army has killed 13 terrorists with 3 major operations. But even today, Kashmiri Pandits are waiting for their justice. Because of Congress today there is a separate flag in Kashmir, a different constitution. Do not know how many young people have been martyred in Kashmir till now.

ऐसे में धारा 370 को अब ख़त्म करना ज़रूरी है, लेकिन हमारा कोर्ट कश्मीरी पंडितों को इन्साफ दिलाने की बात नहीं करता है उसे धारा 370 की ज़्यादा चिंता है. जब कश्मीरी पंडितों के इन्साफ की बात आती है तो कोर्ट यह कहकर ठुकरा देता है कि इसको तो कई साल बीत चुके अब सबूत कैसे मिलेंगे इसमें. जबकि खुद अलगावादी बिट्टा ने कबूल किया था कि उसने कई कश्मीरी पंडितों को खुद मारा. गलती से भी कहीं मोदी सरकार धारा 370 को छू न ले इसके लिए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है जिसे सुन आप दंग रह जायेंगे.

In such a situation, it is necessary to end Article 370 now, but our court does not talk of securing justice to Kashmiri Pandits, it is more worried about Section 370. When it comes to the justice of the Kashmiri Pandits, the court rejects it saying that many years have passed and how will the evidence be found in it. While himself alagadi Bitta had admitted that he himself killed many Kashmiri Pandits himself. By mistake, even the Modi government has not touched the section 370, the court has heard a big decision for which you will be stunned to hear.

धारा 370 को हटाना अब असंभव है : सुप्रीम कोर्ट

अभी मिल रही ताज अखबार के मुताबिक जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली संविधान की धारा 370 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद चौंकाने वाला फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि सालों से बने रहने के चलते अब यह धारा एक स्थायी प्रावधान बन चुकी है जिससे इसको खत्म करना असंभव हो गया है.

It is now impossible to remove Article 370: Supreme Court

According to the current Taj newspaper, the Supreme Court has given a very shocking decision on Article 370 of the Constitution giving special status to Jammu and Kashmir. The court said that due to the continuance of the years, this section has become a permanent provision, which has made it impossible to eliminate it.

अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के एक मामले में वह पहले ही इस बहस को यह कहकर खत्म कर चुकी है कि धारा 370 अब संविधान का एक स्थायी हिस्सा है. कोर्ट को धारा 370 को लेकर बहुत चिंता है लेकिन उन लाखों कश्मीरी पंडितों की कोई चिंता नहीं, जिनकी निर्मम हत्या की गयी और कितने ही कश्मीरी पंडितों को घर छोड़कर जाना पड़ा.

The court also reminded that in a matter of 2017, he has already finished this debate by saying that Article 370 is now a permanent part of the Constitution. The court is concerned about Article 370 but there is no concern for millions of Kashmiri Pandits who were brutally murdered and many Kashmiri Pandits had to leave their homes.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक जज आदर्श के गोयल और जज आरएफ नरीमन की बेंच की यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई करते हुए आई. इसमें दावा किया गया था कि धारा 370 एक अस्थायी प्रावधान के तहत लाई गई थी जिसे 26 जनवरी 1957 को जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के भंग होने के साथ ही खत्म हो जाना था. इसमें यह भी कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर का संविधान निरर्थक, अप्रभावी और भारतीय संविधान का उल्लंघन है.

According to a report of the Times of India, the hearing of the bench of Judge Adarsh ​​Goel and Judge RF Nariman came in the hearing of a petition. It was claimed that Section 370 was brought under a temporary provision, on 26 January 1957. Jammu and Kashmir was to end with the dissolution of the Constituent Assembly. It was also stated that the Constitution of Jammu and Kashmir was a violation of the meaningless, ineffective and Indian constitution.

धारा 370 न सिर्फ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देती है, बल्कि इस राज्य के लिए कानून बनाने के मामले में मोदी सरकार की शक्तियां भी सीमित करती है. इस पर काफी समय से बहस होती रही है. इसे हटाना केंद्र में इन दिनों सत्तासीन भाजपा के प्रमुख मुद्दों में से एक रहा है.

Article 370 not only gives special status to Jammu and Kashmir, but also limits the powers of the Modi Government in the matter of making laws for this state. There has been debate over this for a long time. The removal of it has been one of the main issues of the ruling BJP in the center this time.

