CIA का बड़ा ख़ुलासा- सभी इस्लामिक देशों को अकेले युद्ध में हारने में सक्षम भारतीय सेना

पिछले साल कुछ शिया मुस्लिम देशों को छोड़कर सभी इस्लामिक देशों ने इस्लामिक सेना बनाने का निर्णय किया था, और इसका प्रमुख पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को बनाया गया था, इस इस्लामिक सेना का हेडक्वार्टर सऊदी अरब में है, और राहिल शरीफ आजकल सऊदी में बैठते है |

Last year, except for some Shiite Muslim countries, all Islamic countries had decided to create an Islamic army, and it was made to the former chief of Pakistan Army General Gen. Rahil Sharif, the headquarters of the Islamic Army is in Saudi Arabia, and Rahil Sharif is nowadays Sit in saudi

 

इस्लामिक सेना के निर्माण के समय ये कहा गया था की युद्ध की स्तिथि में सभी इस्लामिक देश एकजुट हो जायेंगे, एक इस्लामिक देश पर हमला सभी इस्लामिक देशों पर हमला माना जायगे और इस्लामिक सेना एकजुट होकर लड़ेगी, पाकिस्तान इसके बाद भारत को धमकियाँ भी दे रहा था, पर सीआईए का कहना है की सभी इस्लामिक देश मिलकर भी भारत से युद्ध लड़े तो मात्र 14 दिनों में अकेला भारत सभी इस्लामिक देशों को हरा देगा |

At the time of the creation of the Islamic Army, it was said that all Islamic countries will be united in the war situation, an attack on an Islamic country will be considered an attack on all Islamic countries, and the Islamic army will fight together, Pakistan is threatening India after this. But the CIA says that even if all the Islamic countries fight together with India, only India will defeat all Islamic countries in 14 days.

दुनिया में 56 इस्लामिक देश हैं जिनकी कुल आबादी 162 करोड़ है | इन इस्लामिक देशो की औकात जानने का प्रयास करते है | विश्व के सभी इस्लामिक देश बनाम भारत |

There are 56 Islamic countries in the world, whose total population is 162 crores. Attempt to know the authors of these Islamic countries. All the Islamic countries of the world vs. India

कई इस्लामिक देश इतने छोटे है कि उनसे ज्यादा बड़ा तो भारत का गोवा राज्य है । ज्यादातर इस्लामिक देश भुखमरी से जूझ रहे हैं | पाकिस्तान के अलावा कोई मुस्लिम देश परमाणुं संपन्न नहीं है | इन 53 इस्लामिक देशोँ की सारी सेनाओं को जोड़ लिया जाये तो लगभग 19.62 लाख सैनिक है, जबकि भारत के पास 16.82 लाख आर्मी और 11.31लाख रिजर्व सैनिक है | किसी इस्लामिक देश के पास विमान वाहक युद्धपोत नहीँ है जबकि भारत के पास 5 युद्धपोत है |

Many Islamic countries are so small that more than them is Goa state of India. Most Islamic countries are battling hunger. Apart from Pakistan, no Muslim country is endowed with atoms. If all the forces of these 53 Islamic countries are added, then there are approximately 19.62 lakh soldiers, while India has 16.82 lakh army and 11.31 lakh reserves. There is no aircraft carrier warship near an Islamic country, while India has 5 warships.

किसी इस्लामिक देश के पास Anti BalasticMissile नही है | अमरीका, चीन, इजराइल के बाद भारत दुनिया का चौथा देश है , जिसके पास मिसाईल्स को हवा में नष्ट करने की शक्ति है | किसी इस्लामिक देश के पास 3200Km से ज्यादा की मारक शक्ति वाली मिसाईल नही है , भारत के पास 7000Km तक दुश्मनों को मारनेवाली पृथ्वी-5 मिसाईल है |

No Islamic country has Anti BalasticMissile. India is the fourth country in the world after America, China, Israel, which has the power to destroy missiles in the air. An Islamic country does not have an explosive missile of more than 3200Km, India has an earth-5 missile to kill enemies by 7000km.

किसी इस्लामिक देश के पास सुपर सोनिक मिसाईल नही है , भारत के पास ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाईल है | ये शक्ति सिर्फ अमेरिका,चीन और रूस के पास है | CIA के अनुसार मान लिया कि सारे इस्लामिक देश आतंकवादियों के साथ मिलकर भारत के साथ युद्ध करते है तो भी भारतीय सेना मात्र 14 दिनों में सारे इस्लामिक देशों मे तिरंगा लहराने की क्षमता रखती है | इन बीते दशकों में भारत की सैन्य ताकत काफी बढ़ गयी है और भारतीय सेना के पास सारे अत्याधुनिक हतियार भी आ गए हैं |

No Islamic country has a super sonic missile, India has a supersonic missile like Brahmos. This power is only with America, China and Russia. According to the CIA, even if all Islamic countries fight with terrorists, then the Indian army has the ability to blow the tricolor in just 14 days in all Islamic countries. In these past decades, India’s military strength has increased greatly and all the cutting-edge artisans have come to the Indian Army.

source zeenews

इजराइल के बाद भारतीय सेना में आये ये ज़बरदस्त हथियार, पाकिस्तान फ़ौज में मचा हाहाकार !

नई दिल्ली: पाकिस्तान के मटियामेट होने का वक़्त आ गया है. पीएम मोदी ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफलता पा ली है और अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देशों ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है. वहीँ भारतीय सेना को भी पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाने का सामान मिलने जा रहा है, जिसके बाद एलओसी पर पाकिस्तानी सेना एक भी गोली चलाने की हिम्मत नहीं कर सकेगी|

New Delhi: Pakistan’s deadline has come. PM Modi has succeeded in isolating Pakistan and many other world countries including the US have left Pakistan. In the same way, Indian Army is going to get bricks of Pakistan bricks, after which the Pakistani army will not be able to dare to shoot a single shot.

डीआरडीओ द्वारा बनाये गए वेपन लोकेटिंग रेडार ‘स्वाति’ को तो भारतीय सेना को पहले ही सौंपा जा चुका है. खबर है कि ऐसे 30 रडार भारतीय सेना को जल्द ही मिलने वाले हैं, जिन्हे पाकिस्तान से सटी सीमा और एलओसी पर तैनात किया जाएगा| बता दें कि ‘स्वाति’ के नाम से ही पाक फ़ौज थर-थर काँप उठती है. दरअसल भारत के साथ आमने-सामने लड़े गए सभी युद्धों में पाकिस्तान को हमेशा मुँह की खानी पड़ी है. ऐसे में पाक सैनिक छुप कर सीमा पार से गोलियां, मोर्टार और रॉकेट दागते रहते है|

Weapon locating radar ‘Swati’ created by DRDO has already been handed over to the Indian Army. It is reported that such radars are expected to soon meet the Indian Army, which will be deployed on the border with Pakistan and the LoC. Let us know that the name of ‘Swati’ only raises the Pak army. Indeed, in all the war fought with India, Pakistan has always lost its face. In this way, the Pak soldiers hide the bullets, mortars and rockets from across the border.

भारतीय सेना भी जवाबी कार्रवाई करती तो है लेकिन गोलीबारी करने वाले पाक सैनिकों की सटीक जानकारी न होने की वजह से भारतीय सेना के सामने मुश्किल आती है. मगर 30 स्वाति रडार सिस्टम की एलओसी पर तैनाती के बाद जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से छिप कर हमला होगा, भारतीय सेना के जवानों को तुरंत पता चल जाएगा कि फायरिंग कहां से हो रही है, रॉकेट कहां से दागे जा रहे हैं और उनकी दूरी और ट्रेजेक्टरी क्या है|

The Indian army also responded, but due to lack of accurate information of the Pakistani soldiers firing, the Indian army faces difficulties. But after the deployment of 30 Swati radar system, after the deployment of Pakistan by the side of the LoC, Indian Army personnel will know immediately where the firing is from where the rockets are being pressed and their distance and What is the tragedy?

30 नए स्वाति रडार के जरिए यह सब जानकारी चंद मिनटों में मिल जाएगी और उसके बाद भारतीय सेना सटीक हमला करेगी और पाकिस्तानी पोस्ट या गोलीबारी की जगह को पलक झपकते ही तबाह कर देगी|

Through 30 new Swati radars, all this information will be found in a few minutes and after that the Indian army will attack exact and will destroy the Pakistani post or firing place with a blink of sight.

स्वाति रडार सिस्टम के द्वारा दुश्मन की ओर से हो की जा रही गोलीबारी की सटीक लोकेशन या ठिकाने का पता चल जाता है. ये दुश्मन के मोर्टार रॉकेट लॉन्चर और आर्टिलरी गन को सिर्फ एक से दो मिनट में तबाह करने की ताकत रखता है. स्वाति रडार सिस्टम की रेंज 30 से 50 किलोमीटर तक है|

The exact location of the firing or detection of enemy firing by Swati Radar system is known. It has the power to destroy enemy mortar rocket launcher and artillery guns in just one to two minutes. The Swati radar system ranges from 30 to 50 kilometers.

सबसे ख़ास बात ये है कि इस रडार सिस्टम को फायर सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे सीमा पर होने वाली फायरिंग की जानकारी के साथ दुश्मन को ऑटोमैटिक मुहतोड़ जवाब दिया जा सकेगा. मतलब यहाँ पाक फ़ौज ने मोर्टार दागा और पलक झपकते ही ‘स्वाति’ मोर्टार हमले की जगह का पता लगाते हुए आटोमेटिक हमला कर देगा और दुश्मन के संभलने से पहले ही उसका काम-तमाम हो जाएगा|

The most important thing is that this radar system will be connected to the fire system, allowing the enemy to respond automatically with information about firing on the border. This means that the Pak army will blast the mortar and in the blink of an eye, the ‘Swati’ mortar will attack an automatic attack by attacking the place and it will be full of work before the enemy takes over.

