चीन के बॉर्डर तक अब जल्द पहुंच सकेगी इंडियन आर्मी, 150 करोड़ रुपये खर्च कर रही मोदी सरकार

नई दिल्ली। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 15 हजार फीट की ऊंचाई पर शिंकुला दर्रे से एक वैकल्पिक सड़क बनाई है, जिसके जरिये अब भारतीय सेना आसानी से पाकिस्तान और चीन की सीमा पर पहुंच सकेगी। दरअसल, बीआरओ शिंकुला दर्रे से सड़क बनाकर करगिल को मनाली से जोड़ दिया है। यानी कि अब मनाली से कारगिल की दूरी 250 किलोमीटर कम हो गई है। इसके पहले तक मनाली से लेह होकर कारगिल जाने के लिए 750 किमी का लंबा सफर करना पड़ता था। लेकिन इस सड़क के जरिये दूरी कम हो गई है।

India pak Border दुनिया की सबसे ऊंची सड़कों में से एक दारचा-शिंकुला-पदुम-करगिल मार्ग के दोनों छोरों को जोड़ दिया गया है। अब सेना बारालाचा, तंगलंगला और लाचुंगला दर्रों को पार किए बगैर शिंकुला दर्रा होकर जंस्कर से कारगिल पहुंच जाएगी।

इस बारे में बीआरओ 38 टीआरएफ के कमांडर कर्नल एसके अवस्थी ने बताया कि दारचा-शिंकुला- पदुम सड़क की फार्मेशन कटिंग पूरी हो गई है। बीआरओ ने जंस्कर के करग्या गांव के समीप ब्रिज बनाकर मनाली को करगिल से जोड़ दिया है।

India pak Border

टारिंग के बाद इस मार्ग पर यातायात शुरू हो जाएगा। हिमाचल के हिस्से में सड़क का निर्माण दीपक प्रोजेक्ट और जम्मू कश्मीर में हिमांक प्रोजेक्ट कर रहा है।

India pak Border

कर्नल अवस्थी ने बताया कि शिंकुला दर्रा होकर मनाली से कारगिल की दूरी 500 किमी रहेगी। इस सड़क के बनने से करगिल जिला का पदुम उपमंडल टूरिस्ट के लिए खुल जाएगा। वहीं, रोहतांग टनल बनने के बाद कुछ घंटों में मनाली से करगिल का सफर पूरा होगा।

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अमेरिका के बाद अब चीन भी झुका भारत की जबरदस्त ताकत के आगे किये ऐसे कारनामे पाकिस्तान फ़ौज समेत देशभर की जनता हैरान

नई दिल्‍ली : पीएम मोदी की कूटनीति की ताकत का एक नमूना अभी हाल ही में तब देखने को मिला, जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की धमकियों के बावजूद पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ एस-400 डिफेन्स मिसाइल सिस्टम डील कर ली और अमेरिका भारत पर प्रतिबन्ध लगाने की हिम्मत ना कर सका.

इसके बाद पीएम मोदी ने ईरान से तेल खरीदना भी जारी रखा और अमेरिका देखता रह गया. अब पीएम मोदी की कूटनीति की ताकत का एक और नमूना चीन में देखने को मिला है. पाकिस्तान को खैरात देने वाले और पीओके में निवेश करने वाले चीन ने पीओके को भारत का हिस्सा आखिरकार मान ही लिया है.

गौरतलब है कि कश्‍मीर मुद्दे पर चीन का रुख हमेशा से भारत विरोधी ही रहा है। वह पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) में डैम से लेकर रोड तक कई प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है। यहां तक कि पीओके में चीनी सेना की मौजूदगी की खबरें भी आती रही हैं, लेकिन बीते शुक्रवार को चीन के सरकारी टीवी पर पीओके को भारत के हिस्‍से के तौर पर दिखाया गया।

लगातार भारत विरोधी रवैय्या अपनाने वाले चीन को भी पता चल चुका है कि पीएम मोदी नेहरू की तरह कमजोर प्रधानमंत्री नहीं हैं. साथ ही ये आभास भी हो चुका है कि अगले लोकसभा चुनाव में भी पीएम मोदी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. पाकिस्तान पूरी तरह से भिखारी हो चुका है, ऐसे में कमजोर का साथ कौन देता है इस दुनिया में. यही कारण है कि चीन अब भारत के साथ अपने सम्बन्ध सुधारने पर जोर दे रहा है.

जानकारों के मुताबिक़ चीन में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का शासन है, जो बड़े सख्‍त तरीके से मीडिया पर कंट्रोल रखती है। ऐसे में चीन का सरकारी टीवी पीओके को भारत के नक्‍शे में दिखा रहा है, जोकि इशारा करता है कि चीन ने कोई बड़ा रणनीतिक बदलाव कर दिया है। अगर ऐसा है तो पाकिस्‍तान के लिए यह बहुत बुरी है।

पाकिस्‍तान में चीनी दूतावास पर हमले की रिपोर्टिंग के दौरान दिखाया नक्‍शा
चीन के जिस सरकारी टीवी ने पीओके को भारत के नक्‍शे में दिखाया है, उसका नाम है- सीजीटीएन। बीते शुक्रवार को इस टीवी चैनल पर पाकिस्‍तान में चीन के वाणिज्‍य दूतावास पर हुए आतंकी हमले की रिपोर्टिंग दिखाई जा रही थी। इसी खबर के दौरान चैनल ने एक नक्‍शा दिखाया, पीओके को भारत के हिस्‍से के तौर पर पेश किया गया।

इसी हफ्ते होनी पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात

चीन के सरकारी टीवी पर पीओके को भारत के हिस्‍से के तौर पर दिखाए जाने के मुद्दे पर पाकिस्‍तान आपत्ति जरूर दर्ज कराएगा। ऐसे में संभव है कि पीओके को भारत के नक्‍शे में दिखाने पर चीन की ओर से कोई बयान आए, तभी स्थिति स्‍पष्‍ट हो सकेगी।

इस हफ्ते जी-20 समिट के दौरान चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात हो सकती है। अगर चीन ने पीओके को भारत के नक्‍शे में रणनीतिक बदलाव के बाद दिखाया है तो तब तो भारत-चीन रिश्‍तों में एकदम नई शुरुआत हो सकती है। ऐसे में पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच यह मुद्दा उठना तय होगा। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर चीन की ओर से क्‍या संदेश आता है?

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नार्थ कोरिया के तानाशाह ने अपने इस कदम से पूरी दुनिया को डाल दिया है सकते में! किम ने..