आपको बता दें खुद सुब्रमण्यम स्वामी कह चुके हैं कि धारा 370 स्थायी नहीं अस्थायी है और इसको हटाया जा सकता है. लेकिन फिर भी कोर्ट के जज इसे अस्थायी बता रहे हैं.

Tell yourself, Subramaniam Swamy himself has said that Article 370 is not permanent lasting and can be removed. But even then the court judges are telling it to be temporary.

‘370 को बनाए रखना गलत’
तो वहीँ विजयालक्ष्मी झा ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था 1957 में संविधान सभा के भंग होने के साथ ही धारा 370 एक अस्थायी प्रावधान हो गई थी. याचिका में कहा गया था कि धारा 370 को बनाए रखना गलत है क्योंकि संविधान सभा भंग होने के बाद इसके लिए राष्ट्रपति या संसद या केंद्र सरकार से अनुमति नहीं ली गई थी ये हमारे संविधान के मूल ढांचे के साथ बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा है.

370 is wrong to maintain’
So then Vijayalakshmi Jha told the Delhi High Court that in 1957, with the dissolution of the Constituent Assembly, Section 370 had a temporary provision. It was said in the petition that it is wrong to maintain Article 370 because after the dissolution of the Constituent Assembly, permission for this was not obtained from the President or the Parliament or the Central Government, it is a big fraud with the basic structure of our Constitution.

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बार काउंसिल का आया बड़ा फैसला,कांग्रेसी वकीलों को पड़ी तगड़ी लात तो अब इसलियें राम मंदिर पर नहीं घुसेड़ेंगे टांग

नई दिल्ली : राम मंदिर किसी भी हालत में ना बन पाए इसकी पूरी कोशिश में कांग्रेस जीतोड़ मेहनत करने में लगी है. अभी 44 सांसद के साथ कांग्रेस जिसके विपक्ष सरकार बनने के भी लाले पड़ गए थे उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास मत प्रस्ताव का फैसला किया है. तो वहीँ अब सुप्रीम कोर्ट के CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने जा रही है. इस बीच बार कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने कांग्रेस के कपिल सिब्बल समेत अन्य वकीलों को ज़ोरदार झटका दिया है.

New Delhi: In the entire effort of the Ram temple, in any condition, the Congress has started working hard. Now with 44 MPs, the Congress, whose opposition to the formation of the government, has also decided to propose an unbelief vote proposal against the Modi government. So he is now going on impeachment against the Supreme Court’s CJI Deepak Mishra. Meanwhile, the Bar Council of India has strongly shocked other lawyers, including Kapil Sibal of Congress.

राम मंदिर, रोहिंग्या पर बार कॉउन्सिल ने सुनाया फैसला, कपिल सिब्बल के निकले आंसू

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अदालत में प्रैक्टिस करने पर ही प्रतिबंध लगा दिया है.

Ram Temple, Bar Council of Barring the decision on Rohingya, Kapil Sibal’s tears turned out

According to the latest news, the Bar Council of India has passed a resolution and banned Congress leader and senior lawyer Kapil Sibal, Abhishek Manu Singhvi and Vivek Tankha from practicing in the court of Chief Justice of India Deepak Mishra.

नया प्रस्ताव उन सांसदों और विधायकों को ऐसी अदालतों या जजों के सामने आने से रोकेगा, जिनका वह विरोध कर रहे हैं. अध्यक्ष मनन मिश्रा ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि हम सांसदों और विधायकों को कोर्ट में प्रैक्टिस से नहीं रोक सकते, लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी हैं. ऐसे वकील, जो सांसद या विधायक भी हैं, अगर वह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव शुरु करते हैं तो वह उन जजों की अदालतों में प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे.

The new proposal will prevent those MPs and MLAs from appearing before such courts or judges who are opposing them. Speaking to the media on Saturday, Chairman Manan Mishra said that Bar Council of India (BCI) has reached the conclusion that we can not stop MPs and MLAs from practicing in the court, but there are some exceptions. Such lawyers, who are also MPs or MLAs, if they initiate impeachment proceedings against the High Court or Judge of the Supreme Court, then they will not be able to practice in those judges’ courts.

