UP के बाद अब उत्तराखंड में मदरसों से बगावत के बोल, ओवैसी समेत आजम के पैरों तले खिसकी जमीन…

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देहरादून : मुस्लिम संगठनों के विरोध के बावजूद तीन तलाक पर बिल लोकसभा में पास हो चुका है. हालांकि मुस्लिम महिलाऐं इससे काफी खुश है. अब मदरसों को लेकर भी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिससे मुस्लिम संगठन एक बार फिर विरोध में उतर आये हैं. दरअसल अब जल्द ही मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जायेगी. सबसे ख़ास बात तो ये है कि मदरसों ने ये मांग खुद ही की है.

Dehradun: Despite the opposition from Muslim organizations, the bill has been passed in the Lok Sabha on three divorces. Although Muslim women are very happy with this. There is also a big news about the madarsas, which has brought Muslim organizations once again in protest. In fact, soon Sanskrit will be taught in the madarsas. The most important thing is that the madarsas have made these demands themselves.

मदरसों में संस्कृत पढ़ेंगे मुस्लिम बच्चे?
उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाने की मांग हुई है. प्रदेश की मदरसा वेलफेयर सोसायटी (एमडब्ल्यूएस) के सदस्यों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर इसकी मांग की है. प्रदेश की 207 मदरसों का प्रतिनिधित्व करने वाली एमडब्ल्यूएस ने 8 दिसंबर को मुख्यमंत्री रावत को इस बाबत पत्र लिखा था.

Muslim children to study Sanskrit in madarsas?
There has been a demand for Sanskrit teaching in the madarsas of Uttarakhand. Members of the Madrasah Welfare Society (MWS) of the state have written a letter to Chief Minister Trivendra Singh Rawat and demanded it. The MWS, which represented 207 madrassas of the state, had written a letter to Chief Minister on December 8 this year.

उन्होंने अपने पत्र में अपील की थी कि सूबे के मदरसों से संस्कृत के शिक्षकों को भी जोड़ा जाए ताकि वहां के पाठ्यक्रम में संस्कृत को जोड़ा जा सके. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ एमडब्ल्यूएस के चेयरपर्सन सिब्ते नाबी ने कहा है कि राज्य के 207 मदरसों ने हमारे इस सुझाव का खुशी से स्वागत किया है. हम चाहते हैं कि मदरसे के छात्रों का भविष्य उज्जवल हो और वो आयुर्वेद की पढ़ाई भी कर सकें.

He had appealed in his letter that teachers of Sanskrit should also be added to the Madarsas of the state so that the Sanskrit could be added in the courses there. According to the report of the Indian Express, MVS chairperson Sibte Naabi has said that 207 madrassas of the state have happily welcomed our suggestion. We want the future of the students of madrassas to be bright and they can also study Ayurveda.

आयुर्वेद सीखने के लिए संस्कृत जरूरी
उन्होंने कहा कि फिलहाल मदरसे के छात्रों के लिए यह एक नामुमकिन सी बात है, क्योंकि आयुर्वेद की पढ़ाई में संस्कृत भाषा का इस्तमाल होता है और मदरसे के छात्रों को संस्कृत भाषा आती ही नहीं. इसलिए उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से अपील करते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा पर खर्च होने वाले पैसे का उपयोग यहां के 25,000 छात्रों को संस्कृत की शिक्षा प्रदान करने के लिए होना चाहिए.

Sanskrit needed to learn Ayurveda
He said that this is an impossible thing for the students of Madarsa at the moment, because Sanskrit is used in the education of Ayurveda and the students of the madarsa do not have Sanskrit language. Therefore, he appealed to the central government of Modi and said that the money spent on education in the state should be used to provide Sanskrit education to 25,000 students here.

मुस्लिम संगठन खिलाफत में उतरे
वहीँ कई मुस्लिम संगठन इस मांग के खिलाफ खड़े हो गए हैं. मुस्लिम बच्चों को संस्कृत भाषा का ज्ञान हो, ऐसा उन्हें कतई मंजूर नहीं. प्रदेश के मदरसा बोर्ड ने भी एमडब्ल्यूएस की इस मांग को अव्यावहारिक बताते हुए मानने से इनकार कर दिया है.

Muslim organizations go to Khilafat
Many Muslim organizations have stood there against this demand. Muslim children do not know how to get knowledge of Sanskrit language; The Madarsa Board of the state has also refused to accept the demand of the MWS as impractical.

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अखलाक अहमद अंसारी ने एमडब्ल्यूएस के इस सुझाव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मदरसों में संस्कृत की शिक्षा को लेकर हमें कोई पत्र नहीं मिला है और न ही किसी ने जानकारी दी है.

Uttarakhand Madarsa Education Board deputy registrar Akhlaq Ahmed Ansari rejected the suggestions of the MWS and said that we have not received any letter regarding Sanskrit education in Madarsas and no one has given the information.

मदरसा बोर्ड की अरबी और फारसी को प्राथमिकता
अंसारी ने कहा कि मदरसों के पाठ्यक्रम में संस्कृत को जोड़ने से तकनीकी समस्या होगी. हिंदी और अंग्रेजी हमारी प्राथमिकता हैं, जिन्हें मदरसों में पढ़ाया जाना आवश्यक है. इसके अलावा मदरसों में केवल एक ही अतिरिक्त भाषा पढ़ाई जा सकती है, जिसके लिए हमारे पास विकल्प के तौर पर अरबी और फारसी है. ऐसे में एक और भाषा संस्कृत को मदरसे के पाठ्यक्रम में जोड़ना अव्यावहारिक होगा. उन्होंने कहा कि हम संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए अरबी या फारसी को नहीं छोड़ सकते हैं.

Priority of Arabic and Persian of Madrasah Board
Ansari said that connecting Sanskrit to madrassas courses would be a technical problem. Hindi and English are our priorities, which are required to be taught in the madarsas. Apart from this, only one additional language can be taught in madarsas, for which we have Arabic and Persian as an alternative. In such a way it would be impractical to add another language to Sanskrit in the madarsas curriculum. He said that we can not leave Arabic or Persian to include Sanskrit in the curriculum.

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