दुनिया में कई देश और सभी देशों की अलग-अलग संस्कृति, हाव-भाव, रीति-रिवाज है. कुछ देश आज सभी पैमानों पर दुनिया में सबसे आगे तो कुछ ऐसे देश भी है जहाँ के लोग बड़े ही कष्ट से अपना जीवन व्यतीत कर रहे है. लेकिन एक ऐसा देश है जिसकी बात पूरी दुनिया से अलग है और वो देश है उत्तर कोरिया.


उत्तर कोरिया में ना तो कोई संविधान है और ना ही कोई लोकतंत्र. उत्तर कोरिया को चलाने वाला है एक ही आदमी जिसका नाम है किम जोंग उन. किम आज के दौर में भी एक तानाशाह है और उसके पेचीदा फरमानों की कहानियाँ सुनने को मिलती रहती है. हाल ही में किम का अमेरिका के साथ मतभेद चल रहा था और किम ने परमाणु हमले की भी धमकी दे डाली थी. उत्तर कोरिया दुनिया के सभी देशों से दूरी बनाये रखता है मगर इस बार तानाशाह ने ऐसा कदम उठाया है जिसने सबको चौंका दिया है.

 

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग ऐतिहासिक वार्ता के लिए शुक्रवार को दक्षिण कोरिया पहुंच गए, जहां दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन ने उनसे मुलाकात की। किम जोंग उन 1953 में कोरियाई युद्ध के समाप्त होने के बाद से दक्षिण कोरिया की जमीन पर कदम रखने वाले उत्तर कोरिया के पहले नेता हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किम जोंग और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के बीच औपचारिक वार्ता सीमावर्ती गांव पनमुनजोम में शुरू हो गई है। इससे पहले कोरियाई देशों के सीमावर्ती गांव पनमुनजोम में मून और किम जोंग ने गर्मजोशी से एक-दूसरे से हाथ मिलाए। दोनों नेताओं को एक सार्थक बातचीत और एक संभावित शांति संधि होने की उम्मीद है।

बीबीसी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर वार्ता होने की उम्मीद है लेकिन कई विश्लेषक किम जोंग उन के परमाणु कार्यक्रमों को छोड़ने के उनके संकेतों पर अभी भी संदेह जता रहे हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, किम जोंग उन का दक्षिण कोरिया पहुंचने पर स्वागत किया गया। दोनों नेताओं के बीच कोरियाई देशों को विभाजित करने वाले सीमा पर बने पनमुनजोम गांव में पीस हाउस की दूसरी मंजिल पर बने कॉंफ्रेंस रूम में हो रही है।

इससे पहले सैन्य सीमा रेखा (एमडीएल) पर किम और मून मुस्कुराए और हाथ मिलाया। 1950-1953 का कोरियाई युद्ध समाप्त होने के बाद एमडीएल बनाई गई थी। किम जोंग ने सम्मेलन स्थल पर कहा कि उन्हें बेहतरीन चर्चा होने की उम्मीद है। यह ऐतिहासिक बैठक उत्तर कोरिया के उन संकेतों पर भी केंद्रित होगी, जिसमें किम जोंग ने अपने परमाणु हथियारों को छोड़ने की इच्छा जताई थी। किम जोंग और मून जे इन ने सीमा पर एक दूसरे से हाथ मिलाया।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने पहले एक कदम उत्तर कोरियाई सीमा की ओर बढ़ाते हुए किम जोंग से कहा, “मुझे आपसे मिलकर खुशी हुई है।” इसके बाद दोनों नेता दक्षिण कोरिया की तरफ पीस हाउस की ओर चले गए।

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ब्रेकिंग:अमेरिका के रक्षा मंत्री ने दिया ऐसा बयान जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी

मोदी सरकार के आते ही भारत की छवि दुनिया बहुत उभर कर आई है| पूरी दुनिया ने भारत का लोहा माना है और आज भारत दुनिया के सबसे प्रगतिशील देशों में से एक है| भारत ने अपनी छवि को आगे बढाया तो वहीँ पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दिया| भारत की एहमियत आज दुनिया में क्या है आप खुद देख लीजिये…

As the Modi Government comes, the image of India has emerged very much. The whole world is considered as India’s iron and today India is one of the most progressive countries in the world. If India forwarded its image, then she had to make Pakistan naked before the whole world. What is in the world today in the sense that you see yourself …

अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने अमेरिकी संसद से तत्काल प्रभाव से भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा छूट देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रूस से एस-400 वायु संरक्षण मिसाइल प्रणाली खरीद को रोकने के लिए बनाए गए नए कानून के तहत भारत पर प्रतिबंध लगाने से अमेरिका का ही नुकसान होगा।

US Defense Minister Jim Matisse has urged the US Parliament to give National Security Exemption with immediate effect. He said that the ban on India by the new law created by Russia to prevent the purchase of the S-400 air protection missile system will only harm America.

कांग्रेस की सीनेट सशस्त्र सेवा समिति में सुनवाई के दौरान मैटिस ने अमेरिकी सांसदों से कहा कि भारत और अन्य देशों को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय सुरक्षा छूट दी जानी चाहिए, जो ‘काउंटरिंग अमेरिका एडवर्जरिज थ्रू सेक्शन एक्ट‘ (सीएएटीएसए) के तहत प्रतिबंधों से दूर रहने के लिए रूस के हथियार लेने से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

During the hearing at Congress Senate Armed Services Committee, Matisse told American lawmakers that national security exemption should be given to India and other countries with immediate effect, to stay away from restrictions under the ‘Countering America Advisers Through Section Act’ (CAATSA). Are trying to avoid taking Russia’s weapons.

‘सीएएटीएसए’ पर 2017 अगस्त में हस्ताक्षर किए गए थे जो इस साल जनवरी से प्रभाव में आया। यह प्रावधान ट्रंप प्रशासन को उन देशों या कंपनियों को दंडित करने का अधिकार देता है जो रूस के रक्षा या खुफिया क्षेत्र से जुड़ा कोई लेन देन करता है।

The ‘CAATSA’ was signed in August 2017, which came into effect from January this year. This provision gives the Trump Administration the right to punish those countries or companies who make any transactions related to Russia’s defense or intelligence.

