यूपी STFफाॅर्स के हाथ बड़ी कामयाबी ,कई वर्षों से जिसकी तलाश थी ,उसकी जाँच मिला देख अधिकारीयों के उड़े होश

YOGI

नई दिल्ली : प्रदेश में योगी राज में अपराधियों, गैंगस्टर को चुन चुन के पकड़ा जा रहा है. पूरी तरह से यूपी को अपराध मुक्त करने के लिए स्पेशल टास्क फाॅर्स के ऑपरेशन तेज़ी से चल रहे हैं. पिछली सरकार में तुष्टिकरण की राजनीति के चलते इन्हे हमेशा बचाया गया.

यूपी STF के हाथ बड़ी कामयाबी लगी
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक यूपी एसटीएफ के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. एसटीएफ ने मेरठ से एक लाख के इनामी मोहम्मद अकरम को देर रात मुजफ्फरनगर के खतौली इलाके से गिरफ्तार किया है. उसने पुलिस से हाथापाई की। इस दौरान एसटीएफ के तीन सिपाही चोटिल हो गए। अकरम के खिलाफ करीब 30 मुकदमें दर्ज हैं. STF ने गोली के बदले गोली चलाने की बात कही लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया. बता दें काफी सालों से इसकी पुलिस को तलाश थी.

सटीएफ को इस कुख्यात बदमाश के कब्जे से ढेर सारा असलाह और कारतूस का जखीरा बरामद किया हैं. बड़ी साज़िश को अंजाम देने की साज़िश रच रहा था. डेढ़ साल पहले वह मुजफ्फरनगर से पुलिस की हिरासत से फरार हो गया था और झारखंड की राजधानी रांची में जाकर छिप गया था.

अकरम मुजफ्फरनगर नगर के खालापार मोहल्ले का रहने वाला है और बेहद शातिर बदमाश है. अकरम पर लूट, डकैती, हत्या आदि के 35 से ज्यादा मुकदमे चल रहे हैं. एसटीएफ से मिली जानकारी के मुताबिक मुजफ्फरनगर के खालापार निवासी अकरम मुकीम काला गैंग से जुड़ा हुआ है. जिसके खिलाफ सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ में गंभीर धाराओं में केस दर्ज है.

वामपंथियों के दबाव के चलते नहीं किया एनकाउंटर
विपक्षी, मानवाधिकारी गैंग और कोर्ट के जजों के चक्कर में STF को मज़बूरन इस अपराधी को गिरफ्तार करना पड़ा. दरअसल एक लाख के इनामी बदमाश अकरम ने पुलिस व एसटीएफ पर फायर किया तो एसटीएफ ने भी पुलिस से जवाबी गोली चलाने को कहा, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। खतौली पुलिस को डर था कि कहीं खतौली में भी बवाल न हो जाए, इसलिए उसे गोली मारे बिना ही गिरफ्तार किया. हालाँकि इस मुठभेड़ में तीन STF जवान घायल हो गए.

लेकिन साफ़ देखा जा सकता है कि कुछ वामपंथियों की साज़िश और दबाव के चलते अब पुलिस भी एनकाउंटर करने में कतरा रही है हिचकिचा रही है. चाहे बदमाश कितना फायरिंग करता रहे लेकिन पुलिस उसे सिर्फ गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है. ये वामपंथी मानवाधिकारियों के पेट में तभी दर्द होता है जब अपराधी मरता है, अगर कोई पुलिसवाला शहीद हो जाए तब ये सारे गायब हो जाते हैं.

गोकशी से रखा अपराध की दुनिया में कदम गिरफ्तार किए गए अकरम ने बताया कि उसने 2004 में खालापार में गोकशी से अपराध की शुरुआत की. अकरम ने बताया कि वह रांची के कारगिल चौक पर डेढ़ वर्ष से मोहम्मद उमर नाम से चाय की दुकान चला रहा था.

अपराध की दुनिया में आने से पहले अकरम ने डेढ़ दशक पूर्व इसने एक हिन्दू युवती से प्रेम विवाह किया था, जिसका परिवार और ससुराल वालों ने विरोध किया था। शादी के बाद उसकी पत्नी ने नाम बदलकर मुस्कान रख लिया था.

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