ये रडार सिस्टम रात में भी काम करता है, मतलब पाक फ़ौज जो कायरों की तरह से रात में छिप कर हमला करती है, वो भी इसके कारण रुक जाएगा. 30 नए रडार की तैनाती के बाद पाक सैनिक या आतंकी पहाड़ों में छिपकर अपने पापी मंसूबों को कभी अंजाम नहीं दे पाएंगे, एलओसी से सटे 50 किलोमीटर के दायरे में किसी भी पाकिस्तानी पोस्ट या बंकर से फायरिंग हुई तो अगले ही पल वो पूरा इलाका धुआं-धुआं हो जाएगा|

These radar systems also work in the night, that means the Pak army, which, like the cowardly, attacks in the night, will be stopped, which will also stop because of it. After the deployment of 30 new radars, Pak soldiers or terrorists will not be able to execute their sinners by hiding in the mountains, if any Pakistani post or bunker firing within 50 km radius adjacent to the LoC, then the next time the smoke of the entire area- Smoke will occur.

जिस-जिस इलाके में ‘स्वाति’ की तैनाती हो चुकी है, वहां पाक फ़ौज के हमले बंद हो गए हैं. इसकी वजह यह है कि भारतीय सेना को इस रडार से पाकिस्तान की चौकी और पोस्ट की सटीक लोकेशन मिल जा रही है, जिससे भारतीय सेना भी मुंहतोड़ जवाब दे रही है|

In the area where ‘Swati’ has been deployed, the attacks of the Pak army have ceased. The reason for this is that the Indian Army is getting an accurate post of Pakistan post and post from this radar, which is giving the Indian Army a shocking response.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=4Tyz5onsJbA

https://www.youtube.com/watch?v=dsJje-_3hzs

बॉर्डर पार कर अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ को भारतीय सेना ने सिखाया ऐसा सबक, मरते दम तक नहीं भूलेंगे !

नई दिल्ली: डोकलाम विवाद को ख़त्म हुए अभी कुछ वक़्त ही बीते हैं और चीन के बार फिर दुबारा अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. अपनी ज़मीन के सारे संसाधनों को ख़त्म करने के बाद अब चीन की नज़र भारत पर है, तभी तो वो बार-बार सीमा उल्लंघन कर घुसा चला आता है, इस बार अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन ने घुसपैठ की हिमाकत करी है, लेकिन हमारे देश के जाबांज़ जवानों ने करारा मुहतोड़ जवाब दिया है|

New Delhi: The Doklam controversy has ended, and it has just started to show its colors again. After finishing all the resources of its land, now China is on the eye of India, only then it is repeatedly violated by the border violation, this time China has infiltrated infiltration with Arunachal Pradesh, but in our country, Jabonz jawans have responded to the call.

डोकलाम के बाद अब चीन की सेना ने अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ करने की हिमाकत करी है, बता दें अरुणाचल प्रदेश को चीन अपना हिस्सा मानता है. अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक भारत के अरुणाचल प्रदेश के लगते सीमा के तूतिंग क्षेत्र में 200 मीटर तक की सीमा में चीनी सैनिक घुसे चले आये. लेकिन हमारी भारतीय सेना ने चीन सैनिको को मुहतोड़ जवाब देते हुए वहां से खदेड़ दिया. हालात काबू से बाहर होते देख भारतीय सैनिकों ने खदेड़ा, तो यह चीनी सैनिक अपने साजो सामान, उपकरण छोड़कर भाग निकले|

Now after the Dalai Lama, the Chinese army has begun to infiltrate into Arunachal Pradesh, tell Arunachal Pradesh to consider China as its share. According to the big news now, Chinese soldiers came to the border in the border area of the border area of Arunachal Pradesh, which is 200 meters. But our Indian army retaliated by giving a counterattack to the Chinese army. If the Indian soldiers saw the situation was out of control, then this Chinese soldier escaped his equipment and equipment.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी असैन्य दल मार्ग गतिविधियों के लिए आया था, लेकिन भारतीय सैनिकों के कड़े विरोध के बाद भाग निकला, चीनी दल अपने साथ खुदाई करने वाले उपकरण सहित सड़क बनाने में काम आने वाले कई उपकरण भी लेकर आआ था, जिसको वो वापस लौटते समय छोड़ गया.भारतीय सुरक्षा बलों ने चीनी दल के सड़क बनाने के उपकरणों को भी जब्त कर लिया है|

According to media reports, the Chinese civilian party came for routine activities, but after the strong protest of the Indian soldiers escaped, the Chinese team had come along with many equipment used to dig the road along with the equipment, Left at the time of returning. Indian security forces have seized the road construction equipment of the Chinese party.

अरुणाचल प्रदेश के ही स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक चीनी दल में सैनिकों के साथ असैन्य कर्मचारी भी थे. इससे करीब चार महीने पहले सिक्किम सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच डोकलाम गतिरोध खत्म हुआ था. ये घुसपैठ दिसंबर के अंतिम सप्ताह की है. सीमा के समीप के जीडो गांव के न्योमिन और गेलिंग गांव के पेमा न्यिसिर ने बताया कि खुदाई करने वाली दो मशीनें जब्त कर ली गई हैं. उन्होंने कहा कि गेलिंग में सियांग नदी के दाएं तट से सड़क निर्माण की गतिविधियां नजर आती हैं. उस जगह से गेलिंग की हवाई दूरी करीब सात आठ किलोमीटर है|

According to local villagers of Arunachal Pradesh, the Chinese team also had civilian employees with soldiers. About four months ago, the Dokalam stalemate had ended between the Indian and Chinese troops in the Sikkim sector. This infiltration is the last week of December. Neemin of Jido village near the border and Pema Nyisir of Gelling village said that the two excavator machines have been seized. He said that the construction of roads from the right bank of the river Siang is seen in Gelling. The distance from Galing to that place is about seven to eight kilometers.

ग्रामीण बताते हैं कि भारतीय और चीनी सैनिकों ने काटी गई मिट्टी के पास शिविर लगा दिए और पत्थरों से एक दीवार खड़ी कर दी है. ग्रामीणों ने चीन की गतिविधियों के बारे में पुलिस को सूचनी दी, जिसने बिशिंग के समीप मेडोग में तैनात आईटीबीपी को इसकी खबर दी. दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, लेकिन चीनी दल ने मानने से इनकार कर दिया. तब भारतीय सेना को वहां भेजा गया, जो अबतक वहां तैनात हैं|

Rural explains that Indian and Chinese soldiers have camped near cut soil and have set up a wall with stones. The villagers informed the police about the activities of China, who reported it to ITBP stationed in Medoga near Bishishing. On both sides, we were told, but the Chinese party refused to accept. Then the Indian Army was sent there, who are posted there till now.

तो वहीँ चीन के विदेश मंत्रालय इस बात पर कुछ भी जानकी होने का ढोंग रच रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि उनको इस बात की कोई जानकारी नहीं है. चीन का दावा है की अरुणाचल प्रदेश दक्षिण तिब्बत का हिस्सा है. वास्तविक नियंत्रण रेखा के 3,488 किमी लंबे हिस्से को लेकर भारत चीन सीमा विवाद है|

So China’s Foreign Ministry is pretending to be anything but knowing this. Chinese Foreign Ministry spokesman Geng Shuang said that he has no information about this. China claims that Arunachal Pradesh is a part of South Tibet. Indo-China border dispute over the 3,488 km long stretch of the Line of Actual Control.

इससे पहले डोकलाम में भी चीन ने ऐसी ही हिमाकत करी थी, बिना इजाज़त दूसरे देश कि ज़मीन पर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया था. दोनों देशों की सेनाओं के बीच 72 दिनों तक गतिरोध चला था. इस दौरान दोनों देशों के बीच माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था. तब भी चीन कि सेना को पीछे हटना पड़ा था और एक बार फिर भारतीय सेना ने ऐसा कर दिखाया है|

Before that, China had done such a snowing in Dokalm, that other countries had started work on making land on the land without permission. There was a standoff between the two countries for 72 days. During this, the atmosphere between the two countries became quite stressful. Even then the Chinese army had to retreat and once again Indian Army has done so.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=xlRRjGN7n7U

https://www.youtube.com/watch?v=aGHeWHD0uXg

VIDEO : अगर भारत चीन को झुका सकता है तो पकिस्तान की क्या औकात है – पाक मीडिया !

पाकिस्तान हमेशा से अपने देश की विकाश को दरकिनार कर भारत की बर्बादी पर ज्यादा तवज्जो देता रहा है, वहाँ अबतक जितनी भी सरकार आई लगभग सब ने भारत के खिलाफ जहर उगलने का ही काम किया है! इसके अलावे जिस किसी ने भी भारत के साथ दोस्ती की हाथ बढ़ाने की कोशिश की उन नेताओं को इसका खामयाजा बखूबी भुगतना पड़ा! क्युकी वहां की सेना तख्ता पलट कर देती है |

Pakistan has always been giving more importance to the waste of India bypassing the development of our country, almost all the government has come here, almost all have done the same thing to promote poison against India! Besides, whoever tried to extend friendship with India, those leaders had to suffer the consequences of this! The Qiki overturns the army’s coup.