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बोले, ‘एशिया में भारत सबसे महत्वपूर्ण देश’

मैटिस ने अमेरिकी सांसदों से कहा, ‘हम जब इस पूरे क्षेत्र की ओर देखते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण जो है, वह मुझे भारत दिखता है। पृथ्वी पर सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश और शायद एक ऐसा देश जहां हमें कई साझा हित खोजने का अवसर मिल रहा है, ऐसा अवसर सदियों में एक बार ही मिलता है

The ‘CAATSA’ was signed in August 2017, which came into effect from January this year. This provision gives the Trump Administration the right to punish those countries or companies who make any transactions related to Russia’s defense or intelligence.

इस बीच, जिम मैटिस ने भारत-अमेरिका के मौजूदा संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत शायद एक ऐसा देश है जहां अमेरिका को कई साझा हित खोजने का सदियों में एक बार मिलने वाला अवसर हाथ लगा है।

In the meantime, Jim Matisse outlining the existing Indo-US relationship, said that India is probably a country where America has found an opportunity to meet once a year in finding many common interests.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सरकारी एजेंसियों को विदेशों में हथियारों की बिक्री में तेजी लाने और विस्तार करने का आदेश दिया था, जिसमें सहयोगी सेनाओं को मजबूत करने के लिए उन्नत ड्रोन का निर्यात शामिल है। यह कदम भारत जैसे देशों के लिए सहायक होने की उम्मीद है।

US President Donald Trump recently ordered government agencies to expedite and expand arms sales abroad, which includes the export of advanced drones to strengthen the Allies. This move is expected to be helpful for countries like India.

 

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चीन की धरती पर कदम रखते ही भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी,बीएसई ने आज रच दिया नया इतिहास, सारे रिकॉर्ड हुए धराशायी

नई दिल्ली : पीएम मोदी आज चीन के विदेशी दौरे पर हैं. चीन के वुहान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया. यहाँ तक की खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने प्रोटोकॉल तोड़कर पीएम मोदी कर गर्मजोशी से स्वागत किया.

New Delhi: PM Modi is on foreign tour of China today Prime Minister Narendra Modi received a grand reception in Wuhan city of China. Even China’s President Xi Jinping himself warmly welcomed the PM Modi by breaking the protocol.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोग वास्तव में बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि मैं पहला ऐसा भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसकी अगवानी के लिए आप (शी जिनपिंग) दो बार राजधानी से बाहर आए.

PM Modi said that the people of India are truly proud that I am the first Indian Prime Minister, for whom you (Shi Jinping) come out twice from the capital

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक आज भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी आयी. शेयर बाजार ने मई सीरीज की शुरुआत दमदार की तो वहीं अंत भी धमाकेदार रहा. एशियाई बाजार में उछाल के बीच बंबई शेयर बाजार में आज बहार का दिन है.

According to the latest news available today, there was a great news for India today. If the stock market started the May series, then the end was also bullish. Between the boom in the Asian market today is the day outside of the Bombay Stock Exchange.

जैसे ही सुबह बाजार खुला शेयर बाज़ार में भारी उछाल देखा गया. दोपहर 1.30 बजे 301 अंकों की उछाल के साथ सेंस्टिव इंडेक्स सेंसेक्स ने नया इतिहास रच दिया और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक 35,014.82 पर चल रहा था. निफ्टी में 84 अंकों का उछाल रहा और ये 10,702.35 अंक पर पहुंच गया.

As soon as the morning market saw a huge surge in open stock market. At 1.30 pm, the BSE Sensex created a new history with a 301-point surge and the BSE Sensex Index of Bombay Stock Exchange was running at 35,014.82. The Nifty was up by 84 points and it reached 10,702.35 points.

रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि पीएम मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है.नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं.

The stock market is losing evidence that this is the evidence that the way the country is moving forward under the leadership of PM Modi is going to win trust in companies of all the sectors. After taking steps for economic reforms such as Nodbindi and GST, Modi Government in the financial world The credibility of this has been strengthened, and companies, stock markets, the common people are reliant on all government policies.

ये तो कुछ भी नहीं आप जानकार दंग रह जाएंगे मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये साल 2017-18 में अभी तक 54,337 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं. यह एक अपना में ज़बरदस्त रिकॉर्ड है.

Nothing will be left to you knowing. Because of the continuous strengthening economy under Modi’s leadership, the government has received 54,337 crores for the first time in 2017-18 through disinvestment. It has a tremendous record in its own right.

विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक वृद्धि
मोदी की सरकार बनने के बाद देश में विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है. अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में इस साल कई रिकॉर्ड बने हैं. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीन में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 423.12 अरब डॉलर के भारीभरकम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा भंडार ने 400 अरब डॉलर का स्‍तर पहली बार इस साल सितंबर के पहले हफ्ते में पार किया था. जबकि कांग्रेस शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब पर अटका रहा करता था.

Historical rise in foreign exchange reserves
After the formation of Modi’s government, there has been a historic increase in foreign exchange reserves in the country. There are several records this year in the field of economy. According to the latest data released by the Reserve Bank of India, in April, the country’s foreign exchange reserves reached a record high of 423.12 billion dollars. Foreign exchange reserves crossed the $ 400 billion mark for the first time in the first week of September this year. During the Congress regime, during 2014, the foreign exchange reserves remained staggering at 311 billion rupees.

सफल नीलामी प्रक्रिया
मोदी सरकार में पहली बार कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई. इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई.

सरकार के आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस सरकार में अप्रैल-जुलाई 2013-14 में अनुमानित व्‍यापार घाटा 62448.16 मिलियन अमरीकी डॉलर का था, वहीं अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान 38073.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. जबकि अप्रैल-जनवरी 2015-16 में यह 54187.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से भी 29.7 प्रतिशत कम है. यानी व्यापार संतुलन की दृष्टि से भी मोदी सरकार में स्थिति उतरोत्तर बेहतर होती जा रही है और 2013-14 की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक सुधार आया है.

Successful auction process
The successful auction process of the coal block and telecom spectrum was adopted for the first time in the Modi government. Through this process, under the coal mines (Special Provisions) Act, 2015, the transparency allocation of 82 coal blocks generated more than Rs 3.94 lakh crore rupees.

भारत हर क्षेत्र में अपना झंडा गाड़ता जा रहा है
आज तेज़ी से भारत हर क्षेत्र में अपना झंडा गाड़ता जा रहा है. कभी हथियार खरीदने के लिए दूसरे देशों के आगे हाथ फैलाना पड़ता था. हज़ारों करोड़ देकर पुरानी तकनीक के बेकार हथियार खरीदे जाते थे लेकिन आज भारत में ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत दुनिया सबसे शक्तिशाली कंपनी भारत में आकर हथियार बना रही है वो भी सबसे आधुनिक तकनीक वाले. आज ये हथियार भारत दूससरे देशों को बेचकर शक्तिशाली देशों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े हो रहा है.

