ताजमहल के बंद तालों के पीछे दफन है कई राज, राज खुलने पर आएगा भूचाल!

आगरा के ताजमहल का सच सम्पूर्ण विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने वाले श्री पी.एन. ओक अपनी पुस्तक “Tajmahal is a Hindu Temple Palace” और “Taj Mahal: The True Story” में 100 से भी अधिक प्रमाण और तर्को का हवाला देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजोमहालय है।

The truth about the Taj Mahal of Agra is presented to Shri P.N. Oak, in its book “Tajmahal is a Hindu Temple Palace” and “Taj Mahal: The True Story”, cites more than 100 proofs and claims that the Taj Mahal is actually a Shiva Temple, whose real name is Tejomahalaya.

प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी विसंगतियों को इंगित करते हैं जो शिव मंदिर के पक्ष में विश्वास का समर्थन करते हैं। प्रो. ओक के अनुसार ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है और आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं, जो आम जनता की पहुँच से परे हैं।

Pro. Oak. Many angles and craft indicate anomalies which support the faith in Shiva temple. Pro. According to Oak, the Taj Mahal is not a huge mausoleum, especially Hindu Shiva temple, and even today many of the Taj Mahal rooms are closed from the time of Shah Jahan, which are beyond the reach of the common people.

प्रो. ओक. ने यह भी जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं। ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है,फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब? इस बात का तोड़ आज तक नहीं खोजा जा सका है।

Pro. Oak. It also insists that in Hindu temples only idols of Lord Shiva, Trishul, Kalash and etc. are used for worship and religious rituals. In relation to the Taj Mahal, it is common practice that in the Taj Mahal there is always water dripping on the grave of Mumtaz, if this is true then water can not be dried by dropping drops on any grave in the whole world, whereas every Hindu In Shiva temple, the Shivling is arranged to drip the water by dropping the drops, then what is meant by sprinkling water by dropping the drops in the Taj Mahal (Tomb)? The break of this thing has not been discovered till date.

राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं। प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे!

Fear of political repression, the Indira government had withdrawn all books of oak from the stores and threatened to suffer the worst consequences for the editors who printed the first edition of these books. Pro. P. N. There is only one way to misrepresent the Oak research that the current central government opens closed rooms in the United Nations supervision, and let international experts investigate.

पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि “ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था” प्रो.ओक. अपनी पुस्तक “TAJ MAHAL – THE TRUE STORY” द्वारा इस बात में विश्वास रखते हैं कि सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था। ओक कहते हैं कि ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था। अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था।

P. N. Oak. No one has ever challenged this statement except that “Taj Mahal was built by Shah Jahan” Prof. A.K. By their book “TAJ MAHAL – THE TRUE STORY”, believe that the whole world is in the deception that the beautiful building Taj Mahal was built by Mughal emperor Shah Jahan. Oak says that the Taj Mahal is not a tomb of Begum Mumtaz since the beginning of the Taj Mahal, a Hindu ancient Shiva temple, which was then called Tejo Mahalaya. During his research, Oak discovered that this Shiv temple was illegally snatched from Shah Jahan Maharaj Jai Singh of Jaipur and had taken possession of it.

शाहजहाँ के दरबारी लेखक “मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी” ने अपने “बादशाहनामा” में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है, जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके 6 माह बाद तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए, आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे।

Shahjahan’s Darbari writer “Mulla Abdul Hamid Lahori” has written the entire account of Mughal ruler emperor in more than 1000 pages in his “emperor”, the section 402 and 403 of section one mentions that, Begum Mumtaz of Shah Jahan -Ul-Zamani, who was temporarily buried in Burhanpur, Madhya Pradesh, and after 6 months, on the 15th day of Jummi-ul-Awal day Friday, Akbarabad Agra Lie He was then taken from Maharaja Jai ​​Singh, buried in an extraordinarily beautiful and luxurious building situated in Agra, according to Lahore, according to Lahori, King Jayasin used to love his ancestors that this place was very much, but the King’s pressure I got ready to give it.

इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा जयसिंह को दिए गए थे। शाहजहां की बेगम अर्जुमंद बानो (मुमताज) बुरहानपुर (म0प्र0) में 14वें बच्चे के जन्म के समय मरी। उसे वहीं दफना दिया गया था। फिर आगरा में उसकी कब्र कहां से आ गयी? और एक नहीं, दो कबे्रं। एक ऊपर एक नीचे। एक को असली और दूसरी को नकली कहते हैं, जबकि वे दोनों ही नकली हैं।

It is very important to confirm here that in the secret collection of the former Maharaja of Jaipur, both the orders have been kept so far which were given to King Jay Singh for the dedication of Taj Mahal by Shah Jahan. Begum Arjumand Bano (Mumtaz) of Shah Jahan died at the time of birth of 14th child in Burhanpur (M.P.). He was buried there only. Then where did his grave come from Agra? And not one, two graves One up one down One is called real and the other is fake, while they are both fake.

मुस्लिम समाज में कब्र खोदना कुफ्र है, और शाहजहां यह काम कर अपनी बेगम को जहन्नुम में भेजना कैसे पसंद कर सकता था?
इसी प्रकार ताजमहल का मूल नाम तेजोमहालय है, जो भगवान शंकर का मंदिर था। यह मुगलों के चाकर राजा जयसिंह के वीर पूर्वजों ने बनवाया था; पर शाहजहां ने दबाव डालकर जयसिंह से इसे ले लिया। फिर कुरान की आयतें खुदवा कर और नकली कब्रें बनाकर उसे प्रेम का प्रतीक घोषित कर दिया।

In a Muslim society, grave digging is a kufr, and how could Shah Jahan like to do this work and send his Begum to hell?
Similarly, the original name of the Taj Mahal is Tejomahalaya, which was the temple of Lord Shiva. It was built by the brave ancestors of the King of the Mughals, King Jai Singh; But Shah Jahan put pressure on Jai Singh to take it. Then by declaring the Qur’anic verses and making false tombs, he declared it a symbol of love.

नकली कब्रें जानबूझ कर वहीं बनाई गयीं, जहां शिवलिंग स्थापित था, ताकि भविष्य में भी उसे हटाकर कभी असलियत सामने न आ सके। ताजमहल में नीचे की ओर अनेक कमरे हैं, जिन्हें खोला नहीं जाता। कहते हैं कि वहां वे सब देव प्रतिमाएं रखी हैं, जिन्हें मंदिर से हटा दिया गया था। कार्बन डेटिंग के आधार पर इसे 1,400 साल पुराना बताया गया है, पर इस सच को सदा छिपाया जाता है।

False graves were deliberately created there, where Shiva was installed, so that in the future, it can never be seen before the realization. There are many rooms downstairs in the Taj Mahal, which are not opened. It is said that there are all the idols placed there, which were removed from the temple. Based on the carbon dating, it is said to be 1,400 years old, but this truth is always hidden.

यह भी देखें!

https://youtu.be/6KzO3XxanXM

source : dainik-bharat

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