एक बात तो सत्य है की पाकिस्तान जब जब भारत से भिड़ने की कोशिश की है तब तब उसे मुहकी कहानी पड़ी है! भारतीय शुक्रगुजार है अपने सैनिकों का जिन्होंने अपनी जान की परवाह किये बिना पाकिस्तान के नपक इरादों को नेस्तोनाबूत कर दिया! चाहे वो 1971 का युद्ध हो या करगिल!

One thing is true that when Pakistan has tried to confront India, then she has a fascination story! Thanking the Indians, who sold their soldiers to Pakistan, without regard to their own lives! Whether it is 1971 war or Kargil!

लेकिन एक पाकिस्तान है जो अभी तक भी उसी हालत में है जैसे 1947 में था। क्योंकि इन्होंने तो देश की तरक्की पर कभी जोर दिया ही नही बस जोर दिया तो भारत की तरक्की पर रोड़ा बनने का, भारत की तकक्की पर जलने का। ये लोग आये दिन बस भारत को बर्बाद करने के झूठे ख्वाब देखते हैं। दुनिया के कई मुल्क चाँद और मंगल ग्रह और पहुँच गये लेकिन पाकिस्तानी अभी भी भारत में घुसपैठ की ही कोसिश करता है।

But there is a Pakistan which is still in the same condition as it was in 1947. Because he never emphasized on the progress of the country, not just the emphasis, the impediment on the progress of India, the burning of India on the fate. These people see the false sorrow of destroying India simply on the day of coming. Many countries of the world reached the moon and Mars, but the Pakistani still intends to infiltrate into India.

भारत चाइना मुद्दे पर चीन ने भारत के सामने घुटने टेक दिये हैं। इस बिहाफ पर पाकिस्तान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में न्यूज़ स्टूडियो में भारत पाकिस्तान की स्थति पर चर्चा हो रही है। जिसमे पाकिस्तानी एक्सपर्ट भी बैठे हुवे थे। बातचीत में कहा कि भारत ने एशिया में चीन का हव्वा खराब कर दिया । हमारी औकात ही क्या है। हम तो भारत के आगे कहीं भी नही टिकते।

China has knocked the front of India on the China-China issue. A video of Pakistan on this behalf is becoming viral. The video is being discussed on the status of India-Pakistan in the news studio. In which the Pakistani experts were sitting. In the talks, India said that India has ruined China’s Eve in Asia. What is ours? We can not stay anywhere ahead of India.

https://youtu.be/MhZrA3Y51XI

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=g-H5DwYD5dc

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

ब्रेकिंग : फारूख अब्दुल्ला के देश के साथ गद्दारी करने पर हुआ बड़ा एक्शन, ऋषि कपूर की बोलती हुई बंद

नई दिल्ली : फारूख अब्दुल्ला ने कुछ वक़्त से लगातार भारत माता के प्रति अमर्यादित टिप्पणी व पाकिस्तान को समर्थन की बात करी थी. इससे पहले कभी पत्थरबाजों का समर्थन कभी अलगवववादियों का समर्थन, लेकिन इस बार तो अबदुल्ला ने हद पार करते हुए कहा था कि पीओके पर कब्ज़ा करने कि दम किसी के बाप में नहीं है. पीओके पाकिस्तान का ही रहेगा. जिसके बाद अब फारुख अब्दुल्ला के खिलाफ बड़ा एक्शन होता दिख रहा है |

New Delhi: Farooq Abdullah had talked of continuous support for Bharat Mata and support for Pakistan from time to time. Never before was the support of stonebirds ever supported by the separatists, but this time Abdullah had crossed the limits saying that the possession of the POK was not in anybody’s father. PoK will remain in Pakistan. After that there is now a big action against Farooq Abdullah.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखीं, वो इतना कमजोर नहीं है कि अपने कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर भारत का कब्जा होने देगा | पाकिस्तान के पास भी एटम बम है| अब्दुल्ला ने कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान का बताया था | यही नहीं अभिनेता ऋषि कपूर ने भी अब्दुल्ला का समर्थन किया था और अब सलमान खुर्शीद ने भी अब्दुल्ला का समर्थन कर दिया है |

Farooq Abdullah had said that Pakistan did not wear bangles, it is not so weak that it will allow India to capture its occupied Kashmir (PoK). Pakistan also has an atom bomb. Abdullah reportedly told Pakistan-occupied Kashmir to Pakistan. Not only this, actor Rishi Kapoor also supported Abdullah and now Salman Khurshid has also supported Abdullah.

फारुख अब्दुल्ला के इस बेतुके बयान के बाद आक्रोशित वकीलों ने शनिवार को जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुला का पूतला फूंका | साथ ही दिल्ली के हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है | इस याचिका में फारुख अब्दुल्ला पर देशद्रोह का मुकद्दमा दर्ज करने और पुलिस को गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से आदेश करने की मांग की गई है | इसके अलावा पासपोर्ट जब्त करके एनआईए और आईबी से जांच करवाने की भी याचिका में मांग की गई है |

After this absurd statement of Farooq Abdullah, the raged lawyers blew the effigy of former Jammu and Kashmir Chief Minister Farooq Abdullah on Saturday. Along with this, a Public Interest Litigation (PIL) has been filed in the High Court of Delhi. In this petition, Farooq Abdullah has been asked to file a sedition case and order the court to arrest the police. Apart from this, a demand has been sought in the petition to seize passports and investigate with NIA and IB.

याचिकाकर्ता का कड़े लफ्ज़ में कहना है कि फारूक अब्दुल्ला को दो बार मुख्यमंत्री भारत की जनता ने बनाया है, उनकी राष्ट्रीयता भारतीय है | लेकिन वो गुणगान पाकिस्तान का कर रहे हैं. ऐसे लोग खाते भारत का हैं और महिमामंडन पाकिस्तान का करते हैं. ऐसे लोगों की फंडिंग की भी जांच होनी चाहिए | ये भारत माता का अपमान है.याचिकाकर्ता का कहना है कि जब वो वोट हिंदुस्तान की जनता से मांगते हैं, तो फिर पाकिस्तान के साथ इतना प्रेम क्यों?

In the strong words of the petitioner, it is said that Farooq Abdullah has been made twice by Chief Minister of India, his nationality is Indian. But they are doing homage to Pakistan. These people belong to India and glorify Pakistan. Funding of such people should also be investigated. This is an insult to Bharat Mata. The petitioner says that when they demand the votes from the people of India, then why so much love with Pakistan?

इस याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट सुनवाई करेगा | अब देखना होगा कि कोर्ट भी देशभक्ति के हित में कुछ कड़ा फैसला सुनाएगा या पिछले मामलों कि तरह इसे भी आया गया कर दिया जाएगा | इससे पहले भी फारुख अब्दुल्ला पत्थरबाजों का समर्थन कर चुके हैं |

The High Court will hear the petition on Monday. Now it is necessary to see that the court will also give some tough verdict in the interest of patriotism or it will also be passed in the previous cases. Even before that Farooq Abdullah has supported the stone makers.

ये वहीँ पत्थरबाज होते हैं जो जब सेना आतंकियों का एनकाउंटर करने लगती है तभी उन्हें बचने के लिए सेना पर पत्थर फेंकने लगते हैं | लेकिन जाबांज सेना ने ऑपरेशन कासो चला रखा है घाटी में जिसमें हर पत्थरबाज को दूर से ही मार मार के खदेड़ दिया जाता है जिससे वो एनकाउंटर वाले क्षेत्र में घुस ही न पाय |

These are stonework which, when the army starts encroaching the terrorists, then they start throwing stones at the army to save them. But the Jabanj army has operated casino in the valley where every stone carrier is driven away by killing it so that it can not enter the area of the encounter.

यह भी देख :

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

 

इस बहादुर जवान ने 1800 चीनी फौजियों को उतर दिया था मौत के घाट, चीनी सेना की हो गई थी हवा खराब

जिस भूल को उस समय के राजनेताओं ने किया और जिस के चलते उन्होंने सेना को आगे कर के खुद पीछे हो गए थे उस भूल को सुधारते हुए सदा सदा के लिए अमरता पाने वाले मेजर शैतान सिंह जी का आज बलिदान दिवस है . अफ़सोस अपनी भूल की चर्चा न करने वाले उस समूह ने धीरे धीरे ऐसे अमर बलिदानियों को भी इसलिए भुला दिया क्योकि इनकी चर्चा होगी तो उन्हें अपनी बेहद शर्मनाक राष्ट्रनीति और विदेश नीति की भी चर्चा करनी होगी जिसके चलते एक छोटे देश जितना भूमि युद्धोन्मादी चीन हमसे ले कर चला गया . आईये याद करते हैं चीन युद्ध के उस अमर बलिदानी को जिसका नाम है मेजर शैतान सिंह |

Correcting that mistake, the mistake of the time that the politicians did, and due to which they had lagged behind the army, today is the sacrifice day of Major Shaitan Singh ji who has immortality for eternity. Sadly, the group who did not discuss their mistake gradually forgot such immortal sacrifices as they would be discussed, they would have to discuss their highly embarrassing nationalism and foreign policy, due to which the land warrior China took us from a small country. Did it Let us recall that the immortal sacrifice of the war of China, named Major Satan Singh.