India is flipping its flag in every sphere
Today India is rapidly flipping its flag in every sphere. Ever had to spread arms ahead of other countries to buy arms. Untamed weapons of old technology were purchased by giving thousands of crores but today, in India, under the ‘Make in India’ scheme, the world’s most powerful company is making weapons in India, it is also the most advanced technology. Today, these arms are selling to other countries and standing with shoulders from powerful countries.

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मोदी के चीन दौरे से ठीक पहले चीन से एक बेहद चौकाने वाली रिपोर्ट ,जिसे देख शिजिंपिंग समेत दुनिया में मची खलबली

नई दिल्ली : 8 महीने पहले तक भारत को जंग की धमकी दे रहे चीन की अक्ल अब ठिकाने लग चुकी है. दोनों देशों की सेनाएं करीब 72 दिन तक डोकलाम में आमने-सामने थीं, मगर चीन भी अब 56 इंच का लोहा मान गया है और पीएम मोदी के लिए लाल कालीन बिछा रहा है. दरअसल भारत को लेकर हाल ही में आयी रिपोर्ट्स इतनी चौंकाने वाली हैं, जिसने चीन को हिला कर रख दिया है, साथ ही पीएम मोदी की ताकत का अहसास भी दिला दिया है.

New Delhi: Until 8 months ago, the Chinese intelligence, which threatens India’s war, has now become a hideout. The two countries’ armies were face-to-face in Dokalm for about 72 days, but China is now considered to be 56 inches iron and PM is laying red carpet for Modi. Indeed, recent reports about India are so shocking that those who have shaken China, have also given the feeling of strength of PM Modi.

दवाओं के निर्यात में चीन को पछाड़ा
हाल ही में आयी रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत अब जिनेरिक दवाइयों का सबसे बड़ा निर्माता बन चुका है और अमेरिका व् यूरोप में दवाओं के निर्यात में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक़ आज दुनिया का हर पांचवा कैप्सूल, गोली और इंजेक्शन भारत में बनता है.

China overtures medicines export
According to a recent report, India has now become the largest producer of generic medicines and India has left China in the export of medicines in the US and Europe. According to the report, every fifth capsule, pill and injection in the world is made in India today.

सैन्य आदान-प्रदान को लेकर झुका चीन
भारत की सैन्य ताकत का लोहा भी चीन मान चुका है. चीन की गीदड़ भभकियों के सामने पीएम मोदी जिस तरह डटे रहे और सेना पीछे नहीं हटाई, उसे देखते हुए चीन समझ चुका है कि आज भारत की सत्ता एक मजबूत व् निडर प्रधानमंत्री के हाथ में है. डोकलाम विवाद के चलते चीन ने भारत के साथ सैन्य आदान-प्रदान पर रोक लगा दी थी, मगर अब आलम ये है कि चीन ने खुद सैन्य आदान-प्रदान शुरू करने के लिए भारत से संपर्क किया है.

China bend over military exchanges
China has even assumed the iron of India’s military power. In view of the way PM Modi stood behind China’s peacock feuds and the army did not back out, China understood that today the power of India is in the hands of a strong and fearless Prime Minister. Due to controversy, China had banned military exchanges with India, but now it is now that China itself has approached India to start military exchanges itself.

अगले 100 साल के रिश्तों की बात करेगा चीन
चीन ने अपनी सैन्य गतिविधियों का कैलेंडर भारत भेजा है. पीएम मोदी इसी हफ्ते चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं और चीन में अभी से पीएम मोदी के स्वागत की जबरदस्त तैयारियां शुरू हो गयी हैं. जानकारी के मुताबिक़ चीन भारत की जनता का मूड समझ चुका है और जान गया है कि मोदी 2019 में भी चुनाव जीत कर फिर से पीएम बनने जा रहे हैं. ऐसे में इस बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पीएम मोदी के साथ मिलकर दस-बीस साल नहीं बल्कि अगले सौ साल के रिश्ते का खाका खींचने जा रहे हैं.

China will talk of 100 years of relationship
China has sent a calendar of its military activities to India. PM Modi is scheduled to visit China this week, and the tremendous preparations of PM Modi’s reception have begun in China. According to information, China has understood the mood of the people of India and it is known that Modi is going to become PM again in 2019. In this way, China’s President Xi Jinping is going to draw a blueprint for the next hundred years, not with the help of the PM Modi, but for 10 years.

पीएम मोदी के स्वागत में प्रोटोकॉल तोड़ेंगे जिनपिंग
सभी तरह के प्रोटोकाल को तोड़ते हुए वुहान में एक अभूतपूर्व अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की तैयारी की जा रही है, जैसा कि अब बेहतर ताकतवर बन चुके राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पहले किसी विदेशी नेता के लिए नहीं किया था. वह पहली बार इस तरह के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं, इसलिए सबको इससे काफी उम्मीदें हैं.

PM will break protocol in PM Modi
Breaking all kinds of protocols, Wuhan is preparing for an unprecedented unofficial summit, as it has now become a more powerful President, Xi Jinping, who had not previously done it for any foreign leader. They are hosting such a summit for the first time, so everyone has a lot of expectations from this.

भारतीय मामलों से जुड़े चीन के उप विदेश मंत्री कोंग शुआनयू ने यह संकेत दिया कि अब चीन आखिर क्यों मोदी के इतना करीब आ रहा है. भारत में 2019 में आम चुनाव हैं, लेकिन चीन को लगता है कि 2019 के बाद भी नरेंद्र मोदी भारत के पीएम रहेंगे. शुआनयू कहते हैं, ‘शी और मोदी दोनों के पास सामरिक दृष्ट‍ि और ऐतिहासिक जिम्मेदारी है. दोनों को अपनी जनता का व्यापक समर्थन हासिल है और वे इस रिश्ते को काफी महत्व दे रहे हैं.’

China’s Deputy Foreign Minister Kong Shuanyu, who was associated with Indian affairs, indicated that now China is coming so close to Modi. There are general elections in India in 2019, but China feels that even after 2019 Narendra Modi will be India’s PM. Shuanyu says, “Both Shi and Modi have strategic vision and historical responsibility. Both have extensive support from their people and they are giving great importance to this relationship.