चीफ जस्टिस की अदालत में नहीं जा पाएंगे कांग्रेसी वकील

इससे अब ये बड़ी राहत मिलेगी कि CJI दीपक मिश्रा जिस भी केस कि सुनवाई कर रहे होंगे, कांग्रेस के ये वकील कपिल सिब्बल उसमे टांग नहीं अड़ा पाएंगे. बता दें CJI दीपक मिश्रा हर बड़े और गंभीर मामलों की सुनवाई कर रहे हैं. राम मंदिर, रोहिंग्या, आधार, तीन तलाक जैसे सभी मुद्दों पर अब कांग्रेस के चालाक वकील उसमे टांग नहीं अड़ा पाएंगे. इस फैसले से कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लगा है. क्यूंकि राम मंदिर की सुनवाई को कपिल सिब्बल ने ही 2019 तक टलवाने के लिए ने बहुत हाथ पाँव मारे थे.

Congress lawyer not going to court in Chief Justice

This will be a great relief now that whatever the case the CJI Deepak Mishra is hearing, Congress lawyer Kapil Sibal will not be able to hang him. Tell us CJI Deepak Mishra is hearing every major and serious case. On all issues like Ram temple, Rohingya, Aadhaar, three divorces, now the Congress’s clever lawyer will not be able to hang him. This decision has caused a major setback to the Congress. Because the hearing of the Ram temple was too much for Kapil Sibal to hang till 2019.

तो वहीँ इस फैसले के बाद से कांग्रेस बुरी तरह खीज उठी है. कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा ने बार काउंसिल के इस फैसले का विरोध किया था, लेकिन बार काउंसिल ने उनके विरोध यह कहते हुए दरकिनार कर दिया कि वकीलों के पास इसका विरोध करने का अधिकार नहीं है.

So, after this decision, the Congress has been very upset. Kapil Sibal, Abhishek Manu Singhvi and Vivek Tankha opposed this decision of the Bar Council, but Bar Council barred their protest saying that lawyers do not have the right to oppose it

बता दें जिस भी बड़े मुद्दे का बीजेपी का विरोध करना होता है तो कांग्रेस सबसे पहले कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी जैसे वकीलों को ही आगे करवाती थी. लेकिन अब तो वो कोर्ट में कदम भी नहीं रख पाएंगे.

Tell the biggest issue that BJP has to oppose, the Congress would have been advocating advocates like Kapil Sibal and Abhishek Singhvi first. But now he will not be able to move to the court.

काउंसिल के इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस के प्रस्ताव पर ऐसे सांसद हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे, जो कोर्ट में वकालत भी करते हों. इसका मतलब ये हुआ कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी महाभियोग की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे.

After this decision of the Council, such MPs will not be able to sign on the Congress proposal preparing for impeachment against Supreme Court Chief Justice Deepak Mishra, who also advocate in the court. It means that the Congress Rajya Sabha MP Abhishek Manu Singhvi can not be involved in the impeachment process.

दरअसल, बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि ऐसे सांसदों और विधायकों की कोर्ट प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाए. उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 49 का हवाला देते हुए ऐसे नेताओं की कोर्ट प्रैक्टिस को असंवैधानिक बताया था.

In fact, BJP leader Ashwani Upadhyay had petitioned the Supreme Court to ban the court practice of such MPs and legislators. He cited the Court Practice of such leaders as unconstitutional, citing Rule 49 of the Bar Council of India.

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राम मंदिर से पहले कोर्ट ने मस्जिदों को लेकर सुनाया अब तक का सबसे कड़ा ऐतिहासिक फैसला, दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय के उड़ा दिए होश

नई दिल्ली : भारत में जो मुद्दे कई वामपंथियों, पत्रकारों, अवार्ड वापसी गैंग और कुछ तथाकथित फिल्मबाजो के लिए असहिष्णुता बन जाते हैं. आज दुनिया के दूसरे देश इस बात को समझ चुके हैं और उनपर ज़ोरदार एक्शन भी ले रहे हैं. अभी सीएम योगी ने मस्जिदों के लम्बे समय से विवाद चले आ रहे ‘अवैध लाउडस्पीकर’ उतरवाए, जिसका लोगो ने विरोध किया और लोकतंत्र की हत्या बता दी. लेकिन अब जर्मन जैसे बड़े देश के कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मस्जिदों के लाउडस्पीकर को हमेशा के लिया बंद करवा दिया है, और इसके पीछे की वजह सुन आप चौंक जाएंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो ऐसा फैसला सुनाना पड़ गया.