जैसलमेर का प्राचीनतम इतिहास भाटी शूरवीरों की रण गाथाओं से भरा पड़ा है। जहाँ पर वीर अपने प्राणों की बाजी लगा कर भी रण क्षेत्र में जूझते हुए डटे रहते थे। मेजर शेतान सिंह की गौरव गाथा से भी उसी रणबंकुरी परम्परा की याद ताजा हो जाती है। जैसलमेर जिले के बंसार (बनासर) गांव के ले.कर्नल हेमसिंह भाटी के घर 1 दिसम्बर 1924 को जन्में इस रणबांकुरे ने मारवाड़ राज्य की प्रख्यात शिक्षण संस्था चैपासनी स्कुल से शिक्षा ग्रहण कर एक अगस्त 1949 को कुमाऊं रेजीमेंट में सैकेंड लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्ति प्राप्त कर भारत माता की सेवा में अपने आपको प्रस्तुत कर दिया था। मेजर शैतान सिंह के पिता कर्नल हेमसिंह भी अपनी रोबीली कमांडिंग आवाज, किसी भी तरह के घोड़े को काबू करने और सटीक निशानेबाजी के लिये प्रख्यात थे।

The oldest history of Jaisalmer is full of rhetoric of Bhati Knights. Wherever the heroes kept betting their lives, they kept fighting in the battlefield. Major Shaitan Singh’s Gaurav Gatha also reminisces the same Rambankuri tradition. Born on December 1, 1924, at the house of Late Colonel Hemsingh Bhati of Bansar (Banasar) village of Jaisalmer district, Ranbankur received an education from the Chapatiya School, a renowned educational institution of Marwar State, and was appointed as a Second Lieutenant in Kumaon Regiment on August 1, 1949. The tax was presented to him in the service of Mother India. Colonel Hemsingh, father of Major Shaitan Singh, was also famous for his robotic commanding voice, control of any kind of horse and precision shooting.

18 नवम्बर 1962 की सुबह अभी हुई ही नहीं थी, सर्द मौसम में सूर्यदेव अंगडाई लेकर सो रहे थे अभी बिस्तर से बाहर निकलने का उनका मन ही नहीं कर रहा था, रात से ही वहां बर्फ गिर रही थी। हाड़ कंपा देने वाली ठण्ड के साथ ऐसी ठंडी बर्फीली हवा चल रही थी जो इंसान के शरीर से आर-पार हो जाये और इसी मौसम में जहाँ इंसान बिना छत और गर्म कपड़ों के एक पल भी नहीं ठहर सकता, उसी मौसम में समुद्र तल से 16404 फुट ऊँचे चुशूल क्षेत्र के रेजांगला दर्रे की ऊँची बर्फीली पहाड़ियों पर आसमान के नीचे, सिर पर बिना किसी छत और काम चलाऊ गर्म कपड़े और जूते पहने सर्द हवाओं व गिरती बर्फ के बीच हाथों में हथियार लिये ठिठुरते हुए भारतीय सेना की 13 वीं कुमाऊं रेजीमेंट की सी कम्पनी के 120 जवान अपने सेनानायक मेजर शैतान सिंह भाटी के नेतृत्व में बिना नींद की एक झपकी लिये भारत माता की रक्षार्थ तैनात थे।

It was not until morning on November 18, 1962 that Sundev was sleeping with an elephant in the cold weather, and he was not just trying to get out of bed, snow was falling from there at night. There was such cold ice-storm with winding humus, which crosses the human body, and in this season where people can not live without a roof and warm clothes, the same season, 16404 Under the skies above the sky on the high snowy mountains of the Rezangala Pass of the Foot High Catcher area, without any roof and work on the head, and the warm clothes worn by the shoes and the arms in the middle of the falling snow Titurte Indian Army’s 13th Kumaon Regiment of C Company of 120 personnel were deployed to escort their commandant Major Shaitan Singh Bharat Mata for a nap without sleep led Bhatti.

एक और खुली और ऊँची पहाड़ी पर चलने वाली तीक्ष्ण बर्फीली हवाएं जरुरत से कम कपड़ों को भेदते हुये जवानों के शरीर में घुस पुरा शरीर ठंडा करने की कोशिशों में जुटी थी वहीँ भारत माता को चीनी दुश्मन से बचाने की भावना उस कड़कड़ाती ठंड में उनके दिल में शोले भड़काकर उन्हें गर्म रखने में कामयाब हो रही थी। यह देशभक्ति की वह उच्च भावना ही थी जो इन कड़ाके की बर्फीली सर्दी में भी जवानों को सजग और सतर्क बनाये हुये थी।

The sharp snowy wind that runs on another open and high hill, was less inclined to wear the clothes of the soldiers in the jawans’ body and was trying to cool down the body. The feeling of saving Bharat Mata from the Chinese enemy was in the heart of that bitter cold. He was able to keep warm by shouting shola. It was a high sense of patriotism, which made the soldiers alert and alert even in the cold winter.

अभी दिन उगा भी नहीं था और रात के धुंधलके और गिरती बर्फ में जवानों ने देखा कि कई सारी रौशनीयां उनकी और बढ़ रही है चूँकि उस वक्त देश का दुश्मन चीन दोस्ती की आड़ में पीठ पर छुरा घोंप कर युद्ध की रणभेरी बजा चूका था, सो जवानों ने अपनी बंदूकों की नाल उनकी तरफ आती रोशनियों की और खोल दी। पर थोड़ी ही देर में मेजर शैतान सिंह को समझते देर नहीं लगी कि उनके सैनिक जिन्हें दुश्मन समझ मार रहे है दरअसल वे चीनी सैनिक नहीं बल्कि गले में लालटेन लटकाये उनकी और बढ़ रहे याक है और उनके सैनिक चीनी सैनिकों के भरोसे उन्हें मारकर अपना गोला-बारूद फालतू ही खत्म कर रहे है।

The day was not too late, and in the twilight and falling snow in the night, the soldiers saw that many of the lights were growing up because at that time the country’s enemy China had stabbed on the back of the friendship of the enemy and had fought the battle of war. The soldiers opened the bridges of their guns and the illuminating lights on their side. But late in the short time, Major Shaitan Singh did not seem to understand that his soldiers, who are trying to understand the enemy, are not actually Chinese soldiers, but hanging lanterns in their throats and their growing yak and their soldiers, The ammunition is ending in a bad way.

दरअसल चीनी सेना के पास खुफिया जानकारी थी कि रेजांगला पर उपस्थित भारतीय सैनिक टुकड़ी में सिर्फ 120 जवान है और उनके पास 300-400 राउंड गोलियां और महज 1000 हथगोले है अतः अँधेरे और खराब मौसम का फायदा उठाते हुए चीनी सेना ने याक जानवरों के गले में लालटेन बांध उनकी और भेज दिया ताकि भारतीय सैनिकों का गोला-बारूद खत्म हो जाये। जब भारतीय जवानों ने याक पर फायरिंग बंद कर दी तब चीन ने अपने 2000 सैनिकों को रणनीति के तहत कई चरणों में हमले के लिए रणक्षेत्र में उतारा।

In fact, the Chinese army had intelligence that there were only 120 soldiers in the Indian troop at Rejangla and they had 300-400 round tablets and just 1000 grenades, taking advantage of the darkness and bad weather, the Chinese army threw the yak animals around The lantern dam was sent to them and the ammunition of Indian soldiers was over. When Indian soldiers stopped firing on Yak, then China launched its 2000 soldiers in the battlefield for the attack in several stages under the tactics.

मेजर शैतान सिंह Major Shaitan Singh ने वायरलेस पर स्थिति की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को देते हुये समय पर सहायता मांगी पर उच्चाधिकारियों से जबाब मिला कि वे सहायता पहुँचाने में असमर्थ है आपकी टुकड़ी के थोड़े से सैनिक चीनियों की बड़ी सेना को रोकने में असमर्थ रहेंगे अतः आप चैकी छोड़ पीछे हट जायें और अपने साथी सैनिकों के प्राण बचायें। उच्चाधिकारियों का आदेश सुनते ही मेजर शैतान सिंह के मस्तिष्क में कई विचार उमड़ने घुमड़ने लगे। वे सोचने कि उनके जिस वंश को उतर भड़ किंवाड़ की संज्ञा सिर्फ इसलिये दी गई कि भारत पर भूमार्ग से होने वाले हमलों का सबसे पहले मुकाबला जैसलमेर के भाटियों ने किया, आज फिर भारत पर हमला हो रहा है और उसका मुकाबला करने को उसी भाटी वंश के मेजर शैतान सिंह को मौका मिला है तो वह बिना मुकाबला किये पीछे हट अपने कुल की परम्परा को कैसे लजा सकता है?

Major Shaitan Singh, Major Shaitan Singh, gave information on the situation to his superior to his high officials and asked for help on time but the high commissioners received the help that they were unable to get help. Some of your troops will be unable to stop the large Chinese army, so you Leave the track behind and save the lives of your fellow soldiers. After listening to the order of the High Command, Major Shaitan Singh began to get entangled in many brainstorming ideas. They thought that the descendants of their descendants were given the name of the burden only because they were attacked by the Bhasis of Jaisalmer in the first place, that India is now attacking today and to fight it, the same Bhati dynasty Major Sainthan Singh has got an opportunity, how can he be restrained from his post-retreat without a fight?