अगले 100 साल की होगी बात!
कोंग ने बताया कि वुहान शिखर सम्मेलन में अनौपचारिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, इसमें बिना किसी तय एजेंडा के कई व्यापक मसलों पर बात होगी और अगले 100 साल के लिए एक खाका तैयार हो सकता है. दोनों नेता अब डोकलाम से आगे बढ़ जाने की बात करेंगे.

The next 100 years will be the matter!
Kong told that the Wuhan Summit is trying to create an informal atmosphere, that there will be discussions on many broad issues without any fixed agenda and a template may be ready for the next 100 years. Both leaders will now talk about moving forward from Dokalm.

अमेरिका से ट्रेड वार का डर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैक्टर ने भी चीन को अपना व्यवहार बदलने को मजबूर किया है. चीन-अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के खतरे को देखते हुए चीन अब अलग-थलग नहीं रहना चाहता और यह भी नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह से अमेरिकी खेमे में चला जाए.

Fear of trade war from America
Factor of US President Trump has also forced China to change its behavior. Given the threat of trade war between China and America, China no longer wants to be isolated and does not want India to go completely into the American camp.

स्पष्ट है कि पीएम मोदी की कूटनीति अपना काम कर रही है. भारत के आज ना केवल रूस बल्कि अमेरिका के साथ भी मजबूत सम्बन्ध स्थापित हो चुके हैं. पीएम मोदी ने इजराइल और उसके कट्टर दुश्मन सऊदी अरब, ईरान, फिलिस्तीन जैसे कई खाड़ी देशों के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाये हैं.

It is clear that PM Modi’s diplomacy is doing his job. India’s strong relations have been established not only with Russia but also the US today. PM Modi has also built strong relations with many Gulf countries like Israel and its staunch enemy Saudi Arabia, Iran and Palestine.

चीन के खिलाफ पीएम मोदी ने जापान व् अन्य देशों के साथ गठजोड़ किया है, यही कारण है कि चीन के तेवर ढीले पड़ चुके हैं और भारत को बर्बाद करने के सपने देखने वाला चीन आज 56 इंच की ताकत के सामने नतमस्तक दिखाई दे रहा है.

PM Modi has made an alliance with Japan and other countries against China, this is the reason that China’s tension has been loose and China, who dreams of ruining India, is now seen in front of the 56-inch power.

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 6 चुनाव में से भारत ने जीते पूरे…

केंद्र में जबसे बीजेपी की सरकार आई है तभी से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कई बड़े फैसले लिए हैं. वह लगातार को दुनिया में शीर्ष पर पहुँचाने के प्रयास में लगे हुए हैं. आज भारत को दुनियाभर में एक अलग पहचान मिल चुकी है.

Since then, when the BJP government came in the center, Prime Minister Narendra Modi has taken many big decisions from the country. He is constantly engaged in trying to reach the top in the world. Today India has got a distinct identity across the world.

भारत एक के बाद एक लगातर रिकार्ड्स दर्ज करता जा रहा है. पीएम मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने देश के अधिकतर राज्यों में सरकार बनाकर भारतीय राजनीति में इतिहास रच दिया है. अब हाल ही में एक ऐसी खबर आ रही है जिसे जानने के बाद आपको भी अपने देश पर गर्व होगा.

India is registering a continuous record after the other. Under the leadership of PM Modi, Bharatiya Janata Party has created history in Indian politics by forming a government in most of the states. Now a recent news is coming to know that you will also be proud of your country.

जानकारी के लिए बता दें संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईकोसोक) में हुए चुनावों में भारत ने जो किया है उसे जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे. यहाँ हुए चुनावों के नतीजों ने सभी के होश उड़ा डाले हैं. आप भी भारत के जब आंकड़े देखेंगे तो गर्व महसूस करेंगे.

For information, you will be amazed knowing what India has done in the elections held in the United Nations Economic and Social Council (eksos). The consequences of the elections here have shaken everyone’s senses. You will also feel proud when you see the figures of India.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए चुनावों में भारत ने शानदार जीत दर्ज की है. भारत ने इन चुनावों में छह चुनाव जीते हैं जिनमे से पांच देश ने सर्वसम्मति से जीत हासिल की है. सोमवार को हुए चुनावों में भारत ने 4 संयुक्त निकायों के कार्यकारी बोर्ड में स्थान हासिल किया है.

In the elections held internationally, India has won a great victory. India has won six elections in these elections, out of which five have won unanimously. In the elections held on Monday, India has secured a place in the Executive Board of 4 Joint Bodies.

गौरतलब है कि भारत को गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) समिति के लिए एशिया-प्रशांत का जबरदस्त सामना करना पड़ा था. जिसमें भारत को सर्वाधिक 46 मत प्राप्त हुए. वहीँ पाकिस्तान को इस चुनाव में 43 चीन को महज 39 मत मिले.

Significantly, India had to face a great deal of Asia-Pacific for the NGO Committee. In which India received 46 votes. In the elections, Pakistan got only 43 votes to get 43 votes.

जिसके बाद भारत ने यह चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम कर दिया है. यह आंकड़े आने के बाद विरोधी देशों के होश उड़ गये. परिणाम आने के बाद पूरे ईकोसोक में सभी यानि छह चुनाव जीतने पर बधाई दी है. बता दें ईकोसोक में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 देश शामिल हुए थे.

After that India has set a record by winning this election. After these figures came, the countries of the anti-liberation countries lost their senses. After the results came out, congratulations on winning all the eight ekosocks that means six elections. Tell that ekosock all 193 countries of the United Nations were involved.

एनजीओ समिति को काफी प्रभाव शाली माना जाता है क्योंकि वह ईकोसोक में परामर्श दर्जे के लिए आवेदन करने वाले सभी एनजीओ की गहराई से जांच करता है. जिसके बाद समिति उनको लेकर फैसला लेती है. अब भारत जनवरी 2019 से शुरू होने वाली समिति में चार साल के कार्यकाल के दौरान सभी को अपनी सेवाएं प्रदान करेगा.

The NGO Committee is considered to be very influential because it examines all NGOs who apply for counseling status in EcoSoc. After which the committee takes a decision about them. Now India will provide services to everyone during the four-year tenure in the commencement of the committee, beginning January 2019.

इसी के साथ भारत जल्द ही जनसँख्या व विकास आयोग में अपने कार्यकाल की शुरुआत करेगा जोकि 2021 में समाप्त होगी और सामाजिक विकास आयोग में अपने 4 साल के कार्यकाल की शुरुआत करेगा.

