VIDEO: चीन से आई ये ख़ुफ़िया रिपोर्ट – जांच एजेंसियों समेत मोदी जी की भी उड़ी नींद – लाखों लोग शामिल – फिर मचा हाहाकार ?

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भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर विवाद सुलझने की बजाय और गहराता जा रहा है l चीन जहाँ अपनी ज़िद पर अड़ा हुआ है तो वहीँ भारत ने भी साफ़ कह दिया है कि वो चीन की धमकियों से डरने वाला नहीं और वो तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक कि चीन डोकलाम से अपनी सेना नहीं हटा लेता l

इस बीच चीन से एक ख़ुफ़िया रिपोर्ट आई है, जिसने जांच एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं l इस रिपोर्ट के आने के बाद मोदी सरकार भी सतर्क हो गयी है और ख़ुफ़िया एजेंसियों को चौकन्ना रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं l

दरअसल सस्ते के चक्कर में देश में बिक रहे लाखों चाइनीज स्मार्टफोन के लेकर खुफिया अलर्ट आया है, जिसने खतरे की घंटी बजा दी है l ऐसी जानकारी सामने आई है कि चीनी कंपनियों के फोन ग्राहकों के पर्सनल डाटा को चीन की एजेंसियों तक पहुंचा रहे हैं और इसका मतलब है कि यदि आप चाइनीज फोन इस्तमाल करते हैं तो हो सकता है कि आपका फोन आपकी बैंक डिटेल से लेकर आपकी बेहद निजी फोटोज तक चोरी-चुपके चीनी एजेंसियों तक को भेज रहा हो l

ये जानकारी इतनी गंभीर है कि इसके आते ही आनन्-फानन में केंद्रीय टेलीकॉम और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक हाईलेवल बैठक बुलाई, जिसमें ये फ़ैसला लिया गया कि भारत में व्यापार कर रही सभी मोबाइल कंपनियों को अपने फोन की सिक्योरिटी की जानकारी भारत सरकार को उपलब्ध करवानी होगी और सरकार द्वारा इनकी कड़ी जांच की जायेगी l

आपको बता दें कि सरकार ने कुल 21 फोन कंपनियों को नोटिस भिजवाए हैं l खुफिया अलर्ट के मुताबिक़ चीन की कुछ कंपनियों के फोन ग्राहकों की कॉन्टैक्ट लिस्ट, मैसेज लोकेशन और ऐसी तमाम जरूरी और निजी जानकारियां चीन भेज रहे हैं l आजकल ज्यादातर ग्राहक अपना मोबाईल नंबर अपने बैंक अकाउंट के साथ भी लिंक रखते हैं और कई लोग तो फोन में बैंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी रखते हैं, तो ऐसे में ये भी मुमकिन है कि चीन आपके फ़ोन के जरिये आपकी ये जानकारियाँ चुरा रहा हो l इसी के मद्देनज़र सरकार ने इन कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है l

सुरक्षा मानकों को पूरा न करने के चलते चीन के अलावा कई अन्य देशों की मोबाईल कंपनियों को भी नोटिस भेजे गए हैं l इसके अलावा कुछ भारतीय कंपनियों जैसे माइक्रोमैक्स, लावा और कार्बन इत्यादि को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है l हालांकि खुफिया एजेंसियों के मुताबिक़ सबसे ज्यादा ख़तरा चीनी फोन कंपनियों से ही है l

जिन कंपनियों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें श्याओमी, वीवो, ओप्पो और जियोनी जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं l इसके अलावा आईफोन और सैमसंग से भी सिक्योरिटी डिटेल्स मांगी गई हैं l मोबाईल कंपनियों से उनके फोन में इस्तमाल किये जा रहे ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और पहले से लोडेड ऐप्स के बारे में पूछा गया है l

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक़ भारी संख्या में लोगों की निजी जानकारियां चीन की एजेंसियां पहले ही चोरी कर चुकी हैं l सरकारी अधिकारियों, भारतीय सेना व् सुरक्षा से जुड़ी अन्य एजेंसियों के लोगों के हाथ में ये फोन किसी खतरे से कम नहीं हैं, क्योंकि इनके जरिये देश की खुफिया बातें आसानी से चीन तक पहुंच सकती हैं l

