सुप्रीम कोर्ट ने धारा 370 को लेकर देश को दिया बड़ा झटका बिपिन रावत समेत PM मोदी रह गए सन्न

नई दिल्ली : कश्मीर में आतंकवाद तेज़ी से खत्म हो रहा है, अभी सेना ने 3 बड़े ऑपरेशन से 13 आतंकवादी मार गिराए. लेकिन आज भी कश्मीरी पंडितों अपने इन्साफ को लेकर इंतज़ार कर रहे हैं. कांग्रेस की वजह से आज कश्मीर में अलग झंडा, अलग संविधान है. ना जाने कितने जवान अब तक कश्मीर में शहीद हो चुके हैं.

New Delhi: Terrorism in Kashmir is ending fast, now the Army has killed 13 terrorists with 3 major operations. But even today, Kashmiri Pandits are waiting for their justice. Because of Congress today there is a separate flag in Kashmir, a different constitution. Do not know how many young people have been martyred in Kashmir till now.

ऐसे में धारा 370 को अब ख़त्म करना ज़रूरी है, लेकिन हमारा कोर्ट कश्मीरी पंडितों को इन्साफ दिलाने की बात नहीं करता है उसे धारा 370 की ज़्यादा चिंता है. जब कश्मीरी पंडितों के इन्साफ की बात आती है तो कोर्ट यह कहकर ठुकरा देता है कि इसको तो कई साल बीत चुके अब सबूत कैसे मिलेंगे इसमें. जबकि खुद अलगावादी बिट्टा ने कबूल किया था कि उसने कई कश्मीरी पंडितों को खुद मारा. गलती से भी कहीं मोदी सरकार धारा 370 को छू न ले इसके लिए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है जिसे सुन आप दंग रह जायेंगे.

In such a situation, it is necessary to end Article 370 now, but our court does not talk of securing justice to Kashmiri Pandits, it is more worried about Section 370. When it comes to the justice of the Kashmiri Pandits, the court rejects it saying that many years have passed and how will the evidence be found in it. While himself alagadi Bitta had admitted that he himself killed many Kashmiri Pandits himself. By mistake, even the Modi government has not touched the section 370, the court has heard a big decision for which you will be stunned to hear.

धारा 370 को हटाना अब असंभव है : सुप्रीम कोर्ट

अभी मिल रही ताज अखबार के मुताबिक जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली संविधान की धारा 370 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद चौंकाने वाला फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि सालों से बने रहने के चलते अब यह धारा एक स्थायी प्रावधान बन चुकी है जिससे इसको खत्म करना असंभव हो गया है.

It is now impossible to remove Article 370: Supreme Court

According to the current Taj newspaper, the Supreme Court has given a very shocking decision on Article 370 of the Constitution giving special status to Jammu and Kashmir. The court said that due to the continuance of the years, this section has become a permanent provision, which has made it impossible to eliminate it.

अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के एक मामले में वह पहले ही इस बहस को यह कहकर खत्म कर चुकी है कि धारा 370 अब संविधान का एक स्थायी हिस्सा है. कोर्ट को धारा 370 को लेकर बहुत चिंता है लेकिन उन लाखों कश्मीरी पंडितों की कोई चिंता नहीं, जिनकी निर्मम हत्या की गयी और कितने ही कश्मीरी पंडितों को घर छोड़कर जाना पड़ा.

The court also reminded that in a matter of 2017, he has already finished this debate by saying that Article 370 is now a permanent part of the Constitution. The court is concerned about Article 370 but there is no concern for millions of Kashmiri Pandits who were brutally murdered and many Kashmiri Pandits had to leave their homes.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक जज आदर्श के गोयल और जज आरएफ नरीमन की बेंच की यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई करते हुए आई. इसमें दावा किया गया था कि धारा 370 एक अस्थायी प्रावधान के तहत लाई गई थी जिसे 26 जनवरी 1957 को जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के भंग होने के साथ ही खत्म हो जाना था. इसमें यह भी कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर का संविधान निरर्थक, अप्रभावी और भारतीय संविधान का उल्लंघन है.

According to a report of the Times of India, the hearing of the bench of Judge Adarsh ​​Goel and Judge RF Nariman came in the hearing of a petition. It was claimed that Section 370 was brought under a temporary provision, on 26 January 1957. Jammu and Kashmir was to end with the dissolution of the Constituent Assembly. It was also stated that the Constitution of Jammu and Kashmir was a violation of the meaningless, ineffective and Indian constitution.

धारा 370 न सिर्फ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देती है, बल्कि इस राज्य के लिए कानून बनाने के मामले में मोदी सरकार की शक्तियां भी सीमित करती है. इस पर काफी समय से बहस होती रही है. इसे हटाना केंद्र में इन दिनों सत्तासीन भाजपा के प्रमुख मुद्दों में से एक रहा है.

Article 370 not only gives special status to Jammu and Kashmir, but also limits the powers of the Modi Government in the matter of making laws for this state. There has been debate over this for a long time. The removal of it has been one of the main issues of the ruling BJP in the center this time.

आपको बता दें खुद सुब्रमण्यम स्वामी कह चुके हैं कि धारा 370 स्थायी नहीं अस्थायी है और इसको हटाया जा सकता है. लेकिन फिर भी कोर्ट के जज इसे अस्थायी बता रहे हैं.

Tell yourself, Subramaniam Swamy himself has said that Article 370 is not permanent lasting and can be removed. But even then the court judges are telling it to be temporary.

‘370 को बनाए रखना गलत’
तो वहीँ विजयालक्ष्मी झा ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था 1957 में संविधान सभा के भंग होने के साथ ही धारा 370 एक अस्थायी प्रावधान हो गई थी. याचिका में कहा गया था कि धारा 370 को बनाए रखना गलत है क्योंकि संविधान सभा भंग होने के बाद इसके लिए राष्ट्रपति या संसद या केंद्र सरकार से अनुमति नहीं ली गई थी ये हमारे संविधान के मूल ढांचे के साथ बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा है.

370 is wrong to maintain’
So then Vijayalakshmi Jha told the Delhi High Court that in 1957, with the dissolution of the Constituent Assembly, Section 370 had a temporary provision. It was said in the petition that it is wrong to maintain Article 370 because after the dissolution of the Constituent Assembly, permission for this was not obtained from the President or the Parliament or the Central Government, it is a big fraud with the basic structure of our Constitution.

यह भी देखे

https://youtu.be/Uzs16fYnw1k

https://youtu.be/VxtYK7YXsQ8

source political report

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