With this, India will soon start its tenure in the population and development commission which will end in 2021 and start its four-year tenure in Social Development Commission.

यह भी देखे
https://youtu.be/o9LQnPMci4I

https://youtu.be/WE3MmmBzG4k

source political report

2019 चुनाव से पहले एशिया के सबसे बड़े बैंक ने दी ज़बरदस्त चौंकाने वाली रिपोर्ट,जिसे देख चीन समेत कांग्रेस के परखच्चे,उड़े

नई दिल्ली : भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पिछले कई सालों से कांग्रेस और उनके महान अर्थशास्त्री भ्रम फैला रहे हैं, कोई अर्थव्यवस्था को डूबता हुआ बताता है तो खुद मनमोहन इसे आर्थिक आपातकाल बताते हैं लेकिन बैंकों के NPA घोटाले पर वो तुरंत चुप्पी साध लेते हैं.

New Delhi: For the last several years, the Congress and their great economists are spreading illusions about the Indian economy, if someone tells the economy to be submerged, then Manmohan himself calls it a financial emergency, but he immediately gets silent on the NPA scam of the banks.

साल 2019 में और ज़्यादा घटकर मात्र 6.4 प्रतिशत रह जाएगी.

लेकिन झूठ और भ्रम के बादल सच के सूरज को ज़्यादा देर तक नहीं छिपा सकते. भारत आज चीन को पछाड़ते हुए दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है. पिछले एक साल से लगातार वर्ल्ड बैंक, IMF , WEF , मॉर्गन स्टैनले , UN सब जगह से खुशखबरी आ रही हैं. तो वहीँ इस बीच 2019 चुनाव से पहले अब ASIA के सबसे बड़े बैंक से बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट आ रही है जो कांग्रेस की धड़कनों को रोक देगी.

In 2019, it will be reduced to only 6.4 percent.

But clouds of delusion and confusion can not hide the truth of the sun for a long time. India today has become the world’s fastest growing economy while retreating China. For the past year, World Bank, IMF, WEF, Morgan Stanley, UN are getting good news from everywhere. In the meantime, before the 2019 elections, there is a very surprising report coming from the largest bank of ASIA, which will stop the beleaguered Congress.

इस साल एक बार फिर भारत के नाम रहा ये मुकाम

एशिया डेवलोपमेन्ट बैंक (ADB) ने अपनी रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि दर मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 प्रतिशत जबकि अगले वित्त वर्ष 2019-20 में 7.6 प्रतिशत रहने का एलान किया है. इसके साथ ही एक बार फिर मोदी राज में भारत पूरे एशिया का सबसे तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दर्जे पर कायम रहेगा.

This year once again, India’s name remained unchanged.

In its report, Asia Development Bank (ADB) has declared India’s economic growth rate 7.3 percent in current financial year 2018-19 and 7.6 percent in the next financial year 2019-20. With this, once again in Modi Raj, India will remain in the fastest growing economy of Asia.

चीन को लेकर भी आयी रिपोर्ट , नहीं रहा किसी को मुँह दिखाने के लायक

अब आइये इसी बड़े बैंक की चीन को लेकर रिपोर्ट देख लेते हैं. चीन के बारे में ADB की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाँ भारत लगातार हर साल प्रगति करता जा रहा है वहीँ चीन हर साल लगातार लुढ़कता जा रहा है. ADB बैंक अनुसार चीन की आर्थिक वृद्धि 2017 में 6.9 प्रतिशत थी. इसके बाद इस साल ये घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ जाएगी. यही नहीं अगले

Report about China, not being able to show anybody

Now let’s look at reports of this big bank about China. About the China ADB report states that while India is progressing steadily every year, China is constantly rolling down every year. According to the ADB bank, China’s economic growth was 6.9 percent in 2017. After this, it will come down to 6.6 percent this year. Not next

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ बढ़ रही है. भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार पकड़ती तेजी पर एक और वैश्विक संस्था ने मुहर लगाई है.

According to the latest news available today, the Indian economy is growing steadily in the leadership of Modi. Another global institution has stamped on the fast growth of the Indian economy.

छायी हुई है आर्थिक मंदी

ये केवल चीन का ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का यही हाल है. पूरे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ज़बरदस्त आर्थिक मंदी छायी हुई है. अमेरिका, जापान, कोरिया सभी इस आर्थिक भूचाल में डूबे जा रहे हैं. बड़े व्यापारियों को रोज़ अरबों का घाटा हो रहा है लेकिन इसके उलट बेहत हैरतअंगेज़ तरीके से भारत हर साल तेज़ी से प्रगति करता जा रहा है.

Covered economy

This is not the case of China, but the whole world. There is a tremendous economic slowdown at the international level. America, Japan, Korea are all being immersed in this economic monsoon. Large traders are losing billions of rupees daily, but in contrast, India is progressing rapidly every year in a surprising way.

रफ्तार की पटरी पर दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था- फिच

इससे पहले वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. इसमें कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग बढ़ने से देश की आर्थिक रफ्तार को सबसे अधिक बल मिलेगा. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है.

Indian economy to run on fast track: Fitch

Earlier, global rating agency Fitch has projected India’s economic growth rate to be 7.3 percent in the next financial year 2018-19. It has been said that due to the increase in demand in the rural areas, the economic growth of the country will be the highest. With this, the economic growth rate in the financial year 2019-20 has been projected to increase to 7.5 percent.

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था- आईएमएफ

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर दोहराया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2018 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। आईएमएफ ने उम्मीद जताई है कि नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से विकास करेगा.

The world’s fastest growing economy – IMF

The International Monetary Fund (IMF) has repeatedly reiterated that the Indian economy will grow at a rate of 7.4 percent in 2018. The IMF has expressed hope that in spite of graft and GST, India will develop fastest in emerging economies.

ब्रिटेन-फ्रांस को पछाड़ दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्था में होगा भारत

सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (सीईबीआर) की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी कर रहा है। सीईबीआर के डिप्टी चेयरमैन डोगलस मैकविलियम ने कहा कि वर्तमान में अस्थायी असफलताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के बराबर टक्कर दे रही है.

UK-France to be world’s top 5 economy in India

According to the Center for Economic and Business Research (CEBR) report, India is preparing to become the fifth largest economy in 2018, overtaking Britain and France. CEBR Deputy Chairman Douglas McWilliam said that despite the current setbacks, India’s economy is fighting a parallel to the economy of France and Britain.