और उतर भड़ किंवाड़ कहावत को चरितार्थ करने का निर्णय कर उन्होंने अपने सैनिकों को बुलाकर पूरी स्थिति साफ साफ बताते हुये कहा कि – मुझे पता है हमने चीनियों का मुकाबला किया तो हमारे पास गोला बारूद कम पड़ जायेगा और पीछे से भी हमें कोई सहायता नहीं मिल सकती, ऐसे में हमें हर हाल में शहादत देनी पड़ेगी और हम में से कोई नहीं बचेगा। चूँकि उच्चाधिकारियों का पीछे हटने हेतु आदेश है अतः आप में से जिस किसी को भी अपने प्राण बचाने है वह पीछे हटने को स्वतंत्र है पर चूँकि मैंने कृष्ण के महान युदुवंश में जन्म लिया है और मेरे पुरखों ने सर्वदा ही भारत भूमि पर आक्रमण करने वालों से सबसे पहले लोहा लिया है, आज उसी परम्परा को निभाने का अवसर मुझे मिला है अतः मैं चीनी सेना का प्राण रहते दम तक मुकाबला करूँगा. यह मेरा दृढ निर्णय है।

They decided to call their soldiers and make the whole situation clear, saying that – I know if we fight against the Chinese, we will have less ammunition and we will not get any help from the back. In such a situation we will have to give martyrdom and none of us will survive. Since the high officials are ordered to retreat, therefore whoever you have saved your life is free to retreat but since I have been born in the great Yuduvans of Krishna and my forefathers always invaded the land of India. First of all, I have taken the iron, today I have had the opportunity to play the same tradition, so I will fight for the life of the Chinese army. This is my firm decision.

अपने सेनानायक के दृढ निर्णय के बारे में जानकार उस सैन्य टुकड़ी के हर सैनिक ने निश्चय कर लिया कि उनके शरीर में प्राण रहने तक वे मातृभूमि के लिये लड़ेंगे चाहे पीछे से उन्हें सहायता मिले या ना मिले. गोलियों की कमी पूरी करने के लिये निर्णय लिया गया कि एक भी गोली दुश्मन को मारे बिना खाली ना जाये और दुश्मन के मरने के बाद उसके हथियार छीन प्रयोग कर गोला-बारूद की कमी पूरी की जाय। और यही रणनीति अपना भारत माँ के गिनती के सपूत, २००० चीनी सैनिकों से भीड़ गये, चीनी सेना की तोपों व मोर्टारों के भयंकर आक्रमण के बावजूद हर सैनिक अपने प्राणों की आखिरी सांस तक एक एक सैनिक दस दस, बीस बीस दुश्मनों को मार कर शहीद होता रहा और आखिर में मेजर शैतान सिंह सहित कुछ व्यक्ति बुरी तरह घायलावस्था में जीवित बचे, बुरी तरह घायल हुए अपने मेजर को दो सैनिकों ने किसी तरह उठाकर एक बर्फीली चट्टान की आड़ में पहुँचाया और चिकित्सा के लिए नीचे चलने का आग्रह किया, ताकि अपने नायक को बचा सके किन्तु रणबांकुरे मेजर शैतान सिंह ने इनकार कर दिया।

Knowing about the strong determination of his commander, every soldier in that army decided that he would fight for the motherland till he died in his body, whether he could get help from him or not. It was decided to complete the reduction of bullets that one bullet should not be vacated without killing the enemy and after the enemy’s death, using the weapon of the enemy, the deficiency of ammunition should be met. And this strategy tactics of the counting of our mother mother, 2000 Chinese soldiers, despite the fierce invasion of Chinese army guns and mortars, every soldier killed one soldier ten ten, twenty two enemies, till the last breath of his life martyr And in the end some people, including Major Shaitan Singh, were living in a severely displaced situation, badly injured by the two soldiers, by taking some of the two soldiers in a hurry Of transported cover and urged walking down the medicine in order to save his hero but Rnbankure Major Shaitan Singh refused.

अपने दोनों सैनिकों को कहा कि उन्हें चट्टान के सहारे बिठाकर लाईट मशीनगन दुश्मन की और तैनात कर दे और गन के ट्रेगर को रस्सी के सहारे उनके एक पैर से बाँध दे ताकि वे एक पैर से गन को घुमाकर निशाना लगा सके और दुसरे घायल पैर से रस्सी के सहारे फायर कर सके क्योंकि मेजर के दोनों हाथ हमले में बुरी तरह से जख्मी हो गए थे उनके पेट में गोलियां लगने से खून बह रहा था जिस पर कपड़ा बाँध मेजर ने पोजीशन ली व उन दोनों जवानों को उनकी इच्छा के विपरीत पीछे जाकर उच्चाधिकारियों को सूचना देने को बाध्य कर भेज दिया।

Asked both of the soldiers to stand by the rock on them and light the machine gun and deploy the guns and tie the gun with one of their legs with the help of a rope so that they could be able to hit the gun with one leg and hit the other with a rope Could fire because with both hands of the Major had been badly injured in the attack, they were bleeding due to the bullets in their stomach, on which the garment dam Major took the position and Onon soldiers sent obliged to report back by officials against their will.

सैनिकों को भेज बुरी तरह से जख्मी मेजर चीनी सैनिकों से कब तक लड़ते रहे, कितनी देर लड़ते रहे और कब उनके प्राण शरीर छोड़ स्वर्ग को प्रस्थान कर गये किसी को नहीं पता. हाँ युद्ध के तीन महीनों बाद उनके परिजनों के आग्रह और बर्फ पिघलने के बाद सेना के जवान रेडक्रोस सोसायटी के साथ उनके शव की तलाश में जुटे और गडरियों की सुचना पर जब उस चट्टान के पास पहुंचे तब भी मेजर शैतान सिंह की लाश अपनी एल.एम.जी गन के साथ पोजीशन लिये वैसे ही मिली जैसे मरने के बाद भी वे दुश्मन के दांत खट्टे करने को तैनात है। मेजर के शव के साथ ही उनकी टुकड़ी के शहीद हुए 114 सैनिकों के शव भी अपने अपने हाथों में बंदूक व हथगोले लिये पड़े थे, लग रहा था जैसे अब भी वे उठकर दुश्मन से लोहा लेने को तैयार है।

When soldiers were sent to the badly wounded Major Chinese soldiers, how long did they fight and no one knows when their soul leaves the body and departed to heaven. Yes after the three months after the war, after the urging of his family and the melting of the snow, the army personnel gathered in search of his dead body along with the Red Cross Society, and when he reached the rock on the instructions of the guards, the corpse of Maj Shaitan Singh The position with the guns was found just like after death, they are deployed to sabotage the enemy’s teeth. Along with the body of Major, the bodies of 114 soldiers who had been martyred in their troop also laid guns and grenades in their own hands, and it seemed as if they got up and ready to take the iron with the enemy.

इस युद्ध में मेजर द्वारा भेजे गये दोनों संदेशवाहकों द्वारा बताई गई घटना पर सरकार ने तब भरोसा किया और शव खोजने को तैयार हुई जब चीनी सेना ने अपनी एक विज्ञप्ति में माना किया कि उसे सबसे ज्यादा जनहानि रेजांगला दर्रे पर हुई। मेजर शैतान सिंह की 120 सैनिकों वाली छोटी सी सैन्य टुकड़ी को मौत के घाट उतारने हेतु चीनी सेना को अपने 2000 सैनिकों में से 1800 सैनिकों की बलि देनी पड़ी। कहा जाता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को देख चीनी सैनिकों ने जाते समय सम्मान के रूप में जमीन पर अपनी राइफलें उल्टी गाडने के बाद उन पर अपनी टोपियां रख दी थी। इस तरह भारतीय सैनिकों को शत्रु सैनिकों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ था। शवों की बरामदगी के बाद उनका यथास्थान पर सैन्य सम्मान के साथ दाहसंस्कार कर मेजर शैतान सिंह भाटी को अपने इस अदम्य साहस और अप्रत्याशित वीरता के लिये भारत सरकार ने सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया।

The government then relied on the incident as told by both the messengers sent by Major in this war and was ready to find the body when the Chinese army in one of its releases believed that it was the most massacre at the Rezangala Pass. The Chinese army had to sacrifice 1800 soldiers out of their 2000 soldiers to bring the small army of 120 soldiers, Major Sitan Singh to death. It is said that in view of the indomitable courage and sacrifice of Indian soldiers to protect the motherland, Chinese soldiers had kept their caps on them after vomiting their rifles on the ground in honor of their respect. In this way, Indian soldiers received the highest honor from enemy soldiers. After the recovery of dead bodies, Maj. Shaitan Singh Bhati, along with cremation with military honors at his place of honor, was honored with the Param Vir Chakra, the highest honor of the army, for his indomitable courage and unforeseen courage.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

आखिर क्यों इजराइल इतनी मित्रता दिखा रहा है, क्या कारण है भारत के प्रति इस राजनैतिक प्रेम का…

हम सभी ने देखा की मोदी जब से इजराइल गए हैं सारा इजराइल उनपर प्यार बरसा रहा है| इसके क्या मायने हैं| क्यों इजराइल भारत के प्रधानमन्त्री और भारत, दोनों का दीवाना हो गया है| इजराइल ऐसा क्यों कर रहा है| कहने का मतलब है की दुनिया के सबसे ताकतवर देश में शुमार इजराइल का भारत के साथ क्या लेना देना हो सकता है|

We all have seen hom modiji is loved by israel ever since he decided to vsit israel. what does it mean? why israel prime minister has fallen in love with india. question is what on earth a powerful nation like israel has to do with a country like india.

कयास यह भी लगाये जा रहे हैं की इजराइल से भारत को इनोवेशन का बोहत बड़ा खजाना मिल सकता है| हालाकि इसैल बोहत छोटा सा देश है लेकिन भारत इजराइल से बोह्ह्त कुछ सीख सकता है| इजराइल की कुल जनसँख्या केवल 87 लाख है और क्षेत्रफल केवल 20700 वर्ग किलोमीटर है| यदि तुलना करें तो भारत का क्षेत्रफल इजराइल से 158 गुना ज्यादा है| जबकि जनसंख्या 153 गुना ज्यादा है| ऐसे में बोहत से लोग ये कहेंगे की इन दोनों देशों की तुलना संभव नहीं |

It is also being speculated that from Israel, India can get a great treasure of innovation. Though Ismail is a small country with Bohit, but India can learn something from Bohhat. The total population of Israel is only 87 million and the area is only 20700 square kilometers. If compared, the area of ​​India is 158 times more than Israel. While the population is 153 times more. In such a case, people will say that the comparison of these two countries is not possible.

