तिब्बत पर हमला करने की सोचे भी ना चीन, देखिये कैसे तबाह कर दिया जायेगा !

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भारत और चीन के बीच डोकलाम मु्द्दे को लेकर सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए दोनों ही देशों के बीच तलवारें तनी हुई हैं. एक तरफ चीन पीछे हटने को तैयार नहीं है वहीं भारत भी अपने रुख पर कायम है.

Due to the growing tension between India and China on the border with Dokalam Mudade, the swords are strained between the two countries. On one hand, China is not ready to retreat, India is still on its stand.

आये दिन चीनी मीडिया द्वारा भारत को नयी नयी धमकियाँ दी जा रही हैं भारत को पीछे हटने को कहा जा रहा है.

माहौल ऐसा है कि कभी भी युद्ध हो सकता है. ऐसे में यदि युद्ध की ये स्थिति चीन के तिब्बत में बनी तो भारतीय वायुसेना चीनी लड़ाकू विमानों को पटखनी दे सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय वायुसेना के विमान चीन की (पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स) पर कहीं ज्यादा भारी पड़ेंगे. जानिए

These days are being given new new threats to India by Chinese media is being asked to retreat to India.

The atmosphere is such that there can be war ever. In such a case, if this situation of war was made in Tibet of China, then the Indian Air Force could spill Chinese fighter planes. It is believed that the plane of the Indian Air Force will more heavily than ever on China (People’s Liberation Army Air Force). Learn

तिब्‍बत में टकराव की स्थिति उत्‍पन्‍न होती है तो इस युद्ध स्थल में ऐसी कई परिस्थितियां हैं जो भारत के पक्ष में जाएंगी. इसका खुलासा भारतीय वायुसेना के पूर्व स्‍क्‍वाड्रन लीडर समीर जोशी ने अपने एक दस्तावेज में किया है जो जल्द ही प्रकाशित होने जा रहा है.

If there is a situation of confrontation in Tibet, there are many situations in this war site that will go in favor of India. This is disclosed by Sameer Joshi, former Squadron Leader of the Indian Air Force, in a document which is going to be published soon.

पिछले कुछ समय से सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच आकाश में शक्ति संतुलन के आकलन के लिहाज से यह अपनी तरह का समग्र रूप से पहला भारतीय दस्‍तावेज है

इंडियन डिफेंस अपडेट वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक इस दस्तावेज का नाम है. जिसमें पूर्व स्‍क्‍वाड्रन लीडर जोशी ने भारतीय वायुसेना और चीनी वायुसेना का तिब्बत की परिस्थिति में विश्लेषण किया है.

It has been the first Indian document of its kind in terms of estimation of power balance in the sky in the sky between the stalemate between India and China in Sikkim’s Dokalam area for some time.

According to the news published in the Indian Defense Update website, this document is named. In which former Squadron Leader Joshi has analyzed Indian Air Force and Chinese Air Force in Tibet.

जल्‍दी ही प्रकाशित होने जा रहे दस्‍तावेज के मुताबिक तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र में ऑपरेशन के लिहाज से भारतीय एयरफोर्स को चीन की तुलना में बढ़त हासिल है. आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच स्थित वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उत्‍तर में तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र पड़ता है.

According to the document being published soon, in the Tibet Autonomous Region, Indian Air Force has an edge over China compared to China. Let us know that the Tibet Autonomous Region lies in the north of the Line of Actual Control (LAC) between India and China.

भारतीय वायुसेना के श्रेष्ठ लड़ाकू विमानों में से एक मिराज 2000 के फाइटर पायलट रहे हैं जोशी ने इसके पीछे भौगोलिक कारण दिए है. उन्होंने लिखा है कि भारतीय एयरफोर्स के लड़ाकू विमान, चीनी लड़ाकू विमानों को पटखनी देने में प्रभावी रूप से सक्षम हैं.

One of the best fighter aircraft of the Indian Air Force, Mirage 2000 has been a fighter pilot, Joshi has given geographical reasons behind it. He has written that Indian Air Force’s fighter aircraft are capable of bridging Chinese fighter planes.

इस मामले में भारत पड़ेगा भारी

जोशी ने इसकी मुख्य वजह ये बताई है कि चीन के मुख्य एयरबेस बेहद ऊंचाई पर है वहीं दूसरी तरफ तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र में आने वाले चीनी एयरक्राफ्ट को बेहद विपरीत जलवायु दशाओं का भी सामना करना पड़ता है जिसके चलते चीनी एयरक्राफ्ट की प्रभावी पेलोड और सैन्‍य अभियान की क्षमता में काफी कमी आ जाती है. यानी तिब्‍बत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वायु का लघु घनत्‍व चीनी लड़ाकू विमानों मसलन su-27, J-11 अथवा J-10 की क्षमता को कमजोर कर देता है.वहीं भारतीय वायुसेना की बात करें तो इंडियन एयरफोर्स उत्‍तर-पूर्व में स्थित 4 एयरबेस (तेजपुर, कलाईकुंडा, छाबुआ और हाशीमारा) से ऑपरेट करती हैं. इन चारों एयरबेस की ऊंचाई मैदानी इलाकों की समुद्र तल से ऊंचाई के करीब है.

In this case, India will have heavy

Joshi’s main reason for this is that China’s main airbase is at a very high level, while on the other hand, the Chinese aircraft coming to the Tibet Autonomous Region have to face extreme anti-climatic conditions, due to the effective payloads of the Chinese aircraft and the military campaign. Capacity decreases significantly. That is, the small density of air in the high altitude areas of Tibbad weakens the potential of Chinese fighter planes such as Su-27, J-11 or J-10. If there is talk of Indian Air Force, Indian Air Force 4 airbase located in the northeast (Tezpur, Kalaikunda, Chhabua and Hashimara). The height of these four airbases is close to the altitude of the plains of the plains

मतलब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए काफी भीतर तक ऑपरेशन करने में सक्षम हैं. जबकि चीनी लड़ाकू विमानों को तिब्बत की ऊंचाई वाले क्षेत्रों से उड़ान भरनी पड़ेगी जो उनके अनुकूल नहीं होगी और उनकी मारक क्षमता कम हो जाएगी.

स्‍क्‍वाड्रन लीडर समीर जोशी के मुताबिक, ‘क्षेत्र, टेक्‍नोलॉजी और ट्रेनिंग के लिहाज से तिब्‍बत और दक्षिणी जिनजियांग में भारतीय वायुसेना को PLAAF(पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स) पर निश्चित रूप से बढ़त हासिल है. यह संख्‍याबल के लिहाज से PLAAF की बढ़त को कम से कम आने वाले कुछ सालों तक रोकने में सक्षम है.

It means that the fighter aircraft of the IAF is able to take the advantage of geographical conditions in the Tibet Autonomous Region and perform quite within the operation. While Chinese fighter aircraft will have to fly from high altitude areas of Tibet, which will not be favorable to them and their firepower will be reduced.

According to Squadron Leader Sameer Joshi, in terms of area, technology and training, the IAF in Tibet and southern Gingjiang is definitely the lead on the PLAAF (People’s Liberation Army Air Force). It is capable of stopping the growth of PLAAF for a few years for at least the coming years in terms of numerical strength.

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source http://vegnfresh.com

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