भारत कई ग्लोबल शॉक से बचा हुआ है – जापानी वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा

जापानी वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा ने भारत की ग्रोथ के बारे में पॉजिटिव रिपोर्ट दी थी। नोमुरा में इमर्जिंग मार्केट्स इकनॉमिक्स के हेड रॉबर्ट सुब्बारमण का कहना था कि भारत कई ग्लोबल शॉक से बचा हुआ है और अगले साल उसकी ग्रोथ 7.5 पर्सेंट रह सकती है।

India is left with many global shocks – Japanese financial services company Nomura

Japanese financial services company Nomura gave a positive report about India’s growth. Robert Subbaranan, Head of Emerging Markets Economics at Nomura, said that India has avoided many global shocks and its growth could be 7.5% next year.

भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है किडिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी.

India will be among the fastest growing economies in the world in the next 10 years. Global financial services company Morgan Stanley has claimed that due to digitization, globalization and reforms, India will be the world’s fastest growing economy in the coming decade.

भारत बना विदेशी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह- चीन

यहाँ तक की खुद चीन भी अब भारत की तारीफ करने के लिए मजबूर हो रहा है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है। अखबार ने एक लेख में कहा है कि कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है. मोदी सरकार ने बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है. लेख में कहा गया है कि आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी से फॉक्सकॉन जैसी बड़ी कंपनी भारत में निवेश करने के अपने वादे के साथ आगे बढ़ेंगी.

ndia’s preferred destination for foreign companies – China

Even China itself is now being forced to praise India. China’s official newspaper Global Times has said that India is becoming a big attraction for foreign companies. The newspaper has said in an article that the production at a lower cost is slowly withdrawing from China. The Modi government has implemented GST for the integration of the market. The article says that a major company like Foxconn with GST will go ahead with its promise of investing in India, the biggest economic recovery since independence.

यह भी देखे
https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

SOURCE POLITICAL REPORT

चीन के डोकलाम से पीछे हटने का था ये बड़ा कारण सच्चाई जान मोसाद सीआईए भी हैरान

लगभग ढाई महीने तक एक-दूसरे के सामने डोकलाम में खड़ी चीन की सेनाएं अब पीछे हट चुकी है दुनिया ने इसे केवल भारत की जीत माना है, क्योंकि भारत तो पहले से ही चीन से दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने का प्रस्ताव रख चुका था. चीन ही अड़ा हुआ था कि भारत बिना किसी शर्त के अपनी सेना को पीछे हटाए. बहरहाल अड़ियल चीन ने आखिर ऐसा फैसला क्यों लिया, इसका खुलासा हो गया है.

China’s army standing in front of each other in front of each other for two and a half months has now retreated; the world has considered it only a victory of India, because India had already proposed to withdraw from the two countries’ forces from China. . China was stunned that India should retract its forces without any condition. However, the imposing China has finally decided to do so, it has been revealed.

चीन में भारत से लड़ने की ताकत ही नहीं

खुलासा हुआ है कि भारतीय सेना की ताकत पीएम मोदी के आने के बाद से काफी बढ़ चुकी है और दुनियाभर के देश आज भारत के समर्थन में खड़े हैं. चीन के पास दरअसल भारत से टक्कर लेने का दम ही नहीं है. चीन केवल अपना हव्वा खड़ा करके भारत को डराने की कोशिश कर रहा था.

China has no power to fight India

It has been exposed that the strength of the Indian Army has increased significantly since the arrival of PM Modi and the countries of the world are standing in support of India today. China does not really have a chance to compete with India. China was only trying to frighten India by setting its own Eve

चीन दरअसल उत्तरी कोरिया की ही तरह एक कम्युनिस्ट देश है. प्रोपगंडा फैलाना, झूठा प्रचार करना कम्युनिस्ट देशों की ख़ास आदत होती है. भारत तो पहले से जानता था कि युद्ध होने पर उसकी जीत निश्चित है, इसीलिए पीएम मोदी चीन की गीदड़ भभकियों को नज़रअंदाज करते हुए अपने अन्य कामों में व्यस्त थे. ताकतवर बोला नहीं करते, वो सीधे कर देते हैं.

China is actually a communist country like North Korea. Propaganda spreading, false propaganda is a special habit of Communist countries. India had already known that his victory was certain when the war was over, so PM Modi was busy with other activities while ignoring the Chinese peacock feudalists. Do not speak powerful, they make it straight.

झूठा प्रोपगंडा फैला कर भारत को डराने की योजना हुई विफल

चीनी सरकारी टेलीविजन सीसीटीवी ने तिब्बत में तैनात माउंटेन ब्रिगेड द्वारा सैन्य अभ्यास का सीधा प्रसारण दिखाया. चीन ऐसा अभ्यास हर साल करता है, फिर भी भारत पर दबाव बनाने के लिए चीनी मीडिया ने झूठ बोल दिया कि डोकलाम मामले से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जंगी साजोसामान तिब्बत भेजा जा रहा है.

Failure to scare India by spreading false propaganda failed

Chinese Government Television CCTV has shown a live demonstration of military exercises by the Mountain Brigade stationed in Tibet. China conducts such practice every year, yet to pressurize India, the Chinese media has lied that a large number of warships are being sent to Tibet to deal with the issue.

पीछे हटने का मौक़ा तलाश रहा था चीन

आखिर तक जब चीन की डाल भारत के सामने नहीं गली, तो उसने पीछे हटने के लिए बहाना तलाशना शुरू कर दिया. ब्रिक्स समिट को सही मौक़ा जानकार तुरंत चीन ने भारत के साथ मांडवली कर ली और अपनी सेना पीछे हटा ली.

China was looking for a retreat

By the end, when China did not put India in front of India, then she started exploring excuses to retreat. The exact information about the BRICS summit was immediately established with China and India withdrew its troops.

हालांकि चीन के थूक कर चाटने को देखकर चीनी नागरिकों को शर्मिंदगी ना हो, इसलिए चीनी मीडिया ने फिर से नया झूठ फैलाना शुरू कर दिया कि सिर्फ भारत ने सेना पीछे हटाई है, चीन की सेना वहां गश्त करती रहेगी. जबकि सच तो ये हैं कि चीन के अंदर भारत का सामना करने का माद्दा ही नहीं है.

Although Chinese citizens do not feel embarrassed by the spitting of China’s spit, the Chinese media again started spreading new lies that only India has retracted the army, China’s army will continue patrolling there. While the fact is that there is no point in trying to face India inside China.