हम भी यह बात जानते हैं लेकिन इनोवेशन क्षेत्रफल और जनसँख्या की मोहताज नहीं होती| नए आविष्कार और खोज कही भी हो सकती हैं| केवल खोज करने का भाव होना चाहिए| और इजराइल भाव में पीछे नहीं है| और इसीलिए इजराइल को इनोवेशन का केंद्र कहा जाता है| आतंकवाद से लड़ने के नए तरीके हों या खेती करने के नए फोर्मुले, इजराइल ने दोनों ही क्षेत्रो में झंडे गाढ़े हुए हैं| वह जय जवान भी है और जय किसान भी है|

We also know this, but the area of innovation and the population is not appealing. New inventions and discoveries can happen anywhere. There should be a sense of searching only. And Israel is not behind in the spirit. And that is why Israel is called the center of innovation. There are new ways to fight terrorism or the new formulas of farming, Israel has flagged the flags in both areas. He is also a Jai Jawan and Jai is a farmer too.

आतंकवाद से मुकाबला केसे किया जाता है? और सूखी ज़मीन पर खेती केसे होती है? ये इनोवेशन इजराइल ने पूरी दुनिया को करके दिखाया है| इजराइल दुनिया के उन चुनिन्द्दा देशों में शामिल है जो आतंकवाद से किसी भी तरह का कोई भी समझौता कभी भी नहीं करते हैं|

How to counter terrorism? And what is the cultivation of dry land? This innovation has shown to Israel through the whole world. Israel is among the select countries of the world who do not compromise on any kind of terrorism.

आज इजराइल के बने हथियार पूरी दुनिया में आतंकवादियों पर मौत बनकर बरस रहे हैं|
Today the weapons made by Israel are roaming on the terrorists throughout the world.

इतिहास गवाह है की भारतीय जनता पार्टी की सरकार से इजराइल के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं| इससे पहले पूर्व प्रधानमन्त्री अटल विहारी बाजपेयी के नेत्रत्व वाली सर्कार के समय भी तत्कालीन इजराइल के प्रधानमन्त्री अरियल शेरोन भारत की यात्रा करने वाले पहले इसरायली प्रधानमंती बने|

History is witness that Israel’s relations with the Bharatiya Janata Party government have always been good. Earlier, even during the reign of the Prime Minister Atal Bihari Vajpayee’s leadership, then Israel’s prime minister Ariel Sharon became the first Israeli prime minister to visit India.

कांग्रेस पार्टी पर ये आरोप लगते रहे हैं की उन्होंने इजराइल को नज़रंदाज़ किया| हालांकि पी वी नरसिंह राव के कार्यकाल में इजराइल से कूटनीतिक बातचीत की औपचारिक शुरुआत हुई थी|

The Congress party has been accusing that they ignored Israel. However, during the tenure of P.V. Narasimha Rao, formal formation of diplomatic negotiations was initiated by Israel.

इतिहास गवाह है की भारतीय जनता पार्टी की सरकार से इजराइल के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं| इससे पहले पूर्व प्रधानमन्त्री अटल विहारी बाजपेयी के नेत्रत्व वाली सर्कार के समय भी तत्कालीन इजराइल के प्रधानमन्त्री अरियल शेरोन भारत की यात्रा करने वाले पहले इसरायली प्रधानमंती बने|

History is witness that Israel’s relations with the Bharatiya Janata Party government have always been good. Earlier, even during the reign of the Prime Minister Atal Bihari Vajpayee’s leadership, then Israel’s prime minister Ariel Sharon became the first Israeli prime minister to visit India.

भारत और इजराइल में क्या समानताएं हैं और दोनों देशों को एक साथ क्यों काम करना चाहिए और इजराइल को ये बात समझ में आती है इसीलिए इजराइल भारत देश के साथ जुड़ने को बेताब है| अधिक जाने के लिए निचे विडियो देखें|

What are the similarities between India and Israel and why both countries should work together and Israel understands this, so Israel is desperate to be associated with India. Watch the video below to learn more.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=8ImzYyVUuNQ

CIA का बड़ा ख़ुलासा- सभी इस्लामिक देशों को अकेले युद्ध में हारने में सक्षम भारतीय सेना !

पिछले साल कुछ शिया मुस्लिम देशों को छोड़कर सभी इस्लामिक देशों ने इस्लामिक सेना बनाने का निर्णय किया था, और इसका प्रमुख पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को बनाया गया था, इस इस्लामिक सेना का हेडक्वार्टर सऊदी अरब में है, और राहिल शरीफ आजकल सऊदी में बैठते है |

Last year, except for some Shiite Muslim countries, all Islamic countries had decided to create an Islamic army, and it was made to the former chief of Pakistan Army General Gen. Rahil Sharif, the headquarters of the Islamic Army is in Saudi Arabia, and Rahil Sharif is nowadays Sit in saudi

 

इस्लामिक सेना के निर्माण के समय ये कहा गया था की युद्ध की स्तिथि में सभी इस्लामिक देश एकजुट हो जायेंगे, एक इस्लामिक देश पर हमला सभी इस्लामिक देशों पर हमला माना जायगे और इस्लामिक सेना एकजुट होकर लड़ेगी, पाकिस्तान इसके बाद भारत को धमकियाँ भी दे रहा था, पर सीआईए का कहना है की सभी इस्लामिक देश मिलकर भी भारत से युद्ध लड़े तो मात्र 14 दिनों में अकेला भारत सभी इस्लामिक देशों को हरा देगा |

At the time of the creation of the Islamic Army, it was said that all Islamic countries will be united in the war situation, an attack on an Islamic country will be considered an attack on all Islamic countries, and the Islamic army will fight together, Pakistan is threatening India after this. But the CIA says that even if all the Islamic countries fight together with India, only India will defeat all Islamic countries in 14 days.

दुनिया में 56 इस्लामिक देश हैं जिनकी कुल आबादी 162 करोड़ है | इन इस्लामिक देशो की औकात जानने का प्रयास करते है | विश्व के सभी इस्लामिक देश बनाम भारत |

There are 56 Islamic countries in the world, whose total population is 162 crores. Attempt to know the authors of these Islamic countries. All the Islamic countries of the world vs. India

कई इस्लामिक देश इतने छोटे है कि उनसे ज्यादा बड़ा तो भारत का गोवा राज्य है । ज्यादातर इस्लामिक देश भुखमरी से जूझ रहे हैं | पाकिस्तान के अलावा कोई मुस्लिम देश परमाणुं संपन्न नहीं है | इन 53 इस्लामिक देशोँ की सारी सेनाओं को जोड़ लिया जाये तो लगभग 19.62 लाख सैनिक है, जबकि भारत के पास 16.82 लाख आर्मी और 11.31लाख रिजर्व सैनिक है | किसी इस्लामिक देश के पास विमान वाहक युद्धपोत नहीँ है जबकि भारत के पास 5 युद्धपोत है |

Many Islamic countries are so small that more than them is Goa state of India. Most Islamic countries are battling hunger. Apart from Pakistan, no Muslim country is endowed with atoms. If all the forces of these 53 Islamic countries are added, then there are approximately 19.62 lakh soldiers, while India has 16.82 lakh army and 11.31 lakh reserves. There is no aircraft carrier warship near an Islamic country, while India has 5 warships.

किसी इस्लामिक देश के पास Anti BalasticMissile नही है | अमरीका, चीन, इजराइल के बाद भारत दुनिया का चौथा देश है , जिसके पास मिसाईल्स को हवा में नष्ट करने की शक्ति है | किसी इस्लामिक देश के पास 3200Km से ज्यादा की मारक शक्ति वाली मिसाईल नही है , भारत के पास 7000Km तक दुश्मनों को मारनेवाली पृथ्वी-5 मिसाईल है |

No Islamic country has Anti BalasticMissile. India is the fourth country in the world after America, China, Israel, which has the power to destroy missiles in the air. An Islamic country does not have an explosive missile of more than 3200Km, India has an earth-5 missile to kill enemies by 7000km.

किसी इस्लामिक देश के पास सुपर सोनिक मिसाईल नही है , भारत के पास ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाईल है | ये शक्ति सिर्फ अमेरिका,चीन और रूस के पास है | CIA के अनुसार मान लिया कि सारे इस्लामिक देश आतंकवादियों के साथ मिलकर भारत के साथ युद्ध करते है तो भी भारतीय सेना मात्र 14 दिनों में सारे इस्लामिक देशों मे तिरंगा लहराने की क्षमता रखती है | इन बीते दशकों में भारत की सैन्य ताकत काफी बढ़ गयी है और भारतीय सेना के पास सारे अत्याधुनिक हतियार भी आ गए हैं |

No Islamic country has a super sonic missile, India has a supersonic missile like Brahmos. This power is only with America, China and Russia. According to the CIA, even if all Islamic countries fight with terrorists, then the Indian army has the ability to blow the tricolor in just 14 days in all Islamic countries. In these past decades, India’s military strength has increased greatly and all the cutting-edge artisans have come to the Indian Army.

क्यों आज भी अकेला ही दुनिया को धूल चटा सकता है इजराइल, आतंकियों का काल है इजराइल !