जर्मन कोर्ट ने मस्जिद को लेकर सुनाया ऐतिहासिक फैसला
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक जर्मन देश के कोर्ट के फैसले से दो क्रिस्चियन समुदाय के लोगों को बड़ी ऐतिहासिक जीत मिली है. कोर्ट ने मस्जिदों में तेज़ आवाज़ में बजने वाले लाउडस्पीकर को हमेशा के लिए बंद करा दिया है. इसके पीछे जो कोर्ट को शिकायत मिली वो तो बेहद हैरान करने वाली थी. क्रिस्चियन लोगों ने शिकायत करी की न सिर्फ मस्जिदों के लाउडस्पीकर की आवाज़ बेहद परेशान करने वाली और ध्वनि प्रदुषण को बढ़ा रही है बल्कि मस्जिदों में प्रार्थना करते हुए ये चिल्ला के कहा जा रहा है कि “अल्लाह ही एक मात्र भगवान है और वो क्रिस्चियन के jesus से भी ऊपर है और वो सभी भगवानो से ऊपर है.”

ऐसे आवाज़ सुनकर क्रिस्चियन समुदाय की भावनाएं भड़क उठी और उन्होंने कोर्ट से इन्साफ माँगा. जिसके बाद हांस-जोआचिम लेहमैन, 69 वर्षीय शख्स ने कोर्ट से शिकायत में कहा “न सिर्फ ये आवाज़ से प्रदुषण हो रहा है बल्कि ये बहुत कष्टदायी है. इसमें हमारे भगवान jesus का अपमान किया जा रहा है, हम ये नहीं सह सकते.”

हालाँकि वहां भी प्रशांत भूषण जैसे वकील मौजूद हैं बचाव पक्ष के वकील ने कहा “ये धार्मिक आज़ादी है, किसी भी तरीके से क्रिस्चियन भगवान को ठेस पहुंचे ऐसे कोई बात नहीं कही जा रही है. ये एक षड़यत्र है.”

तो वहीँ अब मस्जिद के अधिकारी भी बचाव में कूद पड़े हैं उन्होंने कहा है “हमारी प्रार्थना सिर्फ 2 मिनट की होती है वो भी एक बजे वो भी सिर्फ शुक्रवार को. ये हमारी आज़ादी है और इसके खिलाफ हम नहीं सुनेंगे. हमें अभी तक किसी भी क्रिस्चियन समुदाय से कोई शिकायत नहीं आयी.”

जिसके बाद कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा “हमें दूसरे लोगों की भी आज़ादी का ख्याल रखना चहिये. ये तेज़ आवाज़ में लाउडस्पीकर जो दिन में 5 बार ऐसा शोर फैला रहे हैं जिससे क्रिस्चियन समुदाई की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही है. इन्हे परमिशन सिर्फ सुनाई दे सके इतनी तक की आवाज़ रखने की दी थी. ऐसे में ये नियमो का भी उल्लंघन है. इसलिए अब से सभी मस्जिद पर लाउडस्पीकर की पाबंदी लगायी जाती है.”

प्रदेश में सीएम योगी ने भी लिया था यही फैसला, बढ़ गयी थी असहिष्णुता
आपको बता दें इसे जर्मन देश में क्रिस्चियन लोगों की ऐतिहासिक जीत बताई जा रही है. हालाँकि हमारे देश में जब ऐसा फैसला लेने की कोई हिम्मत दिखाता है तो देश बहुत जल्दी असहिष्णु हो जाता है. फिल्मबाज़ देश छोड़ने की बात करने लगते हैं. ऐसा ही फैसला अभी प्रदेश की सीएम योगी ने भी सुनाया था. जिसके बाद से मस्जिदों से अवैध लाउडस्पीकर उतरवा लिए गए थे. लेकिन इसके बाद ओवैसी समेत कई कट्टरपंथियों ने बवाल मचा दिया था. दरअसल धर्म की आज़ादी के नाम पर कोई भी जनता के बाच ज़हर फैलाता रहता है. बोलने की आज़ादी के नाम पर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’. ऐसे नारे लगाए जाते हैं, भारतीय सेना को बलात्कारी बताया जाता है. लेकिन फिर भी हमारा कोर्ट के जज प्रेस कॉनफेरेन्स करते रहते हैं और लोकतंत्र की हत्या बताते हैं. करोड़ों केस लंबित पड़े रहते हैं, आम आदमी सालों तक चप्पल घिसता रहता है, सुनवाई तक नहीं होती और जज को मनपसंद केस नहीं मिले तो एक दिन में लोकतंत्र की हत्या हो जाती है.

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