युद्ध करती तो चीनी सेना मार खाती सो अचीन पूरी तरह मटियामेट ही हो जाता. इसलिए मौक़ा देखकर थूका हुआ चाट लिया और चीनी नागरिकों को चीनी सेना की गश्त वाली मीठी गोली दे दी.लग, ऊपर से व्यापार बंद होने पर चीन में भुखमरी फ़ैल जाती.

If the war ensued, then the Chinese army would have been killed, and the entire extent would have been completely demarcated. So, after seeing the opportunity, he licked and spit and gave Chinese citizens a sweet shotgun with a Chinese army patrol. On the other hand, hunger was spread in China when trade was closed from above.

वहीँ अंतररार्ष्ट्रीय मंच पर चीन का नाम खराब होता और अमेरिका को भी दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के खिलाफ एक्शन लेने का मौक़ा मिल जाता.

At the same time, the name of China on the international stage would have been bad and the US also got the opportunity to take action against China regarding the South China Sea.

यह भी देखे
https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

 

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8
SOURCE NAME POLITICAL REPORT

जोरदार हमला: मोदी सरकार ने दिया सेना को ऐसा जानलेवा बख़्तर, चीन समेत पाक में मची तबाही !

नई दिल्ली दुश्मनों से निपटने के लिए मोदी सरकार भारतीय सेना को वैसे तो कई तरह के आधुनिक हथियार और बुलेट प्रूफ जैकेट दे ही रही है, मगर इस बार सरकार ने एक ऐसा जबरदस्त फैसला लिया है, जिससे दुश्मनों में तबाही मचाने के लिए भारतीय सेना को काफी सहायता मिलने जा रही है. भारतीय सेना को मिलने जा रहे इस हथियार का जवाब चीन और पाकिस्तान सेना के पास भी नहीं है.

In order to deal with the enemies of the New Delhi, Modi Government has been giving various types of modern weapons and bullet proof jackets to the Indian Army, but this time the government has taken such a tremendous decision, to help the Indian Army There is a lot of support going on. The answer to this weapon going to meet the Indian Army is not even with the Chinese and Pakistan army.

बुलेट प्रूफ बंकरों से करेंगे दुश्मनों का विनाश
दरअसल अब भारतीय सेना ऐसे बंकर बनाने जा रही है जो पोर्टेबल और बुलेट प्रूफ हों. पत्थर और मिट्टी के बंकरों की जगह पर ऐसे बंकरों का निर्माण किया जाएगा, जो स्टील के हों और मजबूत हों. पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से मोर्चा लेने वाले जवानों को ऐसे बंकर मिलने से वो दुश्मन के हमले से सुअक्षित रह सकेंगे और मजबूती से दुशमन पर धावा बोल सकेंगे.

Bullet proof bunkers will destroy the enemies
Indeed, the Indian Army is going to build a bunker, which is portable and bullet proof. Bunkers will be constructed at the place of stone and soil bunkers, which are steel and strong. By getting such bunkers from the challenges of Pakistan and China, such a bunker will be able to stay safe with the enemy attack and will be able to rush firmly on the enemy.

नए बंकरो के निर्माण का उद्देश्य सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना है. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा मात्रा में बुलेटप्रूफ सामान का प्रयोग किया जाएगा, जिनमें जैकेट और गाड़ियां भी शामिल हैं. यानी बंकर भी बुलेट प्रूफ होंगे, साथ ही जवान बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होंगे और उनकी गाड़ियां भी बख्तरबंद होंगी, जो दुश्मन की गोलियां आसानी से झेल जाएंगी और जवानों की जान बचा लेंगी.

The objective of building new bunkers is to strengthen security standards. For this, bulletproof bags will be used in maximum quantities, including jackets and trains. That means the bunker will also be bullet proof, as well as the youth will be wearing bullet proof jackets and their vehicles will also be armored, which will easily catch the enemy pills and save the lives of the soldiers.

बता दें कि कांग्रेस ने अपने 60 साल के राज में सेना के जवानों की सुरक्षा की ओर कभी कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया. जवान मिटटी व् पत्थरों के बंकरों से दुश्मन से लोहा लेते आये हैं और ऐसे बंकरों के कमजोर होने के कारण जवानों को असमय ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ता था.

Let us state that the Congress has never given special attention towards the security of the army personnel in its 60-year rule. Young men have come from the land of the bunks of clay and stones, and due to the weakness of such bunkers, the soldiers had to wash their lives in the meantime.

मिटटी के नहीं, फौलाद के होंगे बंकर
सेना के इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था और चाक-चौबंद करने के साथ सेना को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार करना है. विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम कर सेना को घरेलू हालात में और मजबूत बनाना ही भारतीय सेना की प्राथमिकता है.

Not of soil, steel can be bunker
The main objective behind this move of the army is to make the army in accordance with the local needs, with the security system and chalking. Reducing dependence on foreign equipment and strengthening the army in the domestic situation is the priority of the Indian Army.

बता दें कि इस वक्त सेना में 2 तरह के बंकर इस्तेमाल किए जाते हैं. पत्थर और मिट्टी वाले बंकर मजबूती के लिहाज से ठीक नहीं होते. दुश्मनों का हमला झेलने की इनकी क्षमता नहीं होती और जल्द ही ध्वस्त हो जाते हैं. दूसरे बंकर स्टील वाले होते हैं, जिनका निर्माण मुश्किल होता है. इन स्टील के बंकरों पर दुश्मन की गोलियों का असर नहीं होता और इनमे कुछ ऐसे छेद बने होते हैं, जिनसे जवान दुश्मनों पर गोलियां चलाते हैं

Explain that two types of bunkers are used in the army at this time. Boulders with stones and soil are not well enough in terms of strength. They do not have the ability to withstand the attack of enemies and they are destroyed soon. The second bunker is steel, which is difficult to construct. These steel bunkers are not affected by enemy bullets and some of these holes are formed by which the young soldiers firing on enemies

मगर अब कोयटंबूर की अमृता यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे बंकर मॉडल का निर्माण किया है, जो हल्के स्टील से बना है और बीच में प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है, ये बंकर बनाने आसान भी हैं और जवानों की रक्षा करने में भी बेहतरीन हैं. सेना को ये बंकर मिलने से हर जवान की ताकत कई गुना तक बढ़ जायेगी.

Now Amrita University of Coetambur has built a bunker model which is made of light steel and plywood is used in the middle, these bunkers are easy to make and are also excellent in protecting the soldiers. By getting this army bunker, the strength of every young man will increase manifold.