इजरायल अपने सृजन के पहले ही क्षण से विवादित राष्ट्र रहा है। यह अरब देशों के अपने अस्तित्व के अगले दिन पर एक क्रूर हमले का सामना करना पड़ा, और उस दिन से इज़राइल प्रत्येक गुजरते दिन अपनी ताकत बनाने में जुड़ा हुआ है। यह एक अत्यंत प्रतिकूल परिस्थिति में मौजूद है जहां हर पड़ोसी राष्ट्र इसे नष्ट करना चाहता है। और यही कारण था कि इसराइल को अपने पड़ोसियों के साथ कई पूर्ण पैमाने पर युद्धों से लड़ना पड़ा और यह कई दशकों से अपने पड़ोसियों के साथ एक दैनिक झड़पों में शामिल हो गया। पूर्व-आजादी के लड़ाकों की नींव पर निर्मित, द्वार विश्व युद्ध II के हथियारों के साथ आपूर्ति की गई, इसराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 1960 और 1970 के दशक में, अपनी अद्वितीय जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय बहिष्कारों की वजह से, दोनों ने अपनी अपनी सैन्य तकनीकों का विकास करना शुरू किया, साथ ही साथ सर्वश्रेष्ठ विदेशी तकनीक को बढ़ाने के लिए |

Israel has been a disputed nation right from the very first moment of its creation. It faced a brutal attack from Arabian countries right on the very next day of its existence, and since that day Israel has been indulged in building its strength with each passing day. It exists in an extremely hostile neighborhood where every neighboring nation wants to destroy it. And that was the reason why Israel had to fight multiple full scale wars with its neighbors and it is indulged in a daily skirmishes with its neighbors for many decades.
Built on a foundation of pre-independence militias, supplied with cast-off World War II weapons, the Israel Defense Forces (IDF) have enjoyed remarkable success in the field. In the 1960s and 1970s, both because of its unique needs and because of international boycotts, Israel began developing its own military technologies, as well as augmenting the best foreign tech.

इज़राइली सैनिक 1 9 48 के बाद से इसराइल ने अपने मानव पूंजी को सशस्त्र बलों में बदलने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया है। आईडीएफ ने भर्ती, प्रशिक्षण और प्रतिधारण के सिस्टम विकसित किए हैं जो इसे दुनिया के कुछ सबसे सक्षम, सक्षम सैनिकों के क्षेत्र में पेश करने की अनुमति देते हैं। कोई भी तकनीक काम नहीं करती है, जब तक कि उनके पास स्मार्ट, समर्पित, अच्छी तरह प्रशिक्षित ऑपरेटर नहीं है, ताकि उन्हें अपनी पूरी क्षमता पर कार्य कर सकें। 1 9 48 के बाद से इसराइल के नागरिकों के लिए एक अनिवार्य रक्षा सेवा है, और हम मानते हैं कि इस नीति ने एक शानदार परिणाम दिया है।

The Israeli Soldier Since 1948 Israel has initiated a programme to convert its human capital to the armed forces. The IDF has developed systems of recruitment, training, and retention that allow it to field some of the most competent, capable soldiers in the world. None of the technologies work unless they have smart, dedicated, well-trained operators to make them function at their fullest potential. Israel has a mandatory Defense Service for its Citizens since 1948, and we believe this policy has given a tremendous results.

मेर्कवा टैंक:
1 9 7 9 में मर्कवा टैंक आईडीएफ में शामिल हो गया और इसके घरेलू डिजाइन और निर्माण में अस्थिर विदेशी आपूर्ति की समस्याओं से परहेज किया गया, जबकि इजरायल को केंद्रीय पर्यावरण के बजाय अपने पर्यावरण के लिए अनुकूलित डिजाइनों पर ध्यान केंद्रित करने की इजाजत भी देनी थी। कई तरह के 1600 मेर्कवों ने सेवा में प्रवेश किया है, रास्ते में कई सौ अभी भी हैं। यह अपनी गतिशीलता, सटीक और गति के लिए प्रसिद्ध है हाल ही में गाजा युद्धों में, आईडीएफ ने फिलक्का की स्थिति में घुसने के लिए मेर्कवाओं का इस्तेमाल किया है जबकि सक्रिय रक्षा प्रणालियों ने कर्मचारियों को सुरक्षित रखा है। इसराइल ने भी संशोधनों को विकसित किया है जो शारिरी और कम तीव्रता से निपटने में मर्कवाओं की क्षमताओं को बढ़ाती है।

Merkava Tank:
The Merkava tank joined the IDF in 1979 and its domestic design and construction avoided problems of unsteady foreign supply, while also allowing the Israelis to focus on designs optimized for their environment, rather than for Central Europe. Around 1,600 Merkavas of various types have entered service, with several hundred more still on the way. It is famous for its maneuverability, precision and speed. In both of the recent Gaza wars, the IDF has used Merkavas to penetrate Palestinian positions while active defense systems keep crews safe. Israel has also developed modifications that enhance the Merkavas’ capabilities in urban and low-intensity combat.

एफ -115 थंडर लड़ाकू विमान:
इज़राइली वायु सेना ने 1 9 70 के दशक के बाद से एफ -15 के वेरिएंट ले जाया है, और यह ईगल की दुनिया का सबसे बहुमुखी और प्रभावी उपयोगकर्ता बन गया है। इजरायलियों ने वायु वर्चस्व और हड़ताल के प्रयोजनों के लिए एफ -15 को परिपूर्ण किया है संभ्रांत पायलटों द्वारा लाया गया, आईएएफ के एफ -15 भारतीय मध्य पूर्व में विमान के सबसे घातक स्क्वाड्रन बने रहते हैं।

F-15I Thunder Fighter Jet :
The Israeli Air Force has flown variants of the F-15 since the 1970s, and has become the world’s most versatile and effective user of the Eagle. Israelis have perfected the F-15 both for air supremacy and for strike purposes. Flown by elite pilots, the F-15Is of the IAF remain the most lethal squadron of aircraft in the Middle East.

जेरिको III परमाणु मिसाइल प्रणाली:
जेरिको 1 बैलिस्टिक मिसाइल ने 1 9 70 के दशक की शुरुआत में सेवा में प्रवेश किया, अंततः जेरिको द्वितीय और जेरिको III की जगह ले ली। जेरिको III क्षेत्र में सबसे उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल है, संभवतः मध्य पूर्व में न केवल हड़ताली लक्ष्यों में सक्षम है, लेकिन यूरोप, एशिया और संभवत: उत्तर अमेरिका में भी। जेरिको 1 बैलिस्टिक मिसाइल ने 1 9 70 के दशक की शुरुआत में सेवा में प्रवेश किया, अंततः जेरिको द्वितीय और जेरिको III की जगह ले ली। जेरिको III क्षेत्र में सबसे उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल है, संभवतः मध्य पूर्व में न केवल हड़ताली लक्ष्यों में सक्षम है, लेकिन यूरोप, एशिया और संभवत: उत्तर अमेरिका में भी। यरीहो III यह सुनिश्चित करता है कि इजरायल पर कोई परमाणु हमला विनाशकारी प्रतिशोध के साथ मिलेगा, खासकर जब यह संभव नहीं है कि इजराइल पहले हड़ताल से निहत्थे हो सकता है। बेशक, कोई भी संभावित इजरायल के शत्रु परमाणु हथियार नहीं हैं, ये मिसाइल पूरे क्षेत्र में यरूशलेम की परिक्रमात्मक परमाणु श्रेष्ठता देते हैं।

Jericho III Nuclear Missile System :
The Jericho I ballistic missile entered service in the early 1970s, to eventually be replaced by the Jericho II and Jericho III.The Jericho III is the most advanced ballistic missile in the region, presumably capable of striking targets not only in the Middle East, but also across Europe, Asia, and potentially North America. The Jericho I ballistic missile entered service in the early 1970s, to eventually be replaced by the Jericho II and Jericho III.The Jericho III is the most advanced ballistic missile in the region, presumably capable of striking targets not only in the Middle East, but also across Europe, Asia, and potentially North America. The Jericho III ensures that any nuclear attack against Israel would be met with devastating retaliation, especially as it is unlikely that Israel could be disarmed by a first strike. Of course, given that no potential Israeli foe has nuclear weapons, these missiles give Jerusalem presumptive nuclear superiority across the region.

 

डॉल्फिन क्लास पनडुब्बी:
इजरायल के परमाणु निवारक में डॉल्फिन वर्ग की भूमिका लगभग निश्चित रूप से गहराई से अतिरंजित हो गई है। निवारक गश्ती करने के लिए एक डीजल बिजली पनडुब्बी की क्षमता बिल्कुल सीमित है, भले ही वे कौन-सा ऑर्डनेंस लेते हैं हालांकि, डॉल्फिन आईडीएफ द्वारा आवश्यक अन्य सभी अभियानों के लिए एक प्रभावी मंच बना रहता है।  समुद्री टोहों में सक्षम, दुश्मन जहाजों को डूबने या अन्यथा हस्तक्षेप करने में सक्षम है, और विशेष शक्तियों को अप्रतिबंधित तटीय क्षेत्रों में वितरित करने के लिए, डॉल्फ़िन एक प्रमुख इजरायल सुरक्षा निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं, और इस क्षेत्र में सबसे संभावित घातक अंडरसेई बलों में से एक है।

 

Dolphin Class Submarine:
The role of the Dolphin class in Israel’s nuclear deterrent has almost certainly been wildly overstated. The ability of a diesel electric submarine to carry out deterrent patrols is starkly limited, no matter what ordnance they carry. However, the Dolphin remains an effective platform for all sorts of other missions required by the IDF. Capable of maritime reconnaissance, of sinking or otherwise interdicting enemy ships, and also of delivering Special Forces to unfriendly coastlines, the Dolphins represent a major Israeli security investment, and one of the most potentially lethal undersea forces in the region.