स्मार्टफोन से सूचनाओं की चोरी और हैकिंग की घटनाओं के बीच सरकार ने मोबाइल बनाने वाली चीनी तथा अन्य कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं और पूछा है कि वे उपभोक्‍ताओं के डेटा की सुरक्षा व गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रक्रिया अपना रही हैं l सरकारी आदेश में लगभग 21 कंपनियों से कहा गया है कि वे ग्राहकों की डेटा की सुरक्षा व गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया व प्रणाली का ब्यौरा लिखित में दें l जिन कंपनियों को नोटिस दिया गया है उनमें चीन के नामी गिरामी ब्रांड वीवो, ओप्पो, शियोमी और जियोनी शामिल हैं l

यह निर्देश ऐसे समय आया है जबकि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर विवाद गहरा रहा है l इसके अलावा चीन से आईटी और दूरसंचार उत्पादों के आयात को लेकर चिंता भी इसके पीछे एक प्रमुख वजह है l एक अनुमान के अनुसार 2016-17 में मोबाइल फोन आयात 3.7 अरब डॉलर रहा l यह निर्देश मोबाइल विशेषकर स्मार्टफोनों से सूचनाओं की हैकिंग की चिंताओं के बीच जारी किया गया है l अआप्को बता दें कि फोन बनाने वाली ज्यादातर चीनी कंपनियों के सर्वर चीन में हैं l

इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जिन कंपनियों को नोटिस भेजे हैं उनमें एपल, सैमसंग, ब्लैकबेरी जैसी वैश्विक कंपनियां तथा अनेक भारतीय मोबाइल विनिर्माता भी शामिल हैं l सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने सभी कंपनियों को अपना जवाब देने के लिए 28 अगस्त तक का समय दिया है l अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर मोबाइल फोन से डेटा लीक होने का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले चरण में उपकरण और पहले से लोड साफ्टवेयर और एप जांच के दायरे में रहेंगे l

जिन कंपनियों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें श्याओमी, वीवो, ओप्पो और जियोनी जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं l इसके अलावा आईफोन और सैमसंग से भी सिक्योरिटी डिटेल्स मांगी गई हैं l मोबाईल कंपनियों से उनके फोन में इस्तमाल किये जा रहे ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और पहले से लोडेड ऐप्स के बारे में पूछा गया है l

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक़ भारी संख्या में लोगों की निजी जानकारियां चीन की एजेंसियां पहले ही चोरी कर चुकी हैं l सरकारी अधिकारियों, भारतीय सेना व् सुरक्षा से जुड़ी अन्य एजेंसियों के लोगों के हाथ में ये फोन किसी खतरे से कम नहीं हैं, क्योंकि इनके जरिये देश की खुफिया बातें आसानी से चीन तक पहुंच सकती हैं l

कंपनियों से मिले जवाब के आधार पर मंत्रालय उपकरणों का सत्यापन और ऑडिट करेगा l मंत्रालय ने चेताया है कि यदि उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ होगा, तो आईटी कानून की धारा 43 (ए) के तहत जुर्माना लगाया जाएगा l अधिकारी ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मोबाइल फोन में हार्डवेयर और साफ्टवेयर के संदर्भ में जरूरी डेटा सुरक्षा उपाय किए जाएं l अधिकारी ने बताया कि आईटी मंत्रालय ने कुल मिलाकर 21 स्मार्टफोन कंपनियों को इस बारे में पत्र लिखा है और इनमें से ज्यादातर चीन की कंपनियां हैं l

उन्होंने कहा कि आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने स्थिति की समीक्षा के लिए 14 अगस्त को दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा सीईआरटी-इन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी l देश में ई कामर्स लेनदेन व डिजिटल भुगतान में उछाल को देखते हुए यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण हो गया है l इस बीच इंडियन सेल्यूलर एसोसिएशन (आईसीए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा है कि सुरक्षित संवाद व डेटा की सुरक्षा की जरूरत के मुद्दे पर कोई तर्क नहीं हो सकता पर इस मुद्दे पर समग्रता से विचार किए जाने की जरूरत है l

आपको बता दें कि इससे पहले चीनी मोबाइल कंपनी श्याओमी के बारे में भी खबर आयी थी कि ये फोन ग्राहकों के पर्सनल डेटा किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को भेज रहे हैं और ये अलर्ट इतना गंभीर था कि भारतीय सेना ने अपने अफसरों के लिए एडवाइजरी जारी करके श्याओमी के फोन न रखने की सलाह दी थी l

गौरतलब है कि केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के देशों में चीनी फोन को शक की नज़रों से देखा जाता है l अमेरिका, जापान और कई यूरोपीय देशों में लोग इन्हे खरीदने से बचते हैं, लेकिन भारत में ज्यादा फीचर्स और कम दाम के लालच में लोग इन्हें खरीद लेते हैं

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