यह भी देखे

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM

बड़ी खबर- देश में फिर से मोदी सरकार ने करवाई सर्जिकल स्ट्राइक, आतंकियों के होश उड़े !

कांग्रेस सरकार के दौरान आतंकियों की चापलूसी और देशभक्तों को झूठे मुकदमों में फंसाने की ख़बरें आयेदिन ही आया करती थी. मगर मोदी सरकार के दौरान पहली बार देश ने सर्जिकल स्ट्राइक करनी शुरू की. पहले म्यांमार में, फिर पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करके भारतीय सेना ने आतंकियों के मन में खौफ भर दिया है | हाल ही में म्यांमार में एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक की गयी थी और उग्रवादियों के ठिकाने उड़ा दिए गए थे | अब देश के अंदर ही ऐसी ही एक और बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की खबर सामने आ रही है, जिसने नक्सलियों के होश उड़ाए हुए हैं |

During the Congress government, the news of trickery of terrorists and entrapment of the patriots in false cases came only days. But for the first time during the Modi government, the country started surgical strike. In the first place in Myanmar, then by the surgical strike in the PoK, the Indian Army has filled the horror of the terrorists. More recently, a surgical strike was done in Myanmar and the whereabouts of the militants were blown away. Now there is news of another such major surgical strike within the country, which has captured the naxalites.

सीआरपीएफ जवानों पर हमले करने वाले नक्सलियों के खिलाफ मोदी सरकार ने बड़ा अभियान छेड़ा हुआ है. खबर है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के काले धन, खुफिया तंत्र एवं हथियारों के जखीरे की बरामदगी की कार्रवाई के बाद अब पुलिस का सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन शुरू हो चुका है | इस सर्जिकल स्ट्राइक को फ्लेक्सी सर्जिकल स्ट्राइक कहा जा रहा है, इसके तहत नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले इलाकों में पुलिस ने इनामी राशि के साथ नक्सलियों की फोटो के बड़े-बड़े फ्लेक्स व् होर्डिंग लगवाए हैं |

The Modi government has launched a big campaign against the Maoists who attacked the CRPF jawans. The news is that the surgical strike operation of the police has started after the operation of the recovery of black money, intelligence and weapons of Naxalites in Chhattisgarh. This surgical strike is being called a Flexi Surgical Strike, under which the police has provided large flakes and billboards of Naxalites with prize money in areas called Maoists’ strongholds.

इनमे चेतावनी जारी की गयी है कि समर्पण करो वरना मारे जाओगे | पुलिस व् सुरक्षाबलों के जवान नक्सलियों के पीछे पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं और समर्पण ना करने पर इन्हे देखते ही मार गिराने के आदेश हैं | सभी इनामी नक्सलियों की जानकारी हर होर्डिंग पर नक्सली प्रभावित इलाकों के थाना कैंपों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनामी नक्सलियों के फ्लेक्स लगवाए जा रहे हैं |

It has been issued warning that surrender or else will be killed. The soldiers of the police and the security forces are fully engaged in the revenge of the Maoists and if they do not surrender they are ordered to kill. Information about all the prize naxalites, with floating camps of Naxalite affected areas on every hoarding, fencing of the Naxalites is also being implemented in rural areas.

इसको ही फ्लेक्सी सर्जिकल स्ट्राइक नाम दिया गया है. फ्लेक्स लगवाने के पीछे पुलिस का तर्क है कि जो नक्सली बीजापुर, सुकमा एवं ओड़िसा के सरहदीय इलाकों में सक्रिय हैं, उनका दंतेवाड़ा जिले में आना जाना लगा रहता है. ऐसे टॉप माओवादियों के नाम, इनाम की राशि की जानकारी के साथ फोटो फ्लेक्स में लगवाए गए हैं | पुलिस का मानना है कि इनामी राशि व जागरुकता के कारण एक ओर जहां ग्रामीणों द्वारा नक्सलियों की सूचना उन्हें मिलेगी, वहीं दूसरी ओर फ्लेक्स के माध्यम से नक्सलियों को भी समर्पण करने का मौका दिया जा रहा है | पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे नक्सलियों को संदेश दिया जा रहा है कि मुठभेड़ में बाकी जो नक्सली मारे गए हैं, समर्पण नहीं करने पर उनका भी यही हश्र होगा |

This is named as Flexi Surgical Strike. The police have argued that the Naxalites are active in the border areas of Bijapur, Sukma and Odisha, and they are going to come to Dantewada district. The names of such top Maoists, along with information about the amount of reward, have been photographed in Flex. Police believe that due to prize money and awareness, while the villagers will get information about the Maoists, on the other hand, Naxals are being given the opportunity to surrender through Flex. Police officers say that it is being given message to the Maoists that if the Naxalites have been killed in the encounter, they will be defeated if they do not surrender.

छोटे-छोटे पर्चे, पोस्टर नहीं बल्कि होर्डिंग्स के जरिये नक्सली ऑपरेशन इस योजना का नाम फ्लेक्सी सर्जिकल स्ट्राइक इसलिए भी रखा गया है, क्योंकि अब तक पुलिस पर्चे, पोस्टर के माध्यम से ही इनामी नक्सलियों की जानकारी दिवारों पर चस्पा करती थी. पहली बार बड़े-बड़े फ्लैक्स व होर्डिंग के माध्यम से इनामी नक्सलियों को लेकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है |

Naxalite operation through small swamps, posters, hoardings, this scheme has also been named Flexi Surgical Strike because the police used to send information about the Naxalites through the poster, poster, on the wall. For the first time, propaganda is being spread through the big flax and billboards for the Naxalites.

पुलिस नक्सलियों के बारे में सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखने के साथ ही इनाम भी दिया जा रहा है. फ्लेक्स के माध्यम से पुलिस की ओर से गांव के लोगों को यह भी बताया जाएगा कि बड़े नक्सलियों और संगठनों द्वारा किस तरह से आम ग्रामीणों का शोषण किया जा रहा है. शीर्ष नक्सलियों के परिवार ऐशो आराम से गुजर बसर कर रहे है. उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं. जबकि नक्सली ग्रामीण छेत्रो के स्कूलों को तोड़ कर ग्रामीण बच्चो को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं |

The information about the police naxalites is being kept as well as the reward is given. Through Flex, the people of the village will be told by the police how the villagers and organizations are exploiting the common villagers. The families of the top Maoists have been living comfortably. Their children are studying in good schools. While the Naxalites are blocking schools of rural areas, rural children are deprived of education.

समर्पण या मौत दंतेवाड़ा के एडिशनल एस पी गोरखनाथ बघेल के मुताबिक फ्लेक्स से ग्रामीणों के अंदर मानसिक बदलाव आएगा. जनता नक्सलियों के शोषण से त्रस्त हो चुकी है. फ्लेक्स में सरहदीय इलाकों के शीर्ष नक्सली, जिनका जिले में आना जाना लगे रहता है. उनकी फोटो के साथ इनाम की राशि की जानकारी भी है | एएसपी बघेल ने बताया कि फ्लेक्स में पुलिस के उच्च अधिकारियों के मोबाइल फोन नंबर भी दिए गए हैं. फ्लेक्स में दोनो बातों का जिक्र किया गया है कि सरकार की समर्पण नीति के तहत समर्पण कर मुख्यधारा में जुड़े अन्यथा मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों की तरह तुम भी मारे जाओगे |

Dedication or death According to Dantewada Additional SP Gorakhnath Baghel, there will be a psychological change in the villagers. The people have been troubled by the exploitation of the Maoists. Top Naxalites of the border areas in Flex, who are going to come to the district. There is also information about the amount of reward with his photo. ASP Baghel said that the mobile phone number of the police officers in Flex has also been given. In Flex, both things have been mentioned that surrendered under the surrender policy of the government, in the mainstream, otherwise you will be killed like Maoists killed in the encounter.

नक्सलियों का अंत करीब एएसपी बघेल ने यह भी कहा कि ग्रामीण इलाकों में फ्लेक्स ज्यादा दिनों तक नहीं रहेंगे. नक्सली उन्हें फाड़ देंगे. फिर भी फाड़ने से पहले नक्सली दिए गए नम्बरो को रख लेते हैं और जरूरत के समय फोन भी करते हैं. पहले भी मोबाइल फोन के जरिये कई माओवादियों ने समर्पण करने की इच्छा जताई और समर्पण किया | कांग्रेस की सरकार देश में 60 सालों तक रही और नक्सलियों के खिलाफ एक्शन लेने की जगह उन्हें पालती रही. साफ़ है कि मोदी सरकार नक्सलियों के सफाये के लिए हर मुमकिन कदम उठा रही है | सरकारी सूत्रों के मुताबिक़ सरकार का मिशन है कि अगले लोकसभा चुनावों तक नक्सलियों का पूरी तरह से सफाया हो जाए |

Nearing the end of the Maoists, ASP Baghel also said that flex in rural areas will not stay for long. Naxalites will tear them. However, before tearing, the Naxalites keep the numbers given and phone them in need. Earlier, through the mobile phone, many Maoists expressed their desire to surrender and surrendered. The Congress government remained in the country for 60 years and kept abreasting instead of taking action against the Naxalites. It is clear that the Modi government is taking every possible step to wipe out the Naxalites. According to government sources, the government’s mission is that the Naxalites are completely wiped out by the next Lok Sabha elections.

यह भी देखे :

https://www.youtube.com/watch?v=6KzO3XxanXM